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खाद्य तेल क्षेत्र में सख्त निगरानी: संशोधित VOPPA आदेश 2025 के तहत नियामक ढांचा मजबूत

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भारत सरकार ने वनस्पति तेल उत्पाद, उत्पादन एवं उपलब्धता (विनियमन) संशोधन आदेश, 2025 (VOPPA आदेश, 2025) के माध्यम से खाद्य तेल मूल्य श्रृंखला में नियामक निगरानी को और सुदृढ़ किया है। संशोधित आदेश के तहत सभी खाद्य तेल निर्माता, प्रोसेसर, ब्लेंडर एवं री-पैकर के लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) और VOPPA पोर्टल (www.edibleoilindia.in) पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, उत्पादन, भंडारण और उपलब्धता से संबंधित मासिक विवरण (रिटर्न) दाखिल करना भी अनिवार्य किया गया है।

मासिक रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य

संशोधित VOPPA आदेश, 2025 के अनुसार अब कंपनियों को उत्पादन, स्टॉक, आयात, प्रेषण, बिक्री और खपत से संबंधित मासिक रिटर्न दाखिल करने होंगे। इसमें कच्चा एवं परिष्कृत वनस्पति तेल, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टेड तेल, ब्लेंडेड ऑयल, वनस्पति घी, मार्जरीन तथा अन्य अधिसूचित उत्पाद शामिल हैं। यह व्यवस्था पारदर्शी और डेटा-आधारित खाद्य तेल प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे नीति निर्माण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

देशभर में निरीक्षण एवं अनुपालन अभियान

देशव्यापी अनुपालन अभियान के तहत खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) द्वारा इंदौर सहित विभिन्न स्थानों पर निरीक्षण अभियान चलाए गए। इन निरीक्षणों में NSWS/VOPPA पंजीकरण की स्थिति, मासिक रिटर्न की सटीकता और समयबद्धता की जांच की गई तथा उद्योग से संवाद कर अनुपालन को बढ़ावा दिया गया।

इसके साथ ही विभाग द्वारा क्षमता निर्माण पर भी जोर दिया जा रहा है। नवंबर 2025 में इंदौर में राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें सटीक डेटा रिपोर्टिंग, NSWS पंजीकरण, VOPPA पोर्टल के उपयोग और समय पर रिटर्न दाखिल करने पर प्रशिक्षण दिया गया। इसी तरह की कार्यशालाएं अन्य प्रमुख राज्यों में भी आयोजित की जाएंगी।

गैर-अनुपालन पर कारण बताओ नोटिस

निरीक्षणों और समीक्षा के आधार पर विभाग ने कुछ बड़ी खाद्य तेल कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने बार-बार स्मरण, ई-मेल और फोन कॉल के बावजूद अनिवार्य मासिक उत्पादन रिटर्न जमा नहीं किए। यह संशोधित VOPPA आदेश, 2025 का उल्लंघन है, जो आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 के अंतर्गत जारी किया गया है।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि अधिनियम की धारा 6A के तहत उल्लंघन की स्थिति में निरीक्षण और जब्ती की कार्रवाई की जा सकती है, जबकि धारा 6B के अनुसार जब्ती से पहले संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके तहत संबंधित इकाइयों को 7 दिन का समय दिया गया है कि वे लिखित जवाब प्रस्तुत करें।

आगे भी जारी रहेगी सख्ती

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो इकाइयाँ VOPPA ढांचे के तहत पंजीकृत नहीं हैं या जिन्होंने अनिवार्य रिटर्न दाखिल नहीं किए हैं, उन्हें भी कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे, ताकि पूरे क्षेत्र में समान अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा जनवरी 2026 में हरियाणा और राजस्थान सहित अन्य क्षेत्रों में खाद्य तेल प्रसंस्करण इकाइयों का निरीक्षण प्रस्तावित है।

सरकार ने दोहराया है कि वह खाद्य तेल क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और सख्त अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्रभावी नीति निर्माण और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।

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