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दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए और अधिक प्रयास जरूरी -राज्यपाल रमेन डेका

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वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज

राज्यपाल ने टीम के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर किया सम्मानित

रायपुर- राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ में अभी और बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। उन्हें गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री सहज रूप से उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। तकनीक के माध्यम से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने का वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ का प्रयास सराहनीय और अनुकरणीय है।

वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम को उल्लेखनीय योगदान के लिए किया सम्मानित

राज्यपाल डेका से आज लोक भवन में वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ के सदस्यों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल ने टीम के सभी सदस्यों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। टीम की उपलब्धि को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किए जाने पर उन्होंने सभी सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

शारदा ने 1,800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कर चुकी

वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम द्वारा दृष्टिबाधित एवं सामान्य विद्यार्थियों के लिए 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस अभिनव अभियान की शुरुआत 5 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका के. शारदा के नेतृत्व में हुई। शारदा स्वयं अब तक 1,800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कर चुकी हैं। उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के 30 शिक्षक- शिक्षिकाएं अपने नियमित शैक्षणिक दायित्वों के साथ इस कार्य में योगदान दे रहे हैं।

दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने समान अवसर

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ऑडियो के माध्यम से अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और शिक्षा के समान अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों को और व्यापक बनाने की जरूरत है, ताकि अधिक से अधिक दृष्टिबाधित विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकें।

वर्ल्ड ऑडियो बुक चैनल को 8 लाख से अधिक बार देखा गया

वर्ल्ड ऑडियो बुक चैनल पर 107 से अधिक प्लेलिस्ट उपलब्ध हैं और इसे अब तक 8 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। टीम द्वारा विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम आधारित एवं उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार की जा रही है। इस अवसर पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की छत्तीसगढ़ हेड डॉ. सोनल राजेश शर्मा सहित वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम के सभी सदस्य उपस्थित थे।

टॉप क्लास एजुकेशन योजना से अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को मिल रही नई उड़ान, शिक्षा से सशक्त हो रहा भारत

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नई दिल्ली- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के मेधावी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराकर समावेशी विकास और सामाजिक सशक्तिकरण को नई दिशा दे रहा है। मंत्रालय की टॉप क्लास एजुकेशन स्कीम फॉर एससी स्टूडेंट्स के माध्यम से देशभर के हजारों छात्र-छात्राएं प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में अध्ययन कर अपने सपनों को साकार कर रहे हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

इस योजना का उद्देश्य ऐसे मेधावी एससी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अवसर प्रदान करना है, जिनके परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये तक है। योजना के तहत छात्रों को ट्यूशन फीस, रहने-खाने का खर्च, पुस्तकों, कंप्यूटर तथा अन्य शैक्षणिक आवश्यकताओं के लिए व्यापक वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें।

वर्ष 2007-08 में शुरू हुई इस योजना का दायरा लगातार बढ़ा है। योजना के तहत लाभान्वित विद्यार्थियों की संख्या 2007-08 में 195 से बढ़कर 2025-26 में 4,742 तक पहुंच गई है। इसी अवधि में योजना पर वार्षिक व्यय 2.17 करोड़ रुपये से बढ़कर 117.19 करोड़ रुपये हो गया है।

आज इस योजना के अंतर्गत विद्यार्थी देश के प्रमुख संस्थानों जैसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT), भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (NLU), राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID), भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) तथा अन्य राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

तकनीकी क्षेत्र में सफलता की मिसाल

योजना के लाभार्थी विद्यार्थियों ने तकनीकी क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। अमूल शतूरिया, जिन्होंने IIIT इलाहाबाद से सूचना प्रौद्योगिकी में बी.टेक की पढ़ाई की, योजना की सहायता से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर एक अग्रणी तकनीकी कंपनी में 56 लाख रुपये वार्षिक पैकेज पर नियुक्त हुए। एक स्कूल बस चालक के पुत्र होने के बावजूद उनकी सफलता इस योजना की परिवर्तनकारी शक्ति को दर्शाती है।

इसी प्रकार सुश्मिता पोथुराजू ने IIIT इलाहाबाद में अध्ययन के दौरान कोडिंग, इंटर्नशिप और नेतृत्व गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की और बाद में अमेज़न में 45 लाख रुपये वार्षिक पैकेज के साथ नियुक्ति प्राप्त की।

राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में योगदान

आईआईटी पालक्काड की सिविल इंजीनियरिंग छात्रा थम्बल्ला सिंधु ने योजना के सहयोग से पेशेवर शिक्षा प्राप्त की और बाद में देश की अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो कंस्ट्रक्शन में ग्रेजुएट इंजीनियर ट्रेनी के रूप में चयनित हुईं।

वहीं, आईआईटी पालक्काड के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग स्नातक नलन एस ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) में नियुक्ति प्राप्त की। वे अपने समुदाय के प्रथम पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं और उनकी सफलता इस योजना की व्यापक सामाजिक प्रभावशीलता को दर्शाती है।

कानून, प्रबंधन और कॉर्पोरेट क्षेत्र में भी सफलता

बोग्गिति शाइनी जैस्पर ने भारतीय प्लांटेशन प्रबंधन संस्थान, बेंगलुरु से पीजीडीएम की पढ़ाई पूरी कर कॉर्पोरेट क्षेत्र में सफल करियर बनाया। वहीं, ऋषभ भास्कर लाडे ने महाराष्ट्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, मुंबई से बी.ए. एलएलबी (ऑनर्स) की पढ़ाई पूरी कर आईडीबीआई बैंक में सहायक विधि प्रबंधक के रूप में नियुक्ति प्राप्त की।

रचनात्मकता, उद्यमिता और अनुसंधान को बढ़ावा

राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान, अहमदाबाद की छात्रा वार्तिका सोनकर ने योजना के सहयोग से डिजाइन के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा को निखारा और आज एक सफल ज्वेलरी डिजाइनर के रूप में पहचान बना चुकी हैं।

वहीं, चिंतला संजय ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग आधारित स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाओं को आगे बढ़ाया है।

आत्मविश्वास और आकांक्षाओं को मिल रही नई दिशा

यह योजना केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और बेहतर भविष्य के प्रति आकांक्षा का भी निर्माण कर रही है। योजना के लाभार्थी विद्यार्थी शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और पेशेवर विकास के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच ही समावेशी और विकसित भारत की आधारशिला है। टॉप क्लास एजुकेशन योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो प्रतिभा, अवसर और दृढ़ संकल्प को जोड़कर देश के लिए नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, प्रबंधकों, विधि विशेषज्ञों, उद्यमियों और नवाचारकर्ताओं को तैयार कर रही है।

योजना के अंतर्गत प्राप्त प्रत्येक सफलता यह साबित करती है कि उचित अवसर मिलने पर प्रतिभा किसी भी बाधा को पार कर सकती है। यह पहल विकसित, आत्मनिर्भर और समावेशी भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति छात्रावास के प्रतिनिधि मंडल ने की सौजन्य भेंट

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से विगत दिवस राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में शासकीय आदर्श पोस्ट मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास, पेंशनबाड़ा रायपुर के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री खुशवंत साहेब उपस्थित थे।

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री साय को संत शिरोमणि बाबा गुरु घासीदास जी की 269वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित गुरु पर्व कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने का आमंत्रण दिया।

प्रतिनिधियों ने बताया कि इस अवसर पर राजधानी रायपुर के विभिन्न छात्रावासों—कालाबाड़ी कन्या छात्रावास, शंकर नगर कन्या छात्रावास, आमापारा छात्रावास, डी.डी.यू. छात्रावास, कबीर छात्रावास, प्रयास छात्रावास, देवपुरी छात्रावास सहित अनेक छात्रावासों के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में सहभागिता करेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास जी के विचार सामाजिक सद्भाव, समरसता और मानव-सेवा की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने इस प्रकार के आयोजनों को छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास एवं मूल्य शिक्षा के लिए अत्यंत प्रेरणादायी बताया।

प्रतिनिधिमंडल में छात्रावास के पदाधिकारी, शिक्षकगण एवं अन्य सदस्य उपस्थित थे।

जनजातीय शिक्षा को सशक्त बनाने हेतु NESTS की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

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राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति छात्र शिक्षा समाज (NESTS) ने 21–22 नवंबर 2025 को आकाशवाणी भवन, नई दिल्ली में “जनजातीय शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण ढाँचा निर्माण” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया। यह कार्यशाला सरकार द्वारा जनजातीय समुदायों की शैक्षणिक संरचना को मज़बूत करने और एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों (EMRS) के माध्यम से सतत एवं प्रभावी शिक्षण वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल माननीय प्रधानमंत्री के “शिक्षा द्वारा जनजातीय परिवर्तन” के विज़न को साकार करने पर केंद्रित है।

जनजाति कार्य मंत्रालय की सचिव ने कार्यशाला का उद्घाटन किया, इंजीनियर्स हैंडबुक जारी

कार्यक्रम का उद्घाटन रंजन चोपड़ा, सचिव, जनजाति कार्य मंत्रालय ने किया। उन्होंने EMRS इंजीनियर्स हैंडबुक भी जारी की।
सचिव ने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य NESTS, परियोजना टीमों और EMRS निर्माण स्थलों पर कार्यरत इंजीनियरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है।

उन्होंने कहा कि EMRS जनजातीय छात्रों और उनके परिवारों में आत्मविश्वास और सम्मान की भावना जगाते हुए सामाजिक परिवर्तन का माध्यम हैं।

उन्होंने विद्यालयों के निर्माण में सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और सौंदर्य को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ये विद्यालय आशा और अवसर के प्रतीक हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यद्यपि स्थलों से संबंधित चुनौतियाँ हैं, फिर भी परिश्रम, पारदर्शी संवाद और समान अपेक्षाएँ उच्च गुणवत्ता वाले EMRS कैंपस बनाने में सहायक होंगे। यह कार्यशाला तकनीकी सवालों को हल करने, सूचना की खाई को पाटने और समन्वित प्रयासों को प्रोत्साहित करेगी।

NESTS के आयुक्त का संबोधन

शुरुआत में NESTS के आयुक्त अजीत के. श्रीवास्तव ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया।
अपने संबोधन में उन्होंने बताया:

  • वर्तमान में 499 EMRS स्कूल संचालित हैं,

  • 397 स्कूल भवन पूर्ण हो चुके हैं,

  • शेष विद्यालय निर्माण या पूर्व-निर्माण चरणों में हैं।

उन्होंने समय पर गुणवत्तापूर्ण निर्माण के महत्व पर जोर देते हुए कहा:

“अच्छी गुणवत्ता वाले EMRS का समय पर पूरा न होना मतलब है कि जनजातीय बच्चे स्कूल नहीं जा पाएँगे—जो बिल्कुल स्वीकार्य नहीं।”

कार्यशाला के बारे में

कार्यशाला में PSUs, CPWD, राज्य सरकारों और विभिन्न निर्माण एजेंसियों के इंजीनियरों ने भाग लिया।
यह कार्यक्रम क्षमता-विकास पर केंद्रित था ताकि EMRS निर्माण कार्य को तेजी और गुणवत्ता के साथ आगे बढ़ाया जा सके।

सत्रों में निम्न विषय शामिल थे:

  • परियोजना योजना व निगरानी

  • भू-तकनीकी जांच

  • सामग्री परीक्षण

  • अर्थवर्क और रिइनफोर्समेंट

  • जनजातीय क्षेत्रों की चुनौतियों के अनुरूप निर्माण प्रथाएँ

प्रतिभागियों ने भौगोलिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों के अनुरूप निर्माण मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

गुणवत्तापूर्ण निर्माण के लिए विशेषज्ञों का मार्गदर्शन

IIT, NIT, CBRI, SAI सहित प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों ने निम्न विषयों पर मार्गदर्शन दिया:

  • गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली

  • सामग्री परीक्षण तकनीक

  • प्रभावी परियोजना प्रबंधन

  • क्षेत्रीय चुनौतियों के समाधान

इंटरैक्टिव सत्रों में इंजीनियरों ने अपने अनुभव साझा किए और व्यावहारिक समाधान खोजे।

यह कार्यशाला जनजातीय छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मजबूत विद्यालय अवसंरचना सुनिश्चित करने की दिशा में NESTS के मिशन का महत्वपूर्ण कदम है। यह जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा के परिदृश्य को बदलने की सरकारी प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है।


वार्षिक NES सम्मेलन 2025: नेवल स्कूलों में गुणवत्ता, समानता और NEP-2020 के अनुरूप परिवर्तन पर फोकस

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वार्षिक नेवी एजुकेशन सोसाइटी (NES) सम्मेलन 2025 सफलतापूर्वक 10 से 13 नवंबर 2025 तक ईस्टर्न नेवल कमांड, विशाखापत्तनम में आयोजित किया गया।

सम्मेलन की मुख्य विशेषताएँ

सम्मेलन में कार्यकारी समिति, प्रबंधन सलाहकार समिति (MAC), और अकादमिक सलाहकार समिति (AAC) की महत्वपूर्ण बैठकों का आयोजन किया गया, जिसमें नेवल स्कूलों की नीति संरचना और संचालनात्मक पहलुओं पर चर्चा हुई, विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के परिवर्तनकारी कार्यान्वयन के संदर्भ में।

  • कार्यकारी समिति की बैठक 12 नवंबर 2025 को आयोजित हुई और इसकी अध्यक्षता वी.एdm सीआर प्रवीण नायर, कंट्रोलर पर्सनल सर्विसेज और NES के अध्यक्ष ने की।

  • MAC और AAC सत्र की अध्यक्षता कमोडोर (नौसेना शिक्षा) Cmde SM उरूज अथर और NES के उपाध्यक्ष ने की।

सम्मेलन में नेवल हेडक्वार्टर से अधिकारी तथा देशभर के नेवल स्कूलों का प्रतिनिधित्व करने वाले शैक्षणिक और प्रशासनिक नेताओं ने भाग लिया।

प्रमुख गतिविधियाँ और चर्चा

  • प्रतिभागियों ने केस स्टडी प्रस्तुत कीं, जिसमें चुनौतियों और उनके समाधान की प्रभावी रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया।

  • मुद्दा-आधारित चर्चाओं के माध्यम से विशेषज्ञता साझा की गई और महत्वपूर्ण कार्यात्मक मामलों पर रचनात्मक संवाद हुआ, जिससे ठोस और लागू करने योग्य समाधान तैयार हुए।

नवाचार और समावेशिता

इस बार पहली बार सम्मेलन में संकल्प स्कूलों ने भाग लिया – ये संस्थाएँ नेवल समुदाय के बच्चों के लिए शिक्षा, पूर्व-व्यावसायिक प्रशिक्षण और जीवन कौशल विकास को बढ़ावा देती हैं। यह कदम समावेशिता और सहयोगी विकास के प्रति NES की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्य भाषण

वी.एडमनायर ने अपने मुख्य भाषण में नेवल स्कूलों में समानता और समावेशी शैक्षणिक वातावरण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने पिछले वर्ष की प्रगति की समीक्षा करते हुए NEP-2020 के अनुरूप चल रहे सुधारों, मानकीकरण और नीति सुविधा में प्रगति, साथ ही बुनियादी ढांचे और शिक्षक विकास में निवेश को रेखांकित किया।

उन्होंने NES के संशोधित विज़न और मिशन स्टेटमेंट्स भी प्रस्तुत किए, जो छात्रों को भविष्य के लिए तैयार नागरिक बनाने के उद्देश्य से एक मजबूत मूल्य प्रणाली पर आधारित हैं। यह संशोधन NEP-2020 की परिवर्तनकारी सोच को प्रतिबिंबित करता है और उच्च गुणवत्ता, समावेशी शिक्षा प्रदान करने के NES के संकल्प को पुष्ट करता है।

उपलब्धियाँ और पुरस्कार

सम्मेलन के दौरान NES अकादमिक पुरस्कार 2024-25 प्रदान किए गए, जिससे शैक्षणिक उत्कृष्टता को सम्मानित किया गया। इसके अलावा, प्रतिभागियों को विशाखापत्तनम के नेवल चिल्ड्रन स्कूलों का गाइडेड टूर भी कराया गया।


दूरदराज़ के आदिवासी गाँवों से आई उज्जवल सफलता: 597 EMRS छात्रों ने JEE और NEET में हासिल की कामयाबी

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देश के दूरदराज़ आदिवासी इलाकों से आने वाले 597 छात्रों ने 2024-25 में JEE Main, JEE Advanced और NEET जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। यह बड़ी छलांग पिछले साल के सिर्फ 16 छात्रों (JEE) और 6 छात्रों (NEET) की तुलना में बेहद प्रेरणादायक है।

यह सफलता Eklavya Model Residential Schools (EMRS) की विशेष शिक्षा और मार्गदर्शन की देन है, जो अनुसूचित जनजाति (ST) छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर उन्हें बड़े अवसरों तक पहुँचाने में मदद करती हैं। कुल 230 EMRS स्कूलों में से 101 स्कूलों के छात्रों ने इन प्रतिष्ठित परीक्षाओं को पास किया।

प्रेरणादायक उदाहरण:

जतिन नेगी, हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के सांगला गाँव से, जिन्होंने JEE Advanced में 421वीं रैंक हासिल की। उन्होंने IIT जोधपुर में B.Tech की पढ़ाई शुरू की। उन्होंने कहा कि EMRS में शिक्षक और संरचित शिक्षा प्रणाली ने उनके सपनों को साकार करने में मदद की।

पड़वी उर्जस्वीबेन अमृतभाई, गुजरात के खपतिया गाँव की रहने वाली, ने NEET परीक्षा पास की और अब GMERS मेडिकल कॉलेज, जूनागढ़ में MBBS कर रही हैं। उन्होंने बताया कि शिक्षक का मार्गदर्शन और मेहनत ने उन्हें सामाजिक बाधाओं को पार करने में मदद की।

EMRS छात्रों का प्रदर्शन (2024–25)

राज्य     JEE Main       JEE Advanced         NEET
आंध्र प्रदेश         17               1            0
छत्तीसगढ़         17               3           18
गुजरात        37               3          173
हिमाचल प्रदेश         3               1            7
झारखंड        6               0              0
कर्नाटक         7               0            0
मध्य प्रदेश      51              10          115
महाराष्ट्र         7               2            7
ओडिशा      10               4            0
तेलंगाना      60              10           24
उत्तर प्रदेश       1               0               0
उत्तराखंड       3               0            0
कुल     219              34          344

EMRS क्या हैं?

Eklavya Model Residential Schools (EMRS) केंद्रीय जनजाति मंत्रालय द्वारा स्थापित स्कूल हैं। ये स्कूल दूरदराज़ आदिवासी बच्चों को मुफ्त, CBSE-सम्बद्ध गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, हॉस्टल सुविधा, पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं।

संविधान और कानून की भूमिका

भारत के संविधान ने अनुसूचित जातियों और जनजातियों के छात्रों के लिए विशेष प्रावधान बनाए हैं। Articles 15 और 46, और Central Educational Institutions (Reservation in Admission) Act, 2006 जैसी कानून व्यवस्था सुनिश्चित करती हैं कि इन छात्रों को उच्च शिक्षा और रोजगार में समान अवसर मिलें।

विशेष शैक्षिक समर्थन

EMRS छात्रों को IIT-JEE और NEET की तैयारी के लिए डिजिटल ट्यूटरिंग, स्मार्ट क्लास, कौशल विकास लैब्स, अटल टिंकरिंग लैब्स और करियर मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं मिलती हैं। यह मदद छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए सक्षम बनाती है।

जतिन और पड़वी जैसी कहानियां यह दिखाती हैं कि सही शिक्षा, मेहनत और मार्गदर्शन से किसी भी दूरदराज़ आदिवासी क्षेत्र का बच्चा बड़े लक्ष्य हासिल कर सकता है।


15,000 वंचित छात्रों को मिलेगी फ्री ऑनलाइन कोचिंग: सामाजिक न्याय विभाग का पीडब्ल्यू(PW) फाउंडेशन से समझौता

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सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार ने आज पीडब्ल्यू फाउंडेशन (Physics Wallah Foundation) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत 15,000 पात्र अभ्यर्थियों – जिनमें अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) तथा पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के लाभार्थी शामिल हैं – को निःशुल्क संरचित ऑनलाइन कोचिंग प्रदान की जाएगी।

यह समझौता 7 नवम्बर 2025 को दोपहर 12 बजे शास्त्री भवन, नई दिल्ली में, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

इस पहल के अंतर्गत पीडब्ल्यू फाउंडेशन UPSC, SSC और बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी के लिए उच्च गुणवत्ता की डिजिटल कोचिंग निःशुल्क उपलब्ध कराएगा। इसमें लाइव और रिकॉर्डेड लेक्चर, टेस्ट सीरीज़, मेंटरशिप, काउंसलिंग और अध्ययन सामग्री शामिल होगी। इस पहल का उद्देश्य वंचित वर्गों के छात्रों के लिए प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी को सुलभ बनाना है।

यह साझेदारी गैर-वित्तीय सहयोग (Non-Financial Collaboration) के रूप में कार्य करेगी, जिसमें विभाग पात्र छात्रों का चयन पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से करेगा, जबकि पीडब्ल्यू फाउंडेशन बिना किसी शुल्क के अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कोचिंग सामग्री उपलब्ध कराएगा।

इस अवसर पर विभाग के सचिव ने कहा —

“यह सहयोग गुणवत्तापूर्ण कोचिंग सुविधाओं को हाशिए पर बसे वर्गों के छात्रों तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। डिजिटल सशक्तिकरण और समावेशी शिक्षा के माध्यम से हम युवाओं को ऐसे अवसर प्रदान करना चाहते हैं जिससे वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकें।”

यह पहल सरकार की “समावेशी मानव संसाधन विकास” (Inclusive Human Resource Development) की प्रतिबद्धता को सशक्त बनाती है तथा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-4 (SDG-4) — “सभी के लिए समावेशी और समान गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित करना” — के अनुरूप है।

अंतर्राष्ट्रीय पर्पल फेस्ट में दिव्यांगों के लिए शिक्षा और कौशल विकास में तीन नई पहलें लॉन्च

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गोवा- अंतर्राष्ट्रीय पर्पल फेस्ट के दूसरे दिन, सुनने, पढ़ने और लिखने में दिव्यांग व्यक्तियों की पहुंच बढ़ाने के लिए तीन महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की गई, जो समावेशी शिक्षा और कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

राजेश अग्रवाल, सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, भारत सरकार, ने इन पहलों का उद्घाटन किया। कार्यक्रम में ताहा हाज़िक, सचिव, SCPD गोवा; ऋचा शंकर, DDG; प्रवीण कुमार, CMD, ALIMCO; कुमार राजू, निदेशक, भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (ISLRTC); जसबीर सिंह, उप सचिव;अनुपम शुक्ला,देबला भट्टाचार्य, उप सचिव; और एस.के. महतो, सेवानिवृत्त उप सचिव उपस्थित रहे।

इन पहलों से सरकार की यह प्रतिबद्धता झलकती है कि दिव्यांगों के लिए बाधा-मुक्त शिक्षा प्रणाली तैयार की जाए और उन्हें वैश्विक शिक्षा एवं पेशेवर अवसरों में पूरी भागीदारी का अवसर मिले।

पहली पहल: IELTS प्रशिक्षण हैंडबुक

पहली प्रमुख पहल “IELTS Training Handbook for Persons with Disabilities” की लॉन्चिंग थी। इसे Believe in the Invisible (BITI) ने दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) के समर्थन से विकसित किया है।

  • इस हैंडबुक की लेखिका अंजली व्यास, BITI की सह-संस्थापक और ब्रिटिश काउंसिल–सर्टिफ़ाइड IELTS ट्रेनर हैं।

  • यह दिव्यांग व्यक्तियों के लिए समावेशी, संरचित और लर्नर-फ्रेंडली पहला संसाधन है।

  • यह हैंडबुक स्व-अध्ययन गाइड और प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण मैनुअल दोनों के रूप में कार्य करती है।

  • यह सुनने, पढ़ने, लिखने और बोलने के चारों IELTS मॉड्यूल के लिए अनुकूलित रणनीतियाँ, व्यावहारिक उपकरण, समय प्रबंधन मार्गदर्शन, व्याकरण और शब्दावली निर्माण सहायता, और ISL (भारतीय सांकेतिक भाषा) वीडियो लिंक प्रदान करती है।

यह प्रकाशन समावेशी शिक्षा और वैश्विक भाषा कौशल प्रशिक्षण में समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

दूसरी पहल: ISLRTC प्रशिक्षण और प्रमाणन

भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र (ISLRTC), नई दिल्ली, ने DEPwD की कौशल प्रशिक्षण पहल के तहत ISL इंटरप्रिटेशन (CISLI) / SODA (Siblings of Deaf Adults) और CODA (Children of Deaf Adults) के लिए Recognition of Prior Learning (RPL) – Certification Course का आयोजन किया।

  • यह कोर्स 11 अगस्त से 29 अगस्त 2025 तक ऑफ़लाइन मोड में ISLRTC, नई दिल्ली में संपन्न हुआ।

  • 17 प्रतिभागियों ने इस कोर्स को सफलतापूर्वक पूरा किया।

  • ग्रेडिंग उनके प्रदर्शन के आधार पर की गई और प्रमाणपत्र वितरण समारोह 3 दिसंबर 2025, अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस पर आयोजित किया जाएगा।

तीसरी पहल: ASL और BSL में विशेषज्ञ प्रशिक्षण कार्यक्रम

ISLRTC ने अमेरिकन साइन लैंग्वेज (ASL) और ब्रिटिश साइन लैंग्वेज (BSL) में विशेषीकृत बेसिक ट्रेनिंग प्रोग्राम की भी घोषणा की।

  • यह चार सप्ताह (1 माह) का प्रशिक्षण कार्यक्रम ISLRTC, नई दिल्ली में 3 दिसंबर 2025 से शुरू होगा।

  • इसका उद्देश्य ISL पेशेवरों को ASL और BSL के मूल तत्व, व्याकरण, वाक्य रचना और शब्दावली से परिचित कराना और अंतरराष्ट्रीय मंचों में उनके पेशेवर अवसरों को मजबूत करना है।

  • इस पहल से ISLRTC की भूमिका बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय श्रवण-असक्षम आगंतुकों को भारतीय संस्कृति और विरासत का अनुभव प्राप्त होगा।

सारांश

ये तीन पहलों एक समान दृष्टिकोण को दर्शाती हैं: दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभ, समावेशी और सशक्त मार्ग तैयार करना ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीख सकें, संवाद कर सकें और प्रगति कर सकें।


फरसाबहार में बन रहा है सर्वसुविधायुक्त एकलव्य विद्यालय

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 रायपुर- जशपुर जिला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण यहां के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु फरसाबहार में 37.80 करोड़ रुपये की लागत से एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के नवीन भवन का निर्माण तीव्र गति से किया जा रहा है।

नवीन भवन आधुनिक एवं सर्वसुविधायुक्त होगा, जिसमें शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों के समग्र विकास हेतु सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इस विद्यालय में कक्षा 6वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी। वर्तमान में फरसाबहार स्थित विद्यालय में कक्षा 8वीं तक शिक्षा दी जा रही है, जिसे अब 12वीं तक विस्तारित करने की योजना है।

आधुनिक भवन में निःशुल्क शिक्षा, गणवेश, पुस्तकें, भोजन, छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब, खेल मैदान तथा विकलांग विद्यार्थियों के लिए सुलभ अवसंरचना जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। साथ ही ई-लर्निंग, जीवन कौशल विकास और कैरियर मार्गदर्शन जैसी सेवाओं से भी विद्यार्थियों को लाभान्वित किया जाएगा। यह विद्यालय विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का महत्वपूर्ण केन्द्र होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी पहल से जशपुर जिले के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक नया अवसर प्राप्त हो रहा है।


मुख्यमंत्री की पहल पर शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े शाला त्यागी बच्चे

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पहाड़ी कोरवा बाहुल्य क्षेत्र के पांच बच्चों को आश्रम एवं स्कूल में कराया गया एडमिशन

रायपुर-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशन में जिला प्रशासन द्वारा विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्र के शाला त्यागी बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की मुहिम  चलाई जा रही है। इसके तहत मैनपाट विकासखण्ड के कोरता ग्राम पंचायत के विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समाज के 5 बच्चों का विद्यालय एवं आश्रम में प्रवेश कराया गया।

इस अभियान अंतर्गत बच्चों को पुस्तकें, स्कूल ड्रेस और अन्य अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई। पहाड़ी कोरवा बसाहट क्षेत्र में भ्रमण के दौरान यह देखा गया कि पहाड़ी कोरवा बच्चे अधिकारियों को देख दूर भागते थे। उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा में जोड़ने  प्रशासन निरंतर टीम बनाकर सर्वे कर रही है। बच्चों के अभिभावकों को भी समझाइश दी जा रही है । अभिभावक अधिकारियों के समझाइश को मानकर बच्चों को स्कूल भेजने तैयार हो रहे हैं।अध्ययन सामग्री पाकर बच्चों के चेहरे पर उत्साह और मुस्कान छा गई। बच्चों ने कहा कि अब वे स्कूल छोड़कर कभी नहीं जाएंगे और नियमित रूप से पढ़ाई करेंगे।

मुहिम अंतर्गत कुमारी राखि को कक्षा चौथी, कु. कुमारी को कक्षा चौथी, कुमारी सुमारी को कक्षा चौथी, कुमारी रवीना को कक्षा चौथी, कुमारी सुमंती को कक्षा चौथी शाला प्रवेश कराया गया।बच्चों के अभिभावकों को शिक्षा की महत्ता बताते हुए उन्हें प्रेरित किया कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजें। उन्होंने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने और अपने भविष्य को संवारने की सलाह दी गई।

शाला त्यागी बच्चों का पुनः नामांकन जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के समन्वित प्रयास का हिस्सा है। इसके लिए विकासखण्ड स्तर पर समितियों का गठन कर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। यह पहल न केवल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में ठोस कदम है, बल्कि विशेषकर पिछड़ी जनजातियों के बच्चों को शिक्षा से जोड़कर उनके उज्ज्वल भविष्य की राह भी प्रशस्त करेगी।


नानदमाली शाला में शिक्षक पदस्थापना से बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार

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रायपुर-प्राथमिक शाला नानदमाली में विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्य सरकार ने युक्तियुक्तकरण के तहत अतिरिक्त शिक्षकों की पदस्थापना की है, जिससे विद्यालय का शैक्षणिक वातावरण पूरी तरह बदल गया है। शिक्षक पदस्थापना से बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिसकी अभिभावकों ने सराहना की है।

विद्यालय की वर्तमान स्थिति:

सरगुजा जिले के नानदमाली प्राथमिक शाला में वर्तमान में 123 विद्यार्थी दर्ज हैं। पहले शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी, लेकिन नवीन पदस्थापना के बाद अब विद्यालय में कुल 5 शिक्षक उपलब्ध हैं:

  • प्रधान पाठक: पुष्पा बड़ा

  • सहायक शिक्षक: दीनानाथ कैवर्त

  • सहायक शिक्षक: पुष्पा पंडो

  • सहायक शिक्षक: हरी चंद पटेल

  • सहायक शिक्षक (युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया): नीलिमा सिंह

इन शिक्षकों के चलते प्रत्येक कक्षा में विद्यार्थियों को पर्याप्त समय और व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिल रहा है, जिससे उनकी सीखने की क्षमता में सुधार देखा जा रहा है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम:

पांचों शिक्षक अब बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने में सक्रिय हैं। कक्षाओं में शिक्षक-छात्र अनुपात संतुलित होने से पढ़ाई अधिक व्यवस्थित और सरल ढंग से संचालित हो रही है। बच्चों को अब व्यक्तिगत मार्गदर्शन और पर्याप्त समय मिल रहा है।

अभिभावकों की प्रतिक्रिया:

अभिभावकों ने शिक्षक पदस्थापना और युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया की सराहना की है। उनका कहना है कि पहले कक्षाओं में शिक्षकों की कमी से पढ़ाई अधूरी रह जाती थी, लेकिन अब परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की इस पहल से न केवल विद्यार्थियों का शैक्षणिक स्तर सुधर रहा है, बल्कि पूरे गांव का शैक्षिक वातावरण सकारात्मक बन रहा है।

सरकारी पहल:

प्रदेश सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मानकों के अनुरूप हर विद्यालय में शिक्षक-छात्र अनुपात संतुलित रखने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

निष्कर्ष:

युक्तियुक्तकरण के तहत शिक्षक पदस्थापना से नानदमाली शाला में बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार आया है और यह ग्रामीण शिक्षा में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


अमित शाह ने जोधपुर में 'श्री पारसमल बोहरा कॉलेज फॉर द विजुअली इम्पेयरड' और छात्रावास की आधारशिला रखी

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जोधपुर- केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज जोधपुर, राजस्थान में 'श्री पारसमल बोहरा कॉलेज फॉर द विजुअली इम्पेयरड' और छात्रों के लिए छात्रावास की आधारशिला रखी। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमं त्रीभजनलाल शर्मा, केंद्रीय मंत्रीग जेन्द्र सिंह शेखावत और कई विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।

मुख्य बातें:

  • तीन परियोजनाओं की आधारशिला: कुल लागत लगभग 15 करोड़ रुपये, जिनसे सैकड़ों दृष्टिहीन छात्रों के जीवन में नई रोशनी आएगी।

  • पारसमल बोहरा कॉलेज: 2022 में राजस्थान का पहला दृष्टिहीनों का कॉलेज।

  • सुशीला जी का योगदान: पांच स्कूल, दो कॉलेज, नि:शुल्क होस्टल, भोजन, ऑडियो बुक्स, रिकॉर्डेड लेक्चर, ब्रेल प्रिंटिंग प्रेस, स्क्रीन रीडर, कंप्यूटर लैब और लाइब्रेरी के माध्यम से सैकड़ों छात्रों के जीवन में ज्ञान और दृष्टि का प्रकाश।

  • दिव्यांग शब्द की पहल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में 'दिव्यांग' शब्द का प्रयोग शुरू किया, जिसने देश में दिव्यांगजन के प्रति दृष्टिकोण बदल दिया।

  • खेल और उपलब्धियाँ: पिछले तीन पैरा ओलंपिक खेलों में भारत ने 52 पदक जीते, जबकि 2012 तक कुल 8 पदक थे।

  • सुविधाएँ और बजट: दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग का बजट 338 करोड़ से बढ़कर 1,313 करोड़; 1,314 केंद्रीय भवनों और कई हवाई अड्डों को दिव्यांगजन के लिए सुलभ बनाया गया; 31 लाख लोगों को कृत्रिम सहायक उपकरण प्रदान किए गए।

निष्कर्ष:

अमित शाह ने कहा कि जब समाज, सरकार और स्वयंसेवी संस्थाएँ मिलकर दिव्यांगजन के कल्याण के लिए काम करती हैं, तो कुछ भी असंभव नहीं है। इन प्रयासों से शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और समग्र सशक्तिकरण के अवसर बढ़े हैं, जिससे दिव्यांगजन का जीवन सरल, सम्मानजनक और सशक्त बन रहा है।


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