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अवैध सागौन चिरान जब्ती, 5 लाख रुपये मूल्य की सागौन लकड़ी बरामद

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रायपुर। वन विभाग की उड़नदस्ता दल और विशेष टीम ने सोमवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कोंडागांव शहर के डीएनके कॉलोनी स्थित प्रेमनगर क्षेत्र में अवैध रूप से संग्रहित सागौन चिरान जब्त की है। यह कार्रवाई वनमंडलाधिकारी कोंडागांव के निर्देश पर, संयुक्त वनमंडलाधिकारी पश्चिम कोंडागांव उपवनमंडल के मार्गदर्शन और परिक्षेत्र अधिकारी, कोंडागांव के नेतृत्व में की गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कृष्णपद विश्वास पिता स्व. सुधीर विश्वास के घर पर छापेमारी के दौरान कुल 17 नग सागौन चिरान एवं एक नग सागौन लट्ठा बरामद किया गया। जब्त की गई सागौन लकड़ी का बाजार मूल्य लगभग 5 लाख रुपये है। कार्यवाही के दौरान आरोपी मौके से फरार हो गया, लेकिन प्रारंभिक अपराध विवरण (पीओआर) क्रमांक 18487/21 दिनांक 23 जून 2025 को पंजीबद्ध कर, उसके विरुद्ध न्यायालयीन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ में लगाए जाएंगे 2.75 करोड़ पौधे

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रायपुर। एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के तहत प्रदेश में करीब दो करोड़ 75 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया जाएगा। पौधों की उपलब्धता वन विभाग के नर्सरियों और विभागीय स्त्रोतों से सुनिश्चित की जाएगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने आज मंत्रालय में आयोजित बैठक में एक पेड़ मां के नामअभियान की गहन समीक्षा की। बैठक में अभियान के तहत शासकीय विभागों द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप वृक्षारोपण के निर्देश दिए गए।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बैठक में अधिकारियों से एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के तहत जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पौधरोपण करने वालों को उस पौधे के ग्रोथ की निगरानी से जोड़ें, जिससे वृक्षारोपण के वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश के विभिन्न इंजीनियरिंग महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और अन्य महाविद्यालयों से अनेक लोग निकलकर आज कामयाबी के शिखर पर हैं। इन सभी संस्थाओं को ऐसे लोगों को संस्था में वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान अवश्य आमंत्रित करना चाहिए। नगरीय निकायों में शहरों के बड़े व्यवसाईयों, उद्योगपतियों और अन्य गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में वृक्षारोपण कराया जाना चाहिए। उप मुख्यमंत्री साव ने स्कूलों में वृक्षारोपण कार्यक्रम में सहयोग प्रदान करने वालों की भागीदारी सुनिश्चित करने और सभी को वृक्षारोपण के दौरान रोपे गए पौधों के ग्रोथ की भी जानकारी देना सुनिश्चित करने को कहा।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने वृक्षारोपण में महत्वपूर्ण सहयोग देने वाले लोगों को 15 अगस्त और वानिकी दिवस पर सम्मानित किए जाने की बात कही। उन्होंने आगामी पर्यावरण दिवस 5 जून को होने वाले वृक्षारोपण कार्यक्रमों में व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने वृक्षारोपण अभियान के दौरान कलेक्ट्रेट परिसरों, राष्ट्रीय राजमार्गों, पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों, माइनिंग परिसरों, जल स्त्रोतों के आसपास, स्कूल परिसरों तथा अन्य संस्थाओं एवं स्थानों को चिन्हित कर व्यापक कार्ययोजना के तहत कार्य करने को कहा।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने वृक्षारोपण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए सभी विभागों के अधिकारियों को समन्वय एवं सहयोग से कार्य करने को कहा। उन्होंने  अधिकारियों को एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, लोक निर्माण, आवास एवं पर्यावरण, नगरीय प्रशासन एवं विकास, खनिज, पर्यटन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन एवं जलवायु परिवर्तन और जल संसाधन विभाग द्वारा एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के क्रियान्वयन के संबंध में प्रस्तुतिकरण दिया गया। पीसीसीएफ अरूण पाण्डेय ने वृक्षारोपण अभियान में किए जाने वाले कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।

लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी.दयानंद और उच्च शिक्षा विभाग के सचिव एस. भारतीदासन सहित वन विभाग, वन विकास निगम, आवास एवं पर्यावरण, पर्यटन, वाणिज्य एवं उद्योग, संस्कृति, स्कूल शिक्षा, कृषि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

दुर्ग-विशाखापटनम लिंक एक्सप्रेस ट्रेन में तोता तस्करी करते आरोपी गिरफ्तार

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रायपुर। दुर्ग-विशाखापटनम लिंक एक्सप्रेस ट्रेन में 19 दिसंबर की रात को छत्तीसगढ़ वन विभाग के राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल ने सूचना के आधार पर एक व्यक्ति को बड़ी संख्या में वन्यजीव तोते की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया।

सूचना के आधार पर राज्य स्तरीय उड़नदस्ता, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, छत्तीसगढ़ रेलवे पुलिस बल और रायपुर वन परिक्षेत्र अधिकारियों की संयुक्त टीम ने दुर्ग-विशाखापटनम लिंक एक्सप्रेस ट्रेन के सभी बोगियों की जांच की। इस दौरान शमसुद्दीन अली, निवासी मुर्रा भट्ठी, गुढ़ियारी रायपुर के पास पिंजरों और केरेट में 105 नग हिरामन तोते पाए गए। 

टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। आरोपी को वन्यप्राणी अपराध में शामिल होने के कारण वन परिक्षेत्र अधिकारी रायपुर द्वारा अपराध दर्ज किया गया। आरोपी को हिरासत में लेकर जब्तीनामे की कार्रवाई की गई। उल्लेखनीय है कि वन मंत्री केदार कश्यप ने वन्यजीव अपराध में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों पर सख्त कार्यवाही करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख व्ही. श्रीनिवास राव के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई की गई। तोता तस्करी के मामले में यह कार्रवाई वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत की गई है। गौरतलब है कि तोता प्रजाति को वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची में शामिल किया गया है, जिसके कारण अब तोता पालना और उसकी खरीदी-बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित है।

छत्तीसगढ़ में ई-ऑक्शन से लकड़ियों की नीलामी शुरू

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप छत्तीसगढ़ राज्य में वन विभाग द्वारा ई-ऑक्शन के माध्यम से लकड़ियों की नीलामी की सफल शुरूआत धमतरी वन मंडल से हुई है। यहां ई-ऑक्शन के माध्यम से 254 लॉट लकड़ियों की नीलामी में से 210 लॉट की बिक्री से वन विभाग को 39 लाख 54 हजार 310 रूपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। नीलाम लॉट में इमारती लकड़ी, बांस, जलाऊ लकड़ी और अन्य लकड़ियां शामिल थी। ई-ऑक्शन में 134 बोलीदारों ने भाग लिया।

यहां यह उल्लेखनीय है कि बीते दिनों वन मंत्री केदार कश्यप की अध्यक्षता में महानदी मंत्रालय भवन में आयोजित वनोपज राजकीय व्यापार अंतर्विभागीय समिति (आईडीसी) की 301वीं बैठक में वन विभाग की लकड़ियों की नीलामी ई-ऑक्शन के माध्यम से किए जाने का निर्णय लिया गया था। इसका उद्देश्य वन विभाग के काम-काज में पारदर्शिता, दक्षता और वनोपज के उचित मूल्य का निर्धारण सुनिश्चित करना है। ई-ऑक्शन की प्रक्रिया में कोई भी बोलीदार कहीं से भी शामिल हो सकता है। बोलीदारों को मौके पर उपस्थित होना जरूरी नहीं होता है। ई-ऑक्शन के माध्यम से नीलामी का उद्देश्य क्रेताओं को सुविधा, नीलामी में पारदर्शिता एवं राजस्व में वृद्धि है। वन मंत्री केदार कश्यप ने धमतरी वन मंडल में ई-ऑक्शन के माध्यम से लकड़ियों की सफल नीलामी की शुरूआत होने पर प्रसन्नता जताई है और ई-ऑक्शन की प्रक्रिया तत्परता से राज्य में शुरू करने के लिए अधिकारियों को बधाई दी है। वन मंत्री ने उम्मीद जताई है कि इससे राजस्व में वृद्धि होगी।  

कसडोल शहर के एक किमी के दायरे में आ गया था बाघ, वन विभाग ने ट्रैक्यूलाइज कर किया गया काबू

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 रायपुर :  कसडोल शहर के बिल्कुल एक किमी के दायरे में पहुंच गये बाघ को वन विभाग ने सफलतापूर्वक काबू पा लिया। यह वाकया कसडोल शहर से लगे ग्राम कोट का है। बाघ एक पैरे के ढेर में छिप गया था। वन विभाग की टीम पहुंची और बेहद कुशलता से बाघ को ट्रैक्यूलाइज किया। टैक्यूलाइज करने के बाद बाघ कुछ देर तक होश में रहा और पास ही के पेट्रोल पंप के पीछे की तरफ आ गया लेकिन उसे तेजी से बेहोशी आई और फिर उसे नियंत्रित कर लिया गया।


 
बाघ के बिल्कुल शहर के पास आने से लोगों के लिए कौतूहल का विषय था कि इसे कैसे नियंत्रित किया जाएगा। वन विभाग के अमले ने इसकी योजना बनाई और बेहद सफलतापूर्वक यह कार्य संपन्न किया गया। बताया जाता है कि यह बाघ ओडिशा के रास्ते से बारनवापारा पहुंचा होगा। आठ महीने से यह बारनवापारा में सक्रिय था। बाघ की सक्रियता केवल कोर एरिया में रहे इसके लिए वन विभाग ने पर्याप्त प्रयास किये थे। जब बाघ का मूवमेंट कोर एरिया से बाहर होने की खबर मिली तो अमले ने सतर्कता से अपनी कार्रवाई की। अधिकारियों ने बताया कि अब बाघ को किसी टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा ताकि इसे और भी सुरक्षित परिवेश मिले।
 
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बाघ को रेडियो कालर लगा दिया गया है। इससे बाघ के मूवमेंट पर नजर रखने में आसानी होगी। इसके रक्त का नमूना भी लिया गया है। बाघ पूरी तरह स्वस्थ है। उल्लेखनीय है कि बाघ के शहर के पास होने की सूचना प्राप्त होते ही वन विभाग एवं वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी कानन पेण्डारी चिड़ियाघर बिलासपुर डॉ. पी.के. चंदन वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी नंदन वन जू एवं जंगल सफारी नवा रायपुर डॉ. राकेश वर्मा तथा डॉ. रश्मिलता राकेश पशु चिकित्सा अधिकारी कसडोल के टीम ने तत्काल ग्राम कोट पहुंच कर ग्रामीण  धीराजी के बाड़ी में रखे पैरा के ढेर में छुपे बाघ को ट्रैक्यूलाईज करने की प्रयास किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख रायपुर  व्ही. श्रीनिवास राव प्रधान, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (व.प्रा.) श्री प्रेम कुमार, मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत्त रायपुर  राजु अगसिमनी, मुख्य वन संरक्षक (व.प्रा.) एवं क्षेत्र संचालक उदन्ती सीतानदी टायगर रिजर्व रायपुर श्रीमति सतोविशा समाजदार, वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार मयंक अग्रवाल,  आनंद कुदरया अधीक्षक बारनवापारा भी मौजूद थे।
 

टाइगर रिजर्व बनने से बाघों को नैचुरल हैबिटेट में मिलेगा बेहतर परिवेश

 
  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने वन विभाग के अधिकारियों को बाघ के सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए ‘गुरू घासीदास-तमोर पिंगला टायगर रिजर्व‘ के रूप में एक नया टायगर रिजर्व मिल गया है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व और असम के मानस टाइगर रिजर्व के बाद यह देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है।
इस टाइगर रिजर्व के बनने से बाघों को नैचुरल हैबिटेट में बेहतर परिवेश मिल पाएगा और इनके बेहतर संवर्धन के अवसर मिलेंगे। छत्तीसगढ़ में अब 4 बाघ रिजर्व हो गए हैं, जिससे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से मिल रही तकनीकी और वित्तीय सहायता से इस प्रजाति के संरक्षण को मजबूती मिलेगी। उल्लेखनीय है कि एक हफ्ते पहले ही टूरिस्टों ने अचानकमार में टाइगर साइट किया था। टाइगर रिजर्व बनने से एक बार छत्तीसगढ़ पुनः बाघों से गुलजार हो जाएगा।

कसडोल शहर के एक किमी के दायरे में आ गया था बाघ, वन विभाग का अमला था सतर्क, ट्रैक्यूलाइज कर किया गया काबू

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रायपुर। कसडोल शहर के बिल्कुल एक किमी के दायरे में पहुंच गये बाघ को वन विभाग ने सफलतापूर्वक काबू पा लिया। यह वाकया कसडोल शहर से लगे ग्राम कोट का है। बाघ एक पैरे के ढेर में छिप गया था। वन विभाग की टीम पहुंची और बेहद कुशलता से बाघ को ट्रैक्यूलाइज किया। टैक्यूलाइज करने के बाद बाघ कुछ देर तक होश में रहा और पास ही के पेट्रोल पंप के पीछे की तरफ आ गया लेकिन उसे तेजी से बेहोशी आई और फिर उसे नियंत्रित कर लिया गया। बाघ के बिल्कुल शहर के पास आने से लोगों के लिए कौतूहल का विषय था कि इसे कैसे नियंत्रित किया जाएगा।

वन विभाग के अमले ने इसकी योजना बनाई और बेहद सफलतापूर्वक यह कार्य संपन्न किया गया। बताया जाता है कि यह बाघ ओडिशा के रास्ते से बारनवापारा पहुंचा होगा। आठ महीने से यह बारनवापारा में सक्रिय था। बाघ की सक्रियता केवल कोर एरिया में रहे इसके लिए वन विभाग ने पर्याप्त प्रयास किये थे। जब बाघ का मूवमेंट कोर एरिया से बाहर होने की खबर मिली तो अमले ने सतर्कता से अपनी कार्रवाई की। अधिकारियों ने बताया कि अब बाघ को किसी टाइगर रिजर्व में छोड़ा जाएगा ताकि इसे और भी सुरक्षित परिवेश मिले।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बाघ को रेडियो कालर लगा दिया गया है। इससे बाघ के मूवमेंट पर नजर रखने में आसानी होगी। इसके रक्त का नमूना भी लिया गया है। बाघ पूरी तरह स्वस्थ है। उल्लेखनीय है कि बाघ के शहर के पास होने की सूचना प्राप्त होते ही वन विभाग एवं वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी कानन पेण्डारी चिड़ियाघर बिलासपुर डॉ. पी.के. चंदन वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी नंदन वन जू एवं जंगल सफारी नवा रायपुर डॉ. राकेश वर्मा तथा डॉ. रश्मिलता राकेश पशु चिकित्सा अधिकारी कसडोल के टीम ने तत्काल ग्राम कोट पहुंच कर ग्रामीण धीराजी के बाड़ी में रखे पैरा के ढेर में छुपे बाघ को ट्रैक्यूलाईज करने की प्रयास किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख रायपुर व्ही. श्रीनिवास राव प्रधान, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (व.प्रा.) प्रेम कुमार, मुख्य वन संरक्षक रायपुर वृत्त रायपुर राजु अगसिमनी, मुख्य वन संरक्षक (व.प्रा.) एवं क्षेत्र संचालक उदन्ती सीतानदी टायगर रिजर्व रायपुर श्रीमति सतोविशा समाजदार, वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार मयंक अग्रवाल, श्री आनंद कुदरया अधीक्षक बारनवापारा भी मौजूद थे।

टाइगर रिजर्व बनने से बाघों को नैचुरल हैबिटेट में मिलेगा बेहतर परिवेश

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वन विभाग के अधिकारियों को बाघ के सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बधाई दी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को बाघों के संरक्षण और संवर्धन के लिए गुरू घासीदास-तमोर पिंगला टायगर रिजर्वके रूप में एक नया टायगर रिजर्व मिल गया है। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व और असम के मानस टाइगर रिजर्व के बाद यह देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। इस टाइगर रिजर्व के बनने से बाघों को नैचुरल हैबिटेट में बेहतर परिवेश मिल पाएगा और इनके बेहतर संवर्धन के अवसर मिलेंगे। छत्तीसगढ़ में अब 4 बाघ रिजर्व हो गए हैं, जिससे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से मिल रही तकनीकी और वित्तीय सहायता से इस प्रजाति के संरक्षण को मजबूती मिलेगी। उल्लेखनीय है कि एक हफ्ते पहले ही टूरिस्टों ने अचानकमार में टाइगर साइट किया था। टाइगर रिजर्व बनने से एक बार छत्तीसगढ़ पुनः बाघों से गुलजार हो जाएगा।


गिद्ध संरक्षण पर रायपुर में कार्यशाला का होगा आयोजन, बाम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और बर्ड काउंट इंडिया के प्रतिनिधि भी होंगे शामिल

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर छत्तीसगढ़ में विलुप्त होने के कगार पर पहुंचे वन्य जीव प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में वन विभाग द्वारा कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में वन विभाग द्वारा 15 नवम्बर 2024 को नवा रायपुर स्थित अरण्य भवन में गिद्ध संरक्षण पर कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है जिसमें विभिन्न राज्यों में गिद्ध संरक्षण हेतु कार्य कर रहे विशेषज्ञ राजधानी रायपुर में गिद्धों के संरक्षण पर चर्चा करने के लिए एकत्रित होंगे।

15 नवंबर को आयोजित कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के गिद्ध विशेषज्ञ होंगे शामिल

इस कार्यशाला में विशेषज्ञ और शोधार्थी अपने अनुभव साझा करेंगे और मध्य भारत में विशेषकर छत्तीसगढ़ में गिद्ध संरक्षण के क्षेत्र में अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत करेंगे। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस), बर्ड काउंट इंडिया और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ जैसी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी इस कार्यशाला में शामिल होंगे। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व, अचानकमार टाइगर रिजर्व, बस्तर और गुरु घासीदास टाइगर रिज़र्व और अन्य वन्यजीव अभ्यारण्यों में गिद्धों की छह प्रजातियाँ पाई जाती हैं जिसमे लॉन्ग बिल्ड वल्चर, व्हाइट रम्प्ड वल्चर, इजिप्शियन वल्चर, हिमालयन वल्चर, यूरेशियन वल्चर, और सिनेरियस वल्चर शामिल हैं।

जंगल सफारी के संचालक धम्म्शील गणवीर ने बताया कि गिद्ध जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, वे पर्यावरण में प्राकृतिक सफाईकर्मी के रूप में कार्य करते हैं और संक्रमण फैलने से रोकने में सहायक होते हैं। गिद्धों की संख्या में कमी के कारण पर्यावरण में जैविक असंतुलन उत्पन्न हो सकता है। इस कार्यशाला का उद्देश्य न केवल छत्तीसगढ़ में बल्कि संपूर्ण देश में गिद्ध संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना और गिद्ध संरक्षण में सामूहिक सहभागिता को बढ़ावा देना है।

 

कोरिया जिले में बाघ के मृत होने की सूचना पर वन विभाग सतर्क

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रायपुर। कोरिया जिले में एक बाघ की मौत की खबर ने वन विभाग को सतर्क कर दिया है। आज गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के संचालक एवं वनमण्डलाधिकारी बैकुंठपुर ने इस सम्बंध में जानकारी दी है कि 8 नवम्बर 2024 को दोपहर एक बजे ग्रामीणों से परिसर रक्षक गरनई को सूचना प्राप्त हुई कि ग्राम कटवार के पास खनखोपड़ नाला के किनारे एक बाघ की मृत्यु हुई है।

घटना स्थल बीट गरनई, सर्किल रामगढ़, परिक्षेत्र सोनहत, कोरिया वनमण्डल के असीमांकित वनक्षेत्र के समीप है। संबंधित वनरक्षक के द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया गया। तत्काल वन मण्डलाधिकारी कोरिया, संचालक गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान बैकुन्ठपुर, उप वनमण्डलाधिकारी उत्तर बैकुन्ठपुर, मुख्य वन संरक्षक सरगुजा वन वृत्त अम्बिकापुर, वन संरक्षक (वन्यप्राणी) सरगुजा मौके पर पहुंचे। वन विभाग के कर्मचारियों की टीम के द्वारा घटना स्थल के आसपास डेढ़ से दो किलोमीटर परिधि में तलाशी की गई।

प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि बाघ का शव दो-तीन दिन पुराना था। 9 नवम्बर को वन विभाग, पुलिस, एनटीसीए प्रतिनिधि और ग्रामीणों की उपस्थिति में चार सदस्यीय पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा बाघ का पोस्टमार्टम किया गया। जांच में यह भी पाया गया कि बाघ के स्किन, नाखून, दाँत और अन्य सभी अंग सुरक्षित थे, किसी भी प्रकार का अंग-भंग नहीं हुआ था। पोस्टमार्टम के बाद बाघ का दाह संस्कार कर दिया गया और उसके महत्वपूर्ण अंगों को प्रयोगशाला परीक्षण के लिए संरक्षित किया गया। इस मामले में गोमर्दा अभ्यारण्य के डॉग स्क्वायड और वन विभाग की संयुक्त टीम द्वारा आसपास के क्षेत्रों में सघन जांच की गई। सम्पूर्ण कार्यवाही के दौरान अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) रायपुर उपस्थित रहे एवं समस्त वन अधिकारियों/कर्मचारियों को अपराधियों की पतासाजी करने एवं वाइल्ड लाइफ क्राइम की रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

27वीं अखिल भारतीय वन खेलकूद के महाकुंभ : छत्तीसगढ़ राज्य 108 पदक जीत कर पहले स्थान पर

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में चल रहे 27वीं अखिल भारतीय वन खेलकूद प्रतियोगिता का समापन समारोह 20 अक्टूबर को स्वामी विवेकानंद स्टेडियम, कोटा, रायपुर में किया जा रहा है। इस वन खेलकूद प्रतियोगिता में विगत वर्ष की तरह इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ राज्य वन विभाग ने सबसे अधिक पदक प्राप्त कर अपना प्रथम स्थान पर बने रहे। रिपोर्ट लिखे जाने तक छत्तीसगढ़ 57 गोल्ड, 28 सिल्वर, 23 कांस्य पदक लेकर कुल 108 पदक और 435 पॉइंट के साथ शीर्ष पर बना हुआ है। वहीं पदक तालिका में दूसरे और तीसरे स्थान पर क्रमशः केरल और मध्यप्रदेश की टीम ने अपना स्थान बनाया हुआ है।

गौरतलब है कि इस प्रतियोगिता में 29 राज्य, 08 केन्द्र शासित प्रदेश, 06 वानिकी संस्थानों एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधिकारी-कर्मचारियों के लगभग 3000 खिलाड़ियों जिसमें लगभग 584 महिला एवं 2320 पुरूष खिलाड़ी भाग लिया था। प्रतिभागियों के बीच 23 खेलों की 300 विधाओं जैसे एथलेटिक्स, बैडमिंटन, लॉन टेनिस, वेटलिफटिंग, कैरम, स्वीमिंग, तीरंदाजी, कबड्डी, क्रिकेट, फुटबॉल, बॉलीबाल जैसे खेलों के व्यक्तिगत एवं समूह खेलों का आयोजन किया गया। देशभर से आए वन विभाग के प्रतिभागियों के बीच प्रतिस्पर्धा हुआ। प्रतिस्पर्धा प्रत्येक प्रतिभागी द्वारा अपने प्रतिद्वंदी को कड़ी चुनौती दी गई। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को क्रमशः स्वर्ण, रजत एवं कांस्य के कुल 1200 पदक प्रदाय किए जाएंगे।

27वीं अखिल भारतीय वन खेलकूद प्रतियोगिता खिलाड़ियों द्वारा अपने खेल कौशल को निखारे तथा विभिन्न संस्कृतियों, विचारों और भावनाओं के प्रति भी एक-दूसरे का सम्मान किये। यह आयोजन न केवल प्रतिस्पर्धा का पर्व रहा, बल्कि भाईचारे, मेहनत और सामूहिक एकता का उत्सव भी दिखा। इस समापन समारोह में खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन तथा खेल के प्रति जागरूकता लाने के लिए ऑलंपिक पदक विजेता सुश्री मनु भाकर, निशानेबाज विशेष रूप से उपस्थित रहेंगी।

खेल महाकुंभ के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, कार्यक्रम की अध्यक्षता वनमंत्री केदार कश्यप एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में असम राज्य के वन मंत्री चंद्र मोहन पटवारी, उत्तराखंड राज्य के वन मंत्री सुबोध उनियाल, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर पश्चिम के विधायक राजेश मूणत, रायपुर उत्तर के विधायक पुरन्दर मिश्रा, रायपुर ग्रामीण के विधायक मोती लाल साहू के साथ ही वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारीगण इस समापन समारोह में उपस्थित रहेंगे।

बारनवापारा अभ्यारण्य में 21 से 23 अक्टूबर को बटरफ्लाई मीट का होगा आयोजन

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रायपुर। वन विभाग एवं बारनवापारा अभ्यारण्य के संयुक्त तत्वाधान में 21 से 23 अक्टूबर 2024 को अभ्यारण्य में बटरफ्लाई मीट का आयोजन किया जाएगा। जिसके माध्यम को प्रकृति प्रेमियों को तितलियों को करीब से जानने और पहचानने का मौका मिलेगा। साथ ही विषय विशेषज्ञों द्वारा तितलियों के पर्यावास एवं उनके महत्त्व के संबध में महत्वपूर्ण जानकारियां प्रतिभागियों के साथ साझा की जाएंगी। उक्त आयोजन की तीसरी कड़ी है। इसके पूर्व 2022 एवं 2023 में यह आयोजन किया गया था। विभाग द्वारा बटरफ्लाई मीट की तैयारी पूरी कर ली गई है।

आयोजन में भाग लेने एवं जानकारी प्राप्त करने के लिए क्यू आर कोड भी जनरेट किया गया है जिसके माध्यम से आसानी से पंजीयन कराया जा सकता है। मीट में प्रतिभागी स्टूडेंट के 15 सौ रूपये एवं अन्य व्यक्तियों के लिए 2 हजार रूपये पंजीयन शुल्क रखा गया है। इसके साथ ही भाग लेने के लिए 18 वर्ष से 60 वर्ष की आयु निर्धारित की गई है।

गौरतलब है कि बारनवापारा अभ्यारण्य में 150 प्रजाति के तितली एवं मोथ पायी जाती हैं। जिसमे से वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की शेड्यूल वन की क्रिमसन रोज (पैचीलौप्टा हेक्टर) डनाइड इगली (हाइपो सिलिमस मिसीपस) शेड्यूल दो की सिपोरा निरिसा,होगारा एनेक्स, यूक्रीशॉप्स सीनेजस, जेनेलिया लेपीडिया रपेला वरुणा,लैंपिडर्स  बोइहन, तजुना शिप्स आदि  पाई जाती है। शेड्यूल छह के भी बहुत से प्रजातियां पाई जाती हैं। विगत तीन वर्षों से बारनवापारा अभ्यारण्य में 14-16 हाथियों का दल निवास कर रहा है। साथ ही साथ विगत 8 माह से एक बाघ लगातार अभ्यारण्य में विचरण कर रहा है। बारनवापारा नाम बार और नवापारा गाँव से मिलकर बना है। बारनवापारा अभ्यारण्य अपनी स्थापना के बाद से ही देश के हर हिस्से से पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार भाटापारा जिले में स्थित है। अभ्यारण्य का कुल क्षेत्रफल 244.66 वर्ग किमी है। अभ्यारण्य की स्थलाकृति समतल और लहरदार इलाका है।

ऊँचाई 640 मीटर समुद्र तल तक है। बालमदेही,जोंक और महानदी नदियाँ अभयारण्य की जीवन रेखा हैं जो अभयारण्य की जल कमी को पूरा करने के लिए अभयारण्य के साथ बहती हैं। वार्षिक वर्षा 1200 मिमी है इस अभ्यारण्य में सागौन, साल और मिश्रित वन की मुख्य वनस्पति है। पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने के लिए इसमें शिकार और शिकारियों का अच्छा घनत्व है। अभ्यारण्य के अंदर स्थित बलार जलाशय में कई आर्द्रभूमि पक्षी और मछलियाँ पाई जाती हैं। यह अभ्यारण्य लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए इकोटूरिज्म को बढ़ावा देता है।

बारनवापारा तक पहुँचने के लिए रायपुर से सड़क मार्ग से दो घंटे का सफर करना पड़ता है। यह रायपुर से NH53 पर 78वें किलोमीटर पर 106 किलोमीटर दूर है। पटेवा एक छोटा शहर है जहाँ बारनवापारा से 28 किलोमीटर की दूरी पर मौसम अनुकूल सड़क पर गाड़ी चलाकर पहुँचा जा सकता है।

’बारनवापारा बटरफ्लाई मीट’ 21 से 23 अक्टूबर तक

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के वन विभाग द्वारा बारनवापारा अभ्यारण्य में तीसरा बारनवापारा बटरफ्लाई मीटका आयोजन 21 से 23 अक्टूबर तक किया जाएगा। इसका उद्देश्य बारनवापारा अभ्यारण्य के विभिन्न आवासों में तितलियों की विविधता का पता लगाना है। इससे वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे के अध्ययनों के लिए प्रमुख हॉट स्पॉट स्थापित करने में मदद मिलेगी।

बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में स्थित है। यह 244.66 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला राज्य के मनमोहक वन्यजीव अभ्यारण्यों में से एक है। बारनवापारा का अपने बड़े आकार के कारण महत्वपूर्ण पारिस्थितिक महत्व है। बटरफ्लाई मीट के लिए 18 अक्टूबर 2024 तक आवेदन करना होगा। बारनवापारा बटरफ्लाई मीट में सम्मिलित होने के लिए प्रतिभागियों को वन विभाग द्वारा जारी क्यूआर कोड को स्कैन कर मीट की सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

प्रतिभागियों के लिए आयु सीमा 18 से 60 वर्ष निर्धारित की गई है। सभी प्रतिभागियों को प्रतिदिन 10 से 15 किलोमीटर चलने में सक्षम होना अनिवार्य है और प्रतिभागियों को तितली प्रजाति का बुनियादी ज्ञान होना वांछनीय है। प्रतिभागियों का चयन बारनवापारा अभ्यारण्य बटरफ्लाई मीट-2024’ टीम द्वारा किया जाएगा, जिनका निर्णय अंतिम एवं मान्य होगा। सभी प्रतिभागियों को वन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देश का पालन करना आवश्यक है।

 

वन विभाग की बडी कार्यवाही; संरक्षित वन्य प्राणी पेंगोलिन की तस्करी करते पकड़े गये चार अन्तर्राज्यीय तस्कर

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रायपुर। प्रदेश में वन्य जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विशेष पहल की जा रही है। वनमंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बाल प्रमुख श्रीनिवास राव द्वारा वन अधिकारियों को आदेशित किया गया है कि संरक्षित वन्य प्राणी के तस्करी करने वालों पर कड़ी कार्यवाही की जाए। 

मुख्य वन संरक्षक जगदलपुर आर सी दुग्गा के मार्गदर्शन में बस्तर वन मंडल के वन मंडल अधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता के निर्देशन में मुखबिर से प्राप्त सूचना उपरांत उप वनमण्डलाधिकारी बस्तर, परिक्षेत्र अधिकारी करपावण्ड सौरभ रजक एवं अन्य वन अधिकारियों की एक टीम गठित कर करपावण्ड कोलावल मार्ग पर घेराबंदी कर 02 नग मोटर सायकल में एक जूट की थैले में 01 नग संकटपन्न जीवित वन्य जीव पेंगोलिन (छत्तीसगढ़ी में साल खपरी कहा जाता है) के साथ चार आरोपियों को पकड़ा गया। यह चारों व्यक्ति वन्य जीव को बेचने के फिराख में उड़ीसा से छत्तीसगढ़ आकर ग्राहक तलाश कर रहे थे।

वन विभाग के अधिकारियों द्वारा उक्त वन्य प्राणी को सुरक्षित अपने कब्जे में लेकर चारों आरोपियों को उनके 02 नग मोटर सायकल हीरो एचएफ ड्यूलक्स ओ डी 10 टी 3001, होंडा शाईन एसपी एपी 31 ईएम 7882 के साथ करपावण्ड वन परिक्षेत्र कार्यालय लाया गया एवं भारतीय वन अधिनियम 1927 तथा वन्यप्राणि संरक्षण अधिनियम 1972 के विभिन्न धाराओ के तहत् वन अपराध दर्ज कर अग्रिम वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।

इस कार्यवाही में देवलाल दुग्गा, उप वनमण्डलाधिकारी जगदलपुर, योगेश कुमार रात्रे, उप वनमण्डलाधिकारी चित्रकोट, सुर्यप्रकश धु्रव, वन परिक्षेत्र अधिकारी माचकोट, प्रकाश ठाकुर, वन परिक्षेत्र अधिकारी चित्रकोट, देवेन्द्र वर्मा, वन परिक्षेत्र अधिकारी जगदलपुर, जयराज पात्र, वनरक्षक, श्रीधर स्नेही, सी.एफ.ओ. जगदलपुर, एवं वन परिक्षेत्र करपावण्ड के बनसिंह कर्मा उप वनक्षेत्रपाल, सुखपाल यादव वनपाल, कलमू देवा वनरक्षक, तुलेष बघेल वनरक्षक, मंगल कष्यप वनरक्षक, रघुनाथ नाग वनरक्षक, सोनाधर मौर्य वनपाल कमलोचन बघेल वनपाल का योगदान सराहनीय रहा।

संकटपन्न वन्यप्राणियों के बचाव एवं सुरक्षा हेतु जगदलपुर वन वृत्त स्तरीय रेपिड रेस्क्यू टीम (आरआरटी) का गठन किया गया है। जो वन्यप्राणियों क बचाव हेतु लगातार सूचना तंत्र स्थापित कर वन्यप्राणियों के तस्कर पर लगाम लगाने का प्रयास कर रहे है। वन्य प्राणी पेंगोलिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत् सेड्यूल्ड 1 में दर्ज है। जिसको मारना एवं खरीद फरोक्त करना दंडनीय अपराध है।

सिरपुर में खजाना खोदने वालों तक नहीं पहुंच पायी जांच टीम, जेसीबी मालिक हो सकते हैं सूत्रधार !

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आनंदराम पत्रकारश्री / महासमुन्द । 

छत्तीसगढ़ के प्राचीन नगर सिरपुर के पुरावशेषों और पुरातात्विक महत्व को सहेजने में घोर उदासीनता बरती जा रही है। मीडिया24मीडिया द्वारा " सिरपुर के पास बेशकीमती खजाने की खोदाई, दो दिन बाद भी कुंभकर्णी निद्रा में है पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग " खबर प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद विभाग के अधिकारी, वन विभाग का मैदानी अमला, सिरपुर विकास प्राधिकरण के लोग हरकत में आए। पुलिस विभाग सूचना के बावजूद इस गम्भीर मसले पर अब तक कोई भी कार्यवाही नहीं की है। उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण/संरक्षण विभाग के लिखित रिपोर्ट की प्रतीक्षा है। एफआईआर करने के लिए जब भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारी लिखित में देंगे, किस धारा के तहत आपराधिक कृत्य किया गया है, यह स्पष्ट बताएंगे तब जाकर पुलिस कार्यवाही करेगी। आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध खोदाई के लिए वन विभाग ने पीओआर काट कर वन अपराध कायम किया है। महासमुन्द वन परिक्षेत्र अधिकारी सियाराम कर्माकर ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जेसीबी CG04NT4037 को जब्त कर राजसात करने की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।

सिरपुर में करबिन तालाब के समीप जंगल में जेसीबी से अवैध खोदाई में निकली मूर्ति


पुलिस में एफआईआर नहीं होने से मामला रहस्यमय

पुरातात्विक महत्व के स्थल को क्षति पहुंचाने, कथित तौर पर गड़ा खजाना (बेशकीमती मूर्ति अथवा धन) खोजने के लिए संरक्षित क्षेत्र में अवैध रूप से खोदाई करने वालों के विरुद्ध सख्ती से कार्यवाही नहीं किए जाने से समूचा मामला संदेह के दायरे में है। घटना के दो दिन बाद और मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद जिम्मेदार लोग हरकत में आए जरूर हैं, अभी भी मामले को रफादफा करने की कवायद हो रही है। दरअसल में जब्त जेसीबी नरेंद्र वर्मा खरोरा के नाम पर दर्ज है। समूचे अपराध की विवेचना में संबंधित जेसीबी का मालिक सूत्रधार हो सकते हैं। पुलिस जेसीबी मालिक के जरिये अपराधियों तक आसानी से पहुंच सकती है। लेकिन, पुलिस की चुप्पी आश्चर्यजनक है। जानकार बताते हैं कि जेसीबी मालिक और उसके कुछ रिश्तेदार आज अफसरों के पास महासमुन्द पहुंचकर मामले को कमजोर कर जेसीबी को छुड़ाने का जुगाड़ लगा रहे थे। सूत्रों से ऐसी जानकारी मिली है कि जेसीबी घटना के पहले दिन चोरी हो गई थी, ऐसा मिथ्या रिपोर्ट पुलिस में अब लिखाकर जेसीबी मालिक अपना दामन बचाने की कोशिश भी कर सकते हैं।

जेसीबी के आरटीओ में रजिस्ट्रेशन की ऑनलाइन कॉपी

118 वर्ष से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से संरक्षित क्षेत्र है सिरपुर

उल्लेखनीय है कि सिरपुर को वर्ल्ड हेरिटेज की सूची में शामिल करने लम्बे अर्से से प्रयास किया जा रहा है। सिरपुर क्षेत्र के करीब 10 से 15 किमी क्षेत्र की परिधि वर्ष 1906 से संरक्षित क्षेत्र घोषित है। जहाँ भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की पूर्वानुमति के बिना कोई भी खोदाई गैर कानूनी और दंडनीय अपराध है। इस मामले में अवैध खोदाई कर पुरातात्विक महत्व की मूर्तियों, टीलों को क्षति पहुंचाई गई है। इसके बावजूद ASI के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा पुलिस में आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं कराया जाना अनेक संदेहों को जन्म दे रहा है। ठोस कार्यवाही करने के बजाय जिम्मेदार विभाग एक-दूसरे के सिर पर कार्यवाही करने की जिम्मेदारी डाल कर पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं।

इस संबंध में पूछने पर सिरपुर चौकी प्रभारी बसंत पाणिग्राही ने बताया कि जंगल में कुछ लोग 25 जून की रात में टीलानुमा खंडहर को खोदे हैं। वहाँ से गणेशजी की एक प्राचीन मूर्ति बरामद हुआ है। जिसे ASI को सौंपा गया है। अवैध खोदाई की सूचना पर मौका मुआयना करने पुलिस भी पहुँची थी। इस संबंध में ASI के अधिकारियों के द्वारा लिखित रिपोर्ट और जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर उच्चाधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर समुचित कार्यवाही करेंगे। पुलिस का कहना है कि वन विभाग द्वारा भी इस पर कार्यवाही की जा रही है।

कार्यवाही नहीं होने से हौसले बुलंद

पुलिस द्वारा ठोस दंडात्मक कार्यवाही नहीं करने पर गड़ा धन के लालच में सिरपुर क्षेत्र में खोदाई को बल मिलेगा। यह छत्तीसगढ़ के प्राचीन विरासत को सहेजने की दिशा में घोर लापरवाही होगी। तीन दिन बाद भी एफआईआर नहीं होने से अपराधियों के हौसले बुलंद होना स्वाभाविक है। अब देखना होगा कि पुरातात्विक महत्व के स्थान को क्षति पहुंचाने वालों के खिलाफ क्या कार्यवाही की जाती है।

दल से बिछड़कर मरवाही के जंगल पहुंचा दंतैल हाथी, अलर्ट मोड पर वन विभाग

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 रायपुर : छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में एक दंतैल हाथी की एंट्री हो गई है। हाथी की मौजूदगी से वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गया है। हाथी के मूवमेंट पर नजर बनाया हुआ है। लोगों को हाथी से दूर रहने की हिदायत दी जा रही है। 


हाथी की एंट्री से ग्रामीण क्षेत्रों में अलर्ट मोड पर वन विभाग। वहीं यह दंतैल हाथी घुसरिया में एक ग्रामीण के घर को भी नुकसान पहुंचाया। साथ ही घर में रखे शक्कर और अनाज को चट कर गया। वहीं ग्रामीणों के अनुसार इस दौरान हाथी कई बार अक्रामक भी नजर आया।


आरोपी ने वन विभाग पर लगाया थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करने का आरोप, कोर्ट ने अफसरों को लगाई फटकार

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 रायपुर : छत्‍तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के उदंती अभ्यारण्य एंटी पोचिंग टीम पर थर्ड डिग्री इस्तेमाल कर आरोपी को टॉर्चर करने का मामला सामने आया है। दरअसल अभ्यारण इलाके में पोटाश बम से हमला कर 25 दिन पहले भालू का शिकार किया गया था, एंटी पोचिंग टीम को भनक लगी तो आरोपी फरार हो गए थे। 


टीम ने भालू के अवशेष जप्त कर जांच जारी रखा था, विगत रविवार को टीम ने कालिमाटी के पास आरोपी हजारी गोंड को हिरासत में लिया और मंगलवार की देर शाम देवभोग न्यायालय में पेश किया। जहा आरोपी ने न्यायधीश के समक्ष आप बीती बता कर थर्ड डिग्री का खुलासा किया। 



आरोपी करंट व पिटाई से लगे चोंट के निशान भी दिखाए, जिसके बाद न्यायालय ने मेडिकल जांच कराने के बाद विभाग के जिम्मेदार अफसरों के नाम सम्मन जारी कर जवाब मांगा है। 

घटना सामने आने के बाद इधर आदिवासी नेता लामबद्ध हो रहे है वही विभाग का दावा है की आरोपी मध्यभारत के शिकारी गैंग का हिस्सा है, 2020 में भी यही आरोपी पकड़ा गया था जो महिलाओ के आड में बच निकला था, अभी फिर से आरोप लगा रहा।

ये कैसा जंगल राज : 25 दिन बाद वन विभाग ने माना महासमुन्द-बलौदाबाजार क्षेत्र में विचरण कर रहा है बाघ !

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मीडिया की खबरों को झुठलाते रहे वन विभाग के जिला अधिकारी

आनंदराम पत्रकारश्री.

महासमुन्द/बलौदाबाजार। वन विभाग में जंगल राज चल रहा है? यह हम नहीं, क्षेत्र के वनवासी कह रहे हैं। सात मार्च को दो शासकीय सेवक (एक शिक्षक और एक पंचायत सचिव) ने सिरपुर रोड (महासमुन्द) किनारे पहली बार बाघ को देखा। उन्होंने सबूत के तौर पर बाघ का वीडियो भी बनाया। जब शोसल मीडिया में वीडियो वायरल हुआ, तो कुम्भकर्णी निद्रा से जागे वन विभाग के अफसर शहरों से सरपट गांव की ओर भागे। साथ ही क्षेत्र में बाघ होने की सूचना को झुठलाने का हर संभव प्रयास किया। वायरल वीडियो को दूसरे क्षेत्र का होना बताया। इस बीच लगातार मवेशियों का शिकार कर अपनी उपस्थिति का अहसास करा रहे बाघ से सिरपुर क्षेत्र में दहशत फैलने लगी। वन्यजीव के तथाकथित शिकारी सक्रिय हो गए। वन विभाग के मैदानी अमला का हाथ पांव फूलने लगा। यदि किसी ने बाघ को मौत के घाट उतार दिया तो आफत आ जाएगी। जैसे-तैसे क्षेत्र के ग्रामीणों को धमका-चमका कर बाघ का फोटो-वीडियो वायरल नहीं करने के लिए अभियान चलाया गया। इसमें वन अधिकारी सफल भी हुए। महासमुन्द वनमण्डल के अधिकारियों ने बाघ के संबंध में कभी कोई जानकारी साझा करने में रुचि नहीं दिखाई। अब 25 दिन बाद बलौदाबाजार वनमण्डल के अधिकारी द्वारा इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी जा रही है। इसे लेकर महासमुन्द वनमण्डल की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाया जा रहा है।



पढ़िए:- वन विभाग की ओर से जारी यह प्रेस विज्ञप्ति

दिनांक 07/03/2024 को शिक्षक श्री कांशीराम पटेल एवं सचिव श्री ओमप्रकाश पटेल ग्राम पंचायत बंदोरा कार से जा रहे थे, तब छपोराडीह से सिरपुर मार्ग पर शाम 05:45 बजे ग्राम बांसकूड़ा से सिरपुर मार्ग में एक नग बाघ को रोड़ पार करते हुए देखा गया। शिक्षक पटेल द्वारा मोबाईल से विडियो बनाया गया है। शिक्षक द्वारा उक्त जानकारी वनमण्डलाधिकारी महासमुन्द को दी गई। सूचना प्राप्त होते ही जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के वन अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा क्षेत्र की रात्रि गश्त की गई। दूसरे दिन 08/03/2024 को रायकेरा एवं सुकुलबाय के ग्रामीणों द्वारा पुनः बाघ देखने की सूचना दी गई। जिस पर त्वरित कार्यवाही करते हुए वनमण्डलाधिकारी महासमुन्द की अध्यक्षता एवं वनमण्डलाधिकारी बलौदाबाजार तथा वन विकास निगम के बारनवापारा परियोजना मण्डल की टीम गठित कर कार्यवाही की गई। जिससे अमलोर, सुकुलबाय में मवेशियों की मृत्यु होना पाया गया। मवेशियों को मारने के तरीके हिंसक वन्यप्राणी तेन्दूआ जैसे थे। दिनांक 12/03/2024 को जिले के अंतर्गत ट्रेकिंग के दौरान बाघ के पंजे का निशान पगडंडी में प्राप्त हुए। दिनांक 14/03/2024 को बलौदाबाजार वनमण्डल के परिक्षेत्र बल्दाकछार के कर्मचारी द्वारा बाघ को प्रत्यक्ष रूप से देखा गया एवं पुष्टि की गई। तत्पश्चात् विभाग के द्वारा NICA द्वारा जारी SOP/प्रोटोकॉल का पालन कर नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।

जिला बलौदाबाजार-भाटापारा एवं महसमुन्द जिला में वन विकास निगम के परिक्षेत्र रवान्, बार एवं सिरपुर परिक्षेत्र का आंशिक भाग है। वन विभाग द्वारा विभागीय अमला, डॉग स्क्वायड, NGO संस्था के माध्यम से लगातार ग्रामीणों को जंगल ना जाने हेतु एवं बाघ के विचरण के संबंध में सचेत किया जा रहा है। साथ ही साथ विभागीय अमले के द्वारा लगातार रात्रि गश्ती कर क्षेत्र को नियंत्रण करने का प्रयास किया जा रहा है। सुरक्षा की दृष्टि से वन विकास निगम क्षेत्र के अंतर्गत वनक्षेत्रों में प्रवेश रोकने के लिये अस्थाई बेरियर का निर्माण किया गया है। परिस्थतियों को ध्यान में रखते हुए बाघ की सुरक्षा हेतु 03 ट्रेकिंग टीम वनमण्डल बलौदाबाजार, वनमण्डल महासमुन्द्र, वन विकास निगम की गठित कर नोवा नेचर वेलफेयर सोसाइटी रायपुर के श्री एम. सूरज तथा वसुंधरा सोसाइटी फार कंजर्वेशन आफ नेचर के श्री गौरव निहलानी के सहयोग से लगातार ट्रेकिंग किया जा रहा है, साथ ही जन-जागरुकता हेतु बलौदाबाजार वनमण्डल द्वारा 07 परिक्षेत्रों की अलग-अलग टीम बनाकर दिवसवार रात्रिगश्त करते हुये उपरोक्त ग्रामों में ग्राम प्रमुखों एवं जनप्रतिनिधियों को सूचना देकर ग्रामीणों को अनावश्क वनक्षेत्र में ना जाने की लगातार समझाईस दिया जा रहा है। वनमण्डलाधिकारी (बलौदाबाजार वनमण्डल बलौदाबाजार )

वन विभाग की कार्रवाई में अवैध लकड़ियां और गाड़ी जप्त

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रायपुर। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर के निर्देश पर वन विभाग द्वारा लकड़ियों के अवैध परिवहन पर निरंतर कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में वन परिक्षेत्र बालोद की टीम द्वारा झलमला-धमतरी मुख्य सड़क मार्ग में ग्राम करकाभाट मोड़ के पास लगभग 75 हजार अनुमानित मूल्य के मिश्रित प्रजाति के 93 नग त्र 6.522 घ.मी. प्रतिबंधित लकड़ियां जप्त की गई। इसी प्रकार बीजापुर जिले के भोपालपट्टनम वन परिक्षेत्र तारलागुड़ा नाका में वन विभाग की टीम द्वारा घेराबंदी कर 5 नग सागौन स्लीपर तथा टाटा मैजिक वाहन जप्त कर कार्रवाई की जा रही है।

पीसीसीएफ व्ही. श्रीनिवास राव और वनमण्डलाधिकारी बालोद आयुष जैन के निर्देशन में अवैध परिवहन करते पाए जाने के कारण माजदा वाहन क्रमांक सीजी 08 एल 0918 (ज्।ज्। 1109) को काष्ठ सहित जप्त कर काष्ठागार बालोद लाया गया। जप्त वाहन में अवैध साजा, इमली एवं नीम काष्ठ भरे होने के कारण वाहन चालक पंकज व जोहन के विरूद्ध वन अपराध प्रकरण क्रमांक 96/22 दिनांक 16.08.2023 दर्ज कर विवेचना की जा रही है। जप्त काष्ठ के विरूद्ध भारतीय वन संरक्षण अधिनियम 1927 की धारा 41 एवं छ.ग. वनोपज परिवहन नियम 2001 के तहत कार्यवाही की जा रही है।

इसी प्रकार सीसीएफ मो. शाहिद से प्राप्त जानकारी के अनुसार बीजापुर वनमंडल में मुखबिर से प्राप्त सूचना के अनुसार तारलागुड़ा नाका में घेराबंदी कर टाटा मैजिक वाहन में 5 नग सागौन स्लीपर तस्करी कर रहे दो आरोपियों को वन विभाग ने पकड़ा है। आरोपी टी. श्रीकांत एवं शेख ख़ासिम द्वारा सवारी गाड़ी के ऊपर खुफिया कंपार्टमेंट बनाकर अवैध सागौन का परिवहन किया जा रहा था। वन विभाग द्वारा दोनों आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम एवं लोक संपत्ति हानि निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जाएगी।

 

CG NEWS : वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, हजारों टन प्रतिबंधित लकड़ियों की तस्करी पकड़ी

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 CG NEWS : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में प्रतिबंधित लकड़ियों की तस्करी कर रहे तस्‍करों के खिलाफ वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। वन विभाग की टीम ने ग्राम करहीभदर डिपो में बुधवार की देर शाम ट्रक में प्रतिबंधित लकड़ियां जैसे सागौन, शीशम, कौहा की तस्करी करते हुए तस्करों को पकड़ा है।


डीएफओ को मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर रात करीबन 12 बजे तत्काल बालोद रेंजर को भेज जब्ती की कार्रवाई की गआ। देर रात होने की वजह से लकड़ियों की संख्या का आंकलन नहीं किया जा सका। वहीं ट्रक पूरा लकड़ियों से भरा हुआ है। अंदाजा लगाया जा रहा की वाहन में सैकड़ों टन प्रतिबंधित लकड़ियां है। जिसे ग्राम कांडे से गाड़ाडीह ले जाया जा रहा था। जब्त वाहन करहीभदर डिपो में खड़ी हुई है।

छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कम्पनी की समीक्षा बैठक सम्पन्न

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रायपुर। मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कम्पनी की समीक्षा बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में कोरबा में नवीन ताप विद्युत संयंत्र की स्थापना एवं छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कम्पनी लिमिटेड की गारेपेलमा सेक्टर-3 खदान से कोयला संबंधित प्रकरणों पर विस्तार से चर्चा की गई। 
                  

वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित इस बैठक में ऊर्जा विभाग के सचिव अंकित आनंद, जल संसाधन, वन विभागरेल्वे, पीजीसीआईएल एवं राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

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