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ओडिशा के राज्यपाल ने युवा संगम फेज़-VI के गुजरात छात्र प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात

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भुवनेश्वर- ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने युवा संगम फेज़-VI में भाग ले रहे गुजरात के छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ संवाद किया। यह प्रतिनिधिमंडल भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) अहमदाबाद के नेतृत्व में 22 मई 2026 को ओडिशा पहुंचा था। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) राउरकेला द्वारा आयोजित इस शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत छात्रों का 25 मई को गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका, सांस्कृतिक समझ विकसित करने के महत्व और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। इस संवाद के दौरान छात्रों को नेतृत्व, नागरिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय एकीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन मिला।

अपने दौरे के दौरान छात्र प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक, शैक्षणिक और विकासात्मक विरासत को करीब से जाना। छात्रों ने कोणार्क सूर्य मंदिर और मां समलेश्वरी मंदिर का भ्रमण कर राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को समझा। इसके अलावा उन्होंने स्थानीय बुनकरों और कारीगरों से मुलाकात कर ओडिशा की प्रसिद्ध वस्त्र परंपरा के बारे में जानकारी प्राप्त की। छात्रों ने मुंडा जनजाति समुदाय के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक प्रस्तुतियों में भी भाग लिया।

प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान द्वारा आयोजित एक विशेष सत्र में भाग लिया, जहां भारत की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक समरसता में उसकी भूमिका पर चर्चा की गई। छात्रों ने NIT राउरकेला FTBI लैब, राउरकेला स्टील प्लांट, हीराकुंड बांध और बिरसा मुंडा हॉकी स्टेडियम का भी दौरा किया। इन यात्राओं के माध्यम से उन्हें ओडिशा की नवाचार क्षमता, औद्योगिक विकास, इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और खेल अवसंरचना की जानकारी मिली।

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छात्रों ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में भाग लिया और पौधारोपण किया। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और सतत विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को भी समझा।

30 मई 2026 को आयोजित समापन समारोह के साथ यह यात्रा संपन्न हुई। युवा संगम के तहत आयोजित यह कार्यक्रम छात्रों के लिए सीखने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का एक यादगार अनुभव साबित हुआ।

युवा संगम चरण-VI: हरियाणा के विद्यार्थियों का त्रिपुरा दौरा, सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान को मिला बढ़ावा

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त्रिपुरा के राज्यपाल इंद्र सेना रेड्डी नल्लू ने 26 मई 2026 को अगरतला स्थित लोक भवन में हरियाणा के छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। यह प्रतिनिधिमंडल ‘युवा संगम चरण-VI’ कार्यक्रम के तहत त्रिपुरा के दौरे पर आया हुआ था।

छात्रों का स्वागत और अनुभव

यह प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कुरुक्षेत्र ने किया, सबसे पहले राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, अगरतला पहुंचा, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

राज्यपाल से मुलाकात के दौरान छात्रों ने त्रिपुरा की प्रशासनिक व्यवस्था, शासन की प्रमुख पहल और विकास प्राथमिकताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की। इस बातचीत से उन्हें राज्य की सांस्कृतिक विविधता और संस्थागत ढांचे को समझने का अवसर मिला।

सांस्कृतिक और शैक्षणिक भ्रमण

कार्यक्रम के तहत छात्रों ने त्रिपुरा के कई ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक स्थलों का दौरा किया। उन्होंने राज्य की समृद्ध परंपराओं, विरासत और विकास यात्रा को नजदीक से जाना।

इसके अलावा, छात्रों ने त्रिपुरा के प्रसिद्ध मंदिरों का भी दर्शन किया, जहां उन्हें राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव हुआ।

‘युवा संगम’ पहल

Yuva Sangam Phase VI की शुरुआत उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय द्वारा की गई है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक सद्भाव और भावनात्मक एकीकरण को बढ़ावा देना है।

यह कार्यक्रम 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच युवाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से भारत की विविधता, नवाचार और राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करने पर केंद्रित है।

INS सुदर्शिनी ने फ्रांस में बिखेरा जलवा, भारत की समुद्री ताकत और संस्कृति का प्रदर्शन

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भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप INS सुदर्शिनी 7 अप्रैल 2026 को फ्रांस के सेट (Sète) बंदरगाह से रवाना हुआ, जहां उसने प्रतिष्ठित ‘Escale à Sète’ समुद्री महोत्सव में सफल भागीदारी दर्ज की। यह महोत्सव भूमध्यसागर के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय समुद्री आयोजनों में से एक है, जिसमें दुनिया भर के जहाज शामिल होते हैं। इस दौरान सुदर्शिनी ने विभिन्न समुद्री गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, वर्कशॉप और खेल प्रतियोगिताओं में सक्रिय भाग लेकर भारत की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। खास आकर्षण फ्रांसीसी नौसेना की 400वीं वर्षगांठ पर आयोजित हेरिटेज सिटी परेड रही, जिसमें भारतीय नौसेना के मार्चिंग दल ने ऐतिहासिक सड़कों पर तिरंगा लहराते हुए अनुशासन और एकता का शानदार प्रदर्शन किया।

इस यात्रा के दौरान INS सुदर्शिनी की रोइंग टीम ने Jeux Maritimes प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। महोत्सव के समापन पर ग्रांडे परेड डे डिपार में जहाज ने अपने पाल खोलकर आकर्षक दृश्य प्रस्तुत किया। बंदरगाह प्रवास के दौरान हजारों लोगों ने जहाज का दौरा किया, जिससे भारत और फ्रांस के बीच सांस्कृतिक और समुद्री संबंध और मजबूत हुए। इस दौरान भारतीय राजदूत संजीव सिंगला द्वारा जहाज पर आयोजित स्वागत समारोह में कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि शामिल हुए। अब INS सुदर्शिनी ‘Lokayan 26’ मिशन के तहत कैसाब्लांका की ओर बढ़ रही है, जहां वह भारत के वैश्विक समुद्री संबंधों को और सुदृढ़ करेगी।



भारतीय रेलवे तमिलनाडु और काशी के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए काशी तामिल संगम 4.0 के लिए चलाए सात विशेष ट्रेनें

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भारतीय रेलवे ने काशी तामिल संगम 4.0 में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों की सुविधा के लिए कन्नियाकुमारी, चेन्नई, कोयम्बटूर और बनारस के बीच सात विशेष ट्रेनों की श्रृंखला संचालित की है। इन विशेष ट्रेनों का उद्देश्य सहज यात्रा, लंबी दूरी की आरामदायक कनेक्टिविटी और प्रतिभागियों के लिए समय पर आगमन सुनिश्चित करना है, जो बहु-दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

पहली ट्रेन 29 नवंबर 2025 को कन्नियाकुमारी से रवाना हुई। इसके बाद आज चेन्नई से अतिरिक्त विशेष ट्रेन चलायी गई। आगामी प्रस्थान तिथियाँ हैं:

  • कोयम्बटूर: 3 दिसंबर

  • चेन्नई: 6 दिसंबर

  • कन्नियाकुमारी: 7 दिसंबर

  • कोयम्बटूर: 9 दिसंबर

  • चेन्नई: 12 दिसंबर 2025

साथ ही, भारतीय रेलवे ने बनारस से समय पर वापसी की सुविधा के लिए विशेष रिटर्न सेवाओं की व्यवस्था की है। रिटर्न ट्रेनें निम्नानुसार हैं:

  • कन्नियाकुमारी: 5 दिसंबर

  • चेन्नई: 7 दिसंबर

  • कोयम्बटूर: 9 दिसंबर

  • चेन्नई: 11 दिसंबर

  • कन्नियाकुमारी: 13 दिसंबर

  • कोयम्बटूर: 15 दिसंबर

  • चेन्नई: 17 दिसंबर 2025

काशी तामिल संगम 4.0 का आयोजन आज से शुरू हुआ और यह तमिलनाडु और काशी के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों को जारी रखता है। इस संस्करण का मुख्य विषय है “चलो तमिल सीखें – तमिल कारकलम”, जो काशी और तमिलनाडु के बीच भाषाई और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करता है। इसमें काशी के छात्रों के लिए तमिल अध्ययन कार्यक्रम, तमिलनाडु के स्कूलों में अध्ययन यात्रा और तेनकसी से काशी तक आस्तिक वाहन यात्रा जैसे पहल शामिल हैं।

काशी तामिल संगम 4.0 ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संदेश को समर्पित है, जो लोगों को अपनी संस्कृति से परे अन्य संस्कृतियों को समझने और सराहने के लिए प्रेरित करता है। इस कार्यक्रम का संचालन शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है, जबकि आईआईटी मद्रास और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय प्रमुख ज्ञान भागीदार हैं। इसमें रेलवे सहित दस मंत्रालयों की भागीदारी है, जो छात्रों, कलाकारों, विद्वानों, आध्यात्मिक नेताओं, शिक्षकों और सांस्कृतिक प्रैक्टिशनरों को जोड़ते हुए दोनों क्षेत्रों के बीच विचार, सांस्कृतिक प्रथाओं और पारंपरिक ज्ञान का आदान-प्रदान सुनिश्चित करता है।

इन सात विशेष ट्रेनों के संचालन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध कार्यक्रम के माध्यम से, भारतीय रेलवे देश के विविध क्षेत्रों को जोड़ने और तमिलनाडु और काशी के बीच साझा विरासत को सुदृढ़ करने में एक केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।


काशी तमिल संगमम 4.0: भाषा, संस्कृति और सभ्यतागत एकता का नया अध्याय

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • काशी तमिल संगमम 4.0 की शुरुआत 2 दिसंबर, 2025 से हो रही है, जो तमिलनाडु और काशी के सांस्कृतिक व सभ्यता संबंधों को आगे बढ़ाता है।

  • इस संस्करण का मुख्य आधार “लेट अस लर्न तमिल – तमिल कार्कालम” है, जिसके तहत तमिल भाषा सीखने और भाषाई एकता पर विशेष फोकस रहेगा।

  • प्रमुख कार्यक्रमों में तमिल कार्कालम (वाराणसी के विद्यालयों में तमिल शिक्षण), तमिल कर्पोम (काशी क्षेत्र के 300 छात्रों के लिए तमिल सीखने हेतु अध्ययन भ्रमण), और सेज अगस्त्य व्हीकल एक्सपीडिशन (तेनकासी से काशी तक सभ्यतागत मार्ग का अनुसरण) शामिल हैं।

  • इस वर्ष का संगमम रामेश्वरम में वैलेडिक्टरी समारोह के साथ सम्पन्न होगा, जो काशी से तमिलनाडु तक की सांस्कृतिक यात्रा का प्रतीकात्मक समापन होगा।

प्राचीन बंधन की पुनर्स्मृति: काशी तमिल संगमम क्या है?

स्रोत: काशी तमिल संगमम वेबसाइट

काशी तमिल संगमम एक ऐसे संबंध का उत्सव है, जो सदियों से भारतीय चेतना में समाहित रहा है। तमिलनाडु और काशी के बीच होने वाली यात्राएँ केवल भौगोलिक नहीं थीं, बल्कि विचारों, दर्शन, भाषाओं और परंपराओं के आदान-प्रदान की गहन सांस्कृतिक यात्राएँ थीं। संगमम इसी जीवंत ऐतिहासिक संबंध को आधुनिक समय में पुनर्जीवित करता है।

2022 में आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान शुरू हुआ यह कार्यक्रम भारत की विविध सांस्कृतिक धारा को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास है। यह पहल एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना से प्रेरित है, जो लोगों को विभिन्न संस्कृतियों को समझने और अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित और IIT मद्रास तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के ज्ञान साझेदारों के रूप में, संगमम में रेलवे, संस्कृति, पर्यटन, वस्त्र, युवा मामले एवं खेल मंत्रालय सहित कई मंत्रालयों और उत्तर प्रदेश सरकार की सक्रिय भागीदारी रहती है।

प्रत्येक संस्करण में तमिलनाडु के छात्र, शिक्षक, कारीगर, विद्वान, आध्यात्मिक नेता, महिला समूह और सांस्कृतिक प्रतिनिधि काशी पहुंचते हैं तथा वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या में आयोजित कार्यक्रमों, दर्शन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और संवादों में भाग लेते हैं।

काशी तमिल संगमम 4.0: “तमिल कार्कालम – लेट अस लर्न तमिल”

2 दिसंबर 2025 से प्रारंभ होने वाला 4.0 संस्करण अपने पूर्व संस्करणों की भावना को आगे ले जाता है, परंतु इस बार इसका केंद्र भाषाई शिक्षा और युवा सहभागिता है।

इस वर्ष का विषय “लेट अस लर्न तमिल – तमिल कार्कालम” सभी भारतीय भाषाओं को एक साझा "भारतीय भाषा परिवार" का हिस्सा मानते हुए भाषाई विविधता में एकता का संदेश देता है। यह संस्करण उत्तर भारत के छात्रों के लिए तमिल भाषा सीखने और तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के नए अवसर प्रदान करता है।

तमिलनाडु से 1,400 से अधिक प्रतिनिधि काशी आएंगे, जिनमें विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, पत्रकार, किसान, कारीगर, पेशेवर, महिलाएँ और आध्यात्मिक विद्वान शामिल होंगे।

काशी तमिल संगमम 4.0: प्रमुख पहलें

1. उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को तमिल सिखाना – “तमिल कार्कालम”

  • 50 तमिल शिक्षक (DBHPS प्रचारकों सहित) वाराणसी के 50 स्कूलों में 2–15 दिसंबर 2025 के बीच तैनात रहेंगे।

  • प्रत्येक शिक्षक कक्षा 30 छात्रों को तमिल बोलचाल, उच्चारण और मूलाक्षरों का प्रशिक्षण देंगे।

  • कुल 1,500 विद्यार्थियों को आधारभूत तमिल शिक्षा मिलेगी।

  • BHU का तमिल विभाग, CIIL मैसूरु, IRCTC और वाराणसी प्रशासन इसके समन्वय में शामिल हैं।

यह पहल तमिल शिक्षण को तमिलनाडु के बाहर विस्तृत करने का महत्वपूर्ण कदम है।

2. तमिलनाडु यात्रा के दौरान तमिल सीखना – स्टडी टूर कार्यक्रम

  • उत्तर प्रदेश के 300 कॉलेज छात्र 10 बैचों में तमिलनाडु का अध्ययन दौरा करेंगे।

  • CICT, चेन्नई में ओरिएंटेशन के बाद वे तमिल भाषा और संस्कृति पर कक्षाओं में भाग लेंगे।

  • प्रमुख संस्थान (IIT मद्रास, शास्त्र यूनिवर्सिटी, पांडिचेरी विवि, कांचीपुरम के संस्थान आदि) छात्रों की मेजबानी करेंगे।

  • प्रत्येक छात्र को प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।

यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के युवाओं को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से तमिल भाषा व संस्कृति से परिचित कराता है।

3. सेज अगस्त्य व्हीकल एक्सपीडिशन (SAVE)

  • 2 दिसंबर 2025 को तेनकासी से शुरू होकर 10 दिसंबर 2025 को काशी पहुंचेगा।

  • यह यात्रा ऋषि अगस्त्य के पौराणिक मार्ग पर आधारित है।

  • चेरी, चोल, पांड्य, पल्लव, चालुक्य और विजयनगर साम्राज्यों की ऐतिहासिक कड़ियों को रेखांकित करेगी।

  • तमिल साहित्य, सिद्ध चिकित्सा और साझा विरासत पर भी प्रकाश डालेगी।

यह यात्रा तमिलनाडु और काशी के बीच प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को सम्मानित करती है।

काशी तमिल संगमम: 1.0 से 4.0 तक की यात्रा

KTS 1.0 (2022)

  • 2,500+ प्रतिभागी

  • काशी, प्रयागराज और अयोध्या के व्यापक दर्शन और संवाद

  • सांस्कृतिक कार्यक्रम, शैक्षणिक सत्र और प्रदर्शनियाँ

KTS 2.0 (2023)

  • 1,435 प्रतिनिधि

  • PM के भाषण का पहली बार रियल-टाइम तमिल अनुवाद

  • 2 लाख से अधिक आगंतुकों वाली बड़ी प्रदर्शनी

  • डिजिटल आउटरीच में 8.5 करोड़ की पहुंच

KTS 3.0 (2025)

  • ऋषि अगस्त्य पर केंद्रित प्रदर्शनियाँ और सत्र

  • महाकुंभ 2025 और राम मंदिर, अयोध्या के दर्शन

  • NEP 2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान प्रणाली आधारित कार्यक्रम

काशी–तमिल बंध को सुदृढ़ करना: एक जीवंत सांस्कृतिक सततता

चारों संस्करणों ने दिखाया है कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान तभी प्रभावी होता है, जब वह अनुभव और सहभागिता पर आधारित हो।
KTS 4.0 इस यात्रा को नई दिशा देता है—भाषाई सीखने, युवाओं की सहभागिता और द्विपक्षीय सांस्कृतिक समझ को केंद्र में रखकर।

यह पहल एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को मूर्त रूप देती है, जहाँ भाषाएँ, परंपराएँ और विचार एकता के सूत्र में जुड़ते हैं।



काशी तमिल संगम 4.0: तमिलनाडु और काशी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का चौथा संस्करण

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वाराणसी, 29 नवंबर 2025: तमिलनाडु और काशी के सभ्यतागत और ऐतिहासिक संबंधों को समर्पित पहल काशी तमिल संगम का चौथा संस्करण 2 से 15 दिसंबर 2025 तक वाराणसी में आयोजित होगा।

पहले ट्रेन का शुभारंभ

आज (29 नवंबर 2025) कन्याकुमारी से पहले बैच की यात्रा शुरू हुई, जिसमें 45 प्रतिनिधि शामिल हैं। त्रिची से 86 और चेन्नई से 87 प्रतिनिधियों के जुड़ने के बाद इस पहले बैच में कुल 216 प्रतिभागी होंगे। इस समूह में शामिल हैं:

  • 50 तमिल साहित्य विशेषज्ञ

  • 54 सांस्कृतिक विद्वान

  • छात्र, शिक्षक, शिल्पकार, शास्त्रीय गायक और आध्यात्मिक ग्रंथों के शिक्षक एवं छात्र

कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन पर स्थानीय विधायक एम.आर. गांधी और जनता ने प्रतिनिधियों को विदाई दी।

उद्घाटन और मुख्य कार्यक्रम

काशी तमिल संगम 4.0 का औपचारिक उद्घाटन 2 दिसंबर 2025 को NaMo घाट, वाराणसी में होगा। इस वर्ष का आयोजन कार्तिकेय दीपम (4 दिसंबर), तमिलनाडु के प्रमुख त्योहार के समय संपन्न हो रहा है।

इस कार्यक्रम में 1,500 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे, जो भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को समझने और साझा करने के लिए ज्ञान-सत्रों में भाग लेंगे। आठ दिवसीय यात्रा के दौरान प्रतिभागी वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों जैसे प्रयागराज और अयोध्या का दौरा करेंगे। इसके अलावा वे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों जैसे:

  • काशी विश्वनाथ मंदिर

  • NaMo घाट

  • हनुमान घाट

  • बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय

  • सारनाथ

  • अयोध्या मंदिर

का भ्रमण भी करेंगे।

प्रमुख पहल और शिक्षा कार्यक्रम

  • “एक भारत श्रेष्ठ भारत” अभियान के तहत चार प्रमुख सहयोगी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

  • इस वर्ष का विषय “चलो तमिल सीखें – तमिल कर्कलम” है, जो यह संदेश देता है कि सभी भारतीय भाषाएँ एक ही परिवार की सदस्य हैं।

  • संत अगस्त्य वाहन यात्रा, तेनकसी (तमिलनाडु) से काशी (उत्तर प्रदेश) तक 2 दिसंबर को शुरू होकर 12 दिसंबर को वाराणसी में समाप्त होगी। यह यात्रा आदि वीर पराक्रमा पांडियन की ऐतिहासिक यात्रा का स्मरण करती है, जिन्होंने तमिलनाडु से काशी तक सांस्कृतिक एकता का संदेश फैलाया और शिव मंदिर की स्थापना की।

  • “उत्तर प्रदेश के छात्रों को तमिल पढ़ाना” कार्यक्रम के तहत, यूपी के छात्र तमिलनाडु आएंगे और उन्हें तमिल भाषा की समृद्धि से परिचित कराया जाएगा। इसमें 10 बैचों में 30-30 कॉलेज छात्र शामिल होंगे।

उद्देश्य और महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल काशी तमिल संगम का उद्देश्य है:

  • तमिलनाडु और काशी के बीच स्थायी सांस्कृतिक और लोगों से लोगों का संबंध मजबूत करना

  • इस सरकारी कार्यक्रम में भागीदारी की बढ़ती उत्सुकता को पूरा करना

  • तमिल भाषा और संस्कृति को भारत के अन्य हिस्सों तक पहुँचाना और प्राचीन तमिल ग्रंथों के प्रचार को बढ़ावा देना

यह आयोजन भारतीय विविधता और संस्कृति के सांस्कृतिक संवाद और एकता का प्रतीक है।



जापान पर केंद्रित 56वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में ‘टाइगर’ और ‘सीसाइड सेरेन्डिपिटी’ का संवाद

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56वें अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) में देश विशेष के रूप में जापान ने इस वर्ष विशेष ध्यान आकर्षित किया। महोत्सव में जापान की दो प्रमुख फिल्मों, ‘टाइगर’ और ‘सीसाइड सेरेन्डिपिटी’ की टीमों ने मीडिया के साथ संवाद करते हुए अपनी रचनात्मक यात्रा, प्रेरणाएँ और अंतरराष्ट्रीय मंच पर जापान का प्रतिनिधित्व करने के महत्व को साझा किया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत दोनों फिल्मों के ट्रेलरों के प्रदर्शन से हुई, जिसके बाद ‘टाइगर’ की टीम ने फिल्म का परिचय मीडिया के सामने प्रस्तुत किया।

‘टाइगर’ 35 वर्षीय एक मसाज चिकित्सक की कहानी बताती है, जो संपत्ति विवाद को लेकर अपनी बहन के साथ संघर्ष में उलझता है और नैतिक सीमाओं को चुनौती देता है। फिल्म LGBTQ+ समुदाय के सामने आने वाली पहचान, अधिकार और सामाजिक स्वीकार्यता की चुनौतियों को भी उजागर करती है। निर्देशक अंशुल चौहान ने फिल्म बनाने में आई भावनात्मक और रचनात्मक जटिलताओं को साझा किया और बताया कि गैर-LGBTQ निर्माता के रूप में संवेदनशील विषयों को प्रस्तुत करना जिम्मेदारी और सम्मान की मांग करता है।

‘सीसाइड सेरेन्डिपिटी’ के कार्यकारी निर्माता टोमोमी योशिमुरा ने भारतीय दर्शकों द्वारा प्राप्त उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया के लिए आभार व्यक्त किया। फिल्म एक शांत तटीय शहर में घटित होती है, जहां कलाकारों के आगमन और असामान्य घटनाओं से समुदाय की जिंदगी प्रभावित होती है। फिल्म बच्चों और वयस्कों के बीच अंतर पीढ़ियों की समझ को बढ़ाने और प्रेम व संबंध की भावना को दर्शाती है।

दोनों टीमों ने उम्मीद जताई कि उनकी फिल्में दर्शकों के दिलों में लंबे समय तक असर छोड़ेंगी और महोत्सव में व्यापक सराहना पाएंगी।

IFFI के बारे में:

साल 1952 में शुरू हुए IFFI, दक्षिण एशिया का सबसे पुराना और बड़ा फिल्म महोत्सव है। इसे राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC), सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार और गोवा राज्य सरकार के एंटरटेनमेंट सोसाइटी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है। IFFI अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, मास्टरक्लास, ट्रिब्यूट और WAVES फिल्म बाजार जैसी गतिविधियों के माध्यम से वैश्विक सिनेमा की विविधता को प्रस्तुत करता है।

इस वर्ष महोत्सव 20–28 नवंबर के बीच गोवा के शानदार तटीय वातावरण में आयोजित किया गया।

भारत से रूस तक: काल्मिकिया में पहली बार भगवान बुद्ध की पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी

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राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली से भगवान बुद्ध की पवित्र अवशेष पहली बार रूस के काल्मिकिया गणराज्य में प्रदर्शनी के लिए यात्रा करेंगे, और इसके साथ वरिष्ठ भारतीय और अंतरराष्ट्रीय भिक्षुओं का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल जाएगा, ताकि वहां के मुख्यतः बौद्ध आबादी द्वारा पूजा और आशीर्वाद संभव हो सके।

भगवान बुद्ध की पवित्र अवशेष की कास्केट

संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध महासंघ (IBC), राष्ट्रीय संग्रहालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के सहयोग से पहली बार भगवान बुद्ध की पवित्र अवशेष की प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। यह अवशेष राष्ट्रीय संग्रहालय में संरक्षित हैं और 3रे अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध फोरम के दौरान रूस के काल्मिकिया गणराज्य की राजधानी एलिस्टा में 24-28 सितंबर, 2025 को प्रदर्शित की जाएंगी।

वोटिव स्तूप, गौतम बुद्ध के जीवन के दृश्य दर्शाते हुए

लगभग 10वीं शताब्दी ईस्वी
पाली काल, नालंदा, बिहार
कांस्य, चौड़ाई: 30 सेमी, ऊंचाई: 20 सेमी
संग्रह संख्या: 49.129 (राष्ट्रीय संग्रहालय संग्रह)

यह कलाकृति काल्मिकिया, रूस में प्रदर्शनी हॉल में प्रदर्शित की जाएगी।

फोरम का मुख्य आकर्षण, जिसका थीम है “नए सहस्राब्दी में बौद्ध धर्म,” भारत से शाक्यमुनि की पवित्र अवशेष, IBC और राष्ट्रीय संग्रहालय द्वारा आयोजित चार प्रदर्शनी, और तीन विशेष शैक्षणिक व्याख्यान होंगे। अवशेष एलिस्टा, काल्मिकिया की मुख्य बौद्ध मठ, गेडेन शेड्दुप चॉइकोर्लिंग मठ में प्रतिष्ठित किए जाएंगे, जिसे "शाक्यमुनि बुद्ध का गोल्डन एबोड" भी कहा जाता है। यह एक प्रमुख तिब्बती बौद्ध केंद्र है, जिसे 1996 में जनता के लिए खोला गया था और यह काल्मिक स्टेप पर स्थित है।

पहले, काल्मिकिया के वरिष्ठ भिक्षुओं का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भारत आया था और उन्होंने संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत और संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू से पवित्र अवशेष को उनके क्षेत्र में प्रतिष्ठित करने का अनुरोध किया था।

इस अवसर पर दो समझौता ज्ञापन (MoU) भी हस्ताक्षरित किए जाएंगे—एक रूसी बौद्ध केंद्रीय प्रशासन और अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध महासंघ के बीच, और दूसरा नालंदा विश्वविद्यालय के साथ।

पवित्र अवशेष को अत्यंत श्रद्धा के साथ, वरिष्ठ भिक्षुओं की उपस्थिति में, धार्मिक प्रोटोकॉल का पालन करते हुए विशेष भारतीय वायु सेना के विमान द्वारा काल्मिकिया ले जाया जाएगा।

उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य करेंगे, और अन्य अधिकारी भी पवित्र अवशेष के साथ रहेंगे। IBC प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व महानुभाव H.H. 43वें सक्या त्रिजिन रिनपोचे, सक्या ऑर्डर ऑफ तिब्बती बौद्ध धर्म के प्रमुख, H.E. 13वें कुंडेलिंग तकसक रिनपोचे, द्रेपुंग गोमांग मठ, H.E. 7वें योंग्जिन लिंग रिनपोचे और अन्य 17 वरिष्ठ भिक्षु करेंगे। भारत के तीन वरिष्ठ-most भिक्षु स्थानीय भक्तों के लिए आशीर्वाद सत्र देंगे।

राष्ट्रीय संग्रहालय और IBC तीन प्रदर्शनी आयोजित करेंगे:

  1. बुद्ध के जीवन की "चार महान घटनाएँ" दर्शाती मूर्तियाँ और कला कार्य

  2. शाक्यवंश की पवित्र धरोहर - पिपरहवा, प्राचीन कपिलवस्तु से अवशेषों का उत्खनन और प्रदर्शनी

  3. "द आर्ट ऑफ स्टिलनेस - राष्ट्रीय संग्रह से बौद्ध कला," नई दिल्ली।

विशेष कलाकार वासुदेव कामत, पद्मश्री अपने कला कार्यों को भी प्रदर्शित करेंगे।

फोरम में 35 से अधिक देशों के आध्यात्मिक नेता और अतिथि भाग लेंगे। IBC रूसी भाषा में AI चैटबॉट "नोरबु - द कल्याण मित्र" का प्रदर्शन भी करेगा, जो बुद्ध धर्म की जानकारी प्रदान करता है।

साथ ही, IBC और संस्कृति मंत्रालय के पांडुलिपि विभाग द्वारा होली ‘कांजुर’ (मंगोलियाई धार्मिक ग्रंथों का 108-खंड सेट, जो तिब्बती से अनुवादित है) नौ बौद्ध संस्थानों और एक विश्वविद्यालय को प्रदान किया जाएगा।

अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध फोरम एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय आयोजन है, जो आध्यात्मिक संवाद और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जा रहा है, क्योंकि काल्मिकिया यूरोप का एकमात्र बौद्ध गणराज्य है।

काल्मिकिया की जानकारी:

  • यह क्षेत्र विस्तृत घास के मैदानों और रेगिस्तानी क्षेत्रों से युक्त है।

  • यूरोप के पश्चिमी हिस्से में स्थित, कैस्पियन सागर से सटा है।

  • काल्मिक्स ओइराट मंगोलों के वंशज हैं, जो 17वीं शताब्दी में पश्चिमी मंगोलिया से आए थे।

  • ये यूरोप में महायान बौद्ध धर्म का पालन करने वाली एकमात्र जातीय समूह हैं।

पिछले अवशेष प्रदर्शन:

  • बुद्ध के पवित्र अवशेष मंगोलिया, थाईलैंड और वियतनाम ले जाए जा चुके हैं।

  • पिपरहवा अवशेष 2022 में मंगोलिया गए।

  • सांची के अवशेष 2024 में थाईलैंड और 2025 में सर्नाथ के अवशेष वियतनाम गए।

  • रूस के लिए ले जाए जा रहे अवशेष राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली के "बौद्ध गैलरी" में संरक्षित हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2025 में पवित्र ज्वेल अवशेषों की भारत में वापसी का जश्न मनाया। उन्होंने कहा कि यह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है कि भगवान बुद्ध के पिपरहवा अवशेष 127 वर्षों के बाद भारत लौट आए हैं।

पिपरहवा उत्खनन का संक्षिप्त इतिहास:

  • 1898 में विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने पिपरहवा (उत्तर प्रदेश) में पांच छोटे वास खोजे जिनमें अस्थि और आभूषण थे।

  • 1971-77 में K.M. श्रीवास्तव की टीम ने फिर से उत्खनन किया और 4वीं या 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व के अवशेष पाए।

  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने पिपरहवा को कपिलवस्तु के रूप में मान्यता दी।


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