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दिल्ली में गोबर से बनेगी हरित ऊर्जा, एमसीडी और एनडीडीबी के बीच हुआ बड़ा समझौता

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नई दिल्ली- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में दिल्ली नगर निगम (MCD) और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के बीच गोबर के वैज्ञानिक उपयोग के लिए कम्प्रेस्ड बायो-गैस (CBG) प्लांट स्थापित करने हेतु एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह), दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित केंद्र और दिल्ली सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अमित शाह ने कहा कि यह पहल देश के सभी बड़े शहरों को स्वच्छ और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक मॉडल साबित होगी। इससे न केवल पशुपालकों की आय बढ़ेगी, बल्कि स्वच्छता, हरित ऊर्जा (CBG) उत्पादन और जैविक खेती को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने कहा कि यमुना नदी की सफाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए सीवेज, औद्योगिक कचरे और गोबर को नदी में जाने से रोकना बेहद जरूरी है।

अमित शाह ने बताया कि दिल्ली में सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट के शोधन के लिए लगभग 80 ट्रीटमेंट प्लांट पर काम चल रहा है। साथ ही, भविष्य में 1.25 लाख मवेशियों के गोबर का वैज्ञानिक तरीके से निपटान सुनिश्चित किया जाएगा ताकि यमुना में गोबर का एक भी कण न पहुंचे।

उन्होंने कहा कि दिसंबर 2028 तक यमुना में एक भी लीटर गंदा पानी नहीं जाने देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

गोबर के प्रसंस्करण का कार्य नांगली, घोघा-गोयला और गाजीपुर स्थित संयंत्रों में किया जाएगा। इस परियोजना के तहत पशुपालकों को गोबर के बदले ₹1 प्रति किलोग्राम का भुगतान भी किया जाएगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।

सरकार का मानना है कि यह पहल न केवल दिल्ली बल्कि देश के अन्य महानगरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वच्छता, हरित ऊर्जा उत्पादन और पशुपालकों की आर्थिक मजबूती का नया मॉडल बनेगी।


प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से राजनांदगांव का साहू परिवार बना ऊर्जा आत्मनिर्भर

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3-3 किलोवाट के दो सोलर रूफटॉप प्लांट से बिजली बिल हुआ शून्य, अतिरिक्त आय का भी खुला रास्ता

रायपुर- प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना प्रदेश में ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित ऊर्जा को नई गति दे रही है। राजनांदगांव जिले के ग्राम गठुला का साहू परिवार इस योजना का लाभ लेकर न केवल अपना बिजली बिल शून्य करने में सफल हुआ है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की प्रेरक मिसाल भी बन गया है।

ग्राम गठुला में टीकम होटल का संचालन करने वाले अंकालु राम साहू और उनके पुत्र कुंदन साहू ने अपने घर पर 3-3 किलोवाट क्षमता के दो सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित किए। होटल व्यवसाय के कारण प्रतिमाह 4 से 5 हजार रुपये तक का बिजली बिल आता था, जिसे कम करने के लिए उन्होंने सौर ऊर्जा को अपनाया।

साहू परिवार ने योजना के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर पंजीकृत वेंडर के माध्यम से सोलर प्लांट स्थापित कराया। दोनों प्लांटों की कुल लागत लगभग 4 लाख रुपये रही, जिसमें केंद्र एवं राज्य शासन से कुल 2 लाख 16 हजार रुपये की सब्सिडी सीधे बैंक खाते में प्राप्त हुई। इससे उनकी लागत में उल्लेखनीय कमी आई।

सोलर प्लांट शुरू होने के बाद परिवार का बिजली बिल लगभग शून्य हो गया है। नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत अतिरिक्त उत्पादित बिजली ग्रिड में भेजी जा रही है, जिससे भविष्य में अतिरिक्त आय की भी संभावना बनी है। अब साहू परिवार केवल बिजली का उपभोक्ता नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादक भी बन गया है।

साहू परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना आम नागरिकों के लिए आर्थिक बचत, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम है।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर रूफटॉप प्लांट लगाने पर केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा आकर्षक सब्सिडी के साथ राष्ट्रीयकृत बैंकों के माध्यम से रियायती ब्याज दर पर ऋण सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे अधिक से अधिक परिवार स्वच्छ एवं सस्ती ऊर्जा से जुड़ रहे हैं।

शहरी क्षेत्रों में PNG विस्तार को मिलेगा गति, 50 लाख नए कनेक्शन देने का लक्ष्य

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नई दिल्ली- विज्ञान भवन में आज शहरी क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) सेवाओं के विस्तार और आवश्यक सेवाओं की निरंतर आपूर्ति पर एक उच्चस्तरीय राउंडटेबल समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में केंद्र और राज्यों के कई वरिष्ठ मंत्री, अधिकारी, नगर निकायों के प्रतिनिधि तथा गैस कंपनियों के प्रमुख शामिल हुए।

बैठक में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और उपभोक्ता मामले मंत्रालय के केंद्रीय मंत्रियों ने भाग लिया। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के मंत्री और अधिकारी भी उपस्थित रहे, जबकि कुछ राज्यों ने वर्चुअली हिस्सा लिया।

बैठक में बताया गया कि शहरी क्षेत्रों में ऊर्जा की बढ़ती मांग को देखते हुए PNG नेटवर्क का विस्तार जरूरी है। पेट्रोलियम मंत्रालय की प्रस्तुति में PNG को LPG के मुकाबले अधिक सुरक्षित, सस्ता और पर्यावरण अनुकूल बताया गया। हालांकि, राइट ऑफ वे (RoW) मंजूरी, नगर निगम की अनुमति और ऊंचे शुल्क जैसी समस्याएं इसके विस्तार में बाधा बन रही हैं।

केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने शहरों को आर्थिक विकास का इंजन बताते हुए PNG विस्तार को मिशन मोड में लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने सिंगल विंडो क्लीयरेंस, बेहतर शहरी योजना और अंतिम छोर (last-mile) तक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही 50 लाख नए PNG कनेक्शन देने का लक्ष्य भी रखा गया।

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य का जिक्र करते हुए PNG इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दिया, जबकि उपभोक्ता मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति, अफवाहों पर रोक और ईंधन की कालाबाजारी रोकने की आवश्यकता बताई।

बैठक में राज्यों ने सुझाव दिया कि RoW शुल्क को कम या अस्थायी रूप से माफ किया जाए और मंजूरी प्रक्रिया को सरल व समयबद्ध बनाया जाए। साथ ही LPG से PNG में चरणबद्ध बदलाव के लिए जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

बैठक के अंत में यह सहमति बनी कि PNG नेटवर्क विस्तार को तेज करने के लिए ठोस कार्ययोजना, बेहतर समन्वय और नियमित निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके।



रेयर अर्थ और लिथियम में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत

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भारत ने दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबकों (Rare Earth Permanent Magnets) के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को तेज करने के प्रयासों को तेज कर दिया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि 2030 तक उत्पादन क्षमता को 5,000 टन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रश्नकाल के दौरान मंत्री ने बताया कि वर्तमान में देश में दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबकों की मांग लगभग 4,000 टन है, जो 2030 तक बढ़कर लगभग 8,000 टन होने का अनुमान है। इससे घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

मंत्री ने जानकारी दी कि नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) स्थायी चुंबकों पर एक पायलट परियोजना शुरू की गई है, जबकि विशाखापत्तनम में समेरियम-कोबाल्ट मैग्नेट प्लांट शुरू हो चुका है, जिसकी शुरुआती उत्पादन क्षमता 500 टन प्रति वर्ष है। इसे अगले चरण में 2,000 टन और 2030 तक 5,000 टन तक बढ़ाया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार विभिन्न मंत्रालयों के साथ समन्वय कर Whole-of-Government Approach के तहत महत्वपूर्ण खनिजों की खोज और विकास को तेज कर रही है।

राजस्थान के डेगाना में लिथियम भंडार के बारे में पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने बताया कि प्रारंभिक सर्वेक्षण कार्य शुरू हो चुका है और जल्द ही आगे की खोज प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही, जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में भी लिथियम की खोज जारी है।

उन्होंने बताया कि लिथियम और दुर्लभ मृदा तत्व इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, एयरोस्पेस और अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में अहम भूमिका निभाएंगे।

मंत्री ने यह भी बताया कि हाल के नीतिगत बदलावों, जैसे एटॉमिक एनर्जी (संशोधन) ढांचा, के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है, हालांकि यूरेनियम जैसे रणनीतिक संसाधनों के लिए सुरक्षा उपाय बनाए रखे गए हैं।

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और केरल में रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे घरेलू प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा।

मंत्री के अनुसार, रेयर अर्थ तत्व समुद्री तटीय रेत और चट्टानी संरचनाओं दोनों में पाए जाते हैं, जिनकी खोज के लिए अलग-अलग तकनीकों की आवश्यकता होती है। राजस्थान, गुजरात और झारखंड जैसे राज्यों में चट्टानी खनिज भंडार मौजूद हैं, जिनकी खोज अपेक्षाकृत जटिल है।

पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर उन्होंने स्पष्ट किया कि खनन से जुड़े सुरक्षा उपाय खनन मंत्रालय और संबंधित नियमों के तहत आते हैं, साथ ही अवैध खनन पर रोक लगाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत आयात पर निर्भरता कम करने, घरेलू उत्पादन बढ़ाने और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने के लक्ष्य के साथ महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है, जो भविष्य के औद्योगिक और तकनीकी विकास के लिए आवश्यक है।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) स्थापना दिवस समारोह में सौर ऊर्जा की वैश्विक भूमिका पर जोर

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नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सौर ऊर्जा के बढ़ते वैश्विक महत्व और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को गति देने में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने 11 मार्च को नई दिल्ली में आयोजित ISA स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह गठबंधन साझा दृष्टि और वैश्विक साझेदारी की शक्ति को दर्शाता है, जो सौर ऊर्जा के माध्यम से सतत विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

मंत्री ने कहा कि लगभग एक दशक पहले भारत और फ्रांस ने मिलकर एक दूरदर्शी पहल की थी, जिसका उद्देश्य वैश्विक विकास के केंद्र में सूर्य की ऊर्जा को स्थापित करना था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह पहल एक वैश्विक आंदोलन में बदल गई।

120 से अधिक देशों का वैश्विक गठबंधन

मंत्री  जोशी ने बताया कि आज अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन 120 से अधिक देशों के वैश्विक गठबंधन के रूप में विकसित हो चुका है, जो मिलकर सौर ऊर्जा के प्रसार को तेज करने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में ISA ने सौर ऊर्जा के वादे को वास्तविक और जीवन बदलने वाले प्रभाव में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ISA के प्रयासों के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्रों का सौर ऊर्जा से संचालन, किसानों को सौर सिंचाई और कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं, खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना तथा स्कूलों और सार्वजनिक संस्थानों को स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना संभव हुआ है। इसके अलावा स्टार्टअप, युवा पेशेवरों और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देकर स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में नए अवसर और रोजगार सृजित किए जा रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि ISA की स्थापना भारतीय दर्शन “वसुधैव कुटुम्बकम” की भावना पर आधारित है, जो यह मानता है कि पूरा विश्व एक परिवार है और सभी देशों को मिलकर स्वच्छ ऊर्जा के लाभों को समान रूप से साझा करना चाहिए।

भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में तेजी से वृद्धि

मंत्री जोशी ने भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता लगभग 136 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लगभग आधा हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मजबूत नीतिगत प्रतिबद्धता और नवाचार का परिणाम है।

उन्होंने बताया कि पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना जैसे कार्यक्रम लाखों परिवारों को अपनी स्वच्छ बिजली स्वयं उत्पन्न करने का अवसर दे रहे हैं, जबकि पीएम-कुसुम योजना किसानों को सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से सशक्त बना रही है।

विश्व स्तर पर सौर ऊर्जा का तेज विस्तार

मंत्री ने कहा कि वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा का विस्तार तेजी से हो रहा है। जहां दुनिया को पहली 1000 गीगावाट सौर क्षमता स्थापित करने में लगभग 25 वर्ष लगे, वहीं अगली 1000 गीगावाट क्षमता इससे कहीं कम समय में स्थापित होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का केंद्र अब तेजी से ग्लोबल साउथ की ओर बढ़ रहा है, जहां ऊर्जा की बढ़ती मांग और प्रचुर सौर संसाधन पारंपरिक ऊर्जा मार्गों को पीछे छोड़ने का अवसर प्रदान कर रहे हैं।

इस संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन सरकारों, विकास साझेदारों, वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र को एक साथ लाकर सौर ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देने वाला एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका

मंत्री जोशी ने कहा कि ऊर्जा परिवर्तन अब एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने ISA द्वारा संचालित ग्लोबल मिशन ऑन AI फॉर एनर्जी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य नवाचार के माध्यम से अधिक स्मार्ट और लचीली ऊर्जा प्रणालियां विकसित करना है।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा परिवर्तन केवल ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकास, लचीलापन और समृद्धि के नए अवसरों का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

इस अवसर पर नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने कहा कि सौर ऊर्जा आज के समय की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक संपत्तियों में से एक बन चुकी है। उन्होंने बताया कि भारत 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य की दिशा में मजबूत नीतिगत ढांचा और प्रभावी कार्यान्वयन प्रणाली के माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रहा है।

ISA के महानिदेशक आशीष खन्ना ने कहा कि ISA आज 125 सदस्य और हस्ताक्षरकर्ता देशों का एक वैश्विक गठबंधन बन चुका है, जो यह मानते हैं कि दुनिया के सबसे प्रचुर ऊर्जा स्रोत को सबसे लोकतांत्रिक भी होना चाहिए।

इस अवसर पर ग्रीन हाइड्रोजन और स्टोरेज स्टार्टअप चैलेंज 2026 की भी घोषणा की गई। इसका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण तकनीकों पर काम करने वाले नवाचारी स्टार्टअप्स की पहचान करना और उन्हें सहयोग प्रदान करना है।

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन ने एक नई उन्नत वेबसाइट भी लॉन्च की, जो सदस्य देशों और भागीदारों को ज्ञान, कार्यक्रमों और अवसरों तक बेहतर पहुंच प्रदान करेगी।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के बारे में

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना भारत और फ्रांस द्वारा 2015 में पेरिस में आयोजित COP21 जलवायु सम्मेलन के दौरान की गई थी। यह एक संधि-आधारित अंतर-सरकारी मंच है, जिसका उद्देश्य वैश्विक स्तर पर सौर ऊर्जा के प्रसार को बढ़ावा देना और सतत विकास को गति देना है।

आज ISA अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों में ऊर्जा पहुंच बढ़ाने, आजीविका मजबूत करने और जलवायु लचीलापन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक अधोसंरचना की दिशा में प्रदेश का सशक्त संकल्प है सिटी गैस परियोजना : मुख्यमंत्री साय

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सिटी गैस अवसंरचना का किया शुभारंभ

हरित छत्तीसगढ़, स्मार्ट छत्तीसगढ़ की दिशा में बड़ा कदम

मेट्रो शहरों की तरह डोमेस्टिक पाइप्ड नेचुरल गैस  माध्यम से घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मिलेगी गैस

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में सिटी गैस अवसंरचना परियोजना का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने सीएनजी युक्त वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और रायपुर नगर निगम की पहली पाइपलाइन गैस उपभोक्ता पूनम चौबे से संवाद कर घरेलू उपयोग में पाइपलाइन गैस की सुविधा के बारे में जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर रजत जयंती वर्ष मना रहा है और इन वर्षों में प्रदेश ने विकास के अनेक आयाम स्थापित किए हैं। सिटी गैस अवसंरचना परियोजना इस विकास यात्रा में एक नई उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल नई सुविधा नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक अधोसंरचना की दिशा में प्रदेश का सशक्त संकल्प है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि अब मेट्रो शहरों की तर्ज पर डीपीएनजी (डोमेस्टिक पाइप्ड नेचुरल गैस) के माध्यम से घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पाइपलाइन से गैस उपलब्ध होगी। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को रिफिलिंग की झंझट से मुक्ति मिलेगी और सुरक्षा भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सस्ती और सुलभ ऊर्जा मिलने से उद्योग क्षेत्र को भी गति मिलेगी तथा प्रदेश में निवेश की संभावनाएं सशक्त होंगी।

मुख्यमंत्री ने एचसीजी समूह को बधाई देते हुए अपेक्षा व्यक्त की कि वे रायपुर सहित बलौदाबाजार और गरियाबंद जिले में शीघ्र ही सीएनजी स्टेशनों का व्यापक नेटवर्क विकसित करेंगे। उन्होंने कहा कि वाहनों में सीएनजी के उपयोग से प्रदूषण में कमी आएगी और आम नागरिकों के ईंधन खर्च में भी राहत मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में प्रस्तुत राज्य बजट में अधोसंरचना विकास के लिए महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। सरकार का लक्ष्य है कि शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हों और प्रदेशवासियों को मेट्रो शहरों जैसी सुविधाओं का अनुभव हो। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलें, इस दिशा में सरकार ग्रीन एनर्जी को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे स्वच्छ ईंधन अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में सहभागी बनें और हरित, विकसित एवं आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण में योगदान दें।

उल्लेखनीय है कि सिटी गैस अवसंरचना परियोजना रायपुर, बलौदाबाजार और गरियाबंद जिलों में प्रारंभ की गई है। इसके माध्यम से घरेलू उपयोग तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों हेतु पाइपलाइन द्वारा पीएनजी की आपूर्ति की जाएगी तथा वाहनों के लिए सीएनजी भी उपलब्ध होगा। कार्यक्रम में एचसीजी समूह के प्रबंध निदेशक राहुल चोपड़ा, निदेशक राजीव माथुर, अध्यक्ष दीपक सावंत, राकेश रंजन, गैल इंडिया के प्रतिनिधि एवं उद्योग जगत के लोग उपस्थित रहे।

कृषि में सर्कुलर इकोनॉमी: भारत में कृषि कचरे से ऊर्जा और संसाधन बनाने की दिशा में बड़ा कदम

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भारत में बढ़ते कृषि और खाद्य अपशिष्ट (वेस्ट) की समस्या पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। देश में हर साल लगभग 35 करोड़ टन कृषि अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जिसमें फसल अवशेष, भूसा, भूसी और खाद्य प्रसंस्करण के उप-उत्पाद शामिल हैं। सही प्रबंधन न होने पर यह अपशिष्ट वायु, जल और मिट्टी प्रदूषण का कारण बनता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के कृषि अवशेषों से 18,000 मेगावाट से अधिक ऊर्जा उत्पादन की क्षमता है। इसके अलावा, इनसे जैविक खाद भी बनाई जा सकती है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है।

सर्कुलर इकोनॉमी: कचरे से संसाधन बनाने की सोच

सर्कुलर इकोनॉमी का उद्देश्य कचरे को संसाधन में बदलना और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग को कम करना है। यह मॉडल Reduce, Reuse, Recycle, Refurbish, Recover और Repair के सिद्धांतों पर आधारित है। अनुमान है कि 2050 तक भारत की सर्कुलर इकोनॉमी का बाजार मूल्य 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है और 1 करोड़ नौकरियां पैदा होंगी।

कृषि अपशिष्ट के प्रमुख स्रोत

  • फसल अवशेष (स्टबल): जलाने से मिट्टी की उर्वरता घटती है और प्रदूषण बढ़ता है।

  • पशु अपशिष्ट: गोबर और अन्य अपशिष्ट से बायोगैस और जैविक खाद बनाई जा सकती है।

  • पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस: भंडारण और परिवहन में खाद्य नुकसान।

  • फूड वेस्ट: घरों और बाजारों में खाद्य बर्बादी, जिससे ग्रीनहाउस गैसें बढ़ती हैं।

सरकारी पहलें: कचरे से संपदा (Waste-to-Wealth)

GOBARdhan योजना

सरकार गोबर, फसल अवशेष और खाद्य अपशिष्ट से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक खाद बनाने को बढ़ावा दे रही है। जनवरी 2026 तक देश के 51.4% जिलों में 979 बायोगैस प्लांट स्थापित हो चुके हैं।

फसल अवशेष प्रबंधन (CRM)

फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए मशीनों और कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना की गई है। अब तक 3.24 लाख से अधिक मशीनें किसानों को उपलब्ध कराई गई हैं।

एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF)

भंडारण, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स के लिए 66,310 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिससे कृषि मूल्य श्रृंखला मजबूत हुई है।

एनिमल हसबैंड्री इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (AHIDF)

पशुपालन क्षेत्र में 15,000 करोड़ रुपये का कोष निजी निवेश को बढ़ावा दे रहा है और जैविक खाद व बायोगैस उत्पादन को प्रोत्साहित कर रहा है।

जल शक्ति मिशन और जल पुन: उपयोग

जल शक्ति मंत्रालय घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग को बढ़ावा दे रहा है, जिससे कृषि में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और भूजल पर दबाव कम होगा।

सतत विकास लक्ष्य (SDGs) से जुड़ा सर्कुलर कृषि मॉडल

सर्कुलर कृषि मॉडल SDG-2 (भूख समाप्ति और सतत कृषि) और मिट्टी स्वास्थ्य सुधार से जुड़ा है। कम्पोस्टिंग, बायोचार और बायोमास रीसाइक्लिंग से मिट्टी की उर्वरता और उत्पादन बढ़ता है।

निष्कर्ष

भारत में कृषि में सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में उठाए गए कदम पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास दोनों को संतुलित कर रहे हैं। सरकार की योजनाएं कृषि अपशिष्ट को ऊर्जा, जैविक खाद और रोजगार में बदल रही हैं। इससे खाद्य सुरक्षा, जल सुरक्षा और ग्रामीण विकास को मजबूती मिलने की उम्मीद है।


राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 2025 प्रदान किए

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राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (14 दिसंबर 2025) नई दिल्ली में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 2025 तथा ऊर्जा संरक्षण पर राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया।

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण सबसे पर्यावरण-अनुकूल और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऊर्जा संरक्षण आज के समय की केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा बचाने का अर्थ केवल कम उपयोग करना नहीं है, बल्कि ऊर्जा का समझदारी, जिम्मेदारी और दक्षता के साथ उपयोग करना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जब हम अनावश्यक रूप से विद्युत उपकरणों का उपयोग नहीं करते, ऊर्जा-दक्ष उपकरण अपनाते हैं, घरों और कार्यस्थलों में प्राकृतिक प्रकाश और वेंटिलेशन का उपयोग करते हैं, अथवा सौर और नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाते हैं, तो हम न केवल ऊर्जा बचाते हैं बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाते हैं। ऊर्जा संरक्षण स्वच्छ वायु, सुरक्षित जल स्रोतों और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बचाई गई ऊर्जा की प्रत्येक इकाई प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी संवेदनशीलता का प्रतीक है।

राष्ट्रपति ने विशेष रूप से युवाओं और बच्चों की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि यदि वे ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक हों और इस दिशा में प्रयास करें, तो इस क्षेत्र के लक्ष्य आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं और देश का सतत विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच समुदायों को सशक्त बनाती है, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देती है और नए विकास अवसर पैदा करती है। इसलिए हरित ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सशक्तिकरण और समावेशी विकास का एक सशक्त माध्यम है।

राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन जैसी पहलों की सराहना की, जो जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सरकार नवीकरणीय उपभोग दायित्व (RCO) और उत्पादन-संलग्न प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2023-24 में भारत के ऊर्जा दक्षता प्रयासों से 53.60 मिलियन टन तेल समतुल्य ऊर्जा की बचत हुई है, जिससे प्रतिवर्ष उल्लेखनीय आर्थिक लाभ और CO₂ उत्सर्जन में बड़ी कमी आई है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के ऊर्जा संक्रमण की सफलता के लिए हर क्षेत्र और प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता लाने के लिए व्यवहारगत परिवर्तन अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण संतुलित जीवनशैली अपनाने की चेतना भारत की सांस्कृतिक परंपरा का मूल है, और यही भावना विश्व को दिए गए संदेश “लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट – LiFE” का आधार है।

उन्होंने ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत सभी हितधारकों की सराहना करते हुए कहा कि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करेगा। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक जिम्मेदारी, साझेदारी और जनभागीदारी की भावना के साथ भारत ऊर्जा संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा और हरित भविष्य की दिशा में अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त करेगा।


भारतीय रेल का व्यापक आधुनिकीकरण: विद्युतीकरण, नवीकरणीय ऊर्जा और हाइड्रोजन ट्रेन परियोजनाओं से हरित भविष्य की ओर कदम

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भारतीय रेल सुरक्षा, समयबद्धता, विश्वसनीयता और यात्री सुविधा को बढ़ाने के लिए अपने बुनियादी ढांचे और रोलिंग स्टॉक (Engine, Coaches आदि) को लगातार आधुनिक तकनीक अपनाते हुए उन्नत कर रही है। ये सुधार भारतीय रेल को आधुनिक बनाने और यात्रियों की बढ़ती अपेक्षाओं को पूरा करने पर केंद्रित हैं।

आधुनिक तकनीक और रेल नेटवर्क के विद्युतीकरण (Electrification) के कारण कोयला आधारित इंजन और डीजल इंजनों के उपयोग में कमी आई है।

रेलवे नेटवर्क का विद्युतीकरण

भारतीय रेल पर ब्रॉड गेज (BG) नेटवर्क का लगभग 99.2% विद्युतीकरण किया जा चुका है। शेष नेटवर्क का विद्युतीकरण कार्य जारी है।

विद्युतीकरण की प्रगति इस प्रकार है:

  • अवधि
  • रूट किलोमीटर
  • 2014 से पहले (लगभग 60 वर्ष)
  • 21,801
  • 2014–25
  • 46,900

ऊर्जा-कुशल आधुनिक इंजन

भारतीय रेल अत्याधुनिक तीन-फेज IGBT तकनीक पर आधारित लोकोमोटिव का निर्माण और संचालन कर रही है।
इनमें रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम होता है, जिससे ब्रेक लगाने पर ऊर्जा वापस सिस्टम में जाती है और ये अधिक ऊर्जा-कुशल बनते हैं।

भाप इंजन का सीमित उपयोग

कोयला आधारित भाप इंजन अब केवल निम्न स्थानों पर उपयोग किए जाते हैं:

  • यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त पर्वतीय रेल मार्गों पर

  • मौसमी स्टीम ट्रेनें

  • IRCTC के सहयोग से चार्टर्ड ट्रेनों में

नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग

भारतीय रेल ने अपने ट्रैक्शन (Train Operation) के लिए आवश्यक बिजली को सौर, पवन और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त करने की योजना बनाई है, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा।

नवंबर 2025 तक:

  • 812 MW सौर ऊर्जा संयंत्र

  • 93 MW पवन ऊर्जा संयंत्र
    स्थापित किए जा चुके हैं और रेल ट्रैक्शन की आवश्यकता पूरी कर रहे हैं।

इसके अतिरिक्त:

  • 100 MW नवीकरणीय ऊर्जा (RTC मोड) SECI से प्राप्त होना शुरू

  • 1,500 MW हाइब्रिड (सोलर + विंड + स्टोरेज) नवीकरणीय क्षमता भी ट्रैक्शन के लिए सुनिश्चित

ट्रैक्शन खर्च

वर्ष 2023–24 में भारतीय रेल का कुल ट्रैक्शन खर्च ₹29,614 करोड़ था।

हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना

भारतीय रेल ने RDSO द्वारा तैयार मानकों के अनुसार अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की अत्याधुनिक परियोजना शुरू की है। यह परियोजना साफ-सुथरी और हरित उर्जा आधारित भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

2030 तक नेट ज़ीरो कार्बन लक्ष्य

भारतीय रेल 2030 तक नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जक बनने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है। इसके लिए बिजली की आवश्यकता धीरे-धीरे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी की जाएगी।


भारत ने दर्ज की अब तक की सबसे बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा वृद्धि, ओडिशा में 1.5 लाख रूफटॉप सोलर की योजना

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केंद्रीय नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री  प्रल्हाद जोशी ने भारत में ऐतिहासिक रूप से स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार को उजागर करते हुए कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में देश ने अभी तक की सबसे बड़ी गैर-फॉसिल क्षमता जोड़ी है, कुल 31.25 GW, जिसमें से 24.28 GW सौर ऊर्जा है।

जोशी ने यह जानकारी ग्लोबल एनर्जी लीडर्स समिट 2025, पुरी, ओडिशा में दी और साथ ही ओडिशा के लिए 1.5 लाख रूफटॉप सोलर ULA मॉडल की घोषणा की, जिससे राज्य के लगभग 7–8 लाख लोगों को लाभ मिलेगा और उनकी सशक्तिकरण में मदद होगी।

वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा में भारत की भूमिका

उन्होंने कहा कि विश्व ने 2022 में 1 TW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने में लगभग 70 साल लिए, लेकिन 2024 तक केवल दो साल में 2 TW की क्षमता हासिल कर ली। इस वैश्विक वृद्धि में भारत का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।

पिछले 11 वर्षों में भारत की सौर क्षमता 2.8 GW से लगभग 130 GW तक बढ़ी, यानी 4,500% से अधिक की वृद्धि। केवल 2022–2024 के बीच, भारत ने वैश्विक सौर ऊर्जा में 46 GW का योगदान दिया और तीसरे सबसे बड़े योगदानकर्ता के रूप में उभरा।

जोशी ने यह भी कहा कि भारत के पास विश्व के पाँचवें सबसे बड़े कोयला भंडार हैं और यह कोयले का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। इसके बावजूद, भारत धीरे-धीरे कोयले और नवीकरणीय ऊर्जा का संतुलन बना रहा है।

ओडिशा में नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में प्रगति

ओडिशा के लिए नई पहलों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत उपभोक्ता-स्वामित्व वाले Utility-Led Aggregation (ULA) मॉडल के तहत राज्य में 1.5 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम (प्रति यूनिट 1 kW) स्थापित किए जाएंगे। इससे लगभग 7–8 लाख लोगों, विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को लाभ मिलेगा।

मंत्री ने बताया कि ओडिशा पहले से ही स्वच्छ ऊर्जा अपनाने में अग्रणी है। राज्य में स्थापित कुल नवीकरणीय क्षमता 3.1 GW से अधिक है, जो राज्य की कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 34% से अधिक है।

PM सूर्य घर योजना के तहत:

  • 1.6 लाख परिवारों ने रूफटॉप सोलर के लिए आवेदन किया

  • 23,000 से अधिक इंस्टॉलेशन पूरे हुए

  • 19,200 से अधिक परिवारों के बैंक खातों में ₹147 करोड़ से अधिक की सब्सिडी सीधे ट्रांसफर की गई

प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता और केंद्र–राज्य सहयोग

जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बनाए गए समग्र इकोसिस्टम, आसान व्यापारिक माहौल, निवेशकों का विश्वास, मजबूत आधारभूत संरचना, मांग-आधारित योजनाएँ और केंद्र–राज्य सहयोग ने भारत में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को गति दी है।

मंत्री ने ओडिशा के भविष्य के लिए आश्वस्ति व्यक्त की और राज्य के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, उपमुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव, और जनता की सराहना की, जिन्होंने स्वच्छ ऊर्जा और हरित तकनीक को बढ़ावा दिया।

ग्लोबल एनर्जी लीडर्स समिट (GELS) 2025

ग्लोबल एनर्जी लीडर्स समिट (GELS) 2025, पुरी भारत की स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को तेज़ करने के लिए नीति निर्माता, नवप्रवर्तनकर्ता और उद्योग नेताओं को एक मंच पर लाने का पहला कदम है।
5–7 दिसंबर 2025 के बीच आयोजित इस समिट में केंद्रीय और राज्य ऊर्जा मंत्री, वैश्विक ऊर्जा नेता, नवप्रवर्तक और उद्योगपति भाग लेंगे, जो ऊर्जा के भविष्य को आकार देने के लिए विचार-विमर्श करेंगे।


EIMA Agrimach India 2025 संपन्न: ग्रीन फ्यूल आधारित कृषि मशीनरी पर मिला वैश्विक जोर

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नई दिल्ली— FICCI और इटली की कृषि उद्योग संस्था FederUnacoma द्वारा, भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहयोग से आयोजित ‘EIMA Agrimach India 2025’ का तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी आज सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। समापन समारोह में भविष्य की कृषि मशीनरी को ग्रीन फ्यूल आधारित तकनीकों की ओर मोड़ने का आह्वान किया गया।

भव्य आयोजन में किसानों और उद्योग जगत की बड़ी भागीदारी

दिल्ली के पूसा (IARI ग्राउंड) में 27–29 नवंबर तक आयोजित इस कार्यक्रम में—

  • 20,000 से अधिक किसान — मुख्य रूप से यूपी, पंजाब, हरियाणा और ओडिशा से

  • 4,000+ डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर्स

  • 180+ देशी-विदेशी कंपनियां

  • 100+ विदेशी खरीदार (अल्जीरिया, नेपाल, श्रीलंका, केन्या, ओमान, मलेशिया, मोरक्को, नाइजीरिया, वियतनाम, जापान आदि देशों से)
    ने भाग लिया।

इटली इस आयोजन का पार्टनर देश रहा, जबकि नीदरलैंड, जापान, अमेरिका और पोलैंड ने भी अपनी प्रमुख उपस्थिति दर्ज कराई।

ग्रीन फ्यूल आधारित मशीनरी पर जोर

उद्घाटन सत्र में डॉ. देवेश चतुर्वेदी, सचिव, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा कि भारतीय कृषि के विजन 2047 को पूरा करने के लिए उद्योग को ग्रीन फ्यूल—इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर और CBG आधारित मशीनों पर काम तेज करना होगा।

उन्होंने कहा:

“मशीनें इलेक्ट्रिक या ग्रामीण CBG प्लांट से प्राप्त बायोगैस पर चल सकें—यह दिशा आने वाले 5–10 वर्षों में आवश्यक है। इससे किसानों की रखरखाव व संचालन लागत भी घटेगी।”

महिला किसानों के लिए जेंडर-फ्रेंडली उपकरणों की मांग

2026 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष’ घोषित किए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि—

  • जेंडर बजटिंग का अर्थ केवल मशीनरी का मालिकाना हक देना नहीं है

  • बल्कि ऐसी मशीनें विकसित करना आवश्यक है जो महिला किसानों की मेहनत व शारीरिक बोझ को वास्तविक रूप से कम करें

भारत–इटली कृषि सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

इटली के भारत में राजदूत एंटोनियो बार्तोली ने जल्द ही दूतावास में कृषि अटैची नियुक्त किए जाने की संभावना जताई, जिससे दोनों देशों के कृषि सहयोग को गति मिलेगी।

"कृषि को सेवा के रूप में विकसित करने की जरूरत"

EIMA Agrimach India के आयोजन समिति अध्यक्ष टी. आर. केसवन ने कहा कि कई महंगे उपकरण, जैसे सीडर, किसानों के लिए खरीदना मुश्किल है, इसलिए—

“कृषि मशीनरी को सेवा (Agriculture as a Service) के रूप में उपलब्ध कराना भविष्य का मॉडल बन सकता है।”

भारत–इटली कृषि बाजार का उज्ज्वल भविष्य

FederUnacoma की DG सिमोना रापास्टेला ने बताया कि—

  • 2023 में भारत का कृषि मशीनरी बाजार 13.7 बिलियन USD का था

  • 2033 तक इसके 31.6 बिलियन USD तक बढ़ने का अनुमान है

  • वार्षिक वृद्धि दर लगभग 9%

कृषि उत्पादकता बढ़ाने पर जोर

FICCI कृषि समिति के सह-अध्यक्ष सुबरतो गीड ने कहा—

“भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए उत्पादकता बढ़ाना अनिवार्य है। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक तकनीक और मशीनीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।”

 FICCI–PwC रिपोर्ट हुई जारी

कार्यक्रम में ‘Farm Mechanisation: The Path Towards a Future-Ready India’ रिपोर्ट भी जारी की गई।

अगला आयोजन इटली में

कार्यक्रम के 10वें संस्करण का आयोजन अगले वर्ष इटली में किया जाएगा।

यदि आप चाहें, तो मैं इसका संक्षिप्त संस्करण, सोशल मीडिया पोस्ट, या हैशटैग सेट भी तैयार कर देता हूँ।

टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड ने स्वदेशी EV चार्जर्स के व्यावसायीकरण हेतु Electrowaves Electronics को दी वित्तीय सहायता

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टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने हिमाचल प्रदेश के परवाणू स्थित M/s Electrowaves Electronics Pvt. Ltd. को स्वदेशी रूप से डिज़ाइन, विकसित और निर्मित ईवी चार्जर्स के व्यावसायीकरण के लिए वित्तीय सहायता स्वीकृत की है। यह कदम स्वच्छ गतिशीलता और आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को सुदृढ़ करते हुए विदेशी आयात पर निर्भरता कम करेगा और देश में इलेक्ट्रिक परिवहन के प्रसार को गति देगा।

कंपनी द्वारा विकसित तकनीक में शामिल हैं:

  • 30–240 kW श्रेणी के DC फास्ट चार्जर्स

  • 15 kW और 30 kW पावर कनवर्टर मॉड्यूल (100–1000 VDC आउटपुट, 100A अधिकतम करंट)

  • PLC कम्युनिकेशन कंट्रोलर (DIN SPEC 70121 के अनुरूप, ISO 15118 के आंशिक अनुरूप)

  • OCPP कंट्रोलर (OCPP 1.6J एवं OCPP 2.0.1 के अनुरूप)

  • यूनिवर्सल DC चार्ज कंट्रोलर और पूर्ण HMI डिज़ाइन

  • घरेलू एवं सार्वजनिक उपयोग हेतु AC टाइप-2 चार्जर्स

TDB का यह सहयोग भारत में उच्च गुणवत्ता वाले स्वदेशी ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के उत्पादन को बढ़ावा देगा, जिससे स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा सुरक्षा और EV सेक्टर में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूती मिलेगी।

TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि कंपनी का यह प्रयास नवाचार-आधारित आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह परियोजना ऊर्जा सुरक्षा, सतत औद्योगिक विकास और स्वच्छ गतिशीलता की दिशा में देश के प्रयासों को गति प्रदान करेगी।

Electrowaves Electronics Pvt. Ltd. के प्रमोटर्स ने इस सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग उनकी निर्माण क्षमता को विस्तार देने और भारत के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य में महत्वपूर्ण योगदान देने में मदद करेगा।

यह पहल मेकिन इंडिया को बढ़ावा देने, स्वदेशी तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने और अगली पीढ़ी की परिवहन प्रणालियों में घरेलू क्षमताओं को सुदृढ़ करने की TDB की निरंतर प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करती है।

भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने ACITI त्रिपक्षीय प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी की स्थापना की

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भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने आज एक नए त्रिपक्षीय प्रौद्योगिकी और नवाचार साझेदारी में शामिल होने पर सहमति व्यक्त की: ऑस्ट्रेलिया-कनाडा-भारत प्रौद्योगिकी और नवाचार (ACITI) साझेदारी।

तीनों पक्षों ने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग को मजबूत करने और मौजूदा द्विपक्षीय पहलों को पूरक बनाने पर सहमति व्यक्त की।

इस पहल में तीनों देशों की प्राकृतिक ताकतों का उपयोग किया जाएगा और इसमें हरित ऊर्जा नवाचार और महत्वपूर्ण खनिजों सहित लचीले आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण पर जोर दिया जाएगा। यह साझेदारी नेट जीरो की दिशा में उनके संबंधित लक्ष्यों और रणनीतिक सहयोग को गहरा करेगी और सुरक्षित, टिकाऊ और लचीले भविष्य की ओर आपूर्ति श्रृंखलाओं के और अधिक विविधीकरण को बढ़ावा देगी। यह साझेदारी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के विकास और व्यापक उपयोग की संभावनाओं का भी अध्ययन करेगी, ताकि हमारे नागरिकों के जीवन में सुधार हो सके।

उन्होंने सहमति व्यक्त की कि अधिकारियों को 2026 की पहली तिमाही में इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए बैठक करनी चाहिए।


एसईसीआई और आंध्र प्रदेश सरकार ने 1200 MWh BESS और 50 MW हाइब्रिड सोलर परियोजना के लिए सरकारी आदेशों का आदान-प्रदान किया

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Solar Energy Corporation of India Limited (SECI), जो नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE), भारत सरकार के अंतर्गत एक नवरत्न सीपीएसयू है, ने आज आंध्र प्रदेश सरकार के साथ 1200 MWh बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) के नंद्याल में विकास तथा 50 मेगावाट हाइब्रिड सोलर प्रोजेक्ट के लिए सरकारी आदेशों (GOs) का आदान-प्रदान किया।

यह आदान-प्रदान विशाखापट्टनम में आयोजित आंध्र प्रदेश पार्टनरशिप समिट 2025 के ऊर्जा सत्र के दौरान हुआ, जिसे आंध्र प्रदेश सरकार के उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग ने CII के साथ मिलकर आयोजित किया था।

परियोजना अनुमोदन और कार्यान्वयन

बिजली मंत्रालय ने 23 जनवरी 2025 के आदेश के माध्यम से 1200 MWh BESS परियोजना को मार्केट-बेस्ड ऑपरेशंस मोड के तहत लागू करने के लिए SECI को नामित किया था।

यह परियोजना SECI बोर्ड के अध्यक्ष संतोष कुमार सारंगी द्वारा 22 अक्टूबर 2025 को अनुमोदित की गई। MNRE लगातार दोनों परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा कर रहा है।

CAPEX मोड के तहत परियोजनाओं का विकास करेगा SECI

दोनों—BESS और हाइब्रिड सोलर प्रोजेक्ट—CAPEX मोड में विकसित किए जाएंगे, जिसमें SECI पूरी निवेश ज़िम्मेदारी निभाएगा।

आंध्र प्रदेश के ऊर्जा मंत्री गोट्टिपाटी रवि कुमार ने SECI प्रतिनिधियों को सरकारी आदेश सौंपे। इस अवसर पर आंध्र प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव के. विजयानंद और NREDCAP के उपाध्यक्ष एम. कमलाकर बाबू उपस्थित रहे।

SECI की ओर से शिवकुमार वेंकट वेपाकोंमा और  रोहित चौबे मौजूद थे।

भारत के स्वच्छ ऊर्जा इकोसिस्टम को मजबूती

इन सरकारी आदेशों का आदान-प्रदान आंध्र प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इन परियोजनाओं से—

  • राज्य की ग्रीन एनर्जी स्टोरेज क्षमता बढ़ेगी

  • एक सक्षम और लचीला ग्रीन ग्रिड तैयार होगा

  • भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण में तेजी आएगी

SECI ने राज्यों और केंद्र सरकार के साथ मिलकर भारत के ऊर्जा भविष्य को अधिक हरित और सक्षम बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।


एनएचपीसी लिमिटेड ने मनाया स्थापना के 50 गौरवशाली वर्ष और 51वां स्थापना दिवस उत्सवपूर्वक

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भारत सरकार का “नवरत्न” उपक्रम एनएचपीसी लिमिटेड ने अपनी स्थापना के 50 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने और 51वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में 7 नवम्बर 2025 को पूरे उत्साह के साथ समारोह मनाया। इस अवसर पर एनएचपीसी के कॉरपोरेट कार्यालय, फरीदाबाद सहित सभी क्षेत्रीय कार्यालयों, विद्युत गृहों और परियोजनाओं में भव्य समारोह आयोजित किए गए।

फरीदाबाद स्थित कॉरपोरेट कार्यालय में आयोजित स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि, माननीय केंद्रीय विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा जारी एनएचपीसी पर आधारित “कस्टमाइज्ड माई स्टैम्प” तथा एनएचपीसी की 50 वर्षों की गौरवमयी यात्रा और उपलब्धियों पर आधारित “अचीवमेंट बुक” का विमोचन किया।

मुख्य अतिथि मनोहर लाल, माननीय केंद्रीय मंत्री (विद्युत, आवासन एवं शहरी कार्य), सचिन किशोर, मुख्य डाक महाप्रबंधक (हरियाणा परिमंडल),भूपेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (सीएमडी), एनएचपीसी, निदेशकों, मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) एवं स्वतंत्र निदेशकों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर माननीय केंद्रीय मंत्री एवं मुख्य डाक महाप्रबंधक, हरियाणा परिमंडल का स्वागत एनएचपीसी के सीएमडी भूपेंद्र गुप्ता ने पौधा एवं शॉल भेंट कर किया।

समारोह में विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग, विद्युत मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक उपक्रमों के अध्यक्ष एवं निदेशक, विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों/विभागों के प्रतिनिधि, एनएचपीसी अधिकारी, कर्मचारी एवं उनके परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

भारत सरकार के डाक विभाग ने एनएचपीसी की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में “माई स्टैम्प” का एक विशेष संस्करण जारी किया, जिसमें एनएचपीसी के 12 प्रसिद्ध बांधों और बैराजों को प्रदर्शित किया गया है। ये सभी संरचनाएँ इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के प्रतीक हैं और देश के लिए जलविद्युत के क्षेत्र में एनएचपीसी की दक्षता का प्रतिनिधित्व करती हैं।

एनएचपीसी की “अचीवमेंट बुक” में पिछले 50 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों को आकर्षक तस्वीरों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है, जो संगठन की समृद्ध विरासत, तकनीकी श्रेष्ठता, उल्लेखनीय योगदान और राष्ट्र-निर्माण के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

अपने संबोधन में माननीय मुख्य अतिथि मनोहर लाल ने एनएचपीसी परिवार को 51वें स्थापना दिवस और स्वर्ण जयंती पर हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि एनएचपीसी देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पाँच दशकों की उल्लेखनीय प्रगति के दौरान, जलविद्युत के क्षेत्र में एनएचपीसी का योगदान पूरे राष्ट्र के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री ने 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है और इस दिशा में एनएचपीसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए एनएचपीसी को नवीकरणीय ऊर्जा के अधिकतम उपयोग और तकनीकी नवाचारों को अपनाना होगा। मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में एनएचपीसी हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेगी और देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करेगी।

इस अवसर पर माननीय विद्युत एवं नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा राज्यमंत्री श्रीपद नाइक ने वीडियो संदेश के माध्यम से एनएचपीसी को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पचास वर्षों की यात्रा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि समर्पण और उत्कृष्टता की प्रेरणादायक कहानी है। 1975 में प्रारंभ हुआ यह संगठन आज भारत का अग्रणी जलविद्युत एवं हरित ऊर्जा उपक्रम बन चुका है। यह उपलब्धि एनएचपीसी की निष्ठा, ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का परिणाम है।

इस अवसर पर विद्युत सचिव, भारत सरकार पंकज अग्रवाल ने भी सभी को बधाई देते हुए कहा कि यह क्षण गौरव का है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने जलविद्युत क्षेत्र में एनएचपीसी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ सौंपी हैं और एनएचपीसी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता से इन दायित्वों को निष्ठापूर्वक निभाएगा तथा विकसित भारत के विज़न को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा।

अपने संबोधन में भूपेंद्र गुप्ता, सीएमडी, एनएचपीसी ने सभी कर्मचारियों को शुभकामनाएँ दीं और माननीय केंद्रीय मंत्री का मार्गदर्शन एवं समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने विद्युत मंत्रालय का भी निरंतर सहयोग के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि आज का दिन हमारे लिए गौरव, आत्मचिंतन और प्रेरणा का दिन है। एनएचपीसी ने पिछले पचास वर्षों में न केवल भारत के ऊर्जा क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है, बल्कि देश की प्रगति में निरंतर योगदान भी दिया है। उन्होंने एनएचपीसी की यात्रा में जुड़े सभी हितधारकों का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से संस्था आज इस ऊँचाई तक पहुँची है।

कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायक और संगीतकार आनंद राज आनंद तथा लोकप्रिय हास्य कलाकार संकैत भोसले ने अपने शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।

दिन की शुरुआत में पुरस्कार वितरण एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन एनएचपीसी कॉरपोरेट कार्यालय, फरीदाबाद में किया गया। इस अवसर पर एनएचपीसी के ध्वज फहराने का कार्य सीएमडी  भूपेंद्र गुप्ता द्वारा किया गया। इस दौरान शिखा गुप्ता सहित एनएचपीसी के सभी निदेशक एवं उनके परिवारजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का आरंभ राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम्” के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में इसे गाकर किया गया। तत्पश्चात, इस अवसर पर एनएचपीसी परिवार ने माननीय प्रधानमंत्री का संबोधन (जो संस्कृति मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में आयोजित समारोह में दिया गया) लाइव वेब लिंक के माध्यम से सुना।

इस अवसर पर “एनएचपीसी पुरस्कार योजना 2024-25” के अंतर्गत सर्वश्रेष्ठ विद्युत गृह, सर्वश्रेष्ठ निर्माण परियोजना, उत्कृष्ट समर्पण, एनएचपीसी स्टार तथा कक्षा 10 एवं 12 के स्टार विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा एनएचपीसी की विभिन्न विभागीय प्रकाशन सामग्री का विमोचन भी किया गया। एनएचपीसी के कर्मचारियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को और भी जीवंत बना दिया।


भारत–रोमानिया व्यापार मंच में राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने किया भारत के व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व

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राज्य वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री जितिन प्रसाद ने आज ब्रासोव वाणिज्य एवं उद्योग मंडल (CCIBv) द्वारा भारत के बुखारेस्ट स्थित भारतीय दूतावास और भारत सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) के सहयोग से आयोजित भारत–रोमानिया व्यापार मंच में भारत के व्यापार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

इस बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश और औद्योगिक सहयोग का विस्तार करना था। इसमें ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, इंजीनियरिंग सेवाओं और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) जैसे प्रमुख क्षेत्रों के उद्योग जगत के नेताओं ने भाग लिया।

अपने संबोधन में जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, और उन्होंने रोमानियाई उद्यमों को ‘मेक इन इंडिया’ और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के तहत भारत के गतिशील विनिर्माण और नवाचार तंत्र में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।

“भारत में व्यापार के अवसर” पर दिए गए एक प्रस्तुतीकरण में हाल के नीति सुधारों, व्यवसाय करने में सुगमता से जुड़ी पहलों और प्रमुख औद्योगिक कॉरिडोरों में राज्य-स्तरीय प्रोत्साहनों का विवरण प्रस्तुत किया गया। सत्र के दौरान भारतीय और रोमानियाई कंपनियों के बीच संयुक्त उपक्रमों और प्रौद्योगिकी साझेदारी की संभावनाओं का पता लगाने के लिए समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए और व्यवसायिक मिलान सत्रों का भी आयोजन किया गया।

ब्रासोव मंच भारत और मध्य एवं पूर्वी यूरोप के बीच व्यापार और निवेश संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुआ, जिसने दोनों देशों की सतत् विनिर्माण, हरित ऊर्जा और उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों में दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी बनाने की प्रतिबद्धता को पुनः पुष्टि की।

ब्रासोव आधुनिक रोमानिया का प्रतीक है — जहाँ परंपरागत उद्योग नई तकनीकों से मिलते हैं, जहाँ लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs) को प्रोत्साहन मिलता है, और जहाँ नवाचार फलता-फूलता है। यह भावना भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ पहलों की दृष्टि से मेल खाती है, जहाँ MSME और स्टार्ट-अप्स समावेशी विकास के इंजन के रूप में कार्य करते हैं। ब्रासोव की औद्योगिक क्षमता और भारत की विनिर्माण, डिज़ाइन और इंजीनियरिंग क्षमताओं के बीच सहयोग की असीम संभावनाएँ मौजूद हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की आठवीं महासभा का उद्घाटन किया

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (28 अक्टूबर, 2025) नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की आठवीं महासभा के उद्घाटन सत्र का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) मानवता की साझा आकांक्षा का प्रतीक है — सौर ऊर्जा को समावेश, गरिमा और सामूहिक समृद्धि के स्रोत के रूप में उपयोग करने की दिशा में एक वैश्विक प्रयास।

राष्ट्रपति ने कहा कि जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है, और इस खतरे से निपटने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। भारत जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके समाधान के लिए दृढ़ कदम उठा रहा है। उन्होंने कहा कि ISA सौर ऊर्जा को अपनाने और उसके उपयोग को प्रोत्साहित कर इस वैश्विक चुनौती का समाधान प्रस्तुत करता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि समावेश का विचार भारत की विकास यात्रा की पहचान है। देश के सबसे दूरस्थ क्षेत्रों में घरों को रोशन करने के हमारे अनुभव ने इस विश्वास को मजबूत किया है कि ऊर्जा समानता ही सामाजिक समानता की नींव है। सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता समुदायों को सशक्त बनाती है, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देती है और बिजली आपूर्ति से कहीं आगे जाकर अवसरों के द्वार खोलती है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि सशक्तिकरण और समावेशी विकास का साधन है।

राष्ट्रपति ने सभी सदस्य देशों से आह्वान किया कि वे केवल अवसंरचना निर्माण से आगे बढ़कर लोगों के जीवन पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि इस महासभा को एक सामूहिक कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए जो सौर ऊर्जा को रोजगार सृजन, महिलाओं के नेतृत्व, ग्रामीण आजीविका और डिजिटल समावेशन से जोड़े। प्रगति को केवल मेगावॉट में नहीं, बल्कि रोशन हुए जीवन, सशक्त परिवारों और परिवर्तित समुदायों की संख्या से मापा जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रौद्योगिकी विकास और उन्नत तकनीकों के साझा उपयोग पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि सभी देशों को अधिकतम लाभ मिल सके। साथ ही, बड़े पैमाने पर सौर संयंत्रों के विस्तार के दौरान पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, क्योंकि पर्यावरण संरक्षण ही हरित ऊर्जा की मूल प्रेरणा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमें अपने देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया और आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस महासभा की चर्चाएँ और निर्णय सौर ऊर्जा उत्पादन में एक मील का पत्थर साबित होंगे और एक समावेशी व न्यायपूर्ण विश्व के निर्माण में योगदान देंगे।


भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र: गति से परिपक्वता की ओर

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भारत का नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र अब एक नए और परिवर्तनकारी चरण में प्रवेश कर रहा है, जो केवल क्षमता विस्तार की गति से नहीं, बल्कि इसके सिस्टम की मजबूती, स्थिरता और गहराई से परिभाषित होगा। पिछले एक दशक में रिकॉर्ड वृद्धि के बाद, अब ध्यान केवल मेगावाट जोड़ने पर नहीं बल्कि एक मजबूत, भरोसेमंद और लचीले साफ-सुथरे ऊर्जा ढांचे (clean energy architecture) के निर्माण पर केंद्रित है, जो 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के देश के महत्वाकांक्षी लक्ष्य का समर्थन कर सके।

मात्रा से गुणवत्ता की ओर संक्रमण

पिछले दस वर्षों में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 35 GW (2014 में) से बढ़कर आज 197 GW (बड़े हाइड्रो को छोड़कर) हो गई है। इतनी तेज वृद्धि के बाद अगला कदम सिर्फ क्षमता बढ़ाने से नहीं बल्कि सिस्टम सुधार और गहन समेकन की आवश्यकता को दर्शाता है।

अब ध्यान केवल क्षमता विस्तार से क्षमता अवशोषण (capacity absorption) की ओर बढ़ रहा है। इसमें ग्रिड इंटीग्रेशन, ऊर्जा भंडारण (energy storage), हाइब्रिडाइजेशन और बाज़ार सुधार शामिल हैं — ये 500 GW से अधिक गैर-जीवाश्म ऊर्जा भविष्य की नींव हैं। इस दृष्टिकोण से हालिया क्षमता वृद्धि में थोड़ी मंदी एक संतुलित, भरोसेमंद और लचीली वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

बहुपथीय विस्तार द्वारा विश्व की सबसे तेज़ RE वृद्धि

अभी 40 GW से अधिक परियोजनाएँ पीपीए (PPA), पीएसए (PSA) या ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी के अंतिम चरण में हैं, जो निवेश की मजबूती को दर्शाती हैं। राज्यों और डिस्कॉम द्वारा नवीकरणीय पावर खरीद दायित्व (RPO) का पालन, ट्रांसमिशन लाइन अपग्रेड और ग्रिड इंटीग्रेशन तकनीक का उपयोग, बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा नीलामी से पहले प्राथमिकताएं हैं।

वर्तमान वर्ष में केंद्रीय RE एजेंसियों ने 5.6 GW और राज्य एजेंसियों ने 3.5 GW की नीलामी की है। इसके अलावा, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ता 2025 में लगभग 6 GW RE क्षमता जोड़ने की योजना बना रहे हैं। इस प्रकार, RE क्षमता वृद्धि कई रास्तों से हो रही है, केवल केंद्रीय एजेंसियों द्वारा नहीं।

नीति में जानबूझकर बदलाव

पिछले दो वर्षों में नीति का ध्यान केवल क्षमता वृद्धि से सिस्टम डिज़ाइन की ओर गया है। ऊर्जा भंडारण या पीक पावर सप्लाई के साथ RE पावर टेंडर अब प्रमुख हैं, जो फर्म और डिस्पैचेबल ग्रीन पावर की ओर इशारा करते हैं। बैटरी ऊर्जा भंडारण सिस्टम (BESS) को ग्रिड और परियोजना स्तर पर एकीकृत किया जा रहा है। PLI योजना, घरेलू सामग्री आवश्यकता (Domestic Content Requirement), आयात शुल्क और ALMM जैसी नीतियां घरेलू उत्पादन बढ़ा रही हैं और आयात निर्भरता कम कर रही हैं।

GST और ALMM के पुनर्संरचनात्मक बदलाव लागत स्थिर करने, मॉड्यूल विश्वसनीयता बढ़ाने और सोलर मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता बढ़ाने के लिए रणनीतिक कदम हैं। साथ ही, बैटरी भंडारण की तैनाती Viability Gap Funded परियोजनाओं, संप्रभु टेंडर और नए भंडारण दायित्वों के माध्यम से बढ़ रही है।

ट्रांसमिशन सुधार और 200 GW क्षमता

ट्रांसमिशन अब नया फोकस है। भारत का ग्रिड ₹2.4 लाख करोड़ के ट्रांसमिशन प्लान के माध्यम से पुनः डिजाइन किया जा रहा है, जो नवीकरणीय ऊर्जा संपन्न राज्यों को मांग केंद्रों से जोड़ता है। ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और राजस्थान, गुजरात, लद्दाख से उच्च क्षमता वाली ट्रांसमिशन लाइनें निवेश प्राथमिकता में हैं।

HVDC कॉरिडोर और इंटर-रीजनल ट्रांसमिशन क्षमता को 120 GW से 143 GW (2027) और 168 GW (2032) तक बढ़ाने की योजना है। CERC General Network Access Regulations 2025 में संशोधन ने ‘solar-hours’ और ‘non-solar-hours’ के माध्यम से डाइनामिक कॉरिडोर शेयरिंग की सुविधा दी है, जो कंजेशन कम करने और stranded RE परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

निवेश आकर्षण

संक्षिप्त विलंब के बावजूद भारत नवीकरणीय ऊर्जा निवेश के लिए आकर्षक बना हुआ है। टैरिफ दुनिया में सबसे कम में से हैं। अंतरराष्ट्रीय निवेशक अब इंटीग्रेटेड और स्टोरेज-बैक्ड पोर्टफोलियो की ओर देख रहे हैं।

विस्तार से समेकन की कहानी

सच्ची RE कहानी विस्तार से समेकन की है। अब मुख्य चुनौतियाँ इंटीग्रेशन, विश्वसनीयता और स्केल एफिशियेंसी हैं। अस्थायी क्षमता वृद्धि में धीमापन परिपक्वता का संकेत है।

वर्चुअल पावर पर्चेज एग्रीमेंट (VPPA) और अन्य मार्केट आधारित साधन RE तैनाती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। ये कॉर्पोरेट और संस्थागत खरीदारों को वर्चुअल रूप से RE पावर खरीदने की अनुमति देते हैं, जिससे निवेश और मांग बढ़ती है।

आगे का रास्ता

  • राजस्थान, गुजरात और कर्नाटक में बड़े हाइब्रिड और RTC प्रोजेक्ट्स

  • ऑफशोर विंड और पंप्ड हाइड्रो स्टोरेज

  • PM Suryaghar और PM KUSUM के तहत ग्रामीण भागीदारी

  • नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत औद्योगिक डिकार्बोनाइजेशन

  • ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज III के माध्यम से RE इंटीग्रेशन

निष्कर्ष

भारत की साफ़ ऊर्जा संक्रमण अब संस्थागत मजबूती और स्थायित्व पर केंद्रित है। एक दशक की तेज़ दौड़ के बाद अब सेक्टर ग्रिड ताकत, स्थानीय उत्पादन और वित्तीय स्थिरता के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत की RE यात्रा अब कंसोलिडेशन चरण में है, जो भविष्य की तेजी और सतत वृद्धि सुनिश्चित करेगी।

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा कहानी अब गति खोने की नहीं, बल्कि परिपक्वता और मजबूती हासिल करने की कहानी है।

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