Media24Media.com: रूस से तेल खरीद पर 100% टैरिफ की धमकी, भारत ने कहा- ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं

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रूस से तेल खरीद पर 100% टैरिफ की धमकी, भारत ने कहा- ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं

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 नई दिल्ली। रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने की संभावित अमेरिकी कार्रवाई के बीच भारत ने अपना रुख स्पष्ट किया है। अमेरिकी कांग्रेस में रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़ा विधेयक पारित होने के बाद विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने घटनाक्रम का संज्ञान लिया है और आगे की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।




विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। मंत्रालय के मुताबिक, देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों से आयात जारी रखेगा।

बदलते बाजार के हिसाब से होंगे फैसले

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा आयात से जुड़े फैसले अंतरराष्ट्रीय बाजार की बदलती परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे। भारत किसी एक देश या स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय ऊर्जा आपूर्ति के विभिन्न विकल्पों पर आगे बढ़ेगा।

मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों के संभावित प्रभाव को लेकर भारत और अमेरिका के बीच हाल के महीनों में उच्चस्तरीय बातचीत हुई है। यह मुद्दा अमेरिकी अधिकारियों के साथ विभिन्न स्तरों पर उठाया गया है।

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर को लेकर भी चिंता

भारत ने कहा है कि अमेरिकी प्रतिबंधों की संभावित व्यवस्था का असर केवल द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है। भारत ने इस पहलू को अमेरिकी पक्ष के सामने भी रखा है।

संभावित 100 फीसदी टैरिफ के मद्देनजर भारत ने अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का संकेत दिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, सरकार इस मामले में व्यापार और उद्योग जगत के साथ करीबी समन्वय करेगी और संभावित प्रभावों से निपटने के लिए आगे की रणनीति पर काम करेगी।

अभी अगले कदम पर स्थिति स्पष्ट नहीं

भारत सरकार ने फिलहाल अमेरिकी कानून के संभावित आर्थिक प्रभाव का कोई अंतिम आकलन सार्वजनिक नहीं किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रही है। हालांकि, भारत ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि अमेरिकी कानून लागू होने की स्थिति में वह कौन-से विशिष्ट कदम उठाएगा।

भारत का मौजूदा रुख मुख्य रूप से दो बातों पर केंद्रित है—ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा और देश के व्यापारिक एवं आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

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