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शेयर बाजार में लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया तनाव से बढ़ी चिंता

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मुंबई- भारतीय शेयर बाजार में लगातार पांचवें सप्ताह कमजोरी देखने को मिली। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके चलते बाजार में बिकवाली का दबाव बना रहा और प्रमुख शेयर सूचकांक साप्ताहिक आधार पर कमजोर बंद हुए।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की आशंका है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ने, महंगाई पर दबाव आने और कंपनियों की लागत बढ़ने की चिंता बाजार sentiment पर असर डाल रही है।

इसके अलावा, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक निवेशकों को सतर्क कर दिया है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया की स्थिति, विदेशी निवेश और वैश्विक बाजारों के रुख पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। इन कारकों में स्थिरता आने पर बाजार में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की बड़ी निकासी, सितंबर के पहले सप्ताह में निकाले ₹7,443 करोड़

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नई दिल्ली- भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली एक बार फिर बढ़ गई है। सितंबर के पहले सप्ताह में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब ₹7,443 करोड़ की निकासी की है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में शुद्ध बिकवाल रहे।

यह निकासी ऐसे समय हुई है जब इससे पहले जुलाई और अगस्त में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगातार निवेश किया था। अगस्त में FPIs ने ₹29,600 करोड़ से अधिक और जुलाई में करीब ₹20,200 करोड़ का निवेश किया था।

क्यों कर रहे हैं विदेशी निवेशक बिकवाली?

जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में इजाफा और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने विदेशी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इन वैश्विक परिस्थितियों के चलते उभरते बाजारों में निवेश को लेकर सतर्कता बढ़ी है।

विदेशी निवेशकों की हालिया बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार में अगस्त के दौरान विदेशी निवेश का मजबूत रुझान देखने को मिला था। हालांकि, सितंबर की शुरुआत में एक बार फिर बिकवाली लौटने से बाजार के निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

2026 में अब तक बड़ी निकासी

सितंबर की ताजा निकासी के बाद 2026 में भारतीय इक्विटी से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की कुल निकासी करीब ₹2.32 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा पूरे 2025 में हुई करीब ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से भी अधिक है।

बाजार विशेषज्ञों की नजर अब आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों के रुख और वैश्विक बाजारों की चाल पर रहेगी।

पश्चिम एशिया तनाव का भारतीय शेयर बाजार पर असर, सेंसेक्स 374 अंक टूटा; निफ्टी 24 हजार के नीचे

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पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर बुधवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। वैश्विक बाजारों में कमजोर रुख के बीच घरेलू बाजार में भी निवेशकों ने सतर्कता बरती और जमकर बिकवाली देखने को मिली।

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 373.93 अंक यानी 0.49 प्रतिशत गिरकर 76,570.35 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 141.35 अंक यानी 0.59 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 23,914.45 अंक पर बंद हुआ।

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है। इससे तेल की कीमतों में तेजी आई और भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगाई, आयात बिल और आर्थिक विकास को लेकर चिंता बढ़ गई है।

बाजार में ऑटो और आईटी शेयरों पर खास दबाव रहा, जबकि कुछ बैंकिंग, तेल एवं गैस और बड़े शेयरों में खरीदारी ने शुरुआती गिरावट को कुछ हद तक संभालने में मदद की।

विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

अमेरिका-ईरान तनाव से शेयर बाजार में भूचाल! सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी 200 अंक धड़ाम

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 मुंबई। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर बुधवार सुबह भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया। कारोबार की शुरुआत में ही सेंसेक्स करीब 700 अंक तक टूट गया, जबकि निफ्टी में 200 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच निवेशकों में चिंता बढ़ी और बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली।


प्री-ओपनिंग में ही मिल गए थे गिरावट के संकेत

बाजार खुलने से पहले ही कमजोर शुरुआत के संकेत मिल गए थे। प्री-ओपनिंग कारोबार में सेंसेक्स करीब 540 अंक गिरकर 76,397.24 के स्तर पर पहुंच गया था। वहीं, निफ्टी भी 203 अंक की गिरावट के साथ 23,852.05 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।

सुबह 7:38 बजे गिफ्ट निफ्टी फ्यूचर्स करीब 24,033.5 के स्तर पर था। इससे बाजार में दबाव बने रहने के संकेत मिल रहे थे। मंगलवार को निफ्टी 24,055.8 के स्तर पर बंद हुआ था।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में से अधिकांश शेयरों में गिरावट रही। सनफार्मा का शेयर ही शुरुआती कारोबार में बढ़त में नजर आया, जबकि अन्य प्रमुख शेयरों पर बिकवाली का दबाव रहा।

अमेरिका-ईरान तनाव से बिगड़ा वैश्विक माहौल

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ने से वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ी है। अमेरिकी प्रशासन की ओर से ईरान में सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए जाने की पुष्टि के बाद ईरान की ओर से भी जवाबी कार्रवाई की खबरें सामने आईं। इस घटनाक्रम ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

पश्चिम एशिया में तनाव का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया। निवेशकों ने जोखिम वाली परिसंपत्तियों से दूरी बनाते हुए सुरक्षित निवेश की ओर रुख किया।

क्रूड ऑयल 96 डॉलर के पार

तनाव बढ़ने का सबसे सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 2 फीसदी बढ़कर 96.6 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह करीब छह सप्ताह का उच्चतम स्तर बताया जा रहा है।

पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में संघर्ष लंबा खिंचने या ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से वैश्विक महंगाई को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं। तेल महंगा होने से परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर कई वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ सकता है।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि अमेरिका-ईरान तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। इससे विदेशी निवेशकों के रुख पर भी असर पड़ने की संभावना है। भारत जैसे उभरते बाजारों में विदेशी पूंजी का बहिर्वाह बढ़ने पर शेयर बाजार पर अतिरिक्त दबाव बन सकता है।

इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार पर नजर: महत्वपूर्ण ट्रिगर्स करेंगे रुख तय

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नए हफ्ते की शुरुआत के साथ ही भारतीय शेयर बाजार कई अहम घरेलू और वैश्विक ट्रिगर्स के प्रभाव में रहेगा। निवेशकों की निगाहें आर्थिक आंकड़ों, वैश्विक संकेतों और सेक्टोरल गतिविधियों पर टिकी रहेंगी, जिनके आधार पर बाजार की चाल तय होगी।

मुख्य ट्रिगर्स जिन पर रहेगा बाजार का फोकस:

जीएसटी वसूली व आर्थिक आंकड़े — सरकार द्वारा जारी होने वाले नवीनतम आर्थिक डेटा से बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है।

अमेरिकी फेड और वैश्विक बाजारों के संकेत — अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और फेडरल रिजर्व की नीति संकेतों का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ेगा।

कच्चे तेल की कीमतें — तेल की बढ़ती या घटती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार की भावनाओं को प्रभावित कर सकती हैं।

कॉरपोरेट घोषणाएं व सेक्टोरल मूवमेंट — आईटी, बैंकिंग और मेटल सेक्टर से आने वाली खबरें निवेशकों की धारणा को दिशा देंगी।

रुपये में उतार-चढ़ाव — डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर या मजबूत होने पर भी बाजार में हलचल देखने को मिल सकती है।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस सप्ताह बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन मजबूत सेक्टर और सकारात्मक संकेत मिलने पर निवेशकों को अच्छे मौके भी मिल सकते हैं।


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