Media24Media.com: अमेरिका-ईरान तनाव से शेयर बाजार में भूचाल! सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी 200 अंक धड़ाम

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अमेरिका-ईरान तनाव से शेयर बाजार में भूचाल! सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी 200 अंक धड़ाम

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 मुंबई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर बुधवार सुबह भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। कारोबार की शुरुआत में ही सेंसेक्स करीब 700 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी में 200 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच निवेशकों में चिंता बढ़ी और बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली।


प्री-ओपनिंग में ही मिल गए थे गिरावट के संकेत

बाजार खुलने से पहले ही कमजोर शुरुआत के संकेत मिल गए थे। प्री-ओपनिंग कारोबार में सेंसेक्स करीब 540 अंक गिरकर 76,397.24 के स्तर पर पहुंच गया था। वहीं, निफ्टी भी 203 अंक की गिरावट के साथ 23,852.05 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

सुबह 7:38 बजे गिफ्ट निफ्टी फ्यूचर्स करीब 24,033.5 के स्तर पर था। इससे बाजार में दबाव बने रहने के संकेत मिल रहे थे। मंगलवार को निफ्टी 24,055.8 के स्तर पर बंद हुआ था।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में से अधिकांश शेयरों में गिरावट रही। सनफार्मा का शेयर ही शुरुआती कारोबार में बढ़त में नजर आया, जबकि अन्य प्रमुख शेयरों पर बिकवाली का दबाव रहा।

अमेरिका-ईरान तनाव से बिगड़ा वैश्विक माहौल

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने से वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ी है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से ईरान में सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए जाने की पुष्टि के बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आईं। इस घटनाक्रम ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

पश्चिम एशिया में तनाव का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। निवेशकों ने जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बनाते हुए सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया।

क्रूड ऑयल 96 डॉलर के पार

तनाव बढ़ने का सबसे सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2 फीसदी बढ़कर 96.6 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह करीब छह सप्ताह का उच्चतम स्तर बताया जा रहा है।

पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में संघर्ष लंबा खिंचने या ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वैश्विक महंगाई को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं। तेल महंगा होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर कई वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि अमेरिका-ईरान तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। इससे विदेशी निवेशकों के रुख पर भी असर पड़ने की संभावना है। भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी का बहिर्वाह बढ़ने पर शेयर बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

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