Media24Media.com: #FreedomFighter

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #FreedomFighter. Show all posts
Showing posts with label #FreedomFighter. Show all posts

उपराष्ट्रपति ने मन्नाथु पद्मनाभन की प्रतिमा का किया अनावरण, मन्नम स्मृति मंडपम् का उद्घाटन

No comments Document Thumbnail

 भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली के द्वारका स्थित मन्नम इंटरनेशनल सेंटर में नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस), दिल्ली द्वारा आयोजित कार्यक्रम में समाज सुधारक एवं स्वतंत्रता सेनानी मन्नाथु पद्मनाभन की प्रतिमा का अनावरण किया तथा मन्नम स्मृति मंडपम् का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने इसे आधुनिक भारत के महानतम समाज सुधारकों और राष्ट्रनिर्माताओं में से एक मन्नाथु पद्मनाभन की अमर विरासत का ऐतिहासिक उत्सव बताया। उन्होंने नायर सर्विस सोसाइटी (एनएसएस), दिल्ली को लंबे समय से संजोए गए मन्नम स्मृति मंडपम् के निर्माण के स्वप्न को साकार करने पर बधाई देते हुए कहा कि यह स्मारक केवल एक भवन नहीं, बल्कि एक ऐसी महान विरासत का जीवंत प्रतीक है, जिसके आदर्श सामाजिक न्याय, समानता और राष्ट्रसेवा की भावना को जाति, क्षेत्र और धर्म की सीमाओं से ऊपर उठाते हैं।

मन्नाथु पद्मनाभन के जीवन और योगदान का स्मरण करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि प्रख्यात समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और नायर सर्विस सोसाइटी के संस्थापक ने शिक्षा, सामाजिक सुधार, आत्मनिर्भरता और सामुदायिक सेवा के माध्यम से समाज के उत्थान के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया।

उपराष्ट्रपति ने मन्नाथु पद्मनाभन को सामाजिक पुनर्जागरण का सच्चा अग्रदूत बताते हुए कहा कि उनकी दृष्टि किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं थी। उन्होंने कहा, "वे मानते थे कि प्रत्येक व्यक्ति समान सम्मान और समान अवसर का अधिकारी है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि वास्तविक सामाजिक प्रगति तभी संभव है, जब न्याय, करुणा और समावेशिता समाज के मार्गदर्शक सिद्धांत बनें।"

राधाकृष्णन ने कहा कि नायर सर्विस सोसाइटी की उल्लेखनीय प्रगति स्वयं उसके संस्थापक की असाधारण निष्ठा और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि मन्नाथु पद्मनाभन का विश्वास था कि महान संस्थाएँ धन से नहीं, बल्कि समर्पण से बनती हैं। उन्होंने सामान्य परिवारों के छोटे-छोटे योगदानों से शिक्षा और सामाजिक संस्थानों की स्थापना की, जिसने अनेक पीढ़ियों के जीवन को बदल दिया।

उपराष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि स्थापना के एक शताब्दी से अधिक समय बाद भी मन्नाथु पद्मनाभन के आदर्श केरल से कहीं आगे तक फैल चुके हैं। उन्होंने विशेष रूप से एनएसएस दिल्ली द्वारा कलरिपयट्टु, कथकली और मोहिनीयाट्टम जैसी केरल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर में 25 शाखाओं और लगभग 25,000 सदस्यों वाले संगठन के रूप में एनएसएस दिल्ली की उल्लेखनीय प्रगति पर भी बधाई दी।

स्मारकों के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा, "स्मारक केवल पत्थरों पर की गई नक्काशी नहीं होते, बल्कि वे समाज की सामूहिक चेतना पर अंकित अमिट छाप होते हैं। उनका उद्देश्य केवल अतीत का स्मरण करना नहीं, बल्कि भविष्य को प्रेरणा देना भी है।"

उन्होंने नागरिकों से मन्नाथु पद्मनाभन के आदर्शों को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा, "उनके प्रति हमारी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि हम समानता, शिक्षा, करुणा, सेवा और राष्ट्रीय एकता पर आधारित समाज निर्माण के उनके मिशन को आगे बढ़ाएँ।"

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रव्यापी 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान के अंतर्गत मन्नम इंटरनेशनल सेंटर परिसर में एक पौधा भी रोपा।

कार्यक्रम में केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस तथा पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी, एनएसएस दिल्ली के अध्यक्ष एम. के. जी. पिल्लै, महासचिव एम. डी. जयप्रकाश सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

बाबू जगजीवन राम की 119वीं जयंती पर समता स्थल पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित

No comments Document Thumbnail

5 अप्रैल 2026 को बाबू जगजीवन राम की 119वीं जयंती के अवसर पर बाबू जगजीवन राम राष्ट्रीय फाउंडेशन एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समता स्थल (बाबूजी की समाधि), दिल्ली गेट, नई दिल्ली में सुबह 7:30 बजे से 8:00 बजे तक पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसके साथ ही 6, कृष्ण मेनन मार्ग, नई दिल्ली में सुबह 9:30 बजे सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।

पुष्पांजलि समारोह में भारत के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री बी. एल. वर्मा, लोकसभा सांसद मनोज कुमार, मंत्रालय के सचिव सुधांश पंत, बाबू जगजीवन राम राष्ट्रीय फाउंडेशन की कार्यकारी उपाध्यक्ष स्वाति कुमार, सदस्य सचिव शैलेंद्र कुमार, निदेशक नरेंद्र वशिष्ठ, विभिन्न सांसदों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों सहित बाबूजी के सैकड़ों अनुयायियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके बाद 6, कृष्ण मेनन मार्ग पर आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभा में भी पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार, विभिन्न सांसदों, फाउंडेशन के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में अनुयायियों ने बाबूजी को श्रद्धांजलि दी।

बाबू जगजीवन राम एक स्वतंत्रता सेनानी और महान राष्ट्रीय नेता थे, जिन्होंने समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए निरंतर संघर्ष किया। वे 35 वर्षों तक केंद्रीय मंत्री रहे, जो कि एक लंबा कार्यकाल है, और उन्होंने कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।

खाद्य एवं कृषि मंत्री के रूप में उन्हें ‘हरित क्रांति’ का श्रेय दिया जाता है, वहीं रक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने 1971 के ऐतिहासिक युद्ध में भारत का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का गठन हुआ।



शहीद उधम सिंह की जयंती पर अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी ने अर्पित की श्रद्धांजलि

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद उधम सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

‘एक्स’ (X) पर साझा किए गए संदेश में अमित शाह ने कहा कि अमर शहीद उधम सिंह ने जलियांवाला बाग नरसंहार में शहीद हुए देशवासियों का बदला लेकर अद्वितीय साहस और पराक्रम का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि उधम सिंह जी ने ग़दर आंदोलन के माध्यम से विदेशी धरती पर भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की ज्वाला को प्रज्वलित करने में अग्रणी भूमिका निभाई। शाह ने कहा कि उनकी वीरगाथा देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है, जो उनके मन में मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का भाव जागृत करती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शहीद उधम सिंह को उनकी जयंती पर नमन करते हुए कहा कि उनका बलिदान और राष्ट्रभक्ति आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि शहीद उधम सिंह का जीवन अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, साहस और देशप्रेम का अमर प्रतीक है, जिसे भारतवासी कभी नहीं भूल सकते।

शहीद वीर नारायण सिंह का बलिदान, आत्मगौरव, संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक - मुख्यमंत्री साय

No comments Document Thumbnail

नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन, सियान सदन और मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना अंतर्गत बस सेवा प्रारंभ करने की घोषणा

101 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन

मुख्यमंत्री सोनाखान में आयोजित शहीद वीर नारायण सिंह की शहादत दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में हुए शामिल

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि शहीद वीर नारायण सिंह का बलिदान छत्तीसगढ़ के आत्मगौरव, संघर्ष और स्वाभिमान का अमर प्रतीक है। वे आज सोनाखान में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में प्रदेश के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को नमन करने पहुंचे, जहां उन्होंने शहीद के वंशजों को सम्मानित किया और क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं। मुख्यमंत्री ने सोनाखान में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना अंतर्गत बस सेवा प्रारंभ करने, नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन निर्माण हेतु 75 लाख रुपये, सियान सदन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये तथा मड़ई मेला स्थल में शौचालय निर्माण के लिए 20 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सोनाखान में इको-टूरिज्म विकास और सड़क निर्माण हेतु आवश्यक प्रावधान आगामी बजट में शामिल किए जाएंगे जिससे इस ऐतिहासिक स्थल को नई पहचान मिलेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार एवं सुविधाओं में वृद्धि होगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह अंग्रेजी शासन के अत्याचार के विरुद्ध गरीबों, किसानों और वंचित समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए खड़े हुए एक ऐसे वीर सपूत थे, जिन्होंने भीषण अकाल के समय गरीबों में अनाज बांटकर मानवता की ऐतिहासिक मिसाल पेश की। अंग्रेजी हुकूमत ने 10 दिसंबर 1857 को उन्हें फांसी दे दी, किंतु उनका बलिदान सदियों से संघर्ष, स्वाभिमान और अन्याय के प्रतिकार की प्रेरणा देता आया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘गारंटी’ के तहत अधिकांश वादों को पूरा किया है और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए निरंतर काम कर रही है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि आज ही के दिन अंग्रेजी हुकूमत ने रायपुर के जयस्तंभ चौक में वीर नारायण सिंह को फांसी दी थी। वे अन्याय के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहीद हुए और उनका बलिदान पीढ़ियों तक लोगों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने राज्य सरकार की जनहितैषी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि विकास और कल्याण के लिए सरकार सतत् कार्यरत है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कुल 101.44 करोड़ रुपये की लागत के 119 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण के 10 हितग्राहियों को घरों की चाबियाँ सौंपी तथा ‘हम होंगे कामयाब’ कार्यक्रम के अंतर्गत 37 युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। आदिवासी समाज के पाँच प्रतिभावान छात्रों को भी मंच पर सम्मानित किया गया। समारोह में वन मंत्री श्री केदार कश्यप, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, पूर्व विधायक डॉ. सनम जांगड़े तथा शहीद वीर नारायण सिंह के वंशज राजेंद्र दीवान सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  द्वारा जिन कार्यों का लोकार्पण किया गया उनमें ग्राम ओड़ान, खरतोरा, सकरी (स) और दतान (ख) में 9.88 करोड़ रुपये की लागत से रेट्रोफिटिंग नल-जल प्रदाय योजनाएँ तथा गोरधा में एकल नल-जल प्रदाय योजना शामिल है। जिन कार्यों का भूमिपूजन किया गया उनमें अर्जुनी में 5.84 करोड़ रुपये की लागत से जोंक शीर्ष जीर्णोद्धार एवं तटबंध निर्माण, लवन शाखा नहर के तिल्दा, करदा लाटा एवं सिरियाडीह माइनर के 3.63 करोड़ रुपये की लागत से जीर्णोद्धार एवं पुनर्निर्माण, मटिया नाला में 3.36 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉपडैम निर्माण, परसाडीह के खोरसीनाला में 2.99 करोड़ रुपये की लागत से स्टॉपडैम निर्माण और लाहोद में 2.60 करोड़ रुपये की लागत से निरीक्षण कुटीर एवं आवासीय भवन निर्माण कार्य मुख्य रूप से शामिल हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जयस्तंभ चौक में किया शहीद वीर नारायण सिंह के त्याग और संघर्ष का स्मरण

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और जननायक अमर शहीद वीर नारायण सिंह की पुण्यतिथि पर आज मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर स्थित जयस्तंभ चौक पहुँचकर उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह का जीवन त्याग, साहस और न्याय की अनुपम मिसाल है। अंग्रेजी शासन के अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध शहीद वीर नारायण सिंह ने जिस अदम्य साहस के साथ संघर्ष किया, वह छत्तीसगढ़ की गौरवमयी विरासत का स्वर्णिम अध्याय है। मातृभूमि की रक्षा और समाज के वंचित वर्गों के प्रति उनकी निष्ठा हमारे लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सोनाखान के ज़मींदार परिवार में जन्म लेने के बाद भी शहीद वीर नारायण सिंह का हृदय सदैव आदिवासियों, किसानों और गरीब परिवारों के दुःख-संघर्ष से जुड़ा रहा। वर्ष 1856 के विकट अकाल में जब आमजन भूख से व्याकुल थे, तब उन्होंने मानवता को सर्वोपरि मानते हुए अनाज गोदाम का अनाज ज़रूरतमंदों में बाँटकर करुणा, त्याग और साहस का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कदम केवल विद्रोह नहीं था, बल्कि सामाजिक अन्याय, शोषण और असमानताओं के विरुद्ध एक ऐतिहासिक उद्घोष था।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ की अस्मिता, स्वाभिमान और जनप्रतिरोध की जीवंत प्रेरणा हैं। गरीबों, किसानों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए उनका जीवन-संघर्ष आने वाली पीढ़ियों को सदैव न्याय, मानवता और राष्ट्रभक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता रहेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शहीद वीर नारायण सिंह के आदर्शों और उनके सपनों के अनुरूप छत्तीसगढ़ के विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रही है।

इस अवसर पर आदिम जाति कल्याण मंत्री रामविचार नेताम, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक पुरन्दर मिश्रा, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूपसिंह मंडावी, छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष रामसेवक पैकरा एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री ने सी. राजगोपालाचारी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

No comments Document Thumbnail

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज सी. राजगोपालाचारी की जन्मजयन्ती के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्हें स्वतंत्रता सेनानी, विचारक, विद्वान और राजनेता के रूप में याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राजाजी 20वीं सदी के सबसे तेजस्वी मस्तिष्कों में से एक थे, जिन्होंने मूल्य सृजन और मानवीय गरिमा को बनाए रखने में विश्वास रखा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र उनके स्वतंत्रता संग्राम और सार्वजनिक जीवन में किए गए स्थायी योगदान को कृतज्ञता के साथ याद करता है।

X (पूर्व में ट्विटर) पर अपने पोस्ट में मोदी ने लिखा:

“स्वतंत्रता सेनानी, विचारक, विद्वान, राजनेता… ये कुछ शब्द हैं जो सी. राजगोपालाचारी को याद करते समय मन में आते हैं। उनकी जन्मजयन्ती पर उन्हें श्रद्धांजलि। वे 20वीं सदी के सबसे तेजस्वी मस्तिष्कों में से एक रहे, जिन्होंने मूल्य सृजन और मानवीय गरिमा को बनाए रखने में विश्वास रखा। हमारा राष्ट्र उनके स्थायी योगदान को कृतज्ञता के साथ याद करता है।

राजाजी की जन्मजयन्ती पर, कुछ रोचक सामग्री साझा कर रहा हूँ, जिसमें युवा राजाजी की तस्वीर, उनके कैबिनेट मंत्री बनने की अधिसूचना, 1920 के दशक में स्वयंसेवकों के साथ उनकी तस्वीर और 1922 में एडिट की गई यंग इंडिया की एक संस्करण शामिल है, क्योंकि गांधी जी जेल में थे।”



मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अमर शहीद वीर नारायण सिंह के बलिदान दिवस पर किया नमन

No comments Document Thumbnail

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 10 दिसंबर को छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद वीर नारायण सिंह के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वीर नारायण सिंह छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपरा के ऐसे महान जननायक थे, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा, अन्याय के प्रतिरोध और वंचित वर्गों की सेवा को अपने जीवन का ध्येय बनाया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सोनाखान के ज़मींदार परिवार में जन्म लेकर भी शहीद वीर नारायण सिंह का जीवन सदैव आदिवासियों, किसानों और गरीब परिवारों के संघर्षों से जुड़ा रहा। वर्ष 1856 के विकट अकाल में जब आमजन भूख से त्रस्त थे, तब उन्होंने मानवता को सर्वोपरि रखते हुए अनाज गोदाम का अनाज गरीबों में वितरित कर त्याग, करुणा और साहस की अनुपम मिसाल प्रस्तुत की।मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह ने छत्तीसगढ़ की जनता में देशभक्ति, स्वाभिमान और एकता की लौ प्रज्वलित की। उनका संघर्ष केवल अंग्रेजी शासन के विरुद्ध नहीं था, बल्कि हर प्रकार के अन्याय, दमन और सामाजिक शोषण के खिलाफ था।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह का बलिदान छत्तीसगढ़ की अस्मिता, वीरता और बलिदान की गौरवशाली परंपरा का प्रेरक अध्याय है। वे गरीबों, किसानों और वंचितों के सच्चे रक्षक थे और उनकी गाथा सदैव आने वाली पीढ़ियों को न्याय एवं मानवता के लिए खड़े होने की प्रेरणा देती रहेगी।

अमर शहीद खुदीराम बोस की जयंती पर गृह मंत्री अमित शाह की श्रद्धांजलि

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय गृह मंत्री और सहयोग मंत्री अमित शाह ने महान देशभक्त और अमर शहीद खुदीराम बोस जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

‘एक्स’ प्लेटफ़ॉर्म पर एक पोस्ट में अमित शाह ने कहा कि मां भारती की स्वतंत्रता के लिए सशस्त्र क्रांति हेतु युवाओं को संगठित करने वाले और स्वदेशी के लिए देशवासियों को जागृत करने वाले, वीरता, साहस और त्याग के प्रतीक खुदीराम बोस जी सदैव स्मरणीय रहेंगे।

उन्होंने कहा कि अनगिनत क्रांतिकारियों से प्रेरित खुदीराम जी ब्रिटिश सरकार के अत्याचारों से कभी भयभीत नहीं हुए और उन्होंने मां भारती के लिए हंसते-हंसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

शाह ने कहा कि खुदीराम बोस जी की वीर गाथा हर युवा के लिए राष्ट्र को सर्वोपरी रखने की अनमोल प्रेरणा है।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी ने किया राष्ट्रनिर्माता के योगदान का स्मरण

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- भारत के प्रथम राष्ट्रपति और संविधान निर्माण के महानायक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर संदेश साझा करते हुए कहा कि डॉ. प्रसाद का जीवन सत्यनिष्ठा, सादगी और राष्ट्र सेवा का अद्वितीय उदाहरण है, जिसकी प्रेरणा आज भी देश की नई पीढ़ियों का मार्गदर्शन करती है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में लिखा:

“डॉ. राजेन्द्र प्रसाद जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि। स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाने से लेकर संविधान सभा की अध्यक्षता करने और हमारे पहले राष्ट्रपति बनने तक, उन्होंने अतुलनीय गरिमा, समर्पण और स्पष्ट उद्देश्य के साथ देश की सेवा की। लोक जीवन के उनके लंबे वर्षों में सादगी, साहस और राष्ट्रीय एकता के प्रति समर्पण की छाप रही। उनकी अनुकरणीय सेवा और दृष्टि पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है।”

प्रधानमंत्री के इस संदेश ने एक बार फिर उस महान नेता के प्रति देश की सामूहिक स्मृतियों को जागृत किया, जिसने अपनी संपूर्ण ऊर्जा राष्ट्रउत्थान के लिए समर्पित की।

बचपन से लेकर राष्ट्र नेतृत्व तक—डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की अद्वितीय यात्रा

3 दिसंबर 1884 को बिहार के जीरादेई में जन्मे डॉ. राजेन्द्र प्रसाद असाधारण प्रतिभा और गहन नैतिक मूल्यों से संपन्न थे। बचपन से ही मेधावी, विनम्र और अनुशासित—वे छात्रों के बीच "राजेन्द्र बाबू" के नाम से प्रसिद्ध थे।

उनकी शिक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय में हुई, जहाँ उन्होंने कानून की पढ़ाई में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। बाद में वे देश के सर्वश्रेष्ठ वकीलों में गिने जाने लगे, लेकिन राष्ट्र की पुकार पर उन्होंने अपना कानूनी करियर छोड़ दिया और स्वतंत्रता आंदोलन में पूर्णकालिक रूप से सक्रिय हो गए।

स्वतंत्रता आंदोलन में अद्वितीय नेतृत्व

डॉ. प्रसाद ने महात्मा गांधी के साथ कई ऐतिहासिक आंदोलनों में भाग लिया।
उनके प्रमुख योगदानों में शामिल हैं:

  • चंपारण सत्याग्रह में किसानों के अधिकारों के लिए अग्रणी भूमिका

  • असहयोग आंदोलन और नमक सत्याग्रह में सक्रिय सहभागिता

  • ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध संघर्ष

  • जेल में कई बार कारावास, लेकिन संकल्प एक क्षण भी कमजोर नहीं

उनकी शांत, संतुलित और प्रभावी नेतृत्व क्षमता ने उन्हें राष्ट्र के सबसे विश्वसनीय नेताओं में स्थापित किया।

संविधान सभा के अध्यक्ष—भारत के लोकतांत्रिक ढांचे के निर्माता

1946 में, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को संविधान सभा का अध्यक्ष चुना गया।
उनके नेतृत्व में:

  • विविध विचारधाराओं के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर संविधान तैयार किया

  • कठिन बहसों को धैर्य और सरल भाषा में समझाते हुए संतुलन बनाया

  • गांधीवादी मूल्यों, लोकतंत्र, न्याय और समानता को संविधान में मजबूत आधार मिला

भारत का संविधान आज विश्व के सर्वोत्तम संविधान मॉडलों में से एक माना जाता है—जिसे अंतिम रूप देने में डॉ. प्रसाद की भूमिका केंद्रीय रही।

12 वर्षों तक भारत के राष्ट्रपति—सादगी और नैतिकता का आदर्श

26 जनवरी 1950 को जब भारत गणतंत्र बना, तो डॉ. राजेन्द्र प्रसाद सर्वसम्मति से देश के पहले राष्ट्रपति चुने गए।
कुल 12 वर्षों तक उन्होंने इस उच्चतम संवैधानिक पद को अद्वितीय गरिमा और पवित्रता के साथ निभाया—जो आज तक किसी और राष्ट्रपति के कार्यकाल से अधिक है।

उनकी कार्यशैली में:

  • निर्णयों में निष्पक्षता और नैतिक दृढ़ता

  • सरकार के कामकाज पर सजग, लेकिन संवैधानिक मर्यादा का कठोर पालन

  • आम जनता के बीच लगातार संपर्क

  • सादगी की ऐसी मिसाल कि राष्ट्रपति भवन में भी सामान्य जीवनशैली बनाए रखी

राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद भी वे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे और समाजसेवा में लगे रहे।

भारत रत्न और अमर विरासत

1962 में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न प्रदान किया गया।
वे न केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रपति थे, बल्कि:

  • लेखक

  • सामाजिक सुधारक

  • शिक्षाविद

  • किसान और गरीबों के सच्चे हितैषी

उनकी पुस्तकें, भाषण और जीवन मूल्य आज भी देश के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

प्रधानमंत्री का संदेश—नए भारत के लिए प्रेरक संकल्प

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जयंती पर प्रधानमंत्री के श्रद्धांजलि संदेश ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि राष्ट्र निर्माण की यात्रा में मूल्यों, त्याग और देशभक्ति का महत्व आज भी उतना ही है जितना स्वतंत्रता के समय था।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों से आग्रह किया कि वे डॉ. प्रसाद के आदर्शों से प्रेरणा लें और राष्ट्र की एकता, विकास और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने में योगदान दें।

जंजातीय गौरव दिवस पर संसद में भगवान बिरसा मुंडा को राष्ट्र का नमन

No comments Document Thumbnail

भारत की राष्ट्रपति,द्रौपदी मुर्मु; भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति,सी. पी. राधाकृष्णन; लोकसभा अध्यक्ष,ओम बिड़ला; संसदीय कार्य मंत्री एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री,किरण रिजिजू; राज्यसभा के उपसभापति,हरिवंश; सांसदगण; पूर्व सांसद; तथा अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों ने आज संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती—जंजातीय गौरव दिवस—के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

ओम बिड़ला ने इससे पहले ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा,

“अतुलनीय स्वतंत्रता सेनानी और जनजातीय अस्मिता व स्वाभिमान के शाश्वत प्रतीक धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि, तथा जंजातीय गौरव दिवस की सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ।

सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने जल, जंगल और ज़मीन के अधिकारों के लिए जो साहसिक संघर्ष किया, वह विदेशी शासन के विरुद्ध धधकती क्रांति के रूप में उभरा और स्वतंत्रता की चेतना को पूरे देश में फैलाया। उत्पीड़ित, वंचित और जनजातीय समुदायों की आवाज़ बनकर, बिरसा मुंडा जी ने अपने अटल संकल्प, बलिदान और अद्वितीय नेतृत्व से अनगिनत युवाओं में राष्ट्रवाद, आत्मसम्मान और न्याय की भावना जगाई।

उनका जीवन राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में सदैव प्रेरणा स्रोत रहेगा और हमें कर्तव्य-पथ, सामाजिक न्याय तथा सांस्कृतिक गरिमा का मार्ग दिखाता रहेगा।”

भगवान बिरसा मुंडा, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उलगुलान (क्रांति) का नेतृत्व किया, प्रतिरोध के एक सशक्त प्रतीक बन गए। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने राष्ट्रीय चेतना को प्रज्वलित किया और उनकी विरासत आज भी पूरे देश के जनजातीय समुदायों द्वारा गहरी श्रद्धा से स्मरण की जाती है।

साल 2021 से, 15 नवंबर को जंजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का सम्मान किया जा सके। भारत की स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समुदायों ने अनेक क्रांतिकारी आंदोलनों के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह दिवस उनकी गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और विरासत का उत्सव है। देशभर में आयोजित कार्यक्रमों का उद्देश्य एकता, गर्व और जनजातीय योगदानों की पहचान को सुदृढ़ करना है।

समारोहों के हिस्से के रूप में, संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर विभिन्न राज्यों के जनजातीय लोक कलाकारों ने प्रदर्शन कर आगंतुकों का स्वागत किया।



Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.