Media24Media.com: कचरा प्रबंधन के लिए विकसित हुआ राष्ट्रीय LCA फ्रेमवर्क, ULBs को मिलेगा कम कार्बन वाले विकल्प चुनने में वैज्ञानिक आधार

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

कचरा प्रबंधन के लिए विकसित हुआ राष्ट्रीय LCA फ्रेमवर्क, ULBs को मिलेगा कम कार्बन वाले विकल्प चुनने में वैज्ञानिक आधार

Document Thumbnail

PSA प्रो. अजय कुमार सूद ने परियोजना के परिणामों की समीक्षा की, GHG Calculator App से कचरा प्रबंधन तकनीकों के उत्सर्जन का आकलन होगा

नई दिल्ली- देश में ठोस कचरा प्रबंधन (Solid Waste Management) को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और कम कार्बन वाला बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रो. अजय कुमार सूद ने 16 सितंबर 2026 को ‘Development of LCA Framework for Solid Waste Management (SWM) Technologies in India’ परियोजना के परिणामों और सिफारिशों की समीक्षा की। इस दौरान परियोजना के तहत विकसित Life Cycle Assessment (LCA) Framework और GHG Calculator Web Application को प्रस्तुत किया गया।

यह परियोजना प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के सहयोग से वर्ष 2024 में शुरू की गई थी। इसे IISc बेंगलुरु, IIT मद्रास और IIT (BHU) वाराणसी के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से पूरा किया है। इसका उद्देश्य भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप ऐसा राष्ट्रीय LCA फ्रेमवर्क विकसित करना है, जिसकी मदद से शहरी स्थानीय निकाय (ULBs) विभिन्न ठोस कचरा प्रबंधन तकनीकों की तुलना कर सकें और कम कार्बन उत्सर्जन वाले विकल्पों का चयन कर सकें।

कचरा प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया का होगा आकलन

परियोजना के तहत विकसित GHG Calculator App शहरी स्थानीय निकायों के लिए तैयार किया गया है। यह मौजूदा ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था से होने वाले ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का विश्लेषण करने में मदद करेगा।

एप में एनेरोबिक डाइजेशन, इंसीनरेशन/वेस्ट-टू-एनर्जी, कंपोस्टिंग, रीसाइक्लिंग और लैंडफिलिंग जैसी प्रमुख कचरा प्रबंधन प्रक्रियाओं को शामिल किया गया है। इसके माध्यम से विभिन्न तकनीकों और संचालन परिदृश्यों के आधार पर उत्सर्जन का आकलन किया जा सकेगा।

मीथेन से लेकर ब्लैक कार्बन तक की जानकारी

GHG Calculator App के जरिए ULBs को नेट उत्सर्जन, उत्सर्जन से बचाव, लॉजिस्टिक उत्सर्जन और कार्बन फुटप्रिंट जैसी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकेगी। इसके अलावा मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, NOx और ब्लैक कार्बन जैसे विभिन्न प्रदूषकों एवं ग्रीनहाउस गैसों से संबंधित आंकड़ों का भी आकलन किया जा सकेगा।

यह टूल अलग-अलग कचरा प्रबंधन परिदृश्यों की तुलना करने और ऐसे विकल्पों की पहचान करने में मदद करेगा, जिनसे कम GHG उत्सर्जन और कम कार्बन फुटप्रिंट हासिल किया जा सके।

छह शहरों के केस स्टडी से तैयार हुआ फ्रेमवर्क

परियोजना के तहत बेंगलुरु, मैसूरु, तुमकुरु, चेन्नई, दिल्ली और वाराणसी के केस स्टडी के आधार पर विभिन्न कचरा प्रबंधन तकनीकों का LCA अध्ययन किया गया। इसमें बायोमाइनिंग, एनेरोबिक डाइजेशन, वेस्ट-टू-एनर्जी और लैंडफिलिंग जैसी तकनीकों का विस्तृत मूल्यांकन किया गया।

बैठक में परियोजना टीम ने GHG Calculator App का प्रदर्शन भी किया और बताया कि शहरी स्थानीय निकाय किस तरह अलग-अलग तकनीकों एवं संचालन परिस्थितियों से जुड़े उत्सर्जन का आकलन कर सकते हैं।

नई परियोजनाओं और DPR में भी उपयोगी होगा ऐप

GHG Calculator App का उपयोग केवल मौजूदा कचरा प्रबंधन व्यवस्था के मूल्यांकन तक सीमित नहीं रहेगा। इसका इस्तेमाल नई परियोजनाओं के पर्यावरणीय आकलन, विभिन्न सलाहकारों द्वारा तैयार Detailed Project Reports (DPRs) और निविदाओं में आवश्यक पर्यावरणीय प्रदर्शन संबंधी आंकड़े उपलब्ध कराने में भी किया जा सकता है।

इससे ULBs को परियोजना की योजना तैयार करने से लेकर विभिन्न तकनीकों की तुलना और पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन तक एक वैज्ञानिक आधार मिल सकेगा।

स्मार्ट और कम उत्सर्जन वाले कचरा प्रबंधन की ओर कदम

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने परियोजना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि LCA फ्रेमवर्क और विकसित एप्लिकेशन शहरी स्थानीय निकायों को विज्ञान आधारित निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन उपकरणों के माध्यम से देशभर में स्मार्ट, लचीली और कम उत्सर्जन वाली ठोस कचरा प्रबंधन प्रणालियों की दिशा में बदलाव को समर्थन मिल सकता है।

वैज्ञानिक सचिव डॉ. पारविंदर मैनी ने परियोजना को स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के उद्देश्यों के अनुरूप बताया। उन्होंने देशभर में इस तरह के समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए संस्थागत व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

जलवायु-अनुकूल कचरा प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय रोडमैप

परियोजना में मौजूदा और भविष्य की ठोस कचरा प्रबंधन प्रणालियों की दक्षता बढ़ाने के लिए कई रणनीतिक सिफारिशें भी दी गई हैं। इसके साथ ही भारत में जलवायु-अनुकूल और कम उत्सर्जन वाले कचरा प्रबंधन की ओर संक्रमण के लिए एक राष्ट्रीय रोडमैप भी प्रस्तावित किया गया है।

यह पहल भारत सरकार के Waste to Wealth Mission और Swachh Bharat Mission-Urban जैसे राष्ट्रीय अभियानों के उद्देश्यों के अनुरूप है। इसका उद्देश्य तकनीकी विकल्पों के चयन को अधिक वैज्ञानिक बनाते हुए देश के शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव और कार्बन उत्सर्जन को कम करने में मदद करना है।

बैठक के दौरान ‘Development of LCA Framework for Solid Waste Management (SWM) Technologies in India’ नामक रिपोर्ट भी जारी की गई।

Advertisement Sushasan Divas Advertisement Mohan Chandrakar Chhattisgarh Tourism Chhattisgarh Tourism
Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.