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देशभर में ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान शुरू, जनभागीदारी से स्वच्छता का संदेश

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नई दिल्ली- देशभर में स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से ‘स्वच्छता ही सेवा 2026’ अभियान की शुरुआत हो गई है। अभियान के तहत स्वच्छता, साफ-सफाई और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

अभियान के दौरान विभिन्न स्थानों पर स्वच्छता गतिविधियों, जागरूकता कार्यक्रमों और जनभागीदारी से जुड़े आयोजनों के माध्यम से लोगों को स्वच्छता के प्रति जिम्मेदार भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान का उद्देश्य केवल सार्वजनिक स्थानों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों में स्वच्छता के प्रति स्थायी व्यवहार और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है। इसमें स्थानीय निकायों, सरकारी संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अभियान के माध्यम से स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण के निर्माण के साथ स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया जा रहा है। जनभागीदारी के जरिए देशभर में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने पर जोर रहेगा।

छत्तीसगढ़ में ‘Made in Bastar’ को बढ़ावा, 2024 से अब तक करीब ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव

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औद्योगिक विकास के साथ नए सेक्टरों पर फोकस, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और पर्यटन में निवेश की उम्मीद

रायपुर- छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए राज्य सरकार अब पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ नए और उभरते क्षेत्रों पर भी फोकस कर रही है। इसी कड़ी में ‘Made in Bastar’ को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं। वर्ष 2024 से अब तक राज्य में करीब ₹8 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव सामने आने की बात कही गई है।

राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय संसाधनों, कौशल और उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। ‘Made in Bastar’ की अवधारणा के जरिए बस्तर की स्थानीय पहचान और उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

नए क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं

छत्तीसगढ़ में औद्योगिक निवेश अब केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल, फूड प्रोसेसिंग और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

इन क्षेत्रों में निवेश से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ छोटे एवं मध्यम उद्यमों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर फूड प्रोसेसिंग और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में स्थानीय कच्चे माल और मानव संसाधन का उपयोग कर वैल्यू एडिशन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

बस्तर के स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बाजार

‘Made in Bastar’ के तहत बस्तर की स्थानीय कला, हस्तशिल्प, वन आधारित उत्पादों और अन्य पारंपरिक उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इससे स्थानीय कारीगरों, उत्पादकों और उद्यमियों के लिए आय के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।

बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में भी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इससे क्षेत्र में पर्यटन आधारित रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

निवेश से औद्योगिक आधार मजबूत करने की तैयारी

करीब ₹8 लाख करोड़ के प्रस्तावित निवेश को राज्य के औद्योगिक विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि निवेश प्रस्ताव और वास्तविक निवेश अलग-अलग चरण हैं, इसलिए इन प्रस्तावों के धरातल पर उतरने के साथ ही इनके वास्तविक आर्थिक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

राज्य में निवेश के लिए बेहतर औद्योगिक माहौल तैयार करने, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और विभिन्न क्षेत्रों में निवेशकों को सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

स्थानीय से ग्लोबल बाजार तक पहुंच बनाने की कोशिश

‘Made in Bastar’ के जरिए स्थानीय उत्पादों को केवल राज्य और देश के बाजार तक सीमित रखने के बजाय व्यापक बाजार तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ ही नए उद्योगों और निवेश के जरिए छत्तीसगढ़ को एक विविधीकृत औद्योगिक अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करने पर जोर है।

इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर फूड प्रोसेसिंग और पर्यटन तक नए क्षेत्रों में संभावित निवेश से राज्य की अर्थव्यवस्था को विविधता मिलने के साथ स्थानीय स्तर

अमेरिका में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ का रास्ता साफ, भारत-चीन पर भी असर की आशंका

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वॉशिंगटन- अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़ा एक व्यापक विधेयक पारित कर दिया है, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को देने का प्रावधान है। भारत और चीन उन प्रमुख देशों में शामिल हैं, जो इस प्रावधान से प्रभावित हो सकते हैं।

‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नामक विधेयक को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने 262-159 मतों से मंजूरी दी। इससे पहले विधेयक अमेरिकी सीनेट से भी पारित हो चुका है। अब इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

भारत समेत प्रमुख खरीदारों पर पड़ सकता है असर

विधेयक का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाना और रूस से तेल एवं गैस खरीदने वाले देशों को वैकल्पिक स्रोतों की ओर जाने के लिए प्रोत्साहित करना है। प्रस्तावित प्रावधान के तहत अमेरिका रूस से ऊर्जा खरीद जारी रखने वाले प्रमुख देशों पर भारी टैरिफ लगा सकता है। भारत और चीन को इस प्रावधान के संभावित रूप से प्रभावित देशों में प्रमुखता से बताया गया है।

हालांकि, विधेयक अपने आप भारत से आने वाले सभी सामानों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं करता। यह अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में ऐसा टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। 

भारत ने कहा- ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

अमेरिकी कदम पर भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और ऊर्जा की खरीद बाजार की परिस्थितियों तथा उपलब्धता को ध्यान में रखकर की जाती रहेगी। भारत ने यह भी कहा है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

भारत लंबे समय से रूस समेत विभिन्न देशों से ऊर्जा स्रोतों की खरीद करता रहा है। सरकार का कहना है कि ऊर्जा आपूर्ति में विविधता और किफायती कीमतें देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

भारत-अमेरिका संबंधों पर भी नजर

अमेरिकी विधेयक ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार एवं टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर बातचीत चल रही है। प्रस्तावित नए अधिकारों से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है।

अब सभी की नजर राष्ट्रपति ट्रंप के अगले कदम पर है। यदि विधेयक कानून बनता है और इसके तहत भारत जैसे देशों पर टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर ऊर्जा आयात, व्यापार लागत और व्यापक आर्थिक संबंधों पर पड़ सकता है।

शासकीय स्कूलों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का सार्थक प्रयास : कलेक्टर महोबे

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वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू की स्मृति में पांचवां प्रतिभा सम्मान समारोह एवं कॅरियर मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित, 42 प्रतिभावान छात्र-छात्राओं और खिलाड़ियों का हुआ सम्मान

जांजगीर-चांपा- खरौद के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू की स्मृति में पांचवां ‘प्रतिभा सम्मान समारोह एवं कॅरियर मार्गदर्शन’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह में खरौद के शासकीय प्राथमिक, मिडिल और हायर सेकेंडरी स्कूल के 5वीं, 8वीं, 10वीं और 12वीं कक्षा के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं सहित खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कुल 42 प्रतिभाओं को सम्मान मिला। सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में उत्साह और खुशी का माहौल रहा।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कलेक्टर जन्मेजय महोबे रहे। जिला पंचायत के सीईओ विनय पोयाम अति विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि समारोह की अध्यक्षता एडिशनल एसपी डॉ. यूलैंडन यार्क ने की। विशिष्ट अतिथियों में पामगढ़ एसडीएम आरके तम्बोली, चांपा की माउंटेनियर अमिता श्रीवास, 12वीं की टॉपर छात्रा खुशबू देवांगन, ड्रोन दीदी हेमलता मनहर, स्कूल जनभागीदारी समिति की अध्यक्ष धनेश्वरी आदित्य, केवराबाई सिदार, पार्षद डॉ. हरेकृष्ण साहू और वरिष्ठ नागरिक सुबोध शुक्ला मौजूद रहे।

कार्यक्रम की रूपरेखा और आयोजन के उद्देश्यों की जानकारी वरिष्ठ पत्रकार कुंजबिहारी साहू स्मृति आयोजन समिति खरौद के संयोजक राजकुमार साहू ने दी।

लक्ष्य तय कर अनुशासन के साथ आगे बढ़ें विद्यार्थी : कलेक्टर

कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने कहा कि शासकीय स्कूलों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए इस तरह का आयोजन एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने आयोजन समिति की पहल की सराहना करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों से विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो सराहनीय है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अनुशासन के साथ अपने लक्ष्य पर फोकस करें। जीवन में किस क्षेत्र में आगे बढ़ना है, इसे पहले तय करना चाहिए और फिर उसी दिशा में लगातार मेहनत एवं प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास करने से सफलता की राह आसान होती है।

सम्मान से विद्यार्थियों को मिलता है प्रोत्साहन : सीईओ

जिला पंचायत सीईओ विनय पोयाम ने कहा कि किसी मंच पर विद्यार्थियों को सम्मान मिलने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ता है और आगे बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने वाले ऐसे आयोजन लगातार होते रहने चाहिए।

कॅरियर को लेकर विद्यार्थियों को किया जागरूक

समारोह की अध्यक्षता कर रहे एडिशनल एसपी डॉ. यूलैंडन यार्क ने विद्यार्थियों को कॅरियर से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रतिभाओं को सम्मान मिलने से उनमें आगे और बेहतर करने की प्रेरणा पैदा होती है।

उन्होंने कहा कि शासकीय स्कूल में इस तरह का आयोजन होना महत्वपूर्ण है और आयोजन समिति की यह पहल आगे भी जारी रहनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को कॅरियर निर्माण की दिशा में आगे भी मार्गदर्शन और सहयोग देने की बात कही। इस दौरान उन्होंने साइबर सुरक्षा और यातायात जागरूकता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी विद्यार्थियों से चर्चा की।

पामगढ़ एसडीएम आरके तम्बोली ने कहा कि इस तरह के आयोजन हर स्कूल में होने चाहिए। उन्होंने कहा कि खरौद में पिछले पांच वर्षों से प्रतिभा सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है और सभी को इससे जुड़कर कार्यक्रम को सफल बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रतिभाओं के सम्मान से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे आगे बेहतर करने के लिए प्रेरित होते हैं।

माउंटेनियर, टॉपर छात्रा और ड्रोन दीदी ने साझा किए अनुभव

कॅरियर मार्गदर्शन सत्र में चांपा की माउंटेनियर अमिता श्रीवास ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि माउंट एवरेस्ट फतह करने के लिए उन्होंने करीब आठ वर्षों तक कठिन मेहनत की। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता के लिए सबसे पहले लक्ष्य तय करना जरूरी है। इसके बाद सही मार्गदर्शन और पूरी लगन के साथ लक्ष्य की दिशा में मेहनत करनी चाहिए।

12वीं की टॉपर छात्रा खुशबू देवांगन ने बताया कि उन्होंने कॉमर्स विषय से पढ़ाई कर मेरिट में स्थान हासिल किया। उन्होंने कहा कि मेहनत और पढ़ाई की सही प्लानिंग से किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने बताया कि 10वीं की मेरिट में कुछ अंकों से चूकने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 12वीं में मेरिट में स्थान बनाया। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन और पढ़ाई का शेड्यूल बनाने की सलाह दी।

वहीं ड्रोन दीदी हेमलता मनहर ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा करते हुए कहा कि एक समय वह घर की चारदीवारी में रहकर परिवार संभालती थीं, लेकिन परिवार के सहयोग और अपने प्रयासों से आज जिले की पहली ड्रोन दीदी के रूप में पहचान बना चुकी हैं और लखपति दीदी के रूप में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि परिस्थितियां कैसी भी हों, खुद पर भरोसा बनाए रखना चाहिए और जिस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, उसमें पूरी ताकत से मेहनत करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि किसी उपलब्धि के बाद मिलने वाला सम्मान खुशी देता है, लेकिन किसी विद्यार्थी की सफलता परिवार के लिए सबसे गौरव का क्षण होती है।

इन प्रतिभाओं का हुआ सम्मान

समारोह में शासकीय प्राथमिक स्कूल खाल्हेपारा के 5वीं कक्षा के मयंक कुमार यादव, मोचन रात्रे और सुशांत नोनिया तथा प्राथमिक शाला शुकुलपारा की मोहनी साहू, धानी आदित्य और संतोष आदित्य को सम्मानित किया गया।

मिडिल स्कूल शुकुलपारा की 8वीं कक्षा की यसीता आदित्य, जोनिका बर्मन और संध्या यादव का भी सम्मान हुआ।

शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल के 10वीं कक्षा के पुष्पा साहू, तरुण कुमार चौहान और वीणा नोनिया तथा 12वीं कक्षा के हिमेश कुमार आदित्य, अनिशा खूंटे, भूमि काटले, गगन साहू, दिव्या आदित्य, वंशिका नोनिया, यंकिता नोनिया, टुकेश्वर साहू और रिया सिदार को सम्मानित किया गया।

इसके अलावा गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) में आयोजित नेशनल ड्राप रो बॉल प्रतियोगिता में शामिल होनहार खिलाड़ियों भानू सिदार, देवव्रत भारद्वाज और पीयूष बंजारा को भी सम्मानित किया गया। 10वीं कक्षा में 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 14 विद्यार्थियों तथा 12वीं के चार छात्र-छात्राओं को भी सम्मान प्रदान किया गया।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में सीएमओ सत्यनारायण देवांगन, इंदलदेव समिति के अध्यक्ष कृष्णकुमार आदित्य, विजय कुमार मनहर, अजीत बंजारे, शिक्षक रामस्वरूप साहू, धन्यसाय साहू, राजेन्द्र कंवर, जागेश्वर सिदार, प्रकाश साहू, हिमांशु, विकास साहू, व्याख्याता एचएल धृतलहरे, दिलीप कुमार मिश्रा, सालिकराम कश्यप, डीसी देवांगन, भूमिका यादव, विवेक तिवारी, सोमनाथ कश्यप, लिपिक सचिन मिश्रा, अजय कश्यप, संकुल समन्वयक उपेन्द्र सिंह ध्रुव, मिडिल स्कूल शुकुलपारा के प्रधान पाठक डीके कश्यप, शिक्षक गोरेलाल कश्यप, नीलकमल साहू, रविशंकर यादव, सुरेश सिंह, भृत्य सुदामा सिदार और प्रेम आदित्य सहित शिक्षक, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन जया अग्रवाल, चांपा ने किया तथा आभार प्रदर्शन स्कूल के प्राचार्य आरके गोस्वामी ने किया।

एआई क्षेत्र में नई उड़ान भरने को तैयार छत्तीसगढ़

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 धनंजय राठौर (सयुक्त संचालक, जनसंपर्क)

रायपुर : दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में छत्तीसगढ़ भी अब एक नई छलांग लगाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार एआई को विकास, रोजगार और सुशासन के नए अवसरों से जोड़ने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। खेती-किसानी से लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासन तक हर क्षेत्र में एआई के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य में बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और जनसेवा के विभिन्न क्षेत्रों में एआई के प्रभावी उपयोग से रोजगार और नवाचार के नए अवसर सृजित करते हुए हम विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए पूरी तरह संकल्पित हैं।


500 करोड़ रुपये का मुख्यमंत्री एआई मिशन

भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने 500 करोड़ रुपये के मुख्यमंत्री एआई मिशन की शुरुआत की है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ को केवल एआई तकनीक अपनाने वाला राज्य नहीं, बल्कि इसके उपयोग और नवाचार में सिरमौर बनाना है। इस मिशन के तहत प्रदेश में 100 एआई लैब और 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए जाएंगे।

योजना के अंतर्गत लगभग 6 लाख विद्यार्थियों और डेढ़ लाख शासकीय अधिकारी- कर्मचारियों को एआई के उपयोग से जोड़ा जाएगा। साथ ही, शासन की 50 से अधिक सेवाओं को एआई के जरिए अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। युवाओं को जॉब सीकर (नौकरी तलाशने वाला) की बजाय जॉब क्रिएटर (नौकरी पैदा करने वाला) बनाने के लिए मशीन लर्निंग और डेटा साइंस का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

कृषि, स्वास्थ्य और प्रशासन में एआई का प्रयोग

इस मिशन का दायरा केवल आईटी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर आम जनता के जीवन को आसान बनाने के लिए उतारा जा रहा है। कृषि मौसम, फसल, कीट और रोगों के आंकड़ों के विश्लेषण से किसानों को समय पर सटीक सलाह मिल सकेगी। एआई आधारित तकनीक से जांच, रोग पहचान और स्वास्थ्य संसाधनों के प्रबंधन में सुधार होगा।

सुशासन एवं उद्योग

सरकारी पोर्टलों (जैसे सेवा सेतु) के विस्तार और एआई के उपयोग से योजनाओं की मॉनिटरिंग और नागरिक सेवाओं को सुगम बनाया जा रहा है। वहीं उद्योगों में उत्पादकता और ऊर्जा दक्षता बढ़ेगी। कारखानों में रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग के उपयोग से उत्पादन की गति बढ़ती है और त्रुटियाँ कम होती हैं। AI सेंसर मशीनों की स्थिति पर लगातार नजर रखते हैं और खराबी आने से पहले ही चेतावनी दे देते हैं, जिससे लागत बचती है। उद्योगों में व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को समझने और 24X7 सहायता प्रदान करने के लिए AI संचालित टूल का उपयोग किया जाता है।

नवा रायपुर बन रहा तकनीक और एआई का नया हब

नवा रायपुर को आईटी, एआई और डाटा सेंटर के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहाँ लगभग 1 हजार करोड़ रुपये के निवेश से एआई आधारित डाटा सेंटर और एआई एसईजेड विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा, नवा रायपुर में करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना का निर्णय लिया गया है। एनआईटी रायपुर और ट्रिपल आईटी (IIIT) नवा रायपुर में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के माध्यम से खनन, इस्पात, स्वास्थ्य, कृषि और स्मार्ट गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान और स्टार्टअप को बढ़ावा मिल रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए उच्च तकनीक आधारित रोजगार के नए द्वार खुल रहे हैं।

नवा रायपुर में देश का पहला एआइ आधारित डेटा सेंटर

नवा रायपुर अटल नगर में देश का पहला एआइ आधारित डेटा सेंटर सेक्टर-22 में 13.5 एकड़ में विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट न केवल प्रदेश की पहचान को नई ऊंचाई देगा, बल्कि आम जनता के लिए भी बड़े बदलाव लेकर आएगा। प्रदेश के युवाओं को बेहतर करियर के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही एआइ तकनीक का फायदा किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भी मिलेगा। डिजिटल सेवाएं मजबूत होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं का लाभ दूरदराज के क्षेत्रों तक आसानी से पहुंच सकेगा।

छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग में बड़ा फेरबदल, 25 अफसरों का तबादला; कई जिलों के CMHO बदले

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। विभाग ने 25 स्वास्थ्य अधिकारियों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की नई पदस्थापना करते हुए तबादला आदेश जारी किया है। तबादले के बाद रायपुर, महासमुंद, सुकमा, बेमेतरा, धमतरी, सूरजपुर, कोरिया, सरगुजा, बिलासपुर, मुंगेली सहित कई जिलों में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और सिविल सर्जन की जिम्मेदारियों में बदलाव हुआ है।


जारी आदेश के अनुसार कई अधिकारियों को एक जिले से दूसरे जिले में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं कुछ अधिकारियों को प्रभारी CMHO और सिविल सर्जन के पद पर पदस्थ किया गया है।






प्रमुख तबादले

  • डॉ. आई. नागेश्वर राव को प्रभारी CMHO महासमुंद से उप संचालक, राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान, रायपुर बनाया गया है।

  • डॉ. रामकेश्वर सिंह कुशवाहा को प्रभारी CMHO सुकमा से प्रभारी CMHO महासमुंद की जिम्मेदारी दी गई है।

  • डॉ. भुवन विजय कुर्रे को जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा से प्रभारी CMHO सुकमा बनाया गया है।

  • डॉ. शरद कोहाड़े को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खंडसरा, बेमेतरा से प्रभारी CMHO बेमेतरा पदस्थ किया गया है।

  • डॉ. अरुण कुमार टोंडर को प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय धमतरी से प्रभारी CMHO धमतरी बनाया गया है।

  • डॉ. यू.एल. कौशिक को प्रभारी CMHO धमतरी से प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी भेजा गया है।

  • डॉ. आदित्य सिन्हा को जिला चिकित्सालय धमतरी से प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय धमतरी की जिम्मेदारी दी गई है।

  • डॉ. अनिल कुमार शुक्ला को संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, सरगुजा से प्रभारी CMHO खैरागढ़-छुईखदान-गंडई बनाया गया है।

  • डॉ. कपिल देव पैंकरा को प्रभारी CMHO सूरजपुर से संभागीय संयुक्त संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, सरगुजा पदस्थ किया गया है।

  • डॉ. प्रशांत सिंह को प्रभारी CMHO कोरिया से प्रभारी CMHO सूरजपुर बनाया गया है।

  • डॉ. बलवंत सिंह को जिला चिकित्सालय बैकुंठपुर, कोरिया से प्रभारी CMHO कोरिया की जिम्मेदारी दी गई है।

  • डॉ. आशीष शर्मा को प्रभारी CMHO खैरागढ़-छुईखदान-गंडई से प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय खैरागढ़-छुईखदान-गंडई बनाया गया है।

  • डॉ. जगसाय सिंह सरुता को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विश्रामपुर, सूरजपुर से प्रभारी CMHO सरगुजा पदस्थ किया गया है।

  • डॉ. प्रेम सिंह मार्को को प्रभारी CMHO सरगुजा से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनहट, जिला कोरिया भेजा गया है।

  • डॉ. शीला साहा को प्रभारी CMHO मुंगेली से जिला चिकित्सालय बिलासपुर पदस्थ किया गया है।

  • डॉ. श्रीकेश गुप्ता को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरदीकला, बिलासपुर से प्रभारी CMHO मुंगेली बनाया गया है।

  • डॉ. राकेश कुमार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पंडरिया, कबीरधाम से प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय मुंगेली की जिम्मेदारी दी गई है।

  • डॉ. सत्यम कुमार पटेल को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बर्रा, रायगढ़ से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डभरा, जिला सक्ती भेजा गया है।

  • डॉ. शशांक गुप्ता को प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय बलरामपुर से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर, बलरामपुर पदस्थ किया गया है।

  • डॉ. रामप्रसाद तिर्की को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर से प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय बलरामपुर बनाया गया है।

  • डॉ. राजेंद्र राय को जिला चिकित्सालय चिरमिरी, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर से जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा पदस्थ किया गया है।

  • डॉ. अभय सिंह तोमर को प्रभारी सिविल सर्जन सह अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा से प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय चिरमिरी, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर बनाया गया है।

  • डॉ. प्रियंका सक्सेना को जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा से प्रभारी सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा की जिम्मेदारी दी गई है।

  • डॉ. जमुना प्रसाद आर्य को प्रभारी अधीक्षक, राज्य मानसिक चिकित्सालय सेंदरी, बिलासपुर से प्रभारी अधीक्षक, मानसिक चिकित्सालय मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर पदस्थ किया गया है।

  • डॉ. रक्षित जोगी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिल्हा, बिलासपुर से प्रभारी अधीक्षक, राज्य मानसिक चिकित्सालय सेंदरी, बिलासपुर की जिम्मेदारी दी गई है।

विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों को नवीन पदस्थापना पर तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

भूपेश सरकार में हुआ संवैधानिक अधिकारों का हनन, जीएसटी इंस्पेक्टर पदोन्नति में घोटाला : डॉ. विजयशंकर मिश्रा

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रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. विजयशंकर मिश्रा ने कांग्रेस की पिछली भूपेश सरकार के कार्यकाल में युवाओं के हकों पर डाका डालने और अपनों को उपकृत करने के एक और सनसनीखेज मामले के खुलासे के मद्देनजर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि भूपेश सरकार के संरक्षण में राज्य के प्रतिभावान युवाओं और कर्मचारियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया।


भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मिश्रा ने बुधवार को यहाँ एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में पत्रकार वार्ता में बताया कि छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा वर्ष 2022 में आयोजित सीमित प्रतियोगिता परीक्षा में जाँच के दौरान भारी धांधली, फर्जीवाड़ा और प्रणालीगत भ्रष्टाचार पाया गया है। इसके बाद शासन द्वारा इस परीक्षा को तत्काल प्रभाव से शून्य घोषित कर पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि 26 जून 2022 को लिपिक वर्ग से वाणिज्यिक कर निरीक्षक (टैक्स इंस्पेक्टर) के पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। जाँच समिति की रिपोर्ट (3 जुलाई 2026) ने यह साफ कर दिया है कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल म़े किस प्रकार नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं!

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मिश्रा ने बताया कि परीक्षा से पहले आरक्षण रोस्टर का पालन ही नहीं किया गया, जिससे वंचित और पिछड़े वर्गों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधी चोट पहुँचाई गयी। इसी तरह परीक्षा केंद्रों में उपस्थिति पंजी का संधारण ही नहीं किया गया ताकि मनचाहे लोगों की बैकडेट में एंट्री कराई जा सके। जाँच में पाया गया कि कई चयनित अभ्यर्थियों ने एक समान उत्तर लिखे थे। इतना ही नहीं, कॉपियों में कोडिंग व्यवस्था को जानबूझकर खत्म किया गया ताकि मनपसंद अभ्यर्थियों की पहचान उजागर रहे।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मिश्रा ने कहा कि अपनों को फायदा पहुँचाने के लिए चयन समिति के अध्यक्ष, सदस्यों और परीक्षा नियंत्रक ने खुद नियम विरुद्ध पुनर्मूल्यांकन कर चहेतों के अंक बढ़ाए। खरीदी गई कॉपियों और इस्तेमाल/शेष कॉपियों के आँकड़ों में भारी विसंगतियाँ पाई गईं, जो सीधे तौर पर फर्जी कॉपियाँ जमा करने की ओर इशारा करती हैं।

मेधावी कर्मचारियों के साथ धोखा, सभी गलत नियुक्तियाँ रद्द

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि जाँच में यह साबित हो चुका है कि भूपेश सरकार के कार्यकाल में हुई यह परीक्षा पूरी तरह दूषित और फर्जीवाड़े पर आधारित थी। अनियमितताएँ इतनी व्यापक थीं कि इसमें से ईमानदार और धांधली करने वालों को अलग करना सम्भव नहीं था। शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए 26 जून 2022 की परीक्षा एवं 1 जुलाई 2022 के तहत दिए गए सभी नियुक्ति आदेशों को तत्काल निरस्त कर दिया है। फर्जी तरीके से टैक्स इंस्पेक्टर बने सभी कर्मचारियों को उनके मूल पदों पर वापस भेज (प्रत्यावर्तित कर) दिया गया है।

जनता और युवाओं के मन में उठते सवाल

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मिश्रा ने कहा कि युवाओं और कर्मचारियों की मेहनत पर पानी फेरने वाली भूपेश सरकार को इस धांधली का जवाब देना ही होगा। क्या कांग्रेस सरकार का मकसद केवल अपनों को पिछले दरवाजे से लाभ पहुँचाना था? डॉ. मिश्रा ने कहा कि भूपेश बघेल सरकार का यह कृत्य न केवल प्रशासनिक मर्यादाओं का हनन था, बल्कि राज्य के परिश्रमी कर्मचारियों और युवाओं के विश्वास पर कुठाराघात था। अब सच सामने आ चुका है और धांधली के बल पर पाई गई नियुक्तियों को खारिज कर न्याय स्थापित किया गया है।

कचरा प्रबंधन के लिए विकसित हुआ राष्ट्रीय LCA फ्रेमवर्क, ULBs को मिलेगा कम कार्बन वाले विकल्प चुनने में वैज्ञानिक आधार

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PSA प्रो. अजय कुमार सूद ने परियोजना के परिणामों की समीक्षा की, GHG Calculator App से कचरा प्रबंधन तकनीकों के उत्सर्जन का आकलन होगा

नई दिल्ली- देश में ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management) को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और कम कार्बन वाला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रो. अजय कुमार सूद ने 16 सितंबर 2026 को ‘Development of LCA Framework for Solid Waste Management (SWM) Technologies in India’ परियोजना के परिणामों और सिफारिशों की समीक्षा की। इस दौरान परियोजना के तहत विकसित Life Cycle Assessment (LCA) Framework और GHG Calculator Web Application को प्रस्तुत किया गया।

यह परियोजना प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के सहयोग से वर्ष 2024 में शुरू की गई थी। इसे IISc बेंगलुरु, IIT मद्रास और IIT (BHU) वाराणसी के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से पूरा किया है। इसका उद्देश्य भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप ऐसा राष्ट्रीय LCA फ्रेमवर्क विकसित करना है, जिसकी मदद से शहरी स्थानीय निकाय (ULBs) विभिन्न ठोस कचरा प्रबंधन तकनीकों की तुलना कर सकें और कम कार्बन उत्सर्जन वाले विकल्पों का चयन कर सकें।

कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया का होगा आकलन

परियोजना के तहत विकसित GHG Calculator App शहरी स्थानीय निकायों के लिए तैयार किया गया है। यह मौजूदा ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का विश्लेषण करने में मदद करेगा।

एप में एनेरोबिक डाइजेशन, इंसीनरेशन/वेस्ट-टू-एनर्जी, कंपोस्टिंग, रीसाइक्लिंग और लैंडफिलिंग जैसी प्रमुख कचरा प्रबंधन प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है। इसके माध्यम से विभिन्न तकनीकों और संचालन परिदृश्यों के आधार पर उत्सर्जन का आकलन किया जा सकेगा।

मीथेन से लेकर ब्लैक कार्बन तक की जानकारी

GHG Calculator App के जरिए ULBs को नेट उत्सर्जन, उत्सर्जन से बचाव, लॉजिस्टिक उत्सर्जन और कार्बन फुटप्रिंट जैसी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, NOx और ब्लैक कार्बन जैसे विभिन्न प्रदूषकों एवं ग्रीनहाउस गैसों से संबंधित आंकड़ों का भी आकलन किया जा सकेगा।

यह टूल अलग-अलग कचरा प्रबंधन परिदृश्यों की तुलना करने और ऐसे विकल्पों की पहचान करने में मदद करेगा, जिनसे कम GHG उत्सर्जन और कम कार्बन फुटप्रिंट हासिल किया जा सके।

छह शहरों के केस स्टडी से तैयार हुआ फ्रेमवर्क

परियोजना के तहत बेंगलुरु, मैसूरु, तुमकुरु, चेन्नई, दिल्ली और वाराणसी के केस स्टडी के आधार पर विभिन्न कचरा प्रबंधन तकनीकों का LCA अध्ययन किया गया। इसमें बायोमाइनिंग, एनेरोबिक डाइजेशन, वेस्ट-टू-एनर्जी और लैंडफिलिंग जैसी तकनीकों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।

बैठक में परियोजना टीम ने GHG Calculator App का प्रदर्शन भी किया और बताया कि शहरी स्थानीय निकाय किस तरह अलग-अलग तकनीकों एवं संचालन परिस्थितियों से जुड़े उत्सर्जन का आकलन कर सकते हैं।

नई परियोजनाओं और DPR में भी उपयोगी होगा ऐप

GHG Calculator App का उपयोग केवल मौजूदा कचरा प्रबंधन व्यवस्था के मूल्यांकन तक सीमित नहीं रहेगा। इसका इस्तेमाल नई परियोजनाओं के पर्यावरणीय आकलन, विभिन्न सलाहकारों द्वारा तैयार Detailed Project Reports (DPRs) और निविदाओं में आवश्यक पर्यावरणीय प्रदर्शन संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराने में भी किया जा सकता है।

इससे ULBs को परियोजना की योजना तैयार करने से लेकर विभिन्न तकनीकों की तुलना और पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन तक एक वैज्ञानिक आधार मिल सकेगा।

स्मार्ट और कम उत्सर्जन वाले कचरा प्रबंधन की ओर कदम

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने परियोजना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि LCA फ्रेमवर्क और विकसित एप्लिकेशन शहरी स्थानीय निकायों को विज्ञान आधारित निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन उपकरणों के माध्यम से देशभर में स्मार्ट, लचीली और कम उत्सर्जन वाली ठोस कचरा प्रबंधन प्रणालियों की दिशा में बदलाव को समर्थन मिल सकता है।

वैज्ञानिक सचिव डॉ. पारविंदर मैनी ने परियोजना को स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के उद्देश्यों के अनुरूप बताया। उन्होंने देशभर में इस तरह के समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

जलवायु-अनुकूल कचरा प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय रोडमैप

परियोजना में मौजूदा और भविष्य की ठोस कचरा प्रबंधन प्रणालियों की दक्षता बढ़ाने के लिए कई रणनीतिक सिफारिशें भी दी गई हैं। इसके साथ ही भारत में जलवायु-अनुकूल और कम उत्सर्जन वाले कचरा प्रबंधन की ओर संक्रमण के लिए एक राष्ट्रीय रोडमैप भी प्रस्तावित किया गया है।

यह पहल भारत सरकार के Waste to Wealth Mission और Swachh Bharat Mission-Urban जैसे राष्ट्रीय अभियानों के उद्देश्यों के अनुरूप है। इसका उद्देश्य तकनीकी विकल्पों के चयन को अधिक वैज्ञानिक बनाते हुए देश के शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करना है।

बैठक के दौरान ‘Development of LCA Framework for Solid Waste Management (SWM) Technologies in India’ नामक रिपोर्ट भी जारी की गई।

जी20 ऊर्जा बैठक में भारत ने रखा सुरक्षित और किफायती ऊर्जा का पक्ष

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मनोहर लाल ने कहा- विकास के लिए सुरक्षित, सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा जरूरी; महत्वपूर्ण खनिजों की मजबूत आपूर्ति शृंखला पर दिया जोर

ह्यूस्टन- केंद्रीय विद्युत एवं आवासन और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजित जी20 ऊर्जा प्रचुरता मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत का नेतृत्व करते हुए सुरक्षित, किफायती और विश्वसनीय ऊर्जा व्यवस्था को वैश्विक विकास की बुनियाद बताया। अमेरिका की जी20 अध्यक्षता में 14 से 16 सितंबर तक आयोजित बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, नियामक दक्षता और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

बैठक के दौरान मनोहर लाल ने कहा कि ऊर्जा की सुरक्षित और किफायती उपलब्धता विशेष रूप से विकासशील देशों के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों से निपटने के लिए देशों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा अलग-अलग देशों की परिस्थितियों और विकास प्राथमिकताओं का सम्मान करने पर जोर दिया।

552 गीगावाट पहुंची भारत की बिजली उत्पादन क्षमता

केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक मंच पर भारत के ऊर्जा क्षेत्र में हुए बदलावों और उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत की स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता बढ़कर 552 गीगावाट हो गई है। इसमें आधे से अधिक क्षमता गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आती है।

उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसे ऊर्जा तंत्र का निर्माण कर रहा है, जो लचीला, भविष्य के लिए तैयार, डिजिटल, विकेंद्रीकृत और उपभोक्ता-केंद्रित हो। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के कई प्रमुख लक्ष्यों को समय से पहले हासिल किया है। भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-जीरो का लक्ष्य भी निर्धारित किया है।

निवेश और परियोजनाओं के लिए आसान हुई मंजूरी प्रक्रिया

मनोहर लाल ने ऊर्जा क्षेत्र में नियामक सुधारों और निवेश को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी। उन्होंने नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम, PARIVESH और पीएम गति शक्ति जैसी पहलों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इन पहलों से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए मंजूरी प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और पूर्वानुमेय बनाने में मदद मिली है। साथ ही, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और ऊर्जा क्षेत्र में निजी एवं अन्य भागीदारों की भागीदारी तथा निवेश को सुगम बनाने के लिए भी कई सुधार किए गए हैं।

महत्वपूर्ण खनिजों पर भारत का जोर

बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल बुनियादी ढांचे और उभरती प्रौद्योगिकियों के दौर में महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित और विविधीकृत आपूर्ति अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने भारत के राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन का उल्लेख करते हुए बताया कि यह मिशन खनिजों की पूरी मूल

रूस से तेल खरीद पर 100% टैरिफ की धमकी, भारत ने कहा- ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं

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 नई दिल्ली। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की संभावित अमेरिकी कार्रवाई के बीच भारत ने अपना रुख स्पष्ट किया है। अमेरिकी कांग्रेस में रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़ा विधेयक पारित होने के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने घटनाक्रम का संज्ञान लिया है और आगे की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।




विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। मंत्रालय के मुताबिक, देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से आयात जारी रखेगा।

बदलते बाजार के हिसाब से होंगे फैसले

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा आयात से जुड़े फैसले अंतरराष्ट्रीय बाजार की बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे। भारत किसी एक देश या स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय ऊर्जा आपूर्ति के विभिन्न विकल्पों पर आगे बढ़ेगा।

मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित प्रभाव को लेकर भारत और अमेरिका के बीच हाल के महीनों में उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। यह मुद्दा अमेरिकी अधिकारियों के साथ विभिन्न स्तरों पर उठाया गया है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर को लेकर भी चिंता

भारत ने कहा है कि अमेरिकी प्रतिबंधों की संभावित व्यवस्था का असर केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। भारत ने इस पहलू को अमेरिकी पक्ष के सामने भी रखा है।

संभावित 100 फीसदी टैरिफ के मद्देनजर भारत ने अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का संकेत दिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, सरकार इस मामले में व्यापार और उद्योग जगत के साथ करीबी समन्वय करेगी और संभावित प्रभावों से निपटने के लिए आगे की रणनीति पर काम करेगी।

अभी अगले कदम पर स्थिति स्पष्ट नहीं

भारत सरकार ने फिलहाल अमेरिकी कानून के संभावित आर्थिक प्रभाव का कोई अंतिम आकलन सार्वजनिक नहीं किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही है। हालांकि, भारत ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अमेरिकी कानून लागू होने की स्थिति में वह कौन-से विशिष्ट कदम उठाएगा।

भारत का मौजूदा रुख मुख्य रूप से दो बातों पर केंद्रित है—ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा और देश के व्यापारिक एवं आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

PM मोदी का 76वां जन्मदिन आज, देशभर में सेवा संकल्प अभियान की शुरुआत

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 17 सितंबर को अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रही है। भाजपा ने प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को चिह्नित करते हुए ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू किया है। यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा। इसके तहत सेवा कार्य, स्वच्छता अभियान, रक्तदान शिविर और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।


काशी और वडनगर से शुरू होगी बाइक यात्रा

प्रधानमंत्री मोदी के जन्मस्थान गुजरात के वडनगर और उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी से दो बाइक यात्राएं शुरू की जा रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, वडनगर से वाराणसी और वाराणसी से वडनगर जाने वाली यात्राएं एक साथ शुरू होकर अक्टूबर में पूरी होंगी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह वडनगर से और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह वाराणसी से यात्रा को रवाना करेंगे।

इन यात्राओं के जरिए 10 राज्यों के 193 जिलों और करीब 1,159 गांवों तक पहुंचने की योजना है। अभियान में युवाओं की भागीदारी भी रखी गई है।

काशी में विशेष आयोजन

वाराणसी में प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर में धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई है। कार्यक्रम में एनडीए से जुड़े नेता और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होने वाले हैं।

गुजरात में भी होंगे कई कार्यक्रम

प्रधानमंत्री के जन्मस्थान वडनगर समेत गुजरात के कई हिस्सों में जन्मदिन के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। राज्य में दीप प्रज्ज्वलन समेत कई सामाजिक और सेवा गतिविधियां रखी गई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, गुजरात के अलग-अलग स्थानों पर बड़ी संख्या में दीये जलाने की तैयारी की गई है।

उज्जैन में दीपोत्सव की तैयारी

मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी प्रधानमंत्री के जन्मदिन के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। राज्य में भाजपा की ओर से जन्मदिन के साथ सेवा संकल्प अभियान से जुड़े कार्यक्रमों की शुरुआत की जा रही है।

दिल्ली में SEMICON India 2026 का उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज नई दिल्ली के यशोभूमि में SEMICON India 2026 का उद्घाटन करेंगे। तीन दिवसीय यह आयोजन 17 से 19 सितंबर तक चलेगा। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, कार्यक्रम में 52 देशों के प्रतिनिधियों और 600 से अधिक कंपनियों की भागीदारी है। प्रधानमंत्री उद्घाटन अवसर पर संबोधित भी करेंगे।

इस साल SEMICON India का विषय ‘Silicon to Systems: Building the Ecosystem’ है। आयोजन में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े उद्योग, निवेशक, शोधकर्ता, स्टार्टअप और नीति-निर्माता हिस्सा ले रहे हैं।

अरब सागर में भारत-पाकिस्तान के युद्धपोत टकराए

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भारतीय नौसेना के कोलकाता-क्लास डेस्ट्रॉयर से टकराया PNS हुनैन, भारत ने पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारी को किया तलब


नई दिल्ली। अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में मंगलवार शाम भारतीय और पाकिस्तानी नौसेना के दो जहाजों के बीच टक्कर हो गई। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान नौसेना का जहाज PNS हुनैन तेज रफ्तार से आगे बढ़ते हुए भारतीय नौसेना के एक फ्रंटलाइन कोलकाता-क्लास गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर के बेहद करीब पहुंच गया, जिसके बाद दोनों जहाजों की टक्कर हुई।

घटना के समय भारतीय युद्धपोत नियमित निगरानी मिशन पर था। भारतीय पक्ष के अनुसार, PNS हुनैन का भारतीय युद्धपोत के बेहद करीब आना असुरक्षित और गैर-पेशेवर तरीके से संचालन का मामला था।

भारतीय युद्धपोत को बड़ा नुकसान नहीं

टक्कर के बावजूद भारतीय नौसेना के युद्धपोत को किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। वहीं, PNS हुनैन को गंभीर क्षति पहुंचने की बात सामने आई है और घटना के बाद वह वापस बंदरगाह लौट गया।

घटना को लेकर भारत ने राजनयिक स्तर पर भी आपत्ति दर्ज कराई है। नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग के चार्ज द अफेयर्स को विदेश मंत्रालय ने तलब कर घटना पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने इस्लामाबाद स्थित अपने चार्ज द अफेयर्स को भी पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के समक्ष समान विरोध दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

1991 के समझौते के अनुच्छेद 10 का हवाला

भारत ने इस घटना के संदर्भ में अप्रैल 1991 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के अनुच्छेद 10 का हवाला दिया है। भारत का कहना है कि इस प्रावधान के तहत दोनों देशों की सैन्य गतिविधियों के दौरान अग्रिम सूचना और आवश्यक सावधानी से जुड़े नियमों का पालन किया जाना चाहिए।

नई दिल्ली ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज का संचालन इन प्रावधानों के अनुरूप नहीं था।

कोलकाता-क्लास और PNS हुनैन में बड़ा अंतर

भारतीय नौसेना का कोलकाता-क्लास डेस्ट्रॉयर आधुनिक स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल युद्धपोत है। इसका विस्थापन करीब 7,400 टन, लंबाई लगभग 163 मीटर और चौड़ाई करीब 17.4 मीटर है। इसमें आधुनिक रडार और सेंसर के साथ लंबी दूरी की मिसाइल, वायु रक्षा और पनडुब्बी रोधी हथियार प्रणालियां मौजूद हैं। जहाज करीब 300 कर्मियों को ले जा सकता है और दो हेलिकॉप्टर संचालित करने में सक्षम है।

इसके मुकाबले PNS हुनैन यारमूक-क्लास बैच-2 का ऑफशोर पेट्रोल वेसल है। इसे वर्ष 2024 में पाकिस्तानी नौसेना में शामिल किया गया था। इसका विस्थापन करीब 2,600 टन, लंबाई लगभग 98 मीटर और चौड़ाई करीब 14.5 मीटर है। यह मुख्य रूप से समुद्री गश्त, निगरानी, समुद्री सुरक्षा और सीमित लड़ाकू अभियानों के लिए तैयार किया गया है।

अलग-अलग भूमिका के लिए बनाए गए हैं दोनों जहाज

कोलकाता-क्लास युद्धपोत का डिजाइन मुख्य रूप से उच्च-तीव्रता वाले नौसैनिक अभियानों के लिए किया गया है, जबकि PNS हुनैन जैसी ऑफशोर पेट्रोल पोत श्रेणी की प्राथमिक भूमिका समुद्री निगरानी और सुरक्षा है। ऐसे में दोनों जहाजों का आकार, विस्थापन, हथियार क्षमता और परिचालन भूमिका एक-दूसरे से काफी अलग है।

घटना से समुद्री संचालन पर उठे सवाल

अरब सागर के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई इस टक्कर ने नौसैनिक जहाजों के सुरक्षित संचालन और समुद्री नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। खासकर दो देशों के युद्धपोतों की मौजूदगी वाले क्षेत्र में दूरी बनाए रखने, संचार और सुरक्षित नौवहन प्रक्रियाओं का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है।

भारत ने घटना पर औपचारिक राजनयिक विरोध दर्ज करा दिया है। फिलहाल पाकिस्तान की ओर से इस घटना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियों से जुड़े समझौतों के मद्देनजर यह मामला अब राजनयिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण हो गया है।

नवा रायपुर में राज्य निर्वाचन आयुक्तों के 32वें अखिल भारतीय सम्मेलन का राज्यपाल रामेन डेका ने किया शुभारंभ

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Chhattisgarh Local Body Election Year Book- 2026 का किया विमोचन

रायपुर- छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने बताया कि हर वर्ष अलग-अलग राज्यों में होने वाले राज्य निर्वाचन आयुक्तगणों के सम्मेलन के क्रम में 32वां सम्मेलन इस वर्ष 16-17 सितम्बर को छत्तीसगढ़ की राजधानी नवा रायपुर अटल नगर में हो रहा है। इस सम्मेलन का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा किया जा रहा है।

सम्मेलन का शुभारंभ आज माननीय राज्यपाल द्वारा किया गया। सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर मेजबान छत्तीसगढ़ के निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह, राज्य निर्वाचन आयुक्तगण की स्थाई समिति के अध्यक्ष विजय देव एवं संयोजक सुधांशु पांडे तथा प्रदेश के मुख्य सचिव विकासशील उपस्थित रहे। शुभारंभ सहारोह के इस विशेष अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका ने छत्तीसगढ़ स्थानीय निकाय निर्वाचन वार्षिकी 2026 Year Book के प्रथम संस्करण का विमोचन भी किया।

उद्घाटन उपरांत आज सम्मेलन में देशभर से विभिन्न राज्यों के पधारे राज्य निर्वाचन आयुक्तगण ने स्थानीय लोकतंत्र विशेषकर त्रिस्तरीय पंचायतों व नगरीय निकायों को और अधिक सशक्त, पारदर्शी, समावेशी, विश्वसनीय एवं सहभागी बनाने हेतु निर्वाचन के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया एवं कॉन्फ्रेंस में अलग-अलग राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्तगण और विषय-विशेषज्ञों के द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया ।

सम्मेलन के दौरान राज्य निर्वाचन आयुक्तगण द्वारा स्थानीय निकाय निर्वाचन के संचालन में सामने आने वाली चुनौतियों, अनुभवों और नवाचारों को साझा करने के क्रम में छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा "राज्य गठन उपरांत नक्सल प्रभावित बस्तर में पिछले 25 वर्षों में स्थानीय लोकतंत्र की प्रगति" विषय पर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह के निर्देशन में तैयार प्रस्तुति आयोग की सचिव  शिखा राजपूत तिवारी द्वारा प्रस्तुत की गई।

बस्तर में स्थानीय लोकतंत्र की यात्रा को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। भौगोलिक दुर्गमता, विस्तृत वन क्षेत्र, सीमित संचार सुविधाओं तथा लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित बस्तर संभाग की परिस्थितियों के बीच स्थानीय निर्वाचन कराना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं लोकतांत्रिक चुनौती रहा है। छत्तीसगढ़ में स्थानीय निकायों के निर्वाचन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया गया कि प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बल, निर्वाचन कर्मियों तथा स्थानीय समुदाय के समन्वित प्रयासों से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निरंतर सुदृढ़ किया गया है। वर्ष 2025 में नगरीय निकायों एवं त्रिस्तरीय पंचायतों के निर्वाचन एक साथ राज्यभर में, बस्तर संभाग सहित, शांतिपूर्वक एवं सफलतापूर्वक संपन्न कराने तथा पुनर्मतदान की आवश्यकता न पड़ने का उल्लेख किया गया।

मध्य प्रदेश, बिहार, राजस्थान एवं केरलम की ओर से सूचना प्रोद्योगिकी के उपयोग के संबंध में 'EVM sharing tracking policy and it's challenges and EMS SOFTWARE' 'Panchayat Delimitation 2026: Transforming Delimitation through Technology A New Era of Paperless Delimitation', 'Digitalising Elections in India', 'Re-engineering elections in the Digital Era: The Kerala Story' विषयों पर प्रस्तुतियां दी गई।

सम्मेलन में लोकतांत्रिक निर्वाचन विषय से जुड़े प्रिंसटन यूनिवर्सिटी न्यू जर्सी अमेरिका के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विषय विशेषज्ञ ने भी हिस्सा लिया और उन्होंने भारत के राज्यों में होने वाले स्थानीय निर्वाचनों का तुलनात्मक एवं समेकित अध्ययन का सार प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रस्तुत किया। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, हैदराबाद एवं भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड, बेंगलूरु के ईलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के विषय विशेषज्ञ ने भी सम्मेलन में अपने संस्थानों की अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करते हुए बताया कि निर्वाचन में उपयोग होने वाली इलेक्ट्रानिक वोति वोटिंग मशीन हर प्रकार से सुरक्षित है और इसमें लगातार नवाचार करते हुए राज्य निर्वाचन आयोगों के अनुकूल इसका विकास एवं उत्पादन किया जा रहा है।

झीरम घाटी हत्याकांड के दोषियों को मृत्युदंड न्याय की जीत : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री ने कहा - झीरम घाटी हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का पीड़ादायक अध्याय, इसकी कटु स्मृतियां लंबे समय तक देती रहेंगी पीड़ा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लौह संकल्प और दृढ़ नेतृत्व में सशस्त्र माओवाद के चंगुल से मुक्त हुआ छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री साय ने कहा - दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर बढ़ रहा

आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए भी आत्मचिंतन का अवसर : मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने झीरम घाटी हत्याकांड मामले में दोषी पाए गए सभी दस माओवादियों को जगदलपुर एनआईए कोर्ट द्वारा मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने को न्याय की जीत बताया है।

मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर लिखा है कि झीरम घाटी में हुआ बर्बर हत्याकांड छत्तीसगढ़ के इतिहास का वह पीड़ादायक अध्याय है, जिसकी कटु स्मृतियां हमें लंबे समय तक पीड़ा देती रहेंगी। इस जघन्य कम्युनिस्ट हिंसा में हमने प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों को भी खोया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मामले में दोषी पाए गए सभी दस माओवादियों को जगदलपुर एनआईए कोर्ट द्वारा दी गई मृत्युदंड की सजा न्याय की जीत है। एनआईए ने जिस तरह इस जांच को अंजाम तक पहुंचाया, उसकी भी सराहना होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी के लौह संकल्प और उनके दृढ़ नेतृत्व में हमने सशस्त्र माओवाद के चंगुल से प्रदेश को मुक्त कराया है। दशकों से माओवादी हिंसा झेल रहा बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास के नए युग की ओर आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अवसर विशेषकर जनजाति समाज की लाश पर राजनीति करने वालों और आतंक को बौद्धिक एवं वैचारिक समर्थन देने वालों के लिए आत्मचिंतन का भी अवसर है। दिमागी नक्सल भी यह जान लें कि निहित स्वार्थ के कारण किसी भी आतंक को प्रश्रय और आसरा देने का परिणाम सबके लिए विनाशकारी ही होता है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र और संविधान के विरुद्ध लड़ने वाले आतंक का भस्मासुर किसी विचार या क्षेत्र की सरहद को नहीं मानता है। यह समझकर उन्हें अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए।

मुख्यमंत्री साय ने झीरम घाटी के क्रूर हमले में प्राण गंवाने वाले सभी दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि  दी है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला: मामूली विभागीय सजा पर निलंबन अवधि का पूरा वेतन देने का आदेश

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बिलासपुर- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी कर्मचारी को विभागीय जांच के बाद केवल मामूली विभागीय सजा दी जाती है और उसे सेवा में बहाल कर दिया जाता है, तो निलंबन की अवधि के लिए उसके पूरे वेतन का भुगतान किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निलंबन अपने आप में कोई सजा नहीं है, बल्कि विभागीय जांच पूरी होने तक की एक अस्थायी प्रशासनिक कार्रवाई है। ऐसे में यदि जांच के बाद कर्मचारी के खिलाफ केवल मामूली दंड लगाया गया है, तो निलंबन अवधि के वेतन को रोकना उचित नहीं माना जा सकता।

रायपुर में पदस्थ महिला ASI से जुड़ा था मामला

यह मामला रायपुर में पदस्थ एक महिला सहायक उपनिरीक्षक (ASI) से संबंधित था। विभागीय कार्रवाई के चलते उन्हें कुछ समय के लिए निलंबित किया गया था। बाद में विभागीय जांच पूरी होने के बाद उन्हें सेवा में वापस बहाल कर दिया गया और उनके खिलाफ केवल मामूली विभागीय दंड लगाया गया।

मामले में निलंबन अवधि के दौरान रोके गए वेतन को लेकर विवाद सामने आया। इसी मुद्दे पर न्यायालय के समक्ष मामला पहुंचा, जहां कोर्ट ने कर्मचारी के निलंबन और बाद में दी गई विभागीय सजा के बीच के संबंध को देखते हुए वेतन भुगतान के अधिकार पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।

कोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट के फैसले का मुख्य आधार यह है कि निलंबन को अंतिम दंड नहीं माना जा सकता। यदि विभागीय जांच का परिणाम गंभीर सजा के रूप में सामने नहीं आता और कर्मचारी को मामूली दंड के साथ सेवा में बहाल कर दिया जाता है, तो निलंबन की पूरी अवधि के वेतन को रोकने का पर्याप्त आधार नहीं बनता। ऐसे मामले में कर्मचारी को 100 प्रतिशत वेतन दिए जाने का अधिकार है।

इस फैसले को सरकारी कर्मचारियों से जुड़े सेवा मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह निलंबन अवधि के दौरान वेतन और विभागीय कार्रवाई के बीच संबंध को स्पष्ट करता है।

नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध प्रकाशित न्यायिक समाचार के आधार पर तैयार की गई है; किसी मामले में अंतिम कानूनी प्रभाव संबंधित आदेश/निर्णय के मूल पाठ पर निर्भर करता है।

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