Media24Media.com: हाथी का हमला

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हाथी के हमले से ग्रामीण की मौत, 2 दिन के अंदर मौत की दूसरी घटना

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आबादी बढ़ने की वजह से भी जंगलों में अतिक्रमण बढ़ने लगे हैं। जंगल की पूरी संरचना प्रभावित हो रही है। जंगलों में बांस और फलदार वृक्ष भी कम हो रहे हैं। अपने निवास स्थान की कमी और पेट भरने के लिए हाथी इन्सानी बस्तियों का रुख कर रहे हैं। सिमटते जंगल से हाथी और मनुष्य के बीच द्वंद्व (Elephant attack in Chhattisgarh) की स्थिति बनी हुई है। हर दूसरे दिन गजराज के हमले से इंसानों की मौत की खबर सामने आते रहती है। 

ताजा मामला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का है, जहां हाथियों का उत्पात जारी है। हाथियों ने फिर एक ग्रामीण को कुचलकर मार डाला। दो दिन में ये दूसरी मौत है। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को अलर्ट किया है, जिनके मकान कच्चे बने हैं, उन्हें वन विभाग की टीम ने अपने वाहनों से दूसरी जगह शिफ्ट कराया है। बताया जा रहा है कि हाथियों के दल ने मध्य प्रदेश से जिले में प्रवेश किया है। जानकारी के मुताबिक मरवाही रेंज के कटारा गांव में तीन हाथियों के दल ने डेरा डाला हुआ है। 

गांव खाली कराने के लिए मुनादी

इसी बीच हाथियों ने स्थानीय ग्रामीण रामधुन गोंड (उम्र 45) को कुचल दिया, जिससे रामधुन की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन हाथियों को भगाने में नाकामयाब रही। इसके बाद गांव में मुनादी करा कर लोगों को अलर्ट कराया गया। साथ ही सभी को निकाल कर पक्के भवन में शिफ्ट किया गया है। कच्चे मकानों वाले ग्रामीणों को गांव खाली करने के लिए मुनादी कराई गई। 

MP के अनूपपुर से पहुंचा है दल

मरवाही रेंज में MP के अनूपपुर जिले से तीन हाथियों का दल अलग-अलग गांवों के पास डेरा डाले हुए हैं। बताया जा रहा है कि हाथी लौट गए थे, लेकिन दो दिन से फिर गांव में पहुंचे हुए हैं। एक दिन पहले भी हाथी ने मालाडांड़ गांव में दो लोगों को कुचल दिया था। इसमें एक की मौत हो गई थी, जबकि दूसरा घयल है। इसके बाद लोगों में वन को लेकर आक्रोश बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि न तो सुरक्षा के उपाय किए जा रहे हैं, न ही ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।

हाथी से सामना होने पर ढलान की ओर दौड़े

अगर हाथी से सामना हो जाए तो तुरंत उसके लिए रास्ता छोड़े, पहाड़ी स्थानों में सामना होने की स्तिथि मे पहाड़ी की ढलान की ओर दौड़े ऊपर की ओर नहीं क्योंकि हाथी ढलान में तेज गति से नहीं उतर सकता, लेकिन चढाई चढ़ने में वह दक्ष होता है, सीधे न दौड़ कर आड़े तिरछे दौड़े, कुछ दूर दौड़ने के बाद गमछा, पगड़ी, टोपी और अन्य कोई वस्त्र फेक दे, ताकि कुछ समय तक हाथी उसमें उलझा रह सके और आपको सुरक्षित स्थान पर जाने का समय मिल जाए।

हाथियों के हमले से व्यापारी समेत 2 लोगों मौत, गांव में दहशत का माहौल

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आबादी बढ़ने की वजह से भी जंगलों में अतिक्रमण बढ़ने लगे हैं। जंगल की पूरी संरचना प्रभावित हो रही है। जंगलों में बांस और फलदार वृक्ष भी कम हो रहे हैं। अपने निवास स्थान की कमी और पेट भरने के लिए हाथी इन्सानी बस्तियों का रुख कर रहे हैं। सिमटते जंगल से हाथी और मनुष्य के बीच द्वंद्व (Elephant attack in Chhattisgarh) की स्थिति बनी हुई है। हर दूसरे दिन गजराज के हमले से इंसानों की मौत की खबर सामने आते रहती है। 

ताजा मामला जशपुर जिले का है, जहां हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। साथ ही लीची बगान को तहस-नहर करने के साथ ही व्यापारी समेत 2 लोगों की जान ले ली। हाथी के हमले में मारा गया व्यापारी महकूल समाज का नेता था। बगान में सोते हुए हाथियों ने उस पर हमला कर दिया। इसके चलते उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं एक अन्य गांव में हाथी ने महिला को उठाकर पटक दिया। इससे उसकी मौत हो गई।  

एक महीने में तीसरी घटना

जानकारी के मुताबिक कुनकुरी से लगे कंडोरा गांव में दल से बिछड़ कर देर रात दो हाथी पहुंच गए। ग्रामीणों को पता चला तो एकत्र होकर उन्होंने हाथियों को खदेड़ना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि इस दौरान हाथी पास ही त्रिलोचन यादव (60) के लीची के बगान में घुस गए। त्रिलोचन बगान में ही सो रहा था। हाथियों ने उस पर हमला कर मार दिया। बताया जा रहा है कि वन परिक्षेत्र में एक माह में यह तीसरी घटना है।

ग्रामीणों को हाथियों से दूर रहने की सलाह

 नारायणपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत जाम चुवां के गीदा बहार में भी हाथियों ने 55 साल की एक महिला को कुचल दिया। महिला की पहचान सनीयारों बाई (55) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि तड़के वह निकली थी, तभी नर हाथी ने उस पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है इस क्षेत्र में कई दिनों से 40 से 50 हाथियों का झुंड मौजूद है। फिलहाल वन विभाग की टीम हाथियों पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं उन्होंने ग्रामीणों को हाथियों से दूर रहने की सलाह दी है।

हाथी से सामना होने पर ढलान की ओर दौड़े

अगर हाथी से सामना हो जाए तो तुरंत उसके लिए रास्ता छोड़े, पहाड़ी स्थानों में सामना होने की स्तिथि मे पहाड़ी की ढलान की ओर दौड़े ऊपर की ओर नहीं क्योंकि हाथी ढलान में तेज गति से नहीं उतर सकता, लेकिन चढाई चढ़ने में वह दक्ष होता है, सीधे न दौड़ कर आड़े तिरछे दौड़े, कुछ दूर दौड़ने के बाद गमछा, पगड़ी, टोपी और अन्य कोई वस्त्र फेक दे, ताकि कुछ समय तक हाथी उसमें उलझा रह सके और आपको सुरक्षित स्थान पर जाने का समय मिल जाए।

हाथियों के हमले से बाप-बेटी की मौत, पत्नी ने भागकर बचाई अपनी जान

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आबादी बढ़ने की वजह से भी जंगलों में अतिक्रमण बढ़ने लगे हैं। जंगल की पूरी संरचना प्रभावित हो रही है। जंगलों में बांस और फलदार वृक्ष भी कम हो रहे हैं। अपने निवास स्थान की कमी और पेट भरने के लिए हाथी इन्सानी बस्तियों का रुख कर रहे हैं। सिमटते जंगल से हाथी और मनुष्य के बीच द्वंद्व (Elephant attack in Chhattisgarh) की स्थिति बनी हुई है। हर दूसरे दिन गजराज के हमले से इंसानों की मौत की खबर सामने आते रहती है। 

ताजा मामला कोरिया जिले के बेलगांव गांव का है, जहां हाथियों ने बाप-बेटी पर हमला कर उनकी जान ले ली है। जबकि मरने वाले युवक की पत्नी ने किसी तरह से भागकर जान बचाई है। परिवार अपने मकान में सो रहा था। इसी दौरान हाथियों ने हमला कर दिया और जंगल की ओर भाग गए। इसके अलावा हाथियों ने घर को भी तोड़ दिया है। जानकारी के मुताबिक बेलगांव के रहने वाला गुलाब सिंह (उम्र 31) अपने 6 साल की बच्ची रूपा और पत्नी के साथ सो रहा था। 

अपने घर में सो रहे थे सभी लोग

बताया जा रहा है कि गुलाब ने कुछ दिन पहले ही गांव में ये कच्चा मकान बनाया था, जो पूरा बना भी नहीं था। इसी मकान में तीनों सो रहे थे। इसी दौरान हाथियों ने हमला कर दिया। वहीं वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी। बताया गया कि करीब 9 हाथी रात को गांव में पहुंचे थे। इसके बाद वह सीधे गुलाब सिंह के घर के पास पहुंच गए और हमला कर दिया। 

महिला ने भागकर बचाई जान

हमला के बाद मौके पर चीख पुकार मच गई। हल्ला सुनकर गुलाब की पत्नी की नींद खुली तो वह दौड़ते हुए वहां से निकली और जोर-जोर से चिल्लाने लगी, जिसके बाद आस-पास के लोग भी मौके पर पहुंच गए, लेकिन तब तक हाथियों ने दोनों को मार दिया था और जंगल की ओर चले गए। इसके पहले हाथियों ने आधा बना हुआ कच्चा मकान भी तोड़ दिया। घटना के बाद आस-पास के लोग काफी नाराज हो गए। 

ग्रामीणों को हाथियों से दूर रहने की सलाह

वहीं गुलाब की पत्नी जोर-जोर से रोने लगी। इधर, घटना की जानकारी वन विभाग को भी सुबह के वक्त दे दी गई थी। लेकिन टीम सुबह 9 बजे के आस-पास पहुंची। जिसके चलते परिजनों और ग्रामीणों ने नाराजगी जताई और शव को पीएम के लिए देने से इनकार दिया था। फिर वन विभाग की टीम ने काफी समझाया तब वह माने और मामला शांत हुआ है। बाद में दोनों शवों को पीएम के लिए भेजा गया था। फिलहाल वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों को हाथियों से दूर रहने की सलाह दी है।

हाथी से सामना होने पर ढलान की ओर दौड़े

अगर हाथी से सामना हो जाए तो तुरंत उसके लिए रास्ता छोड़े, पहाड़ी स्थानों में सामना होने की स्तिथि मे पहाड़ी की ढलान की ओर दौड़े ऊपर की ओर नहीं क्योंकि हाथी ढलान में तेज गति से नहीं उतर सकता, लेकिन चढाई चढ़ने में वह दक्ष होता है, सीधे न दौड़ कर आड़े तिरछे दौड़े, कुछ दूर दौड़ने के बाद गमछा, पगड़ी, टोपी और अन्य कोई वस्त्र फेक दे, ताकि कुछ समय तक हाथी उसमें उलझा रह सके और आपको सुरक्षित स्थान पर जाने का समय मिल जाए।

हाथी के हमले से जिले में 3 लोगों की मौत, हाथियों के उत्पात से ग्रामीणों में दहशत का माहौल

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आबादी बढ़ने की वजह से भी जंगलों में अतिक्रमण बढ़ने लगे हैं। जंगल की पूरी संरचना प्रभावित हो रही है। जंगलों में बांस और फलदार वृक्ष भी कम हो रहे हैं। अपने निवास स्थान की कमी और पेट भरने के लिए हाथी इन्सानी बस्तियों का रुख कर रहे हैं। सिमटते जंगल से हाथी और मनुष्य के बीच द्वंद्व (Elephant attack in Chhattisgarh) की स्थिति बनी हुई है। हर दूसरे दिन गजराज के हमले से इंसानों की मौत की खबर सामने आते रहती है। 

ताजा मामला धमतरी जिले का है, जहां हाथियों ने 22 साल की युवती समेत तीन लोगों की जान ले ली है। इसमें एक महिला भी शामिल है। हाथी ने उसे सूंड़ से उठाकर पटक दिया। इसके अलावा कई मकान भी तोड़ दिए हैं। लोग जान बचाकर वहां से भाग रहे हैं। हाथियों का यह दल ओडिशा के सिकाशेर से आया है। आसपास के 8 गांवों में अलर्ट जारी किया गया है। वहीं ग्रामीणों ने इस घटना के बाद वन विभाग को लेकर आक्रोश है।

लड़की पर किया हमला

जानकारी के मुताबिक बिरनासिल्ली में रामसिंह ने झोपड़ी बना रखी है। शनिवार देर रात करीब 12 बजे उसकी 22 साल की बेटी सुखबाई सोकर उठी और झोपड़ी से बाहर निकली। इसी दौरान वहां पहले से मौजूद हाथियों ने उस पर हमला कर दिया। इसमें युवती की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं हाथी ने झोपड़ी को भी तोड़ डाला। इसके बाद परिजन अन्य लोगों को लेकर किसी तरह जान बचाकर भागे।

बिना कपड़ों के मिला शव

हाथी के हमले में मारी गई 22 साल की युवती की मौत सवालों के घेरे में है। उसका नग्न शव बरामद हुआ है। आसपास कपड़े भी नहीं मिले हैं। ऐसे में घटना को लेकर संदेह है। आशंका है कि युवती के साथ कुछ गलत हुआ होगा। इसके बाद हाथी पहुंचे और हमला कर मार दिया। वहीं वन विभाग की टीम भी पहुंची। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

 महिला समेत 2 लोगों की ली जान

इससे पहले शनिवार को भी हाथियों ने महिलाओं समेत दो लोगों की जान ली थी। महिलाएं जंगल में लकड़ी लेने गईं थीं। तभी हाथियों ने महिलाओं को दौड़ा लिया। महिलाएं वहां से भागी। उनमें शामिल पाइकभाठा निवासी भूमिका उर्फ सत्तो मरकाम (36) गिर पड़ी, तभी हाथी ने उसे पकड़ लिया और सूंड़ से उठाकर पटक दिया। फिर पैर से कुचलकर मार डाला। ये खबर ग्रामीणों को हुई तो घटना स्थल से कुछ दूरी पर भीड़ एकत्रित हो गई।

निरीक्षण के दौरान मिला दूसरा शव

घटना की जानकारी उदंती-सीतानदी टाइगर के उप संचालक वरुण जैन, DFO मयंक पांडेय को हुई। वन विभाग के अफसर दलबल के साथ घटना स्थल पर करीब 3 बजे आए। उन्होंने महिला का शव देखा। इसके बाद आसपास निरीक्षण करने लगे। तभी वहां से करीब 200 मीटर दूर पांवद्वार डैम के पास एक और ग्रामीण का शव मिला। उसकी पहचान बुधलाल (45) नेताम के रूप में हुई। दोनों के शव ग्रामीणों ने कंधे पर लादकर बाहर निकाला।

हाथी की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत

ओडिशा के सिकाशेर से आया से 30 हाथियों का दल करीब 5 महीने से विचरण कर रहा है। 2 दिन पहले इस दल से 2 सदस्य एक हाथी व एक हथिनी अलग हो गए। यह दोनों ही सीतानदी रेंज, रिसगांव रेंज व अरसीकन्हार रेंज में घूम रहे है। फसल सहित कुछ घरों को भी तोड़ चुके हैं। 2 दिन पहले यह हथिनी सीतानदी-उदंती टाइगर रिजर्व के कक्ष क्रमांक 346 में थी। लगातार 24 से 36 घंटे एक ही जगह पर बैठे रहने से वन विभाग के अफसर निश्चित थे।  

8 गांव को अलर्ट जारी

अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिलेभर के 250 वनकर्मी 20 दिन से हड़ताल पर है। इनके हड़ताल से वन्य प्राणियों के साथ जंगल की सुरक्षा खतरे में है। हथिनी द्वारा 2 लोगों को कुचलने के बाद अफसर घटना स्थल से लगे आसपास के 8 गांव को सतर्क किया है। इनमें पांवद्वार, घठुला, रतावा, पोड़ागांव, बिरनासिल्ली, पदमपुर, पाइकभाठा, विश्रामपुर शामिल है।

परिजनों को 25-25 हजार दिए गए

उदंती-सीतानदी टाइगर के उप संचालक वरुण जैन ने बताया कि सिकाशेर दल के 30 हाथियों का झुंड 3 समूह में बट गया है। 48 घंटे पहले ही अलग हुए है। प्रारंभिक जांच में हथिनी ने 2 ग्रामीण को कुचलने की पुष्टि हुई है। मृतकों के परिजनों को 25-25 हजार रुपए सहयोग राशि दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई करेंगे। 6-6 लाख रुपए मुआवजा मिलता है।

जिले में 24 हाथियों का डेरा

हथिनी चंदा का दल शनिवार रात धमतरी रेंज के बॉर्डर नरहरपुर के पास पहुंच गया। मालवाड़ी में कई मकान तोड़ दिए। जिसके बाद ग्रामीणों को जान बचाकर भागना पड़ा। चंदा के साथ झुंड में 24 हाथी है। जिनमें 3 बच्चे भी शामिल है। इसलिए चंदा हथिनी का दल भी आक्रामक है।

ढलान की ओर दौड़े

अगर हाथी से सामना हो जाए तो तुरंत उसके लिए रास्ता छोड़े, पहाड़ी स्थानों में सामना होने की स्तिथि मे पहाड़ी की ढलान की ओर दौड़े ऊपर की ओर नहीं क्योंकि हाथी ढलान में तेज गति से नहीं उतर सकता, लेकिन चढाई चढ़ने में वह दक्ष होता है, सीधे न दौड़ कर आड़े तिरछे दौड़े, कुछ दूर दौड़ने के बाद गमछा, पगड़ी, टोपी और अन्य कोई वस्त्र फेक दे, ताकि कुछ समय तक हाथी उसमें उलझा रह सके और आपको सुरक्षित स्थान पर जाने का समय मिल जाए।

हाथी के हमले से जिले में गर्भवती समेत 2 महिलाओं की मौत, हाथियों के उत्पात से ग्रामीणों में दहशत का माहौल

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आबादी बढ़ने की वजह से भी जंगलों में अतिक्रमण बढ़ने लगे हैं। जंगल की पूरी संरचना प्रभावित हो रही है। जंगलों में बांस और फलदार वृक्ष भी कम हो रहे हैं। अपने निवास स्थान की कमी और पेट भरने के लिए हाथी इन्सानी बस्तियों का रुख कर रहे हैं। सिमटते जंगल से हाथी और मनुष्य के बीच द्वंद्व (Elephant attack in Chhattisgarh) की स्थिति बनी हुई है। हर दूसरे दिन गजराज के हमले से इंसानों की मौत की खबर सामने आते रहती है। 

ताजा मामला रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ का है, जहां के 2 अलग-अलग बस्तियों में घुसे हाथियों के दल ने एक गर्भवती समेत 2 महिलाओं पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। हाथियों ने गर्भवती महिला को पटककर मार डाला। वहीं दूसरी बस्ती में एक बुजुर्ग को कुचल दिया। इस दौरान हाथियों के डर से लोग घर छोड़कर भाग निकले। घटना कापू वनांचल के आदिवासी इलाके की है। जानकारी के मुताबिक हाथियों ने सरगुजा बॉर्डर से लगे इलाकों में कई दिनों से डेरा डाला हुआ है।

हाथियों ने महिला को कुचला

पुलिस के मुताबिक चिखलापानी की रहने वाली इंजोरी बाई (उम्र 70) रोज की तरह बुधवार रात करीब 10 बजे खाना खाने के बाद परिजनों के साथ सो रही थी। तभी 3 से 4 हाथी उनके घर में घुस आए और तोड़फोड़ शुरू कर दी। इस पर सुखीराम का परिवार जान बचाने के लिए घर में ही छिप गया, लेकिन हाथियों का रौद्र रूप देख सभी बाहर भागे। इसी बीच इंजोरी बाई सामने आ गई और हाथी ने उसे कुचल दिया। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। 

घटना के बाद से गांव में दहशत

ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों का दल सुबह करीब 9 बजे तक घटना स्थल के ही आसपास डेरा जमाए हुए था। इसके चलते वनकर्मी गांव के अंदर नहीं घुस सके। वहीं दूसरी घटना छत्तासरई की है, जहां की रहने वाली सबीना बाई (उम्र 36) गर्भवती थी। बताया जा रहा है कि रात करीब डेढ़ बजे हाथी ने छत्तासरई में भी हमला किया और सबीना बाई को पटक कर मार डाला। सूचना पर पुलिस भी पहुंच गई। वन विभाग की टीम ने दोनों शवों को पुलिस को सौंप दिया।

पुलिस ने परिजनों को सौंपा शव

वहीं पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के बाद दोनों के शव को परिजन को दे दिया दिया है। घटना से गांव में दहशत का माहौल है। बताया जा रहा है कि अभी हाथियों का दल  सरगुजा वन मंडल में उत्पात मचा रहा है। हाथियों ने कई दिनों से डेरा जमाया हुआ था। फिलहाल वन विभाग के कर्मचारी निगरानी बनाए हुए हैं। साथ ही लोगों को जंगल की ओर नहीं जाने का अलर्ट जारी किया है। बता दें कि छत्तीसगढ़ में हाथी की हमले की घटनाएं बढ़ती ही जा रही है। हाथी लगातार इंसानी बस्तियों की ओर रूख कर रहे हैं।

ढलान की ओर दौड़े

अगर हाथी से सामना हो जाए तो तुरंत उसके लिए रास्ता छोड़े, पहाड़ी स्थानों में सामना होने की स्तिथि मे पहाड़ी की ढलान की ओर दौड़े ऊपर की ओर नहीं क्योंकि हाथी ढलान में तेज गति से नहीं उतर सकता, लेकिन चढाई चढ़ने में वह दक्ष होता है, सीधे न दौड़ कर आड़े तिरछे दौड़े, कुछ दूर दौड़ने के बाद गमछा, पगड़ी, टोपी और अन्य कोई वस्त्र फेक दे, ताकि कुछ समय तक हाथी उसमें उलझा रह सके और आपको सुरक्षित स्थान पर जाने का समय मिल जाए।

हाथी के हमले से भाजपा नेता के दादा की मौत, नगर में घुसकर ली दंतैल ने जान

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महासमुंद। नगर पंचायत तुमगांव के उपाध्यक्ष भाजपा नेता पप्पू पटेल के दादा पर हाथी ने हमला कर दिया। इससे घटना स्थल पर ही उनकी मौत हो गई।  तुमगांव बस्ती के भीतर गौरा चौरा के पास आज सुबह 5.45 बजे यह दर्दनाक हादसा हुआ। एक दंतैल ने 68 वर्षीय रहिपाल पटेल को देखते ही देखते मौत के घाट उतार दिया। 

फाइल फोटो

घटना की जानकारी मिलते ही वन और पुलिस विभाग का अमला पहुंचा।  मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। और परिजनों को तात्कालिक अनुग्रह राशि 25 हजार रुपए दिया गया है। इस घटना के बाद नगर में शोक और दहशत का माहौल है।

हाथी ने सूंड से उठाकर पटका

प्रत्यक्ष दर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार नगर पंचायत तुमगांव में बस्ती के अन्दर गौरा चौरा के पास मृतक सहित केशव पटेल, गोकुल पटेल,खुबीराम पटेल घर के पास बने चबूतरा में हर रोज की तरह सुबह के समय बैठे हुए थे। इसी समय एक दंतैल घर के पीछे गली से आ गया। जिसे देखकर अन्य लोग अपनी जान बचाकर भाग गए। वहीं मृतक भाग नही पाया और दंतैल ने उसे सूंड से उठाकर पटक दिया। 

हाथियों ने 29 लोगों को उतारा मौत के घाट

हाथी भगाओ-फसल बचाओ समिति के संयोजक राधे लाल सिन्हा का कहना है कि सिरपुर हाथी प्रभावित क्षेत्र में वर्ष 2016 से अबतक दंतैलो के द्वारा जिला में 29 लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। वही प्रदेश के वन मंत्री के द्वारा कहा गया है कि हाथियों के नजदीक जाने,छेड़ने,फोटो खीचने आदि पर लोगों पर वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत कार्यवाही की जाएगी। अब हाथी गाँव के गली में घुसकर लोगों  को मार रहे हैं।  इसके लिए वन मंत्री जिम्मेदारी तय करें। और जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

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