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LBSNAA में रक्षा मंत्री का संबोधन: तकनीक, पारदर्शिता और जनसेवा पर दिया बल

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर नागरिक–सैन्य समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां प्रशासनिक तंत्र और सशस्त्र बलों ने मिलकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की और जनता में विश्वास कायम किया।” वे 29 नवंबर 2025 को उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में 100वें कॉमन फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की सशस्त्र सेनाओं ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ठिकानों को संतुलित और गैर-उत्तेजक तरीके से नष्ट किया, लेकिन पड़ोसी देश के अनुचित व्यवहार के कारण सीमा पर सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो पाई। उन्होंने सैनिकों की वीरता की सराहना करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यों की भी प्रशंसा की, जिन्होंने देशभर में सफल मॉक ड्रिल्स और सूचना प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शासन और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच और अधिक तालमेल आवश्यक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ और ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ के मंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सिविल सेवकों की भूमिका आत्मनिर्भर और विकसित भारत की आकांक्षाओं को गति देने में अत्यंत महत्वपूर्ण है।राजनाथ सिंह ने कहा, “2014 में हमारी सरकार बनने के समय भारत विश्व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। पिछले 9–10 वर्षों में हम चौथे स्थान पर आ गए हैं। प्रतिष्ठित वैश्विक वित्तीय संस्थान भी मानते हैं कि भारत अगले 2–3 वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। आप जनता के सेवक हैं, शासक नहीं। आपका चरित्र निष्कलंक होना चाहिए, आपकी कार्यशैली ईमानदारी से भरी होनी चाहिए। ईमानदारी को अपवाद नहीं, सामान्य जीवन का हिस्सा बनाना होगा।”

राजनाथ सिंह ने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीक-प्रधान युग में नवाचार को अपनाएं और जनता की समस्याओं के समाधान खोजें। उन्होंने जनधन योजना, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और आयकर विभाग की फेसलेस असेसमेंट योजना जैसी तकनीक-संचालित पहलों का उल्लेख किया। रक्षा मंत्रालय की SAMPURNA पहल का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह एक एआई-आधारित प्रणाली है जो रक्षा खरीद और भुगतान प्रक्रियाओं का पारदर्शी विश्लेषण करती है। उन्होंने कहा कि तकनीक अंत नहीं, केवल साधन है—इसे पारदर्शिता, सुगमता और जन-सम्पर्क बढ़ाने के लिए उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने सिविल सेवकों से कहा कि वे प्रत्येक नागरिक से सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ पेश आएं। “विशेषकर जब आप समाज के वंचित या कमजोर वर्गों से मिलें, तो समझें कि उनकी मुश्किलें केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से प्रभावित होती हैं। यही गुण एक प्रशासक को जन-केंद्रित और करुणामय बनाता है।”

रक्षा मंत्री ने सिविल सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना की। उन्होंने कहा कि नवीनतम UPSC परीक्षा में एक महिला ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है और शीर्ष पाँच में से तीन स्थान महिलाओं ने हासिल किए हैं। उन्हें विश्वास है कि 2047 तक अनेक महिलाएँ कैबिनेट सचिव जैसी उच्च प्रशासनिक भूमिकाओं में पहुँचेंगी।

राजनाथ सिंह ने फाउंडेशन कोर्स को मात्र प्रशिक्षण नहीं, बल्कि एक सक्षम, संवेदनशील और कुशल प्रशासनिक ढांचा बनाने की प्रतिबद्धता बताया। उन्होंने LBSNAA की व्यापक प्रशिक्षण व्यवस्था की सराहना की, जो राष्ट्र की प्रशासनिक क्षमताओं को मजबूत बनाती है।

पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की प्रेरणादायक विरासत को स्मरण करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि यह अकादमी साहस, सादगी और ईमानदारी का प्रतीक है। उन्होंने 1965 के युद्ध, हरित क्रांति और “जय जवान, जय किसान” के संदेश का उल्लेख करते हुए अधिकारियों से शास्त्री जी के आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि UPSC के 100 वर्ष पूरे होने पर UPSC और LBSNAA की साझेदारी ने पीढ़ियों को दिशा दी है और आगे भी भारत की प्रशासनिक संरचना को मजबूत करती रहेगी।

इससे पहले, राजनाथ सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने अकादमी परिसर में ODOP पवेलियन का भी उद्घाटन किया।

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