Media24Media.com: चंद्रयान-3

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Aditya-L1 Mission को लेकर आई बड़ी खुशखबरी, इसरो ने बताई डेस्टिनेशन तारीख

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 Aditya-L1 Mission : चंद्रयान-3 की सफलता के कुछ दिन बाद भारत ने पिछले महीने अपने पहले सूर्य मिशन को प्रक्षेपित किया। सूर्य के अध्ययन के लिए ‘आदित्य एल1’ को धरती से 15 लाख किलोमीटर दूर ‘लैग्रेंजियन-1 (एल-1) ’ बिंदु तक पहुंचना है। अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपडेट दिया है कि आदित्य एल-1 जनवरी के मध्य तक लैग्रेंजियन-1 तक पहुंच जाएगा।


इसरो प्रमुख एस सोमनाथ का कहना है कि यह बहुत अच्छी तरह से काम कर रहा है। वर्तमान में, पृथ्वी से एल-1 प्वाइंट तक पहुंचने में करीब 110 दिन लगते हैं। इसलिए जनवरी के मध्य तक यह एल-1 प्वाइंट तक पहुंच जाएगा। इसके बाद आदित्य एल-1 को पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर लैग्रेंजियन पॉइंट के हेलो ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। आदित्य एल-1 पर लगे पेलोड सूरज की रोशनी, प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र का अध्ययन करेंगे।

गौरतलब है कि इसरो ने दो सितंबर को पीएसएलवी सी57 लॉन्च व्हीकल से आदित्य एल1 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह लॉन्चिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से हुई। यह मिशन भी चंद्रयान-3 की तरह पहले पृथ्वी की परिक्रमा करेगा और फिर यह तेजी से सूरज की दिशा में उड़ान भरेगा। इसरो ने बताया था कि आदित्य एल1 ने अपनी कक्षा बदलकर अगली कक्षा में प्रवेश किया। आदित्य एल1 पृथ्वी की कक्षा में 16 दिन बिताएगा। इस दौरान पांच बार इसकी कक्षा बदलने के लिए अर्थ बाउंड फायरिंग की जाएगी।

इसके अलावा इसरो प्रमुख ने ‘गगनयान’ मिशन के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि परीक्षण वाहन-डी1 मिशन 21 अक्तूबर के लिए निर्धारित है। यह गगनयान कार्यक्रम है। गगनयान कार्यक्रम के लिए क्रू एस्केप सिस्टम का प्रदर्शन करते हुए परीक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा, ‘हर महीने हम कम से कम एक प्रक्षेपण करेंगे। इस परीक्षण वाहन प्रक्षेपण के बाद, हमारे पास जीएसएलवी है। फिर हमारे पास एसएसएलवी है। फिर उसके बाद गगनयान मानवरहित मिशन होगा। बीच में एक पीएसएलवी प्रक्षेपण होगा। इसलिए जनवरी से पहले, आप कम से कम 4-5 लॉन्च देखेंगे।’

110 दिन की यात्रा के बाद आदित्य एल1 लैग्रेजियन-1 पॉइंट पर पहुंचेगा। लैग्रेंजियन-1 पॉइंट पहुंचने के बाद आदित्य एल1 में एक और मैनुवर किया जाएगा, जिसकी मदद से आदित्य एल1 को एल1 पॉइंट के हेलो ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा। यही से आदित्य एल1 सूरज की स्टडी करेगा। यह लैग्रेंजियन पॉइंट सूरज की दिशा में पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर दूर है। आदित्य एल1 के साथ सात पेलोड भेजे गए हैं, जो सूरज का विस्तृत अध्ययन करेंगे। इनमें से चार पेलोड सूरज की रोशनी का अध्ययन करेंगे। वहीं बाकी तीन सूरज के प्लाजमा और चुंबकीय क्षेत्र का अध्ययन करेंगे।



चंद्रयान-3 के रोवर प्रज्ञान को चांद पर देवी की मूर्ति! पढ़े पूरी खबर

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 Chandrayaan-3 : चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के बाद दुनिया भर में भारत के चंद्रयान 3 की कामयाबी के चर्चे हैं। अब भी प्रज्ञान रोवर चांद पर अपना काम कर रहे है। भारत के तीसरे चंद्र मिशन, चंद्रयान 3 ने अंतरिक्ष में एक महीने की लंबी यात्रा के बाद चंद्रमा के सुदूर हिस्से पर सफलतापूर्वक लैंडिंग कर ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित किया।


वहीं अपने सफर के दौरान चंद्रयान-3 ने इसरो को कई अहम जानकारियां साझी की। इतना ही नहीं इस दौरान चंद्रयान-3 ने अंतरिक्ष से कई अद्धभूत तस्वीरें भी शेयर की। वहीं इस बीच एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। वायरल हुई एक 3D तस्वीर में एक देवी की मुर्ति नजर आ रही है।

हालांकि इसरो ने इसकी पुष्टि नहीं की न ही इसके बारे में कोई जानकारी अपने official वेबसाइट, फेसबुक और एक्स (twitter) पर भी नहीं दी। वहीं जब इस तस्वीर की जांच की गई तो पता चला कि इसे रूस की वेबसाइट ‘ट्रेना बुलगरिया’ पर पोस्ट की गई है। ये तस्वीर 28 अगस्त 2023 को शेयर की गई थी, जिसपर कैप्शन लिख था ‘चद्रमा पर एक दिन कैसा दिखता है’।

इसके अलावा एक अन्य वेबसाइट ‘कोस्टियाओस डॉट आर्ट स्टेशन’ पर भी चंद्रमा की 3D तस्वीर पोस्ट की गई हालांकि इस फोटो में कोई मूर्ति नहीं नज़र आई और यह भी लिखा था कि यह तस्वीर वास्तविक नहीं है।


चांद के बाद अब ISRO ने कर दिया बड़ा ऐलान, 2 सितंबर को लॉन्च होगा आदित्य-एल1 मिशन

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नई दिल्ली: चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक लैंडिंग के बाद, इसरो की नजर बहुप्रतीक्षित आदित्य एल1 मिशन पर है। चंद्रयान-3 के चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद इतिहास रचने के एक दिन बाद, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने घोषणा की कि वह 2 सितंबर को आदित्य-एल1 मिशन लॉन्च करेगा। आदित्य-एल1 मिशन सूर्य का अध्ययन करने के लिए समर्पित है। अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र-इसरो, अहमदाबाद के निदेशक नीलेश एम.देसाई ने गुरुवार को कहा कि आदित्य-एल1 मिशन तैयार है और प्रतीक्षा कर रहा है। आदित्य-एल1 मिशन को इसरो पीएसएलवी रॉकेट द्वारा सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र एसएचएआर (एसडीएससी एसएचएआर), श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा।


बहुप्रतीक्षित 'आदित्य L1' मिशन पर बोलते हुए इसरो प्रमुख एस सोमनाथ ने कहा कि यह सितंबर में लॉन्च के लिए तैयार हो रहा है। आदित्य-एल1 भारत का पहला सौर मिशन है जो सूर्य का अध्ययन करने के लिए एक अंतरिक्ष-आधारित भारतीय वेधशाला है। अंतरिक्ष यान प्रकाशमंडल, क्रोमोस्फीयर और सूर्य की सबसे बाहरी परतों का निरीक्षण करने के लिए 7 पेलोड ले जाएगा। 

सूर्य का अध्ययन करने वाला भारत का पहला अंतरिक्ष मिशन होगा। इस सोलर मिशन का नाम आदित्य एल 1 है। इसका मकसद करीब से सूर्य का निरीक्षण, इसके वातावरण और चुंबकीय क्षेत्र के बारे में स्टडी करना है। इसका ऐलान खुद पीएम मोदी ने किया था। इसकी अहमियत इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सोलर सिस्टम पर पड़ने वाले प्रभाव उपग्रह की कक्षा और उसके जीवन को बाधित कर सकते हैं। अंतरिक्ष के वातावरण को समझने के लिए यह मिशन खास है। भारत पहली बार सूरज पर रिसर्च करने जा रहा है। लेकिन अब तक सूर्य पर कुल 22 मिशन भेजे जा चुके हैं। इन मिशन को पूरा करने वाले देशों में अमेरिका, जर्मनी, यूरोपीयन स्पेस एजेंसी शामिल हैं। सबसे ज्यादा मिशन नासा ने भेजे हैं।  


Mission Chandrayaan-3 : चंद्रमा पर पहुंचा भारत का चंद्रयान-3, दुनियाभार से मिल रही भारत को बधाई

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Mission Chandrayaan-3 : चंद्रयान-3 की चांद की सतह पर सफल लैडिंग (Chandrayaan-3 Landing On Moon) के बाद दुनियाभर से भारत को बधाईयां मिल रही हैं. भारत, चांद के दक्षिण ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश बन गया है. इस मौके पर नेताओं, वैज्ञानिकों, बिजनेसमैन समेत आम लोग भारत की कामयाबी पर शुभकामनाएं दे रहे हैं.


दुनिया के बड़े नेताओं ने दी बधाई

रशियन प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन ने भी भारत को बधाई दी. न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, क्रेमलिन की तरफ से जारी स्टेटमेंट में कहा गया, 'स्पेस एक्सप्लोरेशन की दिशा में ये बड़ा कदम है, साथ ही विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भारत की प्रभावित करने वाली शानदार तरक्की का भी ये सबूत है.'

इस मौके पर दक्षिण अफ्रीका के प्रेसिडेंट सिरिल रामाफोसा ने कहा, 'ये हमारे ब्रिक्स परिवार के लिए बड़ा मौका और हम आपकी खुशी में शरीक हैं. इस बड़ी उपलब्धि को पाने की खुशी में हम आपके साथ हैं.'

स्पेस एडमिनिस्ट्रेटर्स ने सराहा

इस मौके पर NASA के एडमिनिस्ट्रेटर बिल नेल्सन ने X पर लिखा, 'चंद्रयान-3 की चंद्रमा के साउथ पोल लैंडिंग पर ISRO आपको बधाई. और भारत को चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बनने पर बधाई. हमें खुशी है कि इस मिशन पर हम आपके पार्टनर थे.

वहीं ESA (यूरोपियन स्पेस एजेंसी) के डायरेक्टर जनरल जोसेफ अस्कबैकर ने लिखा, 'इंक्रेडिबल! इसरो, चंद्रयान-3 और भारत के लोगों को बधाई. नई तकनीक को दिखाने और एक और सेलेस्टियल बॉडी पर सॉफ्ट लैंडिंग का शानदार तरीका. वेल डन. मैं बहुत प्रभावित हुआ.

नेताओं ने भी दी बधाई

गृहमंत्री अमित शाह ने सोशल प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के साथ चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव को छूने वाला पहला देश बना भारत. इससे हमारी अंतरिक्ष संबंधी महत्वकांक्षाओं को नई ऊंचाई मिली है, इसने भारत को स्पेस प्रोजेक्ट के लिए दुनिया का लॉन्च पैड बना दिया है. इससे इंडियन कंपनीज के लिए स्पेस का गेट खुल गया है, जिससे हमारे युवाओं के लिए बड़ी मात्रा में रोजगार का सृजन होगा.'

 

 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग पर इसरो के वैज्ञानिकों को दी बधाई

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों और देशवासियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा है कि हमारे वैज्ञानिकों ने अपनी प्रतिभा से इस कठिन मिशन को पूरा कर इतिहास रच दिया है।
                     

भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करने वाला दुनिया का पहला देश और चंद्रमा पर पहुंचने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया है। देश के लोगों को इस उपलब्धि पर गर्व है। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के तीन करोड़ नागरिकों की ओर से इस मिशन से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी है।

Chandrayaan-3 Landing: चांद पर सफल लैंडिंग के लिए कछुए की चाल चलेगा चंद्रयान-3, जानें भारत आज कैसे रचेगा इतिहास

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Chandrayaan-3 Landing: भारत के लिए आज का दिन बेहद खास है. भारत का महत्वाकांक्षी मून मिशन चंद्रयान-3 आज शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद की सतह पर लैंड करेगा. एक तरफ रूस का चंद्र मिशन लूना-25 (Luna-25) जहां क्रैश कर चुका है। अब पूरी दुनिया की नजर भारत के मून मिशन पर टिकी हुई है. ISRO के वैज्ञानिक भी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं.


आखिरी 17 मिनट का है खेल

वैज्ञानिकों का कहना है कि लैंडिंग के आखिरी 17 मिनट सबसे अहम होंगे। इन आखिरी पलों में इसरो के वैज्ञानिकों समेत सबकी धड़कनें बढ़ने वाली हैं। चांद पर लैंडिंग 4 चरणों में होगी।

कमांड मिलते ही लैंडर विक्रम 25 किलोमीटर की ऊंचाई से चांद की सतह की तरफ बढ़ना शुरू करेगा। 750 Km दूर होगा तब विक्रम लैंडिंग साइट से, स्पीड 1.6 Km/सेकंड होगी, 690 सेकेंड के दौरान विक्रम के सभी इंजन स्टार्ट होकर उसकी रफ्तार कम करेंगे। 7.4 किमी की ऊंचाई पर होगा, 358 मीटर/सेकंड सतह के समांतर होगी स्पीड, नीचे आने की रफ्तार 61 मीटर/सेकंड रह जाएगी।

बता दें कि अभी तक किसी अन्य देश ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर सॉफ्ट लैंडिंग नहीं की है. आज शाम विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग के बाद भारत ऐसा करने वाला पहला देश बन जाएगा. भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के पूर्व प्रोफेसर आरसी कपूर ने कहा कि 'यह इसरो का एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण मिशन है.'

उन्होंने आगे कहा 'इसमें कई चरण शामिल थे - सबसे पहले, चंद्रयान -3 को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया था, फिर इसे चंद्रमा स्थानांतरण पथ पर भेजा गया, फिर यह चंद्रमा की कक्षा तक पहुंच गया, और अब लैंडर और रोवर लैंडिंग से पहले की कक्षा में पहुंच गए हैं.ये सभी चरण सटीकता से पूरे कर लिए गए हैं.

छत्तीसगढ़ के विद्यार्थि और शिक्षक देख पाएंगे चंद्रयान-3 की Live लैंडिंग

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Chandrayaan Mission : छत्तीसगढ़ में चंद्रयान 3 मिशन के साथ बच्चों के उत्साह को बढ़ाने के लिए स्कूलों में लाइव प्रसारण दिखाने का आदेश जारी किया गया है। चंद्रयान-3 का चंद्रमा पर उतरने का सीधा प्रसारण 23 अगस्त 2023 को इसरो की वेबसाइट, यूट्यूब चैनल और डीडी नेशनल पर दिखाया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस मौके पर देश को संबोधित करेंगे।


पढ़ें आदेश…

Chandrayaan-3 Landing Update: चंद्रयान-3 का चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से हुआ कम्युनिकेशन

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 Chandrayaan-3 Landing Update:  भारत का चंद्रयान-3 मिशन का लैंडर मॉड्यूल (LM) चांद की कक्षा में चक्कर लगा रहा है और इतिहास रचने को तैयार है. इसरो ने कहा है कि लैंडर की बुधवार (23 अगस्त) को शाम छह बजकर चार मिनट पर चांद की सतह पर उतरने की उम्मीद है. चांद की ओर बढ़ रहे चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल का चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) के ऑर्बिटर से संपर्क हो गया है.


इसरो ने इस बारे में सोमवार (21 अगस्त) को ट्वीट कर जानकारी दी. इसरो ने लिखा, "स्वागत है दोस्त- चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ने औपचारिक रूप से चंद्रयान-3 के लैंडर मॉड्यूल का स्वागत किया. दोनों के बीच दोतरफा संवाद स्थापित हो गया है. अब लैंडर मॉड्यूल से संपर्क में रहने के ज्यादा रास्ते हैं. लैंडिंग का सीधा प्रसारण बुधवार को शाम 5:20 बजे शुरू होगा.


चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर कर रहा मदद

दरअसल, भारत का चंद्रयान-2 का लैंडर साल 2019 में चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करते वक्त क्रैश हो गया था. हालांकि, चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर 2019 से ही चांद की परिक्रमा कर रहा है और इसने चंद्रयान-3 मिशन में काफी सहायता की है.

सुरक्षित लैंडिंग की जगह में सहायता की

चंद्रयान-2 ऑर्बिटर लैंडर मॉड्यूल के साथ कम्यूनिकेशन कर रहा है. इसके जरिए ग्राउंड स्टेशन तक सिग्नल भी पहुंचेगा. चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ने पहले ही चंद्रयान-3 लैंडर के लिए सुरक्षित लैंडिंग के लिए जगह की पहचान करने में भी अहम भूमिका निभाई है.

लगभग हाथ की पहुंच के अंदर है

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने चंद्रयान-3 द्वारा चंद्रमा के सुदूर हिस्से की नई ली गई तस्वीरें साझा कीं और कहा कि चंद्रमा अब लगभग हाथ की पहुंच के भीतर है। चंद्रमा के दूरवर्ती क्षेत्र की नवीनतम छवियां लैंडर हैज़र्ड डिटेक्शन और अवॉइडेंस कैमरा द्वारा कैप्चर की गईं।



चंद्रमा पर कब उतरेगा चंद्रयान-3? ISRO ने बताया कब और कितने बजे होगी लैंडिंग

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 Chandrayaan 3:  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने घोषणा की है कि चंद्रयान-3, 23 अगस्त को शाम 6:04 बजे चंद्रमा (Moon) की सतह पर उतरने के लिए तैयार है. चंद्रयान-3  का रविवार तड़के दूसरा डीबूस्टिंग ऑपरेशन  सफलतापूर्वक पूरा हुआ है. इसके साथ ही मिशन का अंतिम चरण चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की ओर संचालित है. चंद्रयान-3, मून एक्‍सप्‍लोरेशन सीरीज में भारत का तीसरा मिशन 14 जुलाई को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था.


इस स्‍पेसक्राफ्ट ने 5 अगस्त को लूनर आर्बिट में प्रवेश किया था और यह 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला है. ISRO अंतरिक्ष एजेंसी ने एक्स (Twitter) पर पोस्ट कर लैंडिंग के समय की घोषणा की और लोगों को उनकी शुभकामनाओं और सकारात्मकता के लिए धन्यवाद दिया है.

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA), बेंगलुरु की निदेशक प्रोफेसर अन्नपूर्णी सुब्रमण्यन ने कहा कि वह इसरो के चंद्रयान -3 की सफलता को लेकर आश्वस्त हैं. उन्‍होंने कहा कि हम बिना किसी समस्या के वहां पहुंच जाएंगे. लेकिन यह आखिरी 30 किमी है; वे काफी महत्वपूर्ण होंगे. अंतरिक्ष के पैरामीटर विशाल हैं और इसमें जटिलताएं शामिल हैं. इसकी हमेशा एक छोटी सी गैर-शून्य संभावना रहेगी कि यह गलत हो सकता है और हम इसे खत्म नहीं कर सकते. लेकिन मुझे पूरा यकीन है कि हम इस बार ऐसा करेंगे. सुब्रमण्यम ने कहा, ‘इसमें बड़ी तैयारी की गई है और चंद्रयान-3 के सफल होने की संभावना सबसे ज्यादा है.’




Chandrayaan-3 Big News : अंतिम ओवर शुरू, 4 दिन बाद लिखा जाएगा इतिहास

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Chandrayaan-3 Big News : चंद्रयान-3 ने बड़ी कामयाबी हासिल कर ली है और अब 4 दिन बाद 23 अगस्त का इंतजार है। इस दिन चांद के दक्षिणी ध्रुव पर इसकी सॉफ्ट लैंडिंग होगी। इसरो ने गुरुवार दोपहर चंद्रयान-3 के प्रोपल्शन मॉड्यूल को लैंडर और रोवर से अलग कर दिया। अब यह चंद्रमा की कक्षा में रहकर धरती से आने वाले रेडिएशन्स की स्टडी करेगा।


लैंडर मॉड्यूल में लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान शामिल हैं जो अब एक ऐसी कक्षा में उतरने के लिए तैयार है जिससे यह चंद्रमा की सतह के और करीब आ जाएगा। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग अगले बुधवार को शाम 5.47 बजे निर्धारित है। वहीं आज शाम लैंडर मॉड्यूल के भारतीय समयानुसार शाम करीब चार बजे डीबूस्टिंग (गति कम करने की प्रक्रिया) से गुजरते हुए चंद्रमा की कक्षा में थोड़ा और नीचे आने की उम्मीद है।

इसरो के एक अधिकारी ने कहा कि लैंडर को एक ऐसी कक्षा में लाने के लिए डीबूस्ट किया जाएगा। यानी उसकी गति को कम किया जाएगा। इसके बाद यहां से चंद्रमा की दूरी 30 किलोमीटर रह जाएगी। सबसे कम दूरी से ही 23 अगस्त को चंद्रयान की सॉफ्ट लैंडिंग होगी। लैंडर को 30 किलोमीटर की हाइट से चंद्रमा की सतह पर लैंड कराने की प्रक्रिया काफी महत्वपूर्ण होगी।

लैंडर चंद्रमा की कक्षा में अपने स्वयं के कार्यों को तब तक अंजाम देता रहेगा, जब तक वह चंद्रमा की सतह पर नहीं पहुंच जाता और सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर लेता. इन दोनों के अलावा, चंद्रयान-2 ऑर्बिटर, जो अब भी चंद्रमा के चारों ओर परिक्रमा कर रहा है, भारत की चंद्रमा पर उपस्थिति को बढ़ाता है. 2,379 किलोग्राम के कक्षीय द्रव्यमान और सौर किरणों के जरिए 1000 वॉट बिजली पैदा करने में सक्षम यह बॉक्स आकार का यान, भारतीय डीप स्पेस नेटवर्क और लैंडर के साथ संचार करता है.


इन तीन अंतरिक्ष यानों के साथ, भारत स्पेस एक्सप्लोरेशन में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है. विक्रम लैंडर की सफल लैंडिंग इसरो के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी, जो चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित लैंडिंग और घूमने में एंड-टू-एंड क्षमता का प्रदर्शन करेगा, जिसे वह 4 साल पहले चंद्रयान -2 के साथ हासिल नहीं कर सका था. हालांकि, भारत चंद्रमा के आसपास अकेला नहीं है. चीन, अमेरिका और कोरिया के भी चंद्रमा के ऊपर मंडराने वाले एक्टिव मिशन हैं. जैसा कि दुनिया देख रही है, भारत का लूनर​​ मिशन नई वैज्ञानिक खोजों और तकनीकी प्रगति को उजागर करने के लिए तैयार है.


Chandrayaan 3 Update: आज चांद के और करीब पहुंचेगा चंद्रयान-3 , अब बस लैंडिंग का इंतजार

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Chandrayaan 3 Update: भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया की नजर भारत के मून मिशन चंद्रयान-3 पर टिकी है. आज का दिन चंद्रयान3 के लिए बेहद खास है, क्योंकि आज ही अपना मून मिशन चंद्रयान-3 चांद की चौखट पर दस्तक देने वाला है. आज यानी बुधवार को एक बार फिर चंद्रयान-3 के ऑर्बिट को घटाया जाएगा और यह ऑर्बिट घटाने की अंतिम प्रक्रिया होगी. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आज सुबह 8:30 बजे यह ऑपरेशन करने जा रहा है.


इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया का उद्देश्य प्रणोदन और लैंडर मॉड्यूल दोनों को चंद्रमा के चारों ओर लगभग 100 किमी की गोलाकार कक्षा में स्थापित करना है. यह मील का पत्थर चंद्रयान -3 मिशन के अगले चरण में पहुंचने का प्रतीक है, जिसमें लैंडर को प्रणोदन मॉड्यूल से अलग करना शामिल है. जबकि प्रणोदन मॉड्यूल चंद्रमा के चारों ओर अपनी कक्षा जारी रखेगा, लैंडर एक ‘डीबूस्ट’ प्रक्रिया से गुजरेगा, जिसमें जटिल ब्रेकिंग युद्धाभ्यास की एक श्रृंखला शामिल होगी.

लैंडर उतारने वाला चौथा देश होगा भारत

चंद्रमा की सतह पर लैंडर उतारने वाला चौथा देश होगा भारत अब तक अमेरिका, रूस और चीन ने ही चंद्रमा की सतह पर अपने लैंडर उतारे हैं। भारत ने 2019 में चंद्रयान-2 मिशन के तहत लैंडर को उतारने का प्रयास किया था।

Chandrayaan On Moon : चंदा मामा बेहद करीब पहुंचा चंद्रयान-3, आज चांद के चौथे ऑर्बिट में लेगा एंट्री

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 Chandrayaan On Moon : चंदा मामा के लिए निकले हिंदुस्तान के मिशन चंद्रयान-3 को आज पूरा एक महीना बीत चुका है. चंद्रयान-3 लगातार और सफलतापूर्वक अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा है. आज से करीब 9 दिन बाद चंद्रयान-3 चांद की सतह पर लैंड करेगा. लेकिन आज का दिन चंद्रयान-3 के लिए बेहद अहम होगा. बता दें कि आज तारीख 14 अगस्त है और आज से ठीक एक महीने पहले चंद्रयान-3 का चांद के लिए सफर शुरू हुआ था. 14 जुलाई को चंद्रयान-3 आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से चंद्रमा के लिए निकला था. तब से लेकर अब तक चंद्रयान-3 ने कई मुश्किलों से गुजरते हुए बड़े और अहम पड़ाव को पार किया है. अब आपको चंद्रयान-3 के अब तक के सफर के बारे में बताते हैं.


चंद्रयान-3 का अब तक का सफर

- चंद्रयान-3 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया.
- 15 जुलाई को पहली बार ऑर्बिट बढ़ाई गई.
- इसके बाद 17 जुलाई को दूसरी बार ऑर्बिट में इजाफा किया गया.
- साथ ही 18 और 20 जुलाई को तीसरी और चौथी बार ऑर्बिट की गति बढ़ाई गई.
- वहीं 25 जुलाई को 5वीं बार फिर ऑर्बिट बढ़ाया गया.
- जिसके बाद 31 जुलाई और 1 अगस्त की रात चंद्रयान पृथ्वी की कक्षा से चंद्रमा की ओर बढ़ गया.
- 5 अगस्त को चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश किया.
- 6 अगस्त को चंद्रयान की ऑर्बिट पहला बार घटाई गई.
- 6 अगस्त को चंद्रयान ने चांद के करीब से तस्वीरें भेजी.
- 9 अगस्त को चंद्रयान की ऑर्बिट दूसरी बार घटाई.
-14 अगस्त को यानी आज चंद्रयान-थ्री चांद की चौथी कक्षा में प्रवेश करेगा.

चांद पर 14 दिन ही क्यों रहेगा चंद्रयान-3?

चंद्रयान-3, 23 अगस्त को चांद की सतह पर लैंड करेगा और 14 दिनों तक यहां काम करेगा. अब ऐसे में सवाल उठता है कि चंद्रयान-3 सिर्फ 14 दिन ही क्यों चांद की सतह पर रहेगा? बता दें कि चंद्रमा पर 14 दिन तक रात और 14 दिन तक उजाला रहता है. जब यहां रात होती है तो तापमान -100 डिग्री सेल्सियस से भी कम हो जाता है. चंद्रयान के लैंडर और रोवर अपने सोलर पैनल्स से पावर जनरेशन करेंगे इसलिए वो 14 दिन तो पावर जेनेरेट कर लेंगे लेकिन रात होने पर पावर जनरेशन प्रोसेस रुक जाएगी. पावर जेनेरेशन नहीं होगा तो इलेक्ट्रॉनिक्स भयंकर ठंड को झेल नहीं पाएंगे. इस स्थिति में उनमें खराबी आना शुरू हो जाएगी.

 

रूस ने भेजा अपना मून मिशन, चंद्रयान-3 से पहले उतरेगा चांद पर!

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Russia Luna 25 Mission: रूस ने करीब 47 साल बाद चांद पर अपना मून मिशन भेजा. 11 अगस्त की सुबह 4:40 बजे के करीब अमूर ओब्लास्ट के वोस्तोनी कॉस्मोड्रोम से Luna-25 Lander मिशन लॉन्च किया गया. लॉन्चिंग सोयुज 2.1बी (Soyuz 2.1b) रॉकेट से किया गया.  इसे लूना-ग्लोब (Luna-Glob) मिशन भी कहते हैं. 


यह रॉकेट करीब 46.3 मीटर लंबा है. इसका व्यास 10.3 मीटर है. इसका वजन 313 टन है. चार स्टेज के रॉकेट ने Luna-25 लैंडर को धरती के बाहर एक गोलाकार ऑर्बिट में छोड़ा. जिसके बाद यह स्पेसक्राफ्ट चांद के हाइवे पर निकल गया. इस हाइवे पर ही 5 दिन की यात्रा करेगा. इसके बाद चांद के चारों तरफ 7-10 दिन चक्कर लगाएगा. 

21 या 22 अगस्त को लूना-25 चांद की सतह पर उतरेगा. इसका लैंडर चांद की सतह पर 18 किलोमीटर ऊपर पहुंचने के बाद लैंडिंग शुरू करेगा. करीब 15 किलोमीटर ऊंचाई कम करने के बाद 3 किलोमीटर की ऊंचाई से पैसिव डिसेंट होगा. यानी धीरे-धीरे लैंडर चांद की सतह पर उतरेगा. 700 मीटर ऊंचाई से थ्रस्टर्स तेजी से ऑन होंगे ताकि इसकी गति को धीमा कर सकें. 20 मीटर की ऊंचाई पर इंजन धीमी गति से चलेंगे. ताकि यह लैंड हो पाए.

चंद्रयान-3 के लैंडिंग की लोकेशन 69.63 दक्षिण, 32.32 पूर्व है। वहीं अगर रूस के लूना 25 की बात करें तो यह 69.5 दक्षिण 43.5 पूर्व है। अगर दक्षिणी ध्रुव के सबसे करीब की बात करें तो यह चंद्रयान-3 ही होगा। हालांकि रूस चांद पर भारत का पड़ोसी होगा। दोनों के बीच इस दौरान 118 किमी की दूरी रहेगी। यह जानकारी शनमुगा सुब्रमण्यन ने दी है। साल 2019 में जब चंद्रयान 2 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर क्रैश हो गया था तब नासा ने इसकी तस्वीर जारी की थी। नासा ने पब्लिक से चंद्रयान को खोजने को कहा था।

Chandrayaan-3 के लिए अगले कुछ दिनों का सफर अहम - ISRO चीफ

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Chandrayaan-3 Mission : चंद्रयान-3 अच्छी दशा में है और चंद्रमा पर उतरने के लिए अहम चरण की ओर बढ़ रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO ) के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने सोमवार को बताया कि यान को चंद्रमा पर 100 किमी के परिक्रमा पथ से सतह की ओर लाना बेहद नाजुक चरण होगा।


14 जुलाई को प्रक्षेपित यान इस समय चंद्रमा के चारों ओर 170 गुणा 4313 किमी के दीर्घवृत्ताकार पथ पर परिक्रमा कर रहा है। परिक्रमा पथ में बदलाव के अगले चरण नौ अगस्त और 17 अगस्त को प्रस्तावित हैं। इन चरणों के जरिये उसे चांद की सतह से महज 100 किमी ऊंचे वृत्ताकार परिक्रमा पथ पर लाया जाएगा। वहीं, 23 अगस्त को लैंडर विक्रम चंद्रमा की सतह पर उतारा जा सकता है। सोमनाथ ने बताया कि चंद्रमा के 100 किमी तक करीब पहुंचने में वे यान के लिए कोई मुश्किल नहीं देख रहे। समस्याएं लैंडर की सतह से सही पोजीशन का अनुमान लगाने के साथ शुरू होती हैं। इसे पथ निर्धारण प्रक्रिया कहा जाता है। अगर यह सही रहती है, तो बाकी प्रक्रियाएं आसानी से पूरी की जा सकेंगी।

चंद्रयान-2 के अनुभव से सीखे

सोमनाथ ने कहा कि 2019 का मिशन चंद्रयान-2 आंशिक सफल था, लेकिन इससे मिले अनुभव इसरो के चंद्रमा पर लैंडर उतारने के लिए नए प्रयास में काफी उपयोगी साबित हुए। इसके तहत चंद्रयान-3 में कई बदलाव किए गए।

अब तक सब मंगल

सोमनाथ ने बताया कि इस बार चंद्रयान-3 को बेहद सही ढंग से नीचे लाया गया है। परिक्रमा पथ में बदलाव जैसी योजना थी, वैसे ही हो रहे हैं। किसी तरह का पथ विचलन नहीं हुआ है। इसी वजह से अब तक शानदार परिणाम देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे उम्मीद कर रहे हैं कि आगे भी सब ठीक होगा।

चंद्रयान-3 ने खींची चांद की पहली तस्वीर, ऐसी दिखी चंद्रमा की सतह, आपने देखी क्या?

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 Chandrayaan-3 Capture First Images Of Moon : चंद्रयान-3 द्वारा ली गई चंद्रमा की पहली तस्वीरें अब सबके सामने हैं. इन तस्वीरों को Lunar Orbit Injection के दौरान खींचा गया. इन तस्वीरों में बाईं ओर गोल्डेन कलर का चंद्रयान-3 का सोलर पैनल नजर आ रहा है और सामने चंद्रमा की सतह पर मौजूद गड्ढे दिखाई दे रहे हैं.


हर तस्वीर में इन गड्ढों का आकार बढ़ा होता जा रहा है. बताया गया कि 9 अगस्त की दोपहर पौने दो बजे करीब इसके ऑर्बिट को बदलकर 4 से 5 हजार किलोमीटर की ऑर्बिट में डाला जाएगा. इस प्रक्रिया के बाद चांद की जब भी फोटो ली जाएगी तो वो और बड़ी और स्पष्ट दिखेगी.


इसरो का मिशन मून, अब तक सही तरीके से आगे बढ़ रहा है. अंतरिक्ष एजेंसी को उम्मीद है कि विक्रम लैंडर 23 अगस्त तक चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा.

चंद्रयान-3, इसरो का मानवरहित मून मिशन है. चंद्रयान-3 शनिवार को चंद्रमा की ऑर्बिट में दाखिल हुआ था. वहीं से चंद्रमा की तस्वीरें ली गई हैं. भारत के इस महत्वाकांक्षी मिशन पर दुनियाभर की नजरें टिकी हैं.

चंद्रयान-3 लॉन्च होने के 41 दिन बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंच रहा है. चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में पहुंच गया है. चांद के इस हिस्से तक, अभी तक कोई देश नहीं गया है.

 

 

Chandrayaan-3 Update : चंद्रमा की कक्षा में पहुंचते ही चंद्रयान-3 ने भेजा पहला संदेश

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Chandrayaan-3 Update: चंद्रयान-3 के सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में स्थापित होने के बाद अंतरिक्ष में भारत धमक बढ़ गयी है. अब चंद्रमा की ऑर्बिट से बड़ी खबर सामने आयी है. चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करते ही चंद्रयान 3 का पहला मैसेज इसरो (ISRO) मिल गया है. मैसेज में है कि “MOX, ISTRAC, मैं चंद्रयान-3 हूं. मुझे चंद्रमा की ग्रैविटी महसूस हो रही है.”


 इस मैसेज के बाद मिशन चंद्रयान 3 सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है. बता दें कि बीते दिन शनिवार को चंद्रयान 3 ने सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर लिया था. यहां तक पहुंचने के लिए इस मिशन में अभी तक 22 दिन का समय लगा है.

मिशन चंद्रयान 3 ने अभी तक 3 लाख 84 हजार 400 किलोमीटर की दूरी तय कर ली है. शनिवार को चंद्रयान 3 ने धरती की ग्रैविटी से बाहर निकलकर चांद की ऑर्बिट में एंट्री कर ली है. इसरो के वैज्ञानिकों ने बताया है कि इस प्रोसेस को अंजाम देने में कुल आधे घंटे का समय लगा और चंद्रयान को चंद्रमा की कक्षा में पहुंचा दिया गया.

चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश करने के बाद चंद्रयान-3 को चरणबद्ध तरीके से चंद्रमा के पास ले जाया जाएगा. मिशन चंद्रयान-3 को अभी चंद्रमा के चार और ऑबिटों को पार करना है. ऐसा करने में उसे अभी 17 दिन और लग जाएंगे. इसके बाद वह चंद्रमा के पास जा पहुंचेगा. ISRO के मुताबिक, चंद्रयान 3 की सॉफ्ट लैडिंग का लक्ष्य 23 अगस्त तक रखा गया है. अगर सब सही चलता रहा तो तय समय पर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग कराई जा सकेगी.


Chandrayaan-3 Mission: चंद्रमा की ऑर्बिट में पहुंचा हमारा चंद्रयान-3

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Chandrayaan-3 Mission:  देश का महत्‍वाकांक्षी चंद्रयान मिशन  लगातार अपने लक्ष्‍य की ओर बढ़ता जा रहा है. शनिवार को चंद्रयान-3  सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया गया. इसरो (Indian Space Research Organization) ने अपने एक ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी है. एजेंसी ने अपने बयान में कहा, "चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक चंद्रमा की कक्षा में स्थापित कर दिया गया है. मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स (एमओएक्स), आईस्ट्रैक (इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क), बेंगलुरु से पेरिल्यून पर रेट्रो-बर्निंग का आदेश दिया गया था." पेरिल्यून अंतरिक्ष यान का चंद्रमा से निकटतम बिंदु है.



इसरो की ओर से कहा गया कि कक्षा में दूरी कम करने का ऑपरेशन रविवार को रात 11 बजे किया जाएगा .




इसरो ने अपने केंद्रों को उपग्रह से प्राप्‍त एक संदेश भी साझा किया, जिसमें लिखा था, "MOX, ISTRAC, यह चंद्रयान-3 है. मैं चंद्र गुरुत्वाकर्षण महसूस कर रहा हूं." 14 जुलाई को लॉन्च के बाद से तीन हफ्तों में पांच से अधिक परिवर्तन में, इसरो चंद्रयान -3 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी से दूर और दूर की कक्षाओं में ले जा रहा है.




चंद्रयान-3 ने पूरी की दो-तिहाई यात्रा, ISRO बोला- काफी अहम है कल का दिन

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Chandrayaan-3 : 5 अगस्त 2023 यानी चंद्रयान-3 के लिए परीक्षा की घड़ी . इसरो ने आज बताया है कि चंद्रयान-3 ने चंद्रमा की ओर दो-तिहाई यात्रा  पूरी कर ली है. वो चांद के करीब पहुंच रहा है. करीब 40 हजार किलोमीटर की दूरी पर चंद्रमा की ग्रैविटी  उसे अपनी ओर खींचेगी. चंद्रयान-3 भी चांद के ऑर्बिट को पकड़ने का प्रयास करेगा.


चंद्रयान-3 के लिए कल का दिन बेहद जरूरी है. इसरो वैज्ञानिकों  ने भरोसा दिलाया है कि वो चंद्रयान-3 को चंद्रमा के ऑर्बिट में डालने में कामयाब होंगे. 5 अगस्त की शाम करीब सात बजे के आसपास चंद्रयान-3 का लूनर ऑर्बिट इंजेक्शन कराया जाएगा. यानी चांद के पहले ऑर्बिट में डाला जाएगा. 6 अगस्त की रात 11 बजे के आसपास चंद्रयान को चांद के दूसरे ऑर्बिट में डाला जाएगा. 9 अगस्त की दोपहर पौने दो बजे के आसपास तीसरी ऑर्बिट मैन्यूवरिंग होगी. 14 अगस्त को दोपहर 12 बजे के आसपास चौथी और 16 अगस्त की सुबह साढ़े आठ बजे के आसपास पांचवां लूनर ऑर्बिट इंजेक्शन होगा. 17 अगस्त को प्रोपल्शन मॉड्यूल और लैंडर मॉड्यूल अलग होंगे.

17 अगस्त को ही चंद्रयान को चांद की 100 किलोमीटर ऊंचाई वाली गोलाकार कक्षा में डाला जाएगा. 18 और 20 अगस्त को डीऑर्बिटिंग होगी. यानी चांद के ऑर्बिट की दूरी को कम किया जाएगा. लैंडर मॉड्यूल 100 x 30 किलोमीटर के ऑर्बिट में जाएगा. इसके बाद 23 की शाम पांच बजकर 47 मिनट पर चंद्रयान की लैंडिंग कराई जाएगी. लेकिन अभी 19 दिन की यात्रा बची है. चंद्रयान के सामने कुछ दिक्कतें आ सकती हैं… जानिए क्या हैं वो. चंद्रयान-3 के चारों तरफ सुरक्षा कवच लगाया गया है. जो अंतरिक्ष में प्रकाश की गति से चलने वाले सबएटॉमिक कणों से बचाते हैं. इन कणों को रेडिएशन कहते हैं. एक कण जब सैटेलाइट से टकराता है, तब वह टूटता है. इससे निकलने वाले कण सेकेंडरी रेडिएशन पैदा करते हैं. इससे सैटेलाइट या स्पेसक्राफ्ट के शरीर पर असर पड़ता है.

हमारे सूरज से निकलने वाले चार्ज्ड पार्टिकल्स स्पेसक्राफ्ट को खराब या खत्म कर सकते हैं. तेज जियोमैग्नेटिक तूफान से स्पेसक्राफ्ट पर नुकसान पहुंचता है. लेकिन चंद्रयान-3 को सुरक्षित बनाया गया है. इसके चारों तरफ खास तरह का कवच लगा है जो इसे बचाता है. अंतरिक्ष की धूल. यानी स्पेस डर्स्ट. इन्हें कॉस्मिक डस्ट भी बुलाते हैं. ये स्पेसक्राफ्ट से टकराने के बाद प्लाज्मा में बदल जाते हैं. ऐसा तेज गति और टक्कर की वजह से होता है. इनकी वजह से अंतरिक्षयान खराब भी हो सकता है.

किसी भी इंसानी सैटेलाइट या अंतरिक्ष के पत्थरों से टक्कर भी खतरनाक है. पिछले कुछ सालों में धरती के चारों तरफ सैटेलाइट्स की संख्या बढ़ गई है. खास तौर से वो सैटेलाइट्स जो अब निष्क्रिय हैं, लेकिन अंतरिक्ष में पृथ्वी के चारों तरफ तेज गति से चक्कर लगा रही हैं. लेकिन चंद्रयान-3 ने यह इलाका पार कर लिया है. यह खतरा 230 किलोमीटर के ऑर्बिट में था, जो अब वह पार कर चुका है. अगर सैटेलाइट या स्पेसक्राफ्ट या अपना चंद्रयान-3 किसी भी तरह से गलत ऑर्बिट में चला जाए तो उसे सही करने में काफी समय, क्षमता और ताकत लगती है. ऐसा करते समय मिशन के पूरे टाइम टेबल और लागत पर असर पड़ता है. ईंधन कम हो जाता है. ऐसे में मिशन जल्दी खत्म होता है. अगर पकड़ में नहीं आया तो अंतरिक्ष में लापता हो जाता है.

चंद्रयान-3 इतनी लंबी यात्रा के दौरान तेज गति, घटता-बढ़ता तापमान, रेडिएशन सब बर्दाश्त कर रहा है. ये सब यान के अंदरूनी हिस्सों पर असर डाल सकते हैं लेकिन उसे खास धातुओं से बनाया गया है. खास कवच लगा है, जो इन दिक्कतों से चंद्रयान को बचा रहा है. लेकिन इनकी वजह से पेलोड्स या यंत्र खराब हो सकते हैं. जिससे उनका धरती से संपर्क टूट सकता है. कोई एक या कई हिस्से काम करना बंद कर सकते हैं. अंतरिक्ष में दिन में तापमान 100 डिग्री सेल्सियस के ऊपर जा सकता है. वहीं, रात में पारा माइनस 100 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है. अगर चंद्रयान-3 या अन्य सैटेलाइट का शरीर इतने वैरिएशन वाले तापमान को बर्दाश्त नहीं कर पाता है, तो खराब हो सकता है.


Chandrayaan 3 Mission: चंद्रयान-3 चंद्रमा की कक्षा से अब कितने कदम दूरन जानें !

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Chandrayaan 3 Mission: चंद्रयान-3 जो मंगलवार तड़के पृथ्वी की कक्षा से घूमने की सफल प्रक्रिया के बाद चांद की अगले चरण की यात्रा पर निकल गया है. वह अब एक पथ का अनुसरण करेगा जो इसे चंद्रमा के आसपास ले जाएगा. चंद्रमा की पांच दिवसीय यात्रा मंगलवार सहित 5 अगस्त को इसरो द्वारा अंतरिक्ष यान को अंडाकार चंद्र कक्षा में स्थापित करने के साथ समाप्त होगी.  


TOI के अनुसार ISRO ने कहा, ‘मंगलवार के पेरिगी बर्न ने चंद्रयान -3 की कक्षा को सफलतापूर्वक 288 किमी x 3.7 लाख किमी तक बढ़ा दिया है. इस कक्षा में अंतरिक्ष यान चंद्रमा के प्रभाव क्षेत्र में प्रवेश करता है. रिल्यून में एक महत्वपूर्ण पैंतरेबाजी से चंद्र कक्षा इंजेक्शन (LOI) हासिल किया जाएगा.  इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा, ‘अब तक सब कुछ योजना के अनुसार हुआ है और इसे 100 किलोमीटर की गोलाकार कक्षा में ले जाने के लिए 5 अगस्त को एलओआई सहित पांच चंद्र-बाउंड अभ्यास होंगे.

’ चंद्रयान-3, जो वर्तमान में ट्रांस-चंद्र कक्षा में है, चंद्रमा से लगभग 40,000 किमी की दूरी पर पहुंचने पर चंद्र गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव का अनुभव करना शुरू कर देगा और LOI के माध्यम से चंद्र कक्षा में स्थापित किया जाएगा. यह ऑपरेशन 20-25 मिनट का होने की उम्मीद है.  जबकि ट्रांस-लूनर इंजेक्शन (TLI), मंगलवार को किया गया 20-21 मिनट का ऑपरेशन और 5 अगस्त एलओआई के बीच कोई नियोजित अभ्यास नहीं है.

 यदि इसरो को अंतरिक्ष यान के अभिविन्यास या वेग को बदलने की आवश्यकता है तो वह ‘TLI सुधार’ कर सकता है. चंद्रयान-2 को ऐसे एक से अधिक छोटे सुधारों की आवश्यकता थी.

Chandrayaan-3 : धरती की कक्षा से निकल अब चांद की सैर करेगा चंद्रयान-3, जानें कब होगी एंट्री

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 Chandrayaan-3 : चंद्रयान-3  अब चांद की कक्षा में पहुंचने से महज 6 दिन दूर है. इसरो ने चंद्रयान-3 को पृथ्वी की कक्षा से चंद्रमा की कक्षा में भेजने के लिए 1 अगस्त को 12 बजे से 1 बजे के बीच उसके थ्रस्टर्स को चालू करने की योजना बनाई गई है. मध्यरात्रि में ट्रांस-लूनर इंजेक्शन की प्रक्रिया को पूरा होने में 28 से 31 मिनट के बीच का समय लगने की उम्मीद है. चंद्रयान-3 के ऑनबोर्ड थ्रस्टर्स को तब फायर किया जाएगा, जब चंद्रयान-3 पृथ्वी के निकटतम बिंदु पर होगा, न कि तब जब सबसे दूर के बिंदु पर होगा. 


चंद्रयान-3 के थ्रस्टर्स को चालू करके उसकी रफ्तार बढ़ाने की कोशिश, उसके धरती के सबसे करीब बिंदु से इसलिए की जाती है क्योंकि तब उसकी गति सबसे ज्यादा होती है. चंद्रयान-3 मौजूदा वक्त में 1 किमी/सेकंड और 10. 3 किमी/सेकंड के बीच के वेग से एक अण्डाकार कक्षा में पृथ्वी के चारों ओर घूम रहा है. चंद्रयान-3 का वेग धरती के सबसे करीबी बिंदु पर सबसे ज्यादा (10.3 किमी/सेकंड) और धरती से सबसे दूर बिंदु पर सबसे कम होता है. चंद्रयान-3 की रफ्तार को बढ़ाने की कोशिश करते समय उसको तेज रफ्तार की जरूरत होगी. दूसरा कारण यह है कि चंद्रमा की ओर बढ़ने के लिए इसके कोण को बदलना होगा. जिसे चंद्रयान-3 के धरती के सबसे करीबी बिंदु पर बदला जा सकता है.

ट्रांस-लूनर इंजेक्शन के लिए पहले से तैयार और लोड किए गए कमांड, थ्रस्टर्स के चालू होने की उम्मीद के समय से लगभग पांच-छह घंटे पहले शुरू किए जाएंगे. इससे चंद्रमा की ओर बढ़ने के लिए चंद्रयान-3 को अपना कोण बदलने में मदद मिलेगी. इसके अलावा थ्रस्टर्स की फायरिंग से इसकी रफ्तार भी बढ़ेगी. टीएलआई के बाद चंद्रयान-3 का वेग पेरिगी की तुलना में लगभग 0.5 किमी/सेकंड अधिक होने की उम्मीद है. चंद्रयान-3 को औसतन 1. 2 लाख किलोमीटर का सफर तय करने में करीब 51 घंटे का समय लगता है. जबकि पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की औसत दूरी 3.8 लाख किमी है. बहरहाल किसी भी दिन वास्तविक दूरी पृथ्वी और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर अलग होगी.




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