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सरगुजा संभाग के 850 श्रद्धालु भारत गौरव ट्रेन से रामलला एवं बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए रवाना

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रामलला दर्शन योजना से बुजुर्गों, महिलाओं एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों का वर्षों पुराना सपना हो रहा है साकार

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार जनआस्था, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन को जनकल्याण से जोड़ते हुए प्रदेशवासियों के वर्षों पुराने सपनों को साकार कर रही है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में पर्यटन विभाग द्वारा संचालित रामलला दर्शन योजना प्रदेश के हजारों श्रद्धालुओं के लिए श्रद्धा, सेवा और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बन चुकी है। इसी कड़ी में अम्बिकापुर रेलवे स्टेशन से सरगुजा संभाग के 850 श्रद्धालुओं को लेकर भारत गौरव ट्रेन अयोध्या धाम में प्रभु श्री रामलला तथा श्री काशी विश्वनाथ धाम के दर्शन के लिए श्रद्धा और उत्साह के वातावरण में रवाना हुई।

रेलवे स्टेशन पर सुबह से ही भक्ति और उल्लास का अनूठा वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालु भगवान श्रीराम के जयघोष के साथ स्टेशन पहुंचे। पूरा परिसर जय श्रीराम, हर-हर महादेव और जय सियाराम के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं के चेहरों पर अपने आराध्य के दर्शन का उत्साह और भावनात्मक खुशी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। अनेक परिवार पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे, जहां परिजनों ने तिलक लगाकर और पुष्पवर्षा कर यात्रियों को शुभ यात्रा की मंगलकामनाओं के साथ विदा किया।

भारत गौरव ट्रेन को जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मंजूषा भगत (महापौर), हरविंदर सिंह टिनी (सभापति), नीरूपा सिंह (जिला पंचायत अध्यक्ष) सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल, जिला प्रशासन तथा भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत करते हुए यात्रा की शुभकामनाएं दीं।


दर्शन योजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं को श्री अयोध्या धाम में प्रभु श्री रामलला के दिव्य दर्शन तथा श्री काशी विश्वनाथ धाम में बाबा विश्वनाथ के दर्शन एवं पूजन का सौभाग्य प्राप्त होगा। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सम्मान का विशेष ध्यान रखा गया है। पूरी यात्रा का संचालन पर्यटन विभाग एवं आईआरसीटीसी के समन्वय से सुव्यवस्थित रूप से किया जा रहा है।

यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को आरामदायक रेल यात्रा, स्वच्छ एवं सुरक्षित आवास, पौष्टिक शुद्ध शाकाहारी भोजन, पेयजल, स्थानीय परिवहन, चिकित्सा सहायता, सुरक्षा व्यवस्था तथा अनुभवी एस्कॉर्ट दल की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं तथा दिव्यांग यात्रियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष सहायता की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है, ताकि प्रत्येक श्रद्धालु बिना किसी असुविधा के अपनी आध्यात्मिक यात्रा पूर्ण कर सके।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सोच है कि आर्थिक स्थिति किसी भी श्रद्धालु की आस्था के मार्ग में बाधा नहीं बननी चाहिए। इसी भावना के अनुरूप रामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के हजारों श्रद्धालुओं को निःशुल्क धार्मिक यात्रा का अवसर प्रदान किया जा रहा है। यह योजना केवल दर्शन कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेशवासियों को उनकी सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन गई है।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने श्रद्धालुओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि रामलला दर्शन योजना मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संवेदनशील नेतृत्व की ऐसी जनकल्याणकारी पहल है, जिसके माध्यम से प्रदेश के श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम और बाबा विश्वनाथ के पावन दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। यह यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को सशक्त बनाने का अभियान है। मैं सभी श्रद्धालुओं से प्रार्थना करता हूं कि वे प्रभु श्रीराम और बाबा विश्वनाथ से छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, खुशहाली और सभी नागरिकों के कल्याण की कामना करें तथा यात्रा से लौटकर अपने अनुभव समाज के साथ साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित हों।यात्रा पर रवाना होने वाले श्रद्धालुओं ने भी भावुक होकर राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। अनेक बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने कहा कि जीवनभर इच्छा होने के बावजूद आर्थिक परिस्थितियों के कारण अयोध्या और काशी की यात्रा संभव नहीं हो पाई थी, लेकिन मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस योजना ने उनका वर्षों पुराना सपना पूरा कर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने उन्हें सम्मानपूर्वक भगवान श्रीराम और बाबा विश्वनाथ के दर्शन का अवसर देकर उनके जीवन की सबसे बड़ी मनोकामना पूर्ण कर दी है।

एक महिला श्रद्धालु ने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि इतनी अच्छी व्यवस्था के साथ अयोध्या और काशी की यात्रा करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने हम जैसे सामान्य परिवारों की भावनाओं का सम्मान किया है। हम सभी उनके प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।

एक वरिष्ठ श्रद्धालु ने कहा कि सरकार ने हमारी पूरी यात्रा की चिंता अपने ऊपर ले ली है। भोजन, आवास, सुरक्षा और चिकित्सा जैसी सभी व्यवस्थाएं होने से हम पूरी निश्चिंतता और श्रद्धा के साथ यात्रा कर रहे हैं। यह योजना वास्तव में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व तथा पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के सतत प्रयासों से संचालित रामलला दर्शन योजना आज प्रदेशवासियों की आस्था को सम्मान देने वाली एक ऐतिहासिक पहल के रूप में स्थापित हो चुकी है। यह योजना श्रद्धालुओं को केवल धार्मिक स्थलों के दर्शन ही नहीं करा रही, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक एकात्मता से भी जोड़ रही है। सरगुजा संभाग से रवाना हुई भारत गौरव ट्रेन इसी जनसेवा, सुशासन और जनआस्था के सशक्त समन्वय का प्रेरक उदाहरण है।

19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत रेखे ने रचा इतिहास: 50 दिनों में पूरा किया शुक्ल यजुर्वेद का दंडक्रम पारायणम, PM मोदी ने दी बधाई

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनी शाखा के 2000 मंत्रों वाले दंडक्रम पारायणम को 50 दिनों तक बिना किसी बाधा के पूरा करने पर बधाई दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देवव्रत महेश रेखे द्वारा किया गया यह अद्भुत कार्य आने वाली पीढ़ियों द्वारा याद रखा जाएगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा:

"19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे ने जो किया है, उसे आने वाली पीढ़ियाँ याद रखेंगी!
भारतीय संस्कृति से प्रेम करने वाला हर व्यक्ति उनके इस कठोर साधना-कार्य पर गर्व महसूस करता है। उन्होंने शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनी शाखा के 2000 मंत्रों के दंडक्रम पारायणम को 50 दिनों में बिना किसी व्यवधान के पूरा किया है। इसमें कई वैदिक ऋचाएँ और पवित्र मंत्र शामिल हैं, जिन्हें उन्होंने त्रुटिहीन उच्चारण के साथ पूरा किया। वे हमारी गुरु-परंपरा के सर्वोत्तम गुणों को साकार करते हैं।

काशी के सांसद के रूप में, मुझे बेहद प्रसन्नता है कि यह अद्भुत साधना इसी पावन नगरी में संपन्न हुई। उनके परिवार, संतों, ऋषियों, विद्वानों और देशभर के उन सभी संगठनों को मेरा प्रणाम, जिन्होंने उन्हें सहयोग दिया।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि देवव्रत रेखे की यह उपलब्धि भारतीय वैदिक परंपरा की शक्ति और युवा पीढ़ी में उसकी निरंतरता का प्रेरक उदाहरण है।

काशी तमिल संगमम 4.0: भाषा, संस्कृति और सभ्यतागत एकता का नया अध्याय

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मुख्य बिंदु (Key Takeaways)

  • काशी तमिल संगमम 4.0 की शुरुआत 2 दिसंबर, 2025 से हो रही है, जो तमिलनाडु और काशी के सांस्कृतिक व सभ्यता संबंधों को आगे बढ़ाता है।

  • इस संस्करण का मुख्य आधार “लेट अस लर्न तमिल – तमिल कार्कालम” है, जिसके तहत तमिल भाषा सीखने और भाषाई एकता पर विशेष फोकस रहेगा।

  • प्रमुख कार्यक्रमों में तमिल कार्कालम (वाराणसी के विद्यालयों में तमिल शिक्षण), तमिल कर्पोम (काशी क्षेत्र के 300 छात्रों के लिए तमिल सीखने हेतु अध्ययन भ्रमण), और सेज अगस्त्य व्हीकल एक्सपीडिशन (तेनकासी से काशी तक सभ्यतागत मार्ग का अनुसरण) शामिल हैं।

  • इस वर्ष का संगमम रामेश्वरम में वैलेडिक्टरी समारोह के साथ सम्पन्न होगा, जो काशी से तमिलनाडु तक की सांस्कृतिक यात्रा का प्रतीकात्मक समापन होगा।

प्राचीन बंधन की पुनर्स्मृति: काशी तमिल संगमम क्या है?

स्रोत: काशी तमिल संगमम वेबसाइट

काशी तमिल संगमम एक ऐसे संबंध का उत्सव है, जो सदियों से भारतीय चेतना में समाहित रहा है। तमिलनाडु और काशी के बीच होने वाली यात्राएँ केवल भौगोलिक नहीं थीं, बल्कि विचारों, दर्शन, भाषाओं और परंपराओं के आदान-प्रदान की गहन सांस्कृतिक यात्राएँ थीं। संगमम इसी जीवंत ऐतिहासिक संबंध को आधुनिक समय में पुनर्जीवित करता है।

2022 में आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान शुरू हुआ यह कार्यक्रम भारत की विविध सांस्कृतिक धारा को एक सूत्र में जोड़ने का प्रयास है। यह पहल एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना से प्रेरित है, जो लोगों को विभिन्न संस्कृतियों को समझने और अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित और IIT मद्रास तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के ज्ञान साझेदारों के रूप में, संगमम में रेलवे, संस्कृति, पर्यटन, वस्त्र, युवा मामले एवं खेल मंत्रालय सहित कई मंत्रालयों और उत्तर प्रदेश सरकार की सक्रिय भागीदारी रहती है।

प्रत्येक संस्करण में तमिलनाडु के छात्र, शिक्षक, कारीगर, विद्वान, आध्यात्मिक नेता, महिला समूह और सांस्कृतिक प्रतिनिधि काशी पहुंचते हैं तथा वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या में आयोजित कार्यक्रमों, दर्शन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और संवादों में भाग लेते हैं।

काशी तमिल संगमम 4.0: “तमिल कार्कालम – लेट अस लर्न तमिल”

2 दिसंबर 2025 से प्रारंभ होने वाला 4.0 संस्करण अपने पूर्व संस्करणों की भावना को आगे ले जाता है, परंतु इस बार इसका केंद्र भाषाई शिक्षा और युवा सहभागिता है।

इस वर्ष का विषय “लेट अस लर्न तमिल – तमिल कार्कालम” सभी भारतीय भाषाओं को एक साझा "भारतीय भाषा परिवार" का हिस्सा मानते हुए भाषाई विविधता में एकता का संदेश देता है। यह संस्करण उत्तर भारत के छात्रों के लिए तमिल भाषा सीखने और तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने के नए अवसर प्रदान करता है।

तमिलनाडु से 1,400 से अधिक प्रतिनिधि काशी आएंगे, जिनमें विद्यार्थी, शिक्षक, लेखक, पत्रकार, किसान, कारीगर, पेशेवर, महिलाएँ और आध्यात्मिक विद्वान शामिल होंगे।

काशी तमिल संगमम 4.0: प्रमुख पहलें

1. उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को तमिल सिखाना – “तमिल कार्कालम”

  • 50 तमिल शिक्षक (DBHPS प्रचारकों सहित) वाराणसी के 50 स्कूलों में 2–15 दिसंबर 2025 के बीच तैनात रहेंगे।

  • प्रत्येक शिक्षक कक्षा 30 छात्रों को तमिल बोलचाल, उच्चारण और मूलाक्षरों का प्रशिक्षण देंगे।

  • कुल 1,500 विद्यार्थियों को आधारभूत तमिल शिक्षा मिलेगी।

  • BHU का तमिल विभाग, CIIL मैसूरु, IRCTC और वाराणसी प्रशासन इसके समन्वय में शामिल हैं।

यह पहल तमिल शिक्षण को तमिलनाडु के बाहर विस्तृत करने का महत्वपूर्ण कदम है।

2. तमिलनाडु यात्रा के दौरान तमिल सीखना – स्टडी टूर कार्यक्रम

  • उत्तर प्रदेश के 300 कॉलेज छात्र 10 बैचों में तमिलनाडु का अध्ययन दौरा करेंगे।

  • CICT, चेन्नई में ओरिएंटेशन के बाद वे तमिल भाषा और संस्कृति पर कक्षाओं में भाग लेंगे।

  • प्रमुख संस्थान (IIT मद्रास, शास्त्र यूनिवर्सिटी, पांडिचेरी विवि, कांचीपुरम के संस्थान आदि) छात्रों की मेजबानी करेंगे।

  • प्रत्येक छात्र को प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।

यह कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के युवाओं को प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से तमिल भाषा व संस्कृति से परिचित कराता है।

3. सेज अगस्त्य व्हीकल एक्सपीडिशन (SAVE)

  • 2 दिसंबर 2025 को तेनकासी से शुरू होकर 10 दिसंबर 2025 को काशी पहुंचेगा।

  • यह यात्रा ऋषि अगस्त्य के पौराणिक मार्ग पर आधारित है।

  • चेरी, चोल, पांड्य, पल्लव, चालुक्य और विजयनगर साम्राज्यों की ऐतिहासिक कड़ियों को रेखांकित करेगी।

  • तमिल साहित्य, सिद्ध चिकित्सा और साझा विरासत पर भी प्रकाश डालेगी।

यह यात्रा तमिलनाडु और काशी के बीच प्राचीन सभ्यतागत संबंधों को सम्मानित करती है।

काशी तमिल संगमम: 1.0 से 4.0 तक की यात्रा

KTS 1.0 (2022)

  • 2,500+ प्रतिभागी

  • काशी, प्रयागराज और अयोध्या के व्यापक दर्शन और संवाद

  • सांस्कृतिक कार्यक्रम, शैक्षणिक सत्र और प्रदर्शनियाँ

KTS 2.0 (2023)

  • 1,435 प्रतिनिधि

  • PM के भाषण का पहली बार रियल-टाइम तमिल अनुवाद

  • 2 लाख से अधिक आगंतुकों वाली बड़ी प्रदर्शनी

  • डिजिटल आउटरीच में 8.5 करोड़ की पहुंच

KTS 3.0 (2025)

  • ऋषि अगस्त्य पर केंद्रित प्रदर्शनियाँ और सत्र

  • महाकुंभ 2025 और राम मंदिर, अयोध्या के दर्शन

  • NEP 2020 के अनुरूप भारतीय ज्ञान प्रणाली आधारित कार्यक्रम

काशी–तमिल बंध को सुदृढ़ करना: एक जीवंत सांस्कृतिक सततता

चारों संस्करणों ने दिखाया है कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान तभी प्रभावी होता है, जब वह अनुभव और सहभागिता पर आधारित हो।
KTS 4.0 इस यात्रा को नई दिशा देता है—भाषाई सीखने, युवाओं की सहभागिता और द्विपक्षीय सांस्कृतिक समझ को केंद्र में रखकर।

यह पहल एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को मूर्त रूप देती है, जहाँ भाषाएँ, परंपराएँ और विचार एकता के सूत्र में जुड़ते हैं।



काशी तमिल संगम 4.0: तमिलनाडु और काशी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का चौथा संस्करण

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वाराणसी, 29 नवंबर 2025: तमिलनाडु और काशी के सभ्यतागत और ऐतिहासिक संबंधों को समर्पित पहल काशी तमिल संगम का चौथा संस्करण 2 से 15 दिसंबर 2025 तक वाराणसी में आयोजित होगा।

पहले ट्रेन का शुभारंभ

आज (29 नवंबर 2025) कन्याकुमारी से पहले बैच की यात्रा शुरू हुई, जिसमें 45 प्रतिनिधि शामिल हैं। त्रिची से 86 और चेन्नई से 87 प्रतिनिधियों के जुड़ने के बाद इस पहले बैच में कुल 216 प्रतिभागी होंगे। इस समूह में शामिल हैं:

  • 50 तमिल साहित्य विशेषज्ञ

  • 54 सांस्कृतिक विद्वान

  • छात्र, शिक्षक, शिल्पकार, शास्त्रीय गायक और आध्यात्मिक ग्रंथों के शिक्षक एवं छात्र

कन्याकुमारी रेलवे स्टेशन पर स्थानीय विधायक एम.आर. गांधी और जनता ने प्रतिनिधियों को विदाई दी।

उद्घाटन और मुख्य कार्यक्रम

काशी तमिल संगम 4.0 का औपचारिक उद्घाटन 2 दिसंबर 2025 को NaMo घाट, वाराणसी में होगा। इस वर्ष का आयोजन कार्तिकेय दीपम (4 दिसंबर), तमिलनाडु के प्रमुख त्योहार के समय संपन्न हो रहा है।

इस कार्यक्रम में 1,500 से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे, जो भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को समझने और साझा करने के लिए ज्ञान-सत्रों में भाग लेंगे। आठ दिवसीय यात्रा के दौरान प्रतिभागी वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों जैसे प्रयागराज और अयोध्या का दौरा करेंगे। इसके अलावा वे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों जैसे:

  • काशी विश्वनाथ मंदिर

  • NaMo घाट

  • हनुमान घाट

  • बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय

  • सारनाथ

  • अयोध्या मंदिर

का भ्रमण भी करेंगे।

प्रमुख पहल और शिक्षा कार्यक्रम

  • “एक भारत श्रेष्ठ भारत” अभियान के तहत चार प्रमुख सहयोगी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

  • इस वर्ष का विषय “चलो तमिल सीखें – तमिल कर्कलम” है, जो यह संदेश देता है कि सभी भारतीय भाषाएँ एक ही परिवार की सदस्य हैं।

  • संत अगस्त्य वाहन यात्रा, तेनकसी (तमिलनाडु) से काशी (उत्तर प्रदेश) तक 2 दिसंबर को शुरू होकर 12 दिसंबर को वाराणसी में समाप्त होगी। यह यात्रा आदि वीर पराक्रमा पांडियन की ऐतिहासिक यात्रा का स्मरण करती है, जिन्होंने तमिलनाडु से काशी तक सांस्कृतिक एकता का संदेश फैलाया और शिव मंदिर की स्थापना की।

  • “उत्तर प्रदेश के छात्रों को तमिल पढ़ाना” कार्यक्रम के तहत, यूपी के छात्र तमिलनाडु आएंगे और उन्हें तमिल भाषा की समृद्धि से परिचित कराया जाएगा। इसमें 10 बैचों में 30-30 कॉलेज छात्र शामिल होंगे।

उद्देश्य और महत्व

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी पहल काशी तमिल संगम का उद्देश्य है:

  • तमिलनाडु और काशी के बीच स्थायी सांस्कृतिक और लोगों से लोगों का संबंध मजबूत करना

  • इस सरकारी कार्यक्रम में भागीदारी की बढ़ती उत्सुकता को पूरा करना

  • तमिल भाषा और संस्कृति को भारत के अन्य हिस्सों तक पहुँचाना और प्राचीन तमिल ग्रंथों के प्रचार को बढ़ावा देना

यह आयोजन भारतीय विविधता और संस्कृति के सांस्कृतिक संवाद और एकता का प्रतीक है।



काशी तमिल संगमम् 4.0: तमिल–काशी सभ्यतागत सेतुबंध का विस्तार और ‘तमिल कार्कलम’ के साथ भाषाई एकता का उत्सव

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2 दिसंबर 2025 से, शिक्षा मंत्रालय काशी और तमिलनाडु के बीच गहरे सभ्यतागत संबंधों का उत्सव मनाने के लिए काशी तमिल संगमम् (KTS) 4.0 का आयोजन कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न से प्रेरित यह पहल दोनों क्षेत्रों के बीच प्राचीन सभ्यतागत, सांस्कृतिक, भाषाई और जन-जातीय संबंधों को सम्मान देने की परंपरा को आगे बढ़ाती है, जो 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना को साकार करती है।

यह कार्यक्रम आईआईटी मद्रास और बीएचयू वाराणसी द्वारा समन्वित किया जा रहा है तथा संस्कृति मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय, आईआरसीटीसी और उत्तर प्रदेश सरकार का सहयोग प्राप्त है।

2022 में शुरुआत के बाद से, काशी तमिल संगमम् को अत्यधिक सार्वजनिक सहभागिता प्राप्त हुई है और यह भारत की दो प्राचीन ज्ञान परंपराओं को पुनः जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक सेतु बन गया है। पिछले तीन संस्करणों की सफलता के आधार पर, चौथा संस्करण सीखने के आदान-प्रदान, सांस्कृतिक अनुभव, शैक्षणिक संवाद और युवाओं की अधिक भागीदारी को बढ़ाने का लक्ष्य रखता है।

2025 की थीम: “तमिल कार्कलम – Learn Tamil”

KTS 4.0 का आयोजन “Learn Tamil – Tamil Karkalam” थीम पर होगा, जिसका उद्देश्य तमिल भाषा सीखने को पूरे भारत में बढ़ावा देना और भारत की शास्त्रीय भाषाई एवं साहित्यिक विरासत की व्यापक सराहना विकसित करना है।

इस संस्करण में तमिलनाडु से 1,400 से अधिक प्रतिनिधि निम्नलिखित सात श्रेणियों में भाग लेंगे:

  1. छात्र

  2. शिक्षक

  3. लेखक एवं मीडिया पेशेवर

  4. कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र

  5. प्रोफेशनल्स और कारीगर

  6. महिलाएँ

  7. आध्यात्मिक विद्वान एवं साधक

प्रतिनिधि वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या के 8-दिवसीय अनुभवात्मक भ्रमण पर जाएंगे, जिसमें संवाद, सेमिनार, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और विरासत से परिचय शामिल होगा।

प्रतिनिधियों को वाराणसी में महत्वपूर्ण तमिल धरोहर स्थलों पर ले जाया जाएगा, जिनमें महाकवि सुब्रमण्य भारतीयर का पैतृक घर, केदार घाट, “लिटिल तमिलनाडु” क्षेत्र में स्थित काशी मदम, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, और माता अन्नपूर्णा मंदिर शामिल हैं। वे बीएचयू के तमिल विभाग का भी शैक्षणिक एवं साहित्यिक संवाद हेतु दौरा करेंगे।

KTS 4.0 की प्रमुख पहलें

1. तेनकासी से काशी तक 'ऋषि अगस्त्य वाहन यात्रा'

“ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान” 2 दिसंबर 2025 को तेनकासी से शुरू होकर 10 दिसंबर 2025 को काशी पहुँचेगा। यह यात्रा पांड्य शासक श्री आदि वीर पराक्रम पांडियन की उस ऐतिहासिक यात्रा को दर्शाती है, जिन्होंने तमिलनाडु से काशी तक जाकर भारतीय संस्कृति में एकता का संदेश फैलाया और तेनकासी (दक्षिण काशी) की स्थापना की।

यह अभियान चेर, चोल, पांड्य, पल्लव, चालुक्य और विजयनगर कालखंडों से जुड़ी सभ्यतागत कड़ियों, शास्त्रीय तमिल साहित्य, सिद्ध चिकित्सा तथा साझा विरासत को प्रदर्शित करेगा।

2. उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में तमिल शिक्षण

“तमिल कार्कलम” अभियान के तहत 50 हिंदी जानने वाले तमिल शिक्षक काशी के विद्यालयों में छात्रों को तमिल भाषा सिखाएँगे।

3. उत्तर प्रदेश के छात्रों के लिए तमिल अध्ययन भ्रमण

काशी के 300 कॉलेज छात्र 15-दिवसीय तमिल शिक्षण कार्यक्रम के लिए तमिलनाडु के विभिन्न संस्थानों का दौरा करेंगे।
सीआईसीटी चेन्नई ओरिएंटेशन व अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराएगा, जबकि होस्ट संस्थान छात्रों को तमिलनाडु की विरासत, परंपराओं और काशी से ऐतिहासिक संबंधों से परिचित कराएँगे। इन छात्रों का चेन्नई में विशेष स्वागत किया जाएगा।

काशी तमिल संगमम् 4.0 सांस्कृतिक आदान-प्रदान, भाषाई समृद्धि और ज्ञान-साझाकरण के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के भारत सरकार के संकल्प को पुनर्स्थापित करता है। विविध समुदायों को एक साथ लाकर यह कार्यक्रम भारत की जीवंत सभ्यतागत निरंतरता और सांस्कृतिक एकात्मता को दर्शाता है।

पंजीकरण जानकारी

KTS 4.0 के लिए दो अलग-अलग पंजीकरण पोर्टल लॉन्च किए गए हैं:

1. सभी श्रेणियों के प्रतिभागियों हेतु

पोर्टल: https://kashitamil.iitm.ac.in/
पंजीकरण समाप्त: 21 नवंबर 2025, शाम 8 बजे
चयन क्विज़: 23 नवंबर 2025, सुबह 10 बजे – शाम 5 बजे

2. तमिलनाडु भ्रमण हेतु चयनित 300 छात्रों के लिए

पोर्टल: https://kashitamil.bhu.edu.in/


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चलाईं 4 नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें, भारतीय रेल के आधुनिकीकरण में एक और बड़ा कदम

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वाराणसी-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वाराणसी से चार नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये ट्रेनें — बनारस–खजुराहो, फिरोजपुर–दिल्ली, लखनऊ–सहारनपुर और एर्नाकुलम–बेंगलुरु — भारत की आधुनिक रेल व्यवस्था को और मजबूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम हैं।

इस अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने सभी गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया और बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी की जनता को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि आज का दिन ‘विकास के पर्व’ के रूप में मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के हर विकसित देश की प्रगति का आधार मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) रहा है और भारत भी अब उसी राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इन चार नई ट्रेनों के साथ देश में वंदे भारत एक्सप्रेस की कुल संख्या 160 से अधिक हो गई है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “वंदे भारत, नामो भारत और अमृत भारत जैसी ट्रेनें भारतीय रेल के अगले युग की नींव रख रही हैं।” उन्होंने बताया कि वंदे भारत ट्रेन “भारत में बनी है, भारत के लिए बनी है, और भारतवासियों के गर्व का प्रतीक है।”

आस्था, संस्कृति और विकास का संगम

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में तीर्थ यात्रा सदियों से राष्ट्रीय चेतना का माध्यम रही है। अब इन तीर्थ स्थलों को वंदे भारत नेटवर्क से जोड़कर संस्कृति और विकास के बीच एक सेतु बनाया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि प्रयागराज, अयोध्या, हरिद्वार, चित्रकूट और खजुराहो जैसे पवित्र स्थलों को जोड़ने से धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी और यह भारत की संस्कृति, आस्था और विकास यात्रा का संगम बनेगा।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष 11 करोड़ श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए वाराणसी आए और 6 करोड़ से अधिक भक्तों ने राम मंदिर, अयोध्या में रामलला के दर्शन किए। इससे हजारों करोड़ रुपये का आर्थिक प्रवाह हुआ है, जिससे होटल, व्यापार, परिवहन, कला और नौकायन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर बने हैं।

विकसित हो रहा है बनारस

प्रधानमंत्री ने कहा कि वाराणसी आज विकसित काशी के रूप में उभर रही है। शहर में स्वास्थ्य, सड़क, गैस पाइपलाइन, डिजिटल कनेक्टिविटी और खेल सुविधाओं में तेजी से सुधार हो रहा है।
उन्होंने बताया कि आज बनारस में महामना कैंसर हॉस्पिटल, शंकर नेत्रालय, BHU का एडवांस ट्रॉमा सेंटर और पांडेयपुर का मंडलीय अस्पताल जैसी सुविधाएँ हैं, जो पूरे पूर्वांचल और आसपास के राज्यों के लिए वरदान साबित हो रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत और जन औषधि केंद्रों के कारण गरीब मरीजों ने लाखों रुपये की बचत की है। इसी कारण आज काशी को पूर्वांचल की स्वास्थ्य राजधानी कहा जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि रोपवे प्रोजेक्ट, गंजारी और सिगरा स्टेडियम, और सड़क व इंटरनेट नेटवर्क के विकास से बनारस का हर आगंतुक एक नई ऊर्जा और अनुभव महसूस करेगा।

बच्चों की प्रतिभा को मिला सम्मान

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने उन विद्यार्थियों से भी मुलाकात की जिन्होंने वंदे भारत ट्रेन लॉन्च से जुड़ी पेंटिंग और कविता प्रतियोगिता में भाग लिया था। उन्होंने बच्चों की रचनात्मकता की प्रशंसा की और प्रस्ताव दिया कि देश भर के प्रतिभाशाली बच्चों के लिए एक राष्ट्रीय साहित्यिक बाल महोत्सव आयोजित किया जाए।

चार नई वंदे भारत ट्रेनें और उनके लाभ

  1. बनारस–खजुराहो वंदे भारत – यात्रा समय में लगभग 2 घंटे 40 मिनट की बचत; वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट और खजुराहो जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को जोड़ेगी।

  2. लखनऊ–सहारनपुर वंदे भारत – लगभग 7 घंटे 45 मिनट में यात्रा पूरी करेगी; हरिद्वार तक पहुंच को भी सुगम बनाएगी।

  3. फिरोजपुर–दिल्ली वंदे भारत – 6 घंटे 40 मिनट में यात्रा पूरी करेगी; पंजाब और राष्ट्रीय राजधानी के बीच व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देगी।

  4. एर्नाकुलम–बेंगलुरु वंदे भारत – यात्रा समय में 2 घंटे से अधिक की बचत; दक्षिण भारत के प्रमुख आईटी और व्यावसायिक केंद्रों को जोड़ेगी।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और अन्य गणमान्य उपस्थित रहे। वहीं, केरल के राज्यपाल राजेन्द्र अर्लेकर और अन्य केंद्रीय मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

इन चार नई ट्रेनों के शुभारंभ के साथ, वंदे भारत एक्सप्रेस भारत की तेजी, सुविधा और आत्मगौरव का प्रतीक बनती जा रही है — जो देश के सपने “विकसित भारत” की दिशा में एक और सशक्त कदम है।


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