Media24Media.com: असली ‘सेवा-संकल्प’ बच्चों को पढ़ाना और समझदार बनाना है : गेंदलाल कोकडिया

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असली ‘सेवा-संकल्प’ बच्चों को पढ़ाना और समझदार बनाना है : गेंदलाल कोकडिया

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सरकारी कार्यक्रम में प्राचार्यों और प्रधानपाठकों की अनिवार्य उपस्थिति पर उठे सवाल, शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की चिंता

महासमुंद- ‘सेवा-संकल्प अभियान’ के तहत सलिहाभांठा में आयोजित समस्या-समाधान शिविर में महासमुंद स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा क्षेत्र के सभी प्राचार्यों एवं प्रधानपाठकों की उपस्थिति अनिवार्य किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। आदेश के चलते क्षेत्र के कई स्कूलों के प्राचार्य और प्रधानपाठक शिविर में उपस्थित रहे, जिससे स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

शिक्षा के मानवीयकरण एवं चेतना विकास मूल्य शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी, महासमुंद के प्रधान अध्यापक गेंदलाल कोकडिया ने इस व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षकों और प्रधानपाठकों का प्राथमिक दायित्व बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना, उन्हें समझदार और जिम्मेदार नागरिक बनाना है।

कोकडिया का कहना है कि समस्या-समाधान शिविर में केवल उन्हीं स्कूलों के प्रधानपाठक और प्राचार्य उपस्थित हों, जिनके विद्यालय से संबंधित कोई समस्या है। सभी स्कूलों के प्रधानपाठकों एवं प्राचार्यों को एक साथ बुलाना आवश्यक नहीं होना चाहिए।

उन्होंने बताया कि उनके विद्यालय में ऐसी कोई समस्या नहीं थी, जिसके कारण वे स्वयं शिविर में उपस्थित नहीं हुए। हालांकि, उनके संकुल प्राचार्य द्वारा सभी प्रधानपाठकों को शिविर में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था।

‘स्कूल छोड़कर सरकारी कार्यक्रमों में उपस्थिति क्यों?’

कोकडिया के अनुसार, यदि सरकारी कार्यक्रमों में सभी प्राचार्यों और प्रधानपाठकों की अनिवार्य उपस्थिति कराई जाती है, तो इसका सीधा असर स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ता है। स्कूलों के जिम्मेदार अधिकारी एवं शिक्षक यदि विद्यालय के बजाय अन्य कार्यक्रमों में उपस्थित रहेंगे, तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि लंबे समय में ऐसी व्यवस्था से जनमानस में सरकारी स्कूलों की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लोगों के बीच यह धारणा बन सकती है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के बजाय शिक्षक और प्रधानपाठक विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में व्यस्त रहते हैं।

‘आदेश जारी करने से पहले होना चाहिए चिंतन’

कोकडिया ने कहा कि किसी भी आदेश को जारी करने से पहले उसके शैक्षणिक प्रभाव पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। यदि किसी कार्यक्रम का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना है, तो उसके लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे स्कूलों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे कार्यक्रमों में संकुल समन्वयकों एवं संकुल प्राचार्यों की उपस्थिति सुनिश्चित की जा सकती है। स्कूलों से संबंधित समस्याओं को वे संबंधित विद्यालयों से जानकारी लेकर शिविर में प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे एक ओर लोगों की समस्याओं का समाधान होगा और दूसरी ओर विद्यालयों में बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी।

‘भीड़ जुटाना नहीं, शिक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी’

गेंदलाल कोकडिया ने स्कूल शिक्षा विभाग महासमुंद, शिक्षा मंत्री, कलेक्टर महासमुंद एवं मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि सरकारी कार्यक्रमों में प्राचार्यों और प्रधानपाठकों को केवल भीड़ बढ़ाने के उद्देश्य से अनिवार्य रूप से नहीं बुलाया जाए। इसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

उन्होंने कहा कि यदि ऐसे कार्यक्रमों में केवल आवश्यक अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, तो सरकारी स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था बेहतर होगी और आम जनता के बीच सरकारी स्कूलों की छवि भी मजबूत होगी।

उन्होंने केंद्र सरकार से भी आग्रह किया कि शिक्षकों के मूल दायित्व को प्राथमिकता देने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश सभी राज्यों में लागू किए जाएं।

कोकडिया ने कहा कि शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण काम बच्चों को पढ़ाना, उन्हें समझदार बनाना और बेहतर नागरिक के रूप में तैयार करना है। यही असली ‘सेवा-संकल्प’ है—सरकारी कार्यक्रमों में अनावश्यक रूप से भीड़ बढ़ाना नहीं।

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