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DPIIT और NPC द्वारा हैदराबाद में ‘बॉयलर चिंतन शिविर’ का आयोजन

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उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार ने राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) के सहयोग से हैदराबाद में “बॉयलर पर चिंतन शिविर” का आयोजन किया।

इस चिंतन शिविर का उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना, नीतियों के क्रियान्वयन की समीक्षा करना और “विजन 2047” जैसे दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप रणनीतियों को समन्वित करना था। चर्चा का मुख्य फोकस बॉयलर उद्योग के लिए एक रोडमैप तैयार करना था, जिसमें उद्योग से जुड़े प्रमुख हितधारकों को शामिल किया गया।

उच्चस्तरीय सहभागिता

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की महानिदेशक नीरजा शेखर,DPIIT के संयुक्त सचिव जय प्रकाश शिवहरे,और तकनीकी सलाहकार (बॉयलर) एवं सचिव, केंद्रीय बॉयलर बोर्ड, संदीप सदानंद कुंभार शामिल हुए।

इसके अलावा राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, बॉयलर निर्माता, बॉयलर उपयोगकर्ता, थर्ड पार्टी निरीक्षण प्राधिकरण (TPIA) और अन्य हितधारक भी चर्चा में शामिल हुए।

Boilers Act, 2025 पर चर्चा

प्रतिभागियों को बताया गया कि बॉयलर अधिनियम, 1923 (संविधान से पूर्व का कानून) की वर्तमान प्रासंगिकता की समीक्षा की गई थी। चूंकि यह कानून जीवन और संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए इसे बनाए रखने का निर्णय लिया गया, लेकिन इसके प्रावधानों को अद्यतन किया गया।

इसके परिणामस्वरूप कानून को Boilers Act, 2025 के रूप में पुनः अधिनियमित किया गया, जो 1 मई 2025 से लागू है।चिंतन शिविर का उद्देश्य इस नए कानून पर फीडबैक लेना और नियामक ढांचे को मजबूत बनाने के सुझाव आमंत्रित करना था।

तकनीकी सत्र और उद्योग विषय

तकनीकी सत्रों में निम्न विषयों पर चर्चा हुई:

  • Boilers Act, 2025 और इसके नियम व विनियम

  • ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यापार सुगमता)

  • थर्ड पार्टी निरीक्षण प्राधिकरण और सक्षम व्यक्तियों की भूमिका

  • पुराने बॉयलरों की शेष जीवन अवधि का आकलन

  • बॉयलर निर्माण में उन्नत तकनीक

  • सुपरक्रिटिकल बॉयलरों की स्थापना में आने वाली चुनौतियाँ

खुली चर्चा और सुझाव

कार्यक्रम का समापन पैनल चर्चा और ओपन हाउस संवाद के साथ हुआ, जिसमें हितधारकों से नियमों को सरल बनाने, अनुपालन बोझ कम करने और व्यापार सुगमता बढ़ाने के सुझाव मांगे गए, जबकि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न करने पर जोर दिया गया।


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