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ESTIC 2025 में PitchX: भारत के DeepTech स्टार्टअप्स ने नवाचार और निवेशकों के समक्ष प्रदर्शित किया अपनी प्रतिभा

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नई दिल्ली-Emerging Science & Technology Innovation Conclave (ESTIC 2025) के दूसरे दिन PitchX @ ESTIC 2025 में नवाचार और उद्यमिता का जीवंत प्रदर्शन देखा गया, जिसमें भारत के सबसे आशाजनक DeepTech स्टार्टअप्स और प्रमुख निवेशक एकत्र हुए।

इस कार्यक्रम में 20 से अधिक अग्रणी स्टार्टअप्स ने अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया और प्रतिष्ठित निवेशकों के सामने अपने विचार प्रस्तुत किए। निवेशकों में PeakXV, Yournest, FAST India, IIMA Ventures, और Silver Needle Ventures (SNV) Fund के प्रतिनिधि शामिल थे। इस आयोजन ने भारत में DeepTech उद्यमिता की बढ़ती गति और वैज्ञानिक अनुसंधान को बाजार-योग्य समाधानों में बदलने की दृष्टि को प्रदर्शित किया।

सम्माननीय केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए नवाचार को समर्थन देने के लिए प्रारंभिक उद्योग संबंधों और निवेशक जुड़ाव के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने हाल ही में लॉन्च किए गए ₹1 लाख करोड़ के Research, Development and Innovation (RDI) योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पहल निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करेगी और भारत के DeepTech क्रांति को गति देगी।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव, प्रो. अभय करंदिकर ने RDI योजना के संचालनात्मक ढांचे पर प्रकाश डाला और घोषणा की कि DST और Technology Development Board (TDB) जल्द ही Sunrise सेक्टर्स में DeepTech स्टार्टअप्स का समर्थन करने के लिए प्रारंभिक निवेश करेंगे।

DeepTech स्टार्टअप शोकेस में भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा नामांकित 30 ब्रेकथ्रू स्टार्टअप्स को प्रदर्शित किया गया। इस शोकेस ने अनुसंधान उत्कृष्टता, बौद्धिक संपदा सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता से प्रेरित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने में सरकार की प्रतिबद्धता को उजागर किया।

स्टार्टअप्स ने Space & Defence, Quantum Technologies, Cybersecurity, Health & Life Sciences, Semiconductors, Industry 4.0, Artificial Intelligence, Water और AgriTech जैसे क्षेत्र प्रस्तुत किए।

कुछ स्टार्टअप्स जैसे EndureAir Systems, Atreya Innovations, Lifespark Technologies, Noccarc Robotics, और FortyTwo Labs अत्यधिक निवेश योग्य के रूप में उभरे। इस सम्मेलन में महिला उद्यमियों को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया, जो भारत के समावेशी, तकनीक-प्रधान उद्यमिता दृष्टिकोण का प्रतीक हैं।

इस आयोजन का समापन निवेशकों और स्टार्टअप्स की उत्साही भागीदारी के साथ हुआ, जिसने PitchX @ ESTIC 2025 को भारत के DeepTech भविष्य के लिए उत्प्रेरक और देश की नवाचार-आधारित वृद्धि के लिए एक मजबूत आधार के रूप में पुष्ट किया।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किए तीन क्रांतिकारी स्वदेशी नवाचार — QSIP, क्वांटम चिप और CAR-T सेल थेरेपी

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माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को भेंट की तीन अभूतपूर्व नवाचार उपलब्धियां — QSIP: भारत की अपनी क्वांटम सुरक्षा चिप, 25-क्यूबिट QPU: भारत की पहली क्वांटम कंप्यूटिंग चिप और CAR-T सेल थेरेपी: भारत की पहली स्वदेशी कैंसर सेल थेरेपी

चल रहे Emerging Science, Technology & Innovation Conclave (ESTIC 2025) के दौरान माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को तीन ऐतिहासिक नवाचार उपलब्धियां समर्पित कीं —

  1. QSIP (Quantum Security in Package) : भारत की अपनी क्वांटम सुरक्षा चिप।
  2. 25-क्यूबिट QPU (Quantum Processing Unit) : भारत की पहली क्वांटम कंप्यूटिंग चिप, जो भविष्य की कंप्यूटेशन शक्ति का प्रतीक है।
  3. CAR-T सेल थेरेपी : भारत की पहली स्वदेशी कैंसर सेल थेरेपी, जिसे भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित किया है।

इनमें से NexCAR19, जो विश्व की पहली humanised CAR-T therapy है, भारत में ImmunoACT द्वारा विकसित की गई है — यह वास्तव में “Made in India, for the World” नवाचार का उदाहरण है। इस परियोजना को Department of Biotechnology (DBT) और BIRAC द्वारा समर्थन प्राप्त हुआ है।

CAR-T सेल थेरेपी (Chimeric Antigen Receptor T-cell therapy) कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति बनकर उभरी है। विश्वभर में किए गए क्लिनिकल ट्रायल्स ने दर्शाया है कि यह थेरेपी Acute Lymphocytic Leukemia जैसे गंभीर कैंसर रोगियों में अत्यंत प्रभावी साबित हुई है।

NexCAR19, भारत की पहली living drug, ने जीन थेरेपी को न केवल किफायती बल्कि सुलभ भी बनाया है, जबकि वैज्ञानिक गुणवत्ता और रोगी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है।

ImmunoACT, जो IIT बॉम्बे की एक स्पिन-ऑफ स्टार्टअप है, को BIRAC के BioNest Initiative के तहत वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और संसाधन प्रदान किए गए, जब यह Society for Innovation and Entrepreneurship (SINE), IIT बॉम्बे के Technology Business Incubator में इनक्यूबेट की जा रही थी।

वर्ष 2021 में, भारत की पहली CAR-T थेरेपी के Lentivirus manufacturing और clinical trial के लिए DBT और BIRAC ने National Biopharma Mission के तहत आंशिक सहायता प्रदान की। यह परीक्षण ACTREC Centre, टाटा मेमोरियल अस्पताल में TMC-IIT Bombay Team द्वारा किया गया, जिसमें ImmunoACT निर्माण भागीदार के रूप में कार्यरत है।

हाल ही में, DBT ने BioE3 Policy के तहत Biomanufacturing initiative के माध्यम से ImmunoACT को 200-लीटर GMP lentiviral vector and plasmid प्लेटफॉर्म स्थापित करने हेतु वित्त पोषण प्रदान किया है। इस प्लेटफॉर्म से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और थेरेपी की लागत कम होगी। अनुमान है कि यह GMP ग्रेड gene delivery vector प्रति वर्ष कम से कम 1000 रोगियों की मदद कर सकेगा।

DBT प्रारंभिक एवं उन्नत translational research को भी बढ़ावा दे रहा है ताकि देश में CAR-T आधारित थेरेप्यूटिक्स विकसित कर विभिन्न प्रकार के कैंसर जैसे Multiple Myeloma (MM), Acute Lymphocytic Leukemia, B-cell Acute Lymphoblastic Leukemia, glioblastoma आदि का उपचार किया जा सके।

यह पहल भारत को कैंसर उपचार में आत्मनिर्भर और वैश्विक अग्रणी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

भारत ने प्रदर्शित किया पहला 500 किमी लंबा क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (QKD) नेटवर्क : राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत क्वांटम-सुरक्षित संचार में ऐतिहासिक उपलब्धि

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विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (एनक्यूएम) के तहत समर्थित 8 स्टार्टअप्स में से एक ने भारत का पहला व्यापक क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन (QKD) नेटवर्क सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया है, जो 500 किलोमीटर से अधिक लंबाई तक फैला हुआ है।

New design of rack of Quantum Suraksha Kavach launched

यह ऐतिहासिक उपलब्धि बेंगलुरु स्थित क्वांटम टेक्नोलॉजी कंपनी, QNu Labs Pvt. Ltd. द्वारा हासिल की गई है, जिसने मौजूदा ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क पर यह क्वांटम-सुरक्षित संचार नेटवर्क विकसित किया। यह भारत में क्वांटम-सुरक्षित संचार (Quantum Secure Communication) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन (QKD) नेटवर्क के इस प्रदर्शन की औपचारिक घोषणा एमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC 2025) के दौरान की गई। इस अवसर पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय के. सूद, राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के मिशन गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अजय चौधरी, और डीएसटी के सचिव प्रो. अभय करंडिकार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

QKD system installed in the QSK rack


नए ‘क्वांटम सुरक्षा कवच (Quantum Suraksha Kavach)’ रैक डिज़ाइन का शुभारंभ

कार्यक्रम के दौरान क्वांटम सुरक्षा कवच (QSK) रैक में स्थापित QKD प्रणाली का नया डिज़ाइन भी लॉन्च किया गया।

यह प्रदर्शन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है जिसमें वे भारत को उभरती हुई प्रौद्योगिकियों और सुरक्षित डिजिटल बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अग्रणी के रूप में देखते हैं। यह भारत को “सेकंड क्वांटम रेवोल्यूशन” में एक प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित करता है और सुरक्षित डिजिटल संचार एवं उन्नत साइबर सुरक्षा के नए आयाम खोलता है।

यह परियोजना आई-हब क्वांटम टेक्नोलॉजी फाउंडेशन (I-Hub QTF) के माध्यम से वित्तपोषित की गई, जो राष्ट्रीय मिशन ऑन इंटरडिसिप्लिनरी साइबर-फिजिकल सिस्टम्स (NMICPS) के अंतर्गत आईआईएसईआर पुणे में स्थित है।

भारतीय सेना का महत्वपूर्ण योगदान

भारतीय सेना के सदर्न कमांड सिग्नल्स ने इस क्षमता प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस QKD परीक्षण के लिए विशेष रूप से राजस्थान सेक्टर में एक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क टेस्ट-बेड तैयार किया गया। इस नेटवर्क में कई नोड्स शामिल थे, जिनमें से दो को “ट्रस्टेड नोड्स” के रूप में उपयोग किया गया ताकि पूरे 500 किलोमीटर के प्रभावी क्षेत्र में क्वांटम की एक्सचेंज संभव हो सके।

यह उपलब्धि भारत में क्वांटम-सुरक्षित संचार प्रणाली को सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम है और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के उद्देश्यों को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। यह तकनीक, अनुसंधान, उद्योग और रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र (STRIDE) के बीच उत्कृष्ट सहयोग का उदाहरण है।

QSIP तकनीक का प्रदर्शन प्रधानमंत्री के समक्ष

उसी स्टार्टअप QNu Labs द्वारा विकसित क्वांटम रैंडम नंबर जनरेटर सिस्टम-इन-पैकेज (QSIP) को ESTIC 2025 के उद्घाटन सत्र के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रदर्शित किया। यह तकनीक क्वांटम-प्रमाणित रैंडमनेस प्रदान करती है, जो क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिद्म्स में उपयोग की जाती है, और मौजूदा साइबर खतरों व भविष्य के क्वांटम हमलों से सबसे मजबूत सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

यह प्रदर्शन भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता, राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल संप्रभुता की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

ESTIC 2025 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर उच्च स्तरीय पैनल चर्चा : भारत के जिम्मेदार एआई नवाचार और समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

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भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने उभरती विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार संगोष्ठी (ESTIC 2025) के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) पर एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा का आयोजन किया।

इस सत्र की अध्यक्षता एस. कृष्णन, सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने की। इसमें सरकार, शिक्षाजगत और उद्योग क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया, जिन्होंने इस बात पर विचार-विमर्श किया कि भारत कैसे जिम्मेदारीपूर्वक एआई का उपयोग करते हुए नवाचार, समावेश और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को आगे बढ़ा सकता है।

यह सत्र आगामी इंडिया–एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी साबित हुआ, जिसमें भारत के उभरते एआई पारिस्थितिकी तंत्र — डिजिटल अवसंरचना का विस्तार, स्वदेशी बड़े भाषा मॉडलों (Large Language Models) का विकास, नैतिक एआई गवर्नेंस को सुदृढ़ करना, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना — जैसे विषयों पर केंद्रित चर्चाएँ होंगी।

मुख्य संबोधन

सत्र की शुरुआत करते हुए एस. कृष्णन, सचिव, MeitY ने कहा,

“किसी भी तकनीक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उसका समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है — वह जीवन की गुणवत्ता को कैसे बेहतर बनाती है और देश के लोगों को क्या अवसर प्रदान करती है। भारत के लिए यह वास्तव में एक बड़ा अवसर है कि हम एआई जैसी क्षैतिज और व्यापक तकनीक का उपयोग करके 2047 तक ‘विकसित भारत (Viksit Bharat)’ के लक्ष्य की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ें।”

इंडियाAI मिशन की भूमिका पर प्रकाश

अभिषेक सिंह, अतिरिक्त सचिव, MeitY, महानिदेशक, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) एवं सीईओ, इंडियाAI मिशन ने कहा,

“एआई नवाचार के मार्ग खोलने के लिए इंडियाएआई मिशन हमारे पारिस्थितिकी तंत्र में मौजूद सभी खामियों को दूर करने पर केंद्रित है। भारत का सबसे बड़ा बल उसका मानव पूंजी है, लेकिन एआई मॉडल और अनुप्रयोग बनाने के लिए हमें किफायती कंप्यूटिंग, गुणवत्तापूर्ण डेटा सेट्स, और निरंतर निवेश की भी आवश्यकता है। मिशन की सात स्तंभों वाली रणनीति — सस्ती कंप्यूटिंग, डेटा प्लेटफ़ॉर्म, फाउंडेशन मॉडल्स, स्टार्टअप समर्थन, और सुरक्षित एवं विश्वसनीय एआई के लिए टूल्स — के माध्यम से हम एक ऐसा तंत्र बना रहे हैं जो भारत को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ देशों के समकक्ष खड़ा करेगा। हमारा लक्ष्य ऐसे एआई अनुप्रयोग बनाना है जो न केवल भारत की जरूरतें पूरी करें बल्कि नवाचार, नैतिकता और विश्वास के वैश्विक मानक स्थापित करें।”

स्वदेशी एआई विकास की दिशा में प्रेरणा

डॉ. श्रीधर वेंबू, सह-संस्थापक एवं मुख्य वैज्ञानिक, Zoho Corporation ने कहा,

“हमें सीमित संसाधनों और बजट की चुनौतियों से उबरने के लिए एक अलग मार्ग तलाशना होगा। जब संसाधन सीमित होते हैं, तो वही प्रतिबंध हमें बेहतर और नवाचारी समाधान खोजने के लिए प्रेरित करते हैं। मेरा मानना है कि इस दिशा में नई विज्ञान की खोज होना बाकी है — एक ऐसी नींव जो पूरी तरह से बदल देगी कि हम इन समस्याओं को कैसे देखते और हल करते हैं।”

विभिन्न क्षेत्रों में एआई की परिवर्तनकारी भूमिका

सत्र में अग्रणी शोधकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं ने एआई की परिवर्तनकारी संभावनाओं पर अपने विचार रखे:

  • डॉ. गीता मंजनाथ, संस्थापक, सीईओ और सीटीओ, निरामाई हेल्थ एनालिटिक्स ने बताया कि एआई आधारित नवाचार स्तन कैंसर की पहचान को अधिक सुलभ और किफायती बना रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में असमानता कम हो रही है।

  • डॉ. श्रीराम राघवन, उपाध्यक्ष, आईबीएम रिसर्च (AI), ने खुले नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Open Innovation Ecosystems) की शक्ति पर प्रकाश डाला, जो एआई विकास को तीव्र गति प्रदान करते हैं।

  • डॉ. अमित शेठ एनसीआर चेयर प्रोफेसर और निदेशक, एआई संस्थान, यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैरोलाइना ने बताया कि सामान्य एआई से उद्देश्य-आधारित, डोमेन-विशिष्ट प्रणालियों की ओर संक्रमण से ऊर्जा, विनिर्माण और अन्य क्षेत्रों में उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।

पैनल चर्चा — “नवाचार और समावेशन के लिए जिम्मेदार एआई”

इस विषय पर आयोजित पैनल चर्चा का संचालन शशि शेखर वैम्पति, सह-संस्थापक, DeepTech for Bharat Foundation एवं पूर्व सीईओ, प्रसार भारती ने किया।

इसमें प्रमुख विशेषज्ञों ने भाग लिया —

  • डॉ. हेरिक मयंक विन, सीटीओ, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), मुंबई

  • प्रो. बालारमन रवींद्रन, प्रमुख, डेटा साइंस एवं एआई विभाग, आईआईटी मद्रास

  • अभिषेक सिंह, अतिरिक्त सचिव, MeitY, सीईओ, इंडियाAI मिशन

  • डॉ. रिमझिम अग्रवाल, सह-संस्थापक एवं सीटीओ, ब्रेनसाइटएआई, बेंगलुरु

  •  देबजानी घोष, विशिष्ट फेलो, नीति आयोग एवं पूर्व अध्यक्ष, नैसकॉम

  • प्रो. पी. वेंकट रंगन, कुलपति, अमृता विश्व विद्यापीठम, कोयंबटूर

पैनल में भारत के एआई पारिस्थितिकी तंत्र के विभिन्न पहलुओं — डिजिटल अवसंरचना का विस्तार, स्वदेशी बड़े भाषा मॉडल्स का विकास, नैतिक एआई शासन की मजबूती, और वैश्विक साझेदारी को प्रोत्साहन — पर विस्तृत चर्चा हुई।

विशेष बल इस बात पर दिया गया कि तकनीकी प्रगति को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं और सामाजिक समावेशन के लक्ष्यों के साथ संतुलित किया जाए।

ESTIC 2025 में ‘डिजिटल संचार’ सत्र का नेतृत्व करते हुए दूरसंचार सचिव डॉ. नीरेज मित्तल ने किया भारत की 6G दृष्टि पर बल

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दूरसंचार विभाग (DoT) ने 3 से 5 नवम्बर, 2025 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित उभरती विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार संगोष्ठी (ESTIC) 2025 में भाग लिया। प्रमुख आयोजकों में से एक के रूप में, दूरसंचार विभाग ने 5 नवम्बर 2025 को ‘डिजिटल संचार (Digital Communication)’ विषय पर एक थीम आधारित सत्र का नेतृत्व किया।

इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. neeraj मित्तल, सचिव (दूरसंचार) एवं अध्यक्ष, डिजिटल कम्युनिकेशन्स कमीशन ने की। इसमें भारत के दूरसंचार एवं डिजिटल नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े प्रमुख शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सत्र में अशोक कुमार, उप महानिदेशक, दूरसंचार विभाग एवं उपाध्यक्ष, IEG, WTPF, ITU भी उपस्थित रहे।

अपने उद्घाटन भाषण में डॉ. neeraj मित्तल ने कहा कि “टेलीकॉम केवल अर्थव्यवस्था का ही नहीं, बल्कि उन सभी प्रौद्योगिकियों का भी सक्षम माध्यम बन गया है जो विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रही हैं।” उन्होंने कनेक्टिविटी की परिवर्तनकारी शक्ति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तीव्र विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “यह क्षेत्र हम सभी के लिए असंभव को संभव बनाने का नया अवसर लेकर आया है।”

डॉ. मित्तल ने कहा कि कनेक्टिविटी सभी उत्पादक गतिविधियों की आधारशिला है, और भारत की दूरसंचार क्रांति का सीधा प्रभाव राष्ट्रीय आर्थिक वृद्धि पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि माननीय प्रधानमंत्री जी के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत ने विश्व के सबसे तेज़ 5G रोलआउट्स में से एक को पूरा किया है, तथा देशभर में 100 5G लैब्स स्थापित की गई हैं, जो उपयोग मामलों (use cases) के विकास और 6G प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेतृत्व के लिए राष्ट्र को तैयार कर रही हैं।

सचिव (दूरसंचार) ने बताया कि सरकार की अगली पीढ़ी की संचार तकनीक के प्रति रणनीति बहुआयामी है — जो अनुसंधान एवं विकास को समर्थन देती है, घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करती है, और अकादमिक जगत, उद्योग और सरकार के बीच मजबूत पुल बनाती है। उन्होंने जानकारी दी कि वर्तमान में 6G से संबंधित 100 से अधिक अनुसंधान परियोजनाओं को समर्थन दिया जा रहा है, जिनमें Open RAN, स्वदेशी चिपसेट्स, AI आधारित बुद्धिमान नेटवर्क, और रेगुलेटरी सैंडबॉक्स जैसी नवाचार पहलों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

डॉ. मित्तल ने भारत 6G एलायंस (Bharat 6G Alliance) का भी उल्लेख किया — जो प्रधानमंत्री जी की दृष्टि से प्रेरित एक अग्रणी पहल है। इसने अब तक 10 अंतरराष्ट्रीय 6G संस्थाओं के साथ सहयोग समझौते किए हैं और इसका लक्ष्य है कि 2030 तक विश्व के कुल 6G पेटेंट्स में भारत का योगदान 10% हो।

सत्र में “भारत के लिए 6G दृष्टि को साकार कैसे करें” विषय पर मुख्य वक्तव्य प्रो. किरण कुमार कुचि (विभागाध्यक्ष, विद्युत अभियांत्रिकी, IIT हैदराबाद एवं संस्थापक, WiSig Networks) ने दिया। अन्य वक्ताओं में रामु श्रीनिवासैया (संस्थापक एवं निदेशक, लेखा वायरलेस सॉल्यूशंस, बेंगलुरु) जिन्होंने “प्राइवेट नेटवर्क्स का नया रूप: 6G नेटवर्क डिज़ाइन में ORAN की भूमिका” पर बात की, और डॉ. कुमार एन. शिवराजन (सह-संस्थापक एवं सीटीओ, तेजस नेटवर्क्स, बेंगलुरु) जिन्होंने “2030 तक भारत को वैश्विक दूरसंचार क्षेत्र में अग्रणी बनाना” विषय पर विचार साझा किए।

एक पैनल चर्चा “स्वदेशी तकनीकों को अगले स्तर तक ले जाना” विषय पर आयोजित की गई, जिसका संचालन डॉ. राजकुमार उपाध्याय, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सी-डॉट (C-DOT) ने किया। इसमें प्रो. राधाकृष्णा गंती (IIT मद्रास), प्रो. पंगनमला विजय कुमार (IISc बेंगलुरु),ए. रॉबर्ट जेरार्ड रवि (अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, BSNL) और डॉ. पराग नाइक (मुख्य वैज्ञानिक, तेजस नेटवर्क्स, एवं पूर्व सीईओ, सांख्य लैब्स) ने भाग लिया।

पैनल में भारत में 5G पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार, NavIC L1 सिग्नल के माध्यम से स्वदेशी PNT (Positioning, Navigation & Timing) के विकास, तथा D2M से लेकर 6G तक के विघटनकारी प्रौद्योगिकी स्टैक्स के निर्माण पर चर्चा की गई।

ESTIC 2025, जिसका विषय था “विकसित भारत 2047 – सतत नवाचार, प्रौद्योगिकी उन्नति और सशक्तिकरण का मार्ग”, का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 नवम्बर 2025 को किया। यह आयोजन भारत सरकार के 13 मंत्रालयों एवं विभागों द्वारा प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के मार्गदर्शन में संयुक्त रूप से किया गया। इस संगोष्ठी में 3000 से अधिक प्रतिभागियों — शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग, सरकार, नोबेल पुरस्कार विजेताओं, वैज्ञानिकों, नवाचारकर्ताओं और नीति निर्माताओं — ने भाग लिया।

चर्चा का केंद्र 11 प्रमुख क्षेत्र रहे, जिनमें उन्नत सामग्री एवं विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव-उत्पादन (Bio-Manufacturing), ब्लू इकॉनमी, डिजिटल कम्युनिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर निर्माण, उभरती कृषि तकनीकें, ऊर्जा, पर्यावरण एवं जलवायु, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा प्रौद्योगिकी, क्वांटम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, और अंतरिक्ष तकनीकें शामिल हैं।

डीआरडीओ नई दिल्ली में आयोजित ‘उदीयमान विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (ESTIC) 2025’ में भाग ले रहा है

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) नई दिल्ली के भारत मंडपम में 3 से 5 नवंबर, 2025 तक आयोजित हो रहे Emerging Science, Technology and Innovation Conclave (ESTIC) 2025 में भाग ले रहा है। इस वर्ष सम्मेलन का विषय है – ‘विकसित भारत 2047: सतत नवाचार, तकनीकी प्रगति और सशक्तिकरण का मार्गदर्शन’, जिसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 नवंबर, 2025 को किया। यह सम्मेलन भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के मार्गदर्शन में 13 मंत्रालयों एवं विभागों के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्र में प्रधानमंत्री ने ₹1 लाख करोड़ अनुसंधान, विकास और नवाचार योजना कोष (RDI Scheme Fund) का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य निजी क्षेत्र आधारित अनुसंधान एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाना और भारत को वैश्विक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में विकसित करना है। प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर यह भी कहा कि सरकार निजी क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयासरत है।

सम्मेलन में अग्रणी वैज्ञानिकों के व्याख्यान, पैनल चर्चाएँ, प्रस्तुतियाँ और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी आयोजित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य शोधकर्ताओं, उद्योग जगत और युवा नवोन्मेषकों के बीच सहयोग को सशक्त बनाना और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करना है।

मुख्य आयोजकों में से एक के रूप में DRDO ‘इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण’ पर थीमैटिक सत्र का नेतृत्व कर रहा है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव एवं DRDO अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत 5 नवंबर, 2025 को इस विषय पर तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करेंगे।

सेमीकंडक्टर आधुनिक तकनीकी पारिस्थितिकियों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो स्वास्थ्य सेवा, संचार, परिवहन, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में प्रमुख प्रणालियों को संचालित करते हैं। DRDO ने सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें 4-इंच सिलिकॉन कार्बाइड वेफर्स के स्वदेशी उत्पादन और गैलियम नाइट्राइड हाई इलेक्ट्रॉन मोबिलिटी ट्रांजिस्टर (HEMT) को 150 वॉट तक निर्मित करने की क्षमता शामिल है।

पैनल चर्चाओं में भाग लेने वाले अन्य DRDO अधिकारियों में विशिष्ट वैज्ञानिक एवं महानिदेशक (माइक्रो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज, कम्प्यूटेशनल सिस्टम्स एवं साइबर सिस्टम्स) श्रीमती सुमा वरुघीस, डिफेंस मेटालर्जिकल रिसर्च लेबोरेटरी, हैदराबाद के निदेशक डॉ. रामलिंगम बालामुरलीकृष्णन, और सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी, दिल्ली की वैज्ञानिक-जी डॉ. सोमन महाजन शामिल हैं।

ESTIC 2025 में शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग और सरकार से जुड़े 3,000 से अधिक प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं, जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता, प्रतिष्ठित वैज्ञानिक, नवप्रवर्तक और नीति निर्माता भी सम्मिलित हैं। सम्मेलन में 11 प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा हो रही है, जिनमें उन्नत सामग्री और विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, बायो-निर्माण, ब्लू इकोनॉमी, डिजिटल संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण, उभरती कृषि प्रौद्योगिकियाँ, ऊर्जा, पर्यावरण और जलवायु, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा प्रौद्योगिकी, क्वांटम विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ESTIC 2025 का किया शुभारंभ — विज्ञान, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम

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नई दिल्ली-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित “उभरता विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (Emerging Science, Technology and Innovation Conclave – ESTIC 2025)” का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों, नवप्रवर्तकों, शिक्षाविदों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का स्वागत किया।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने सबसे पहले भारतीय महिला क्रिकेट टीम को आईसीसी महिला विश्व कप 2025 में ऐतिहासिक जीत पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह जीत न केवल खेल जगत की उपलब्धि है, बल्कि देश की बेटियों की शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा, “यह भारत का पहला महिला विश्व कप है — और यह सफलता आने वाली पीढ़ियों की लाखों बेटियों को प्रेरित करेगी।”

प्रधानमंत्री ने बताया कि कल भारत ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी एक और उपलब्धि हासिल की — देश के सबसे भारी संचार उपग्रह का सफल प्रक्षेपण। उन्होंने इस मिशन से जुड़े सभी वैज्ञानिकों और इसरो को बधाई दी।

विज्ञान, नवाचार और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में निर्णायक कदम

मोदी ने कहा कि 21वीं सदी परिवर्तन का युग है, और भारत इस बदलाव के केंद्र में है। उन्होंने कहा कि इस सदी में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक विशेषज्ञों का साथ आना अत्यंत आवश्यक है, और इसी विचार से ESTIC का जन्म हुआ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि “भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि तकनीक के माध्यम से परिवर्तन लाने वाला अग्रणी राष्ट्र बन चुका है।” उन्होंने याद दिलाया कि कोविड महामारी के समय भारत ने रिकॉर्ड समय में स्वदेशी वैक्सीन तैयार की और दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान सफलतापूर्वक चलाया।

₹1 लाख करोड़ का “अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) कोष” लॉन्च

प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर देश के अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त करने के लिए ₹1 लाख करोड़ के “RDI स्कीम फंड” का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह कोष निजी क्षेत्र को अनुसंधान एवं विकास में निवेश के लिए प्रोत्साहित करेगा।

उन्होंने बताया कि पहली बार उच्च जोखिम और उच्च प्रभाव वाले शोध कार्यों के लिए पूंजी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा, अनुसंधान राष्ट्रीय निधि (Anusandhan National Research Foundation) की स्थापना की गई है ताकि भारतीय विश्वविद्यालयों में अनुसंधान का विस्तार हो सके।

भारत बन रहा है नवाचार का वैश्विक केंद्र

प्रधानमंत्री ने बताया कि बीते एक दशक में भारत का R&D व्यय दोगुना, पेटेंट पंजीकरण 17 गुना और स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा बन गया है।

उन्होंने कहा कि आज भारत के पास 6,000 से अधिक डीप-टेक स्टार्टअप्स हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा, जैव-अर्थव्यवस्था और उन्नत सामग्रियों पर कार्य कर रहे हैं। भारत की बायो-इकोनॉमी 2014 में $10 बिलियन से बढ़कर आज $140 बिलियन तक पहुंच चुकी है।

अंतरिक्ष से लेकर AI तक: भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब चाँद और मंगल तक पहुंच चुका है, और यह किसानों व मछुआरों के लिए भी लाभदायक सिद्ध हो रहा है।

उन्होंने बताया कि भारत अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में भी वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने घोषणा की कि भारत “Global AI Summit” फरवरी 2026 में आयोजित करेगा, जो “मानव-केंद्रित और नैतिक AI” के लिए अंतरराष्ट्रीय ढांचे को गति देगा।

उन्होंने कहा, “भारत का उद्देश्य है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और विकास का माध्यम बने।”

विज्ञान और तकनीक में महिलाओं की भागीदारी नई ऊंचाइयों पर

प्रधानमंत्री ने बताया कि अब भारत में हर वर्ष 5,000 से अधिक पेटेंट महिलाओं द्वारा दाखिल किए जा रहे हैं, जबकि एक दशक पहले यह संख्या 100 से भी कम थी।

उन्होंने कहा कि STEM शिक्षा में भारत में 43% छात्राएं नामांकित हैं, जो विश्व औसत से अधिक है। यह नारीशक्ति की वैज्ञानिक प्रगति का प्रतीक है।

 युवा नवाचार के अग्रदूत

प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़ रही है, और इस दिशा में देशभर में 10,000 “अटल टिंकरिंग लैब्स” कार्यरत हैं। उन्होंने घोषणा की कि इनकी संख्या बढ़ाकर 25,000 की जाएगी ताकि और अधिक छात्र वैज्ञानिक प्रयोग कर सकें।

साथ ही उन्होंने कहा कि आने वाले पांच वर्षों में 10,000 नई “प्रधानमंत्री अनुसंधान फैलोशिप” दी जाएंगी ताकि युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहन मिल सके।

आत्मनिर्भरता की दिशा में नए शोध लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब भारत को खाद्य सुरक्षा से पोषण सुरक्षा की दिशा में बढ़ना होगा। उन्होंने वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे जैव-संवर्धित फसलें, स्वच्छ ऊर्जा भंडारण तकनीक, जीनोमिक विविधता मैपिंग और किफायती बायो-फर्टिलाइज़र जैसे क्षेत्रों में नवाचार करें ताकि भारत आत्मनिर्भर और विश्व में अग्रणी बन सके।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “जब विज्ञान का विस्तार होता है, नवाचार समावेशी बनता है, और तकनीक परिवर्तन को प्रेरित करती है — तब राष्ट्र महान उपलब्धियों की ओर बढ़ता है।”

उन्होंने सभी वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नवप्रवर्तकों का आह्वान किया कि वे मिलकर एक विज्ञान-संचालित विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें और अपने संबोधन का समापन “जय विज्ञान, जय अनुसंधान” के नारे के साथ किया।

पृष्ठभूमि

ESTIC 2025 (3–5 नवम्बर 2025) के दौरान 3,000 से अधिक प्रतिभागी — जिनमें नोबेल पुरस्कार विजेता, वैज्ञानिक, उद्योग विशेषज्ञ और नीति निर्माता शामिल हैं — 11 प्रमुख विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे, जैसे कि क्वांटम टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी, बायो-मैन्युफैक्चरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, और स्पेस टेक्नोलॉजी।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, नोबेल पुरस्कार विजेता सर आंद्रे गीम और अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।

https://youtu.be/OaAhy7lw2Wg

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे “उभरते विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नवाचार सम्मेलन (ESTIC) 2025” का उद्घाटन एवं ₹1 लाख करोड़ RDI योजना कोष का शुभारंभ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 नवंबर 2025 को सुबह लगभग 9:30 बजे नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित “उभरते विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नवाचार सम्मेलन (Emerging Science & Technology Innovation Conclave – ESTIC) 2025” का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर प्रधानमंत्री सम्मेलन को संबोधित भी करेंगे।

देश के अनुसंधान एवं विकास (R&D) पारिस्थितिकी तंत्र को एक बड़ा प्रोत्साहन देते हुए प्रधानमंत्री ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार (RDI) योजना कोष का शुभारंभ करेंगे। इस योजना का उद्देश्य देश में निजी क्षेत्र–प्रधान अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना है।

ESTIC 2025 का आयोजन 3 से 5 नवंबर 2025 तक किया जाएगा। इस सम्मेलन में 3,000 से अधिक प्रतिभागी — शिक्षाविद्, अनुसंधान संस्थान, उद्योग और सरकारी प्रतिनिधि — सहित नोबेल पुरस्कार विजेता, प्रख्यात वैज्ञानिक, नवोन्मेषक और नीति-निर्माता भाग लेंगे। चर्चाएँ 11 प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर केंद्रित रहेंगी, जिनमें शामिल हैं —

  • उन्नत पदार्थ एवं विनिर्माण (Advanced Materials & Manufacturing)

  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence)

  • बायो-मैन्युफैक्चरिंग (Bio-Manufacturing)

  • ब्लू इकॉनॉमी (Blue Economy)

  • डिजिटल कम्युनिकेशन (Digital Communications)

  • इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर विनिर्माण (Electronics & Semiconductor Manufacturing)

  • उभरती कृषि तकनीकें (Emerging Agriculture Technologies)

  • ऊर्जा, पर्यावरण एवं जलवायु (Energy, Environment & Climate)

  • स्वास्थ्य एवं चिकित्सा प्रौद्योगिकियाँ (Health & Medical Technologies)

  • क्वांटम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Quantum Science & Technology)

  • अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Technologies)

ESTIC 2025 में प्रमुख वैज्ञानिकों के व्याख्यान, पैनल चर्चाएँ, प्रस्तुतियाँ और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी आयोजित की जाएंगी। यह सम्मेलन शोधकर्ताओं, उद्योगों और युवा नवोन्मेषकों को सहयोग और साझेदारी का मंच प्रदान करेगा, जिससे भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को और सशक्त बनाया जा सके।

ESTIC 2025: आयुष मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में नवाचार और पारंपरिक चिकित्सा के संगम पर किया जोर

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आयुष मंत्रालय ने आज नई दिल्ली स्थित सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन आयुर्वेदिक साइंसेज (CCRAS) मुख्यालय, जनकपुरी में ईमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2025 में अपनी भागीदारी को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव अलार्मेलमंगई डी ने की। उन्होंने मंत्रालय की ESTIC 2025 में भागीदारी को दर्शाने वाला एक थीमैटिक वीडियो भी प्रदर्शित किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि ESTIC 2025 भारत की वैज्ञानिक भावना और सहयोग की शक्ति का उत्सव है। यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का उत्सव है — जो यह दर्शाता है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मिलकर एक स्वस्थ, स्थायी भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय “स्वास्थ्य और चिकित्सा प्रौद्योगिकी” थीम के अंतर्गत भाग लेगा, जो भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान प्रणाली और आधुनिक विज्ञान के सुंदर संगम का प्रतीक है।

संयुक्त सचिव ने यह भी उल्लेख किया कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली आज एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। आधुनिक चिकित्सा क्षेत्र में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निदान और प्रिसिजन मेडिसिन जैसे नवाचार नई दिशा दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुनिया फिर से आयुर्वेद और अन्य आयुष प्रणालियों की ओर रोकथाम और समग्र स्वास्थ्य कल्याण के लिए रुख कर रही है। उन्होंने कहा कि ये दोनों धाराएँ मिलकर स्वास्थ्य सेवा की नई परिभाषा गढ़ सकती हैं।

आयुष ग्रिड पहल के माध्यम से मंत्रालय ने पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को डिजिटल और नागरिक-केंद्रित रूप देने के लिए कई अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं —

  • Ayush Hospital Management Information System (A-HMIS) — बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन हेतु

  • e-Learning Management System (e-LMS) — डिजिटल शिक्षा और छात्र प्रबंधन के लिए

  • Y-Break App — कार्यस्थल पर योग और वेलनेस के लिए

  • Yoga Portal — योग संसाधनों के एकीकृत मंच के रूप में

  • e-Aushadhi और Ayush Suraksha — औषधि नियंत्रण और रोगी सुरक्षा हेतु

इसके अतिरिक्त Ayush Research Portal, Clinical Case Repository, Ayusoft और NAMASTE Portal जैसी पहलों से अनुसंधान और मानकीकरण को सुदृढ़ किया जा रहा है। मंत्रालय mYoga App (WHO के साथ साझेदारी में) और Ayush Global Portal जैसे उपकरणों से वैश्विक पहुंच का विस्तार कर रहा है, वहीं PM GatiShakti Ayush Asset Mapping Tool अवसंरचना योजना और निगरानी को सशक्त बना रहा है।

अब मंत्रालय कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भविष्यवाणी विश्लेषण, साहित्य खनन, व्यक्तिगत अनुशंसाओं और वास्तविक समय निगरानी जैसे क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा दे रहा है — जिससे एक डेटा-चालित, नवाचार-नेतृत्वित और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त आयुष डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो सके।

डॉ. ए. रघु, सलाहकार (आय), ने कहा कि ESTIC 2025 भारत-केंद्रित नवाचारों, पॉइंट-ऑफ-केयर डायग्नोस्टिक्स, बायोमेडिकल प्रौद्योगिकियों और एकीकृत स्वास्थ्य समाधानों को प्रदर्शित करने का एक राष्ट्रीय मंच है। उन्होंने कहा कि यह भागीदारी आत्मनिर्भर, नवाचार-प्रधान और वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त स्वास्थ्य प्रणाली के निर्माण के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

डॉ. श्रीनिवास राव चिंता, संयुक्त सलाहकार (एच), ने मंत्रालय की भागीदारी पर विस्तृत प्रस्तुति दी और बताया कि “हेल्थ एंड मेडिकल टेक्नोलॉजीज़” थीम के अंतर्गत मंत्रालय का फोकस क्षेत्र नवोन्मेषी अनुसंधान मॉडल, एकीकृत स्वास्थ्य ढाँचे और पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक वैज्ञानिक नवाचार से जोड़ने वाले सहयोगी प्रोजेक्ट्स पर होगा।

ESTIC 2025 में आयुष मंत्रालय पार्टनर मंत्रालय के रूप में भाग लेगा। मंत्रालय का विशेष सत्र 4 नवंबर 2025 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा, जिसकी सह-अध्यक्षता वैद्य राजेश कोटेचा, सचिव (आयुष) और डॉ. राजीव बहल, सचिव (डीएचआर) एवं महानिदेशक (ICMR) करेंगे।

इस सत्र में प्रमुख वक्ता होंगे —

  • डॉ. शिव कुमार सारिन, निदेशक, ILBS

  • प्रो. गगनदीप कांग, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन

  • प्रो. तनुजा नेसरी, निदेशक, ITRA, जामनगर

  • सी. वी. मुरलीधरन, SCTIMST, तिरुवनंतपुरम

पैनल चर्चा का संचालन डॉ. जितेंद्र शर्मा, प्रबंध निदेशक एवं संस्थापक-सीईओ, आंध्र प्रदेश मेडटेक ज़ोन करेंगे।

ESTIC 2025, जो कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है, 3 से 5 नवंबर 2025 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा। इसका उद्देश्य सरकार, अकादमिक जगत, उद्योग, स्टार्टअप्स और नागरिक समाज के बीच साझेदारी को प्रोत्साहित करना है, ताकि भारत की नवाचार-आधारित विकास यात्रा को गति मिले और विकसित भारत 2047 के विज़न को साकार किया जा सके।

DRDO द्वारा ‘इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC-2025)’ का कर्टन रेज़र कार्यक्रम हैदराबाद में आयोजित

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा आगामी ‘इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC-2025)’ के लिए एक कर्टन रेज़र कार्यक्रम का आयोजन 17 अक्टूबर 2025 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL), हैदराबाद में किया गया। DRDO इस आयोजन के प्रमुख आयोजकों में से एक है और कॉन्क्लेव के 11 विषयगत सत्रों में से “इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग” पर होने वाले सत्र का नेतृत्व कर रहा है।

DRDL हैदराबाद में आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग (DDR&D) के सचिव एवं DRDO के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कमत ने आधुनिक तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र में सेमीकंडक्टर्स की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर्स आज स्वास्थ्य, संचार, परिवहन, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ऊर्जा प्रदान करने वाले प्रमुख घटक बन चुके हैं। जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्थाएँ डिजिटलीकरण और स्वचालन की दिशा में आगे बढ़ रही हैं, सेमीकंडक्टर्स राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रगति और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए अत्यंत आवश्यक हो गए हैं।

भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा का उल्लेख करते हुए डॉ. कमत ने कहा कि 2021 में ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM)’ के शुभारंभ के बाद से भारत ने मात्र चार वर्षों में दृष्टि से क्रियान्वयन तक की यात्रा सफलतापूर्वक तय की है। उन्होंने इस राष्ट्रीय लक्ष्य को दोहराया कि भारत वर्ष 2036 तक सेमीकंडक्टर अनुसंधान, नवाचार और मानव संसाधन विकास के क्षेत्रों में विश्व के शीर्ष तीन देशों में स्थान प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने यह भी बताया कि DRDO ने सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है और 4-इंच सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) वेफर्स के उत्पादन तथा 150W तक की गैलियम नाइट्राइड (GaN) हाई इलेक्ट्रॉन मोबिलिटी ट्रांजिस्टर (HEMTs) के निर्माण के लिए स्वदेशी विधियाँ विकसित की हैं।

ESTIC-2025 का आयोजन भारत सरकार के 13 मंत्रालयों और विभागों द्वारा, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। यह कॉन्क्लेव 3 से 5 नवम्बर 2025 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होगा, जिसका विषय है —

“विकसित भारत 2047 – सतत नवाचार, तकनीकी प्रगति और सशक्तिकरण में अग्रणी भूमिका।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ESTIC-2025 की शुरुआत की — भारत के लिए विज्ञान, नवाचार और तकनीकी क्रांति की दिशा में नया अध्याय

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नई दिल्ली-केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं राज्य मंत्री, पृथ्वी विज्ञान, पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली स्थित Bharat Mandapam में होने वाले प्रथम इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC-2025) का कर्टन राइज़र कार्यक्रम उद्घाटन किया। इस कॉन्क्लेव का विषय है: “Imagine, Innovate, Inspire for Viksit Bharat 2047”, और यह 3 से 5 नवम्बर, 2025 तक आयोजित किया जाएगा।

डॉ. सिंह ने कहा कि ESTIC भारत का पहला एकीकृत विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंच है, जो देश के नवाचार और तकनीकी नेतृत्व को वैश्विक स्तर पर स्थापित करेगा। उन्होंने बताया कि पिछले ग्यारह वर्षों में भारत की यात्रा दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से 4वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने तक तकनीकी और नवाचार-प्रेरित प्रयासों द्वारा संचालित रही, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और दूरदर्शी दृष्टिकोण ने समर्थित किया।

उन्होंने बताया कि कॉन्क्लेव में उभरती और सीमांत तकनीकों जैसे सेमीकंडक्टर, AI, क्वांटम कंप्यूटिंग, बायोटेक, अंतरिक्ष और स्वच्छ ऊर्जा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, ESTIC युवा नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं को अपने विचार साझा करने, मेंटरशिप प्राप्त करने और उद्योग एवं अन्य हितधारकों से जुड़ने का मंच प्रदान करेगा।

डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि भारत की प्रतिभा पेटेंट और शोध प्रकाशनों में विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुकी है, और 2029 तक संयुक्त राज्य अमेरिका को पीछे छोड़ने की क्षमता रखती है। ESTIC-2025 वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों और उद्यमियों को एक साथ लाकर भारत के वैज्ञानिक रोडमैप को आकार देगा।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. अजय कुमार सूद ने बताया कि ESTIC-2025 13 मंत्रालयों और विभागों के सहयोग से आयोजित हो रहा है और यह अकादमिक, उद्योग और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच ज्ञान और अनुभव साझा करने का आदर्श मंच है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सचिव प्रो. अभय करंदीकार ने कहा कि ESTIC-2025 राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप नवाचार को सभी क्षेत्रों में समेकित करेगा, जिससे समाजिक जरूरतों को पूरा करना, आर्थिक वृद्धि बढ़ाना और Viksit Bharat 2047 की दिशा में प्रगति सुनिश्चित होगी।

कर्टन राइज़र कार्यक्रम में 13 मंत्रालयों और विभागों के सचिव, वैज्ञानिक समुदाय के प्रतिनिधि और अनुसंधान संस्थानों एवं उद्योग के सदस्य उपस्थित थे।


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