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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल- हम अन्नदाताओं के साथ छल नहीं होने देंगे

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित हुआ। इससे पहले सदन में हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज कहा कि यह देश और प्रदेश अन्नदाताओं का है। हम किसी भी सूरत में किसानों को उनके अधिकारों (Farmers condition in Chhattisgarh) से वंचित नहीं होने देंगे। हम अन्नदाताओं के साथ छल नहीं होने देंगे।





मुख्यमंत्री ने कहा कि चर्चा के दौरान जो लोग यहां समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर बातें कर रहे थे। दिल्ली में उन्हीं की सरकार है। वहां समर्थन मूल्य पर फसल खरीदने की मांग को लेकर किसान आंदोलन कर रहे हैं, 2 सौ से अधिक किसानों की मौत हो गई, लेकिन तब भी उस सरकार ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि किसानों पर 3 ऐसे कानून जबरदस्ती थोपे जा रहे हैं, जिसे किसान चाहते ही नहीं। उन्होंने कहा कि हमनें छत्तीसगढ़ में किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा।





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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि मैं छत्तीसगढ़ के हितों को लेकर केन्द्र को लगातार पत्र लिखता हूं। इसलिए विपक्षी सदस्यों ने आज मुझे पत्रजीवी कहा, लेकिन आदिवासियों, नौजवानों, किसानों, अनुसूचित जाति, जनजाति और छत्तीसगढ़ के हितों की बात जब भी आएगी, तो मैं हजार बार पत्र लिखूंगा। हमने किसानों की सुविधा बढ़ाने के लिए 263 नये उपार्जन केन्द्र बनाएं। प्रदेश में 2300 धान खरीदी केन्द्र होने से धान खरीदी में कहीं अव्यवस्था नहीं हुई। बारदानों की कमी के बाद भी धान खरीदी का काम सुव्यवस्थित ढंग से हुआ।





बघेल ने कहा कि केन्द्र सरकार ने जब केन्द्रीय पूल में 60 लाख मीटरिक (Farmers condition in Chhattisgarh) टन चावल जमा करने की सहमति दी थी, तो विपक्षी सदस्यों ने कहा कि केन्द्र सरकार को धन्यवाद देना चाहिए। इस पर मैंने कहा था कि जिस दिन पूरा 60 लाख मीटरिक टन चावल केन्द्रीय पूल में लिया जाएगा, उस दिन पूरा सदन उन्हें धन्यवाद दूंगा। उन्होंने कहा कि आज केन्द्र ने केवल 24 लाख मीटरिक टन जमा करने की अनुमति दी है। अब विपक्ष को पूरे 60 लाख मीटरिक टन चावल जमा कराने के लिए केन्द्र से अनुमति दिलानी चाहिए।





मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी नीतियों से कृषि के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015-16 में 13 लाख 17 हजार 583 किसानों का पंजीयन हुआ था, इनमें से 11 लाख 5 हजार 556 किसानों ने धान बेचा। 16.1 प्रतिशत किसान धान नहीं बेच पाए। इसी तरह 2016-17 में 14 लाख 51 हजार 88 किसानों का पंजीयन हुआ, इनमें से 13 लाख 27 हजार 944 किसानों ने धान बेचा। 8.5 प्रतिशत किसान धान नहीं बेच पाए। 2017-18 में 15 लाख 77 हजार 332 किसानों का पंजीयन हुआ, 12 लाख 6 हजार 224 किसानों ने धान बेचा और 23.6 प्रतिशत किसान धान नहीं बेच पाए। जबकि इस साल याने 2020-21 में 21 लाख 52 हजार 475 किसानों का पंजीयन किया गया। 20 लाख 53 हजार 483 किसानों ने धान बेचा यानि 95.38 प्रतिशत किसानों से धान की खरीदी हुई। इस बार प्रदेश में 24 लाख 86 हजार 665 हेक्टेयर रकबे में किसानों ने धान का उत्पादन किया, जो वर्ष 2015-16 की तुलना में बहुत ज्यादा है।





मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ विपक्षी सदस्य यह प्रश्न उठा रहे हैं कि अतिशेष धान राज्य सरकार क्यों बेच रही है। मैं कहना चाहता हूं कि आप हमें 60 लाख मीटरिक टन केन्द्रीय पूल में जमा करने की अनुमति दिला दीजिए, हमें बाहर धान या चावल बेचने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि हम धान का उपार्जन केन्द्र सरकार के लिए करते हैं। एक समय था जब देश में अनाज की कमी थी, तब इंदिरा जी के आव्हान पर हरित क्रांति हुई और हमारे किसानों ने उस चुनौती को स्वीकार किया। देश स्वावलंबी हुआ और आज जब आधिक्य हो गया तो आप व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने तेंदूपत्ता संग्रहण दर 2 हजार 500 रूपए से बढ़ाकर 4 हजार रूपए प्रति मानक बोरा करने के साथ-साथ समर्थन मूल्य पर खरीदे जा रहे 7 लघु वनोपजों की संख्या बढ़ाकर 52 कर दी है। इसके साथ ही हम लघु वनोपजों का वैल्यू एडीशन भी कर रहे हैं। हम लोगों ने वन अधिकार पत्र के उन मामलों का भी निराकरण किया, जो पूर्व में निराकृत नहीं किए गए थे। वनवासियों को उनकी काबिज वनभूमि के वन अधिकार पत्र वितरित करने के मामले में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल है। हमनें 4 लाख 33 हजार व्यक्तिगत प्रकरणों में 9 लाख 3 हजार 520 एकड़ और 41 हजार 16 सामुदायिक प्रकरणों में 37 लाख 870 एकड़ इस प्रकार कुल 46 लाख 4 हजार 399 एकड़ वनभूमि का अधिकार दिलाया है।





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मुख्यमंत्री ने कहा कि हमनें 2019 में नई उद्योग नीति लागू की, जिसके बाद 1249 उद्योगों की स्थापना हुई। इन उद्योगों में 16 हजार 986 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश हुआ। 22 हजार लोगों को रोजगार मिला है। इसी तरह मेगा औद्योगिक परियोजनाओं के लिए 104 एमओयू किए गए, जिससे 42 हजार 417 करोड़ रूपए का पूंजी निवेश होगा। उन्होंने कहा कि हमें निवेश को आकर्षित करने के लिए कहीं नहीं जाना पड़ा। हमनें यहीं के उद्योगपतियों पर विश्वास किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम लोगों ने 200 फूड पार्क स्थापित करने का लक्ष्य रखा है। इनमें से 111 स्थानों पर फूड पार्क के लिए जगह चिन्हित कर ली गई है।





सिंचाई से संबंधित विपक्ष के प्रश्नों का जवाब देेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अरपा-भैंसाझर एक वृहद परियोजना हो सकती थी, लेकिन उसे मध्यम बना दिया गया। बीते दो सालों में राज्य में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से वास्तविक सिंचाई 9 लाख 68 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 13 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो अपने आप में कीर्तिमान है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने 15 सालों के अपने कार्यकाल में सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए 18 हजार 225 करोड़ रूपए खर्च किए।





वास्तविक सिंचाई क्षमता (Farmers condition in Chhattisgarh) में मात्र 16 हजार हेक्टेयर की बढ़ोत्तरी हुई। प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बोलते हुए श्री भूपेश बघेल ने कहा कि प्रदेश में कानून का राज है। हम बेहतर कानून व्यवस्था देने में सफल रहे हैं। प्रदेश में नक्सली घटनाएं कम हुई है। इससे 13 साल से बंद स्कूल फिर से खुले हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, सुपोषण, मलेरिया उन्मूलन जैसे क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल हुई है। लोगों का विश्वास शासन पर बढ़ा है। राज्य में कानून व्यवस्था है इसका प्रमाण यह है कि टाटा ट्रस्ट की ओर से जारी इंडिया जस्टिस रिपोर्ट 2020 में छत्तीसगढ़ की पुलिसिंग को देशभर में दूसरा स्थान मिला है।





उन्होंने कहा कि केन्द्र से हमें 14 हजार 73 करोड़ रूपए हमारे कार्यकाल की लेनी है, जो केन्द्रीय करों में छत्तीसगढ़ का हिस्सा है। वर्ष 2004 से लेकर अब तक कुल 15 हजार 154 करोड़ रूपए लेने हैं। श्री भूपेश बघेल ने कहा केन्द्रीय करों में हिस्सा हमारा हक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना काल में छत्तीसगढ़ में शिक्षा की व्यवस्था की तारीफ नीति आयोग और प्रधानमंत्री जी ने भी की। राज्य के विद्यार्थियों को हर तरह के प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने हेतु स्वामी आत्मानंद के नाम पर अंग्रेजी माध्यम के 52 स्कूल प्रारंभ किए गए हैं।





मुख्यमंत्री ने कहा कि पुरानी सरकार के कार्यकाल में रेत खदान का संचालन पंचायतों द्वारा किया जाता था। तब तरह-तरह की शिकायतें मिलती थी। आज हमनें उन्हें टेंडर के जरिए संचालन की व्यवस्था की है। केवल टेंडर से ही 25 करोड़ रूपए का राजस्व आ गए। खदानों के संचालन से जो आय होगी, उसका 25 प्रतिशत हिस्सा एड करके पंचायतों को उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमनें चंदूलाल चंद्राकर मेमोरियल मेडिकल कॉलेज का अधिग्रहण छात्रों के हित में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किया है। इस कॉलेज का संचालन निजी क्षेत्र द्वारा किया जाता रहा है। ठीक ढंग से संचालन नहीं होने के कारण छात्रों के हित के लिए हमने अधिग्रहण किया।





नगरनार इस्पात संयंत्र का विनिवेशीकरण नहीं होने देने का संकल्प भी इसी सदन में पारित किया गया है। हम बस्तर के लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं होने देंगे। उन्होंने कहा कि इस संयंत्र को एनएमडीसी या सीएमडीसी जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां संचालित करें। एकतरफा विनिवेश नहीं होने देंगे। छत्तीसगढ़ सरकार इस स्टील प्लांट को बचाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल से पहले छत्तीसगढ़ में मात्र 151 वेंटीलेटर थे, जिसे बढ़ाकर हमनें 514 किया है। इसी तरह आईसीयू की संख्या 53 से बढ़ाकर 406, ऑक्सीजन बेड की संख्या अब बढ़ाकर 1668 कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के टीकाकरण मामले में केवल 3 करोड़ लोग ही भारत सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। 135 करोड़ लोगों को निःशुल्क टीके लगवाने की व्यवस्था करनी चाहिए। यदि केन्द्र सरकार ऐसा करने से इंकार करती है, तो अपने राज्य में हम अपने खर्च पर टीकाकरण करवाएंगे। उन्होंने कहा कि कोवैक्सीन का उपयोग 11 राज्यों में केवल एक प्रतिशत लोगों के लिए ही किया गया है। छत्तीसगढ़ ने भी निर्णय लिया है कि इसका उपयोग तीसरे ट्रायल के बाद ही किया जाएगा।


झीरम घाटी संयोजक ने केन्द्रीय गृह मंत्री को लिखा पत्र, NIA की जांच रिपोर्ट SIT को सौंपने की मांग

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रायपुर. झीरमघाटी कांड पर एनआईए की विस्तृत जांच रिपोर्ट एसआईटी को सौंपने की मांग को लेकर पीसीसी के झीरम घाटी संयोजक दौलत रोहड़ा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि 8 वर्ष पहले छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी में 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर माओवादी हमला हुआ था। इसमें वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल,प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल,महेन्द्र कर्मा सहित 27 लोग शहीद हो गए थे। घटना के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने एनआईए से जांच के निर्देश दिये थे। 5 जून 2013 को एनआई की टीम जगदलपुर के वन विभाग के रेस्ट हाउस को अपना कार्यालय बना कर जांच शुरू की थी। इसके बाद एनआईए ने 23 सितंबर 2014 को पहला और 16 सितंबर 2015 को अंतिम पत्र पत्र बिलासपुर हाइकोर्ट में दिया, लेकिन अधूरे आरोप पत्र प्रस्तुत किए गए है।





पूछताछ तक नहीं हुई
रोहड़ा का आरोप है कि झीरमघाटी कांड एक राजनीतिक साजिश थी और एनआईए ने हमले में घायल हुए लोगों एवं उनके परिजनों से पूछताछ तक नहीं की। वहीं जमीनी स्तर पर मामले की जांच तक नहीं की गई। कई बार विधानसभा में सीबीआई की जांच की मांग विपक्षी दल कांग्रेस के द्वारा उठाई गई थी।





एसआईटी का गठन
राज्य में कांग्रेस सरकार के गठन होने के बाद फरवरी 2020 में एसआईटी का गठन किया गया। साथ ही जांच के लिए एनआईए से दस्तावेज मांगे गए। लेकिन, आज तक दस्तावेज न देने के कारण जांच शुरू नहीं हो पाई है। रोहड़ा ने हमले में शहीद एवं घायलों के पीडि़त परिवारों की ओर से केंद्रीय गृहमंत्री से एनआईए को जांच रिपोर्ट निर्देश देने का अनुरोध किया है। ताकि दस्तावेज मिलने पर एसआईटी झीरम घाटी का सच उजागर कर सकें।


अफसरों की नाक के नीचे कई सालों से चल रहा था आवास आवंटन घोटाला, 1 आरोपी गया जेल और 3 की तलाश तेज

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रायपुर. नगर निगम के अधिकारियों के नाक के नीचे कई सालों से प्रधानमंत्री आवास आवंटन घोटाला (Scam in PM House Distribution) चल रहा था, लेकिन अफसरों को इस पर सुध लेने की फुर्सत ही नहीं मिली। घोटाला लाखों से करोड़ों रुपए तक पहुंच गया, इसके बाद निगम के अधिकारियों ने कोतवाली थाने में शिकायत की। पुलिस ने फर्जी आवंटन करने वाले सुनील नायक, उसकी पनी प्रीति नायक, ए रवि राव, अजय कुमार व अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना व अन्य धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया है। पुलिस ने ए रवि को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।





आरोपी पिछले करीब तीन साल से नगर निगम जोन-4 के कमिश्नर के फर्जी साइन, सील लगाकर जरूरतमंदों को बीएसयूपी आवास आवंटित कर रहे थे। इसके एवज में उनसे 25 हजार से 1 लाख रुपए से अधिक की राशि वसूलते थे। इस तरह आरोपियों ने सैकड़ों लोगों को पैसे लेकर सड्डू, लाभांडी और अन्य इलाकों में बने बीएसयूपी आवास आवंटित कर दिया है। इसकी जानकारी नगर निगम को नहीं है। उल्लेखनीय है कि आवास आवंटन घोटाला का खुलासा पत्रिका ने सबसे पहले अपने 10 नवंबर 2020 के अंक में किया था।





बेफिक्र बेच रहे थे आवास





आरोपी बीएसयूपी के आवास को बेफिक्र होकर लोगों को बेच रहे थे और आवंटन सूची जारी करते थे। आरोपी सुनील नायक और उसकी पत्नी एक नेता का नाम लेकर भी लोगों को झांसे में लेते थे और सबको नगर निगम के अधिकारियों के कहने पर आवंटन करना बताते थे। कई जगह, तो खुद को ही नगर निगम का अधिकारी बता देते थे। यही वजह है कि लोगों आसानी से भरोसा हो जाता था।





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चार साल पहले भी कर चुके हैं घोटाला





चार साल पहले जोन-7 के तहत आने वाले बीएसयूपी आवासों को भी इसी तरह आवंटित कर दिया गया था और 100 से अधिक लोगों को मकान दिया गया था। इस मामले में शामिल कई लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है। अब जोन-4 में भी इसी तरह का घोटाला सामने आया है, तो नगर निगम में हड़कंप मच गया है।





नहीं होती निगरानी





प्रधानमंत्री आवास योजना (PM House Distribution Scheme) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए शहर के आउटर में सैकड़ों आवास बनाए जा रहे हैं। इन्हें आवंटन करने की पूरी प्रक्रिया संबंधित जोन कार्यालयों में होती है। लेकिन आवंटन के बाद निगम के अधिकारी इन कॉलोनियों में झांकने तक नहीं जाते और यह भी जांच नहीं करते है कि आवास का आवंटन पात्र हितग्राही को ही हुआ है। कई आवासों में लोग अवैध कब्जा करके रह रहे हैं। उनकी जांच भी नहीं करते हैं। यही वजह है कि आउटर में इन आवासों को बेचने का खेल चल पड़ा है।





क्या था मामला





जोन-4 के बीएसयूपी आवासों (Scam in PM House Distribution) का पिछले साल नगर निगम के इंजीनियर निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान मकान के दरवाजे पर आवंटन पत्र चस्पा मिला। यह देखकर इंजीनियर चौंक गए। उन्होंने 32 आवासों के आवंटन सूची की निगम में जांच की, तब खुलासा हुआ कि इन आवासों को किसी को आवंटित नहीं किया गया है। साथ ही आवंटन पत्र में तत्कालीन जोन कमिश्नर चंदन शर्मा के हस्ताक्षर और सील फर्जी हैं। इसके बाद निगम ने आवंटन पाने वालों को नोटिस देते हुए उनके खिलाफ थाने में शिकायत की। इसके खिलाफ आवास पाने वालों ने हाईकोर्ट में मामला दायर किया। कोर्ट ने निगम को मामले की जांच के बाद उचित कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद नगर निगम ने मामले की जांच की। और आरोपियों के खिलाफ कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। फिलहाल पुलिस मामले के अन्य आरोपियों की तलाश में लगी है।





नगर निगम की ओर से मिली शिकायत के आधार पर आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया है। एक आरोपी को जेल भेजा गया है। अन्य की तलाश की जा रही है।





  • अंजनेय वाष्र्णेय, प्रशिक्षु आईपीएस व सीएसपी, कोतवाली

सीमेंट और स्टील घोटाला : NTPC लारा में जांच के लिए पहुंची CBI

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रायगढ़. नौ वर्ष पूर्व एनटीपीसी लारा में हुए सीमेंट और स्टील घोटाला मामले में सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है। सोमवार की सीबीआई की टीम एनटीपीसी लारा पहुंची और विभागीय अधिकारियों से पूछताछ की।





कयास लगाया जा रहा है कि इस अफरा-तफरी के मामले में कई सफेदपोश चेहरे भी सामने आएंगे। जिला मुख्यालय से करीब 18 किलोमीटर दूर पुसौर क्षेत्र में स्थित एनटीपीसी लारा में सीबीआई की टीम पहुंची और अधिकारियों से पूछताछ की।





बताया जाता है कि करीब 9 वर्ष पूर्व 2012 के आसपास कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत कर कंपनी के सेंट्रल स्टोर लारा से भारी मात्रा में सीमेंट व स्टील को गायब कर दिया गया। यह भी जानकारी मिली है कि उस दौरान कार्यरत अधिकारी जो वर्तमान में सेवानिवृत्त हो चुके हैं उनसे भी पूछताछ की जा रही है।





एके मिश्रा एनटीपीसी, लारा के पीआरओ ने बताया कि एनटीपीसी ने स्वयं सीमेंट और स्टील घोटाला मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। फिलहाल जांच जारी है।


पति को वश में करने पत्नी गई झाड़ फूंक कराने, झांसा देकर तांत्रिक ने किया महिला का बलात्कार

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रायपुर। पति से रोज- रोज के झगड़े से परेशान होकर पत्नी उसे अपने वश में करने झाड़ फूंक कराने गई, तो वहां तांत्रिक (tantrik raped women) ने मौके का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म कर दिया। इसकी शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया है। आरोपी फरार है।





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राजधानी के तेलीबांधा इलाके में रहने वाली करीब 35 वर्षीया महिला का अपने पति से बार-बार झगड़ा होता था। पति उसका कहना नहीं मानता था। इस परेशानी को उसने अपनी सहेली को बताया। उसकी सहेली का बॉयफ्रेंड झाडफ़ूंक का काम करता था। वह महिला को उसके पास ले गई। महिला ने तांत्रिक के पास अपनी समस्या रखी और जल्द ठीक करने के लिए कहा। तांत्रिक ने महिला को अपने झांसे में ले लिया और उससे दुष्कर्म किया।





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इसकी जानकारी महिला ने अपनी सहेली को दी। उसकी सहेली ने महिला को उल्टा सहयोग (tantrik raped women) करने कहा। बाद में पीड़िता ने अपने पति को घटना की जानकारी दी। इसके बाद तेलीबांधा थाने में शिकायत की। पुलिस ने आरोपी तांत्रिक के खिलाफ दुष्कर्म का अपराध दर्ज कर लिया है। इसके बाद से आरोपी फरार है।


कैबिनेट बिग ब्रेकिंग : 1 लाख नए मकान भी बनेंगे, नवा रायपुर बसाहट की तैयारी, पढ़े पूरे निर्णय

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1- प्रदेश के सभी स्कूलों में 9वीं से 12वीं तक की कक्षायें तथा विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की कक्षाएं सोेमवार 15 फरवरी से प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही राज्य में कौशल विकास के सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू करने का निर्णय लिया गया।





कक्षाओं में कोरोना महामारी के संक्रमण से बचाव के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी सभी निर्देशों का पालन किया जाएगा।





2- बस्तर संभाग के सभी जिलों में ‘‘बस्तर फाईटर्स‘‘ विशेष बल के गठन का निर्णय लिया गया।





3- सभी वर्गो के आवासहीनों को आवास उपलब्ध कराने प्रदेश के सभी जिलों में ‘‘राजीव नगर आवास योजना‘‘ का क्रियान्वयन करने का निर्णय लिया गया। जिसके तहत छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल को एक रूपए प्रति वर्गफीट की दर से शासकीय भूमि उपलब्ध करायी जाएगी। इस योजना के तहत राज्य के सभी शहरी, अर्द्धशहरी और बड़े कस्बों में एक लाख आवासीय भवन बनाए जाएंगे।





4- गोधन न्याय योजना के तहत गोठान समिति एवं स्व सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। जिसके तहत प्रति किलो वर्मी कम्पोस्ट के विक्रय दर की राशि 10 रूपए में से गोबर (2.5 किलोग्राम) क्रय की लागत राशि 5 रूपए संबंधित गोठान समित को दिया जाएगा।





इसी प्रकार प्रसंस्करण और पैकेजिंग पर व्यय राशि 0.65 रूपए संबंधित समूह को दिया जाएगा। वर्मी कम्पोस्ट के विपणन के लिए लैम्पस या पैक्स एवं सहकारी बैंक को कमीशन की राशि क्रमशः 0.45 रूपए और 0.05 रूपए, इस तरह कुल 0.50 रूपए प्रति किलोग्राम दिया जाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रति किलो वर्मी कम्पोस्ट विक्रय दर से प्राप्त संभावित लाभांश राशि को 85ः15 के अनुपात में स्व सहायता समूह एवं गोठान समितियों को दिया जाएगा।





5- नवा रायपुर अटल नगर में अच्छे शैक्षणिक संस्थानों के विकास के लिए ऐसे सेक्टर्स, जिनका सेक्टर स्तर पर विस्तृत अभिन्यास तैयार नही किया गया है, में शैक्षणिक प्रयोजन हेतु प्रीमियम दर 3706 प्रति वर्ग मीटर के स्थान पर 2475 प्रति वर्गमीटर करते हुए निविदा के माध्यम से आबंटन करने का निर्णय लिया गया। यह दर 31 मई 2022 तक प्रभावशील रहेगी।





6- नवा रायपुर अटल नगर में निवेश, रोजगार और बसाहट को प्रोत्साहित करने सेक्टर स्तर पर अधोसंरचना के विकास शुल्क के पुर्ननिर्धारण के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया। जिसके तहत प्रीमियम दरों में औसतन 10 से लेकर 21 प्रतिशत तक की कमी की गई है।





7- नवा रायपुर अटल नगर में निवेश, रोजगार एवं बसाहट को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न परियोजनाओं हेतु रियायती प्रीमियम दर पर भूखण्ड आबंटन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया।





8- तेन्दूपत्ता के व्यापार से प्राप्त शुद्ध आय में से 15 प्रतिशत राशि का संग्राहक समितियों को अराष्ट्रीयकृत लघु वनोपजों के व्यापार के साथ-साथ लाख पालन हेतु भी उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। समितियों द्वारा यह कार्य छ.ग. राज्य लघु वनोपज संघ के मार्गदर्शन में किया जाएगा।





9- लघु वनोपज आधारित प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना के लिए राज्य शासन, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ एवं निजी निवेशकों के मध्य किए जाने वाले एमओयू के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।





10- कैम्पा मद से राज्य के वनक्षेत्रों में डी.जी.पी.एस. सर्वे कार्य कराए जाने का निर्णय लिया गया।





11- बंदी अधिनियम-1900 की धारा 31-क के उप नियम (एक) एवं (दो) में संशोधन के प्रारूप का अनुमोदन किया गया।





12- राज्य के अधीन औद्योगिक संस्थानों को शासन द्वारा जिस स्त्रोत ( शासकीय/नैसर्गिक/स्वनिर्मित आदि) से जल आबंटन/प्रदाय करने की स्वीकृति दी गई है, उसी स्त्रोत हेतु शासन द्वारा समय-समय पर निर्धारित जल दर ही लागू करने का निर्णय लिया गया।


Chhattisgarh News : 9वीं और 11वीं के प्रश्न पत्र स्कूल के शिक्षक करेंगे तैयार

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बिलासपुर. कोरोना काल के मद्देनजर माध्यमिक शिक्षा मंडल ने शिक्षा सत्र 2020-21 की 9वीं और 11वीं की वार्षिक परीक्षाएं संबंधित स्कूलों में आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही संबंधित स्कूलों में ही दोनों कक्षाओं के प्रश्न पत्र निर्धारित किए जाएंगे।





माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव प्रोफेसर वीके गोयल ने आदेश जारी कर कहा है कि शासन के निर्देशानुसार शिक्षा सत्र 2020-21 में कक्षा 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं स्थानीय स्तर पर आयोजित की जाएंगी। होम एग्जामिनेशन के तहत विद्यार्थी जिस स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं वे उसी स्कूल में परीक्षा देंगे।

संबंधित स्कूलों में ही दोनों कक्षाओं के प्रश्न पत्र तैयार किए जाएंगे। साथ ही समय सारिणी भी संबंधित स्कूल से ही निर्धारित होगी। परीक्षा आयोजित करते समय केन्द्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए गए कोरोना महामारी संक्रमण से बचाव के सभी निर्देशों का प्राचार्य विशेष रूप से पालन करेंगे।


झाड़ी में मिली महिला की लाश, तीन दिन से फरार थे पति- पत्नी

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बिलासपुर. धमनी खार स्थित चिरकुटी मंदिर के पास झोपड़ी बनाकर पति के साथ रहने वाली महिला का शव झाडिय़ों के बीच छिपा (dead body kept hidden in bush for 3 days) कर रखा गया था। बदबू आने पर कुछ लोगों ने जब जाकर झाडिय़ों को हटाया तो महिला की तीन दिन पुरानी लाश लोगों को दिखाई दी।

महिला व उसका पति तीन दिनों से लापता थे। सूचना पर चकरभाठा पुलिस मामले में मर्ग कायम कर जांच में लिया है वहीं फरार पति की तलाश कर रही है। पुलिस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही कुछ कहने की बात कह रही है। पुलिस ने हत्या की संभावना से इंकार नहीं किया है।





पुलिस (Chhattisgarh police) के अनुसार चकरभाटा पुलिस को गुरुवार की शाम सूचना मिली कि धमनीखार के चिरकुटी मंदिर के पास एक महिला का सड़ा गला शव मिला है। पुलिस मौके पर पहुंच घटना स्थल को अपने कब्जे में ले लिया। रात होने होने के कारण न तो शव का पंचनामा हो सका और न ही पहचान। शुक्रवार को सुबह चकरभाटा पुलिस ने मौके पर पहुंच देखा कि महिला (woamn Killed ) के शव को बेशरम झाडिय़ों में छिपाया गया है। महिला के शव मिलने की खबर फैलते ही ग्रामीणों की भारी भीड़ लग गई।





कुछ लोगों ने महिला की शिनाख्त चिरकुटी मंदिर के पास बनी झोपड़ी में रहने वाली सावित्री बाई के रूप में की है। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि महिला यहां पर बिहारी नाम के एक व्यक्ति के साथ रहा करती थी। दोनों पति पत्नी की तरह ही रह रहे थे। तीन दिन से दोनों किसी को दिखाई नहीं दिए थे। पुलिस ने मामले में शव को पोस्ट मार्टम के लिए चकरभाटा सामुदायिक भवन भेजा है वहीं बिहारी की तलाश कर रही है। पुलिस का कहना है कि बिहारी के मिलने व पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के आने के बाद मामले में कुछ कहा जा सकता है। शव को जिस तरह झाडिय़ों में छुपाया है इससे हत्या की आशंका भी जताई है।

पति ने छोड़ दिया था इसके बाद रह रही थी बिहारी के साथ
पुलिस की जांच में पता चला कि सावित्री सूर्यवंशी धानापार घुटकू की रहने वाली थी। उसकी शादी 15 साल पहले बिटकूली में हुआ था। पति के छोड़े जाने के बाद सावित्री 5 साल से बिहारी के साथ रह रही थी। तीन से बिहारी भी किसी को दिखाई नहीं दिया है। बिहारी ने ही सावित्री की हत्या की है या फिर उसकी मौत का कारण कुछ और है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का पुलिस को इंतजार है।





महिला का तीन दिन पुराना शव झाडिय़ों के बीच छिपा कर रखा गया था जिसे पुलिस ने स्थानीय लोगो की सूचना के बाद अपने कब्जे में लिया है। मृतिका की शिनाख्त घुटकू निवासी के महिला सावित्री के रूप में हुई है। मामले में पोस्टमार्टम के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
- एसएन पटेल, थाना प्रभारी चकरभाटा


IAS अमिताभ जैन और IPS रवि सिन्हा केंद्र के लिए इम्पैनल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव अमिताभ जैन (IAS Amitabh Jain News) भारत सरकार में सचिव के पद पर इम्पेनल हुए है। भारत सरकार ने 89 बैच के आईएएस अधिकारियों की सूची जारी की है। इसमें राज्य के मुख्य सचिव का नाम शामिल है।





इसी तरह छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस रवि सिन्हा (IPS Ravi Sinha) को डीजी के पद पर इम्पेनल किया गया है। वह 88 बैच के आईपीएस हैं। राज्य निर्माण के बाद 2002 में डेपुटेशन पर केंद्रीय प्रतिनियुक्त पर गए थे।





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इसके बाद से वह वापिस नहीं लौटे है। बता दें कि केंद्र में इम्पेनल होने के बाद डेपुटेशन पर आने पर वर्तमान पद के अनुरूप पदस्थापना की जाती है। अगर मुख्य सचिव अमिताभ जैन (IAS Amitabh Jain News)के केंद्र में डेपुटेशन पर जाने पर सिकरेट्री की पोस्टिंग मिलेगी।





हालांकि छत्तीसगढ से चार आईएएस अभी तक सिकरेट्री के लिए इम्पेनल हो चुके हैं। लेकिन, अभी तक सिकरेट्री बनने का किसी आईएएस को मौका नहीं मिला है।


नशीली दवाइयां बेचने के आरोप में 4 युवक गिरफ्तार, 3680 नग स्पास्मो कैप्सूल जब्त

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बलौदा बाजार। मंगलवार देर शाम कोतवाली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नशीली दवाई (4 arrested with drugs) सहित 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। धारा 22 (ख) एनडीपीसी एक्ट के तहत जुर्म दर्ज कर आरोपियों को बुधवार को रिमाण्ड पर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। आरोपियों द्वारा नशीली दवाइयों को बलौदा बाजार शहर में खपत करने की योजना थी। पुलिस ने 460 स्ट्रीप (कुल 3680 नग) स्पास्मो नामक कैप्सूल जब्त की है। पुलिस कार्रवाई में कुल 23253 रुपए की नशीली दवाइयां सहित नकदी 10200 रुपए व दो मोबाइल जब्त किए गए हैं। आरोपियों के नाम विनय दुबे उर्फ कन्नू पिता स्व. रमेश दुबे (29), अमित दुबे उर्फ सन्नी पिता स्व. रमेश दुबे (33)रामसागर तालाब के पास पहन्दा रोड, ज्वाला चतुर्वेदी पिता इन्द्रमन चतुर्वेदी (32) पीलत कारखाना के पीछे, विकास साहू पिता अनुज साहू (23) वार्ड नं 11 दशरमा रोड बलौदा बाजार है।





पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार देर शाम पुलिस को मुखबीर से सूचना मिली कि बलौदा बाजार के रामसागर तालाब के नीचे गार्ड में विनय दुबे उर्फ कन्नू व अमित दुबे उर्फ सन्नी नाम के व्यक्ति बिक्री करने की नियत से बड़ी मात्रा में नशीली कैप्सूल को लेकर आए हैं तथा बेचने वाले है। सूचना पर अग्रिम कार्रवाई के लिए दस्तावेज व पूर्ण विवेचना सामग्री के हमराह स्टाफ गवाहन व औषधि निरीक्षक किशोर ठाकुर के साथ घेराबंदी कर रेड की कार्रवाई की गई। मौके पर चार व्यक्ति मिले, जिनसे पूछताछ पर अपना नाम विनय दुबे उर्फ कन्नू, अमित दुबे उर्फ सन्नी, ज्वाला चतुर्वेदी, विकास साहू बताया। पड़ताल में संदेही विनय दुबे उर्फ कन्नू के कब्जे में रखे एक काला लाल रंग के रेग्जीन बेग के अन्दर 145 स्ट्रीप कुल 1160 नग प्रतिबंधित नशीली कैप्सूल स्पास्मो प्रोक्सवोन प्लस रखे मिला। अमित दुबे उर्फ सन्नी के पास रखे काले रंग के रैग्जीन बैग के अन्दर 90 स्ट्रीप कुल 720 नग प्रतिबंधित नशीली कैप्सूल स्पास्मो प्रोक्सवोन प्लस रखे मिला। ज्वाला चतुर्वेदी के पास रखे सफेद प्लास्टिक थैला के अंदर 120 स्ट्रीप कुल 960 नग प्रतिबंधित नशीली कैप्सूल स्पास्मो प्रोक्सवोन प्लस रखे मिला तथा विनय दुबे उर्फ कन्नू से एक काले लाल रंग के बैग के अंदर रखे 145 स्ट्रीप कुल 1160 कैप्सूल स्पास्मो प्रोक्सवोन प्लस कैप्सूल मिला। साथ ही अपराध में प्रयुक्त एक नग वीवो व 17 मोबाइल तथा नशीली कैप्सूल का बिक्री रकम नकद 10200 रुपए जब्त जप्त किया गया। अमित दुबे उर्फ सन्नी से एक काले रैग्जीन बैग के अंदर 90 स्ट्रीप कुल 720 कैप्सूल कैप्सूल स्पास्मो प्रोक्सवोन प्लस की तथा अपराध में प्रयुक्त एक रेडमी मोबाइल को जब्त किया गया। ज्वाला चतुर्वेदी के पास से एक सफेद प्लास्टिक थैला के अंदर 120 स्ट्रीप कुल 960 कैप्सूल स्पास्मो प्रोक्सवोन प्लस, विकास साहू के पास से एक सफेद रंग के प्लास्टिक थैला के अंदर 105 स्ट्रीप कुल 840 कैप्सूल स्पास्मो प्रोक्सवोन प्लस को जब्त किया गया।





आसानी से मिल रही नशीली दवाई





बीते कुछ सालों से बलौदा बाजार नगर नशीली गोलियों, गांजे समेत अन्य मादक पदार्थों के गढ़ के रूप में कुख्यात हो रहा है। बलौदा बाजार में कई युवाओं तथा महिलाओं द्वारा इस प्रकार के मादक पदार्थों की खुलेआम बिक्री की जा रही है तथा ये मादक पदार्थ बाजार की कुछ दुकानों, चिन्हित मकानों से लेकर स्कूल-कालेज के पास भी आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, जिसकी वजह से युवा वर्ग आसानी से इसके आदी बन रहे हैं।





मध्यप्रदेश व उत्तर प्रदेश से लाते हैं नशीली दवाएं





आरोपियों से नशीली दवाइयों के संबंध में पूछताछ करने पर बताया कि इस प्रकार की नशीली दवाइयों को वह मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों से लाते हैं तथा यहां पर उन नशीली दवाइयों को दुगने- तिगने दामों पर युवाओं को बेचते हैं।





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अपराध की जड़ है नशीली गोलियां





पुलिस अधिकारियों के अनुसार अवैध नशीली दवाइयां खाकर युवा अपराध में संलिप्त हो रहे थे। आरोपी ज्वाला चतुर्वेदी पूर्व में भी नशीली दवाइयों के साथ पकड़ा जा चुका है। वहीं, आरोपी विनय दुबे और अमित दुबे कई वर्षों से नशीली दवाई बेचने का काम कर रहे हैं। साथ ही आसपास के क्षेत्रों के लड़कों को नशीली दवाइयां उपलब्ध कराते हैं।


18 साल की लड़की को 70 दिन में 7 बार बेचा, 8 गिरफ्तार

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छतरपुर. दरिंदों ने 18 साल की लड़की पर जुल्म की इंतेहा कर डाली। पहले छतरपुर के निवारी निवासी एक दंपती ने उसे अगवा किया। पिता से फिरौती मांगी। जब रुपए नहीं मिले तो लड़की का 20 हजार रुपए में सौदा कर दिया। इसके बाद तो लड़की पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। 70 दिन में एक-एक कर उसे कुल सात लोगों को बेचा गया। अंत में जब जबरन शादी कराई गई तो उसने जान दे दी। जशपुर जिले के कांसाबेल थाना निवासी लड़की को वहां से अगवा कर आरोपियों ने मध्यप्रदेश के अलग-अलग स्थानों के साथ उत्तरप्रदेश के ललितपुर में रखा था। अब छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की पुलिस ने इस मामले में कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।





पीड़ा के वो 70 दिन





  1. 3 जुलाई 2020 को छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कांसाबेल थाना इलाके से लड़की का छतरपुर जिले के निवारी निवासी अजय राय और उसकी पत्नी सविता राय ने अपहरण किया था। आरोपियों ने लड़की के पिता को फोन कर फिरौती मांगी।
  2. जब रुपए नहीं मिले तो दंपती ने लड़की को 20 हजार रुपए में कल्लू रैकवार निवासी बमनौरा जिला छतरपुर को बेच दिया।
  3. कल्लू ने लड़की को हरेन्द्र सिंह बुंदेला निवासी नरवां को बेचा।
  4. इसके बाद राजपाल सिंह परमार निवासी ग्राम दतया ने उसे खरीदा।
  5. फिर देशराज कुशवाहा निवासी रनगांव ने नाबालिग का सौदा किया।
  6. यहां से उसे मुन्ना कुशवाहा निवासी सीरौन, ललितपुर को बेचा गया।
  7. आखिर में संतोष कुशवाह निवासी खिरिया ललितपुर ने नाबालिग को 70 हजार रुपए में खरीदकर अपने बेटे से उसकी जबरन शादी करा दी थी। दो महीने बाद 10 सितंबर 2020 को लड़की ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी।




पुलिस ऐसे आरोपियों तक पहुंची





लड़की के पिता की शिकायत पर छत्तीसगढ़ पुलिस के सहायक उप निरीक्षक देवनारायण यादव की टीम ने छतरपुर पुलिस से संपर्क किया। जशपुर में दर्ज मामले में छतरपुर जिले के गढ़ीमलहरा थाना इलाके के खौंप निवारी निवासी अजय उर्फ पंचम सिंह पिता बाबू लाल राय उम्र 27 साल और उसकी पत्नी सविता उम्र 28 वर्ष को खोजा गया। दोनों राज्यों की पुलिस ने उनसे पूछताछ की। इसमें एक-एक कर आरोपियों के नाम सामने आते गए, लेकिन लड़की नहीं मिली। आखिर में पुलिस को उसकी खुदकुशी का पता चला।





सभी आरोपी पकड़े जा चुके हैं। जशपुर पुलिस उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर ले गई है।
- सचिन शर्मा, छतरपुर, एसपी


खातेदार के नाम से फर्जी फर्म खोलकर विदेश में करोड़ों का लेनदेन, बैंक अफसरों पर केस

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रायपुर। बैंक अधिकारियों ने खातेदार के नाम से फर्जी फर्म खोलकर विदेश से करोड़ों रुपए का लेन-देन करने वालों के खिलाफ पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया है। खाते में करोड़ों रुपए जमा और आहरण होने से प्रवर्तन निदेशालय को शक हुआ। प्रवर्तन निदेशालय ने खातेदार को समन भेजा। इसके बाद मामले का खुलासा हुआ। खातेदार की शिकायत पर बैंक अधिकारियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया है।





पुलिस के मुताबिक पुरानीबस्ती निवासी अजय कुमार यदु प्रिटिंग का काम करते हैं। वर्ष 2011 में उन्होंने कृष्णा कॉम्पलेस स्थित इंडसइंड बैंक में मां सम्बलेश्वरी ऑफसेट प्रिंटर्स के नाम से खाता खेला था। उस दौरान असिस्टेंट बैंक मैनेजर मनीष कदम को सभी जरूरी दस्तावेज दिए गए थे। कुछ दिनों बाद उन्होंने यह खाता बंद करा दिया। इस बीच उनके दस्तावेजों के आधार पर मनीष ने कन्हैया सेल्स फर्म के नाम से खाता खोल दिया और उस खाते के जरिए विदेशों से करोड़ों रुपए के घरेलू प्रोडक्ट व अन्य सामान खरीदा।





इसमें करोड़ों रुपए पर प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) की नजर पड़ी। वर्ष 2019 में उन्होंने खातेदार अजय कुमार को नोटिस जारी किया। इसके बाद अजय को उस खाते के संबंध में जानकारी हुई। उन्होंने बैंक और पुलिस में शिकायत की और मामले की जांच की मांग की। पुलिस जब कन्हैया सेल्स फर्म की तलाश शुरू की, तो कहीं नहीं मिला। इस तरह फर्जी फर्म खोलकर आरोपियों ने करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी की। इसकी शिकायत पर पुलिस ने आरोपी मनीष कदम और बैंक के अन्य लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है।

कई लोगों से ठगी
इसी तरह आरोपियों ने हेमंत कुमार साहू के फोटो, ड्राइविंग लाइसेंस, केवायसी डिटेल के आधार पर पंडरी कपड़ा मार्केट में केशव होम एम्लाएंस खोलकर करोड़ों रुपए का लेन-देन किया है। उसके दस्तावेजों का भी दुरुपयोग किया गया है। आरोपी मनीष कदम वर्तमान में बैंक की नौकरी छोड़कर भाग गया है। मौदहापारा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया है।


ब्लड टेस्ट कराने गई महिला से छेड़छाड़, टेक्नीशियन गिरफ्तार

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रायपुर। एक महिला अपना ब्लड टेस्ट कराने गई थी, वहां सैंपल लेने वाले टेक्नीशियन ने उनसे छेड़छाड़ की। पीड़िता की शिकायत पर सिविल लाइन पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर विवेचना में लिया है। मामला शंकर नगर इलाके का है।





शीतलहर की चपेट में छत्तीसगढ़ का ये इलाका, ठंड के बाद अब ओलावृष्टि की संभावना





पुलिस के मुताबिक शंकर नगर स्थित तिवारी क्लीनिक में शुक्रवार सुबह करीब 9.30 बजे एक महिला अपना ब्लड टेस्ट कराने गई थी। टेक्नीशियन योगेशगिरी गोस्वामी उनका ब्लड सैंपल ले रहा था। इस दौरान उसने महिला से अश्लील हरकत करते हुए छेड़छाड़ की। पीड़िता ने इसकी शिकायत सिविल लाइन थाने में की।





PCC ने किया किसान चक्काजाम आंदोलन को समर्थन का ऐलान





पुलिस ने आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ का अपराध दर्ज किया। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। सिविल लाइन टीआई आरके मिश्रा ने बताया कि तिवारी क्लीनिक में ब्लड टेस्ट कराने गई महिला से आरोपी ने छेड़छाड़ की थी। इसकी शिकायत पर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।


नहीं दिखते अब जंगल में मोर, संरक्षण व सुरक्षा के अभाव में हो रहे विलुप्त

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गरियाबंद । आदिवासी विकासखंड मुख्यालय मैनपुर के तौरेंगा, कुल्हाड़ीघाट, राजापड़ाव क्षेत्र सहित आसपास के वन क्षेत्रों मे अब राष्ट्रीय पक्षी मोर विलुप्ति के कगार पर पहुंचते जा रही है। आज से 10-15 वर्ष पहले बिहड़ जंगलों में और मुख्य मार्ग के किनारे मोर आसानी से झुमते नाचते झुंड के झुंड दिखाई पड़ते थे। वर्तमान की आपाधापी व वन्य प्राणियों के शिकार के चलते राष्ट्रीय पक्षी मोर (peacock extinction in chhattisgarh Forest) उचित संरक्षण व संवर्धन के अभाव में उपेक्षित होते जा रहा है।





जंगली इलाकों में लगातार बस रहे गांवों के चलते पक्षी मोर अब उदंती, तौरेंगा, कुल्हाड़ीघाट के जंगलों में कुछ ही स्थानों पर दिखाई देने की बात ग्रामीणों द्वारा सुनने में आती है। जहां इनकी संख्या के कम होने का मुख्य कारण इनका शिकार ही है। कड़े प्रतिबंध के बावजूद राष्ट्रीय पक्षी के सुन्दर पंखों के लालच में शिकारी जहरीली दवाई खाद्य पदार्थ के साथ मिलाकर इन्हें देते है, जिसे खाकर ये मर रहे हैं। राष्ट्रीय पक्षी मोर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम की धारा 1972 की अनुसूची 1 का प्राणी है जिसे मारने पर 7 वर्ष की सजा का प्रावधान निर्धारित है।





शीतलहर की चपेट में छत्तीसगढ़ का ये इलाका, ठंड के बाद अब ओलावृष्टि की संभावना





पूरे देश में मोर राजस्थान में अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। जिसका मुख्य कारण वहां की जलवायु का इनके लिए अनुकूल होना बताया जाता है। एक ओर जहां वन विभाग राजकीय पशु वन भैंसे के संरक्षण में करोड़ों खर्च कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण (peacock extinction in chhattisgarh Forest) के लिए विभाग का रवैया उदासीन लगता है। ग्रामीणो ने बताया कि इनकी संख्या में कमी का प्रमुख कारण दूरस्थ क्षेत्रों मे इनका शिकार है। इनकी कम होती संख्या को गंभीरता से लेते हुए इनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विभागीय उच्च अधिकारियों सहित राज्य सरकार को जल्द से जल्द उचित व ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। वहीं, इनके शिकार पर रोक लगाने के लिए इनके पंखों के संग्रहण पर रोक लगाना भी अति आवश्यक है। जंगलों में मोर पंख संग्रहण पर पाबंदी नहीं होने के कारण शिकारी बेधड़क पंख संग्रहण के बहाने जंगलों में जाकर इनका अवैध शिकार करते हैं, जिस पर अंकुश लगाना राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण के लिए जरूरी है।


राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से महिलाएं हो रही है आत्मनिर्भर

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  • वाशिंग पॉउडर बनाकर एवं बेचकर महिलाएं कमा रही हजारों।




बलौदाबाजार : राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान तहत जिले के विभिन्न महिलाएं स्व-सहायता समूह (Women self help group of Chhattisgarh) से जुड़कर सफलता की नई कहानियाँ लिख रही है। तथा अपने सपने को पंख देकर नई उड़ान को तैयार है। जिला प्रशासन एवं जिला पंचायत की एनआरएलएम टीम की सहायता से इन महिलाओं को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर हरसंभव प्रयास किये जा है।
ऐसे ही जिले के सिमगा विकासखण्ड के अंतर्गत ग्राम रावन की दीपा स्व सहायता समूह की महिलाओं ने सामान्य गृहणी से लेकर सफल व्यवसायी तक का सफर तय किया है। उन्होंने वाशिंग पॉउडर निर्माण कर उन्हें बेचकर स्वरोजगार की मिशाल कायम की है। जो जिले के अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है।









समूह (Women self help group of Chhattisgarh) की अध्यक्ष टुकेश्वरी साहू ने बताया की हमारे समूह में कुल 11 सदस्य है। सभी गरीब परिवार से सम्बंधित इस समूह की सभी महिलाएं गृहणी के रूप में जीवन यापन कर रही थी। फिर एक दिन इन्हें सक्रिय सदस्य केशर वर्मा एवं क्षेत्रीय समन्वयक के द्वारा बिहान योजना के बारे में पूर्ण जानकारी दी गई। जिससे प्रेरित होकर इन 11 महिलाओं ने स्व-सहायता समूह बनाने का निर्णय लिया और दिनांक 20 मार्च 2015 से ही समूह की गतिविधियां प्रारंभ की गयी। प्रारंभ में समूह के सदस्य साप्ताहिक बैठक कर अपनी छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने हेतु समूह से रही ऋण प्राप्त करने लगे एवं सदस्य मजदूरी कर ऋण को चुकाने लगे फिर भी इन्हें घर चलाने एवं बच्चों की पर्ढ़ाइ हेतु बाहर से ऋण लेने की आवश्यकता पड़ ही जाता था।बिहान के क्षेत्रीय समन्वयक द्वारा समूह के सदस्यों को सामुदायिक निवेश निधि सीआईएफ के बारे में जानकारी को दी गई।





नहीं दिखते अब जंगल में मोर, संरक्षण व सुरक्षा के अभाव में हो रहे विलुप्त









समूह की कार्यप्रणाली सुचारू रूप से चलने लगी जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें योजना के माध्यम से 75 हजार रुपये राशि प्राप्त हुए।जिसका उपयोग सदस्यों द्वारा स्वयं की गतिविधि प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया। गतिविधि के अंतर्गत वाशिंग पाउडर निर्माण कर विक्रय लक्ष्य रखा गया। परन्तु यह राशि समूह के सदस्यों की घरेलू आवश्यकताओं एवं ऋण चुकाने हेतु पर्याप्त नही था। कुछ माह बाद समूह की महिलाओं की दृढ़ इच्छा को देखते हुए जिला पंचायत की सहयोग से इलाहाबाद बैंक सुहेला से समूह को 2.50 लाख रूपयें की बैंक ऋण दिलाया गया। जिससे वाशिंग पाउडर (Chhattisgarh women self group makes washing powder) बनाने के लिए मशीन खरीदा गया।









आज यह महिला (Women self help group of Chhattisgarh) समूह हर माह 50 हजार रुपये का कच्चा माल लाकर वाशिंग पॉउडर बनाकर घर घर एवं आस पास के बाजारों में सामान बेच रहे है। समूह ने इस वाशिंग पाउडर का नाम प्रज्ञा वाशिंग (Pragya Washing Powder by Chhattisgarh women self group) पाउडर रखा गया है। आज इस व्यवसाय से समूह को प्रत्येक माह 8 से 10 हजार रूपयें का शुद्ध लाभ हो रहा है। जिससे इन महिलाओं को आत्मबल बढ़ा है और इनकी आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है। भविष्य में इस तरह के कार्य को विस्तार देतें हुए अन्य समूहों को भी इस गतिविधि से जोड़कर उन्हें सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रशासन आगें बढ़ रहे है।






सैलरी घोटाला करने वाले आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू

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रायपुर. नगर निगम जोन तीन के सीनियर बाबू गंगराम सिन्हा और प्लेसमेंट पर तैनात कम्प्यूटर आपरेटर नेहा परवीन द्वारा किए गए सैलरी घोटाले (salary scam inquiry commission) की विभागीय जांच नगर निगम ने शुरू कर दी है। जांच के लिए अधिकारियों की तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।





इसमें वित्त उपायुक्त एसपी साहू, उपायुक्त कृष्णा खटीक, लेखा अधिकारी श्याम सोनी और जोन तीन के जोन कमिश्नर प्रवीण गहलोत शामिल हैं। इन सभी के पास घोटाले की फाइल आ चुकी है। इस पर जांच शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार के घोटाले की शुरुआत के समय से सैलरी निकलने के लिए जोन के जिन अधिकारियों के हस्ताक्षर की भुगतान फाइल है, उन सभी से पूछताछ होगी। सबसे पहले घोटाले का अंजाम देने वाले बाबू गंगाराम सिन्हा और कम्प्यूटर आपरेटर नेहा परवीन से कड़ाई से पूछताछ की जाएगी। इसके अलावा पुलिस को एफआईआर दर्ज कराने के लिए सहायक दस्तावेज भी तैयार किया जा रहा है।





राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से महिलाएं हो रही है आत्मनिर्भर





पुलिस ने निगम को घोटाले (salary scam inquiry commission) के सभी दस्तावेज मांगी है। ताकि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कोर्ट में पेश कर सलाखों के पीछे भेज सके। गौरतलब हो कि गंगाराम सिन्हा और नेहा परवीन ने 2016 से छह कर्मचारियों की तनख्वाह अपने रिश्तेदारों के खाते डालकर सैलरी घोटाला कर रहे थे। नेहा परवीन ने अपनी मां और दो बहनों और गंगाराम सिन्हा ने अपनी पत्नी, बेटे और चाचा के बैंक खाते में राशि डाल रहे थे। अब तक करीब 71 लाख 18 हजार 961 रुपए का गबन कर चुके हैं। ये सभी राशि ब्याज समेत दोनों से वसूला जाएगा। जरूरत पडऩे पर दोनों की संपत्ति कुर्क नीलाम कर राशि एकत्रित की जाएगी।





जोन तीन में हुए सैलरी घोटाले के लिए जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। कमेटी ने जांच भी शुरू कर दी है। एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस ने कुछ और दस्तावेज मांगी है, जिसे तैयार कर शीघ्र संबंधित थाने में प्रस्तुत किया जाएगा।
- पुलक भट्टाचार्य, अपर आयुक्त, नगर निगम रायपुर


कोरोना वायरस की पहचान के लिए लगेगी ट्रू- नॉट मशीन

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रायपुर. राजधानी के पंडरी स्थित जिला अस्पताल में मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने प्रबंधन निरंतर प्रयासरत है। जिला अस्पताल में कोरोना संक्रमितों के सैंपल की जांच के लिए ट्रू-नॉट मशीन लगाई जाएगी, जिसके लिए कवायद शुरू हो गई है। हमर लैब के ऊपर ट्रू-नॉट मशीन लगाने की व्यवस्था की जा रही है।





सीजीएमएससी की टीम ने मशीन लगाने चयनित स्थल का निरीक्षण भी कर लिया है। जिला अस्पताल से औसतन रोजाना 80-90 मरीजों का सैंपल लेकर जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। रिपोर्ट आने में विलंब होता है, जिसके चलते मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। जिला अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों 250 से 300 मरीज पहुंच रहे हैं। सर्दी-खांसी व बुखार के मरीजों का कोरोना की पहचान के लिए तुरंत एंटीजन किया जाता है। आरटी-पीसीआर जांच के लिए स्वॉब भी लिया जाता है।





राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन से महिलाएं हो रही है आत्मनिर्भर





वर्तमान में लालपुर और कालीबाड़ी में ट्रू-नॉट से कोरोना की जांच की जाती है। मेडिकल कॉलेज और एम्स में आरटी-पीसीआर की सुविधा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रू-नॉट मशीन मूलत: टीबी की जांच करने के काम आती है। इस मशीन के सॉफ्टवेयर में मामूली बदलाव से यह मशीन कोरोना संक्रमण की जांच भी कर सकती है। कोरोना समाप्ति के बाद इसका उपयोग टीबी जांच में भी किया जा सकता है।





जिला अस्पताल में ट्रू-नॉट मशीन स्थापित करना प्रस्तावित है, जिसके लिए कवायद की जा रही है। सीजीएमएससी की टीम चयनित स्थल का निरीक्षण कर चुकी है। मशीन लगने से मरीजों को काफी सहुलियत होगी।
- डॉ. पीके गुप्ता, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल


61 साल में 50 सदस्य भी नहीं, 9 जिलों में नहीं होंगे चैंबर चुनाव

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रायपुर. छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की स्थापना को 61 साल बीतने के बाद भी प्रदेश के 9 व्यापारिक जिले ऐसे हैं, जहां चैंबर के सदस्यों की संख्या 50 भी नहीं पहुंच पाई है। इसमें बस्तर, कोंडागांव, बीजापुर, बलरामपुर, सूरजपुर, जशपुर, मरवाही, सुकमा, नारायणपुर शामिल हैं। इसलिए इस वर्ष चैंबर का त्रैवार्षिक चुनाव सिर्फ 20 जिलों में होगा। भिलाई को चैंबर ने अलग से जिले का दर्जा दिया है। बाकी 20 जिलों में चुनाव के लिए चैंबर के निर्वाचन टीम ने रणनीति बना ली है।





प्रदेश के सुदुर जिलों में सदस्यों की संख्या 50 से कम होने के मामले में चैंबर अध्यक्ष जितेंद्र बरलोटा ने कहा कि चैंबर सदस्य बनने के लिए आजीवन 3500 रुपए शुल्क हैं। कई व्यापारी ऐसे हैं, जो कि स्थानीय व्यापारी संगठन में जुडऩे के बाद चैंबर की सदस्यता ग्रहण नहीं करते हैं। ऐसी स्थिति में उन जिलों में सदस्यों की संख्या कम ही रहती है। हालांकि जहां 50 से कम सदस्य हैं, वहां के लिए भी चैंबर द्वारा उपाध्यक्ष व मंत्री मनोनित किए जाते हैं, ताकि किसी भी परेशानी पर चैंबर के जरिए सहायता हो सके।





1959 में हुआ था चैंबर का गठन
चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज का गठन 19 अप्रैल 1959 में किया गया था। तब कुछ जिलों से शुरूआती की गई थी। 1980 में रायपुर चैंबर ऑफ कॉमर्स से नाम छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स किया गया। 1959 से 1976 तब मोहनलाल नत्थानी अध्यक्ष रहे। इनके बाद से अब तक चैंबर में व्यापारी एकता पैनल का कब्जा है। छह साल पहले चैंबर में तीसरे मोर्चे की एंट्री हुई। इस बार चुनाव में व्यापारी एकता पैनल और जय व्यापार पैनल के बीच सीधा मुकाबला है। वर्तमान में 16215 सदस्य हैं।





दिग्गज बन रहे उपाध्यक्ष-मंत्री प्रत्याशी
चैंबर चुनाव में उपाध्यक्ष-मंत्री पद प्रत्याशियों के लिए दिग्गजों के नाम शामिल हो रहे हैं। राजनांदगांव जिला सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल बरडिय़ा जय व्यापार पैनल में शामिल हो चुके हैं। वे राजनांदगांव से उपाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ेंगे, वहीं सिंधी समाज के पदाधिकारी राजा माखीजा को राजनांदगांव से मंत्री पद के लिए प्रत्याशी घोषित किया गया है। जय व्यापार पैनल ने राजनांदगांव दौरे में यह घोषणा की। इधर व्यापारी एकता पैनल ने कांकेर से हरनेक सिंह ओजाला को उपाध्यक्ष प्रत्याशी घोषित किया है। कांकेर दौरे के दौरान एकता पैनल ने प्रत्याशी की घोषणा की। चैंबर चुनाव में मतदाता सूची का प्रकाशन 4 फरवरी को किया जाएगा। सूची त्रुटि सुधार 6 फरवरी को शाम 6 बजे तक होगा।


वन अधिकार के निरस्त किए गए दावों पर होगा पुनर्विचार

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रायपुर. वन अधिकारों की मान्यता (Recognition Of Forest Rights) के लिए नए प्रकरणों की स्वीकृति के साथ ही निरस्त किए गए दावों का पुनर्विचार किया जाएगा। इस तरह के मामलों की संबंधित जिले के सहायक आयुक्त जांच करने के बाद निरस्त किए गए दावों की संबंधित को व्यक्तिगत रूप से दे। वहीं निरस्त किए जाने का कारण भी बताएं। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने बुधवार को मंत्रालय में विभागीय कार्यों की समीक्षा की।





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इस दौरान कहा कि वन अधिकार अधिनियम के तहत अजजा और अन्य परंपरागत वन निवासियों को उनका हक मिले। उनके निरस्त किए गए दावों की समीक्षा फरवरी माह तक पूरा कर लिया जाए।





उन्होंने बताया कि अबूझमाड़ क्षेत्र में विशेष तौर पर वन अधिकार (Recognition Of Forest Rights) पत्र दिए जाने हैं। बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने बताया कि अबूझमाड़ क्षेत्र में सर्वे का काम चल रहा है। खसरा-नक्शा बनाकर शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।


मंगलवार रात 12 बजे से मंदिर हसौद टोल नाका शुरू

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रायपुर। मंगलवार की रात बारह बजे से मंदिर हसौद का टोल नाका (Mandir Hasod Toll)शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही रसनी टोल नाका को भी बंद कर दिया गया। राजधानी से 12 किमी दूर और नवा रायपुर इलाके के मंदिरहसौद में नया टोल नाका २ फरवरी की रात 12 बजे शुरू कर दिया गया।





यह टोल नाका सुंदर नगर टोल बूथ की जगह शुरू किया जा रहा है। इसे चालू करके 2 फरवरी को रात 12 बजे रसनी टोल नाका बंद कर दिया गया। मंदिरहसौद टोल नाके(Mandir Hasod Toll) पर एक तरफ से चार पहिया वाहन का 50 रुपए लेना शुरू कर दिया गया। इससे पहले रसनी में एक तरफ के 25 रुपए के हिसाब से 50 रुपए टोल टैक्स के लिया जा रहा था। रायपुर से महासमुंद जाकर लौटते हैं तो उसे 100 रुपए टोल टैक्स लिया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मंदिरहसौद टोल नाका शुरू करने पहले ही सहमति दे दी थी। कोरोना संक्रमण के कारण टोल नाका तकरीबन दो माह बाद शुरू किया गया है। रसनी में पिछले 8 साल से चल रहे टोल नाके को बंद कर दिया गया है। अब दोनों टोल नाके की टोल टैक्स वसूली मंदिरहसौद नाके से ही की जाएगी। इससे साफ है कि यह प्रदेश का सबसे महंगा टोल नाका माना जा सकता है। दोनों नाकों का जोड़कर यहां दोगुना टैक्स देना पड़ेगा।





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राज्यपाल से हुई शिकायत
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस टोल नाके का जमकर विरोध किया है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से भी इसकी शिकायत की है। उनका कहना है कि जब रसनी में बिना किसी विवाद के टोल नाका चल रहा था तो फिर मंदिर हसौद में शुरू करना गलत है। यह स्थानीय लोगों के साथ अवैध वसूली स्वरूप है।





दुर्घटना का खतरा हर दम
मंदिरहसौद से पहले बने टोल प्लाजा का निर्माण स्थल के दोनों और तिराहा बना हुआ है। जिसकी वजह से अंधा मोड़ जैसी स्थिति बन गई है। नाके के 100 मीटर पहले रिंग रोड-3 तिराहा और तकरीबन आधा किलोमीटर बाद मंदिरहसौद-तुलसी तिराहा है। यहां से दिन भर भारी वाहनों का आना-जाना लगा रहता है। इसके अलावा रेलवे साइडिंग भी है।





सुंदरनगर विरोध के बाद मंदिर हसौद में शुरू
मंदिरहसौद टोल नाका से सड़क निर्माण करने वाली कंपनी 15 साल तक टोल टैक्स लेगी। इससे पहले बीते 8 साल से सुंदर नगर टोल नाका शुरू करने का प्रयास किया जा रहा था। विरोध के बाद अब इसे मंदिर हसौद में बनाया गया। टाटीबंध चौक से रसनी तक 43 किमी सड़क बनाने में कंपनी के 800 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इसकी वसूली रसनी नाका से बीते दस साल से चल रही थी, अब मंदरहसौद से भी वसूली होगी।





सामान्य टोल टैक्स





चार पहिया वाहन - 50 रुपए





छोटे मालवाहक - 85 रुपए
बस और ट्रक - 175 रुपए





भारी माल वाहक - 280 रुपए





मंदिरहसौद के लिए लोगों के लिए
चार पहिया वाहन - 10 रुपए





छोटे मालवाहक- 45 रुपए
बस और ट्रक - 85 रुपए





भारी माल वाहक - 140 रुपए





छूट आईडी कार्ड पर ही
मंदिरहसौद व आसपास के लोगों को टोल टैक्स में छूट दी जाएगी। ऐसे लोगों से चार पहिया वाहन के एक तरफ के लिए 50 के बजाय केवल 10 रुपए ही टोल टैक्स लेने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए आईडी कार्ड दिखाना होगा। इसके अलावा यही रियायत स्थानीय लोगों के हर प्रकार के वाहनों के लिए लागू रहेगी।


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