Media24Media.com: दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन

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दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का बड़ा प्रदर्शन

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नई दिल्ली- मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और वोटर लिस्ट में बदलाव को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद अब सड़क से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। मंगलवार को INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकाला। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

पूरा विवाद SIR यानी Special Intensive Revision से जुड़ा है। इसका मतलब है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची की दोबारा गहन जांच करता है।

इस प्रक्रिया में यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि—

  • मतदाता सूची में दर्ज नाम सही हैं या नहीं।

  • किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक जगह तो नहीं है।

  • मृत लोगों के नाम अभी भी सूची में तो नहीं हैं।

  • ऐसे लोगों के नाम तो नहीं हैं जो उस क्षेत्र में रहने के पात्र नहीं हैं।

  • योग्य नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल है या नहीं।

चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को साफ और सही रखना जरूरी है, ताकि चुनाव निष्पक्ष तरीके से हो सकें।

लेकिन विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में वास्तविक और योग्य मतदाताओं के नाम भी हटने का खतरा है, खासकर गरीब, मजदूर, प्रवासी और ऐसे लोगों के नाम जिनके पास जरूरी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं।

 Form 6 को लेकर विवाद क्या है?

इस पूरे मामले में Form 6 भी महत्वपूर्ण है।

Form 6 का इस्तेमाल कोई व्यक्ति मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने के लिए करता है।

विपक्ष का आरोप है कि SIR के दौरान Form 6 से जुड़ी प्रक्रिया में अतिरिक्त घोषणा/जानकारी की व्यवस्था की गई, जिससे नए मतदाताओं के लिए प्रक्रिया कठिन हो सकती है।

विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग ने ऐसा कदम उठाया जो मतदाता बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

लेकिन चुनाव आयोग की सफाई क्या है?

चुनाव आयोग का कहना है कि मूल Form 6 को बदला नहीं गया है, बल्कि उसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा की व्यवस्था की गई है।

यानी यहां दोनों पक्षों के दावे अलग हैं—

विपक्ष: Form 6 में बदलाव से मतदाताओं पर असर पड़ सकता है।

ECI: Form 6 में मूल बदलाव नहीं किया गया, केवल अतिरिक्त declaration जोड़ा गया है।

सुप्रीम कोर्ट की भूमिका क्या है?

मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है।

सुप्रीम कोर्ट में Form 6 और SIR से जुड़े मुद्दों पर सुनवाई के दौरान अदालत ने इस प्रक्रिया से संबंधित रिकॉर्ड और बदलावों को लेकर सवाल उठाए हैं।

अदालत की चिंता यह है कि Form 6 में बदलाव आखिर किस आधार पर और किस प्रक्रिया के तहत किया गया।

यहां एक बात बहुत महत्वपूर्ण है:

सुप्रीम कोर्ट ने अभी यह फैसला नहीं दिया है कि चुनाव आयोग दोषी है।

अदालत की ओर से रिकॉर्ड की जांच और मामले की न्यायिक समीक्षा की जा रही है।

इसलिए विपक्ष के राजनीतिक आरोपों और अदालत के अंतिम निष्कर्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है।

आज विपक्ष ने मार्च क्यों निकाला?

INDIA गठबंधन के सांसदों का कहना है कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता रखनी चाहिए।

विपक्ष की प्रमुख मांगें हैं:

1. CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा

विपक्ष चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

2. SIR की प्रक्रिया पर रोक

विपक्ष चाहता है कि SIR की प्रक्रिया की समीक्षा की जाए और जब तक पूरी पारदर्शिता न हो, इसे आगे न बढ़ाया जाए।

3. मतदाता सूची में पारदर्शिता

विपक्ष चाहता है कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, उनकी जानकारी और प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से स्पष्ट हो।

4. योग्य मतदाताओं का नाम न हटे

विपक्ष का सबसे बड़ा दावा है कि किसी भी वास्तविक और योग्य नागरिक का नाम सिर्फ दस्तावेजों की कमी या प्रक्रिया संबंधी कारणों से मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए।

मार्च में कौन-कौन शामिल है?

INDIA गठबंधन के कई विपक्षी दलों के सांसद इस मार्च में शामिल हुए हैं।

मार्च की शुरुआत संसद के मकर द्वार से हुई और सांसद निर्वाचन सदन, यानी चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़े।

हालांकि गठबंधन के सभी दल इस प्रदर्शन में एक साथ नहीं हैं। कुछ दलों ने मार्च में शामिल होने से दूरी बनाई है।

दिल्ली में सुरक्षा क्यों बढ़ाई गई?

विपक्ष के मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संसद और चुनाव आयोग कार्यालय के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है।

मार्च के रास्ते में बैरिकेडिंग और अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया है।

प्रशासन की चिंता यह है कि बड़ी संख्या में सांसदों और समर्थकों के एक साथ आने से यातायात और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

मामला इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

यह विवाद केवल चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव नहीं है।

इसका सीधा संबंध मतदाता सूची और मतदान के अधिकार से है।

अगर किसी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो वह चुनाव में मतदान नहीं कर सकता।

इसीलिए विपक्ष इसे लोकतंत्र और "वोट के अधिकार" का मुद्दा बता रहा है।

दूसरी ओर चुनाव आयोग का तर्क है कि अगर मतदाता सूची में गलत, डुप्लीकेट या अयोग्य नाम मौजूद रहेंगे तो चुनाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठेंगे। इसलिए मतदाता सूची का समय-समय पर पुनरीक्षण जरूरी है।

सबसे जरूरी बात

अभी यह कहना गलत होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को दोषी ठहरा दिया है। अदालत मामले की जांच/सुनवाई कर रही है। वहीं चुनाव आयोग अपने फैसले और प्रक्रिया को उचित बता रहा है।

इस समय पूरा मामला तीन स्तरों पर चल रहा है—

राजनीतिक विरोध + चुनाव आयोग की सफाई + सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक समीक्षा।


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