Media24Media.com: मानवीय संविधान की समझ से ही मानव-मानव के बीच मतभेद होंगे समाप्त : गेंदलाल कोकड़िया

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मानवीय संविधान की समझ से ही मानव-मानव के बीच मतभेद होंगे समाप्त : गेंदलाल कोकड़िया

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महासमुंद- मध्यस्थ दर्शन आधारित मानवीय संविधान सूत्र व्याख्या का अध्ययन मानव जीवन में मानवीय मूल्यों, चरित्र निर्माण और सामाजिक समरसता की स्थापना का प्रभावी माध्यम है। जब तक मानवीय चरित्र की सही व्याख्या और समझ विकसित नहीं होगी, तब तक मानव-मानव के बीच मतभेद, देशों के बीच तनाव, टकराव और युद्ध जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान संभव नहीं है। इसलिए विश्व के प्रत्येक व्यक्ति तक मानवीय संविधान सूत्र व्याख्या की समझ पहुंचाना समय की आवश्यकता है।

यह विचार मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही (महासमुंद) के संचालक एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा से जुड़े कोकड़ी शासकीय विद्यालय के शिक्षक गेंदलाल कोकड़िया ने अभ्युदय संस्थान, अछोटी (दुर्ग) में आयोजित जीवन विद्या अध्ययन शिविर को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि मानवीय संविधान सूत्र व्याख्या के प्रणेता पूज्य ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ दर्शन मानव जीवन के मूल्यों, व्यवहार और चरित्र निर्माण की वैज्ञानिक समझ प्रदान करता है। उन्होंने जीवन विद्या अध्ययन के लोकव्यापीकरण अभियान की अब तक की उपलब्धियों तथा आगामी कार्यक्रमों की जानकारी साझा की।

कोकड़िया ने बताया कि जीवन विद्या अध्ययन से प्रतिभागियों के व्यक्तिगत जीवन, पारिवारिक संबंधों और सामाजिक व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिले हैं। उन्होंने विद्यालयों में चेतना विकास मूल्य शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर देते हुए सभी प्रतिभागियों को कोकड़ी शासकीय विद्यालय का शैक्षणिक भ्रमण करने तथा अपने-अपने क्षेत्रों में मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं का आयोजन करने का आह्वान किया। साथ ही सभी को आगामी जीवन विद्या अध्ययन अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया।

शिविर का प्रबोधन कर रहे अंतरराष्ट्रीय मानव वैज्ञानिक डॉ. संकेत ठाकुर ने सामाजिक परिवर्तन के लिए स्वयं में परिवर्तन लाने और जीवन विद्या अध्ययन की निरंतरता बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने जीवन ज्ञान, अस्तित्व दर्शन तथा मानवीयता पूर्ण आचरण को समृद्ध समाज की आधारशिला बताया।

कार्यक्रम में अभ्युदय संस्थान, अछोटी की आयोजन समिति के सदस्य सरदार मंजीत सिंह एवं  डाली ने स्वावलंबन के 30 से अधिक व्यावहारिक प्रयोगों की जानकारी देते हुए उपयोगिता मूल्य और कला मूल्य आधारित जीवनशैली पर प्रकाश डाला।

अभिभावक विद्यालय, अछोटी के प्रभारी बलवंत भैयाजी ने श्रेष्ठ व्यक्तियों एवं संस्थाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की संस्कृति को मानवीय जीवन का महत्वपूर्ण मूल्य बताया।

युवा प्रकोष्ठ प्रभारी चंद्रशेखर राठौड़ ने युवाओं को चेतना विकास मूल्य शिक्षा के महत्व से अवगत कराते हुए अखंड समाज, सार्वभौम व्यवस्था और परिवार मूलक ग्राम स्वराज्य की स्थापना में जीवन विद्या अध्ययन की भूमिका स्पष्ट की।

समाजसेवी एवं आकाशवाणी रायपुर से जुड़ी शुभ्रा ठाकुर ने जीवन विद्या के प्रचार-प्रसार, प्रकाशन और जनजागरण के प्रभावी तरीकों पर विचार रखते हुए मानवीय मूल्यों को परिवार और समाज में व्यवहार के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों को अभ्युदय संस्थान, अछोटी के शैक्षणिक भ्रमण के लिए भी आमंत्रित किया।

उत्सव परिसर, अभ्युदय संस्थान के उत्पादन आयाम प्रभारी महावीर अग्रवाल ने स्वावलंबन एवं शुद्ध उत्पादन के 50 से अधिक व्यावहारिक मॉडल प्रस्तुत किए तथा संस्थान में एक वर्ष तक अध्ययन-अभ्यास करने वाले 17 से अधिक लक्ष्य फेलो के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।

मूल्यांकन सत्र में मानवीय शिक्षा शोध केंद्र, तेंदुवाही के सदस्य एवं समाजसेवी संतोष कुमार साहू (रायतुम, पटेवा) ने समाज के सभी वर्गों से जीवन विद्या अध्ययन और चेतना विकास मूल्य शिक्षा कार्यशालाओं में सक्रिय सहभागिता की अपील की।

कार्यक्रम में धमतरी से हेमलाल, ताम्रध्वज साहू, रायपुर से डॉ. श्वेता, शिक्षक मुकेश साहू, कांकेर (चारामा) से डिगेश्वर साहू, बिहार से आदित्य मिश्रा, धमतरी से लक्ष्य फेलो लक्ष्मी साहू, गोढ़ी से पेनोरमा साहू, बालोद के सांकरी (उत्सवपारा) से गोपी निषाद सहित विभिन्न राज्यों से आए 100 से अधिक युवा, लक्ष्य फेलो, शिक्षक एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

यह संस्करण समाचार पत्र में प्रकाशित होने योग्य शैली में तैयार किया गया है, जिसमें भाषा अधिक प्रवाहपूर्ण, संतुलित और पेशेवर रखी गई है।

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