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जंजातीय गौरव दिवस पर संसद में भगवान बिरसा मुंडा को राष्ट्र का नमन

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भारत की राष्ट्रपति,द्रौपदी मुर्मु; भारत के उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति,सी. पी. राधाकृष्णन; लोकसभा अध्यक्ष,ओम बिड़ला; संसदीय कार्य मंत्री एवं अल्पसंख्यक कार्य मंत्री,किरण रिजिजू; राज्यसभा के उपसभापति,हरिवंश; सांसदगण; पूर्व सांसद; तथा अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों ने आज संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर भगवान बिरसा मुंडा की जयंती—जंजातीय गौरव दिवस—के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

ओम बिड़ला ने इससे पहले ‘एक्स’ पर अपने संदेश में लिखा,

“अतुलनीय स्वतंत्रता सेनानी और जनजातीय अस्मिता व स्वाभिमान के शाश्वत प्रतीक धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि, तथा जंजातीय गौरव दिवस की सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ।

सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने जल, जंगल और ज़मीन के अधिकारों के लिए जो साहसिक संघर्ष किया, वह विदेशी शासन के विरुद्ध धधकती क्रांति के रूप में उभरा और स्वतंत्रता की चेतना को पूरे देश में फैलाया। उत्पीड़ित, वंचित और जनजातीय समुदायों की आवाज़ बनकर, बिरसा मुंडा जी ने अपने अटल संकल्प, बलिदान और अद्वितीय नेतृत्व से अनगिनत युवाओं में राष्ट्रवाद, आत्मसम्मान और न्याय की भावना जगाई।

उनका जीवन राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में सदैव प्रेरणा स्रोत रहेगा और हमें कर्तव्य-पथ, सामाजिक न्याय तथा सांस्कृतिक गरिमा का मार्ग दिखाता रहेगा।”

भगवान बिरसा मुंडा, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध उलगुलान (क्रांति) का नेतृत्व किया, प्रतिरोध के एक सशक्त प्रतीक बन गए। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने राष्ट्रीय चेतना को प्रज्वलित किया और उनकी विरासत आज भी पूरे देश के जनजातीय समुदायों द्वारा गहरी श्रद्धा से स्मरण की जाती है।

साल 2021 से, 15 नवंबर को जंजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का सम्मान किया जा सके। भारत की स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समुदायों ने अनेक क्रांतिकारी आंदोलनों के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह दिवस उनकी गौरवशाली संस्कृति, इतिहास और विरासत का उत्सव है। देशभर में आयोजित कार्यक्रमों का उद्देश्य एकता, गर्व और जनजातीय योगदानों की पहचान को सुदृढ़ करना है।

समारोहों के हिस्से के रूप में, संसद परिसर स्थित प्रेरणा स्थल पर विभिन्न राज्यों के जनजातीय लोक कलाकारों ने प्रदर्शन कर आगंतुकों का स्वागत किया।



जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा 2025: भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजातीय संस्कृति और सशक्तिकरण का उत्सव

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जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 1 से 15 नवंबर 2025 तक “जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा” मनाने की घोषणा की है। यह आयोजन “जनजातीय गौरव वर्ष” के भव्य समापन का प्रतीक होगा और 15 नवंबर 2025 को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के साथ समाप्त होगा।

यह दो सप्ताह लंबा उत्सव देशभर में जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs), एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRSs), ट्राइफेड (TRIFED) और एनएसटीएफडीसी (NSTFDC) के सहयोग से आयोजित किया जाएगा, जिसमें भारत के जनजातीय समुदायों की समृद्ध विरासत, संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में पिछले एक दशक में जनजातीय सशक्तिकरण और कल्याण के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति हुई है। “जनजातीय गौरव वर्ष पखवाड़ा” का उद्देश्य इन उपलब्धियों और प्रमुख पहलों जैसे पीएम जनमण, आदि कर्मयोगी अभियान, राष्ट्रीय सिकल सेल उन्मूलन मिशन, दाजगुआ (DAJGUA) तथा आजीविका और उद्यमिता कार्यक्रमों के तहत हुई प्रगति का उत्सव मनाना है।

इस पखवाड़े के दौरान विभिन्न राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जनजातीय संस्कृति, परंपरा और उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाले जीवंत कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। इनमें मणिपुर में ट्राइबल फ्रेम्स फिल्म फेस्टिवल, छत्तीसगढ़ में शहीद वीर नारायण सिंह लोक कला महोत्सव, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में जनजातीय मेला, गुजरात में जनजातीय गौरव यात्रा, उत्तराखंड में आदि खेल दिवस, तथा गोवा में महा सम्मेलन शामिल हैं।

ये कार्यक्रम भगवान बिरसा मुंडा के साहस, बलिदान और नेतृत्व की भावना को नमन करते हुए “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को सशक्त रूप से व्यक्त करेंगे।

15 नवंबर 2025 को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर देशभर में एक साथ भव्य आयोजन होंगे, जिनमें धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि दी जाएगी — जिनके अदम्य साहस और बलिदान ने भारत के जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरित किया और जो आज भी देश की पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं।

मंत्रालय ने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस उत्सव में शामिल होकर “भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और जनजातीय सशक्तिकरण के 11 वर्ष” के इस गौरवमय अवसर पर जनजातीय नायकों को श्रद्धांजलि दें और समावेशी व सतत विकास के संकल्प को दोहराएँ।

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