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ओडिशा के राज्यपाल ने युवा संगम फेज़-VI के गुजरात छात्र प्रतिनिधिमंडल से की मुलाकात

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भुवनेश्वर- ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने युवा संगम फेज़-VI में भाग ले रहे गुजरात के छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ संवाद किया। यह प्रतिनिधिमंडल भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) अहमदाबाद के नेतृत्व में 22 मई 2026 को ओडिशा पहुंचा था। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) राउरकेला द्वारा आयोजित इस शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत छात्रों का 25 मई को गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका, सांस्कृतिक समझ विकसित करने के महत्व और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम देश के विभिन्न राज्यों के युवाओं को एक-दूसरे की संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। इस संवाद के दौरान छात्रों को नेतृत्व, नागरिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय एकीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर मार्गदर्शन मिला।

अपने दौरे के दौरान छात्र प्रतिनिधिमंडल ने ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक, शैक्षणिक और विकासात्मक विरासत को करीब से जाना। छात्रों ने कोणार्क सूर्य मंदिर और मां समलेश्वरी मंदिर का भ्रमण कर राज्य की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को समझा। इसके अलावा उन्होंने स्थानीय बुनकरों और कारीगरों से मुलाकात कर ओडिशा की प्रसिद्ध वस्त्र परंपरा के बारे में जानकारी प्राप्त की। छात्रों ने मुंडा जनजाति समुदाय के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पारंपरिक प्रस्तुतियों में भी भाग लिया।

प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान द्वारा आयोजित एक विशेष सत्र में भाग लिया, जहां भारत की भाषाई विविधता और सांस्कृतिक समरसता में उसकी भूमिका पर चर्चा की गई। छात्रों ने NIT राउरकेला FTBI लैब, राउरकेला स्टील प्लांट, हीराकुंड बांध और बिरसा मुंडा हॉकी स्टेडियम का भी दौरा किया। इन यात्राओं के माध्यम से उन्हें ओडिशा की नवाचार क्षमता, औद्योगिक विकास, इंजीनियरिंग उत्कृष्टता और खेल अवसंरचना की जानकारी मिली।

पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छात्रों ने ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में भाग लिया और पौधारोपण किया। इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और सतत विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को भी समझा।

30 मई 2026 को आयोजित समापन समारोह के साथ यह यात्रा संपन्न हुई। युवा संगम के तहत आयोजित यह कार्यक्रम छात्रों के लिए सीखने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का एक यादगार अनुभव साबित हुआ।

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ फिलाटेलिक प्रदर्शनी का आयोजन, डाक टिकटों के जरिए दिखाई गई भारत की एकता और लोकतंत्र की झलक

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नई दिल्ली- भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा प्रधानमंत्री संग्रहालय के सहयोग से “एक भारत, श्रेष्ठ भारत: डाक टिकटों के माध्यम से भारत की एकता और लोकतंत्र का उत्सव” शीर्षक से भव्य फिलाटेलिक प्रदर्शनी का आयोजन 14 से 17 अप्रैल 2026 तक किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री  ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने किया।

उद्घाटन के बाद  ज्योतिरादित्य एम. सिंधियाने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और वहां उपस्थित डाक टिकट संग्राहकों (फिलाटेलिस्ट), डिजाइनरों और विशेषज्ञों से संवाद किया। उन्होंने भारत की समृद्ध डाक विरासत को संरक्षित और बढ़ावा देने में उनके योगदान की सराहना की।

डाक टिकटों में दिखी भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत

इस प्रदर्शनी में भारत की विविध सांस्कृतिक धरोहर, ऐतिहासिक घटनाओं और डाक परंपराओं को दर्शाने वाले डाक टिकटों का विशेष संग्रह प्रदर्शित किया गया है।
इसमें राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़े विषय प्रमुख आकर्षण हैं, जो दर्शकों को एक ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक अनुभव प्रदान करते हैं।

केंद्रीय मंत्री का संबोधन

अपने संबोधन में  ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने कहा कि यह आयोजन डाक विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने प्रधानमंत्री संग्रहालय की टीम को सहयोग के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि स्वतंत्रता से लेकर अमृत काल और आगे शताब्दी काल तक भारत की यात्रा में डाक विभाग की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है और आगे भी बनी रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि डाक विभाग और संग्रहालय मिलकर देशभर में ऐसी प्रदर्शनी आयोजित करेंगे, जिससे भारत की समृद्ध विरासत को और व्यापक रूप से प्रस्तुत किया जा सके।

विशेष चित्र पोस्टकार्ड जारी

इस अवसर पर तीन विशेष चित्र पोस्टकार्ड सेट जारी किए गए, जो निम्न अवसरों को समर्पित हैं:

  • प्रधानमंत्री संग्रहालय का चौथा स्थापना दिवस

  • डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर की जयंती (14 अप्रैल 2026)

  • भारतीय संविधान

 एमओयू के जरिए सहयोग को नई दिशा

कार्यक्रम के दौरान डाक विभाग और प्रधानमंत्री संग्रहालय के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते का उद्देश्य सांस्कृतिक और डाक विरासत को बढ़ावा देना है। इसके तहत देशभर में प्रदर्शनी, जागरूकता कार्यक्रम और संयुक्त रूप से डाक उत्पाद तैयार किए जाएंगे। साथ ही संग्रहालय में इंडिया पोस्ट का विशेष काउंटर स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है।

प्रधानमंत्री पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन

अपने दौरे के दौरान  ज्योतिरादित्य एम. सिंधियाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आधारित विशेष प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें उनके जीवन, नेतृत्व और प्रमुख योजनाओं को प्रदर्शित किया गया है।

निष्कर्ष

यह फिलाटेलिक प्रदर्शनी न केवल भारत की डाक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है, बल्कि देश की एकता, लोकतंत्र और विविधता को भी सशक्त रूप से प्रस्तुत करती है। यह पहल ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने माधवपुर मेले के लिए दी शुभकामनाएँ, बताया संस्कृति में इसका महत्व

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प्रधान मंत्री, नरेंद्र मोदी ने गुजरात के पोर्बंदर में चल रहे माधवपुर मेला के लिए शुभकामनाएँ दी हैं। मोदी ने कहा कि यह जीवंत उत्सव हमारी शानदार संस्कृति को उजागर करता है और साथ ही गुजरात और पूर्वोत्तर के बीच शाश्वत सांस्कृतिक संबंध को भी मजबूत करता है।

“यह त्योहार विविध परंपराओं को एक साथ लाता है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना को दर्शाता है। मैं लोगों से इस मेले में आने का आग्रह करता हूँ!” मोदी ने कहा।

प्रधान मंत्री ने अप्रैल 2022 के मन की बात कार्यक्रम में माधवपुर मेले के महत्व और हमारी संस्कृति में इसकी भूमिका के बारे में भी बात की थी।

प्रधान मंत्री ने X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया:

“गुजरात के पोर्बंदर में चल रहे माधवपुर मेले के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।
यह जीवंत उत्सव हमारी शानदार संस्कृति को उजागर करता है और साथ ही गुजरात और पूर्वोत्तर के बीच शाश्वत सांस्कृतिक संबंध को भी मजबूत करता है।
यह त्योहार विविध परंपराओं को एक साथ लाता है, जो ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की सच्ची भावना को दर्शाता है। मैं लोगों से इस मेले में आने का आग्रह करता हूँ!”

“अप्रैल 2022 के #मनकीबात कार्यक्रम में मैंने माधवपुर मेले के महत्व और हमारी संस्कृति में इसकी भूमिका के बारे में बात की थी। कृपया इसे सुनें…”



भारत पर्व 2026 में ऐतिहासिक लाल किले पर आंध्र प्रदेश दिवस का उत्सव

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नई दिल्ली-भारत पर्व 2026 के अवसर पर, जो ऐतिहासिक लाल किला में आयोजित किया गया, 30 जनवरी 2026 को आंध्र प्रदेश दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक, कलात्मक और पर्यटन विरासत का जीवंत प्रदर्शन देखने को मिला।

भारत पर्व, जिसे पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के रूप में आयोजित किया जाता है, एक भव्य राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करता है। यह मंच एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संस्कृति, पर्यटन, व्यंजन, हस्तशिल्प और विरासत को प्रदर्शित करता है।

आंध्र प्रदेश पवेलियन इस अवसर का प्रमुख आकर्षण रहा, जिसमें थीम-आधारित पर्यटन प्रदर्शन, पारंपरिक फूड कोर्ट और अद्भुत हैंडलूम प्रदर्शनी शामिल थे। आगंतुकों ने राज्य की ऐतिहासिक विरासत, कलात्मक परंपराओं और रचनात्मक उत्कृष्टता का प्रत्यक्ष अनुभव किया।

आंध्र प्रदेश दिवस का एक प्रमुख आकर्षण कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य का भव्य प्रदर्शन था, जिसमें 46 विशिष्ट कलाकारों ने भाग लिया। इस प्रस्तुति में आंध्र प्रदेश के शास्त्रीय नृत्य की सौम्यता, विलक्षणता और आध्यात्मिक गहराई जीवंत हो उठी। प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और राज्य की गहन सांस्कृतिक धरोहर और शास्त्रीय कला के संरक्षण के प्रति समर्पण को प्रतिबिंबित किया।

भारतीय संस्कृति के प्रशंसक, पर्यटक और उत्सव में शामिल आगंतुक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, कलाकारों को प्रोत्साहित किया और इस राष्ट्रीय मंच पर आंध्र प्रदेश के गौरव में सहभागी बने।

भारत पर्व 2026 में आंध्र प्रदेश दिवस का आयोजन भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता की ताकतवर अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया, और इस उत्सव की भूमिका को सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में मजबूत किया।



एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर 2026 का दिल्ली कैंट में भव्य शुभारंभ

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राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) गणतंत्र दिवस शिविर (आरडीसी) 2026 का शुभारंभ दिल्ली कैंट स्थित डीजी एनसीसी कैंप में उत्साहपूर्ण और भव्य समारोह के साथ हुआ। इस वर्ष गणतंत्र दिवस शिविर में कुल 2,406 कैडेट्स भाग ले रहे हैं, जिनमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से 127 कैडेट्स तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र से 131 कैडेट्स शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम (YEP) के अंतर्गत 25 मित्र देशों के कैडेट्स और अधिकारी भी इस शिविर में भाग लेंगे।

इस अवसर पर एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स ने एनसीसी परिवार को 77 वर्षों की सफल सेवा पूर्ण करने पर बधाई दी। उन्होंने गणतंत्र दिवस शिविर के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह शिविर कैडेट्स को गणतंत्र दिवस से पूर्व राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित होने वाले विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के माध्यम से देश की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं से परिचित कराने का एक सशक्त मंच है।

मीडिया को संबोधित करते हुए लेफ्टिनेंट जनरल वत्स ने बताया कि देश के 90 प्रतिशत से अधिक जिलों में एनसीसी इकाइयों की उपस्थिति सुनिश्चित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि 1948 में स्थापना के समय जहाँ एनसीसी कैडेट्स की संख्या मात्र 20,000 थी, वहीं वर्तमान में यह संख्या बढ़कर लगभग 20 लाख हो गई है, जिसमें 40 प्रतिशत महिला कैडेट्स शामिल हैं। उन्होंने विभिन्न शिविरों के माध्यम से युवाओं में चरित्र निर्माण और अनुशासन विकसित करने में एनसीसी की भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2025 में एनसीसी ने 1,665 वार्षिक प्रशिक्षण शिविर, 06 विशेष राष्ट्रीय एकता शिविर तथा 33 ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ शिविर आयोजित किए, जिनका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों और संस्कृतियों के कैडेट्स के बीच एकता और आपसी संबंधों को सुदृढ़ करना था। इसके अलावा नियमित साहसिक गतिविधियों के साथ-साथ एनसीसी द्वारा निम्नलिखित प्रमुख गतिविधियाँ संचालित की गईं:

  • माउंट एवरेस्ट के लिए विशेष पर्वतारोहण अभियान

  • ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लगभग 75,000 कैडेट्स की भागीदारी, जिसमें नागरिक प्रशासन को सहयोग, चिकित्सा सहायता और स्वैच्छिक रक्तदान शामिल

  • वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के अंतर्गत सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान

  • ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत 8 लाख पौधों का रोपण

  • विकसित भारत युवा नेता संवाद क्विज़ में 4 लाख से अधिक कैडेट्स की भागीदारी

  • अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर 8 लाख से अधिक कैडेट्स की सहभागिता

  • स्वच्छोत्सव में 50,000 से अधिक कैडेट्स की भागीदारी

  • ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष के उपलक्ष्य में 6 लाख कैडेट्स की भागीदारी

  • 4 रिमोट पायलट ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन (RPTOs) में कैडेट्स को ड्रोन उड़ान प्रशिक्षण

  • 3,000 कैडेट्स को स्किल मंथन कार्यशालाओं में प्रशिक्षण

  • आइडिया एवं इनोवेशन प्रतियोगिता के अंतर्गत 340 कैडेट्स द्वारा 85 स्टार्टअप विचारों एवं समाधानों पर कार्य

वर्तमान में चल रहे अभियानों के बारे में जानकारी देते हुए लेफ्टिनेंट जनरल वत्स ने बताया कि अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के 21 निर्जन द्वीपों के चारों ओर एक विशेष नौकायन अभियान संचालित किया जा रहा है, जो परमवीर चक्र विजेताओं को समर्पित है। इसके साथ ही वीर बिरसा मुंडा और पेशवा बाजीराव की विरासत, सामाजिक सुधार गतिविधियों तथा ऐतिहासिक उपलब्धियों को स्मरण करने हेतु दो साइक्लिंग अभियान भी आयोजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा 315 जिलों के लगभग 94,400 एनसीसी कैडेट्स को युवा आपदा मित्र योजना के अंतर्गत नामित किया गया है, जिन्हें राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के समन्वय से मार्च 2026 तक आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

शिविर के दौरान अनेक गणमान्य अतिथि शिविर का दौरा करेंगे, जिनमें उपराष्ट्रपति, रक्षा मंत्री, रक्षा राज्य मंत्री, दिल्ली के मुख्यमंत्री, रक्षा सचिव, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, तथा थल सेना, नौसेना और वायु सेना के प्रमुख शामिल हैं।

शिविर की गतिविधियों का समापन 28 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाली प्रधानमंत्री रैली के साथ होगा।


उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने क्रिसमस समारोह में भाग लिया, शांति, करुणा और राष्ट्रीय एकता के मूल्यों पर दिया जोर

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) द्वारा आयोजित क्रिसमस समारोह में भाग लिया और क्रिसमस पर्व से पूर्व ईसाई समुदाय को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दीं।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि क्रिसमस शांति, करुणा, विनम्रता और मानव सेवा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों का उत्सव है। उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु मसीह द्वारा दिया गया प्रेम, सद्भाव और नैतिक साहस का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है और यह भारत की आध्यात्मिक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है, जो सह-अस्तित्व, करुणा और मानव गरिमा के सम्मान पर आधारित हैं।

भारत में ईसाई धर्म की दीर्घकालिक उपस्थिति का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ईसाई समुदाय ने देश की सामाजिक, सांस्कृतिक और विकासात्मक यात्रा में शांत लेकिन महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, सामाजिक सुधार और मानव विकास के क्षेत्रों में ईसाई समुदाय द्वारा किए गए सतत कार्यों की सराहना की, जो देश के दूरदराज़ क्षेत्रों तक पहुंचे हैं, और इसे राष्ट्र निर्माण का अभिन्न अंग बताया।

अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि झारखंड, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें कई ईसाई संगठनों के साथ निकटता से कार्य करने का अवसर मिला। उन्होंने अपने सांसद कार्यकाल के दौरान कोयंबटूर के एक चर्च में हर वर्ष क्रिसमस मनाने और वहां अनुभव किए गए आपसी सद्भाव और समझ की भावना को भी याद किया। साथ ही, उन्होंने तमिलनाडु के ऐतिहासिक व्यक्तित्व कॉन्स्टेंटाइन जोसेफ बेस्की (वीरमामुनिवर) का उल्लेख करते हुए तमिल साहित्य और संस्कृति में उनके योगदान को रेखांकित किया, जो भारत में ईसाई परंपरा के गहरे सांस्कृतिक समावेशन को दर्शाता है।

भारत की बहुलतावादी संस्कृति पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की एकता समानता में नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और साझा मूल्यों में निहित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में शांति और सद्भाव का वातावरण है और किसी भी प्रकार के भय की आवश्यकता नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तुत ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा से क्रिसमस की भावना की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार क्रिसमस विभिन्न आस्थाओं के लोगों को आनंद के साथ एकजुट करता है, उसी प्रकार ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ देश की विविधता को संजोते हुए एकता का आह्वान करता है।

उपराष्ट्रपति ने सभी समुदायों से ‘विकसित भारत@2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर रचनात्मक योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने गरीबी उन्मूलन और साझा समृद्धि की दिशा में मिलकर कार्य करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि विकास सामूहिक प्रयास से ही संभव है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया वर्ष 1944 से कार्यरत है और इसके द्वारा स्थापित विद्यालयों, महाविद्यालयों, अस्पतालों और परोपकारी संस्थानों का व्यापक नेटवर्क इसे आम नागरिकों के जीवन से गहराई से जोड़ता है।

इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस, कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया के अध्यक्ष आर्चबिशप एंड्रयूज़ थझथ, भारत में अपोस्टोलिक नुनसियो आर्चबिशप लियोपोल्डो गिरेली सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस पर अंतरधार्मिक सम्मेलन: उपराष्ट्रपति ने शांति, धार्मिक स्वतंत्रता और मानवता का दिया संदेश

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नई दिल्ली- भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में आयोजित अंतरधार्मिक  सम्मेलन (इंटरफेथ कॉन्क्लेव) को संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन शांति, मानवाधिकारों और धार्मिक सद्भाव के लिए एक वैश्विक आह्वान है। यह सम्मेलन गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया।

उपराष्ट्रपति ने बताया कि उन्होंने हाल ही में गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब जाकर गुरु तेग बहादुर जी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी को नैतिक साहस का प्रकाशस्तंभ बताते हुए कहा कि उनका जीवन और बलिदान संपूर्ण मानवता की धरोहर है।

धार्मिक स्वतंत्रता का ऐतिहासिक प्रतीक

उपराष्ट्रपति ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान धार्मिक स्वतंत्रता के इतिहास में एक अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने किसी राजनीतिक सत्ता या किसी एक मत की श्रेष्ठता के लिए नहीं, बल्कि व्यक्ति की अंतरात्मा के अनुसार जीवन जीने और उपासना करने के अधिकार की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। असहिष्णुता के दौर में उन्होंने पीड़ितों के लिए ढाल बनकर खड़े होने का साहस दिखाया।

‘हिंद दी चादर’ का वैश्विक संदेश

राधाकृष्णन ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने विश्व को सिखाया कि करुणा से प्रेरित साहस समाज को बदल सकता है और अन्याय के सामने मौन रहना सच्चे धर्म के अनुकूल नहीं है। इन्हीं शाश्वत मूल्यों के कारण उन्हें केवल सिख गुरु ही नहीं, बल्कि सर्वोच्च बलिदान और नैतिक साहस के सार्वभौमिक प्रतीक के रूप में सम्मानित किया जाता है और उन्हें ‘हिंद दी चादर’ की उपाधि प्राप्त है।

भारत की शक्ति: विविधता में एकता

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में एकता है। प्राचीन काल से ही भारत ने विभिन्न आस्थाओं, दर्शनों और संस्कृतियों का स्वागत किया है, जिसे संविधान निर्माताओं ने विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, आस्था और उपासना की स्वतंत्रता के मूल अधिकारों के माध्यम से सुदृढ़ किया।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के आह्वान का उल्लेख करते हुए इसे भारत की सभ्यतागत आत्मा से जुड़ा दृष्टिकोण बताया और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका

समकालीन वैश्विक चुनौतियों पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने G20 की अध्यक्षता के दौरान “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना को “One Earth, One Family, One Future” के रूप में विश्व के सामने प्रस्तुत किया। उन्होंने मिशन LiFE के माध्यम से जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 के दौरान “वैक्सीन मैत्री” पहल के तहत 100 से अधिक देशों को निःशुल्क टीके उपलब्ध कराने में भारत की मानवीय भूमिका को भी रेखांकित किया।

उन्होंने तमिल सूक्ति “याधुम ऊरे, यावरुम केलिर” का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की सभ्यतागत चेतना आज भी वैश्विक सद्भाव को प्रेरित कर रही है।

आज भी प्रासंगिक है गुरु तेग बहादुर जी का संदेश

उपराष्ट्रपति ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान भारत की आत्मा से गहराई से जुड़ा है—एक ऐसा राष्ट्र जहां एकता एकरूपता से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और समझ से बनती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में भी गुरु तेग बहादुर जी का संदेश अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि शांति बल से नहीं, बल्कि न्याय, करुणा और मानवीय गरिमा के सम्मान से स्थापित होती है।

सम्मेलन में प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति

यह अंतरधार्मिक सम्मेलन डॉ. विक्रमजीत सिंह सहनी, राज्यसभा सांसद एवं अध्यक्ष, ग्लोबल इंटरफेथ हार्मनी फाउंडेशन द्वारा आयोजित किया गया। सम्मेलन में जैन आचार्य लोकेश मुनि, नामधारी सतगुरु उदय सिंह, मोहन रूपा दास (इस्कॉन मंदिर, दिल्ली), हाजी सैयद सलमान चिश्ती (अजमेर दरगाह शरीफ), रेव. फादर मोनोडीप डेनियल, सरदार तरलोचन सिंह सहित अनेक प्रतिष्ठित धार्मिक एवं आध्यात्मिक नेता उपस्थित रहे।


सरदार पटेल की 75वीं पुण्यतिथि पर प्रधानमंत्री मोदी ने अर्पित की श्रद्धांजलि

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 75वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने और देश की एकता को मजबूत करने के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एकीकृत और सशक्त भारत के निर्माण में सरदार पटेल का अतुलनीय योगदान देश की सामूहिक स्मृति में सदैव अंकित रहेगा।

मोदी ने कहा कि सरदार पटेल का जीवन आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए विशेष प्रेरणा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि लौह पुरुष द्वारा स्थापित राष्ट्रीय एकता की भावना ‘विकसित भारत’ के संकल्प के लिए आज भी ऊर्जा का सशक्त स्रोत बनी हुई है।

प्रधानमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि राष्ट्र निर्माण में सरदार पटेल की अद्वितीय भूमिका, उनका निर्णायक नेतृत्व और भारत की अखंडता को सुदृढ़ करने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता एक मजबूत और सक्षम राष्ट्र के लिए सदैव मार्गदर्शक शक्ति बनी रहेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अलग-अलग पोस्ट में कहा:

“लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी 75वीं पुण्यतिथि पर मेरा सादर नमन। उन्होंने देश को एकसूत्र में पिरोने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। अखंड और सशक्त भारतवर्ष के निर्माण में उनका अतुलनीय योगदान कृतज्ञ राष्ट्र कभी भुला नहीं सकता।”

“भारत रत्न सरदार पटेल की 75वीं पुण्यतिथि आत्मनिर्भर भारत के लिए प्रेरणा लेने का भी एक विशेष अवसर है। उन्होंने देशवासियों में राष्ट्रीय एकता की जो भावना भरी, वह ‘विकसित भारत’ के लिए ऊर्जा का स्रोत है। राष्ट्र निर्माण में उनकी अद्वितीय भूमिका सशक्त और सामर्थ्यवान भारत के लिए पथ-प्रदर्शक बनी रहेगी।”


काशी तमिल संगम 4.0: काशी और तमिलनाडु की सांस्कृतिक एकता का भव्य उत्सव

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केंद्रीय कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री एवं शिक्षा राज्य मंत्री, जयंत चौधरी ने काशी तमिल संगम (KTS) 4.0 का दौरा करते हुए कहा कि, “काशी तमिल संगम दो प्राचीन परंपराओं को और करीब लाता है और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को प्रतिबिंबित करता है, जहाँ भारत की समृद्ध विविधता एक एकीकृत शक्ति बनती है।” यह संगम 2 दिसंबर से जारी है और काशी तथा तमिलनाडु के बीच गहरे सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों का उत्सव मनाता है।

चौधरी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, काशी एक जीवंत सांस्कृतिक केंद्र बनकर उभरी है, जो भारत की विविध विरासत को संरक्षित करने, मनाने और एकजुट करने के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। तमिलनाडु के साथ यह नया संबंध यह दर्शाता है कि भारत की सांस्कृतिक एकता इसकी विविधता में गहराई से निहित है। यह पहल समझ और एकता की नई ज्वाला को प्रज्वलित कर रही है। भारत की समृद्ध विरासत गर्व के साथ प्रदर्शित हो रही है और इसकी परंपराओं को आत्मविश्वास और गौरव के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।”

उन्होंने इस वर्ष के विषय “Learn Tamil – Tamil Karkalam” की सराहना करते हुए कहा कि भारत की विविध भाषाएँ लोगों को जोड़ती हैं, और इस प्रकार की पहल युवाओं में सम्मान, संवाद और सहयोग की नई भावना को प्रेरित करती हैं। अपने दौरे के दौरान, उन्होंने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, प्रदर्शनियों, भाषा कार्यशालाओं और छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रमों का अवलोकन किया। उन्होंने विशेष रूप से युवा द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और लोक नृत्यों की सराहना की।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित और IIT मद्रास एवं BHU द्वारा समन्वित KTS 4.0 में प्रमुख पहलें शामिल हैं—तेनकसी से काशी तक ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान, काशी के स्कूलों में 50 तमिल शिक्षकों की तैनाती, और उत्तर प्रदेश के छात्रों के लिए तमिल भाषा अध्ययन यात्राएँ। कार्यक्रम में काशी के ऐतिहासिक तमिल सांस्कृतिक स्थलों के दौरे भी शामिल हैं। KTS 4.0 में सात विभिन्न समूहों—छात्र, शिक्षक, महिलाएँ, कारीगर, मीडिया पेशेवर, आध्यात्मिक विद्वान और अन्य पेशेवरों—के 1,400 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए हैं।

सांस्कृतिक अनुभव, शैक्षणिक आदान-प्रदान और व्यापक जन भागीदारी के साथ, काशी तमिल संगम 4.0 भारत की सांस्कृतिक एकता का भव्य उत्सव है—जो काशी और तमिलनाडु की समृद्ध परंपराओं के बीच शाश्वत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करता है।


उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने सरदार @150 यूनिटी मार्च—राष्ट्रीय पदयात्रा के समापन समारोह में की शिरकत

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भारत के उपराष्ट्रपति, सी. पी. राधाकृष्णन ने आज गुजरात के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर आयोजित सरदार @150 यूनिटी मार्च – राष्ट्रीय पदयात्रा के समापन समारोह में भाग लिया।

सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक राष्ट्रीय पदयात्रा के समापन में शामिल होना एक महान सम्मान है। उन्होंने बताया कि उपराष्ट्रपति पद संभालने के बाद महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल की इस पवित्र भूमि की यह उनकी पहली आधिकारिक यात्रा है।

14 लाख युवाओं की भागीदारी—एकता की ज्वाला आज भी प्रज्ज्वलित

उपराष्ट्रपति ने बताया कि पदयात्रा की शुरुआत 26 नवंबर—संविधान दिवस—को होना अत्यंत सार्थक है।
उन्होंने कहा कि 1,300 से अधिक पदयात्राओं में 14 लाख से ज्यादा युवाओं की भागीदारी यह साबित करती है कि सरदार पटेल द्वारा प्रज्ज्वलित राष्ट्रीय एकता की ज्योति आज भी उतनी ही उज्ज्वल है।

उन्होंने अपने पूर्व पदयात्रा अनुभवों को याद किया—जिसमें 19,000 किमी की रथयात्रा और तमिलनाडु, केरल एवं आंध्र प्रदेश में नदी जोड़ने, आतंकवाद उन्मूलन, समान नागरिक संहिता, अस्पृश्यता मिटाने और नशीले पदार्थों के विरुद्ध कई यात्राएँ शामिल थीं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी यात्राएँ लोगों से सीधे जुड़ने और राष्ट्रव्यापी संकल्प को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम हैं।

‘भारत लौह पुरुष’ को नमन – 560 रियासतों के एकीकरण का ऐतिहासिक नेतृत्व

उन्होंने सरदार पटेल को श्रद्धांजलि देते हुए कहा—

“भारत सदैव लौह पुरुष का ऋणी रहेगा, जिन्होंने 560 से अधिक रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर अखंड भारत की नींव रखी।”

उन्होंने कहा कि सरदार पटेल का मजबूत और आत्मनिर्भर भारत का सपना आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में साकार हो रहा है।

तेजी से बढ़ता भारत—आर्थिक, सामाजिक, सामरिक प्रगति का दशक

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने आर्थिक, सामाजिक, सैन्य और रणनीतिक क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है और अब वह दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के मार्ग पर अग्रसर है।

युवा—भारत की ऊर्जा शक्ति

युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि युवा देश की भविष्य ऊर्जा हैं, और जब वे एकता, अनुशासन और राष्ट्रीय उद्देश्य के साथ आगे बढ़ते हैं, तो भारत को नवाचार और विकास का वैश्विक नेता बना सकते हैं।

उन्होंने युवाओं से ‘नशीली दवाओं को ना कहने’ का आग्रह किया और सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करने, डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा में योगदान देने की सलाह दी।

नारी शक्ति—विकास से नेतृत्व की तरफ

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम ने देश के फोकस को महिला सशक्तिकरण से महिला-नेतृत्व विकास की ओर मोड़ दिया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा—भारत की अडिग प्रतिबद्धता

उन्होंने कहा कि भारत की रक्षा क्षमताएँ कई गुना बढ़ी हैं।
ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस अभियान ने भारत की संप्रभुता की रक्षा और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई के संकल्प को प्रदर्शित किया।

श्रम सुधार—नए भारत की पारदर्शी और श्रमिक-केंद्रित व्यवस्था

उपराष्ट्रपति ने चार नए श्रम संहिताओं को एक बड़ा सुधार बताते हुए कहा कि यह सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास की भावना का प्रतिबिंब है, जिसने भारत के श्रम ढांचे को आधुनिक, पारदर्शी और श्रमिक-केंद्रित बनाया है।

अमृतकाल में विकसित भारत 2047 की ओर

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय पदयात्रा का समापन विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा पर होना केवल सरदार पटेल को श्रद्धांजलि ही नहीं, बल्कि नए भारत की भावना को भी सलाम है।
उन्होंने कहा कि अमृतकाल में भारत विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, और सरदार पटेल के आदर्श ही इस यात्रा के पथप्रदर्शक बने रहेंगे।

10-दिवसीय राष्ट्रीय पदयात्रा—आत्मनिर्भरता और पर्यावरण चेतना का प्रतीक

करमसद से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक 180 किमी की यह 10-दिवसीय पदयात्रा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण जागरूकता का संदेश समेटे हुए थी, जो प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण के अनुरूप एक भारत, श्रेष्ठ भारत का संदेश पुनः स्थापित करती है।

कार्यक्रम में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, डॉ. मनसुख मांडविया, राज्य मंत्री रक्ष खडसे, टोखन साहू सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।


भारतीय रेलवे तमिलनाडु और काशी के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए काशी तामिल संगम 4.0 के लिए चलाए सात विशेष ट्रेनें

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भारतीय रेलवे ने काशी तामिल संगम 4.0 में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों की सुविधा के लिए कन्नियाकुमारी, चेन्नई, कोयम्बटूर और बनारस के बीच सात विशेष ट्रेनों की श्रृंखला संचालित की है। इन विशेष ट्रेनों का उद्देश्य सहज यात्रा, लंबी दूरी की आरामदायक कनेक्टिविटी और प्रतिभागियों के लिए समय पर आगमन सुनिश्चित करना है, जो बहु-दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

पहली ट्रेन 29 नवंबर 2025 को कन्नियाकुमारी से रवाना हुई। इसके बाद आज चेन्नई से अतिरिक्त विशेष ट्रेन चलायी गई। आगामी प्रस्थान तिथियाँ हैं:

  • कोयम्बटूर: 3 दिसंबर

  • चेन्नई: 6 दिसंबर

  • कन्नियाकुमारी: 7 दिसंबर

  • कोयम्बटूर: 9 दिसंबर

  • चेन्नई: 12 दिसंबर 2025

साथ ही, भारतीय रेलवे ने बनारस से समय पर वापसी की सुविधा के लिए विशेष रिटर्न सेवाओं की व्यवस्था की है। रिटर्न ट्रेनें निम्नानुसार हैं:

  • कन्नियाकुमारी: 5 दिसंबर

  • चेन्नई: 7 दिसंबर

  • कोयम्बटूर: 9 दिसंबर

  • चेन्नई: 11 दिसंबर

  • कन्नियाकुमारी: 13 दिसंबर

  • कोयम्बटूर: 15 दिसंबर

  • चेन्नई: 17 दिसंबर 2025

काशी तामिल संगम 4.0 का आयोजन आज से शुरू हुआ और यह तमिलनाडु और काशी के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंधों को जारी रखता है। इस संस्करण का मुख्य विषय है “चलो तमिल सीखें – तमिल कारकलम”, जो काशी और तमिलनाडु के बीच भाषाई और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करता है। इसमें काशी के छात्रों के लिए तमिल अध्ययन कार्यक्रम, तमिलनाडु के स्कूलों में अध्ययन यात्रा और तेनकसी से काशी तक आस्तिक वाहन यात्रा जैसे पहल शामिल हैं।

काशी तामिल संगम 4.0 ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के संदेश को समर्पित है, जो लोगों को अपनी संस्कृति से परे अन्य संस्कृतियों को समझने और सराहने के लिए प्रेरित करता है। इस कार्यक्रम का संचालन शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है, जबकि आईआईटी मद्रास और बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय प्रमुख ज्ञान भागीदार हैं। इसमें रेलवे सहित दस मंत्रालयों की भागीदारी है, जो छात्रों, कलाकारों, विद्वानों, आध्यात्मिक नेताओं, शिक्षकों और सांस्कृतिक प्रैक्टिशनरों को जोड़ते हुए दोनों क्षेत्रों के बीच विचार, सांस्कृतिक प्रथाओं और पारंपरिक ज्ञान का आदान-प्रदान सुनिश्चित करता है।

इन सात विशेष ट्रेनों के संचालन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध कार्यक्रम के माध्यम से, भारतीय रेलवे देश के विविध क्षेत्रों को जोड़ने और तमिलनाडु और काशी के बीच साझा विरासत को सुदृढ़ करने में एक केंद्रीय भूमिका निभा रहा है।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का संबोधन: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति और निर्णायक नेतृत्व का प्रतीक

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर इस बात का प्रमाण है कि भारत शांति और सद्भावना की भाषा न समझने वालों को करारा जवाब देना बखूबी जानता है।” वे गुजरात के वडोदरा में 2 दिसंबर 2025 को आयोजित सरदार सभा को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम मेरा युवा (MY) भारत द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित ‘यूनिटी मार्च’ का हिस्सा था।

ऑपरेशन सिंदूर: भारत की शक्ति का संदेश

रक्षा मंत्री ने भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता को नमन करते हुए कहा कि दुनिया आज भारतीय सैनिकों की बहादुरी और क्षमता को मान रही है। उन्होंने कहा:

  • “हम शांति-प्रिय राष्ट्र हैं, लेकिन यदि कोई उकसाता है तो उसे बख्शते नहीं।”

  • ऑपरेशन सिंदूर ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपनी सुरक्षा और सम्मान के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करेगा।

सरदार पटेल की विरासत और भारत की एकता

राजनाथ सिंह ने सरदार पटेल को भारत की एकता का शिल्पकार बताते हुए कहा:

  • उनकी दूरदर्शिता के कारण भारत एकजुट हुआ।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘वन इंडिया, बेस्ट इंडिया’ के उनके सपने को नई मजबूती मिली है।

  • अनुच्छेद 370 हटाना, जम्मू-कश्मीर को मुख्यधारा में लाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम था।

भारत की वैश्विक स्थिति और मजबूत नेतृत्व

रक्षा मंत्री ने कहा कि आज भारत:

  • विश्व मंच पर अपनी बात मजबूती से रखता है।

  • एक प्रमुख आर्थिक व सामरिक शक्ति के रूप में उभर रहा है।

  • वर्ष 2014 में आर्थिक रैंकिंग में 11वें स्थान पर था, आज चौथे स्थान पर पहुंच चुका है।

उन्होंने सरकार की नीति ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ को सरदार पटेल के सिद्धांतों का आधुनिक रूप बताया।

रक्षा उत्पादन और आत्मनिर्भरता

 राजनाथ सिंह ने कहा:

  • सरदार पटेल की सोच रक्षा आधुनिकीकरण पर आधारित थी।

  • ‘मेक इन इंडिया’ के चलते आज भारत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन रहा है।

  • पिछले 11 वर्षों में रक्षा निर्यात 34 गुना बढ़ा है।

  • लक्ष्य:

    • ₹3 लाख करोड़ रक्षा उत्पादन

    • ₹50,000 करोड़ रक्षा निर्यात (वर्ष 2029 तक)

नैतिकता और सुशासन: संविधान (130वां संशोधन) विधेयक

उन्होंने सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े रुख की जानकारी देते हुए कहा:

  • यदि किसी उच्च पदाधिकारी पर गंभीर आरोप में गिरफ्तारी के बाद 30 दिनों तक जमानत नहीं मिलती, तो वह स्वचालित रूप से अपने पद से मुक्त हो जाएगा।

युवा पीढ़ी से आह्वान

रक्षा मंत्री ने युवाओं से आह्वान किया:

  • भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लें।

  • एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करें।

  • सरदार पटेल के आदर्शों को अपनाएं और अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ

  • पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया

  • उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

  • श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया

  • केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे

  • अन्य वरिष्ठ अधिकारी

यह आयोजन सरदार पटेल की एकता, राष्ट्रवाद और दृढ़ नेतृत्व की भावना को समर्पित रहा।

काशी तमिल संगमम 4.0: भाषा, संस्कृति और सभ्यतागत एकता का नया अध्याय

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • काशी तमिल संगमम 4.0 की शुरुआत 2 दिसंबर, 2025 से हो रही है, जो तमिलनाडु और काशी के सांस्कृतिक व सभ्यता संबंधों को आगे बढ़ाता है।

  • इस संस्करण का मुख्य आधार “लेट अस लर्न तमिल – तमिल कार्कालम” है, जिसके तहत तमिल भाषा सीखने और भाषाई एकता पर विशेष फोकस रहेगा।

  • प्रमुख कार्यक्रमों में तमिल कार्कालम (वाराणसी के विद्यालयों में तमिल शिक्षण), तमिल कर्पोम (काशी क्षेत्र के 300 छात्रों के लिए तमिल सीखने हेतु अध्ययन भ्रमण), और सेज अगस्त्य व्हीकल एक्सपीडिशन (तेनकासी से काशी तक सभ्यतागत मार्ग का अनुसरण) शामिल हैं।

  • इस वर्ष का संगमम रामेश्वरम में वैलेडिक्टरी समारोह के साथ सम्पन्न होगा, जो काशी से तमिलनाडु तक की सांस्कृतिक यात्रा का प्रतीकात्मक समापन होगा।

प्राचीन बंधन की पुनर्स्मृति: काशी तमिल संगमम क्या है?

स्रोत: काशी तमिल संगमम वेबसाइट

काशी तमिल संगमम एक ऐसे संबंध का उत्सव है, जो सदियों से भारतीय चेतना में समाहित रहा है। तमिलनाडु और काशी के बीच होने वाली यात्राएँ केवल भौगोलिक नहीं थीं, बल्कि विचारों, दर्शन, भाषाओं और परंपराओं के आदान-प्रदान की गहन सांस्कृतिक यात्राएँ थीं। संगमम इसी जीवंत ऐतिहासिक संबंध को आधुनिक समय में पुनर्जीवित करता है।

2022 में आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान शुरू हुआ यह कार्यक्रम भारत की विविध सांस्कृतिक धारा को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास है। यह पहल एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना से प्रेरित है, जो लोगों को विभिन्न संस्कृतियों को समझने और अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित और IIT मद्रास तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के ज्ञान साझेदारों के रूप में, संगमम में रेलवे, संस्कृति, पर्यटन, वस्त्र, युवा मामले एवं खेल मंत्रालय सहित कई मंत्रालयों और उत्तर प्रदेश सरकार की सक्रिय भागीदारी रहती है।

प्रत्येक संस्करण में तमिलनाडु के छात्र, शिक्षक, कारीगर, विद्वान, आध्यात्मिक नेता, महिला समूह और सांस्कृतिक प्रतिनिधि काशी पहुंचते हैं तथा वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या में आयोजित कार्यक्रमों, दर्शन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और संवादों में भाग लेते हैं।

काशी तमिल संगमम 4.0: “तमिल कार्कालम – लेट अस लर्न तमिल”

2 दिसंबर 2025 से प्रारंभ होने वाला 4.0 संस्करण अपने पूर्व संस्करणों की भावना को आगे ले जाता है, परंतु इस बार इसका केंद्र भाषाई शिक्षा और युवा सहभागिता है।

इस वर्ष का विषय “लेट अस लर्न तमिल – तमिल कार्कालम” सभी भारतीय भाषाओं को एक साझा "भारतीय भाषा परिवार" का हिस्सा मानते हुए भाषाई विविधता में एकता का संदेश देता है। यह संस्करण उत्तर भारत के छात्रों के लिए तमिल भाषा सीखने और तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के नए अवसर प्रदान करता है।

तमिलनाडु से 1,400 से अधिक प्रतिनिधि काशी आएंगे, जिनमें विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, पत्रकार, किसान, कारीगर, पेशेवर, महिलाएँ और आध्यात्मिक विद्वान शामिल होंगे।

काशी तमिल संगमम 4.0: प्रमुख पहलें

1. उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को तमिल सिखाना – “तमिल कार्कालम”

  • 50 तमिल शिक्षक (DBHPS प्रचारकों सहित) वाराणसी के 50 स्कूलों में 2–15 दिसंबर 2025 के बीच तैनात रहेंगे।

  • प्रत्येक शिक्षक कक्षा 30 छात्रों को तमिल बोलचाल, उच्चारण और मूलाक्षरों का प्रशिक्षण देंगे।

  • कुल 1,500 विद्यार्थियों को आधारभूत तमिल शिक्षा मिलेगी।

  • BHU का तमिल विभाग, CIIL मैसूरु, IRCTC और वाराणसी प्रशासन इसके समन्वय में शामिल हैं।

यह पहल तमिल शिक्षण को तमिलनाडु के बाहर विस्तृत करने का महत्वपूर्ण कदम है।

2. तमिलनाडु यात्रा के दौरान तमिल सीखना – स्टडी टूर कार्यक्रम

  • उत्तर प्रदेश के 300 कॉलेज छात्र 10 बैचों में तमिलनाडु का अध्ययन दौरा करेंगे।

  • CICT, चेन्नई में ओरिएंटेशन के बाद वे तमिल भाषा और संस्कृति पर कक्षाओं में भाग लेंगे।

  • प्रमुख संस्थान (IIT मद्रास, शास्त्र यूनिवर्सिटी, पांडिचेरी विवि, कांचीपुरम के संस्थान आदि) छात्रों की मेजबानी करेंगे।

  • प्रत्येक छात्र को प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।

यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के युवाओं को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से तमिल भाषा व संस्कृति से परिचित कराता है।

3. सेज अगस्त्य व्हीकल एक्सपीडिशन (SAVE)

  • 2 दिसंबर 2025 को तेनकासी से शुरू होकर 10 दिसंबर 2025 को काशी पहुंचेगा।

  • यह यात्रा ऋषि अगस्त्य के पौराणिक मार्ग पर आधारित है।

  • चेरी, चोल, पांड्य, पल्लव, चालुक्य और विजयनगर साम्राज्यों की ऐतिहासिक कड़ियों को रेखांकित करेगी।

  • तमिल साहित्य, सिद्ध चिकित्सा और साझा विरासत पर भी प्रकाश डालेगी।

यह यात्रा तमिलनाडु और काशी के बीच प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को सम्मानित करती है।

काशी तमिल संगमम: 1.0 से 4.0 तक की यात्रा

KTS 1.0 (2022)

  • 2,500+ प्रतिभागी

  • काशी, प्रयागराज और अयोध्या के व्यापक दर्शन और संवाद

  • सांस्कृतिक कार्यक्रम, शैक्षणिक सत्र और प्रदर्शनियाँ

KTS 2.0 (2023)

  • 1,435 प्रतिनिधि

  • PM के भाषण का पहली बार रियल-टाइम तमिल अनुवाद

  • 2 लाख से अधिक आगंतुकों वाली बड़ी प्रदर्शनी

  • डिजिटल आउटरीच में 8.5 करोड़ की पहुंच

KTS 3.0 (2025)

  • ऋषि अगस्त्य पर केंद्रित प्रदर्शनियाँ और सत्र

  • महाकुंभ 2025 और राम मंदिर, अयोध्या के दर्शन

  • NEP 2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान प्रणाली आधारित कार्यक्रम

काशी–तमिल बंध को सुदृढ़ करना: एक जीवंत सांस्कृतिक सततता

चारों संस्करणों ने दिखाया है कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान तभी प्रभावी होता है, जब वह अनुभव और सहभागिता पर आधारित हो।
KTS 4.0 इस यात्रा को नई दिशा देता है—भाषाई सीखने, युवाओं की सहभागिता और द्विपक्षीय सांस्कृतिक समझ को केंद्र में रखकर।

यह पहल एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को मूर्त रूप देती है, जहाँ भाषाएँ, परंपराएँ और विचार एकता के सूत्र में जुड़ते हैं।



जनरेशन Z में दिखा उत्साह, 2 दिसंबर से शुरू होगा काशी तमिल संगमम् 4.0

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जनरेशन Z के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है, क्योंकि 2 दिसंबर से शुरू होने वाले काशी तमिल संगमम् 4.0 के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। इस आयोजन का उद्देश्य काशी और तमिलनाडु के प्राचीन सांस्कृतिक और भाषाई संबंधों को नई पीढ़ी की ऊर्जा के साथ जोड़ना है।

पहले दल के रूप में बड़ी संख्या में GenZ छात्र 29 नवंबर को कन्याकुमारी से विशेष ट्रेन द्वारा यात्रा पर निकले। यह लंबी रेल यात्रा युवाओं के लिए सांस्कृतिक उत्सव का रूप ले चुकी है—जिसमें खेल, समूह गतिविधियाँ, उत्साहभरी बातचीत और रचनात्मक साझेदारियाँ शामिल हैं। यह अनुभव उनके लिए रोमांचक और यादगार बन गया है।

तमिलनाडु की अर्चना, जो इस विशेष ट्रेन से यात्रा कर रही हैं, ने कहा कि उन्हें घर पर मंदिरों में जाने का कम अवसर मिलता है, इसलिए यह यात्रा उनके लिए एक दिव्य संयोग है। वह पहली बार काशी की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने के लिए उत्साहित हैं।

इसी तरह, तिरुपुर की मालथी, जो UPSC की तैयारी कर रही हैं, ने कहा कि तमिलनाडु और काशी का आध्यात्मिक संबंध सदियों से संतों जैसे माणिक्कवाचार द्वारा मनाया जाता रहा है। काशी तमिल संगमम् इस पवित्र संबंध को आधुनिक तरीके से और सशक्त बना रहा है। काशी की यात्रा उनके लिए गर्व का क्षण है।

उधर काशी में भी घाटों और विश्वविद्यालय परिसरों में हो रहे प्री-इवेंट कार्यक्रमों में GenZ बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहा है। ‘Run for KTS 4.0’ जैसे कार्यक्रमों ने युवाओं को फिटनेस के साथ-साथ सांस्कृतिक उत्सव के प्रति जागरूकता बढ़ाने का मंच दिया।

विश्वनाथ मंदिर क्षेत्र और अन्य घाटों पर GenZ द्वारा किए गए नुक्कड़ नाटकों ने काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संबंधों को नए, रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया। वहीं Reel-making प्रतियोगिताओं ने सोशल मीडिया पर उत्साह की लहर पैदा कर दी है, जिससे पूरे देश के युवाओं में कार्यक्रम को लेकर उत्सुकता बढ़ रही है।

इस वर्ष काशी तमिल संगमम् 4.0 का थीम है— “Learn Tamil – Tamil Karkalam”, जिसका उद्देश्य भाषा और संस्कृति को और अधिक निकट लाना है। इसमें GenZ की सक्रिय भागीदारी इस थीम को और अधिक प्रभावी और सार्थक बना रही है।


Sardar@150 राष्ट्रीय एकता पदयात्रा: सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर युवाओं और नागरिकों की भारी भागीदारी

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MY Bharat, युवा मामलों और खेल मंत्रालय के अंतर्गत आयोजित Sardar@150 राष्ट्रीय एकता पदयात्रा ने आज अपने चौथे दिन का उत्साहजनक आगाज़ किया। 26 नवंबर 2025 को सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के अवसर पर अानंद से शुरू हुई यह पदयात्रा पूरे देश के युवाओं को एकजुट करने और भारत की एकता के वास्तुकार को सम्मानित करने के लिए आयोजित की जा रही है।

पदयात्रा की विस्तृत पहुंच

शुरुआत से ही पदयात्रा में असाधारण सहभागिता रही है। अब तक 15.5 लाख से अधिक नागरिकों ने 640 जिलों, 1,524 पदयात्राओं, 451 लोकसभा क्षेत्रों और 23,820 से अधिक संस्थानों में भाग लिया है।

  • क़रमसाद से केवड़िया तक राष्ट्रीय पदयात्रा ने चौथे दिन तक 57 किलोमीटर की दूरी तय की, जिसमें समुदायों, युवा समूहों और MY Bharat स्वयंसेवकों का उत्साहपूर्ण सहयोग दिखाई दिया।

चौथे दिन की यात्रा

चौथे दिन की यात्रा में यश कॉम्प्लेक्स, ISKCON मंदिर (गोत्री रोड), BPCL चार्जिंग स्टेशन, ब्रह्माकुमारी अतलदरा और अतलदरा BAPS मंदिर शामिल थे।
इस अवसर पर पीयूष गोयल, केंद्रीय मंत्री, वाणिज्य और उद्योग, पदयात्रा में शामिल हुए और युवाओं को प्रेरित किया।

अतलदरा BAPS मंदिर में विशेष कहानी कथन सत्र “सरदार गाथा: द डैज़लिंग कमांडर” आयोजित किया गया, जिसमें उपस्थित रहे:

  • डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय मंत्री, युवा मामले एवं खेल और श्रम एवं रोजगार

  • जे.पी. नड्डा, केंद्रीय मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक

  • डॉ. वीरेंद्र कुमार, केंद्रीय मंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता

  • रवनीत सिंह बिट्टू, राज्य मंत्री, रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग

MLAs, MPs और अन्य वरिष्ठ स्थानीय प्रतिनिधियों ने भी मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

जेपी नड्डा का संदेश

जे.पी. नड्डा ने सरदार पटेल के अद्वितीय योगदान और एकता की भावना को याद करते हुए कहा कि पटेल ही सच्चे राष्ट्रपुरुष थे, जिन्होंने एकीकृत भारत की नींव रखी। उन्होंने पटेल की लंदन में कानूनी शिक्षा, अहमदाबाद में प्रारंभिक सुधार, बारडोली आंदोलन और अहमदाबाद नगर निगम अध्यक्ष के रूप में योगदान का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि 1.6 करोड़ भारतीयों के लिए एकता का प्रतीक है।

मनसुख मांडविया का संदेश

डॉ. मनसुख मांडविया ने युवाओं की व्यापक भागीदारी की सराहना की और कहा कि गुजरात में राष्ट्रीय पदयात्रा हर निर्वाचन क्षेत्र तक पहुँच चुकी है। उन्होंने कहा कि यह एकता मार्च प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प का साकार दर्शन है।

नर्मदा और गोदावरी प्रवाह

  • नर्मदा प्रवाह, नागपुर से शुरू होकर पदयात्रा में शामिल हुआ।

  • गोदावरी प्रवाह, मुंबई से रवाना होकर मार्ग में है।
    ये प्रतीकात्मक रूप से भारत के नदी क्षेत्रों को एकजुट कर रहे हैं।

सांस्कृतिक और पर्यावरणीय गतिविधियाँ

  • स्मृति वन में प्राथमिक स्कूल के छात्रों द्वारा बनाई गई सरदार पटेल की चित्रकला प्रदर्शित की गई।

  • वृक्षारोपण अभियान के माध्यम से पर्यावरणीय जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।

प्रदर्शनियाँ और ग्राम सभा

  • नवलखी ग्राउंड, वडोदरा में “राज्य समेकन के सरदार – राष्ट्र की मौन क्रांति” प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया।

  • दिन का समापन ग्राम सभा से हुआ, जिसमें डायरो प्रस्तुतियाँ, सामुदायिक चर्चाएँ और सरदार पटेल के आदर्शों का सामूहिक reaffirmation शामिल था।

समापन

Sardar@150 राष्ट्रीय एकता पदयात्रा Statue of Unity की ओर बढ़ते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित कर रही है और युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी, साझा प्रयास और राष्ट्रीय गर्व के माध्यम से पूरे भारत को एकजुट करने का संदेश दे रही है।


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