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CG Politics : दोषी छोड़ा नहीं जाएगा, चाहे वो राहुल गांधी क्यों न हो : विष्णुदेव

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 CG Politics : राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा था कि, “ED के अंदरूनी सूत्रों ने मुझे बताया है कि छापेमारी की तैयारी हो रही है। मैं ED का खुली बांहों से इंतजार कर रहा हूं। मैं उन्हें चाय और बिस्कुट खिलाऊंगा।’ जिसको लेकर राजनीतिक सियासत गरमा गई है। इसी बीच सीएम विष्णुदेव साय ने भी इस मामले पर बड़ा बयान सामने आया है। सीएम साय ने कहा कि जो अपराधी है उस पर कार्रवाई होकर रहेगी।


ED और अन्य एजेंसियां भी कार्रवाई करेंगी। छत्तीसगढ़ में भी लगातार कार्रवाई हो रही है। किसी भी दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा। पूर्व मंत्री कवासी लखमा के बयान पर CM विष्णु देव साय ने कहा कांग्रेस ने राममंदिर का निमंत्रण अस्वीकार किया था। कांग्रेस निमंत्रण अस्वीकार कर बड़ा पाप किया है। किसी कार्यक्रम में जाएं या नहीं जाए लेकिन निमंत्रण नहीं स्वीकारते।

वहीं राहुल गांधी के ED छापे पोस्ट पर CM विष्णु देव साय ने कहा जो अपराधी है उस पर कार्रवाई होकर रहेगी ED और अन्य एजेंसियां भी कार्रवाई करेंगी छत्तीसगढ़ में भी लगातार कार्रवाई हो रही हैकिसी भी दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।


CG POLITICS : कल फिर दिल्‍ली जाएंगे CM विष्णुदेव, मंत्रियों के नामों पर लगेगी अंतिम मुहर

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 CG POLITICS : मुख्‍यमंत्री विष्‍णुदेव साय कल  को फिर दिल्‍ली जा रहे हैं। साय कैबिनेट मंत्रियों के संभावित नामों की सूची लेकर कल सुबह ही दिल्‍ली जाएंगे।


वहीं दूसरी तरफ खाली पड़े 2 मंत्री पद के लिए मौजूदा वक्त में एक अनार-सौ बीमार वाली स्थिति है। 

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि क्या मुख्यमंत्री साय आगामी निकाय चुनाव से पहले मंत्रिमंडल विस्तार का रिस्क लेंगे ? या फिर लोकसभा चुनाव की तरह ही नगरीय निकाय चुनाव में बीजेपी का परचम लहराने के बाद मंत्रिमंडल के विस्तार पर अंतिम और फाइनल मुहर लगेगी ?

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन कर 11 में से 10 सीटों पर जीत दर्ज की। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही राजनीतिक घटनाक्रमों पर गौर करे, तो सबसे पहले बृजमोहन अग्रवाल के मंत्रिमंडल से इस्तीफ की अटकलों ने सबका ध्यान खींचा। बृजमोहन अग्रवाल के मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद अगले शिक्षा मंत्री को लेकर राजनीतिक गलियारों से लेकर ब्यूरोक्रेंसी तक चर्चाओं का दौर सरगर्म रहा। 

CG Politics : बृजमोहन को मंत्री पद से बर्खास्त करें सीएम साय : कांग्रेस

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 CG Politics : भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल के द्वारा मंत्री पद से इस्तीफा नहीं देने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, बृजमोहन अग्रवाल को बर्खास्त कब करेंगे? बृजमोहन अग्रवाल सांसद का चुनाव जीतने के बाद विधायक पद से इस्तीफा दिये है। नैतिकता का तकाजा है कि वे विधायक के साथ मंत्री पद से भी इस्तीफा दे देते लेकिन उन्होंने मंत्री पद के लालच में सारी नैतिकताओं को धता बता दिया है।


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कोई व्यक्ति बिना विधानमंडल का सदस्य रहते हुये भी 6 माह तक मंत्री पद धारित कर सकता है। उसे 6 माह के अंदर सदन का सदस्य निर्वाचित होना होता है। बृजमोहन के मामले में स्थितियां अलग है। उन्होंने सांसद निर्वाचित होने के बाद विधायक पद से इस्तीफा दिया है। यहां पर 6 माह के अंदर सदस्य के निर्वाचन की अपेक्षा वाली बात नहीं है। अतः संवैधानिक प्रावधानों की आड़ लेकर मंत्री पद पर बने रहना उचित नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेता पद लोलुप है, सत्ता में बने रहना ही उनके लिये सब कुछ है। कोई सांसद पद पर तत्काल निर्वाचित व्यक्ति यह कह कर मंत्री पद नहीं छोड़ रहा कि वह 6 माह तक मंत्री बने रह सकता है यह भाजपा में ही संभव है। भाजपा और मुख्यमंत्री बताये कि क्या वह भी बृजमोहन अग्रवाल के इस निर्णय के साथ है या राजनैतिक सुचिता को देखते हुये मुख्यमंत्री उनको बर्खास्त करेंगे।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस पार्टी राज्यपाल से भी मांग करती है कि यदि बृजमोहन मंत्री पद से स्वयं इस्तीफा नहीं देते है या मुख्यमंत्री उनको नहीं हटाते है तो राज्यपाल स्वयं उनको मंत्री पद से बर्खास्त कर एक नजीर प्रस्तुत करें। राज्य में संवैधानिक नैतिकता की रक्षा का दायित्व राज्यपाल के पास ही है राज्य की जनता उनसे अपेक्षा कर रही है कि वे बृजमोहन को तत्काल बर्खास्त करें।


कांग्रेस की शिकायत पर बीजेपी प्रत्‍याशी सरोज पांडे को चुनाव आयोग का नोटिस, जानें क्या है पूरा मामला

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 CG Politics :  लोकसभा चुनाव के तीसरे चरण के तहत कोरबा लोकसभा क्षेत्र में 7 मई के मतदान होना है। इस बीच चिरमिरी में  धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री का श्रीराम कथा चल रहा है। इस आयोजन के जरिये बीजेपी पर चुनाव प्रचार करने का आरोप कोंग्रस ने लगाया है।


चिरमिरी कोरबा संसदीय क्षेत्र में आता है। कांग्रेस नेता की तरफ से की गई शिकायत के आधार पर चुनाव आयोग ने कोरबा से बीजेपी प्रत्‍याशी सरोज पांडे को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जिला कांग्रेस कमेटी एम.सी.बी. के अध्‍यक्ष अशोक श्रीवास्तव अध्यक्ष ने चुनाव आयोग से की गई शिकायत में आरोप लगाया था कि धीरेंद्र कृष्‍ण शास्त्री के कार्यक्रम का प्रचार-प्रसार कोरबा लोकसभा के भाजपा प्रत्याशी सरोज पांडे और राज्‍य सरकार के मंत्रियों के फोटो फ्लेक्स लगाकर किया जा रहा है।

साथ ही इनकी फोटो पलेक्स को नगर निगम चिरमिरी और नगरपालिका मनेन्द्रगढ़ में कई सरकारी बिजली के खंभों में लगाया गया है जो कि आचार संहिता का उल्लंघन है जिस कारण उक्त कार्यक्रम को रद्द किये जाने की मांग की गई है।


प्रियंका गांधी पर रंजना साहू ने दागे सवाल, कहा - देश की बेटियां जानती हैं सिर्फ वोट और नोट की लालची हैं

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 CG Politics :  कांग्रेस की नेत्री प्रियंका गांधी वाड्रा के दौरे को लेकर भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता व पूर्व विधायक रंजना साहू ने कहा-प्रियंका की मुंह से यहां छत्तीसगढ़ के दौरे पर आ रही हैं। उन्होंने कहा बिग बास 16 फेम व टीवी एक्ट्रेस अर्चना गौतम 'लड़की हूं लड़ सकती हूं' की पोस्टर गर्ल रह चुकी हैं। अर्चना गौतम ने फरवरी 2023 में नवा रायपुर में हुए कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रियंका गांधी के पीए संदीप ठाकुर पर गंभीर आरोप लगाया था। 


अधिवेशन के दौरान संदीप सिंह ने जान से मारने की धमकी दी थी।  इस शर्मनाक घटना को लेकर अभी तक प्रियंका जी, आपने कोई जवाब नहीं दिया। क्या यही आपकी झूठी और दिखावे की राजनीति है। आपके अंदर महिलाओं के प्रति कोई संवदेना नहीं है। कहा कि आप प्रियंका गांधी जी आज आप छत्तीसगढ़ में महिला उत्थान, महिला प्रगति,महिला स्वाभिभान की बड़ी बड़ी बातें करेंगी।

रंजना साहू का प्रियंका गांधी से बड़ा सवाल करते हुए कहा, दलित और पिछड़े वर्ग के लोगो से आपके खानदान को नफरत क्यों? है। अर्चना गौतम से आपकी माजूदगी आपके सचिव ने छेड़छाड़ की आप मौन क्यों हैं जवाब क्यों नही देती। ऐसा क्यों कराया आपने प्रियंका जी? दलितों,पिछड़े वर्ग के लोगो से इतनी नफरत क्यों है आपको और आपके ख़ानदान को? कई बार पूछ चुके है जवाब क्यों नहीं देती?। 

रंजना साहू ने कहा, कांग्रेस की भूपेश सरकार में महिलाओं के अत्याचार के मामले में छत्तीसगढ़ ने सारे रिकार्ड तोड़ दिए थे। महिलाओं को घर से बाहर निकलने में डर लगता था। उनके साथ बलात्कार और आए दिन छेड़छाड़ की घटनाएं हाेती थी। इसके लिए आज तक प्रियंका गांधी ने भूपेश बघेल जी से क्यों नहीं पूछा। महिलाओं के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें करने वाली प्रियंका गांधी महिलाओं के उत्थान के लिए घडि़याली आंसू बहाती है। लेकिन जब उनके ही पीए ने शर्मनाक घटना को अंजाम दिया था तो छत्तीसगढ़ ही नहीं पूरे देश में इसकी गूंज सुनाई थी। थोड़ी भी महिलाओं के प्रति हमदर्दी होती तो वे इस पर बड़ी कार्रवाई कर सकती थी। लेकिन क्या करें कैसे अपने पाले हुए नेताओं को नसीहत देतीं क्योंकि प्रियंका एक तानाशाही प्रवृत्ति की ठहरी। यही कारण है कि महिलाओं पर अत्याचार होने के बावजूद भूपेश बघेल को कभी कुछ नहीं कहा। 

रंजना साहू ने कहा, प्रियंका गांधी कांग्रेस के झूठे न्याय पत्र के जरिए महिलाओं और हर वर्ग को झांसा देने के लिए आ रही है। प्रियंका जी कहां थी, जब निराश्रित महिलाें को कांग्रेस अपने वादे के अनुरूप महज 500 रुपए नहीं दे पाई। क्या उनका फर्ज नहीं था कि वे भूपेश बघेल से इसे लागू करवाती। 18 लाख गरीबों के आवास नहीं मिलने पर भूपेश बघेल के सरकार में टीएस सिंहदेव ने इस्तीफा दे दिया था, उस वक्त वो क्या सो रही थीं, या विदेशों में सैर सपाटे में व्यस्त थीं। गरीबी का दर्द ये गांधी परिवार के लोग क्या जानेंगे, क्याेंकि उन्हें सिर्फ अपने लुटेरे मुख्यमंत्री भूपेश के जरिए अपनी तिजोरी भरनी थी। इसलिए प्रियंका गांधी को बिना आवास के ही अपने परिवार के साथ जिंदगी गुजारने वाली गरीब महिलाओं की सुध नहीं आई। प्रियंका गांधी और कांग्रेस ने महिलाओं के सिर्फ धोखा ही किया है। मां गंगा की सौगंध खाने वाली कांग्रेस ने शराबबंदी नहीं महिलाओं को ठगा है। ऐसे में अब जनता को कांग्रेस के झूठे और भ्रष्टाचार रूपी फेरब से नफरत हो गई। इस बार कांग्रेस के नेताओं की हिम्मत नहीं है कि भूपेश की करतूतों की वजह से जनता के बीच जा सके। इसलिए कांग्रेस के नेताओं को भी पता है कि मोदी की गारंटी पर ही जनता को भरोसा और विश्वास है। 

उन्होंने कहा मोदी की अधिकांश गारंटियों को विष्णुदेव साय की सरकार ने पूरा कर दिया है। आज महिलाओं के खाते में हर माह महतारी वंदन योजना से 1 हजार रुपए और साल में 12 हजार रुपए देने की शुरूआत हो गई। कांग्रेस के न्यायपत्र में महिलाओं के नाम पर झूठे वादों पर जनता को विश्वास नहीं हैं। छत्तीसगढ़ की आधी आबादी मोदी जी को इस बार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनाने के लिए संकल्पित है।

CG Politics : एक ही दिन राजनांदगांव में योगी आदित्यनाथ और प्रियंका गांधी गरजेंगे

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 CG Politics : राजनांदगांव लोकसभा सीट के लिए 26 अप्रैल को मतदान होना है. इसके पहले प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस और भाजपा ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है. 21 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां भाजपा प्रत्याशी संतोष पांडे के पक्ष में चुनावी आमसभा को संबोधित करेंगे वहीं कांग्रेस प्रत्याशी भूपेश बघेल के लिए प्रियंका गांधी भी इसी दिन एक बड़ी आमसभा को संबोधित करेंगी. दोनों दल आमसभा की तैयारी को लेकर पूरी ताकत के साथ जुटे हुए हैं.


जानकारी के मुताबिक 21 अप्रैल को ही योगी आदित्यनाथ सरोज पांडेय के पक्ष में प्रचार के लिए कोरबा लोकसभा क्षेत्र में भी सभा लेंगे. 22 अप्रैल को सतपाल महाराज की भी चुनावी सभा चिरमिरी में प्रस्तावित है. मिली जानकारी के अनुसार योगी आदित्यनाथ खुज्जी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कुमर्दा के सागर ग्राउंड में 21 अप्रैल को दोपहर 12.30 बजे बड़ी आमसभा करेंगे.

इसी दिन डोंगरगांव विधानसभा के अंतर्गत आने वाले मोहड़ में कांग्रेस की राष्ट्रीय नेत्री प्रियंका गांधी वाड्रा दोपहर 2 बजे एक बड़ी आमसभा को संबोधित करेंगी. प्रियंका का दौरा कार्यक्रम तय हो चुका है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने मोहड़ पहुंचकर तैयारियों का जायजा भी ले लिया है.

बता दें कि बीजेपी ने कोरबा में सुश्री सरोज पांड़ेय को अपना उम्मीदवार बनाया है। जहां उनका मुकाबाल कांग्रेस की ज्योत्सना महंत से होगा। बिलासपुर में बीजेपी के तोखन साहू के सामने कांग्रेस ने देवेंद्र यादव को मैदान में उतार हैं। वहीं रायपुर में बीजेपी सरकार के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का मुकाबला कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय से होगा। राजनांदगांव में कांग्रेस की ओर पूर्व सीएम भूपेश बघेल उम्मीदवार हैं जिनका मुकाबला संतोष पांडेय से होगा।


CG Politics : महंत का फिर विवादित बयान, PM मोदी को बताया डिफॉल्टर, पढ़े पूरी खबर

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CG Politics : पीएम मोदी को लेकर सिर फोड़ने वाले बयान के बाद देशभर में चर्चा में आए छत्तीसगढ़ के नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने एक अब मोदी को डिफाल्टर कहा है। सक्ती जिले के कार्यकर्ता सम्मेलन में उन्होंने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि, नरेंद्र मोदी पिछले 10 साल से कोई भी गारंटी पूरी नहीं कर पाए हैं। चाहे लोगों को रोजगार देने की बात हो या लोगों को 15 लाख रुपये देने की बात हो। और ऐसे लोगों को छत्तीसगढ़ की जनता डिफॉल्टर मानती है। इसलिए हम डिफॉल्टर के बारे में बात नहीं करते।


चरणदास महंत ने इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा, नरेंद्र मोदी के खिलाफ उठाने पकड़ने वाला आदमी चाहिए। नरेंद्र मोदी का सिर फोड़ने वाला आदमी चाहिए और ये आदमी भूपेश बघेल हो सकते हैं, देवेंद्र यादव हो सकते हैं। इन्हें जिताकर दिल्ली भेजिए। इस विवादित बयान को लेकर आखिरकार महंत को अपने बचाव में बयान जारी करना पड़ा।

नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता चरणदास महंत के विवादित बयान के बाद चुनाव आयोग के निर्देश पर उन पर FIR दर्ज कर ली गई है. उनके के समर्थन में उनकी सांसद पत्नी ज्योत्सना महंत भी उतर आईं हैं। उन्होंने कहा कि, जिसको जो करना है कर ले, भाजपा जो भी बात करना चाहे वो करे हम भाजपा से नहीं डरते हैं। भाजपा को जो करना है करें वे स्वतंत्र है। उन्होंने आगे कहा कि, छत्तीसगढ़ी भाषा ही कुछ ऐसी होती है। वैसे तो हम ही लोग बोल देते है, अरे इस बात में क्या फोड़ना सिर। अरे ये तो बेकार बात है और यह एक कहावत है।

अजय चंद्राकर का कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- कवासी लखमा नजर नहीं आते, परिणाम BJP के पक्ष में

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 CG Politics: राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ दौरे पर बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कहा कि मोदी जी की सभा का फोटो देख लें. कांग्रेस से किसी के भी आने-जाने से कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला है. कांग्रेस मुकाबले से बाहर हो चुकी है. आज कांग्रेस में अंतर्कलह रोकने के लिए कमेटी बनी है. कांग्रेस में कांग्रेसी ही नहीं रहना चाहते. चुनाव किसकी ताकत पर लड़ेंगे. कांग्रेस के घोषणा पत्र पर बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने कसा तंज कि भारत को अपमानित और सत्ता पाने के लिए कांग्रेस किसी भी हद तक जा सकती है. आप लोग गणित समझिए. एक लाख गरीब महिलाओं को देंगे बोल रहे हैं. पी चिदंबरम ने पूरा गुणा भाग किया है, ऐसा टीएस सिहदेव का कहना है.


पूर्व मंत्री ने कहा कि सकल बजट से ज्यादा पैसे तो बांटने वाले हैं. ऐसे अनाप-शनाप बात बोलते है. मैं तो कहूंगा कि “नशे में बात कहते हैं.” कुछ भी बोलना. कुछ भी अनुमान लगाना. कुछ भी अपमानित करना. बीजेपी 50 साल तक विपक्ष में रही. लेकिन देश के खिलाफ नहीं गई.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पोस्ट पर अजय चंद्राकर ने कहा कि भूपेश बघेल ने फैसला पढ़ लिया. भूपेश बघेल के पास कौन सा एंटीना है. सर्वोच्च न्यायालय का पूरा फैसला आने दीजिए. बहुत से कयास उसमें लगाए गए हैं. समाचार पत्र में भी बहुत सी बात कही गई है. इसलिए एक टिप्पणी से और एक विषय में बोलने से हम उसे संपूर्ण नहीं मान सकते.

Charcha Chaurahe Par : राजनीति में ये रिश्ता क्या कहलाता है, सरकार हमर हो- विधायक नहीं, बकरा भात में किसका हाथ?

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चर्चा चौराहे पर 06

# राजनीति में ये रिश्ता क्या कहलाता है?


'चर्चा चौराहे पर' नियमित कॉलम पांच दिन में ही जिस तेजी से लोकप्रिय हुआ, वह अकल्पनीय है।  एक दिन इसके प्रकाशन में थोड़ा विलम्ब क्या हुआ, 5 लोगों ने लिंक भेजने के लिए फोन घनघना दिया। अनेक व्हाट्सएप्प संदेश भी मिले। इतने स्नेह के लिए हम सुधि पाठकों का हृदय से आभारी हैं।

 

इस बीच अब कानाफूसी से संबंधित और राजनीति में मायने रखने वाले कन्टेंट भी लोग हमें भेजने लगे हैं। ऐसी ही एक तस्वीर हमारे एक पाठक ने हमें इस टिप्पणी के साथ भेजी है कि "राजनीति में ये रिश्ता क्या कहलाता है ?" वह तस्वीर हम मूलतः यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं। हमारे विद्वान पाठकगण खुद तय करें कि इसके मायने क्या है? 

हम इस तस्वीर के संबंध में कोई भी टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं। वह इसलिए कि हमें पता नहीं है कि यह किस अवसर की तस्वीर है। बहरहाल, लोकप्रिय टीवी सीरियल "ये रिश्ता क्या कहलाता है" की तर्ज पर लोग इस तस्वीर के मायने अपने-अपने ढंग से निकाल रहे हैं। 

# सरकार हमर हो, विधायक नहीं


छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में जनता बहुत जागरूक है। बीते तीन विधानसभा चुनावों के परिणाम पर गौर फरमाएं। जिले की चारों सीट एक ही दल के उम्मीदवार जीतते आए हैं। यह गजब संयोग नहीं, जागरूक जनता की पहचान है। क्षेत्र की जागरूक जनता बहुत मंथन कर अपना प्रतिनिधि चुनती है। चौराहे पर चर्चा चल रही थी। "इस बार किसकी सरकार? " एक नेताजी ने डींगे हाँकते हुए कहा- "सरकार तो हमारी ही बनेगी।" जब उनसे पूछा गया कि विधायक किसे चुन रहे हैं? कान में धीरे से फुसफुसाहट भरे स्वर में कहा- विधायक हमारे नहीं बन रहे हैं। ऐसा क्यों? इसके जवाब में नेताजी ने कहा-कमजोर प्रत्याशी दिए हैं। हम चाहते हैं कि सरकार हमारे दल का हो। विधायक प्रतिद्वंदी पार्टी का हो। तभी तो हमारी पूछ परख और राजनीति सफल है। वरना, हमें पूछेगा कौन? 

# ....तेकर धन ला, खाय मरार


चौराहे पर राजनीतिक चर्चा हो रही थी। एक छत्तीसगढ़ी कहावत पर आकर बात अटक गई। कहावत है-
" चिक्कट तेली, सूम कलार।
     तेकर धन ला, खाय मरार।।"
इसका उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़ी प्रिय नेताजी ने कहा-अब समझ गए ना? इस क्षेत्र में हमारे ही जाति के लोग क्यों चुनाव जीतते हैं। जिन्हें भी राष्ट्रीय पार्टियां टिकट देती है। वे लोग पार्टी फण्ड को ही गटकने के फिराक में रहते हैं। "चमड़ी जाए तो जाए, दमड़ी न जाए" सोचने वाले लोग क्या चुनाव लड़ेंगे। उनका इशारा किधर था? हमें तो समझ नहीं आया। नेताजी क्या कहना चाहते हैं? आपको समझ आया, तो हमें भी बताएं। 

# बकरा भात में किसका हाथ ?


महासमुन्द शहर से लगे एक गांव में 'बकरा-भात' (भोज) का आयोजन हुआ। एक जाति विशेष के लोग आपस में एकजुट हुए। जमकर दावत उड़ाई। चुनाव में कोई जीते-कोई हारे, इससे हमें क्या? कहते हुए लोगों ने जमकर पार्टी मनाई। यह खबर गांव में तेजी से फैल गई। अब गांव के अन्य वर्ग के लोग उस सख्श को तलाश रहे हैं, जिन्होंने यह आयोजन कराया। चौराहे पर एक ही चर्चा है-'बकरा भात में है किसका हाथ?' अब देखना होगा कि इसका चुनाव में क्या असर होगा? कत्ल की रात कहे जाने वाले रात से पहले ही न जाने कितने बकरे की बलि चढ़ चुकी है। लोग फूल खा-पी रहे हैं। उम्मीदवार को ही बकरा बना रहे हैं। 'चुनई तिहार' का मजा ले रहे हैं। हार के डर से हर उपाय कर रहे हैं उम्मीदवार। कुछ प्रत्याशी बेचारे फंड कम पड़ने का रोना भी रो रहे हैं। जब चुनाव इतना खर्चीला होगा, तो ईमानदार नेता की उम्मीद कैसे की जा सकती है? 

-: Disclaimer :- 

इस कालम का संपादन वरिष्ठ पत्रकार व 'श्रीपुर एक्सप्रेस' और 'मीडिया24मीडिया' समूह के प्रधान संपादक श्री आनंदराम पत्रकारश्री कर रहे हैं। इसमें उल्लेखित तथ्यों की जानकारी संचार के विभिन्न माध्यमों, जन चर्चा और कानाफूसी पर आधारित है। व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत आलेख से किसी की भी मानहानि नहीं होगी, इसका विशेष ख्याल रखा गया है। आलेख में किसी व्यक्ति विशेष, संस्था अथवा दल विशेष पर कटाक्ष नहीं है। किसी घटना अथवा कड़ी का आपस में जुड़ जाना महज एक संयोग होगा। इस संबंध में कोई दावा-आपत्ति स्वीकार्य नहीं है। 

( हमारा ध्येय स्वस्थ पत्रकारिता को प्रोत्साहित करना है। तथापि यदि संयोगवश किसी विषयवस्तु से किसी की भावना को ठेस पहुंचती है, तो अपनी अभिव्यक्ति सीधे प्रधान संपादक तक मोबाइल नंबर- 9669140004 पर व्हाट्सएप्प करके अथवा anand.media24media@gmail.com पर ई-मेल संदेश भेज सकते हैं। हम सुधि पाठकों के भावनाओं का विशेष ध्यान रखेंगे। )

नोट:- इस नियमित कॉलम का उपयोग विभिन्न समाचार पत्रों और वेबपोर्टल संपादकों द्वारा भी किया जा रहा है।

कृपया कंटेंट से छेड़छाड़ कर प्रकाशित न करें। ऐसा करने पर स्वयं जिम्मेदार रहेंगे। 

बहुत कम समय में पाठकों का अपार स्नेह और हमें व्हाट्सएप पर मिल रहे संदेश से हम उत्साहित हैं। 

राष्ट्रीय प्रेस दिवस की सभी सुधि पाठकों को हार्दिक शुभकामनाएं











Charcha Chaurahe Par : ये कत्ल की रात क्या है, दिया वाली दीवाली, चुनाव लड़ने का शौक हो गया पूरा,ऑब्जर्वर हैं कि दामाद

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चर्चा चौराहे पर-05

# ये कत्ल की रात क्या है ?


चौराहे पर चर्चा चल रही थी। कत्ल की रात आने वाली है। पुलिस विभाग में नए-नए भर्ती हुए एक सिपाही ने यह बात सुन ली। उसने टीआई को बताया। टीआई ने कप्तान को सूचना दी। कप्तान ने पुलिस के मुखबिरों को काम पर लगवाया। सायबर सेल को अलर्ट किया गया। खुफिया तंत्र भी सक्रिय हो गया। 

चहुँओर एक ही चर्चा- "किसी की कत्ल होने वाली है। जरा अलर्ट रहें, चुनाव का समय है। कानून व्यवस्था बिगड़नी नहीं चाहिए।" गुपचुप तरीके से खूब छानबीन हुई। अंत में कत्ल की रात का राज नहीं खुला। सब तरफ चुनावी शोरगुल के बाद किसी तूफान के पहले की खौफनाक शान्ति थी। तभी धुर नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ के एक जिले के कप्तान ने समीक्षा बैठक ली। बैठक में युवा टीआई से कप्तान पूछ बैठे- ये कत्ल की रात क्या है? तुम्हे पता है। गैर अनुभवी टीआई ने मुंडी हिलाई। कहा-"राज का पर्दाफाश नहीं हो पा रहा है श्रीमान।" अनुभवी अफसरों के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई। कप्तान भी थोड़ा निश्चिंत हो गए। कप्तान को समझ में आ गया था कि ये कत्ल की रात का राज क्या है। पहले चरण के चुनाव के दौरान घटित इस वाक्या के बाद लोगों को दूसरे चरण के मतदान के पहले आने वाले 'कत्ल की रात' का बेसब्री से इंतजार है।

# दिया वाली दीवाली और दीया वाली दीपावली


दीगर प्रान्त से छत्तीसगढ़ आकर आजीविका चला रहे एक सख्श ने दीपावली की क्या खूब व्याख्या की है। बात-बात पर 'हमारा क्या ?' कहने वाले ये लोग चुनावी साल में बड़े खुश हैं। दिया वाली दीवाली जो मना रहे हैं। अर्थात दूसरों के दिए उपहार से दीवाली मना रहे हैं। चौराहे पर इसकी चर्चा चली। कहा- "का हो बबुआ ! कैसी रही दीवाली ?" बिरादरी के दूसरे बंदे ने जवाब दिया- " बस भैया, दिया वाली दीवाली रही (दिए गए उपहार पर ही दीवाली मनी)" । इस पर स्वाभिमानी छत्तीसगढ़िया ने तपाक से जवाब दिया- " तो किसकी दीवाली बिना दीया के होती है।" परदेशिया बाबू ने जवाब दिया- "दिया वाली दीवाली (दूसरों के दिए उपहार पर दीवाली मनाना) और दीया वाली दीपावली (दीप मालाओं को सजाकर दीवाली मनाने) में अंतर नहीं न है?" भोला छत्तीसगढ़िया अभी तक नहीं समझ पा रहे हैं कि यह बुड़बक क्या बक रहा है। 

# चुनाव लड़ने का शौक हो गया पूरा


चुनाव लड़ना दिन-ब-दिन खर्चीला होते जा रहा है। एक युवा नेता को भी विधायक बनने का खुमार चढ़ा। पुरखों की खून-पसीने की कमाई पूंजी और खेती की जमीन बेचकर चुनाव मैदान में उतरे। लोगों ने खूब चने के झाड़ पर चढ़ाया। हर किसी ने 'जीत रहे हो-जीत रहे हो' का रट्टा लगाया। जोश-जोश में लाखों रुपये फूंक दिए। अब पैरों तले जमीन खिसकने की बारी आ गयी है। युवा नेता के परिजनों को समझ में आ गया है कि चुनाव जीतने की स्थिति बिल्कुल भी नहीं है। तब चौराहे पर चर्चा छेड़ रहे हैं- "मुन्ना को चुनाव लड़ने का बड़ा शौक था। उसके शौक को पूरा करने ही चुनाव मैदान में उतरे हैं। हमें भी मालूम है जितना इतना आसान नहीं है। चुनाव लड़ने का शौक तो पूरा हो ही गया।"  इन्हें भी समझ में आ गया है कि राजनीति का नशा ऐसा है कि- 

कबीरा खड़ा बाजार में, 
          लिए लुकाठी हाथ ।
जो घर फूंके आपनौ, 
           चले हमारे साथ।। 

#  ऑब्जर्वर हैं कि दामाद !


छत्तीसगढ़ में निर्वाचन संपन्न कराने आए कतिपय आब्जर्वर से सरकारी अमला त्रस्त हो गए हैं। निर्वाचन आयोग से शिकायत करने की बात-बात पर चेतावनी देकर अफसरों को त्रस्त कर रखा है। ऑब्जर्वर की सेवा में तैनात द्वितीय और तृतीय श्रेणी के अधिकारी-कर्मचारी अब कहने लगे हैं कि- "ये ऑब्जर्वर हैं कि दामाद। इनकी सारी नखरे उठाने की विवशता है।" कहा जाता है कि निर्वाचन के दौरान ये ऑब्जर्वर इतने प्रभावशाली होते हैं कि इनकी मनगढ़ंत और मिथ्या रिपोर्ट पर भी त्वरित एक्शन होता है। जांच बाद में होती रहेगी, सबसे पहले अफसर हटा दिए जाते हैं। कैरियर पर दाग अलग लगता है। इसके चलते विभिन्न जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी से लेकर समूचा प्रशासनिक अमला इन्हें 'खुदा की तरह' मानकर खिदमत करने में जुटे हैं। बावजूद, कुछ ऑब्जर्वर की अपेक्षाओं की पूर्ति नहीं होने से गाहे-बगाहे डांट फटकार सहन करने की मजबूरी है। इससे परेशान कर्मी कह रहे हैं- "ये कब जाएंगे? कब मतदान हो और उन्हें मुक्ति मिले। जीना हराम कर रखा है, इन सरकारी दामादों ने।"

-: Disclaimer :- 

इस कालम का संपादन वरिष्ठ पत्रकार व 'श्रीपुर एक्सप्रेस' और 'मीडिया24मीडिया' समूह के प्रधान संपादक श्री आनंदराम पत्रकारश्री कर रहे हैं। इसमें उल्लेखित तथ्यों की जानकारी संचार के विभिन्न माध्यमों, जन चर्चा और कानाफूसी पर आधारित है। व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत आलेख से किसी की भी मानहानि नहीं होगी, इसका विशेष ख्याल रखा गया है। आलेख में किसी व्यक्ति विशेष, संस्था अथवा दल विशेष पर कटाक्ष नहीं है। किसी घटना अथवा कड़ी का आपस में जुड़ जाना महज एक संयोग होगा। इस संबंध में कोई दावा-आपत्ति स्वीकार्य नहीं है। 

( हमारा ध्येय स्वस्थ पत्रकारिता को प्रोत्साहित करना है। तथापि यदि संयोगवश किसी विषयवस्तु से किसी की भावना को ठेस पहुंचती है, तो अपनी अभिव्यक्ति सीधे प्रधान संपादक तक मोबाइल नंबर- 9669140004 पर व्हाट्सएप्प करके अथवा anand.media24media@gmail.com पर ई-मेल संदेश भेज सकते हैं। हम सुधि पाठकों के भावनाओं का विशेष ध्यान रखेंगे। )

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Charcha Chaurahe Par : सोशल मीडिया पर ऐसा वार, महादेव की कृपा से सब काम हो रहा है,उधारी की गारंटी नहीं- नगदी में बात करो

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# सोशल मीडिया पर ऐसा 'वार'


इन दिनों देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहा है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा आदर्श आचार संहिता में अनेक सख्तियां बरती जा रही है। इसका तोड़ राजनीतिक दल सोशल मीडिया पर 'पोस्टर वार' से निकाल रहे हैं। 'चर्चा चौराहे पर' के स्तम्भकार को एक सुधि पाठक ने व्हाट्सएप्प पर वायरल एक 'कार्टून पर्चा' भेजा है। जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह से स्वागत को चुटीले अंदाज में प्रस्तुत किया गया है। देखिए सोशल मीडिया पर कैसा 'वार' चल रहा है। वायरल पर्चा को हम मूलतः यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं। आप भी गौर फरमाइए और मंद-मंद मुस्कुराइये.....
सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा यह पोस्टर


# कांव-कांव अउ खांव-खांव


एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यकर्ता सह कथित मीडिया प्रभारी को उनके ही दल के लोग 'कौआ' संबोधित करते हैं। श्यामवर्ण के होने से इस उपनाम की उत्पति होना माना जा रहा है। किसी भी मसले पर जहाँ-तहां 'कांव-कांव' करने के स्वभाव के कारण पार्टी के लोग उन्हें इस उपनाम से संबोधित करने लगे हैं। चौराहे पर चर्चा हो रही थी कि पार्टी ने 'मीडिया मैनेजमेंट' की महती जिम्मेदारी उन्हें दी है। बड़ा फण्ड भी दिया है। आदत से लाचार ये नेता कलमकारों के हिस्से के धन को भी गटक रहे हैं। इससे अनेक कलमकार नाराज हो गए हैं। ऊपर से (हाई कमान) जब कलम के सिपाहियों के सम्मान में लोकतंत्र के उत्सव में भागीदारी के लिए 'सम्मान निधि' भेजी जा रही है। तब सवाल यह है कि छिछोरे किस्म के इन 'कांव-कांव' करने वाले नेता को खांव-खांव करने का अधिकार किसने दे दिया ?

# 'महादेव' की कृपा से सब काम हो रहा है !


छत्तीसगढ़ के महासमुन्द विधानसभा क्षेत्र में 'महादेव' की खूब चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि एक उम्मीदवार को 'महादेव' की कृपा से टिकट मिली है। तो जीत भी महादेव ही दिलाएंगे। यह सोचकर 'रामजी' सहित प्रायः सभी कार्यकर्ता काम करना बंद कर दिए हैं। 
जब महादेव की कृपा से ही सबकुछ होना है, तो हमारी क्या जरूरत है? ऐसा सवाल कर्मठ कार्यकर्ता कर रहे हैं। जीवन में पंच तक का चुनाव नहीं लड़े व्यक्ति को पार्टी ने क्या सोचकर टिकट दी है, यह तो संगठन के लोग ही जानें। इतना जरूर है कि जनता 'महादेव' का मतलब जानने आतुर हैं। कहीं यहाँ भी 'महादेव एप' की कृपा से सब काम तो नहीं हो रहा है?


# उधारी की नहीं गारंटी, नगदी में बात करो !


एक दल के उम्मीदवार 'महतारी वंदन योजना' का फार्म भरा रहे हैं। गांव-गांव में महिलाओं की टोली घूमकर प्रलोभन दे रही हैं। जागरूक जनता ने इस राजनीतिक फंडा को नकार दिया है। चौक पर चर्चा हो रही थी कि उधारी की योजना की गारंटी नहीं है, फार्म भरने के लिए पहले प्रति फार्म एक हजार रुपये दें। तब विश्वास होगा कि हर महीने एक हजार रुपये उन्हें मिलने वाला है। अब यह योजना उम्मीदवार के गले की हड्डी बन गई है। महिलाएं कह रही हैं-

 "उधारी से काम नहीं चलेगा, नगदी देना है तो बात करो।
21वीं सदी की समझदार नारी हैं हम, बाबा जी हमें माफ करो।"

इस तरह के वाक्या से गुजरते हुए दिन बीत गया और शाम को रिटर्निंग ऑफिसर ने संबंधित उम्मीदवार को नोटिस भेज दिया। आज दो बजे तक जवाब दो, वर्ना खैर नहीं। अब देखना होगा कि किसकी वंदन होती है। 



Charcha Chaurahe Par: जमीन से जुड़े हुए नेताजी-गैस का चक्कर है-लोकतंत्र में राजशाही ठाठ और यहाँ किस्मत का चक्कर है

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छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए हो रहे निर्वाचन-2023 को लेकर चौक-चौराहे पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही है। इस पर मीडिया का नजरिया क्या है? चर्चाओं को रोचक अंदाज में प्रस्तुत करने और सम-सामयिक विषयों पर चुटीले अंदाज में कलम चलाने, कलमकारों को प्रोत्साहित करने के लिए नया कॉलम "चर्चा चौराहे पर" प्रारंभ किया जा रहा है।



इस कालम का संपादन वरिष्ठ पत्रकार व श्रीपुर एक्सप्रेस और मीडिया24मीडिया समूह के प्रधान संपादक श्री आनंदराम पत्रकारश्री कर रहे हैं। इसमें उल्लेखित तथ्यों की जानकारी संचार के विभिन्न माध्यमों, जन चर्चा और कानाफूसी पर आधारित है। व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत आलेख से किसी की भी मानहानि नहीं होगी, इसका विशेष ख्याल रखा गया है। आलेख में किसी व्यक्ति विशेष, संस्था अथवा दल विशेष पर कटाक्ष नहीं है। किसी घटना अथवा कड़ी का आपस में जुड़ जाना महज एक संयोग होगा। इस संबंध में कोई दावा-आपत्ति स्वीकार्य नहीं है। 

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जमीन से जुड़े हुए हैं नेताजी


छत्तीसगढ़ का महासमुन्द जिला। यहाँ एक विधानसभा क्षेत्र में दो नए चेहरे चुनाव मैदान में हैं। दोनों खुद को जमीन से जुड़े हुए नेता बता रहे हैं। जनता समझ नहीं पा रही है कि कौन किस तरह से
जमीन से जुड़े हैं। एक नेता तो संगठन में काम करते हुए गांव-गली की खाक छान चुके हैं। जमीनी लीडर होने का उनका दावा समझ में आता है। दूसरा लीडर एकदम नया चेहरा है। ग्रामीण क्षेत्र में लोग उन्हें जानते-पहचानते ही नहीं हैं। तब कैसे जमीन से जुड़े हुए हैं नेता जी ? इस पर राजनीति के गूढ़ रहस्यों के जानकार एक कलमकार ने टिप्पणी की-

 "एक जमीन से जुड़े नेता हैं। दूसरे भी जमीन से जुड़े (जमीन दलाली) से जुड़े हैं। अब देखना होगा कि जनता किसे चुनती है? किसे धराशायी करती है? "

इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई है। इतना जरूर है कि जमीन से जुड़े एक नेता की जमीन से प्रतिद्वंदी दल के राष्ट्रीय नेता जनसभा को संबोधित करने वाले हैं। यह बड़ी दरियादिली है कि विपक्षी नेता की आमसभा के लिए अपनी जमीन के उपयोग की सहर्ष सहमति दी गई है। यह वही मैदान है, जहाँ से राष्ट्रीय नेता पहले भी विशाल जनसभा को संबोधित कर चुके हैं। जमीन से जुड़े होने और जनाधार दोनों में जमीन-आसमां का अंतर है।


गैस का चक्कर क्या है ?


महासमुन्द जिले का एक चर्चित विधानसभा क्षेत्र खल्लारी। जहाँ के लिए कहा जाता है कि यहाँ 'बाहरी' को ज्यादा मौका मिलता है। कभी-कभी स्थानीय को भी जनता चुन लेती है। यहाँ गैस के कारोबार से जुड़े एक नेताजी की जमकर चर्चा है। जिस गैस ने अच्छी पहचान दिलाई। जिस गैस की महत्वाकांक्षी योजना में कथित तौर पर अच्छा काम करने से टिकट मिली। वही गैस अब मुसीबत बन रही है। 25 हजार से अधिक  कनेक्शन में गोलमाल किए जाने की अपुष्ट खबरें मिल रही है। ऐन चुनाव के वक़्त विपक्षी नेता-कार्यकर्ता गैस के चक्कर का मसला उठा रहे हैं। गैस को हवा मिली तो नेताजी को बदहजमी होना स्वाभाविक है। गैस की समस्या न हो, इसके लिए 'कायमचूर्ण'  की तलाश शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि अफसरों से उगाही कर ज्यादा खाने वाले के पेट में उत्पन्न 'वात रोग' का तारणहार वैधराज कौन साबित होते हैं। चुनावी गलियारे में एक ही चर्चा है- ये गैस का चक्कर क्या है ?


लोकतंत्र में राजशाही ठाठ

महासमुन्द जिले के एक विधानसभा क्षेत्र में महल का खासा प्रभाव माना जाता है। आजाद भारत में भी 'हमर राजा' और 'हमर राजकुमार' की आस्था से लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। राजतंत्र खत्म हो गया, फिर भी क्षेत्र की जनता 'राजा साहब' के वंशजों को अपना पालनहार मानती है। यही वजह है कि आज भी गांव-गांव में थाल सजाकर, आरती उतारकर एक उम्मीदवार की पूजा की जा रही है। 
वहीं दूसरी ओर 

" लक्ष्मी जी की कृपा से सब काम हो रहा है।
 माया से राजनीति में बड़ा नाम हो रहा है।"

जनता दरबार में जनसेवा का संकल्प लेने वाले सख्श के बारे में इन दिनों खूब चर्चा हो रही है। राइस मिलरों को बुलाया गया। चुनाव लड़ने चंदा के रूप में 11-11 लाख रुपये देने का अनुरोध किया गया। मिलरों ने साफ कह दिया कि हम चावल के कारोबारी हैं, चावल एक नम्बर में बनाते हैं। कोयला के कारोबारी नहीं कि हमारे हाथ मे कालिख लगे हैं। हम इतनी मोटी रकम नहीं दे सकते हैं। बेचारे नेताजी अपनी पीड़ा किसी को नहीं बता पा रहे हैं। 


मेरी तो किस्मत ही खराब है !


महासमुन्द जिले का एक श्यामवर्ण नेता जी। यथा नाम तथा गुण। राजनीति में रंग चमकाने हर जतन कर चुके हैं। पर क्या करें-हर बार किस्मत ही साथ नहीं देती है। दल बदल कर देख लिया। चुनाव लड़कर देख लिया। लेकिन, दलाली और ठेकेदारी की पहचान जो बन गई है, वह मिटती नहीं है। अब तो हाईकमान को भी समझ में आ गया है कि अवसरवादी और दलबदलू नेताओं की हैसियत क्या है? अच्छे विचारधारा के लोगों को अब राजनीति में महत्व मिलने लगा है, ऐसा प्रतीत हो रहा है। तभी तो नेताजी को दरकिनार कर दिया गया। 'जाति समाज' का प्रभाव दिखाकर दूसरे दल से टिकट मिलने की उम्मीद में जंप लगाई। यह चतुराई भी काम नहीं आई। वहाँ पहले से पैठ जमाए जो बैठीं थी चातुरी ताई। अब अपनी किस्मत का रोना रो रहे हैं। अपने किए करतूतों का पाप धो रहे हैं। मौका चुके सिकंदर और डाली से झुके बंदर का वजूद खत्म हो जाता है। इसी तर्ज पर राजनीति में किस्मत ही खराब होने का रोना रो रहे हैं। अब तो किस्मत का ही खेल है कि किसकी किस्मत में विधायक बनना लिखा है। 

CG Politics: आचार संहिता का उल्लंघन के मामले में केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह के खिलाफ FIR दर्ज

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 CG Politics:  चुनाव आयोग के नोटिस का जवाब नहीं देने पर भरतपुर सोनहट की बीजेपी प्रत्याशी और केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है। आचार संहिता का उल्लंघन करने पर सोनहत थाने में धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया गया है। निर्वाचन आयोग अब तक रेणुका सिंह को तीन नोटिस जारी कर चुका है. जिसमें से एक का भी जवाब रेणुका सिंह ने नहीं दिया है।


बता दें कि BJP प्रत्याशी रेणुका सिंह को अब तक जिला निर्वाचन अधिकारी से 3 नोटिस मिल चुका है। इससे पहले रेणुका को एक बयान के चलते वोटिस दिया गया था, जिसमें वो कहती नजर आई थी कि ‘मैं वो नेता हूं कि जो मेरे कार्यकर्ता की एक उंगली काटेगा तो मैं उसका एक हाथ काटकर दूसरे हाथ में देना जानती हूं’।


CG Politics: मुख्यमंत्री आवास योजना के नाम पर छत्तीसगढ़ में एक नई सियासी ड्रामेबाजी की शुरुआत : भाजपा

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CG Politics : भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सांसद डॉ. सरोज पाण्डेय ने सोमवार को यहाँ एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री आवास योजना के नाम पर छत्तीसगढ़ में एक नई सियासी ड्रामेबाजी करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस और प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला।

डॉ. पाण्डेय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के 16 लाख से ज्यादा लोगों को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आवास नहीं दिया और प्रदेश की गरीब जनता के साथ विश्वासघात किया। इस योजना के नाम पर होने जा रहे सम्मेलन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी फिर से झूठ बांटने आ रहे हैं। इस योजना के नाम पर आज राहुल गांधी छत्तीसगढ़ की जनता को झूठ बाँटने आए हैं, क्योंकि सच तो वह है, जो आज के उपमुख्यमंत्री और तत्कालीन पंचायत मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए पत्र लिखकर मुख्यमंत्री बघेल को दोषी ठहराया था।

भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सांसद डॉ. पाण्डेय ने सिंहदेव के उस पत्र का हवाला दिया, जिसमें सिंहदेव ने 16 जुलाई 2022 को मुख्यमंत्री बघेल को लिखा था कि ‘ प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्रदेश के आवासविहीन लोगों को आवास बनाकर दिया जाना था। जिसके लिए मैंने कई बार आपसे चर्चा कर राशि आवंटन का अनुरोध किया था। किंतु इस योजना में राशि उपलब्ध नहीं की जा सकी। फलस्वरूप प्रदेश के लगभग 8 लाख लोगों के लिए आवास नहीं बनाए जा सके।

इसके अतिरिक्त 8 लाख घर बनाने में करीब 10 हजार करोड़ रुपए प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सहायक होते। हमारे जन घोषणा पत्र में छत्तीसगढ़ के 36 लक्ष्य अंतर्गत ग्रामीण आवास का अधिकार प्रमुख रूप से उल्लेखित है। विचारणीय है कि प्रदेश में वर्तमान सरकार के कार्यकाल में बेघर लोगों के लिए एक भी आवास नहीं बनाया जा सका और योजना की प्रगति निरंक रही।

मुझे दु:ख है, इस योजना का लाभ प्रदेश के आवासविहीन लोगों को नहीं मिल सका। अतः में अपने पद से त्यागपत्र देता हूं।’ डॉ. पाण्डेय ने कहा कि यह भाजपा का नहीं, बल्कि कांग्रेस सरकार के मंत्री का अपनी ही सरकार पर स्पष्ट आरोप है। क्या यह पत्र राहुल गांधी ने पढ़ा है? और, अगर नहीं पढ़ा है तो पहले उन्हें छत्तीसगढ़ की जनता से माफी मांगते हुए अपने मंत्री के प्रश्न का उत्तर देना चाहिए।

भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सांसद डॉ. पाण्डेय ने कहा कि जिस प्रकार से भाजपा ने जनता के हक की लड़ाई सड़कों पर लड़ने की शुरुआत की और उसे सफलता मिली, तब मुख्यमंत्री और उनकी पूरी सरकार कहीं-न-कहीं इस विषय से घबराने लगी। उसके बाद मुख्यमंत्री बघेल ने एक नया झूठ परोसकर मुख्यमंत्री आवास योजना की घोषणा की है और मोहब्बत की दुकान में नफरत का सामान बाँटने की शुरुआत करने वाले, भारत की राजनीति को बहुत कम समझने वाले, फैंसी ड्रेस प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले अपने नेता को यहाँ पर बुलाकर इस योजना की शुरुआत कराई।

भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सांसद डॉ. पाण्डेय ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यजनक और प्रदेश की जनता के साथ विश्वासघात है। जिन 16 लाख लोगों को प्रधानमंत्री आवास दिया जाना था, उन्हें आवास सिर्फ इसलिए प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने नहीं दिया, क्योंकि मुख्यमंत्री बघेल के मुताबिक इसमें प्रधानमंत्री शब्द लिखा है

तो इसका पूरा पैसा केंद्र की सरकार दे। मुख्यमंत्री की इस ओछी राजनीतिक सोच के चलते प्रदेश के कांकेर में प्रधानमंत्री आवास की प्रतीक्षा सूची में शामिल परिवार के पांच सदस्य कच्चा घर गिरने से दबकर मर गए। इसके दोषी मुख्यमंत्री बघेल हैं। डॉ. पाण्डेय ने कहा कि 15 मार्च 2023 को जनता जब कांग्रेसी मुख्यमंत्री से अपने आवास मांगने विधानसभा परिसर में पहुँची तो मुख्यमंत्री ने चर्चा करने के बजाय पुलिस को आगे करके उन पर बम फिंकवाये, जिसमें बड़ी संख्या में जनता घायल हुई। राहुल गांधी और मुख्यमंत्री बघेल ने उन पीड़ितो से आज तक माफ़ी नहीं मांगी है।

भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सांसद डॉ. पाण्डेय ने प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार और घोटालों की चर्चा करते हुए कहा कि भाजपा ने इस मुद्दे पर भी अपनी मुखर आवाज के साथ सड़क की लड़ाई लड़ी। प्रदेश सरकार ने जितने घोटाले किए हैं, उनमें से अगर प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने सिर्फ शराब घोटाला नहीं किया होता तो उस राशि से ही प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को आवास मिल जाता। डॉ. पाण्डेय ने मुख्यमंत्री आवास योजना को प्रदेश की जनता के लिए एक भ्रम बताते हुए मुख्यमंत्री बघेल से सवाल किया कि इस योजना में उन्होंने जिन लोगों को वर्तमान में आवास देने की बात कही है तो बाकी लोगों को आवास कब तक दिए जाएंगे? प्रदेश चुनाव के मुहाने पर है और आचार संहिता लागू होने का समय करीब है, तो अपना यह वादा पूरा कब करेंगे? और, जब वादा पूरा नहीं करेंगे एक नए घोटाले की भेंट इस योजना को चढ़ा देंगे। डॉ. पांडेय ने जानना चाहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार जो घोटालों पर घोटाले किए जा रही है,

उसका पैसा कहाँ जा रहा है? छत्तीसगढ़ को कांग्रेस के एटीएम की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व सांसद डॉ. पाण्डेय ने कहा कि भाजपा की पूर्ववर्ती प्रदेश सरकार ने अपने कार्यकाल में 7.50 लाख प्रधानमंत्री आवास बना दिए थे । मुख्यमंत्री बघेल का झूठ तो रायगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में भी उपमुख्यमंत्री तथा पूर्व पंचायत मंत्री सिंहदेव ने उजागर किया था और कहा था कि केंद्र सरकार कोई भेदभाव नहीं करती। अब कांग्रेस नेतृत्व यह तय करे कि बघेल झूठ बोल रहे हैं या सिंहदेव?

पत्रकार वार्ता के दौरान प्रदेश मीडिया सह प्रभारी अनुराग अग्रवाल, प्रदेश प्रवक्ता द्वय केदारनाथ गुप्ता व दीपक म्हस्के उपस्थित थे।

 

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