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राउरकेला में 4th राष्ट्रीय EMRS स्पोर्ट्स मीट 2025 का भव्य समापन, तेलंगाना ने जीता ओवरऑल चैम्पियनशिप

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राउरकेला- बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम में आज 4th राष्ट्रीय EMRS खेल प्रतियोगिता 2025 का भव्य समापन हुआ। यह आयोजन पूरे देश में मनाए जा रहे भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय गौरव दिवस के साथ खास तौर पर मेल खाता रहा। कार्यक्रम में भगवान बिरसा मुंडा के अदम्य साहस और बलिदान को नमन करते हुए भारत के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली विरासत का उत्सव मनाया गया।

यह खेल महोत्सव ओडिशा मॉडल ट्राइबल एजुकेशन सोसाइटी (OMTES) द्वारा, ST & SC विकास, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, ओडिशा सरकार के अंतर्गत आयोजित किया गया। आयोजन का संचालन नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स (NESTS), जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अतिथि

  • मोहन् चरण माझी, माननीय मुख्यमंत्री, ओडिशा (मुख्य अतिथि)

  • जुअल ओराम, माननीय केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री (विशिष्ट अतिथि)

  • अजीत कुमार श्रीवास्तव, IRAS, आयुक्त, NESTS

  •  बी. परमेश्वरन, IAS, सचिव, ST & SC विकास विभाग, ओडिशा

  • डॉ. शुभंकर मोहापात्र, IAS, कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, सुंदरगढ़

  • दूती चंद, अंतरराष्ट्रीय धाविका

  • सुंदरगढ़ क्षेत्र के माननीय विधायक एवं अन्य जनप्रतिनिधि

आयुक्त श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों का स्वागत कर खेल प्रतियोगिता की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की और EMRS छात्रों के उत्कृष्ट प्रदर्शन व जनजातीय समुदायों में बढ़ती खेल संस्कृति की सराहना की।

परिणाम सारांश

ओवरऑल स्पोर्ट्स चैम्पियन

    • रैंक
    • राज्य
    •  स्वर्ण 
    • रजत
    •  कांस्य
    •  कुल
    •  अंक
    • 1
    • तेलंगाना        
    •  88
    •  66
    •    76
    • 230
    •  714
    • 2
    • छत्तीसगढ़
    •  55
    •  43
    •    64
    • 162
    •  468
    • 3
    • मध्य प्रदेश
    •  40
    •  49
    •    62
    • 151
    •  409

शीर्ष 3 – व्यक्तिगत स्पर्धाएँ

  • रैंक
  • राज्य
  • स्वर्ण
  • रजत
  • कांस्य
  • कुल
  • अंक
  • 1
  • तेलंगाना
  • 82
  • 65
  • 74
  • 221
  • 679
  • 2
  • छत्तीसगढ़
  • 54
  • 43
  • 62
  • 159
  • 461
  • 3
  • मध्य प्रदेश
  • 40
  • 47
  • 61
  • 148
  • 402

शीर्ष 3 – टीम इवेंट्स

  • रैंक
  • राज्य
  • स्वर्ण
  • रजत
  • कांस्य
  • कुल
  • अंक
  • 1
  • तेलंगाना
  • 6
  • 1
  • 2
  • 9
  • 35
  • 2
  • ओडिशा
  • 2
  • 5
  • 1
  • 8
  • 26
  • 3
  • आंध्र प्रदेश
  • 1
  • 2
  • 2
  • 5
  • 13

तेलंगाना ने 230 पदकों और 714 अंकों के साथ ओवरऑल चैम्पियनशिप जीती।

पीएम मोदी के खेल एवं जनजातीय सशक्तिकरण के विज़न की दिशा में बड़ा कदम

यह EMRS खेल महोत्सव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न को आगे बढ़ाता है:

  • खेलो इंडिया – "खेलो, बढ़ो, प्रगति करो"

  • ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में खेल प्रतिभा की खोज

  • EMRS छात्रों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाना

  • फिटनेस, नेतृत्व, टीमवर्क सुदृढ़ करना

  • विकसित भारत के निर्माण में खेलों की भूमिका को मजबूत करना

NESTS और EMRS संस्थान जनजातीय खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय उत्कृष्टता तक ले जाने के मार्ग तैयार कर रहे हैं।

सांस्कृतिक एवं औपचारिक कार्यक्रम की झलकियाँ

समापन समारोह में शामिल थे:

  • छात्रों द्वारा अतिथियों का पारंपरिक स्वागत

  • दीप प्रज्वलन, वंदे मातरम और वेव मार्च

  • ओडिशी एवं धीमसा जैसे सांस्कृतिक नृत्य

  • पदक एवं ट्रॉफी वितरण

  • अद्भुत आतिशबाज़ी

  • मुख्य अतिथि एवं दूती चंद द्वारा मशाल का विसर्जन और EMRS ध्वज अवतरण

कार्यक्रम का समापन कलेक्टर डॉ. शुभंकर मोहापात्र द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।


जंजातीय गौरव दिवस पर संसद में भगवान बिरसा मुंडा को राष्ट्र का नमन

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भारत की राष्ट्रपति,द्रौपदी मुर्मु; भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति,सी. पी. राधाकृष्णन; लोकसभा अध्यक्ष,ओम बिड़ला; संसदीय कार्य मंत्री एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री,किरण रिजिजू; राज्यसभा के उपसभापति,हरिवंश; सांसदगण; पूर्व सांसद; तथा अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों ने आज संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती—जंजातीय गौरव दिवस—के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

ओम बिड़ला ने इससे पहले ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा,

“अतुलनीय स्वतंत्रता सेनानी और जनजातीय अस्मिता व स्वाभिमान के शाश्वत प्रतीक धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि, तथा जंजातीय गौरव दिवस की सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ।

सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने जल, जंगल और ज़मीन के अधिकारों के लिए जो साहसिक संघर्ष किया, वह विदेशी शासन के विरुद्ध धधकती क्रांति के रूप में उभरा और स्वतंत्रता की चेतना को पूरे देश में फैलाया। उत्पीड़ित, वंचित और जनजातीय समुदायों की आवाज़ बनकर, बिरसा मुंडा जी ने अपने अटल संकल्प, बलिदान और अद्वितीय नेतृत्व से अनगिनत युवाओं में राष्ट्रवाद, आत्मसम्मान और न्याय की भावना जगाई।

उनका जीवन राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में सदैव प्रेरणा स्रोत रहेगा और हमें कर्तव्य-पथ, सामाजिक न्याय तथा सांस्कृतिक गरिमा का मार्ग दिखाता रहेगा।”

भगवान बिरसा मुंडा, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उलगुलान (क्रांति) का नेतृत्व किया, प्रतिरोध के एक सशक्त प्रतीक बन गए। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने राष्ट्रीय चेतना को प्रज्वलित किया और उनकी विरासत आज भी पूरे देश के जनजातीय समुदायों द्वारा गहरी श्रद्धा से स्मरण की जाती है।

साल 2021 से, 15 नवंबर को जंजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का सम्मान किया जा सके। भारत की स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समुदायों ने अनेक क्रांतिकारी आंदोलनों के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह दिवस उनकी गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और विरासत का उत्सव है। देशभर में आयोजित कार्यक्रमों का उद्देश्य एकता, गर्व और जनजातीय योगदानों की पहचान को सुदृढ़ करना है।

समारोहों के हिस्से के रूप में, संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर विभिन्न राज्यों के जनजातीय लोक कलाकारों ने प्रदर्शन कर आगंतुकों का स्वागत किया।



प्रधानमंत्री मोदी ने झारखंड स्थापना दिवस और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर दी शुभकामनाएँ, कहा–साहस और संघर्ष की प्रेरणा आज भी ज़िंदा है

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड के लोगों को राज्य स्थापना दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएँ दी हैं और इस अवसर पर सभी परिवारों की प्रगति और समृद्धि की कामना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि झारखंड जनजातीय संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से समृद्ध प्रदेश है, जिसकी धरती पर साहस और संघर्ष की गाथाएँ सदियों से सुनाई देती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने महान स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा को उनकी 150वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस के पावन अवसर पर पूरा देश उनके अद्वितीय योगदान को याद कर रहा है। उनका साहस, संघर्ष और मातृभूमि के लिए बलिदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने अपने X (पूर्व में Twitter) पोस्ट में लिखा:

"जनजातीय संस्कृति से समृद्ध गौरवशाली प्रदेश झारखंड के सभी निवासियों को राज्य के स्थापना दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। भगवान बिरसा मुंडा जी की इस धरती का इतिहास साहस, संघर्ष और स्वाभिमान की गाथाओं से भरा हुआ है। आज इस विशेष अवसर पर मैं राज्य के अपने सभी परिवारजनों के साथ ही यहां की प्रगति और समृद्धि की कामना करता हूं।"

उन्होंने आगे कहा:

"देश के महान स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा जी को उनकी 150वीं जयंती पर शत-शत नमन। जनजातीय गौरव दिवस के इस पावन अवसर पर पूरा देश मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए उनके अतुलनीय योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण कर रहा है। विदेशी हुकूमत के अन्याय के खिलाफ उनका संघर्ष और बलिदान हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा।"


जनजातीय गौरव दिवस पखवाड़ा: भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर विधि विभाग का श्रद्धांजलि समारोह

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विधि और न्याय मंत्रालय के विधि विभाग ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में जनजातीय गौरव दिवस पखवाड़ा मनाया। बिरसा मुंडा—एक महान स्वतंत्रता सेनानी, जननायक और आदिवासी समुदाय के प्रेरणास्रोत—की विरासत भारत की न्याय, गरिमा और सांस्कृतिक विविधता के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को सशक्त करती है।

कानून सचिव डॉ. अंजू राठी राणा के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में भारत के राष्ट्र-निर्माण में आदिवासी समुदायों के योगदान और उनके ऐतिहासिक महत्व पर विचार किया गया। बिरसा मुंडा के असाधारण साहस, उनके नेतृत्व और आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए उनके संघर्ष को कार्यक्रम का केंद्र बनाया गया।

“बिरसा मुंडा का जीवन और योगदान” विषय पर एक लघु वीडियो भी प्रदर्शित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों और विभागीय कर्मचारियों को भारत की जनजातीय परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और संघर्षशीलता की झलक देखने को मिली। यह प्रस्तुति बिरसा मुंडा के ऐतिहासिक योगदान और उनकी अमर विरासत को उजागर करती है।

इस अवसर पर “राष्ट्रीय इतिहास और संस्कृति में जनजातीय समुदायों का योगदान” विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर देश की जनजातीय धरोहर के प्रति सम्मान और जागरूकता का संदेश दिया।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जनजातीय समुदायों का भारत की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक विविधता में विशिष्ट और अमूल्य योगदान है। जनजातीय गौरव दिवस पखवाड़ा मनाना इस प्रतिबद्धता को मजबूत करता है कि भारत अपने आदिवासी समाज की विरासत को सम्मान, समझ और गर्व के साथ आगे बढ़ाता रहेगा।





जनजातीय गौरव दिवस: बिरसा मुंडा और आदिवासी वीरों को राष्ट्र का नमन

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15 नवंबर: जनजातीय गौरव दिवस

15 नवंबर को भारत जनजातीय गौरव दिवस मनाता है, जो महान स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। वर्ष 2024–25 को उनकी 150वीं जयंती के अवसर पर जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। 1 से 15 नवंबर तक पूरे देश में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें बिरसा मुंडा और अन्य जनजातीय वीरों के बलिदान, संघर्ष और समृद्ध जनजातीय संस्कृति को सम्मान दिया जा रहा है।

भारत सरकार का जनजातीय मंत्रालय जनजातीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएँ चलाता है। इसी उद्देश्य से, देशभर में 11 ‘जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय’ स्थापित किए जा रहे हैं, जो विभिन्न जनजातीय आंदोलनों को संरक्षित करेंगे।

जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय पहल

भारतीय जनजातीय नेताओं ने अंग्रेजी शासन और सामंती अत्याचार के खिलाफ महत्वपूर्ण लड़ाइयाँ लड़ीं। हालांकि इन ऐतिहासिक आंदोलनों को मुख्यधारा के इतिहास में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाया। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार विभिन्न राज्यों में संग्रहालय स्थापित कर रही है।

इन संग्रहालयों के लिए धनराशि जनजातीय अनुसंधान संस्थान समर्थन योजना के तहत दी जा रही है।

संग्रहालयों का विवरण (राज्य, स्थान, लागत, स्वीकृत अनुदान)

  • राज्य            
  • स्थान            
  •  परियोजना लागत (करोड़ रु.)
  • मंत्रालय द्वारा स्वीकृत अनुदान (करोड़ रु.)
  • झारखंड
  • रांची
  • 34.22
  • 25.00
  • गुजरात
  • राजपीपला
  • 257.94
  • 50.00
  • आंध्र प्रदेश
  • लांबासिंगी
  • 45.00
  • 25.00
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर
  • 53.13
  • 42.47
  • केरल
  • वायनाड
  • 16.66
  • 15.00
  • मध्य प्रदेश
  • छिंदवाड़ा
  • 40.69
  • 25.69
  • मध्य प्रदेश
  • जबलपुर
  • 14.39
  • 14.39
  • तेलंगाना
  • हैदराबाद
  • 34.00
  • 25.00
  • मणिपुर
  • तमेंगलॉन्ग
  • 51.38
  • 15.00
  • मिजोरम
  • केलसिह
  • 25.59
  • 25.59
  • गोवा
  • फोंडा
  • 27.55
  • 15.00

छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्य प्रदेश में चार संग्रहालय पहले ही उद्घाटित किए जा चुके हैं।

मुख्य संग्रहालय

1. शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय — रायपुर, छत्तीसगढ़

1 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित।

  • कुल लागत: ₹53.13 करोड़

  • मंत्रालय का योगदान: ₹42.47 करोड़

  • 16 गैलरी, 650 मूर्तियाँ

  • डिजिटल इंस्टॉलेशन, टोपोग्राफिक मैप, एआई फोटो बूथ, कर्व स्क्रीन, RFID स्क्रीन

यह संग्रहालय वीर नारायण सिंह के आंदोलन, हल्बा क्रांति, भूमकाल क्रांति, कोया क्रांति आदि जैसे बड़े जनजातीय विद्रोहों को दर्शाता है।

वीर नारायण सिंह:

  • सोनाखान के जमींदार

  • 1856 में अकाल के दौरान ब्रिटिश अनाज भंडार से अनाज निकालकर लोगों को खिलाया

  • कैद से भागकर सेना बनाई

  • 29 नवंबर 1856 को अंग्रेजों को हराया

  • 10 दिसंबर 1857 को शहीद हुए

2. भगवान बिरसा मुंडा जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय — रांची

  • उद्घाटन: 15 नवंबर 2021

  • बिरसा मुंडा का "उलगुलान" (1899–1900) जनजातीय स्वशासन और भूमि अधिकारों के लिए ऐतिहासिक आंदोलन था।

  • उन्हें "धरती आबा" कहा जाता है।

  • 25 वर्ष की आयु में शहीद हुए।

3. बादल भोई राज्य जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय — छिंदवाड़ा

  • उद्घाटन: 15 नवंबर 2024

  • बादल भोई (ज. 1845) ने 1923 में बड़ा आंदोलन चलाया, कई बार गिरफ्तार हुए

  • 1940 में जेल में शहीद हुए।

4. राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह संग्रहालय — जबलपुर

  • उद्घाटन: 15 नवंबर 2024

  • 1857 में जनजातीय आंदोलन के प्रमुख नेता

  • कवि, जिन्होंने गीतों और पदों के माध्यम से अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई

  • 18 सितंबर 1858 को दोनों को अंग्रेजों ने फाँसी दी।

जनजातीय गौरव वर्ष: देशभर में कार्यक्रम

भारत के विभिन्न राज्यों में सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामुदायिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इनमें कला प्रदर्शनियाँ, कार्यशालाएँ, भाषा संरक्षण कार्यक्रम, खेल आयोजन, शोध संगोष्ठियाँ, तथा जनजातीय इतिहास पर प्रदर्शनियाँ शामिल हैं।

अन्य प्रमुख जनजातीय सांस्कृतिक पहलें

  • पहल उद्देश्य मुख्य विशेषताएँ
    • आदि संस्कृति परियोजना
    • जनजातीय कला रूपों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म
    • 100 कोर्स, 5000 डिजिटल अभिलेख
    • आदि वाणी
    • एआई आधारित भाषा अनुवाद
    • हिंदी–अंग्रेजी–जनजातीय भाषाओं में त्वरित अनुवाद
    • ट्राइबल डिजिटल डॉक्यूमेंट रिपॉजिटरी
    • जनजातीय शोध सामग्री का डिजिटल संग्रह
    • ऑनलाइन अभिलेखागार
    • वर्णमाला और मौखिक साहित्य पहल
    • जनजातीय भाषाओं व कथाओं का संरक्षण
    • लोककथाएँ, गीतों का प्रकाशन
    • स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों का अध्ययन
    • पारंपरिक चिकित्सा, कृषि, कला का दस्तावेजीकरण
    • शोध, प्रकाशन, महोत्सव
    • आदि महोत्सव
    • राष्ट्रीय जनजातीय संस्कृति उत्सव
    • कला, संगीत, भोजन, हस्तशिल्प
    • जनजातीय कला मेले
    • जनजातीय कलाकारों को मंच
    • प्रदर्शनी, कार्यशालाएँ

निष्कर्ष

जनजातीय गौरव दिवस और जनजातीय गौरव वर्ष देश के जनजातीय समुदायों के संघर्ष, संस्कृति, इतिहास और योगदान को राष्ट्रीय चेतना में स्थान देने का महत्वपूर्ण प्रयास है। 11 स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों की स्थापना और विभिन्न सांस्कृतिक पहलों के माध्यम से भारत सरकार “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को सुदृढ़ कर रही है।


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