Media24Media.com: भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

Document Thumbnail

राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा विरासत संस्थान (NIIMH), हैदराबाद ने केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तहत सेवाधि म्यूजियम एंड इंडोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (SEMIRI), कुमारनल्लूर, कोट्टायम, केरल के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सहयोग का उद्देश्य SEMIRI में संरक्षित चिकित्सा पांडुलिपियों का व्यवस्थित डिजिटलीकरण और विस्तृत विवरणात्मक कैटलॉग तैयार करना है।

SEMIRI के पास 30,000 से अधिक पांडुलिपियों का विशाल संग्रह है, जिसमें मंदिर से संबंधित अभिलेख भी शामिल हैं। इस संग्रह में आयुर्वेद और भारतीय पारंपरिक ज्ञान से जुड़ी कई दुर्लभ एवं ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण पांडुलिपियां मौजूद हैं।

इन पांडुलिपियों में चिकित्सा विचारों के विकास, उपचार पद्धतियों, औषधीय द्रव्यों, निदान संबंधी अवधारणाओं और भारतीय ज्ञान परंपरा की विद्वत परंपराओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध है।

MoU के तहत CCRAS-NIIMH तकनीकी एवं शोध विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा। सैकड़ों चिकित्सा पांडुलिपियों का उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और नाजुक पांडुलिपियों को बार-बार संभालने की आवश्यकता भी कम होगी।

तैयार होगा विस्तृत विवरणात्मक कैटलॉग

इस पहल के तहत पांडुलिपियों का एक व्यापक Descriptive Catalogue भी तैयार किया जाएगा। इसमें उपलब्ध जानकारी के आधार पर शीर्षक, लेखक, विषय, लिपि, भाषा, सामग्री, आकार, फोलियो विवरण, स्थिति, स्रोत एवं अन्य महत्वपूर्ण विवरण दर्ज किए जाएंगे।

यह कार्य AYUSH Manuscripts Advanced Repository के निर्धारित प्रारूप के अनुसार किया जाएगा। इससे शोधकर्ताओं और विद्वानों को संबंधित पांडुलिपियों की पहचान करने तथा भविष्य के शोध के लिए प्राथमिक स्रोतों तक पहुंच बनाने में सुविधा होगी।

यह पहल ज्ञान भारतम मिशन और भारत सरकार द्वारा देश की पांडुलिपि विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं व्यापक प्रसार के प्रयासों के अनुरूप है। चिकित्सा संबंधी पांडुलिपियां भारत की बौद्धिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनमें पीढ़ियों से संरक्षित पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान समाहित है।

CCRAS के महानिदेशक प्रो. वैद्य रबिनारायण आचार्य ने कहा कि चिकित्सा पांडुलिपियों का संरक्षण केवल अभिलेखीय कार्य नहीं, बल्कि भारत की बौद्धिक विरासत को सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि व्यवस्थित डिजिटलीकरण और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण से दुर्लभ चिकित्सा ज्ञान भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और सुलभ रहेगा।

वहीं, SEMIRI के अध्यक्ष डॉ. सी.एस. उन्नी ने कुमारनल्लूर और कोट्टायम क्षेत्र की समृद्ध विरासत को सामने लाने में इस सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। CCRAS-NIIMH के प्रमुख डॉ. गोली पेंचला प्रसाद ने आयुर्वेदिक पांडुलिपियों के संरक्षण और अध्ययन से जुड़ी चुनौतियों एवं आगे की रणनीति पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर SEMIRI के क्यूरेटर डॉ. एस. राजेंदु, CCRAS के रिसर्च ऑफिसर (आयुर्वेद) डॉ. संतोष एस. माने, डॉ. राकेश नारायणन सहित कई अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

CCRAS-NIIMH की विशेषज्ञ टीम ने संस्थान की Collection, Digitization and Cataloguing of AYUSH Manuscripts and Rare Books परियोजना के तहत पांडुलिपियों का मौके पर ही व्यवस्थित डिजिटलीकरण भी शुरू कर दिया है।

यह सहयोग भारत की पारंपरिक चिकित्सा एवं पांडुलिपि विरासत को डिजिटल, संरक्षित और शोध के लिए अधिक सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भविष्य में शोधकर्ताओं, इतिहासकारों, शिक्षाविदों और आयुर्वेद एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के विशेषज्ञों को महत्वपूर्ण प्राथमिक स्रोत उपलब्ध हो सकेंगे।


Next Story Older Post Home
Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.