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सीजी पीएससी द्वारा एस आई भर्ती परीक्षा,सोशल मीडिया पर अभ्यर्थियों के नामों को लेकर फैलाई जा रही अफवाहें

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केवल छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें

रायपुर- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) द्वारा गृह (पुलिस) विभाग के अंतर्गत आयोजित सूबेदार, उप-निरीक्षक (SI) संवर्ग और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2024 के प्रारंभिक लिखित परीक्षा परिणाम 04 अगस्त 2026 को घोषित किए गए। परिणाम जारी होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर अभ्यर्थियों के नामों को लेकर भ्रामक व तथ्यहीन जानकारियां प्रसारित की जा रही हैं।

अभ्यर्थियों के वही नाम प्रदर्शित किए गए हैं जो ऑनलाइन आवेदन पत्र में दर्ज है

सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स (रील्स और शॉर्ट्स वीडियो) पर कुछ अभ्यर्थियों के नामों को लेकर उनका उपहास उड़ाया जा रहा है और परीक्षा परिणाम की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने सोशल मीडिया पर चल रही इन रील्स और वीडियो में प्रदर्शित दावों का सख्ती से खंडन किया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा परिणाम में अभ्यर्थियों के वही नाम प्रदर्शित किए गए हैं, जो उन्होंने स्वयं अपने ऑनलाइन आवेदन पत्र में दर्ज कर अंतिम रूप से सबमिट किए थे। इन्हीं नामों के आधार पर अभ्यर्थियों का दस्तावेज़ सत्यापन, शारीरिक परीक्षण (PST) और प्रारंभिक लिखित परीक्षा संपन्न हुई थी।

अभ्यर्थियों के प्रवेश-पत्र (Admit Card) में भी यही नाम अंकित थे

अभ्यर्थियों के प्रवेश-पत्र (Admit Card) में भी यही नाम अंकित थे। इन्हीं नामों के आधार पर अभ्यर्थियों का दस्तावेज़ सत्यापन किया गया। अवर सचिव छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग ने सभी अभ्यर्थियों और जनसामान्य से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही ऐसी किसी भी असत्य, भ्रामक और तथ्यहीन जानकारी या अफ़वाहों पर विश्वास न करें। परीक्षा से जुड़ी किसी भी अधिकृत जानकारी के लिए केवल छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करें।

झारखंड में भर्ती परीक्षा विवाद को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज, पारदर्शी जांच और परीक्षा रद्द करने की मांग

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झारखंड में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। राजधानी रांची सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों अभ्यर्थी कई दिनों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा है, जिससे योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग है कि 14वीं JPSC संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित किया जाए। साथ ही, परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से निष्पक्ष जांच कराई जाए। छात्रों का कहना है कि केवल इस परीक्षा ही नहीं, बल्कि राज्य की अन्य भर्ती परीक्षाओं में भी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधार आवश्यक हैं।

इस मुद्दे ने अब राजनीतिक स्वरूप भी ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों और नेताओं ने भी कथित परीक्षा अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन करते हुए CBI जांच की मांग की है। वहीं, विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी छात्रों के आंदोलन को समर्थन मिलने लगा है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता की व्यापक मांग का प्रतीक बनता जा रहा है। यदि सरकार और संबंधित आयोग समय रहते प्रभावी कदम उठाते हैं, तो इससे युवाओं का भर्ती प्रणाली पर विश्वास मजबूत हो सकता है। वहीं, लंबा गतिरोध राज्य में प्रशासनिक और राजनीतिक चुनौतियों को भी बढ़ा सकता है।

लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए संशोधन विधेयक 2026 पेश, सजा और जुर्माने होंगे और कड़े

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नई दिल्ली- केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि यह विधेयक परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाने और देश के विद्यार्थियों एवं युवाओं के हितों की रक्षा के लिए कानूनी व्यवस्था को और मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि यह विधेयक छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प को दर्शाता है कि देश के युवाओं के सपनों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने इसे भारत की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले कई वर्षों में विभिन्न राज्यों में प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों की घटनाओं ने एक व्यापक राष्ट्रीय कानून की आवश्यकता को उजागर किया। इसी उद्देश्य से वर्ष 2024 में सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया गया था, जो इस तरह की अनियमितताओं से निपटने वाला देश का पहला व्यापक कानून है। अब इसके क्रियान्वयन के अनुभव के आधार पर इसे और अधिक सख्त तथा प्रभावी बनाने के लिए संशोधन प्रस्तावित किया गया है।

उन्होंने बताया कि यह कानून यूपीएससी (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRBs), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS) तथा उच्च शिक्षा प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन करने वाली राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जैसी प्रमुख संस्थाओं द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर लागू होता है। वर्ष 2024 के कानून में ऐसे अपराधों को संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-समझौतायोग्य बनाया गया था।

संशोधन विधेयक के प्रमुख प्रावधान

  • परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए सजा 3–5 वर्ष से बढ़ाकर 5–10 वर्ष करने का प्रस्ताव।

  • अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव।

  • दोषी सेवा प्रदाताओं (Service Providers) पर अधिकतम जुर्माना 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये तथा सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन से प्रतिबंध की अवधि 4 वर्ष से बढ़ाकर 8 वर्ष करने का प्रस्ताव।

  • सेवा प्रदाताओं के निदेशकों और वरिष्ठ प्रबंधन के लिए सजा 5–10 वर्ष तथा अधिकतम जुर्माना 5 करोड़ रुपये तक करने का प्रस्ताव।

  • संगठित परीक्षा अपराधों के मामलों में सजा 7–10 वर्ष तथा अधिकतम जुर्माना 10 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का प्रावधान।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है। विधेयक के अनुसार जांच दो महीने के भीतर पूरी होगी और आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा किया जाएगा। साथ ही, केंद्र सरकार को ऐसे मामलों की जांच विशेष कार्यबल (Special Task Force) को सौंपने का अधिकार भी दिया गया है।

उन्होंने सदन को बताया कि सरकार कई स्थानों पर विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली को "लीक-प्रूफ" बनाने के लिए गठित उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का भी उल्लेख किया और कहा कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने संबंधी समिति की सिफारिशों को लागू करने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

अपने संबोधन के अंत में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रस्तावित संशोधन संगठित परीक्षा अपराधों पर प्रभावी रोक लगाएंगे, त्वरित न्याय सुनिश्चित करेंगे तथा देश की सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता में जनता का विश्वास और मजबूत करेंगे।

साय सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत त्वरित कार्रवाई,दिवंगत आरक्षक के परिवार से 19 लाख की वसूली मामले में थाना प्रभारी गिरफ्तार

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एक करोड़ के बीमा दावे में कथित हेराफेरी का मामला

धमकी देकर आधी राशि मांगने का आरोप

रायपुर- छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के खिलाफ राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत नारायणपुर में एक गंभीर मामले में त्वरित कार्रवाई की गई है। सड़क दुर्घटना में दिवंगत डीएसएफ आरक्षक स्व.धनेश्वर नुरेटी की पत्नी को मिले एक करोड़ रुपये के दुर्घटना बीमा दावे में कथित अनियमितता और अवैध वसूली के आरोपों पर पुलिस ने तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले में एक अधिवक्ता पर भी गंभीर आरोप लगे हैं, जिसकी तलाश जारी है।

पुलिस के अनुसार डीएसएफ आरक्षक स्व.धनेश्वर नुरेटी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु के बाद उनकी पत्नी के बैंक खाते में भारतीय स्टेट बैंक के वेतन पैकेज के अंतर्गत एक करोड़ रुपये की दुर्घटना बीमा राशि प्राप्त हुई थी। आरोप है कि तत्कालीन थाना प्रभारी सुरेश चंद्र यादव और अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा ने बीमा राशि दिलाने के नाम पर मृतक के परिजनों से 19 लाख रुपये ले लिए।

इतना ही नहीं आरोपियों ने कथित रूप से शेष बीमा राशि में भी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी की मांग की। परिजनों द्वारा इसका विरोध करने पर उन्हें कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराने, कानूनी कार्रवाई में फंसाने और लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की धमकी दी गई। आरोपियों की लगातार अतिरिक्त रकम की मांग से परेशान होकर मृतक आरक्षक के परिजनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय, नारायणपुर में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर थाना कोतवाली नारायणपुर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318, 308 एवं अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। इसके बाद आरोपी सुरेश चंद्र यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। वहीं सह-आरोपी अधिवक्ता कृष्ण कुमार वर्मा की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। प्रकरण में आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है।

वास्तव में आरोपियों के विरुद्ध यह कार्रवाई भ्रष्टाचार और कदाचार के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून का पालन कराने वाले तंत्र में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध वसूली, भ्रष्टाचार अथवा किसी भी प्रकार की अनियमितता में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।आम नागरिकों का विश्वास बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

छत्तीसगढ़ में ​सरकारी विज्ञापन के लिए अब नए प्रारूप में ही करना होगा आवेदन, नियमों का उल्लंघन पड़ेगा भारी

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नवा रायपुर- छत्तीसगढ़ जनसंपर्क संचालनालय ने पाक्षिक, मासिक, द्विवार्षिक, वार्षिक समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं को सरकारी प्रदर्शन विज्ञापन जारी करने के संबंध में नए और कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब विज्ञापन पाने के लिए प्रकाशकों को निर्धारित प्रारूप में और लेटर पैड पर ही आवेदन करना होगा। किसी भी अन्य प्रारूप या अधूरी जानकारी वाले आवेदन को सीधे तौर पर खारिज कर दिया जाएगा।  सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सब्जी बेचने वाले और कबाड़ी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े व्यवसायी भी खुद को पत्रकार बताकर लंबे अर्से से सरकार को चूना लगा रहे थे, जिसे रोकने और व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सरकार और जनसंपर्क विभाग की ओर से सख्त कदम उठाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि जनसंपर्क विभाग के विभागीय मंत्री मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हैं।


एक परिवार, एक ही विज्ञापन 

​नए नियमों के मुताबिक, एक आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के केवल एक ही प्रकाशन को सरकारी विज्ञापन का लाभ मिल सकेगा। यदि किसी ने गलत जानकारी देकर एक से अधिक प्रकाशनों के लिए विज्ञापन लिया, तो दी गई राशि वापस वसूल की जा सकेगी। साथ ही, उस प्रकाशन को भविष्य में हमेशा के लिए विज्ञापनों से वंचित (ब्लैकलिस्ट) किया जा सकता है।  

सोशल मीडिया और RNI/PRGI की जानकारी देना अनिवार्य 

​पारदर्शिता बढ़ाने और सुदृढ़ व्यवस्था के लिए विभाग ने अब प्रकाशन के डिजिटल मौजूदगी को भी अनिवार्य किया है। आवेदकों को अपने फेसबुक, ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम अकाउंट के नाम के साथ फॉलोअर्स की सही संख्या बतानी होगी। इसके अलावा, यह लिखित में देना होगा कि पत्रिका का टाइटल RNI/PRGI (रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया) की 'डिफन्क्ट' (निष्क्रिय) सूची में शामिल नहीं है। आर.एन.आई. द्वारा केवल शीर्षक सत्यापन के आधार पर विज्ञापन नहीं मिलेगा। अर्थात पंजीकरण का पुख्ता प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।

मूल हस्ताक्षर, प्रमाणीकरण और दस्तावेज जरूरी 

​आवेदन पत्र के साथ सभी जरूरी दस्तावेज संलग्न करने होंगे। ध्यान रहे कि आवेदन पर सभी पदमुद्रा (सील) और हस्ताक्षर मूल (ओरिजनल) होने चाहिए; फोटोकॉपी बिल्कुल मान्य नहीं होगी। अन्य प्रान्तों के प्रकाशन द्वारा ईमेल आदि पर भेजे जाने वाले आवेदन स्वीकार्य नहीं किया जाएगा। 

आवेदन के साथ ये 5 दस्तावेज लगाना जरूरी है:- 

विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आवेदन के प्रारूप के साथ ही निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है। 

1. ​स्व-हस्ताक्षरित RNI/PRGI पंजीयन प्रमाण-पत्र

2. ​जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी नियमित प्रकाशन का प्रमाण-पत्र

3. ​DAVP, ABC या CA द्वारा जारी प्रसार संख्या (सर्कुलेशन) का प्रमाण-पत्र

4. ​यदि DAVP दर लागू हो, तो उसकी छायाप्रति

5. ​पत्रिका के नवीनतम अंक की मूल प्रति

कॉपीराइट और प्रिंटिंग को लेकर सख्त हिदायत 

​संपादक और मुद्रक (प्रिंटर) को आवेदन के साथ स्व-प्रमाण पत्र देना होगा, जिसमें इन बातों की कड़ाई से पुष्टि करनी होगी कि- 

​ सामग्री मौलिक हो: प्रकाशित समाचार और लेख स्वयं के स्रोत से होने चाहिए और उन पर 'बायलाइन' होनी चाहिए।  

​ क्रेडिट लाइन जरूरी: अन्य स्रोतों से ली गई खबरों पर संबंधित स्रोत को क्रेडिट देना अनिवार्य है। भारतीय कॉपीराइट एक्ट 1957 की धारा 51 का किसी भी हाल में उल्लंघन न हो।  

 ​नो अल्टर/डिजिटल प्रिंट: पत्रिका में किसी भी तरह के 'अल्टर मुद्रण' या 'डिजिटल प्रिंट' का उपयोग नहीं होना चाहिए। मुद्रक को प्रतियों की सटीक संख्या की घोषणा करनी होगी।  

​नियमों का पालन न करने वाले प्रकाशकों के आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।  

सख्ती से मचा हड़कंप 

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नए और सख्त नियमों से ऐसे प्रकाशन की छटनी हो जाएगी, जो फर्जीवाड़ा करके विज्ञापन ले रहे हैं। बताया गया है कि कुछ लोग इसके लिए रैकेट चला रहे हैं। अपने करीबी लोगों, रिश्तेदारों के नाम पर पंजीयन कराकर विज्ञापन ले रहे हैं, जिनका पत्रकारिता से दूर-दूर तक नाता नहीं है। 

विभाग की इस सख्ती से ऐसे लोगों में हड़कंप मच गया है, जो कथित प्रकाशन के नाम पर विभाग को लंबे अर्से से चूना लगाते आ रहे हैं। 

देखिये- आवेदन पत्र का प्रारूप




मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त तेवर से खनिज माफियाओं पर शिकंजा

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बीते दो माह में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के 1747 प्रकरण दर्ज 

6.49 करोड़ रुपये से अधिक की दाण्डिक राशि वसूल

बलौदाबाजार में अवैध उत्खनन, जांजगीर-चांपा में अवैध परिवहन और रायपुर में अवैध भंडारण के सबसे ज्यादा मामले

अवैध खनन पर डबल वार, ताबड़तोड़ कार्रवाई के साथ जुर्माना भी कई गुना बढ़ा

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख का असर अब खनिज माफियाओं पर साफ दिखाई देने लगा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्यभर में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य में अप्रैल और मई 2026 के दौरान उक्त कार्रवाई के तहत 1,747 प्रकरण दर्ज कर 6 करोड़ 49 लाख 50 हजार 903 रुपये से अधिक की दाण्डिक राशि वसूल की गई है। 

अभियान के दौरान सबसे अधिक 1,487 मामले अवैध परिवहन के सामने आए, जबकि 231 प्रकरण अवैध उत्खनन और 29 मामले अवैध भंडारण के दर्ज किए गए। इससे यह पता चलता है कि सरकार ने खनिजों की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर कड़ी निगरानी रखते हुए कार्रवाई तेज कर दी है। 

अवैध उत्खनन के मामलों में बलौदाबाजार-भाटापारा जिला सबसे ऊपर रहा है, जहां 44 प्रकरण दर्ज किए गए। इसके बाद रायपुर में 15 तथा कबीरधाम में 14 और बालोद में 14 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। दूसरी ओर, अवैध परिवहन के सबसे अधिक रायपुर में 173 मामले दर्ज हुए। इसके बाद जांजगीर-चांपा में 162, बिलासपुर में 101 और धमतरी में 101 मामले पकड़ में आए हैं। अवैध भंडारण के सर्वाधिक 8 प्रकरण रायपुर में दर्ज किए गए, जबकि दंतेवाड़ा में 4 तथा कांकेर में 3 और बिलासपुर में 3 मामले पकड़ाए हैं। 

अवैध उत्खनन में सबसे अधिक 55.32 लाख रुपये की दाण्डिक राशि दंतेवाड़ा जिले में वसूल की गई है। अवैध परिवहन में सर्वाधिक 54.69 लाख रुपये रायपुर से वसूले गए, जबकि अवैध भंडारण में भी सबसे अधिक 12.58 लाख रुपये की दाण्डिक राशि रायपुर में वसूली गई। इस प्रकार कुल दांडिक राशि की वसूली के मामले में रायपुर जिला पूरे प्रदेश में सबसे आगे रहा है। 

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में अब अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण करना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सख्त प्रशासनिक रुख के चलते सरकार ने एक ओर राज्यभर में खनिज माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान छेड़ रखा है, वहीं दूसरी ओर नियमों में बदलाव कर जुर्माने और दण्ड के प्रावधान भी पहले से कहीं अधिक कठोर कर दिए हैं। मुख्यमंत्री साय का कहना है कि राज्य के खनिज संसाधनों की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

गौण खनिज नियमों में संशोधन के बाद अब किसी भी मामले में समझौता (प्रशमन) राशि 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध परिवहन पर प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से प्रशमन शुल्क के साथ-साथ खनिज का पूरा मूल्य भी अलग से वसूला जाएगा। ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का जुर्माना और रेत का मूल्य देना होगा। जब्त वाहन, मशीन या उपकरण की सुपुर्दगी से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन की श्रेणी के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी, इसके बाद ही वाहन छोड़ा जाएगा।

सुशासन तिहार के तहत प्राप्त आवेदनों का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ करें निराकरण: प्रमुख सचिव बोरा

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सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक दृष्टि से प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला है दुर्ग, विभागीय समन्वय से दुर्ग बने मॉडल जिला

रायपुर- प्रमुख सचिव एवं दुर्ग जिले के प्रभारी सचिव सोनमणि बोरा ने आज दुर्ग जिले के अधिकारियों की बैठक लेकर शासन की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने बैठक में शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान पर विशेष जोर दिया। लोक निर्माण विभाग कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि दुर्ग जिला सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक दृष्टि से प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला रहा है, इसलिए इसकी पहचान को बनाए रखते हुए अधिकारी बेहतर तालमेल के साथ कार्य करें। उन्होंने विभागीय समन्वय से दुर्ग जिले के मॉडल जिले के रूप में विकसत करने पर बल दिया। 

प्रमुख सचिव बोरा ने समीक्षा बैठक में कहा कि आमजनों को विभागीय सेवाओं का त्वरित लाभ मिले, यह अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शासन की महत्वाकांक्षी सुशासन तिहार के अंतर्गत शिविरों में प्राप्त आवेदनों का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। बैठक में कलेक्टर अभिजीत सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

शुद्ध पेयजल, नाला सफाई और पीएम आवास पर जोर

प्रभारी सचिव बोरा ने कहा कि ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए आमजनों के लिए शुद्ध पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित हो। साथ ही आवश्यकतानुसार टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बरसात पूर्व बड़े नालों सफाई कराने, अतिक्रमण हटाने तथा सैप्टिक टैंक सफाई में एसओपी का पालन करने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में स्वीकृत पीएम आवास निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने तथा हितग्राही सम्मेलन आयोजित कर लोगों को निर्माण के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया।

मनरेगा मजदूरी भुगतान शुरू, श्रमिकों तक जानकारी पहुंचाने के निर्देश

बैठक में मनरेगा की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि दुर्ग जिले में 14 जनवरी 2026 से लंबित लगभग 30 करोड़ 83 लाख रुपये की मजदूरी राशि शासन द्वारा स्वीकृत कर दी गई है और श्रमिकों के खातों में भुगतान शुरू हो गया है। प्रभारी सचिव ने सभी जनपद पंचायत सीईओ और रोजगार सहायकों को निर्देशित किया कि वे श्रमिकों से सीधे संपर्क कर मजदूरी भुगतान संबंधी जानकारी साझा करें तथा भुगतान से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें।

लखपति दीदी, स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी फोकस

बैठक में बताया गया कि एनआरएलएम के तहत जिले में 78 हजार 411 लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 37 हजार महिलाओं को “लखपति दीदी” बनाया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान प्रभारी सचिव ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, शिशु मृत्यु दर को शून्य करने तथा सभी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूलों और छात्रावासों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने तथा 16 जून तक सभी छात्रावासों में आवश्यक मरम्मत एवं सुधार कार्य पूर्ण कराने को कहा।

किसानों को पारदर्शिता के साथ खाद और बीज

कृषि विभाग को आगामी खरीफ सीजन के लिए उर्वरक वितरण की कार्ययोजना तैयार करने तथा पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंनेे कहा कि किसानों को पारदर्शिता के साथ खाद और बीज का वितरण किया जाए। रासायनिक खाद के कालाबाजारी करने वाले पर कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिए। वन विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत जिले में एक लाख 46 हजार पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित है। साथ ही चीचा और बेलौदी क्षेत्र को वेटलैंड घोषित किया गया है।

बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने पुलिस विभाग की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से दी। बैठक में वनमंडलाधिकारी दीपेश कपिल, एडीएम वीरेन्द्र सिंह, अपर कलेक्टर योगिता देवांगन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

प्रतिभा, पारदर्शिता और अवसर से ही बनेगा भारत वैश्विक खेल शक्ति, मजबूत खेल व्यवस्था से ही ओलंपिक में सफलता संभव : अरुण साव

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उप मुख्यमंत्री ने श्रीनगर में राष्ट्रीय खेल चिंतन शिविर में 'गुड गवर्नेंस इन स्पोर्ट्स' सत्र की अध्यक्षता की, छत्तीसगढ़ की खेल योजनाओं एवं भविष्य की रणनीतियों को किया साझा

केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय जल्दी ही युवा मामलों पर भी आयोजित करेगा विशेष चिंतन शिविर

रायपुर- केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्रालय द्वारा श्रीनगर में आयोजित खेल चिंतन शिविर के दूसरे दिन आज उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव ने 'गुड गवर्नेंस इन स्पोर्ट्स' (Good Governance in Sports) पर आयोजित सत्र की अध्यक्षता की। उन्होंने इस दौरान छत्तीसगढ़ की खेल योजनाओं एवं भविष्य की रणनीतियों पर बेस्ट प्रेक्टिसेस पर आधारित वीडियो प्रेजेंटेशन भी दिया। अरुण साव ने विभिन्न राज्यों से आए खेल मंत्रियों एवं अधिकारियों के समक्ष छत्तीसगढ़ में खेलों और खिलाड़ियों के विकास के लिए लागू बेस्ट गवर्नेंस प्रेक्टिसेस (Best Governance Practices) को विस्तार से साझा किया। उन्होंने विभिन्न राज्यों से सुझाव भी प्राप्त किए। चिंतन शिविर में शामिल अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ की भावी योजनाओं की सराहना करते हुए इसे एक प्रभावी मॉडल बताया।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय खेल चिंतन शिविर के दौरान दो दिनों तक विभिन्न राज्यों के खेल मंत्रियों एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से संवाद कर महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। उन्होंने खेलों को बढ़ावा देने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराते हुए छत्तीसगढ़ में बेहतर खेल अवसंरचना, प्रतिभा संवर्धन एवं खिलाड़ियों को अधिक अवसर प्रदान करने पर जोर दिया। 

अरुण साव ने कहा कि प्रतिभा, पारदर्शिता और अवसर से ही भारत वैश्विक खेल शक्ति बनेगा। मजबूत खेल व्यवस्था और प्रोत्साहन से ही देश को ओलंपिक खेलों में बड़ी सफलता मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह चिंतन शिविर छत्तीसगढ़ और पूरे देश में खेलों के समग्र विकास, सुदृढ़ खेल व्यवस्था के निर्माण तथा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए नई दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

चिंतन शिविर के दूसरे दिन भी आज अलग-अलग सत्रों में खेल प्रशासन, नीतिगत सुधार एवं युवा मामलों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। इस दौरान राज्यों में खेल सामग्रियों के निर्माण, सरकारी योजनाओं तथा स्पोर्ट्स स्टार्ट-अप्स (Sports Startups) को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई। इसमें यह बात प्रमुखता से आई कि भारत में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल उपकरणों का निर्माण किया जाए, जिससे देश का खेल उद्योग आत्मनिर्भर बन सके।

आज एक महत्वपूर्ण सत्र में सलेक्शन पॉलिसी और एज फ्रॉड (Selection Policy & Age Fraud) पर भी विशेष चर्चा हुई। इसमें खिलाड़ियों के चयन में पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं स्पष्ट मापदंड सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। साथ ही उम्र में गड़बड़ी (Age Fraud) की रोकथाम के लिए सख्त सत्यापन प्रक्रिया एवं तकनीकी उपाय अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि खेलों में ईमानदारी एवं विश्वसनीयता बनी रहे।

आज का अंतिम सत्र 'माई भारत' (MY Bharat) की योजनाओं और इसकी कार्ययोजना (Action Plan) पर केंद्रित रहा। इसमें खेलों के साथ-साथ युवा मामलों को भी समान महत्व देते हुए केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला गया। साथ ही योजनाओं के प्रभावी प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया, ताकि अधिक से अधिक युवाओं तक इनका लाभ पहुंच सके। 

चिंतन शिविर के समापन के दौरान केन्द्रीय युवा कार्य और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने घोषणा की कि जल्दी ही केवल युवा मामलों पर केंद्रित एक विशेष चिंतन शिविर का आयोजन किया जाएगा। दो दिवसीय चिंतन शिविर में देश के दिग्गज खिलाड़ी ओलंपियन अभिनव बिंद्रा, पुलेला गोपीचंद और गगन नारंग सहित खेल प्रशासक और नीति निर्माता भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

डिजिटल क्रॉप सर्वे से बढ़ी पारदर्शिता, 58 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को तकनीकी रूप से सशक्त और आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी एग्रीस्टेक परियोजना नई क्रांति का आधार बन रही है। इस परियोजना के अंतर्गत संचालित डिजिटल क्रॉप सर्वे (Digital Crop Survey) योजना ने राज्य में खेती-किसानी को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ते हुए पारदर्शिता और सटीकता बढ़ाने का कार्य किया है। मोबाइल ऐप आधारित इस सर्वे के जरिए खरीफ और रबी फसलों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जा रही है, जिससे कृषि प्रबंधन अधिक प्रभावी बन रहा है।

85 प्रतिशत खसरों का डिजिटल सत्यापन पूर्ण

खरीफ वर्ष 2025 के लिए 15 अगस्त 2025 से प्रारंभ किए गए डिजिटल क्रॉप सर्वे में राज्य के 33 जिलों के 18,008 गांवों के कुल 1 करोड़ 19 लाख 68 हजार 415 खसरों का सर्वेक्षण किया गया। इनमें से 1 करोड़ 18 लाख 07 हजार 537 खसरों को अनुमोदित किया गया है। इस प्रकार 85 प्रतिशत खसरों का डिजिटल सर्वे कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया है। वहीं, रबी फसल वर्ष 2026 का सर्वे 1 जनवरी 2026 से जारी है।

79 प्रतिशत किसानों की बनी फार्मर आईडी

एग्रीस्टेक परियोजना के तहत राज्य के कुल 40 लाख 08 हजार 908 किसानों में से 31 लाख 68 हजार 555 किसानों का सत्यापन कर फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी है। यह कुल किसानों का 79.22 प्रतिशत है। राज्य के उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने विशेष केंद्रीय सहायता योजना के अंतर्गत 104 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की है।

तकनीक से मजबूत होगा कृषि तंत्र

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर खेती को अधिक सक्षम और पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि एग्रीस्टेक परियोजना के माध्यम से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ शीघ्र मिलेगा तथा कृषि आंकड़ों का वैज्ञानिक प्रबंधन संभव होगा।

ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का नया अवसर

राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का नया माध्यम बन रहा है। उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन 2025-26 में 33 जिलों के 14,066 गांवों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण कार्य पूर्ण किया गया, जिसमें 58 हजार 335 ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को सर्वेयर के रूप में रोजगार मिला। इन युवाओं को इस कार्य के एवज में लगभग 12 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा।

साल में दो बार मिलेगा रोजगार

अब वर्ष में दो बार—खरीफ और रबी सीजन में—डिजिटल फसल सर्वे होने से ग्रामीण युवाओं को नियमित रोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और तकनीक आधारित कृषि प्रणाली को नई मजबूती मिलेगी।

सक्षम आंगनबाड़ी योजना में खरीदी केंद्र सरकार के प्रावधानों और राज्य के वित्तीय नियमों के तहत, पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन का पूरा ध्यान

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रायपुर- महिला एवं बाल विकास विभाग ने सक्षम आंगनबाड़ी योजना के तहत आंगनबाड़ियों में आरओ एवं एलईडी टीवी खरीदी को लेकर  विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि योजना से संबंधित सभी प्रक्रियाएं केंद्र सरकार के प्रावधानों और राज्य सरकार के वित्तीय नियमों के अनुरूप ही की जा रही हैं, जिससे किसी प्रकार के भ्रम की स्थिति नहीं है।

विभाग ने बताया कि पिछले दो वर्षों से बजट उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया गया, जो तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। वास्तविक स्थिति यह है कि 10 फरवरी 2026 को भारत सरकार से सक्षम आंगनबाड़ी योजना के लिए मदर सैंक्शन प्राप्त हुआ। यह केंद्र प्रवर्तित योजना है, इसलिए मदर सैंक्शन प्राप्त होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकती थी। मदर सैंक्शन से पहले टेंडर जारी न होने पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि एलईडी टीवी, आरओ प्यूरीफायर, वाल पेंटिंग और रेन वाटर हारवेस्टिंग के लिए राशि भारत सरकार द्वारा ही निर्धारित की गई है। इसके तहत एलईडी टीवी के लिए 25 हजार रुपये, आरओ प्यूरीफायर के लिए 10 हजार रुपये, वाल पेंटिंग के लिए 10 हजार रुपये और रेन वाटर हारवेस्टिंग के लिए 16 हजार रुपये की राशि तय की गई है।

तकनीकी स्पेसिफिकेशन को लेकर भी विभाग ने पूरी स्पष्टता रखी है। एलईडी टीवी के लिए न्यूनतम 32 इंच या उससे अधिक का प्रावधान विभागीय पत्र में उल्लेखित है और सभी खरीदी प्रक्रिया जेम पोर्टल के माध्यम से की जानी है।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सक्षम आंगनबाड़ी के उन्नयन से जुड़े सभी कार्य छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम, कोषालय संहिता, वित्तीय संहिता, एसएनए स्पर्श प्रणाली तथा शासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के तहत ही किए जा रहे हैं। विभाग ने यह भी कहा है कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन का पूरा ध्यान रखा जा रहा है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों का बेहतर उन्नयन सुनिश्चित हो सके।

डिजिटल युग में विज्ञापन में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी

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“विज्ञापन का उद्देश्य केवल पहुंच बढ़ाना नहीं, बल्कि विश्वास बनाना होना चाहिए,” सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव संजय जाजू ने आज मुंबई में आयोजित AdTrust Summit 2026 में मुख्य वक्तव्य देते हुए कहा। उन्होंने भारत में एक जिम्मेदार, पारदर्शी और विश्वसनीय विज्ञापन पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया, खासकर ऐसे समय में जब यह क्षेत्र तेजी से विस्तार और प्रभाव में बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का विकास जारी रहना चाहिए, लेकिन विशेष रूप से डिजिटल क्षेत्र में जवाबदेही भी जरूरी है। मंत्रालय का दृष्टिकोण विश्वास निर्माण, विकास को समर्थन और जिम्मेदारी सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

AdTrust Summit 2026 के पहले संस्करण का आयोजन एडवरटाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) द्वारा किया गया, जिसमें विज्ञापन, मीडिया, तकनीक और सरकार के प्रतिनिधियों ने जिम्मेदार विज्ञापन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। चर्चाओं का केंद्र उभरते रुझान, कानूनी ढांचे और नई तकनीकों का विज्ञापन प्रथाओं पर प्रभाव रहा।

संजय जाजू ने कहा कि विज्ञापन केवल एक व्यावसायिक गतिविधि नहीं है, बल्कि यह बाजारों को आकार देता है, ब्रांड बनाता है, उपभोक्ताओं को जानकारी देता है, संस्कृति को दर्शाता है और आकांक्षाओं को प्रभावित करता है। भारत जैसे तेजी से डिजिटल हो रहे देश में विज्ञापन नवाचार, आर्थिक गतिविधि, कंटेंट निर्माण और समावेशन का एक महत्वपूर्ण चालक बन गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब ब्रांड, स्टार्टअप, स्थानीय व्यवसायों और कंटेंट क्रिएटर्स को बड़े पैमाने पर दर्शकों तक पहुंचने में सक्षम बना रहे हैं।

हालांकि, उन्होंने डिजिटल विज्ञापन से जुड़े जोखिमों—जैसे वित्तीय धोखाधड़ी, भ्रामक निवेश प्रचार और फर्जी नौकरी के ऑफर—पर भी चिंता जताई, जो अक्सर कमजोर वर्गों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक अभिव्यक्ति अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा है, लेकिन भ्रामक और धोखेबाज विज्ञापनों को नियंत्रित किया जाना चाहिए।

सम्मेलन में एआई की भूमिका, डीपफेक, डार्क पैटर्न और एंटी-इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग जैसे उभरते मुद्दों पर भी चर्चा हुई। संजय जाजू ने विज्ञापनदाताओं से केवल पहुंच नहीं बल्कि विश्वसनीयता पर ध्यान देने का आग्रह किया और कंटेंट क्रिएटर्स व इन्फ्लुएंसर्स से प्रामाणिकता बनाए रखने तथा भ्रामक प्रचार से बचने की अपील की।

उन्होंने जिम्मेदार विज्ञापन के लिए पांच प्रमुख सिद्धांत भी बताए:

  1. सत्यता हर संचार में अनिवार्य होनी चाहिए

  2. विज्ञापन, प्रायोजन और प्रचार संबंधों में पारदर्शिता जरूरी है

  3. हर सामग्री के निर्माण और प्रस्तुति में जिम्मेदारी होनी चाहिए

  4. कमजोर वर्गों, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए

  5. जवाबदेही के साथ नवाचार, ताकि तकनीकी और रचनात्मक प्रगति विश्वास को मजबूत करे

इस अवसर पर संजय जाजू ने ASCI की सचिव जनरल एवं सीईओ मनीषा कपूर, मैडिसन के चेयरमैन सैम बलसारा, ASCI के चेयरमैन एवं पिडिलाइट इंडस्ट्रीज के एमडी सुधांशु वात्स, ASCI बोर्ड सदस्य प्रवीण त्रिपाठी तथा खैतान एंड कंपनी के पार्टनर्स ईशान जोहरी और तनु बनर्जी के साथ मिलकर “Ad Law Compendium” का शुभारंभ किया। यह विज्ञापन कानूनों और नियमों पर एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करेगा, जिससे उद्योग में जागरूकता और अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव ने विज्ञापन उद्योग के हितधारकों—ASCI नेतृत्व, मार्केटर्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और कानूनी विशेषज्ञों—के साथ एक बैठक भी की।

खाद्य तेल क्षेत्र में नियामक निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए सरकार के सख्त कदम

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भारत सरकार ने वनस्पति तेल उत्पाद, उत्पादन एवं उपलब्धता (नियमन) संशोधन आदेश, 2025 (VOPPA आदेश, 2025) के माध्यम से खाद्य तेल मूल्य श्रृंखला में नियामक निगरानी को और अधिक मजबूत किया है। संशोधित आदेश के तहत सभी खाद्य तेल निर्माताओं, प्रसंस्करणकर्ताओं, ब्लेंडरों एवं री-पैकर्स के लिए राष्ट्रीय एकल खिड़की प्रणाली (NSWS) तथा VOPPA पोर्टल (https://www.edibleoilindia.in) पर अनिवार्य पंजीकरण और उत्पादन, भंडारण एवं उपलब्धता से संबंधित विस्तृत मासिक विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया है।

संशोधित VOPPA आदेश, 2025 के अंतर्गत सभी पंजीकृत इकाइयों को कच्चे एवं परिष्कृत वनस्पति तेल, सॉल्वेंट-एक्सट्रैक्टेड तेल, मिश्रित तेल, वनस्पति घी, मार्जरीन तथा अन्य अधिसूचित उत्पादों के उत्पादन, भंडार, आयात, प्रेषण, बिक्री और उपभोग से संबंधित मासिक विवरण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा। इस ढांचे का उद्देश्य पारदर्शिता को बढ़ावा देना, डेटा-आधारित नीतिगत निर्णयों को सक्षम बनाना तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करना है।

देशव्यापी अनुपालन अभियान के तहत खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) द्वारा हरियाणा के करनाल और राजस्थान के जयपुर सहित विभिन्न स्थानों पर निरीक्षण अभियान चलाए गए। इन अभियानों के दौरान NSWS/VOPPA पंजीकरण की पुष्टि, मासिक विवरणों की समयबद्धता एवं शुद्धता का आकलन किया गया तथा खाद्य तेल उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ संवाद कर अनुपालन को प्रोत्साहित किया गया। यह पहल खाद्य तेल क्षेत्र की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।

प्रवर्तन के साथ-साथ विभाग द्वारा अनुपालन को सुगम बनाने के लिए क्षमता निर्माण गतिविधियाँ भी की जा रही हैं। इस क्रम में 30 जनवरी 2026 को RIC, जयपुर में एक कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें सटीक डेटा रिपोर्टिंग, NSWS पंजीकरण, VOPPA पोर्टल के उपयोग और समय पर मासिक विवरण दाखिल करने पर जोर दिया गया। इसी प्रकार की कार्यशालाएँ अन्य प्रमुख राज्यों में भी आयोजित की जाएंगी। इस पहल को आगे बढ़ाते हुए 16 फरवरी 2026 को राजकोट, गुजरात में तीसरी जागरूकता कार्यशाला आयोजित करने का प्रस्ताव है, क्योंकि इस क्षेत्र में खाद्य तेल प्रसंस्करण इकाइयों की संख्या अधिक है।

निरीक्षणों और उसके बाद की समीक्षाओं के आधार पर, विभाग ने कुछ बड़ी खाद्य तेल कंपनियों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notices) जारी किए हैं, जिन्होंने ईमेल और टेलीफोन के माध्यम से बार-बार स्मरण कराने के बावजूद अनिवार्य मासिक उत्पादन विवरण प्रस्तुत नहीं किए। इस प्रकार की चूक आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के अंतर्गत जारी VOPPA आदेश, 2025 का उल्लंघन है।

संबंधित इकाइयों को सूचित किया गया है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 6A के अंतर्गत उल्लंघन की स्थिति में निरीक्षण एवं जब्ती जैसी कार्रवाई की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, धारा 6B के अनुसार, किसी भी जब्ती आदेश से पूर्व संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना अनिवार्य है। इसी क्रम में, संबंधित इकाइयों को यह बताने के लिए सात दिन का समय दिया गया है कि उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों न की जाए।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि VOPPA ढांचे के अंतर्गत पंजीकरण न कराने वाली अथवा अनिवार्य विवरण दाखिल न करने वाली सभी इकाइयों को इसी प्रकार के कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे, ताकि पूरे क्षेत्र में समान और एकरूप अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। खाद्य तेल प्रसंस्करण इकाइयों में आवश्यकता के आधार पर निरीक्षण अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

सरकार ने प्रभावी नीतिगत निर्माण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के हित में खाद्य तेल क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और कड़े अनुपालन को सुनिश्चित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।


वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यूएमईईडी पोर्टल पर दो नए मॉड्यूल लॉन्च

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नई दिल्ली- वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी, जनोन्मुखी और जवाबदेह बनाने के निरंतर प्रयासों के तहत अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट (UMEED) केंद्रीय पोर्टल पर दो नए मॉड्यूल — सर्वे मॉड्यूल और वक्फ संपत्ति लीज प्रबंधन मॉड्यूल — को 30 जनवरी 2026 को लॉन्च किया।

इन मॉड्यूल्स का शुभारंभ डॉ. चंद्र शेखर कुमार, सचिव, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय द्वारा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया गया।

सर्वे मॉड्यूल वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण से संबंधित सूचनाओं के संग्रहण, प्रबंधन और अद्यतन के लिए एक व्यापक डिजिटल ढांचा प्रदान करता है, जिससे पोर्टल पर सटीक और अद्यतन डेटा उपलब्ध कराया जा सके।

वक्फ संपत्ति लीज प्रबंधन मॉड्यूल को वक्फ संपत्तियों से संबंधित लीज प्रक्रिया की संपूर्ण जानकारी को डिजिटल माध्यम से प्रबंधित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह मॉड्यूल लीज से जुड़ी प्रमुख जानकारियों जैसे लीज अवधि, लीज राशि और अन्य संबंधित विवरणों का सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी रिकॉर्ड रखने और निगरानी में सहायता करता है, जिससे जवाबदेही और निगरानी तंत्र और सुदृढ़ होगा।

इन मॉड्यूल्स का शुभारंभ मंत्रालय द्वारा डिजिटल गवर्नेंस उपकरणों के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाता है।

डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने सभी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों से इन मॉड्यूल्स के व्यापक कार्यान्वयन और पात्र लाभार्थियों के बीच इनके प्रति जागरूकता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

UMEED केंद्रीय पोर्टल, जिसका उद्घाटन केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा 6 जून 2025 को किया गया था, वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत वक्फ संपत्तियों की रीयल-टाइम अपलोडिंग, सत्यापन और निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच के रूप में कार्य करता है।

यह पोर्टल देशभर में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनभागीदारी को बढ़ावा देते हुए एक व्यापक परिवर्तन लाने का लक्ष्य रखता है।

पोर्टल की प्रमुख विशेषताओं में सभी वक्फ संपत्तियों का जियो-टैगिंग सहित डिजिटल इन्वेंट्री, ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र, पारदर्शी लीज एवं उपयोग ट्रैकिंग, जीआईएस मैपिंग और अन्य ई-गवर्नेंस टूल्स के साथ एकीकरण, तथा सत्यापित रिकॉर्ड और रिपोर्ट्स तक सार्वजनिक पहुंच शामिल है।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय देशभर में वक्फ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और राज्य वक्फ बोर्डों के साथ मिलकर निरंतर कार्य कर रहा है।

खाद्य तेल क्षेत्र में सख्त निगरानी: संशोधित VOPPA आदेश 2025 के तहत नियामक ढांचा मजबूत

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भारत सरकार ने वनस्पति तेल उत्पाद, उत्पादन एवं उपलब्धता (विनियमन) संशोधन आदेश, 2025 (VOPPA आदेश, 2025) के माध्यम से खाद्य तेल मूल्य श्रृंखला में नियामक निगरानी को और सुदृढ़ किया है। संशोधित आदेश के तहत सभी खाद्य तेल निर्माता, प्रोसेसर, ब्लेंडर एवं री-पैकर के लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) और VOPPA पोर्टल (www.edibleoilindia.in) पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, उत्पादन, भंडारण और उपलब्धता से संबंधित मासिक विवरण (रिटर्न) दाखिल करना भी अनिवार्य किया गया है।

मासिक रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य

संशोधित VOPPA आदेश, 2025 के अनुसार अब कंपनियों को उत्पादन, स्टॉक, आयात, प्रेषण, बिक्री और खपत से संबंधित मासिक रिटर्न दाखिल करने होंगे। इसमें कच्चा एवं परिष्कृत वनस्पति तेल, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टेड तेल, ब्लेंडेड ऑयल, वनस्पति घी, मार्जरीन तथा अन्य अधिसूचित उत्पाद शामिल हैं। यह व्यवस्था पारदर्शी और डेटा-आधारित खाद्य तेल प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे नीति निर्माण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

देशभर में निरीक्षण एवं अनुपालन अभियान

देशव्यापी अनुपालन अभियान के तहत खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) द्वारा इंदौर सहित विभिन्न स्थानों पर निरीक्षण अभियान चलाए गए। इन निरीक्षणों में NSWS/VOPPA पंजीकरण की स्थिति, मासिक रिटर्न की सटीकता और समयबद्धता की जांच की गई तथा उद्योग से संवाद कर अनुपालन को बढ़ावा दिया गया।

इसके साथ ही विभाग द्वारा क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है। नवंबर 2025 में इंदौर में राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें सटीक डेटा रिपोर्टिंग, NSWS पंजीकरण, VOPPA पोर्टल के उपयोग और समय पर रिटर्न दाखिल करने पर प्रशिक्षण दिया गया। इसी तरह की कार्यशालाएं अन्य प्रमुख राज्यों में भी आयोजित की जाएंगी।

गैर-अनुपालन पर कारण बताओ नोटिस

निरीक्षणों और समीक्षा के आधार पर विभाग ने कुछ बड़ी खाद्य तेल कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने बार-बार स्मरण, ई-मेल और फोन कॉल के बावजूद अनिवार्य मासिक उत्पादन रिटर्न जमा नहीं किए। यह संशोधित VOPPA आदेश, 2025 का उल्लंघन है, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के अंतर्गत जारी किया गया है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधिनियम की धारा 6A के तहत उल्लंघन की स्थिति में निरीक्षण और जब्ती की कार्रवाई की जा सकती है, जबकि धारा 6B के अनुसार जब्ती से पहले संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके तहत संबंधित इकाइयों को 7 दिन का समय दिया गया है कि वे लिखित जवाब प्रस्तुत करें।

आगे भी जारी रहेगी सख्ती

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो इकाइयाँ VOPPA ढांचे के तहत पंजीकृत नहीं हैं या जिन्होंने अनिवार्य रिटर्न दाखिल नहीं किए हैं, उन्हें भी कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे, ताकि पूरे क्षेत्र में समान अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा जनवरी 2026 में हरियाणा और राजस्थान सहित अन्य क्षेत्रों में खाद्य तेल प्रसंस्करण इकाइयों का निरीक्षण प्रस्तावित है।

सरकार ने दोहराया है कि वह खाद्य तेल क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्रभावी नीति निर्माण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

दिल्ली कस्टम्स में CCFC बैठक आयोजित, व्यापार सुविधा और ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस पर जोर

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नई दिल्ली- दिल्ली कस्टम्स द्वारा कस्टम्स क्लीयरेंस फेसीलिटेशन कमेटी (CCFC) की बैठक का आयोजन आज आईजीआई एयरपोर्ट स्थित कल्पना चावला कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया। बैठक की अध्यक्षता मुख्य आयुक्त, कस्टम्स, दिल्ली ज़ोन ने की।

इस बैठक में विभिन्न सहयोगी सरकारी एजेंसियों जैसे एफएसएसएआई (FSSAI), प्लांट क्वारंटीन और ड्रग कंट्रोलर के प्रतिनिधियों के साथ-साथ व्यापार संगठनों—कस्टम्स ब्रोकर फ्रेटरनिटी, ASSOCHAM, GJEPC—ने भाग लिया। इसके अतिरिक्त कस्टोडियन, आयातक, निर्यातक और विभागीय अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिससे कस्टम्स क्लीयरेंस तंत्र से जुड़े सभी प्रमुख हितधारकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हुई।

बैठक के दौरान केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा हाल ही में शुरू की गई नीतिगत और डिजिटल पहलों पर विस्तार से चर्चा की गई, विशेष रूप से उनके दिल्ली कस्टम्स ज़ोन में क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया गया। हितधारकों द्वारा उठाए गए विभिन्न परिचालन संबंधी मुद्दों पर सकारात्मक और रचनात्मक संवाद हुआ, जिसके परिणामस्वरूप कई व्यावहारिक और क्रियान्वयन योग्य समाधान सामने आए, जो व्यापार सुविधा और दक्षता को और सुदृढ़ करेंगे।

बैठक के पारदर्शी और सहयोगात्मक संचालन की सभी प्रतिभागियों ने सराहना की, जिससे कस्टम्स प्रक्रियाओं में विश्वास और EXIM समुदाय के बीच समन्वय को और मजबूती मिली।

दिल्ली कस्टम्स ज़ोन ने कानून के दायरे में रहते हुए ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस और व्यापार सुविधा को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। ज़ोन ने स्पष्ट किया कि उसका मार्गदर्शक मंत्र पारदर्शिता, सुगमता (Accessibility) और दक्षता के सिद्धांतों पर आधारित है। ये मूल्य न केवल कस्टम्स के कार्य संचालन की आधारशिला हैं, बल्कि हितधारकों के साथ विश्वास निर्माण में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

आगामी समय को देखते हुए, दिल्ली कस्टम्स ज़ोन ने कहा कि ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसके लिए कस्टम्स, सहयोगी एजेंसियों, कस्टोडियनों और व्यापार समुदाय के बीच सतत सहयोग आवश्यक है। पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया, सरल एवं सुलभ व्यवस्थाएं और खुले संवाद की नीति के माध्यम से दिल्ली कस्टम्स विश्वास, दक्षता और साझा उत्तरदायित्व की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयासरत रहेगा।

छत्तीसगढ़ में गाइडलाइन दरों का युक्तियुक्त निर्धारण, पारदर्शिता और सरलता की दिशा में बड़ा कदम

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रायपुर- छत्तीसगढ़ गाइडलाइन दरों का निर्धारण नियम, 2000 के प्रावधानों के तहत केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड, छत्तीसगढ़ द्वारा स्थावर संपत्तियों के बाजार मूल्य निर्धारण से संबंधित गाइडलाइन दर वर्ष 2025–26 को अनुमोदित करते हुए 20 नवंबर 2025 से प्रदेशभर में लागू कर दिया गया है। यह निर्णय राज्य में संपत्ति मूल्यांकन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तार्किक और जनसुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।

विगत पांच वर्षों से गाइडलाइन दरों का पुनरीक्षण नहीं होने के कारण प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में कई प्रकार की विसंगतियां उत्पन्न हो गई थीं। वर्ष 2025–26 की नवीन गाइडलाइन में इन विसंगतियों को दूर करते हुए दरों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। पूर्व प्रचलित गाइडलाइन में नगर पालिका क्षेत्रों में कुल 200 कंडिकाएं थीं, जिन्हें घटाकर 102 किया गया है। एक ही वार्ड में अलग-अलग कंडिकाओं और भिन्न दरों के कारण आमजन को संपत्ति के मूल्य को समझने में कठिनाई होती थी, जिसे अब सरल और स्पष्ट बनाया गया है।

वार्ड परिसीमन के बाद कंडिकाओं में आवश्यक संशोधन कर नई परिस्थितियों के अनुरूप दरें निर्धारित की गई हैं। समाचार पत्रों में प्रकाशित दरों के विश्लेषण से स्पष्ट है कि वर्ष 2025–26 की गाइडलाइन में लगभग समान दरों को समायोजित कर एकरूप किया गया है, जिससे औसतन लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि परिलक्षित होती है। उदाहरण के तौर पर महासमुंद जिले में नई गाइडलाइन में पूरे रायपुर मार्ग की दर 32,500 रुपये तथा 20 मीटर अंदर की दर 7,500 रुपये निर्धारित की गई है।

इसी प्रकार यतियतनलाल वार्ड में परिसीमन के कारण दरों को युक्तियुक्त करते हुए 4,800 रुपये से बढ़ाकर 9,000 रुपये किया गया है। वार्ड क्रमांक 03 में भी एक ही मार्ग पर स्थित कंडिकाओं को समायोजित कर नई कंडिका सृजित की गई है और दरों में औसतन 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। पुष्पा पेट्रोल पंप से पंकज सोनी के मकान तक निर्धारित दरें शंकर नगर वार्ड के सामने की दरों के अनुरूप रखी गई हैं, जिससे सड़क के आमने-सामने स्थित क्षेत्रों में समान दरें लागू हो सकें।

बरोण्डा चौक तथा बरोण्डा चौक से भाजपा कार्यालय तक के क्षेत्रों में भी दरों का युक्तियुक्तकरण करते हुए औसतन 20 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। इसी प्रकार अन्य वार्डों में भी समान परिस्थिति और महत्व के क्षेत्रों में दरों को एकरूप करते हुए संतुलित वृद्धि सुनिश्चित की गई है।

राज्य सरकार द्वारा किए गए इस पुनरीक्षण का उद्देश्य वास्तविक प्रचलित बाजार मूल्य को गाइडलाइन दरों में समाहित करना है, ताकि संपत्ति क्रय-विक्रय, स्टांप शुल्क और पंजीयन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़े तथा आम नागरिकों को स्पष्ट और न्यायसंगत दरों का लाभ मिल सके। यह पहल छत्तीसगढ़ में सुगम, भरोसेमंद और जनहितैषी संपत्ति मूल्यांकन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।

जल जीवन मिशन (JJM) – हर घर जल: ग्रामीण परिवारों के लिए नल कनेक्शन की उपलब्धता और निगरानी

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परिचय

अगस्त 2019 से, भारत सरकार जल जीवन मिशन (JJM) – हर घर जल को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ साझेदारी में लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक नल कनेक्शन द्वारा पीने के पानी की सुविधा पहुँचाना है। “पीने का पानी” एक राज्य विषय है, इसलिए योजना, अनुमोदन, क्रियान्वयन, संचालन और रख-रखाव की जिम्मेदारी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की होती है। भारत सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों का समर्थन करती है।

योजना का संचालन और मार्गदर्शन

राज्यों को JJM के प्रभावी योजना और क्रियान्वयन में मदद करने के लिए विस्तृत ऑपरेशनल गाइडलाइन साझा की गई हैं, जो योजना, निष्पादन, गुणवत्ता आश्वासन, निगरानी और बनाए रखी जाने वाली बुनियादी संरचना के सभी पहलुओं को कवर करती हैं।

भारत सरकार समय-समय पर समीक्षा बैठकों और बहु-आयामी टीमों के दौरे के माध्यम से राज्यों के साथ मिशन के क्रियान्वयन की समीक्षा करती है और सुधार के क्षेत्रों को उजागर करती है।

प्रौद्योगिकी का उपयोग

  • JJM में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए तकनीक का उपयोग किया जाता है।

  • भौतिक और वित्तीय प्रगति JJM–IMIS (Integrated Management Information System) पर रिपोर्ट की जाती है।

  • सभी नल कनेक्शन परिवार के मुखिया के आधार कार्ड से लिंक किए जाते हैं।

  • निर्माण कार्य के तहत बनाए गए संपत्तियों की जियो-टैगिंग की व्यवस्था की गई है।

गुणवत्ता नियंत्रण और तृतीय पक्ष निरीक्षण

  • भुगतान से पहले तीसरे पक्ष के निरीक्षण और प्रमाणन को अनिवार्य किया गया है।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को तीसरे पक्ष निरीक्षण एजेंसियों (TPIAs) को सूचीबद्ध करने का अधिकार है, जो कार्य की गुणवत्ता, निर्माण सामग्री और मशीनरी की गुणवत्ता की जांच करें।

निगरानी और सुधारात्मक कदम

  • अप्रैल 2025 से, राज्यों द्वारा हर महीने चार योजनाओं का यादृच्छिक निरीक्षण किया जा रहा है।

  • राष्ट्रीय WASH विशेषज्ञों (NWEs) के लिए निगरानी ढांचे को मजबूत किया गया है, जिसमें गुणवत्ता के मानक और TPI के ToR को संशोधित किया गया है।

  • IMIS के माध्यम से IT निगरानी का विस्तार किया गया है, जिससे जिला और ग्राम पंचायत स्तर के अधिकारियों को भी निगरानी की सुविधा मिली है।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को JJM में रिपोर्ट की गई अनियमितताओं (गुणवत्ता या वित्तीय) के प्रति नियमित रूप से सचेत किया जाता है और शून्य सहिष्णुता अपनाने के लिए निर्देशित किया गया है।

  • 32 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा रिपोर्ट किए गए अनुसार, कुल 17,036 शिकायतें मिलीं, जिनमें वित्तीय अनियमितताएँ और कार्य की खराब गुणवत्ता शामिल हैं।

  • राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कुल 621 विभागीय अधिकारियों, 969 ठेकेदारों और 153 TPIAs के खिलाफ कार्रवाई की गई।

स्रोत: यह जानकारी जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने आज राज्य सभा में लिखित उत्तर में दी।

यूएमीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के अपलोड की 6 माह की अवधि पूर्ण, 5.17 लाख संपत्तियों का रिकॉर्ड दर्ज

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यूएमीद (UMEED) केंद्रीय पोर्टल, जिसे भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा 6 जून 2025 को लॉन्च किया गया था, ने 6 दिसंबर 2025 (शनिवार) को अपलोड के लिए अपनी अवधि आधिकारिक रूप से समाप्त कर दी। पोर्टल ने UMEED अधिनियम, 1995 और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप अपनी निर्धारित 6 महीने की विंडो पूरी की।

अंतिम स्थिति

अंतिम दिनों में पोर्टल पर अपलोड की गति में उल्लेखनीय तेजी आई। कई समीक्षा बैठकें, प्रशिक्षण कार्यशालाएँ और सचिव स्तर तक उच्च-स्तरीय हस्तक्षेपों ने इस प्रक्रिया को गति दी, जिससे आखिरी घंटों में अपलोड में तेज वृद्धि दर्ज हुई।

  • 5,17,040 वक्फ संपत्तियाँ पोर्टल पर प्रारंभ की गईं

  • 2,16,905 संपत्तियाँ नामित अनुमोदकों द्वारा स्वीकृत

  • 2,13,941 संपत्तियाँ मेकर्स द्वारा सबमिट की गईं और समय सीमा तक पाइपलाइन में रहीं

  • 10,869 संपत्तियाँ सत्यापन के दौरान निरस्त/अस्वीकृत

व्यापक राष्ट्रीय अभियान के लिए किये गए प्रयास

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने राज्य/संघ राज्य क्षेत्र वक्फ बोर्डों और अल्पसंख्यक विभागों के साथ निरंतर कार्यशालाएँ और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए। दिल्ली में दो दिवसीय मास्टर ट्रेनर कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें अधिकारियों को अपलोड प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

वरिष्ठ तकनीकी और प्रशासनिक टीमें विभिन्न राज्यों में तैनात की गईं, और देशभर में 7 क्षेत्रीय बैठकें आयोजित की गईं। मंत्रालय में एक समर्पित हेल्पलाइन भी स्थापित की गई, ताकि अपलोड प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान मिल सके।

सचिवालय स्तर पर सक्रिय निगरानी

पोर्टल लॉन्च होने के बाद से, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव, डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने 20 से अधिक समीक्षा बैठकें कीं। उन्होंने राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को समयबद्ध और सटीक अपलोडिंग सुनिश्चित करने हेतु लगातार मार्गदर्शन, प्रेरणा और निगरानी प्रदान की।

डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

इस चरण का समापन पूरे भारत में वक्फ संपत्तियों के लिए पारदर्शिता, दक्षता और एकीकृत डिजिटल प्रबंधन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो UMEED ढांचे के तहत वक्फ प्रशासन को एक आधुनिक, डिजिटल प्रणाली से जोड़ता है। 

LBSNAA में रक्षा मंत्री का संबोधन: तकनीक, पारदर्शिता और जनसेवा पर दिया बल

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर नागरिक–सैन्य समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां प्रशासनिक तंत्र और सशस्त्र बलों ने मिलकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की और जनता में विश्वास कायम किया।” वे 29 नवंबर 2025 को उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में 100वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सशस्त्र सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों को संतुलित और गैर-उत्तेजक तरीके से नष्ट किया, लेकिन पड़ोसी देश के अनुचित व्यवहार के कारण सीमा पर सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो पाई। उन्होंने सैनिकों की वीरता की सराहना करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यों की भी प्रशंसा की, जिन्होंने देशभर में सफल मॉक ड्रिल्स और सूचना प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच और अधिक तालमेल आवश्यक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ और ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ के मंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सिविल सेवकों की भूमिका आत्मनिर्भर और विकसित भारत की आकांक्षाओं को गति देने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।राजनाथ सिंह ने कहा, “2014 में हमारी सरकार बनने के समय भारत विश्व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। पिछले 9–10 वर्षों में हम चौथे स्थान पर आ गए हैं। प्रतिष्ठित वैश्विक वित्तीय संस्थान भी मानते हैं कि भारत अगले 2–3 वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। आप जनता के सेवक हैं, शासक नहीं। आपका चरित्र निष्कलंक होना चाहिए, आपकी कार्यशैली ईमानदारी से भरी होनी चाहिए। ईमानदारी को अपवाद नहीं, सामान्य जीवन का हिस्सा बनाना होगा।”

राजनाथ सिंह ने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीक-प्रधान युग में नवाचार को अपनाएं और जनता की समस्याओं के समाधान खोजें। उन्होंने जनधन योजना, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और आयकर विभाग की फेसलेस असेसमेंट योजना जैसी तकनीक-संचालित पहलों का उल्लेख किया। रक्षा मंत्रालय की SAMPURNA पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह एक एआई-आधारित प्रणाली है जो रक्षा खरीद और भुगतान प्रक्रियाओं का पारदर्शी विश्लेषण करती है। उन्होंने कहा कि तकनीक अंत नहीं, केवल साधन है—इसे पारदर्शिता, सुगमता और जन-सम्पर्क बढ़ाने के लिए उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने सिविल सेवकों से कहा कि वे प्रत्येक नागरिक से सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ पेश आएं। “विशेषकर जब आप समाज के वंचित या कमजोर वर्गों से मिलें, तो समझें कि उनकी मुश्किलें केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होती हैं। यही गुण एक प्रशासक को जन-केंद्रित और करुणामय बनाता है।”

रक्षा मंत्री ने सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि नवीनतम UPSC परीक्षा में एक महिला ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है और शीर्ष पाँच में से तीन स्थान महिलाओं ने हासिल किए हैं। उन्हें विश्वास है कि 2047 तक अनेक महिलाएँ कैबिनेट सचिव जैसी उच्च प्रशासनिक भूमिकाओं में पहुँचेंगी।

राजनाथ सिंह ने फाउंडेशन कोर्स को मात्र प्रशिक्षण नहीं, बल्कि एक सक्षम, संवेदनशील और कुशल प्रशासनिक ढांचा बनाने की प्रतिबद्धता बताया। उन्होंने LBSNAA की व्यापक प्रशिक्षण व्यवस्था की सराहना की, जो राष्ट्र की प्रशासनिक क्षमताओं को मजबूत बनाती है।

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रेरणादायक विरासत को स्मरण करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह अकादमी साहस, सादगी और ईमानदारी का प्रतीक है। उन्होंने 1965 के युद्ध, हरित क्रांति और “जय जवान, जय किसान” के संदेश का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से शास्त्री जी के आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि UPSC के 100 वर्ष पूरे होने पर UPSC और LBSNAA की साझेदारी ने पीढ़ियों को दिशा दी है और आगे भी भारत की प्रशासनिक संरचना को मजबूत करती रहेगी।

इससे पहले, राजनाथ सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने अकादमी परिसर में ODOP पवेलियन का भी उद्घाटन किया।

वन नेशन, वन टैक्स ने कर संरचना को सरल बनाया: ओम बिड़ला

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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने आज कहा कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों में सुधार तथा “वन नेशन, वन टैक्स” जीएसटी ढांचे ने देश की कर व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाया है, जिससे भारत की वृद्धि और समृद्धि को गति मिली है। उन्होंने कहा कि राजस्व सेवा अधिकारियों की ज़िम्मेदारी है कि वे इस पारदर्शी प्रणाली को मजबूत बनाए रखें।

ओम बिड़ला संसद भवन परिसर में लोकसभा सचिवालय के पीआरआईडीई (Parliamentary Research and Training Institute for Democracies) द्वारा आयोजित संसदीय प्रक्रियाओं और विधियों के प्रशंसा पाठ्यक्रम में भाग ले रहे भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस–सी एंड आईटी) के 76वें बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं को संबोधित कर रहे थे।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर प्रसन्नता

उन्होंने विभिन्न केंद्रीय और अखिल भारतीय सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती संख्या पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह देश की प्रगतिशील सोच और आकांक्षाओं का प्रतीक है।

युवा तकनीकी दक्ष और नवाचार के अग्रदूत

 ओम बिड़ला ने कहा कि आज का युवा तकनीक, अनुसंधान और नवाचार में अग्रणी है। उनकी प्रखर सोच, आत्मविश्वास और नई दृष्टि भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएगी। उन्होंने विश्वास जताया कि युवा अधिकारी प्रशिक्षु ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने envisioned किया है।

संसद—लोकतंत्र और नीति-निर्माण का केंद्र

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत की संसद लोकतांत्रिक प्रक्रिया और नीति निर्माण का केंद्र है। आने वाले समय में आईआरएस अधिकारी देश की आर्थिक शक्ति के महत्वपूर्ण स्तंभ बनेंगे।

उन्होंने कहा कि आईआरएस अधिकारियों की भूमिका केवल कर संग्रहण तक सीमित नहीं है, बल्कि ईमानदार करदाताओं का सम्मान, व्यापार सुगमता, अवैध व्यापार पर रोक, मनी लॉन्ड्रिंग की रोकथाम और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना भी उनकी बड़ी जिम्मेदारियाँ हैं।

कर व्यवस्था को और सरल, पारदर्शी बनाने पर जोर

ओम बिड़ला ने कहा कि सरकार कर प्रणाली को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है, ताकि नागरिकों को देश की प्रगति से संबंध महसूस हो। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों में इस दिशा में काफी सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक डिजिटल कर प्रणालियाँ, एआई आधारित असेसमेंट और डेटा एनालिटिक्स कर प्रशासन को और अधिक निष्पक्ष व पारदर्शी बना रहे हैं। उन्होंने युवा अधिकारी प्रशिक्षुओं से आह्वान किया कि वे अपनी मेहनत और नवाचार से इसमें योगदान दें।

कानून और संसदीय प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन करने की सलाह

ओम बिड़ला ने अधिकारियों को कर कानूनों, संसदीय बहसों और नवीनतम विधेयकों का गहन अध्ययन करने की सलाह दी, ताकि वे कानून की भावना और उद्देश्य को अच्छी तरह समझ सकें।

76वें बैच की विशेषताएँ

  • कुल प्रशिक्षु: 79 (जिनमें 5 भूटान से)

  • 40% महिलाएँ

  • 32% ग्रामीण पृष्ठभूमि से

  • औसत आयु: 28 वर्ष

  • 51 प्रशिक्षुओं के पास पूर्व कार्य अनुभव

लोकसभा के महासचिव उत्पल कुमार सिंह ने कार्यक्रम में स्वागत भाषण दिया।

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