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काशी तमिल संगम 4.0: तमिलनाडु और काशी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का चौथा संस्करण

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वाराणसी, 29 नवंबर 2025: तमिलनाडु और काशी के सभ्यतागत और ऐतिहासिक संबंधों को समर्पित पहल काशी तमिल संगम का चौथा संस्करण 2 से 15 दिसंबर 2025 तक वाराणसी में आयोजित होगा।

पहले ट्रेन का शुभारंभ

आज (29 नवंबर 2025) कन्याकुमारी से पहले बैच की यात्रा शुरू हुई, जिसमें 45 प्रतिनिधि शामिल हैं। त्रिची से 86 और चेन्नई से 87 प्रतिनिधियों के जुड़ने के बाद इस पहले बैच में कुल 216 प्रतिभागी होंगे। इस समूह में शामिल हैं:

  • 50 तमिल साहित्य विशेषज्ञ

  • 54 सांस्कृतिक विद्वान

  • छात्र, शिक्षक, शिल्पकार, शास्त्रीय गायक और आध्यात्मिक ग्रंथों के शिक्षक एवं छात्र

कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन पर स्थानीय विधायक एम.आर. गांधी और जनता ने प्रतिनिधियों को विदाई दी।

उद्घाटन और मुख्य कार्यक्रम

काशी तमिल संगम 4.0 का औपचारिक उद्घाटन 2 दिसंबर 2025 को NaMo घाट, वाराणसी में होगा। इस वर्ष का आयोजन कार्तिकेय दीपम (4 दिसंबर), तमिलनाडु के प्रमुख त्योहार के समय संपन्न हो रहा है।

इस कार्यक्रम में 1,500 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे, जो भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को समझने और साझा करने के लिए ज्ञान-सत्रों में भाग लेंगे। आठ दिवसीय यात्रा के दौरान प्रतिभागी वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों जैसे प्रयागराज और अयोध्या का दौरा करेंगे। इसके अलावा वे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों जैसे:

  • काशी विश्वनाथ मंदिर

  • NaMo घाट

  • हनुमान घाट

  • बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय

  • सारनाथ

  • अयोध्या मंदिर

का भ्रमण भी करेंगे।

प्रमुख पहल और शिक्षा कार्यक्रम

  • “एक भारत श्रेष्ठ भारत” अभियान के तहत चार प्रमुख सहयोगी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

  • इस वर्ष का विषय “चलो तमिल सीखें – तमिल कर्कलम” है, जो यह संदेश देता है कि सभी भारतीय भाषाएँ एक ही परिवार की सदस्य हैं।

  • संत अगस्त्य वाहन यात्रा, तेनकसी (तमिलनाडु) से काशी (उत्तर प्रदेश) तक 2 दिसंबर को शुरू होकर 12 दिसंबर को वाराणसी में समाप्त होगी। यह यात्रा आदि वीर पराक्रमा पांडियन की ऐतिहासिक यात्रा का स्मरण करती है, जिन्होंने तमिलनाडु से काशी तक सांस्कृतिक एकता का संदेश फैलाया और शिव मंदिर की स्थापना की।

  • “उत्तर प्रदेश के छात्रों को तमिल पढ़ाना” कार्यक्रम के तहत, यूपी के छात्र तमिलनाडु आएंगे और उन्हें तमिल भाषा की समृद्धि से परिचित कराया जाएगा। इसमें 10 बैचों में 30-30 कॉलेज छात्र शामिल होंगे।

उद्देश्य और महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल काशी तमिल संगम का उद्देश्य है:

  • तमिलनाडु और काशी के बीच स्थायी सांस्कृतिक और लोगों से लोगों का संबंध मजबूत करना

  • इस सरकारी कार्यक्रम में भागीदारी की बढ़ती उत्सुकता को पूरा करना

  • तमिल भाषा और संस्कृति को भारत के अन्य हिस्सों तक पहुँचाना और प्राचीन तमिल ग्रंथों के प्रचार को बढ़ावा देना

यह आयोजन भारतीय विविधता और संस्कृति के सांस्कृतिक संवाद और एकता का प्रतीक है।



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