Media24Media.com: केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को दी शुभकामनाएं

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केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को दी शुभकामनाएं

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तिरुवरुर- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तिरुवरुर स्थित केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय (CUTN) के 11वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचने के लिए बधाई दी।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्रदान करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति, ज्ञान की खोज तथा विद्यार्थियों की मेहनत, समर्पण, दृढ़ता और संघर्ष का उत्सव है।

उन्होंने स्नातक विद्यार्थियों के माता-पिता और शिक्षकों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता और शिक्षकों ने अपने बच्चों एवं विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अनेक वर्तमान सुख-सुविधाओं का त्याग किया है।

थिरुवरुर ज्ञान, आध्यात्म और कला की धरती

उपराष्ट्रपति ने थिरुवरुर के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान त्यागराज के भव्य मंदिर के लिए प्रसिद्ध यह पवित्र नगर सदियों से आध्यात्मिकता, विद्वता और कला की उत्कृष्टता का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र भूमि ने संतों, विद्वानों और कर्नाटक संगीत की महान त्रिमूर्ति को जन्म दिया है। जब संस्कृति, शिक्षा और मूल्य एक साथ विकसित होते हैं, तभी वास्तविक महानता का निर्माण होता है।

शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना नहीं

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में उच्च शिक्षा का तेजी से विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि देशभर में आयोजित दीक्षांत समारोहों में वे अक्सर देखते हैं कि पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाएं डिग्री और पदक प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने इसे एक स्वागत योग्य बदलाव बताया।

उन्होंने कहा कि आज शिक्षा को केवल परीक्षा और अंकों के आधार पर नहीं मापा जा सकता।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि व्यक्ति स्वतंत्र रूप से सोचने, प्रभावी ढंग से संवाद करने, मिलकर काम करने और जीवनभर सीखते रहने में कितना सक्षम है।

उपराष्ट्रपति ने केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय द्वारा बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और मूल्य आधारित शिक्षा पर दिए जा रहे जोर की सराहना की।

परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक जरूरी

संसद द्वारा हाल ही में पारित लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकना और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान झारखंड सरकार ने भी इसी प्रकार का विधेयक पारित किया था और तत्कालीन राज्यपाल के रूप में उन्होंने उस पर तुरंत हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद वह कानून बन सका।

उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों के हितों की रक्षा के लिए समाज में गलत कार्य करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मजबूत कदम उठाने पर जोर दिया।

विद्यार्थी ज्ञान के उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनें

उपराष्ट्रपति ने स्नातक विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे “ज्ञान के उपभोक्ता बनने के बजाय निर्माता, अनुकरण करने वालों के बजाय नवप्रवर्तक और अनुयायी बनने के बजाय नेता बनें।”

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं से अपने कार्यों में “राष्ट्र प्रथम—राष्ट्र प्रथम” की भावना को सर्वोच्च स्थान देने और अपने ज्ञान, कौशल एवं नेतृत्व क्षमता का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने का आह्वान किया।

नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील

उपराष्ट्रपति ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों तथा नशे के प्रसार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्ति का जीवन बर्बाद करती है, बल्कि परिवार और पूरे समाज पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। युवाओं को इस खतरे से बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने विद्यार्थियों से “नशे को ना कहें—Say No to Drugs” का संदेश अपनाने और अपने मित्रों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

1,103 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, 50 को स्वर्ण पदक

दीक्षांत समारोह में कुल 1,103 स्नातकों को डिग्री प्रदान की गई, जिनमें शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 50 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। कुल स्नातकों में 616 छात्राएं शामिल हैं। वहीं 50 स्वर्ण पदकों में से 37 पदक छात्राओं ने हासिल किए।

समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, नागपट्टिनम से लोकसभा सांसद थिरु वी. सेल्वराज, कुलाधिपति प्रो. जी. पद्मनाभन, कुलपति सीनियर प्रो. सुलोचना शेखर, विश्वविद्यालय के शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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