Media24Media.com: जंजातीय गौरव दिवस पर संसद में भगवान बिरसा मुंडा को राष्ट्र का नमन

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जंजातीय गौरव दिवस पर संसद में भगवान बिरसा मुंडा को राष्ट्र का नमन

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भारत की राष्ट्रपति,द्रौपदी मुर्मु; भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति,सी. पी. राधाकृष्णन; लोकसभा अध्यक्ष,ओम बिड़ला; संसदीय कार्य मंत्री एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री,किरण रिजिजू; राज्यसभा के उपसभापति,हरिवंश; सांसदगण; पूर्व सांसद; तथा अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों ने आज संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती—जंजातीय गौरव दिवस—के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

ओम बिड़ला ने इससे पहले ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा,

“अतुलनीय स्वतंत्रता सेनानी और जनजातीय अस्मिता व स्वाभिमान के शाश्वत प्रतीक धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि, तथा जंजातीय गौरव दिवस की सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ।

सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने जल, जंगल और ज़मीन के अधिकारों के लिए जो साहसिक संघर्ष किया, वह विदेशी शासन के विरुद्ध धधकती क्रांति के रूप में उभरा और स्वतंत्रता की चेतना को पूरे देश में फैलाया। उत्पीड़ित, वंचित और जनजातीय समुदायों की आवाज़ बनकर, बिरसा मुंडा जी ने अपने अटल संकल्प, बलिदान और अद्वितीय नेतृत्व से अनगिनत युवाओं में राष्ट्रवाद, आत्मसम्मान और न्याय की भावना जगाई।

उनका जीवन राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में सदैव प्रेरणा स्रोत रहेगा और हमें कर्तव्य-पथ, सामाजिक न्याय तथा सांस्कृतिक गरिमा का मार्ग दिखाता रहेगा।”

भगवान बिरसा मुंडा, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उलगुलान (क्रांति) का नेतृत्व किया, प्रतिरोध के एक सशक्त प्रतीक बन गए। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने राष्ट्रीय चेतना को प्रज्वलित किया और उनकी विरासत आज भी पूरे देश के जनजातीय समुदायों द्वारा गहरी श्रद्धा से स्मरण की जाती है।

साल 2021 से, 15 नवंबर को जंजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का सम्मान किया जा सके। भारत की स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समुदायों ने अनेक क्रांतिकारी आंदोलनों के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह दिवस उनकी गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और विरासत का उत्सव है। देशभर में आयोजित कार्यक्रमों का उद्देश्य एकता, गर्व और जनजातीय योगदानों की पहचान को सुदृढ़ करना है।

समारोहों के हिस्से के रूप में, संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर विभिन्न राज्यों के जनजातीय लोक कलाकारों ने प्रदर्शन कर आगंतुकों का स्वागत किया।



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