Media24Media.com: छत्तीसगढ़ के खैरा गांव ने बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड: सभी 141 घरों की छतों पर लगे रूफटॉप सोलर सिस्टम, बना देश का पहला 100% सोलर विलेज

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छत्तीसगढ़ के खैरा गांव ने बनाया राष्ट्रीय रिकॉर्ड: सभी 141 घरों की छतों पर लगे रूफटॉप सोलर सिस्टम, बना देश का पहला 100% सोलर विलेज

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राजनांदगांव- छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के छोटे से गांव खैरा ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। गांव के सभी 141 घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कर दिए गए हैं। इसके साथ ही खैरा प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के तहत देश का पहला ऐसा गांव बन गया है, जहां शत-प्रतिशत घरों को रूफटॉप सोलर से जोड़ा गया है।

इस पहल की सबसे खास बात यह है कि गांव के किसी भी परिवार को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करना पड़ा। केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी के साथ कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड की मदद से परियोजना को पूरा किया गया। अब गांव के हर घर की छत पर बिजली पैदा करने की व्यवस्था मौजूद है।

141 घरों में 2-2 किलोवाट के सोलर सिस्टम

खैरा गांव की कुल आबादी लगभग 889 है। यहां के प्रत्येक 141 घरों में 2 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाया गया है। इस तरह पूरे गांव की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता करीब 282 किलोवाट हो गई है।

इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि गांव के सभी परिवारों को इस योजना से जोड़ा गया है। अब ग्रामीण अपने घरों की छत पर ही बिजली पैदा कर सकेंगे और परंपरागत बिजली आपूर्ति पर निर्भरता कम कर सकेंगे।

सरकारी सब्सिडी और CSR फंड से पूरा हुआ काम

इस परियोजना को पूरा करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी का उपयोग किया गया। इसके बाद जो राशि शेष रही, उसकी व्यवस्था CSR फंड के माध्यम से की गई। इसी वजह से ग्रामीणों को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए अपनी ओर से कोई रकम नहीं देनी पड़ी।

गांव के कुल 141 सोलरयुक्त घरों में से 93 घर प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत बनाए गए हैं। इससे कम आय वाले और जरूरतमंद परिवारों को भी स्वच्छ ऊर्जा का लाभ मिला है।

‘सूर्य सखियों’ ने घर-घर जाकर ग्रामीणों को किया जागरूक

खैरा गांव को 100 प्रतिशत सोलर गांव बनाने में स्थानीय महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को ‘पीएम सूर्य सखी’ के रूप में प्रशिक्षित किया गया।

इन महिलाओं ने घर-घर जाकर ग्रामीणों को सोलर योजना की जानकारी दी। उन्होंने लोगों को इसके फायदे समझाए और आवेदन भरने, जरूरी दस्तावेज जुटाने तथा बैंक संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने में मदद की।

पद्मश्री सम्मानित फूलबासन बाई यादव से जुड़े महिला समूहों ने भी इस अभियान में सहयोग किया। स्थानीय महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने ग्रामीणों के बीच योजना को लेकर भरोसा बढ़ाया और सभी परिवारों को इससे जोड़ने में मदद की।

बिजली बिल में मिलेगी राहत, अतिरिक्त बिजली का भी हो सकता है फायदा

रूफटॉप सोलर सिस्टम लगने से ग्रामीण परिवारों को बिजली खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है। घरों में सौर ऊर्जा से बनी बिजली का इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे सामान्य बिजली आपूर्ति पर निर्भरता घट सकती है।

नेट मीटरिंग की व्यवस्था के तहत यदि सोलर सिस्टम से जरूरत से अधिक बिजली पैदा होती है, तो निर्धारित नियमों और कनेक्शन की शर्तों के अनुसार अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा सकती है। इससे बिजली की खपत और ग्रिड को दी गई बिजली का हिसाब मीटर के जरिए रखा जाता है।

इस तरह ग्रामीण केवल बिजली के उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि बिजली उत्पादन में योगदान देने वाले परिवार भी बन सकते हैं। हालांकि, वास्तविक बचत मौसम, बिजली की खपत और संबंधित बिजली कनेक्शन की शर्तों पर निर्भर करेगी।

गरीब और जरूरतमंद परिवारों को भी मिला लाभ

इस पहल का लाभ गांव के अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक वर्गों तक पहुंचा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गांव में अनुसूचित जनजाति के 21 परिवार और अनुसूचित जाति के 4 परिवार भी रहते हैं। सभी घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की पहल ने ऊर्जा सुविधाओं तक पहुंच को व्यापक बनाया है।

पेंशन पर निर्भर रहने वाले परिवारों, मजदूरों और घरेलू काम करने वाले लोगों के लिए बिजली खर्च में संभावित कमी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। सीमित आमदनी वाले परिवारों के लिए बिजली बिल में बचत का अर्थ रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कुछ अतिरिक्त पैसे बचना भी है।

जिला प्रशासन, पंचायत और ग्रामीणों के तालमेल से मिली सफलता

इस परियोजना को सफल बनाने में जिला प्रशासन, ग्राम पंचायत, बैंक, CSR सहयोगी संस्थाओं और स्थानीय महिला समूहों ने मिलकर काम किया। ग्रामीणों को योजना से जोड़ने के लिए जागरूकता अभियान चलाए गए और विशेष बैंकिंग शिविरों के माध्यम से दस्तावेजों तथा आवेदन संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा कराया गया।

राजनांदगांव के कलेक्टर जितेंद्र यादव के अनुसार, खैरा की सफलता प्रशासन, स्थानीय समुदाय, बैंकों, CSR भागीदारों और महिला समूहों के समन्वय का परिणाम है। उन्होंने इस मॉडल को दूसरे गांवों में भी लागू किए जाने की संभावना जताई है।

दूसरे गांवों के लिए भी बन सकता है मॉडल

खैरा की उपलब्धि केवल 141 घरों में सोलर पैनल लगाने तक सीमित नहीं है। यह दिखाती है कि सरकारी योजनाओं, स्थानीय भागीदारी और अतिरिक्त वित्तीय सहयोग के जरिए गांव के हर परिवार तक स्वच्छ ऊर्जा पहुंचाई जा सकती है।

यदि इसी तरह दूसरे गांवों में भी प्रशासन, पंचायत और समुदाय मिलकर काम करें, तो ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का विस्तार किया जा सकता है। इससे पारंपरिक बिजली स्रोतों पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

निष्कर्ष: राजनांदगांव का खैरा गांव छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी ग्रामीण ऊर्जा आत्मनिर्भरता की एक उल्लेखनीय मिसाल बनकर उभरा है। सभी 141 घरों में 2-2 किलोवाट के सोलर सिस्टम और कुल 282 किलोवाट की स्थापित क्षमता के साथ गांव ने दिखाया है कि जनभागीदारी और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से स्वच्छ ऊर्जा का लाभ हर घर तक पहुंचाया जा सकता है।


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