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MGR की जयंती पर प्रधानमंत्री ने श्रद्धांजलि अर्पित की

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत रत्न डॉ. एम.जी. रामचंद्रन (MGR) की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है।

प्रधानमंत्री ने एक बयान में MGR की बहुआयामी विरासत की सराहना की और तमिलनाडु के सामाजिक-आर्थिक विकास में उनके महत्वपूर्ण योगदान तथा तमिल संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहुँचाने के उनके प्रयासों को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने X पर अलग-अलग पोस्ट में कहा:

“अपनी जयंती पर असाधारण MGR को श्रद्धांजलि। तमिलनाडु की प्रगति में उनका योगदान उत्कृष्ट है। तमिल संस्कृति को लोकप्रिय बनाने में उनकी भूमिका भी समान रूप से उल्लेखनीय है। हम हमेशा उनके समाज के लिए दृष्टिकोण को साकार करने के लिए काम करते रहेंगे।”

तमिलनाडु के कोंडगई झील से प्राप्त 4,500 वर्षों का विस्तृत जलवायु अभिलेख

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एक नए अध्ययन में तमिलनाडु के शिवगंगा ज़िले के बाहरी क्षेत्र में स्थित कोंडगई अंतर्देशीय झील के नीचे से प्रायद्वीपीय भारत के अब तक के सबसे विस्तृत जलवायु अभिलेखों में से एक का पता चला है।

शोध पत्र का ग्राफिकल सार

स्थलीय तमिलनाडु में पूर्वोत्तर मानसून के प्रति संवेदनशील होने के बावजूद, अब तक अच्छी तरह दिनांकित बहु-प्रॉक्सी झील अभिलेख लगभग नहीं के बराबर थे। कीलाड़ी के समीप स्थित कोंडगई झील—जो संगम काल की एक उन्नत नगरीय सभ्यता के प्रमाणों के लिए प्रसिद्ध एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है और जिसकी तिथि संभवतः ईसा पूर्व छठी शताब्दी या उससे भी पहले की मानी जाती है—तमिल इतिहास को कई शताब्दियों पीछे ले जाती है। शोधकर्ताओं ने यह पहचाना कि प्राचीन बसाहट क्षेत्रों में स्थित यह झील अतीत के मानसून परिवर्तन, पारिस्थितिकी तंत्र की प्रतिक्रियाओं और मानव बसावट के साथ उनके संबंधों को समझने का एक दुर्लभ अवसर प्रदान करती है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान, लखनऊ स्थित बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (BSIP) के शोधकर्ताओं ने झील से एक मीटर से कुछ अधिक गहराई तक का अवसाद (सेडिमेंट) प्रोफ़ाइल निकाला और 32 निकटवर्ती नमूने एकत्र किए, जिनमें से प्रत्येक समय के एक अलग चरण का प्रतिनिधित्व करता है। स्थिर समस्थानिक विश्लेषण, पराग अध्ययन, कण-आकार मापन और रेडियोकार्बन डेटिंग जैसी उन्नत तकनीकों के संयोजन का उपयोग कर उन्होंने असाधारण सटीकता के साथ अतीत की वर्षा, वनस्पति, झील के जल-स्तर और बाढ़ घटनाओं का पुनर्निर्माण किया।

जर्नल Holocene में प्रकाशित इस अध्ययन में, अंतर्देशीय तमिलनाडु से प्राप्त लेट होलोसीन काल की जलवायु और झील-पारिस्थितिकी तंत्र गतिकी का पहला उच्च-रिज़ॉल्यूशन बहु-प्रॉक्सी पुनर्निर्माण प्रस्तुत किया गया है। इसमें पिछले लगभग 4,500 वर्षों के दौरान तीन प्रमुख जलवायु चरणों की पहचान की गई—4.2 हजार वर्ष पूर्व का शुष्क (अरीड) चरण, 3.2 हजार वर्ष पूर्व का शुष्क चरण, और रोमन उष्ण काल—और इनके मानसून परिवर्तनशीलता, झील की जल-प्रणाली तथा मानव गतिविधियों से प्रत्यक्ष संबंधों को स्थापित किया गया है।

4,500 वर्षों के मानसूनी व्यवहार के पुनर्निर्माण के माध्यम से यह अध्ययन एक दीर्घकालिक जलवायु आधाररेखा प्रदान करता है, जो क्षेत्रीय जलवायु पूर्वानुमान को सुदृढ़ बनाती है तथा भविष्य में सूखा, अत्यधिक वर्षा या बाढ़ जैसी घटनाओं के पूर्वानुमान में सहायक है। तमिलनाडु जैसे जलवायु-संवेदनशील क्षेत्र के लिए यह ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य मानसून पूर्वानुमान मॉडलों को बेहतर बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यह निष्कर्ष शिवगंगा और मदुरै जैसे सूखा-प्रवण जिलों में जल संसाधन प्रबंधन को भी प्रत्यक्ष रूप से समर्थन देते हैं। अतीत के झील-स्तर उतार-चढ़ाव, अवसाद प्रवाह और जल-वैज्ञानिक परिवर्तनों की जानकारी सतत जलाशय पुनर्स्थापन, भूजल पुनर्भरण योजना, तालाबों के पुनर्वास तथा जलवायु-स्मार्ट कृषि जल उपयोग को दिशा देती है। यह उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो मानसून-आधारित जल प्रणालियों पर निर्भर हैं।

प्राचीन बाढ़ निक्षेपों, स्थलीय अवसाद प्रवाह और भूमि अस्थिरता के चरणों की पहचान कर यह अध्ययन जोखिम मानचित्रण और आपदा-तैयारी में योगदान देता है। वैगई नदी बेसिन में बाढ़-संवेदनशील क्षेत्रों, नदी-मार्ग परिवर्तन और भूमि क्षरण के प्रति संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान के लिए प्राधिकरण इन संकेतों का उपयोग कर सकते हैं।

(क) कोंडगई झील (KLD), तमिलनाडु का अध्ययन मानचित्र, जिसमें भूमि उपयोग और भूमि आवरण के साथ प्रोफ़ाइल स्थान दर्शाया गया है।
(ख) 1901 से 2020 ईस्वी तक कोंडगई ज़िले में औसत मासिक वर्षा (KNMI क्लाइमेटिक एक्सप्लोरर से प्राप्त)।
(ग) गूगल अर्थ छवि जिसमें अध्ययन स्थल, प्राचीन नदी-मार्ग (पेलियोचैनल) और वैगई नदी बेसिन की ऑक्स-बो झीलें दर्शाई गई हैं।
(घ) KK’ के साथ क्रॉस-सेक्शन, जहाँ T0 सक्रिय नदी-मार्ग और T1 नदी-चिन्ह तथा वैगई नदी के पेलियोचैनलों का स्थान दर्शाता है।
(ङ) कोंडगई दफ़न स्थल।

यह शोध पुरातत्व और सांस्कृतिक धरोहर के क्षेत्र में भी अत्यंत लाभकारी है। कीलाड़ी बसाहट के निकट स्थित कोंडगई झील का पर्यावरणीय इतिहास यह समझने में महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करता है कि प्राचीन समाजों ने जलवायु परिवर्तनशीलता, जल-कमी और पारिस्थितिक दबावों के प्रति कैसे अनुकूलन किया। इससे पुरातात्विक व्याख्या, संरक्षण रणनीतियों और क्षेत्रीय विरासत नियोजन को मजबूती मिलती है।

पारिस्थितिक दृष्टिकोण से, यह अध्ययन जलीय उत्पादकता, ऑक्सीजन स्थितियों और जैविक पदार्थ स्रोतों में दीर्घकालिक परिवर्तनों का दस्तावेज़ीकरण कर आर्द्रभूमि और झील पुनर्स्थापन के लिए एक वैज्ञानिक आधार प्रदान करता है। इससे साक्ष्य-आधारित संरक्षण और जैव विविधता रणनीतियों के निर्माण में सहायता मिलती है।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने श्रीपुरम में सक्ति अम्मा के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लिया

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित श्रीपुरम में सक्ति अम्मा के स्वर्ण जयंती समारोह में भाग लिया और श्री सक्ति अम्मा की 50 वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा के इस अवसर का हिस्सा बनकर गहन प्रसन्नता व्यक्त की।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि श्रीपुरम स्वर्ण मंदिर की पवित्रता और आध्यात्मिक गरिमा इस तथ्य से परिलक्षित होती है कि देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम और राम नाथ कोविंद सहित, हाल ही में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी पिछले माह इस मंदिर के दर्शन किए।

सक्ति अम्मा की धर्म के प्रति प्रतिबद्धता पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनका मार्गदर्शन केवल आध्यात्मिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक सामाजिक सेवा तक विस्तृत है। उन्होंने श्रीपुरम में संचालित विभिन्न परोपकारी गतिविधियों की सराहना की, जिनमें उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्तियाँ, जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था, विद्यार्थियों को साइकिल वितरण जैसी दीर्घकालिक पहलें तथा प्रतिदिन हजारों लोगों को भोजन उपलब्ध कराने वाला अन्नदान कार्यक्रम शामिल हैं। उन्होंने इन पहलों को सच्ची भक्ति की भावना से की गई उत्कृष्ट सेवाएँ बताया।

उपराष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि श्रीपुरम परिसर में 50,000 से अधिक वृक्ष लगाए गए हैं तथा समीपवर्ती कैलासगिरि पहाड़ियों पर कई लाख पौधे रोपे गए हैं। उन्होंने इसे धरती माता और मानवता के लिए एक ऐतिहासिक योगदान बताया तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्यावरण संरक्षण पहलों को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने वाला कदम कहा। उन्होंने जोड़ा कि पर्यावरण की रक्षा स्वयं में एक दिव्य सेवा है।

इस बात पर जोर देते हुए कि सच्ची आध्यात्मिकता केवल कर्मकांडों में नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा और मानव सेवा में निहित है, उपराष्ट्रपति ने महाकवि सुब्रमण्यम भारती के शब्दों का उल्लेख किया— “प्रेम से बड़ा कोई तप नहीं है।” उन्होंने कहा कि समाज से प्रेम करना और उसकी सेवा करना ही सर्वोच्च आध्यात्मिक साधना है।

उपराष्ट्रपति ने सक्ति अम्मा को वर्तमान युग की एक महान आध्यात्मिक विभूति बताया, जो अपने जीवन और कर्मों के माध्यम से “प्रेम ही ईश्वर है” के सिद्धांत को साकार करते हुए समाज में धर्म और आध्यात्मिक चेतना का पोषण कर रही हैं।

इससे पूर्व दिन में, उपराष्ट्रपति ने तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित श्रीपुरम में नारायणी मंदिर में दर्शन किए। उन्होंने देवी लक्ष्मी से सभी के लिए शांति, समृद्धि और सुख की प्रार्थना की।

काशी तमिल संगमम 4.0: भाषा, संस्कृति और सभ्यतागत एकता का नया अध्याय

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • काशी तमिल संगमम 4.0 की शुरुआत 2 दिसंबर, 2025 से हो रही है, जो तमिलनाडु और काशी के सांस्कृतिक व सभ्यता संबंधों को आगे बढ़ाता है।

  • इस संस्करण का मुख्य आधार “लेट अस लर्न तमिल – तमिल कार्कालम” है, जिसके तहत तमिल भाषा सीखने और भाषाई एकता पर विशेष फोकस रहेगा।

  • प्रमुख कार्यक्रमों में तमिल कार्कालम (वाराणसी के विद्यालयों में तमिल शिक्षण), तमिल कर्पोम (काशी क्षेत्र के 300 छात्रों के लिए तमिल सीखने हेतु अध्ययन भ्रमण), और सेज अगस्त्य व्हीकल एक्सपीडिशन (तेनकासी से काशी तक सभ्यतागत मार्ग का अनुसरण) शामिल हैं।

  • इस वर्ष का संगमम रामेश्वरम में वैलेडिक्टरी समारोह के साथ सम्पन्न होगा, जो काशी से तमिलनाडु तक की सांस्कृतिक यात्रा का प्रतीकात्मक समापन होगा।

प्राचीन बंधन की पुनर्स्मृति: काशी तमिल संगमम क्या है?

स्रोत: काशी तमिल संगमम वेबसाइट

काशी तमिल संगमम एक ऐसे संबंध का उत्सव है, जो सदियों से भारतीय चेतना में समाहित रहा है। तमिलनाडु और काशी के बीच होने वाली यात्राएँ केवल भौगोलिक नहीं थीं, बल्कि विचारों, दर्शन, भाषाओं और परंपराओं के आदान-प्रदान की गहन सांस्कृतिक यात्राएँ थीं। संगमम इसी जीवंत ऐतिहासिक संबंध को आधुनिक समय में पुनर्जीवित करता है।

2022 में आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान शुरू हुआ यह कार्यक्रम भारत की विविध सांस्कृतिक धारा को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास है। यह पहल एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना से प्रेरित है, जो लोगों को विभिन्न संस्कृतियों को समझने और अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित और IIT मद्रास तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के ज्ञान साझेदारों के रूप में, संगमम में रेलवे, संस्कृति, पर्यटन, वस्त्र, युवा मामले एवं खेल मंत्रालय सहित कई मंत्रालयों और उत्तर प्रदेश सरकार की सक्रिय भागीदारी रहती है।

प्रत्येक संस्करण में तमिलनाडु के छात्र, शिक्षक, कारीगर, विद्वान, आध्यात्मिक नेता, महिला समूह और सांस्कृतिक प्रतिनिधि काशी पहुंचते हैं तथा वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या में आयोजित कार्यक्रमों, दर्शन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और संवादों में भाग लेते हैं।

काशी तमिल संगमम 4.0: “तमिल कार्कालम – लेट अस लर्न तमिल”

2 दिसंबर 2025 से प्रारंभ होने वाला 4.0 संस्करण अपने पूर्व संस्करणों की भावना को आगे ले जाता है, परंतु इस बार इसका केंद्र भाषाई शिक्षा और युवा सहभागिता है।

इस वर्ष का विषय “लेट अस लर्न तमिल – तमिल कार्कालम” सभी भारतीय भाषाओं को एक साझा "भारतीय भाषा परिवार" का हिस्सा मानते हुए भाषाई विविधता में एकता का संदेश देता है। यह संस्करण उत्तर भारत के छात्रों के लिए तमिल भाषा सीखने और तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के नए अवसर प्रदान करता है।

तमिलनाडु से 1,400 से अधिक प्रतिनिधि काशी आएंगे, जिनमें विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, पत्रकार, किसान, कारीगर, पेशेवर, महिलाएँ और आध्यात्मिक विद्वान शामिल होंगे।

काशी तमिल संगमम 4.0: प्रमुख पहलें

1. उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को तमिल सिखाना – “तमिल कार्कालम”

  • 50 तमिल शिक्षक (DBHPS प्रचारकों सहित) वाराणसी के 50 स्कूलों में 2–15 दिसंबर 2025 के बीच तैनात रहेंगे।

  • प्रत्येक शिक्षक कक्षा 30 छात्रों को तमिल बोलचाल, उच्चारण और मूलाक्षरों का प्रशिक्षण देंगे।

  • कुल 1,500 विद्यार्थियों को आधारभूत तमिल शिक्षा मिलेगी।

  • BHU का तमिल विभाग, CIIL मैसूरु, IRCTC और वाराणसी प्रशासन इसके समन्वय में शामिल हैं।

यह पहल तमिल शिक्षण को तमिलनाडु के बाहर विस्तृत करने का महत्वपूर्ण कदम है।

2. तमिलनाडु यात्रा के दौरान तमिल सीखना – स्टडी टूर कार्यक्रम

  • उत्तर प्रदेश के 300 कॉलेज छात्र 10 बैचों में तमिलनाडु का अध्ययन दौरा करेंगे।

  • CICT, चेन्नई में ओरिएंटेशन के बाद वे तमिल भाषा और संस्कृति पर कक्षाओं में भाग लेंगे।

  • प्रमुख संस्थान (IIT मद्रास, शास्त्र यूनिवर्सिटी, पांडिचेरी विवि, कांचीपुरम के संस्थान आदि) छात्रों की मेजबानी करेंगे।

  • प्रत्येक छात्र को प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।

यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के युवाओं को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से तमिल भाषा व संस्कृति से परिचित कराता है।

3. सेज अगस्त्य व्हीकल एक्सपीडिशन (SAVE)

  • 2 दिसंबर 2025 को तेनकासी से शुरू होकर 10 दिसंबर 2025 को काशी पहुंचेगा।

  • यह यात्रा ऋषि अगस्त्य के पौराणिक मार्ग पर आधारित है।

  • चेरी, चोल, पांड्य, पल्लव, चालुक्य और विजयनगर साम्राज्यों की ऐतिहासिक कड़ियों को रेखांकित करेगी।

  • तमिल साहित्य, सिद्ध चिकित्सा और साझा विरासत पर भी प्रकाश डालेगी।

यह यात्रा तमिलनाडु और काशी के बीच प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को सम्मानित करती है।

काशी तमिल संगमम: 1.0 से 4.0 तक की यात्रा

KTS 1.0 (2022)

  • 2,500+ प्रतिभागी

  • काशी, प्रयागराज और अयोध्या के व्यापक दर्शन और संवाद

  • सांस्कृतिक कार्यक्रम, शैक्षणिक सत्र और प्रदर्शनियाँ

KTS 2.0 (2023)

  • 1,435 प्रतिनिधि

  • PM के भाषण का पहली बार रियल-टाइम तमिल अनुवाद

  • 2 लाख से अधिक आगंतुकों वाली बड़ी प्रदर्शनी

  • डिजिटल आउटरीच में 8.5 करोड़ की पहुंच

KTS 3.0 (2025)

  • ऋषि अगस्त्य पर केंद्रित प्रदर्शनियाँ और सत्र

  • महाकुंभ 2025 और राम मंदिर, अयोध्या के दर्शन

  • NEP 2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान प्रणाली आधारित कार्यक्रम

काशी–तमिल बंध को सुदृढ़ करना: एक जीवंत सांस्कृतिक सततता

चारों संस्करणों ने दिखाया है कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान तभी प्रभावी होता है, जब वह अनुभव और सहभागिता पर आधारित हो।
KTS 4.0 इस यात्रा को नई दिशा देता है—भाषाई सीखने, युवाओं की सहभागिता और द्विपक्षीय सांस्कृतिक समझ को केंद्र में रखकर।

यह पहल एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को मूर्त रूप देती है, जहाँ भाषाएँ, परंपराएँ और विचार एकता के सूत्र में जुड़ते हैं।



शिवगंगा हादसे पर प्रधानमंत्री मोदी का शोक, PMNRF से राहत राशि की घोषणा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में हुई दुर्घटना में हुए जनहानि पर शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने दुर्घटना में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की है।

प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के परिजनों को प्रति व्यक्ति 2 लाख रुपये तथा घायलों के लिए 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया:

“तमिलनाडु के शिवगंगा में हुई दुर्घटना में जान गंवाने वालों की मौत अत्यंत दुखद है। जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदनाएँ। मैं प्रार्थना करता हूँ कि घायल लोग जल्द स्वस्थ हों।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिजन को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे


जनरेशन Z में दिखा उत्साह, 2 दिसंबर से शुरू होगा काशी तमिल संगमम् 4.0

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जनरेशन Z के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है, क्योंकि 2 दिसंबर से शुरू होने वाले काशी तमिल संगमम् 4.0 के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। इस आयोजन का उद्देश्य काशी और तमिलनाडु के प्राचीन सांस्कृतिक और भाषाई संबंधों को नई पीढ़ी की ऊर्जा के साथ जोड़ना है।

पहले दल के रूप में बड़ी संख्या में GenZ छात्र 29 नवंबर को कन्याकुमारी से विशेष ट्रेन द्वारा यात्रा पर निकले। यह लंबी रेल यात्रा युवाओं के लिए सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले चुकी है—जिसमें खेल, समूह गतिविधियाँ, उत्साहभरी बातचीत और रचनात्मक साझेदारियाँ शामिल हैं। यह अनुभव उनके लिए रोमांचक और यादगार बन गया है।

तमिलनाडु की अर्चना, जो इस विशेष ट्रेन से यात्रा कर रही हैं, ने कहा कि उन्हें घर पर मंदिरों में जाने का कम अवसर मिलता है, इसलिए यह यात्रा उनके लिए एक दिव्य संयोग है। वह पहली बार काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने के लिए उत्साहित हैं।

इसी तरह, तिरुपुर की मालथी, जो UPSC की तैयारी कर रही हैं, ने कहा कि तमिलनाडु और काशी का आध्यात्मिक संबंध सदियों से संतों जैसे माणिक्कवाचार द्वारा मनाया जाता रहा है। काशी तमिल संगमम् इस पवित्र संबंध को आधुनिक तरीके से और सशक्त बना रहा है। काशी की यात्रा उनके लिए गर्व का क्षण है।

उधर काशी में भी घाटों और विश्वविद्यालय परिसरों में हो रहे प्री-इवेंट कार्यक्रमों में GenZ बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है। ‘Run for KTS 4.0’ जैसे कार्यक्रमों ने युवाओं को फिटनेस के साथ-साथ सांस्कृतिक उत्सव के प्रति जागरूकता बढ़ाने का मंच दिया।

विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र और अन्य घाटों पर GenZ द्वारा किए गए नुक्कड़ नाटकों ने काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संबंधों को नए, रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया। वहीं Reel-making प्रतियोगिताओं ने सोशल मीडिया पर उत्साह की लहर पैदा कर दी है, जिससे पूरे देश के युवाओं में कार्यक्रम को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है।

इस वर्ष काशी तमिल संगमम् 4.0 का थीम है— “Learn Tamil – Tamil Karkalam”, जिसका उद्देश्य भाषा और संस्कृति को और अधिक निकट लाना है। इसमें GenZ की सक्रिय भागीदारी इस थीम को और अधिक प्रभावी और सार्थक बना रही है।


काशी तमिल संगम 4.0: तमिलनाडु और काशी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का चौथा संस्करण

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वाराणसी, 29 नवंबर 2025: तमिलनाडु और काशी के सभ्यतागत और ऐतिहासिक संबंधों को समर्पित पहल काशी तमिल संगम का चौथा संस्करण 2 से 15 दिसंबर 2025 तक वाराणसी में आयोजित होगा।

पहले ट्रेन का शुभारंभ

आज (29 नवंबर 2025) कन्याकुमारी से पहले बैच की यात्रा शुरू हुई, जिसमें 45 प्रतिनिधि शामिल हैं। त्रिची से 86 और चेन्नई से 87 प्रतिनिधियों के जुड़ने के बाद इस पहले बैच में कुल 216 प्रतिभागी होंगे। इस समूह में शामिल हैं:

  • 50 तमिल साहित्य विशेषज्ञ

  • 54 सांस्कृतिक विद्वान

  • छात्र, शिक्षक, शिल्पकार, शास्त्रीय गायक और आध्यात्मिक ग्रंथों के शिक्षक एवं छात्र

कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन पर स्थानीय विधायक एम.आर. गांधी और जनता ने प्रतिनिधियों को विदाई दी।

उद्घाटन और मुख्य कार्यक्रम

काशी तमिल संगम 4.0 का औपचारिक उद्घाटन 2 दिसंबर 2025 को NaMo घाट, वाराणसी में होगा। इस वर्ष का आयोजन कार्तिकेय दीपम (4 दिसंबर), तमिलनाडु के प्रमुख त्योहार के समय संपन्न हो रहा है।

इस कार्यक्रम में 1,500 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे, जो भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को समझने और साझा करने के लिए ज्ञान-सत्रों में भाग लेंगे। आठ दिवसीय यात्रा के दौरान प्रतिभागी वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों जैसे प्रयागराज और अयोध्या का दौरा करेंगे। इसके अलावा वे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों जैसे:

  • काशी विश्वनाथ मंदिर

  • NaMo घाट

  • हनुमान घाट

  • बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय

  • सारनाथ

  • अयोध्या मंदिर

का भ्रमण भी करेंगे।

प्रमुख पहल और शिक्षा कार्यक्रम

  • “एक भारत श्रेष्ठ भारत” अभियान के तहत चार प्रमुख सहयोगी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

  • इस वर्ष का विषय “चलो तमिल सीखें – तमिल कर्कलम” है, जो यह संदेश देता है कि सभी भारतीय भाषाएँ एक ही परिवार की सदस्य हैं।

  • संत अगस्त्य वाहन यात्रा, तेनकसी (तमिलनाडु) से काशी (उत्तर प्रदेश) तक 2 दिसंबर को शुरू होकर 12 दिसंबर को वाराणसी में समाप्त होगी। यह यात्रा आदि वीर पराक्रमा पांडियन की ऐतिहासिक यात्रा का स्मरण करती है, जिन्होंने तमिलनाडु से काशी तक सांस्कृतिक एकता का संदेश फैलाया और शिव मंदिर की स्थापना की।

  • “उत्तर प्रदेश के छात्रों को तमिल पढ़ाना” कार्यक्रम के तहत, यूपी के छात्र तमिलनाडु आएंगे और उन्हें तमिल भाषा की समृद्धि से परिचित कराया जाएगा। इसमें 10 बैचों में 30-30 कॉलेज छात्र शामिल होंगे।

उद्देश्य और महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल काशी तमिल संगम का उद्देश्य है:

  • तमिलनाडु और काशी के बीच स्थायी सांस्कृतिक और लोगों से लोगों का संबंध मजबूत करना

  • इस सरकारी कार्यक्रम में भागीदारी की बढ़ती उत्सुकता को पूरा करना

  • तमिल भाषा और संस्कृति को भारत के अन्य हिस्सों तक पहुँचाना और प्राचीन तमिल ग्रंथों के प्रचार को बढ़ावा देना

यह आयोजन भारतीय विविधता और संस्कृति के सांस्कृतिक संवाद और एकता का प्रतीक है।



काशी तमिल संगमम् 4.0: तमिल–काशी सभ्यतागत सेतुबंध का विस्तार और ‘तमिल कार्कलम’ के साथ भाषाई एकता का उत्सव

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2 दिसंबर 2025 से, शिक्षा मंत्रालय काशी और तमिलनाडु के बीच गहरे सभ्यतागत संबंधों का उत्सव मनाने के लिए काशी तमिल संगमम् (KTS) 4.0 का आयोजन कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न से प्रेरित यह पहल दोनों क्षेत्रों के बीच प्राचीन सभ्यतागत, सांस्कृतिक, भाषाई और जन-जातीय संबंधों को सम्मान देने की परंपरा को आगे बढ़ाती है, जो 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना को साकार करती है।

यह कार्यक्रम आईआईटी मद्रास और बीएचयू वाराणसी द्वारा समन्वित किया जा रहा है तथा संस्कृति मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय, आईआरसीटीसी और उत्तर प्रदेश सरकार का सहयोग प्राप्त है।

2022 में शुरुआत के बाद से, काशी तमिल संगमम् को अत्यधिक सार्वजनिक सहभागिता प्राप्त हुई है और यह भारत की दो प्राचीन ज्ञान परंपराओं को पुनः जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक सेतु बन गया है। पिछले तीन संस्करणों की सफलता के आधार पर, चौथा संस्करण सीखने के आदान-प्रदान, सांस्कृतिक अनुभव, शैक्षणिक संवाद और युवाओं की अधिक भागीदारी को बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।

2025 की थीम: “तमिल कार्कलम – Learn Tamil”

KTS 4.0 का आयोजन “Learn Tamil – Tamil Karkalam” थीम पर होगा, जिसका उद्देश्य तमिल भाषा सीखने को पूरे भारत में बढ़ावा देना और भारत की शास्त्रीय भाषाई एवं साहित्यिक विरासत की व्यापक सराहना विकसित करना है।

इस संस्करण में तमिलनाडु से 1,400 से अधिक प्रतिनिधि निम्नलिखित सात श्रेणियों में भाग लेंगे:

  1. छात्र

  2. शिक्षक

  3. लेखक एवं मीडिया पेशेवर

  4. कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र

  5. प्रोफेशनल्स और कारीगर

  6. महिलाएँ

  7. आध्यात्मिक विद्वान एवं साधक

प्रतिनिधि वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या के 8-दिवसीय अनुभवात्मक भ्रमण पर जाएंगे, जिसमें संवाद, सेमिनार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और विरासत से परिचय शामिल होगा।

प्रतिनिधियों को वाराणसी में महत्वपूर्ण तमिल धरोहर स्थलों पर ले जाया जाएगा, जिनमें महाकवि सुब्रमण्य भारतीयर का पैतृक घर, केदार घाट, “लिटिल तमिलनाडु” क्षेत्र में स्थित काशी मदम, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, और माता अन्नपूर्णा मंदिर शामिल हैं। वे बीएचयू के तमिल विभाग का भी शैक्षणिक एवं साहित्यिक संवाद हेतु दौरा करेंगे।

KTS 4.0 की प्रमुख पहलें

1. तेनकासी से काशी तक 'ऋषि अगस्त्य वाहन यात्रा'

“ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान” 2 दिसंबर 2025 को तेनकासी से शुरू होकर 10 दिसंबर 2025 को काशी पहुँचेगा। यह यात्रा पांड्य शासक श्री आदि वीर पराक्रम पांडियन की उस ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाती है, जिन्होंने तमिलनाडु से काशी तक जाकर भारतीय संस्कृति में एकता का संदेश फैलाया और तेनकासी (दक्षिण काशी) की स्थापना की।

यह अभियान चेर, चोल, पांड्य, पल्लव, चालुक्य और विजयनगर कालखंडों से जुड़ी सभ्यतागत कड़ियों, शास्त्रीय तमिल साहित्य, सिद्ध चिकित्सा तथा साझा विरासत को प्रदर्शित करेगा।

2. उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में तमिल शिक्षण

“तमिल कार्कलम” अभियान के तहत 50 हिंदी जानने वाले तमिल शिक्षक काशी के विद्यालयों में छात्रों को तमिल भाषा सिखाएँगे।

3. उत्तर प्रदेश के छात्रों के लिए तमिल अध्ययन भ्रमण

काशी के 300 कॉलेज छात्र 15-दिवसीय तमिल शिक्षण कार्यक्रम के लिए तमिलनाडु के विभिन्न संस्थानों का दौरा करेंगे।
सीआईसीटी चेन्नई ओरिएंटेशन व अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराएगा, जबकि होस्ट संस्थान छात्रों को तमिलनाडु की विरासत, परंपराओं और काशी से ऐतिहासिक संबंधों से परिचित कराएँगे। इन छात्रों का चेन्नई में विशेष स्वागत किया जाएगा।

काशी तमिल संगमम् 4.0 सांस्कृतिक आदान-प्रदान, भाषाई समृद्धि और ज्ञान-साझाकरण के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के भारत सरकार के संकल्प को पुनर्स्थापित करता है। विविध समुदायों को एक साथ लाकर यह कार्यक्रम भारत की जीवंत सभ्यतागत निरंतरता और सांस्कृतिक एकात्मता को दर्शाता है।

पंजीकरण जानकारी

KTS 4.0 के लिए दो अलग-अलग पंजीकरण पोर्टल लॉन्च किए गए हैं:

1. सभी श्रेणियों के प्रतिभागियों हेतु

पोर्टल: https://kashitamil.iitm.ac.in/
पंजीकरण समाप्त: 21 नवंबर 2025, शाम 8 बजे
चयन क्विज़: 23 नवंबर 2025, सुबह 10 बजे – शाम 5 बजे

2. तमिलनाडु भ्रमण हेतु चयनित 300 छात्रों के लिए

पोर्टल: https://kashitamil.bhu.edu.in/


शिवराज सिंह चौहान ने तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित ICAR–कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) का दौरा किया; “वन एग्रीकल्चर – वन नेशन – वन टीम” की भावना के तहत किसानों से किया संवाद

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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) – कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) का दौरा किया। यह दौरा “वन एग्रीकल्चर – वन नेशन – वन टीम” (One Agriculture – One Nation – One Team) की भावना के अंतर्गत भारत के कृषि क्षेत्र की एकता और समग्र प्रगति का प्रतीक रहा।


वेल्लोर में  शिवराज चौहान ने किसानों और ग्रामीण समुदाय के सदस्यों के साथ संवाद किया और उनसे प्रधान मंत्री धन धान्य कृषि योजना (PM-DDKY), राष्ट्रीय दलहन मिशन, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF), क्लस्टर फ्रंटलाइन डेमोंस्ट्रेशन ऑन पल्सेस (CFLD on Pulses), फर्मेंटेड ऑर्गेनिक मैन्योर (FOM/LFOM) तथा अन्य KVK संबंधित योजनाओं पर चर्चा की।

अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रगतिशील किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों (SHG) और ग्रामीण युवाओं से बातचीत की तथा क्षेत्र की कृषि उपलब्धियों की समीक्षा की। उन्होंने वेल्लोर कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा विकसित जंगली सूअर भगाने वाले उपकरण (Wild Boar Repellent) जैसी नवाचार तकनीक की सराहना की, जिसने किसानों को जंगली सूअरों से फसलों की सुरक्षा का व्यावहारिक समाधान प्रदान किया है। सीड हब और पल्सेस मिशन के अंतर्गत उच्च उत्पादक किस्में (VBN-8, VBN-10, VBN-11) सफलतापूर्वक प्रसारित की गई हैं। केंद्रीय मंत्री ने कृषि नवाचारों और मूल्यवर्धित उत्पादों की प्रदर्शनी भी देखी।

शिवराज चौहान ने किसानों से कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़ी योजनाओं पर फीडबैक लिया और उन्हें बेहतर कृषि प्रथाओं के बारे में मार्गदर्शन दिया। ‘चौपाल’ संवाद के दौरान उन्होंने विभिन्न योजनाओं पर जमीनी स्तर की प्रतिक्रिया प्राप्त की और आसपास के जिलों के किसानों से भी बातचीत की।

पहली ‘चौपाल’ में शिवराज चौहान ने तमिलनाडु के विरुधुनगर, शिवगंगा, तूतीकोरिन और रामनाथपुरम जिलों के किसानों से बातचीत की, जो प्रधान मंत्री धन धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत 11 केंद्रीय मंत्रालयों की 36 योजनाओं का एकीकरण किया जा रहा है, जिससे किसानों को समग्र लाभ प्राप्त हो सके। उन्होंने इन चार जिलों के KVK प्रमुखों के साथ योजना के अभिसरण की प्रगति की समीक्षा की। किसानों ने प्राकृतिक खेती, मुंडु मिर्च की खेती, दलहन एवं तिलहन CFLD और अन्य परियोजनाओं से संतुष्टि व्यक्त की।

दूसरी ‘चौपाल’ में शिवराज सिंह ने प्राकृतिक खेती और राष्ट्रीय दलहन मिशन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ की गई यह अनोखी पहल देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाएगी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु जैसे राज्य इस मिशन से उन्नत किस्मों, आधुनिक तकनीक और सुनिश्चित विपणन के माध्यम से अत्यधिक लाभान्वित होंगे। उन्होंने राष्ट्रीय दलहन अनुसंधान केंद्र, वंबन (TNAU) द्वारा विकसित उन्नत दलहन किस्मों की भी सराहना की।

कृषि से संबंधित प्रमुख घोषणाएँ

केंद्रीय मंत्री ने धैर्यपूर्वक किसानों की समस्याएँ सुनीं और आश्वासन दिया कि नारियल फसलों को प्रभावित करने वाले कीट और रोगों के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आम उत्पादन में अधिकता से उत्पन्न मूल्य गिरावट की समस्या को दूर करने के लिए मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित करने के प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने आश्वासन दिया कि तमिलनाडु के सभी पात्र किसानों को प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) से जोड़ा जाएगा ताकि अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जा सके।

तमिलनाडु के किसानों के प्रति प्रशंसा

अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने तमिलनाडु के मेहनती किसानों, उनकी संस्कृति और मूल्यों के प्रति गहरी प्रशंसा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे शीघ्र ही फिर से तमिलनाडु आएंगे ताकि किसानों से सीधे संवाद कर सकें और प्राकृतिक खेती सहित अन्य योजनाओं पर चर्चा कर सकें।

कार्यक्रम में तमिलनाडु के कृषि, उद्यानिकी एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक; TNAU के कुलपति डॉ. आर. तमिऴवेंदान; ICAR-ATARI हैदराबाद के निदेशक डॉ. शेख एन. मीरा; कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की संयुक्त सचिव इनिथा; राज्य उद्यानिकी आयुक्त कुमारवेल पांडियन, TNAU और TANUVAS के वरिष्ठ अधिकारी, ICAR तथा कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन और संबद्ध क्षेत्रों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
सैकड़ों किसान इस कार्यक्रम में शामिल हुए और केंद्र व राज्य स्तर पर कृषि विकास प्रयासों के प्रति उत्साह व्यक्त किया। ‘ड्रोन दीदी’ और ‘लखपति दीदी’ जैसे स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएँ भी इस संवाद में शामिल हुईं।

बंगाल की खाड़ी में संभावित चक्रवात की तैयारियों की समीक्षा के लिए कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (NCMC) की बैठक आयोजित

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भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने समिति को जानकारी दी कि दक्षिणपूर्व बंगाल की खाड़ी पर बना अवदाब पिछले छह घंटों में लगभग 7 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ा है और 25 अक्तूबर 2025 को प्रातः 11:30 बजे यह चेन्नई (तमिलनाडु) से लगभग 950 किमी पूर्व-दक्षिणपूर्व, विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश) से 960 किमी दक्षिणपूर्व, काकीनाडा (आंध्र प्रदेश) से 970 किमी दक्षिणपूर्व और गोपालपुर (ओडिशा) से 1030 किमी दक्षिण-दक्षिणपूर्व में केंद्रित था।

यह प्रणाली लगभग पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा में बढ़ते हुए 26 अक्तूबर तक एक गहरे अवदाब में और 27 अक्तूबर की सुबह तक दक्षिणपश्चिम व उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में एक चक्रवाती तूफान में बदलने की संभावना है। इसके बाद यह उत्तरपश्चिम और फिर उत्तर-उत्तरपश्चिम दिशा में बढ़ते हुए 28 अक्तूबर की सुबह तक एक भीषण चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इसके 28 अक्तूबर की शाम या रात को आंध्र प्रदेश तट (मछलीपट्टनम और कालिंगपट्टनम के बीच, काकीनाडा के आसपास) से 90–100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार (110 किमी प्रति घंटे की तेज़ झोंकों सहित) से टकराने की संभावना है।

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी के मुख्य सचिवों और ओडिशा के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने समिति को बताया कि संभावित प्रभावित क्षेत्रों में जनसुरक्षा हेतु सभी तैयारियाँ की जा चुकी हैं। आवश्यक राहत शिविर, निकासी की व्यवस्था और NDRF व SDRF की टीमें तत्पर रखी गई हैं। जिला नियंत्रण कक्ष सक्रिय हैं और लगातार निगरानी कर रहे हैं।

मछुआरों को 26 अक्तूबर से 29 अक्तूबर तक दक्षिणपश्चिम व मध्य बंगाल की खाड़ी, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, यानम (पुडुचेरी) और ओडिशा तट के समीप समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। जो मछुआरे समुद्र में हैं, उन्हें तुरंत तट पर लौटने के लिए कहा गया है।

बैठक में भाग लेने वाले केंद्रीय मंत्रालयों / विभागों ने बताया कि सभी मानक संचालन प्रक्रियाएँ (SOPs) लागू हैं, आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा चुके हैं और चक्रवात के प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए सभी एहतियाती कदम उठाए गए हैं।

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें तैयार हैं और 26 अक्तूबर से तैनात की जाएंगी। अतिरिक्त टीमें भी स्टैंडबाय पर रखी गई हैं। सेना, नौसेना, वायु सेना और भारतीय तटरक्षक बल की बचाव और राहत टीमें अपने जहाजों और विमानों सहित तैयार हैं। भारतीय तटरक्षक बल ने अब तक 900 से अधिक नौकाओं को सुरक्षित तट तक पहुँचाया है और शेष को भी सतर्क कर दिया गया है। गृह सचिव ने बताया कि गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और मौसम विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और सभी मंत्रालयों, विभागों, राज्य सरकारों और एजेंसियों के साथ समन्वय बनाए हुए हैं।

कैबिनेट सचिव ने तैयारियों की समीक्षा करते हुए जोर दिया कि लक्ष्य शून्य जनहानि का होना चाहिए और संपत्ति तथा अवसंरचना को न्यूनतम नुकसान पहुँचे। किसी प्रकार की क्षति होने पर आवश्यक सेवाओं को जल्द से जल्द बहाल किया जाए।

बैठक में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी के मुख्य सचिव, ओडिशा के अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह सचिव, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, मत्स्य, विद्युत, दूरसंचार, बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग विभागों के सचिव, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सचिव, सदस्य और प्रमुख, चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के महानिदेशक, भारतीय तटरक्षक बल के अतिरिक्त महानिदेशक, भारतीय मौसम विभाग और गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कानून और न्याय मंत्रालय ने जारी किए नोटरी (संशोधन) नियम, 2025 — चार राज्यों में नोटरी की अधिकतम संख्या बढ़ाई गई

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नई दिल्ली-कानून और न्याय मंत्रालय के कानूनी कार्य विभाग ने नोटरी (संशोधन) नियम, 2025 अधिसूचित किए हैं। यह अधिसूचना जी.एस.आर. 763(ई) के रूप में 17 अक्टूबर 2025 को जारी की गई है। इन नियमों के माध्यम से नोटरी नियम, 1956 में संशोधन किया गया है, जो नोटरी अधिनियम, 1952 की धारा 15 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए किया गया है।

इस संशोधन के तहत गुजरात, तमिलनाडु, राजस्थान और नागालैंड में राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त किए जा सकने वाले नोटरी की अधिकतम संख्या में वृद्धि की गई है।

संशोधित आंकड़े इस प्रकार हैं —

  • गुजरात : 2,900 से बढ़ाकर 6,000

  • तमिलनाडु : 2,500 से बढ़ाकर 3,500

  • राजस्थान : 2,000 से बढ़ाकर 3,000

  • नागालैंड : 200 से बढ़ाकर 400

संशोधन के अनुसार, ये नियम राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावी होंगे।

केंद्र सरकार ने यह कदम संबंधित राज्य सरकारों से प्राप्त अनुरोधों के आधार पर उठाया है। राज्यों ने यह मांग जनसंख्या वृद्धि, जिलों, तहसीलों और तालुकों की संख्या में वृद्धि तथा नोटरी सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए की थी।

इस संशोधन से आम नागरिकों को नोटरी सेवाओं की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी और राज्यों में कानूनी प्रक्रियाओं के सुचारू संचालन में सुविधा होगी।

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