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अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) स्थापना दिवस समारोह में सौर ऊर्जा की वैश्विक भूमिका पर जोर

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नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सौर ऊर्जा के बढ़ते वैश्विक महत्व और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने 11 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित ISA स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह गठबंधन साझा दृष्टि और वैश्विक साझेदारी की शक्ति को दर्शाता है, जो सौर ऊर्जा के माध्यम से सतत विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

मंत्री ने कहा कि लगभग एक दशक पहले भारत और फ्रांस ने मिलकर एक दूरदर्शी पहल की थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक विकास के केंद्र में सूर्य की ऊर्जा को स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह पहल एक वैश्विक आंदोलन में बदल गई।

120 से अधिक देशों का वैश्विक गठबंधन

मंत्री  जोशी ने बताया कि आज अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन 120 से अधिक देशों के वैश्विक गठबंधन के रूप में विकसित हो चुका है, जो मिलकर सौर ऊर्जा के प्रसार को तेज करने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में ISA ने सौर ऊर्जा के वादे को वास्तविक और जीवन बदलने वाले प्रभाव में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ISA के प्रयासों के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्रों का सौर ऊर्जा से संचालन, किसानों को सौर सिंचाई और कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं, खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना तथा स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों को स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना संभव हुआ है। इसके अलावा स्टार्टअप, युवा पेशेवरों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देकर स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नए अवसर और रोजगार सृजित किए जा रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि ISA की स्थापना भारतीय दर्शन “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना पर आधारित है, जो यह मानता है कि पूरा विश्व एक परिवार है और सभी देशों को मिलकर स्वच्छ ऊर्जा के लाभों को समान रूप से साझा करना चाहिए।

भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में तेजी से वृद्धि

मंत्री जोशी ने भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 136 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लगभग आधा हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मजबूत नीतिगत प्रतिबद्धता और नवाचार का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना जैसे कार्यक्रम लाखों परिवारों को अपनी स्वच्छ बिजली स्वयं उत्पन्न करने का अवसर दे रहे हैं, जबकि पीएम-कुसुम योजना किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से सशक्त बना रही है।

विश्व स्तर पर सौर ऊर्जा का तेज विस्तार

मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा का विस्तार तेजी से हो रहा है। जहां दुनिया को पहली 1000 गीगावाट सौर क्षमता स्थापित करने में लगभग 25 वर्ष लगे, वहीं अगली 1000 गीगावाट क्षमता इससे कहीं कम समय में स्थापित होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का केंद्र अब तेजी से ग्लोबल साउथ की ओर बढ़ रहा है, जहां ऊर्जा की बढ़ती मांग और प्रचुर सौर संसाधन पारंपरिक ऊर्जा मार्गों को पीछे छोड़ने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।

इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन सरकारों, विकास साझेदारों, वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र को एक साथ लाकर सौर ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका

मंत्री जोशी ने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने ISA द्वारा संचालित ग्लोबल मिशन ऑन AI फॉर एनर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य नवाचार के माध्यम से अधिक स्मार्ट और लचीली ऊर्जा प्रणालियां विकसित करना है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा परिवर्तन केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकास, लचीलापन और समृद्धि के नए अवसरों का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि सौर ऊर्जा आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्तियों में से एक बन चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में मजबूत नीतिगत ढांचा और प्रभावी कार्यान्वयन प्रणाली के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ISA के महानिदेशक आशीष खन्ना ने कहा कि ISA आज 125 सदस्य और हस्ताक्षरकर्ता देशों का एक वैश्विक गठबंधन बन चुका है, जो यह मानते हैं कि दुनिया के सबसे प्रचुर ऊर्जा स्रोत को सबसे लोकतांत्रिक भी होना चाहिए।

इस अवसर पर ग्रीन हाइड्रोजन और स्टोरेज स्टार्टअप चैलेंज 2026 की भी घोषणा की गई। इसका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर काम करने वाले नवाचारी स्टार्टअप्स की पहचान करना और उन्हें सहयोग प्रदान करना है।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन ने एक नई उन्नत वेबसाइट भी लॉन्च की, जो सदस्य देशों और भागीदारों को ज्ञान, कार्यक्रमों और अवसरों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के बारे में

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना भारत और फ्रांस द्वारा 2015 में पेरिस में आयोजित COP21 जलवायु सम्मेलन के दौरान की गई थी। यह एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी मंच है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देना और सतत विकास को गति देना है।

आज ISA अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों में ऊर्जा पहुंच बढ़ाने, आजीविका मजबूत करने और जलवायु लचीलापन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पीएम सूर्यघर योजना से ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नई मजबूती – मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस की दी शुभकामनाएं

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस (14 दिसंबर) के अवसर पर  प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ऊर्जा संरक्षण सतत विकास, पर्यावरण संतुलन और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य है। ऊर्जा का विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और कुशल उपयोग न केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सहायक है, बल्कि जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती से निपटने का भी प्रभावी माध्यम है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा संचालित पीएम सूर्यघर योजना स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा को जन-जन तक पहुँचाने की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना से घरेलू स्तर पर सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन मिल रहा है, जिससे बिजली व्यय में कमी के साथ-साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे ऊर्जा बचत को अपनी दैनिक जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाएं, ऊर्जा-सक्षम उपकरणों का अधिकाधिक उपयोग करें और छोटे-छोटे सामूहिक प्रयासों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को हरित, स्वच्छ और विकसित राज्य बनाने में सक्रिय योगदान दें।

एसईसीआई और आंध्र प्रदेश सरकार ने 1200 MWh BESS और 50 MW हाइब्रिड सोलर परियोजना के लिए सरकारी आदेशों का आदान-प्रदान किया

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Solar Energy Corporation of India Limited (SECI), जो नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), भारत सरकार के अंतर्गत एक नवरत्न सीपीएसयू है, ने आज आंध्र प्रदेश सरकार के साथ 1200 MWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के नंद्याल में विकास तथा 50 मेगावाट हाइब्रिड सोलर प्रोजेक्ट के लिए सरकारी आदेशों (GOs) का आदान-प्रदान किया।

यह आदान-प्रदान विशाखापट्टनम में आयोजित आंध्र प्रदेश पार्टनरशिप समिट 2025 के ऊर्जा सत्र के दौरान हुआ, जिसे आंध्र प्रदेश सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग ने CII के साथ मिलकर आयोजित किया था।

परियोजना अनुमोदन और कार्यान्वयन

बिजली मंत्रालय ने 23 जनवरी 2025 के आदेश के माध्यम से 1200 MWh BESS परियोजना को मार्केट-बेस्ड ऑपरेशंस मोड के तहत लागू करने के लिए SECI को नामित किया था।

यह परियोजना SECI बोर्ड के अध्यक्ष संतोष कुमार सारंगी द्वारा 22 अक्टूबर 2025 को अनुमोदित की गई। MNRE लगातार दोनों परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहा है।

CAPEX मोड के तहत परियोजनाओं का विकास करेगा SECI

दोनों—BESS और हाइब्रिड सोलर प्रोजेक्ट—CAPEX मोड में विकसित किए जाएंगे, जिसमें SECI पूरी निवेश ज़िम्मेदारी निभाएगा।

आंध्र प्रदेश के ऊर्जा मंत्री गोट्टिपाटी रवि कुमार ने SECI प्रतिनिधियों को सरकारी आदेश सौंपे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव के. विजयानंद और NREDCAP के उपाध्यक्ष एम. कमलाकर बाबू उपस्थित रहे।

SECI की ओर से शिवकुमार वेंकट वेपाकोंमा और  रोहित चौबे मौजूद थे।

भारत के स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम को मजबूती

इन सरकारी आदेशों का आदान-प्रदान आंध्र प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इन परियोजनाओं से—

  • राज्य की ग्रीन एनर्जी स्टोरेज क्षमता बढ़ेगी

  • एक सक्षम और लचीला ग्रीन ग्रिड तैयार होगा

  • भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में तेजी आएगी

SECI ने राज्यों और केंद्र सरकार के साथ मिलकर भारत के ऊर्जा भविष्य को अधिक हरित और सक्षम बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की आठवीं महासभा का उद्घाटन किया

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (28 अक्टूबर, 2025) नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की आठवीं महासभा के उद्घाटन सत्र का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) मानवता की साझा आकांक्षा का प्रतीक है — सौर ऊर्जा को समावेश, गरिमा और सामूहिक समृद्धि के स्रोत के रूप में उपयोग करने की दिशा में एक वैश्विक प्रयास।

राष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है, और इस खतरे से निपटने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। भारत जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके समाधान के लिए दृढ़ कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि ISA सौर ऊर्जा को अपनाने और उसके उपयोग को प्रोत्साहित कर इस वैश्विक चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि समावेश का विचार भारत की विकास यात्रा की पहचान है। देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों में घरों को रोशन करने के हमारे अनुभव ने इस विश्वास को मजबूत किया है कि ऊर्जा समानता ही सामाजिक समानता की नींव है। सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता समुदायों को सशक्त बनाती है, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देती है और बिजली आपूर्ति से कहीं आगे जाकर अवसरों के द्वार खोलती है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि सशक्तिकरण और समावेशी विकास का साधन है।

राष्ट्रपति ने सभी सदस्य देशों से आह्वान किया कि वे केवल अवसंरचना निर्माण से आगे बढ़कर लोगों के जीवन पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि इस महासभा को एक सामूहिक कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए जो सौर ऊर्जा को रोजगार सृजन, महिलाओं के नेतृत्व, ग्रामीण आजीविका और डिजिटल समावेशन से जोड़े। प्रगति को केवल मेगावॉट में नहीं, बल्कि रोशन हुए जीवन, सशक्त परिवारों और परिवर्तित समुदायों की संख्या से मापा जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी विकास और उन्नत तकनीकों के साझा उपयोग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि सभी देशों को अधिकतम लाभ मिल सके। साथ ही, बड़े पैमाने पर सौर संयंत्रों के विस्तार के दौरान पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि पर्यावरण संरक्षण ही हरित ऊर्जा की मूल प्रेरणा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमें अपने देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया और आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस महासभा की चर्चाएँ और निर्णय सौर ऊर्जा उत्पादन में एक मील का पत्थर साबित होंगे और एक समावेशी व न्यायपूर्ण विश्व के निर्माण में योगदान देंगे।


गंगापुर निवासी सुरेंद्र शुक्ला के घर सौर ऊर्जा से हुए रोशन

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प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना से अब उपभोक्ता बन रहे बिजली के विक्रेता

रायपुर-बदलते समय के साथ अब बिजली उपभोक्ता केवल बिजली खर्च करने वाले नहीं रह गए हैं, बल्कि स्मार्ट बिजली उपभोक्ता बनकर ऊर्जा उत्पादन और बचत में भी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की योजनाओं और आधुनिक तकनीक के जरिए लोग सस्ती, सहज और स्वच्छ बिजली का लाभ उठा रहे हैं और अतिरिक्त बिजली बेचकर आमदनी भी कमा रहे हैं।

सरगुजा जिले के गंगापुर निवासी सुरेंद्र शुक्ला इस योजना के सफल लाभार्थी हैं। पहले उनके घर का मासिक बिजली बिल 4 से 5 हजार रुपये तक आता था। प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना की जानकारी मिलने पर उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक से 6 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण लेकर आसान किस्तों में 6 किलोवाट का सोलर रूफटॉप पैनल लगवाया।

सुरेंद्र शुक्ला ने बताया कि पैनल लगने के बाद उनका बिजली बिल शून्य हो गया। अब उनके घर की सारी दिनचर्या सूर्य की ऊर्जा से चलती है। घर में लगाए गए स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ एप से उन्हें वास्तविक समय में पता चलता है कि कितनी बिजली उत्पन्न हुई और कितनी खपत हुई। साथ ही, अतिरिक्त बिजली वे विद्युत विभाग को बेचकर आमदनी भी कमा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत उपभोक्ताओं को डबल सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा है। इसमें 1 किलोवाट सोलर पैनल पर केंद्र सरकार 30,000 रुपए एवं राज्य सरकार 15,000 रुपए कुल 45,000 रुपए, 2 किलोवाट सोलर पैनल पर केंद्र सरकार 60,000 रुपए एवं राज्य सरकार 30,000 रुपए कुल 90,000 रुपए और 3 किलोवाट सोलर पैनल पर केंद्र सरकार 78,000 रुपए एवं राज्य सरकार 30,000 रुपए कुल 1,08,000 रुपए मिल रहा है।

सुरेंद्र शुक्ला ने बताया कि प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना वास्तव में स्वच्छ सौर ऊर्जा की ओर क्रांतिकारी बदलाव है। योजना के तहत उन्हें कुल 1,08,000 रुपए की सब्सिडी प्रदाय होगी। बैंक ऋण की आसान किस्तों ने इसे अपनाना और भी सरल बना दिया है। सब्सिडी और योजना पूरी तरह पारदर्शी हैं और बिजली उपभोक्ता अब बिजली विक्रेता बनने की दिशा में बढ़ रहे हैं।


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