Media24Media.com: #EcoTourism

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #EcoTourism. Show all posts
Showing posts with label #EcoTourism. Show all posts

वैश्विक बाघ दिवस 2026: केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रकृति से गहरा जुड़ाव और संरक्षण आधारित जीवनशैली अपनाने का किया आह्वान

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा आयोजित वैश्विक बाघ दिवस 2026 समारोह को संबोधित करते हुए प्रकृति के साथ समाज के गहरे जुड़ाव और संरक्षण-आधारित जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, वन्यजीव विशेषज्ञ, अग्रिम पंक्ति के वनकर्मी, विद्यार्थी और विभिन्न हितधारक उपस्थित रहे।

यादव ने कहा कि संरक्षण केवल वन्यजीवों की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान और उसके साथ संतुलित संबंध स्थापित करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा, "प्रकृति केवल पर्यटन या मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि उसका सम्मान करना और उससे आत्मिक शांति प्राप्त करना भी जरूरी है।" उन्होंने लोगों से प्रकृति से प्रेरणा लेकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पित जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया।

भारत ने बाघ संरक्षण में हासिल की बड़ी उपलब्धियां

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में बाघों की संख्या बढ़कर 3,682 हो गई है तथा देश में अब 58 टाइगर रिजर्व हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों में हाथी रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य, संरक्षित क्षेत्र, सामुदायिक रिजर्व और आर्द्रभूमियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

एनटीसीए का इको-टूरिज्म पोर्टल लॉन्च

समारोह के दौरान यादव ने एनटीसीए के इको-टूरिज्म वेबपेज का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह मंच देश के सभी टाइगर रिजर्व की प्रमाणिक वेबसाइटों को एकीकृत करता है, जिससे सफारी और आवास की बुकिंग संबंधी जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी और जिम्मेदार एवं सतत प्रकृति-आधारित पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

वन अधिकारियों से अनुभव साझा करने की अपील

यादव ने कहा कि वनों की कहानियां केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि उनमें पारंपरिक ज्ञान, वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पण और वर्षों का अनुभव भी शामिल होता है। उन्होंने वन अधिकारियों और संरक्षण विशेषज्ञों से अपने अनुभवों को लिखित रूप में साझा करने का आग्रह किया, ताकि वे भविष्य की प्रभावी नीतियां बनाने में सहायक बन सकें।

क्षमता निर्माण और वैश्विक सहयोग पर जोर

उन्होंने वन अधिकारियों और कर्मचारियों के क्षमता निर्माण के लिए वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मंच भारत के नेतृत्व में दुनिया भर में ज्ञान साझा करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।

उत्कृष्ट योगदान के लिए एनटीसीए पुरस्कार

बाघ संरक्षण और संरक्षित क्षेत्रों के बेहतर प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन अधिकारियों और अन्य योगदानकर्ताओं को एनटीसीए पुरस्कार प्रदान किए गए। समारोह में अग्रिम पंक्ति के वनकर्मियों के योगदान को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

विद्यार्थियों की रचनात्मक भागीदारी

मंत्री ने 'सेव टाइगर' विषय पर आयोजित पेंटिंग, स्केचिंग, स्लोगन लेखन और मास्क निर्माण प्रतियोगिताओं की प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इसके अलावा, मंत्रालय के पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर के ईको-क्लबों के माध्यम से विशेषकर टाइगर रिजर्व के आसपास स्थित विद्यालयों में व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया गया।

पांच महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन

समारोह के दौरान बाघ संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े पांच प्रकाशनों का विमोचन किया गया। इनमें एनटीसीए आउटरीच जर्नल 'स्ट्राइप्स' (जुलाई 2026 अंक), 24 टाइगर रिजर्व की सुरक्षा ऑडिट रिपोर्ट, भारत के टाइगर लैंडस्केप में स्लॉथ भालुओं के आवास उपयुक्तता मूल्यांकन रिपोर्ट, 'टाइगर्स ऑफ द वर्ल्ड' तथा 'द रहमान खेड़ा टाइगर' शामिल हैं।

भारत की प्रतिबद्धता दोहराई

वैश्विक बाघ दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित इस समारोह ने उत्कृष्ट कार्यों के सम्मान, वैज्ञानिक प्रबंधन, क्षमता निर्माण, जिम्मेदार इको-टूरिज्म, ज्ञान साझाकरण और जनभागीदारी के माध्यम से बाघ संरक्षण के प्रति भारत की मजबूत और निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया।

पृष्ठभूमि

करीब एक शताब्दी पहले एशिया में लगभग 1 लाख जंगली बाघ पाए जाते थे, लेकिन आज वे अपने ऐतिहासिक आवास के 8 प्रतिशत से भी कम क्षेत्र में सीमित रह गए हैं। अवैध शिकार, वन्यजीव तस्करी, आवास का विनाश, मानव-वन्यजीव संघर्ष और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों ने बाघों की संख्या को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए वर्ष 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग टाइगर समिट में 13 बाघ-आवास वाले देशों ने ग्लोबल टाइगर रिकवरी प्रोग्राम (GTRP) की शुरुआत की और 29 जुलाई को प्रतिवर्ष वैश्विक बाघ दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया। इसका उद्देश्य बाघ संरक्षण के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना और बाघों तथा उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

मैनपाट में 'नाशपाती' की मिठास : एग्री-टूरिज्म का नया गढ़ बना छत्तीसगढ़ का शिमला मैनपाट

No comments Document Thumbnail

नाशपाती से चमकी किसान मनोज यादव की किस्मत

रायपुर- छत्तीसगढ़ के शिमला के रूप में मशहूर पर्यटन स्थल मैनपाट अब एग्री-टूरिज्म (कृषि पर्यटन) के एक नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। यहाँ की अनुकूल जलवायु और राज्य शासन के उद्यानिकी विभाग की कल्याणकारी नीतियां स्थानीय किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं। पारंपरिक खेती को छोड़कर यहाँ के प्रगतिशील किसान अब फलोद्यान की ओर रुख कर सफलता की नई इबारत लिख रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरक सफलता की कहानी मैनपाट के ग्राम बारिमा निवासी कृषक मनोज यादव की है, जिन्होंने ग्राम कुदारीडीह (मेहता पॉइंट के पास) में नाशपाती का सफल बागान तैयार कर शानदार मुनाफा कमाया है।

सरकारी मदद से बंजर जमीन पर खड़े किए 170 फलदार वृक्ष

कृषक मनोज यादव ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2017-18 में मैनपाट के कमलेश्वरपुर स्थित शासकीय उद्यान रोपणी से नाशपाती के पौधे हासिल किए थे। उन्होंने अपनी 0.500 हेक्टेयर गोड़ा जमीन (पठारी और खाली पड़ी भूमि) पर लगभग 200 पौधे रोपे थे। कुछ पौधे प्राकृतिक कारणों से नष्ट जरूर हुए, लेकिन वर्तमान में उनके पास 170 पूरी तरह से फलदार पेड़ मौजूद हैं। मनोज ने अपनी इस सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग को देते हुए बताया कि कमलेश्वरपुर उद्यान विभाग के अधिकारी-कर्मचारी समय-समय पर बागान का निरीक्षण करते हैं और खाद की मात्रा से लेकर पौधों के रखरखाव के लिए निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

मौसम की मार के बाद भी कमाया 1.5 लाख का शुद्ध मुनाफा

इस वर्ष ओलावृष्टि और बाजार में बिक्री में हुई थोड़ी देरी के बावजूद, मनोज यादव के बागान से लगभग 2.5 पिकअप (करीब 260 कैरेट) नाशपाती का थोक उत्पादन हुआ। प्रति पिकअप 100 से 110 कैरेट की औसत से 500 रुपये प्रति कैरेट की दर पर थोक बाजार में फसल बेची गई, जिससे लगभग 1,30,000 रुपये की आय हुई। इसके अलावा खुले बाजार और पर्यटकों को सीधे फल बेचकर 25 से 30 हजार रुपये कमाए गए। इस तरह इस सीजन में उन्हें कुल 1.5 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई। मनोज यादव ने बताया कि पिछले वर्ष अनुकूल मौसम के दौरान इसी बागान से उन्हें 2.5 से 3 लाख रुपये की बंपर कमाई हुई थी।

एग्री-टूरिज्म का हॉटस्पॉट बना कुदारीडीह

यह बागान अब केवल फल उत्पादन का जरिया नहीं रहा, बल्कि पर्यटकों के लिए एक बड़ा आकर्षण केंद्र बन चुका है। लालमाटी के नाम से मशहूर इस खूबसूरत स्थान से रायगढ़ क्षेत्र का बेहद मनोरम दृश्य दिखाई देता है। यहाँ रोजाना करीब 100 से 250 पर्यटक प्राकृतिक खूबसूरती का लुत्फ उठाने पहुँचते हैं। पर्यटक यहाँ आकर न केवल 50 से 100 रुपये प्रति किलो की दर से ताजी नाशपाती खरीदते हैं, बल्कि खुद अपने हाथों से पेड़ों से फल तोड़ने का रोमांचक अनुभव भी लेते हैं। पर्यटकों के इस सीधे जुड़ाव से किसानों को बिचौलियों के बिना सीधे अपनी उपज बेचने का एक बेहतरीन मंच मिल रहा है।

युवाओं और अन्य किसानों के लिए बने मिसाल

प्रगतिशील किसान मनोज यादव ने क्षेत्र के युवाओं और किसानों से अपील की है कि वे अपनी खाली पड़ी अनुपयोगी भूमि पर पारंपरिक खेती के साथ-साथ नाशपाती, लीची और अन्य फलदार पौधों की बागवानी अपनाएं। इससे कम रकबे में भी अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है और पर्यटन क्षेत्रों के पास होने के कारण सीधे उपभोक्ताओं को फसल बेचकर अतिरिक्त लाभ भी लिया जा सकता है।

जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग द्वारा वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को फलोद्यान विकास, आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण और उन्नत कृषि पद्धतियों के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास लगातार जारी है। मनोज यादव जैसे किसान इस बात के प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि वैज्ञानिक मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत से बागवानी को एक बेहद मुनाफे वाले व्यवसाय में बदला जा सकता है।


भोरमदेव में इको-टूरिज्म को मिली नई पहचान, उप मुख्यमंत्री ने वन महोत्सव और 6 किमी लंबे इको ट्रेल का किया शुभारंभ

No comments Document Thumbnail

पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती- उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा

51 काला आम के पौधों का हुआ रोपण, 50 हजार सीड बॉल और एक लाख पौधों के वितरण अभियान की हुई शुरुआत

बैगा समुदाय के 100 हितग्राहियों को सोलर लालटेन और जैकेट का किया वितरण

हर शनिवार और रविवार होगी इको ट्रेल, नेचर गाइड के साथ सुरक्षित वन भ्रमण की सुविधा

रायपुर- कबीरधाम जिले के भोरमदेव अभ्यारण्य में प्रकृति संरक्षण और इको-टूरिज्म को नई पहचान देते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आज जंगल सफारी में वन महोत्सव और भोरमदेव इको ट्रेल का शुभारंभ किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, वन विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों के साथ लगभग 6 किलोमीटर लंबी भोरमदेव इको ट्रेल का भ्रमण कर जंगल की प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और रोमांचक वन यात्रा का अनुभव लिया। प्राकृतिक पर्यावरण में की जाने वाली एक जिम्मेदार यात्रा है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना वहां के प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों का संरक्षण करना, और स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से लाभ पहुँचाना है।

भोरमदेव क्षेत्र अनमोल प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध 

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव अभ्यारण्य में जंगल सफारी शुरू होने के बाद पर्यटक अब जंगल के अंदर जाकर प्रकृति का करीब से आनंद ले रहे हैं। अब आज से शुरू हुई भोरमदेव इको ट्रेल भी पर्यटकों को घने जंगल, प्राकृतिक सुंदरता और वन्य जीवों के बीच एक नया और यादगार अनुभव देगी। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने भोरमदेव क्षेत्र को अनमोल प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि पर्यटन दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला और सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। भोरमदेव में पर्यटन सुविधाओं के बढ़ने से यहां अधिक पर्यटक आएंगे। इससे होटल, वाहन, खान-पान, हस्तशिल्प और अन्य छोटे-बड़े व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी 

उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। अभी भी कई युवा जंगल सफारी में नेचर गाइड बनकर पर्यटकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। आने वाले समय में ऐसे अवसर और बढ़ेंगे, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि साल भर यहां पर्यटन गतिविधियां तेजी से चलने की संभावना है, जिसका सीधा लाभ क्षेत्र के लोगों को मिलेगा। शर्मा ने कहा कि भोरमदेव का विकास तभी सफल होगा, जब स्थानीय लोग इसे अपनी धरोहर मानकर इसकी सुरक्षा करेंगे। उन्होंने सभी से पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखना और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

स्वदेश दर्शन योजना से बदलेगी भोरमदेव की तस्वीर

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत भोरमदेव क्षेत्र के समग्र पर्यटन विकास के लिए 146 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए हैं। इस राशि से प्रवेश द्वार, शेड, संग्रहालय, आधुनिक पार्क, पार्किंग, मेला स्थल, छेरकी महल, मड़वा महल, रामचूंआ और सरोदा बांध सहित विभिन्न पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से भोरमदेव राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित होगा।

6 किलोमीटर लंबी इको ट्रेल में मिलेगा प्रकृति के बीच रोमांच

वन विभाग द्वारा विकसित भोरमदेव इको ट्रेल लगभग 6 किलोमीटर लंबी है, जिसे पूरा करने में करीब 3 से 4 घंटे का समय लगता है। ट्रेल के दौरान पर्यटक प्राकृतिक वन, मनमोहक दृश्य, पक्षियों और तितलियों का अवलोकन, औषधीय वनस्पतियों की जानकारी तथा प्रशिक्षित नेचर गाइड के साथ सुरक्षित वन भ्रमण का आनंद ले सकेंगे।

बैगा समुदाय के हितग्राहियों को किया सोलर लालटेन वितरण

वन महोत्सव के अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने करिया आमा ग्राम में 51 काला आम के पौधों का रोपण कर काला आम उपवन की स्थापना की। इसके साथ ही जिलेभर में 50 हजार सीड बॉल रोपण अभियान का शुभारंभ किया। जिले में एक लाख पौधों के वितरण अभियान की शुरुआत करते हुए ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। कार्यक्रम में बैगा समुदाय के 100 हितग्राहियों को सोलर लालटेन और जैकेट भी वितरित की गई। 

भोरमदेव ईको ट्रेल हर शनिवार और रविवार को होगी आयोजित

भोरमदेव ईको ट्रेल का संचालन करियाआमा गेट स्थित भोरमदेव ईको कैंप से प्रत्येक शनिवार और रविवार को किया जाएगा। वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि अनुभवी नेचर गाइड के साथ प्रतिभागियों को जंगल भ्रमण कराया जाएगा। इस दौरान वे पेड़-पौधों, औषधीय वनस्पतियों, पक्षियों, तितलियों, वन्यजीवों, स्थानीय भोजन, भोरमदेव मंदिर विरासत परिसर के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। ईको ट्रेल में भाग लेने के लिए 1 हजार रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क निर्धारित किया गया है। 

कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष विशेषर पटेल, छत्तीसगढ़ कृषक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी, पुलिस जवाबदेही प्राधिकरण सदस्य भगत पटेल, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, जिला पंचायत सदस्य राम कुमार भट्ट, डॉ वीरेन्द्र साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

’उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ जंगली कुत्तों (ढोल) का झुंड’

No comments Document Thumbnail

’वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में संरक्षण प्रयासों को मिली बड़ी सफलता, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र के मजबूत होने का मिला संकेत’

’अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2026 के कैमरा ट्रैप में पहली बार रिकॉर्ड हुआ चार ढोलों का संगठित झुंड’

रायपुर- वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE) 2026 के दौरान उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में लगाए गए कैमरा ट्रैप में चार दुर्लभ भारतीय जंगली कुत्तों (ढोल) का संगठित झुंड रिकॉर्ड हुआ है। वन विभाग ने इसे जंगल के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र और बेहतर वन्यजीव संरक्षण का महत्वपूर्ण संकेत बताया है।

’दुर्लभ वन्यजीव की मौजूदगी से मजबूत हुआ संरक्षण का भरोसा’

ढोल (भारतीय जंगली कुत्ता) देश के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त मांसाहारी वन्यजीवों में शामिल है। इनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि टाइगर रिजर्व में शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ी है और प्राकृतिक आवास पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हुआ है। इससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलित और स्वस्थ होने का संकेत मिलता है।

’संरक्षण के लिए उठाए गए प्रभावी कदम’

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देश पर उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। इनमें वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कर प्राकृतिक स्वरूप में विकसित करना, वन्यजीव अपराधियों और शिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, एंटी-पोचिंग अभियान को मजबूत करना तथा कैमरा ट्रैप और आधुनिक तकनीक से लगातार निगरानी करना शामिल है। इन प्रयासों में स्थानीय ग्रामीणों की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई।

’956 हेक्टेयर वन भूमि अतिक्रमण से हुई मुक्त’

वन विभाग ने रिजर्व क्षेत्र की लगभग 956 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया। इससे वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास और आवागमन के मार्ग फिर से उपलब्ध हुए। साथ ही 550 से अधिक वन्यजीव अपराधियों और अवैध शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत किया गया।

’ढोल क्यों हैं जंगल के लिए महत्वपूर्ण’

ढोल झुंड में रहने वाले सामाजिक और अनुशासित वन्यजीव हैं। ये चीतल, सांभर और जंगली सूअर जैसे शाकाहारी जीवों की संख्या को संतुलित रखते हैं, जिससे जंगल का प्राकृतिक संतुलन बना रहता है। यही कारण है कि इनकी मौजूदगी किसी भी वन क्षेत्र के स्वस्थ और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत मानी जाती है।

’जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि’

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक ने बताया कि ढोल के संगठित झुंड का रिकॉर्ड होना यह प्रमाणित करता है कि रिजर्व की खाद्य-श्रृंखला मजबूत हुई है और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण विकसित हुआ है। यह उपलब्धि वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में किए गए वैज्ञानिक प्रबंधन, कड़ी सुरक्षा और प्रभावी संरक्षण प्रयासों का परिणाम है।

’वन्यजीव संरक्षण का उभरता मॉडल बन रहा छत्तीसगढ़’

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दुर्लभ वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। राज्य सरकार के संरक्षण प्रयासों से यह रिजर्व मध्य भारत में वन्यजीवों के सुरक्षित और समृद्ध आवास के रूप में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।

इन्फ्लुएंसर मीट से छत्तीसगढ़ पर्यटन को मिलेगी वैश्विक पहचान, डिजिटल मंचों पर गूंजेंगी प्रदेश की खूबसूरती

No comments Document Thumbnail

पाँच दिवसीय फेम टूर में मैनपाट, सतरेंगा और रामगढ़ महोत्सव का अनुभव ले रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, करोड़ों दर्शकों तक पहुंचेगा छत्तीसगढ़ का प्राकृतिक, सांस्कृतिक और जनजातीय वैभव

रायपुर- डिजिटल माध्यमों के जरिए छत्तीसगढ़ पर्यटन को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड द्वारा 26 से 30 जून 2026 तक पाँच दिवसीय "इन्फ्लुएंसर मीट एवं फेमिलराइजेशन (फेम) टूर" का आयोजन किया जा रहा है। इस अभिनव पहल के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित प्रमुख सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है, ताकि उनके माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन संभावनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार देश और दुनिया तक पहुंच सके।

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागी प्रदेश के प्रसिद्ध हिल स्टेशन मैनपाट, प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण सतरेंगा तथा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के रामगढ़ महोत्सव का भ्रमण कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान इन्फ्लुएंसर्स प्राकृतिक छटा, जनजातीय संस्कृति, पारंपरिक लोककलाओं, पर्यटन सुविधाओं और सांस्कृतिक आयोजनों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर रहे हैं। साथ ही वे विभिन्न डिजिटल मंचों के लिए आकर्षक फोटो, वीडियो और रचनात्मक सामग्री तैयार कर रहे हैं, जिसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों की विशेषताएं लाखों दर्शकों तक पहुंचेंगी।

मैनपाट अपनी मनोहारी वादियों, तिब्बती संस्कृति, झरनों और प्राकृतिक आकर्षणों के कारण प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विशेष स्थान रखता है। वहीं सतरेंगा इको-टूरिज्म के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ गंतव्य है, जहां विशाल जलाशय, प्राकृतिक वातावरण और रोमांचक गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इसके साथ ही रामगढ़ महोत्सव के माध्यम से प्रतिभागी छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक कलाओं और ऐतिहासिक विरासत से भी रूबरू हो रहे हैं।

यह आयोजन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के मार्गदर्शन, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा के नेतृत्व, प्रबंध संचालक विवेक आचार्य के सक्षम संचालन तथा उपमहाप्रबंधक  पूनम शर्मा के निर्देशन में छत्तीसगढ़ टूरिज़्म बोर्ड की टीम द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जा रहा है। आयोजन का अंतिम दिन 30 जून को निर्धारित है।

डिजिटल युग में सोशल मीडिया पर्यटन प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। ऐसे में इस इन्फ्लुएंसर मीट के माध्यम से तैयार की जा रही डिजिटल सामग्री छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों को देश और दुनिया के करोड़ों लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के पर्यटन स्थलों की लोकप्रियता और दृश्यता बढ़ेगी, पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, हस्तशिल्प, लोककला, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

इस प्रकार के नवाचार आधारित प्रचार अभियान राज्य को देश के अग्रणी पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आगामी समय में भी पर्यटन के प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए ऐसे अभिनव प्रयास निरंतर किए जाते रहेंगे।

हॉर्नबिल सफारी से बढ़ेगा इको-टूरिज्म, जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा नया आयाम

No comments Document Thumbnail

रायपुर- छत्तीसगढ़ के एक प्रमुख टाइगर रिजर्व में इको-टूरिज्म और पक्षी पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘हॉर्नबिल सफारी’ की शुरुआत की गई है। यह पहल न केवल प्रकृति प्रेमियों और पक्षी पर्यवेक्षकों (बर्ड वॉचर्स) को आकर्षित करेगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय आर्थिक विकास को भी नई दिशा देगी।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हॉर्नबिल सफारी के माध्यम से पर्यटकों को जंगलों की समृद्ध जैव विविधता और दुर्लभ पक्षी प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अवसर मिलेगा। विशेष रूप से हॉर्नबिल पक्षी, जिसे जंगलों का “प्राकृतिक बीज वाहक” माना जाता है, वन पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यह पहल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करेगी। सफारी संचालन, गाइड सेवाओं, आवास, परिवहन और अन्य पर्यटन गतिविधियों से जुड़े लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पक्षी पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए हॉर्नबिल सफारी छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में शामिल करने में मदद कर सकती है। इसके माध्यम से पर्यटक वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को समझ सकेंगे तथा संरक्षण प्रयासों के प्रति अधिक संवेदनशील बनेंगे।

वन विभाग का कहना है कि इस पहल को पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल तरीके से संचालित किया जाएगा ताकि पर्यटन गतिविधियों का वन्यजीवों और उनके प्राकृतिक आवास पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। अधिकारियों को उम्मीद है कि हॉर्नबिल सफारी राज्य में सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।


विशेष लेख-सीएम विष्णु देव साय बस्तर में देंगे राज्य की सबसे बड़े ‘हेरिटेज मैराथन’ की सौगात

No comments Document Thumbnail

‘बस्तर दौड़ेगा, देश जुड़ेगा’ की थीम पर 22 मार्च को होगा राज्य का सबसे बड़ा स्पोर्ट्स इवेंट

फिटनेस और विरासत का उत्सव- बस्तर को ग्लोबल टूरिज्म मैप पर लाने की बड़ी तैयारी

बस्तर को देश का प्रमुख टूरिज्म और स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन बनाना हमारा संकल्प- साय

रायपुर- छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में खेल, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ का आयोजन रविवार 22 मार्च को करने जा रही है। यह राज्य का अब तक का सबसे बड़ा रनिंग इवेंट होगा, जिसकी शुरुआत जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान से होगी और समापन विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात पर होगा। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस रूट पर दौड़ते हुए प्रतिभागियों को बस्तर की अद्भुत वादियों और सांस्कृतिक पहचान का अनूठा अनुभव मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस आयोजन को छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि बस्तर हेरिटेज मैराथन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध परंपरा, प्राकृतिक संपदा और जनभागीदारी का उत्सव है। उन्होंने कहा कि ‘बस्तर दौड़ेगा, देश जुड़ेगा’ के संदेश के साथ यह आयोजन न केवल फिटनेस को बढ़ावा देगा, बल्कि बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को अवसर देना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है।

मैराथन में 42 किलोमीटर (फुल मैराथन), 21 किलोमीटर (हाफ मैराथन), 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर (फन रन) की श्रेणियां रखी गई हैं, ताकि हर आयु वर्ग और फिटनेस स्तर के लोग इसमें भाग ले सकें। प्रतिभागियों के लिए कुल 25 लाख रुपये की आकर्षक पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। पंजीकरण शुल्क मात्र 299 रुपये रखा गया है, जबकि बस्तर संभाग के सातों जिलों के प्रतिभागियों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है, जिससे स्थानीय स्तर पर अधिकतम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

प्रतिभागियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मैराथन मार्ग पर व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। पूरे रूट पर नियमित अंतराल पर रिफ्रेशमेंट पॉइंट्स (आरपीएन) स्थापित किए जाएंगे, जहां एनर्जी ड्रिंक्स और पानी की उपलब्धता रहेगी। इसके अलावा मेडिकल सपोर्ट, इमरजेंसी सेवाएं और सुव्यवस्थित रूट मैनेजमेंट भी सुनिश्चित किया गया है ताकि प्रतिभागियों को सुरक्षित और सुगम अनुभव मिल सके। इस आयोजन को और यादगार बनाने के लिए प्रत्येक प्रतिभागी को फिनिशर मेडल, ई-सर्टिफिकेट और प्रोफेशनल रनिंग फोटोग्राफ्स प्रदान किए जाएंगे। साथ ही जुम्बा सेशन और लाइव डीजे जैसे आकर्षक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रतिभागियों में उत्साह और ऊर्जा बनी रहे।

‘रन फॉर नेचर, रन फॉर कल्चर’ (प्रकृति के लिए दौड़ो, संस्कृति के लिए दौड़ो) की थीम पर आधारित यह मैराथन बस्तर की प्राकृतिक धरोहर और जनजातीय संस्कृति को देशभर के सामने प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने देशभर के खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि यह अवसर न केवल दौड़ने का है, बल्कि बस्तर को करीब से जानने और उसकी विरासत को महसूस करने का भी है। इच्छुक प्रतिभागी https://www.bastarheritage. run/registration लिंक के माध्यम से या आधिकारिक पोस्टर में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘फिट इंडिया’, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ और देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के विजन से प्रेरित है। प्रधानमंत्री ने हमेशा भारत की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर दिया है। बस्तर हेरिटेज मैराथन उसी सोच को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है, जहां खेल, संस्कृति और प्रकृति एक साथ जुड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार बस्तर को देश के प्रमुख पर्यटन और स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस तरह के आयोजनों से न केवल युवाओं में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। बस्तर के कारीगरों, कलाकारों और छोटे-छोटे व्यवसायों को भी इसकाप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री साय ने देशभर के खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह देश के हर कोने से युवाओं और नागरिकों को आमंत्रित करते हैं कि वे बस्तर आएं, यहां की प्रकृति, संस्कृति और ऊर्जा को महसूस करें और इस ऐतिहासिक मैराथन का हिस्सा बनें।

पूर्वोत्तर में एकीकृत पर्यटन विकास को गति: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 4वीं उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स बैठक में किया मार्गदर्शन

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री, ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज नई दिल्ली में आयोजित पर्यटन पर 4वीं उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स (HLTF) बैठक में भाग लिया। इस बैठक की अध्यक्षता मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के. संगमा ने की। इसमें त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा, सिक्किम के पर्यटन मंत्री त्शेरिंग टी. भूटिया, अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन मंत्री पासंग दोर्जे सोना तथा पर्यटन मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम.आर. सिनरेम भी उपस्थित रहे।

बैठक ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक एकीकृत और क्रियाशील पर्यटन ब्लूप्रिंट तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया। इसमें प्राथमिकताओं को स्पष्ट करने, चुनौतियों की पहचान करने और राज्यों के बीच समन्वित कार्यान्वयन को तेज करने पर विशेष जोर दिया गया।

बैठक के प्रमुख बिंदु इस प्रकार रहे:

🌄 पर्यटन क्षमता को अनलॉक करने पर जोर

  • मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करना

  • विश्वस्तरीय पर्यटन अवसंरचना का विकास

  • वैश्विक आकर्षण वाले प्रमुख पर्यटन स्थलों का निर्माण

  • एडवेंचर एवं इको-टूरिज्म को बढ़ावा

  • संस्कृति, प्रकृति और विरासत आधारित नए पर्यटन उत्पाद विकसित करना

🧭 कौशल विकास व सेवा मानकीकरण

  • स्थानीय युवाओं के लिए स्किलिंग इकोसिस्टम का विस्तार

  • सेवा मानकों को एकरूप करना

  • क्षमता-विकास को सुदृढ़ कर सतत उद्योग विकास को बढ़ावा

🌐 उत्तरी-पूर्व का एकीकृत ब्रांडिंग अभियान

  • पूर्वोत्तर भारत को एक प्रीमियम पर्यटन क्षेत्र के रूप में वैश्विक मंच पर स्थापित करना

  • नीतिगत प्रक्रियाओं को सरल बनाकर निजी निवेश आकर्षित करना

  • राज्यों के बीच मजबूत समन्वय से सहज पर्यटन सर्किट विकसित करना

🗣️ मंत्री सिंधिया के प्रमुख विचार

मंत्री सिंधिया ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत, भारत की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर का शक्ति-केंद्र है और इसे देश के सबसे आकर्षक पर्यटन गंतव्यों में परिवर्तित किया जा सकता है। उन्होंने जोर दिया:

  • अंतिम मील कनेक्टिविटी का सुदृढ़ीकरण

  • स्थिरता-आधारित पर्यटन विकास

  • हर राज्य के प्रमुख त्योहारों का वार्षिक कैलेंडर तैयार करना

📝 अगले कदम

केंद्रीय मंत्री ने मेघालय सरकार से अनुरोध किया कि सभी सदस्यों की सुझावों को शामिल कर अंतिम HLTF रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

यह बैठक पूर्वोत्तर क्षेत्र में टिकाऊ, समन्वित और व्यापक पर्यटन विकास की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हुई।

गंगटोक में आयोजित होगा उत्तर-पूर्व क्षेत्र का 13वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट 2025

No comments Document Thumbnail

भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए 13वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट (ITM) का आयोजन 13 से 16 नवंबर 2025 तक गंगटोक, सिक्किम में किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत करेंगे। इस अवसर पर सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उत्तर-पूर्वी राज्यों के पर्यटन मंत्री एवं पर्यटन मंत्रालय तथा राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।

अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट, पर्यटन मंत्रालय की एक वार्षिक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य उत्तर-पूर्वी क्षेत्र — “भारत की अष्टलक्ष्मी” — की पर्यटन संभावनाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करना है। यह आयोजन क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए सतत और समावेशी पर्यटन विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। गंगटोक में आयोजित यह 13वां संस्करण मंत्रालय की इस प्रतिबद्धता को दोहराता है कि उत्तर-पूर्व को ईको-टूरिज़्म, वेलनेस, संस्कृति और एडवेंचर के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित किया जाएगा।

गंगटोक में इस आयोजन का विशेष महत्व है। सिक्किम को सतत और जिम्मेदार पर्यटन का आदर्श राज्य माना जाता है। स्वच्छ प्राकृतिक सौंदर्य, जैविक खेती, आध्यात्मिक विरासत और जीवंत स्थानीय संस्कृति के कारण सिक्किम उस सामुदायिक और पर्यावरण-सचेत पर्यटन का उत्कृष्ट उदाहरण है जिसे मंत्रालय पूरे देश में प्रोत्साहित करना चाहता है। यह आयोजन मंत्रालय की ‘ट्रैवल फॉर लाइफ’ पहल के अनुरूप है।

13वें अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट में देश-विदेश से व्यापक भागीदारी होगी। 19 देशों (जैसे स्पेन, थाईलैंड, फ्रांस, रूस, जर्मनी, वियतनाम आदि) से प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस कार्यक्रम में 39 अंतरराष्ट्रीय टूर ऑपरेटर, 5 अंतरराष्ट्रीय इन्फ्लुएंसर, 50 घरेलू खरीदार, 20 घरेलू इन्फ्लुएंसर एवं ट्रैवल मीडिया, और 91 घरेलू विक्रेता शामिल होंगे। आयोजन में तकनीकी सत्र, पैनल चर्चाएं, उत्पाद प्रस्तुतिकरण और B2B मीटिंग्स आयोजित की जाएंगी ताकि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा मिल सके।

राज्य पर्यटन अधिकारियों के साथ चर्चाएं सिनेमैटिक टूरिज्म, होमस्टे, युवा उद्यमिता, डिजिटल नवाचार, स्थायित्व और साहसिक पर्यटन जैसे विषयों पर केंद्रित होंगी। कार्यक्रम में उत्तर-पूर्व की समृद्ध सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं को भी प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही, प्रतिभागियों को गंगटोक और उसके आसपास के प्रमुख स्थलों जैसे रुमटेक मठ, दो द्रुल छोर्टेन और नामग्याल तिब्बतोलॉजी संस्थान के तकनीकी भ्रमण का अवसर भी मिलेगा।

उत्पाद प्रस्तुतियों में वन्यजीव और नदी क्रूज़ पर्यटन, त्योहारों, विरासत, हस्तशिल्प, खानपान और साहसिक गतिविधियों जैसे क्षेत्रों की संभावनाएं प्रदर्शित की जाएंगी। आयोजन के बाद, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू प्रतिभागियों के लिए उत्तर-पूर्वी राज्यों के विभिन्न गंतव्यों की यात्राओं का आयोजन किया जाएगा ताकि वे क्षेत्र की सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकें।

गंगटोक में आयोजित 13वां अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मार्ट 2025, उत्तर-पूर्व की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव होने के साथ-साथ, सरकार की इस दृष्टि को भी सुदृढ़ करता है कि उत्तर-पूर्व को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाए। अपनी शांत प्राकृतिक दृश्यों, जीवंत समुदायों और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता के साथ, सिक्किम इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए एक आदर्श पृष्ठभूमि प्रस्तुत करता है — जो एकता में विविधता और जिम्मेदार पर्यटन आधारित विकास की भावना का प्रतीक है।

जशपुर जम्बुरी में पर्यटकों ने लिया ग्रामीण संस्कृति, रोमांच और आतिथ्य का अनूठा अनुभव

No comments Document Thumbnail

ग्राम केरे में आठ होम स्टे की सुविधा, देशदेखा में रॉक क्लाइंबिंग और लोक नृत्य-संस्कृति का आकर्षण

रायपुर-छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में आयोजित जशपुर जम्बुरी ने पर्यटन को नया आयाम देते हुए स्थानीय संस्कृति, प्रकृति और रोमांच को एक साथ जोड़ा है। जिला प्रशासन द्वारा 6 से 9 नवम्बर तक आयोजित इस चार दिवसीय आयोजन में देशभर से आए पर्यटकों को जशपुर की सुन्दर वादियों, लोक संस्कृति और आतिथ्य का सजीव अनुभव प्राप्त हो रहा है।

ग्राम केरे में पर्यटकों के लिए आठ होम स्टे की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जहाँ मेहमानों को सभी आवश्यक सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। प्रशासन की इस पहल ने ग्रामीण पर्यटन को नई दिशा दी है और स्थानीय परिवारों को भी आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर मिला है।

होम स्टे में ठहरे पर्यटक केवल अतिथि नहीं, बल्कि स्थानीय परिवारों के सदस्य बनकर रह रहे हैं। वे जशपुर की जीवनशैली, खान-पान और परंपराओं को नजदीक से महसूस कर रहे हैं। पर्यटकों ने कहा कि “होम स्टे में रहना होटल से कहीं बेहतर अनुभव है। यहाँ की सादगी, आत्मीयता और घरेलू भोजन ने मन मोह लिया।”

होम स्टे की यह अवधारणा स्थानीय जीवन से सीधा जुड़ाव प्रदान करती है। यहाँ पर्यटक घरेलू वातावरण में रहकर न केवल स्थानीय संस्कृति और भाषा को समझते हैं, बल्कि परंपरागत छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद भी लेते हैं। यह मॉडल होटल की तुलना में अधिक किफायती होने के साथ-साथ व्यक्तिगत और पारिवारिक वातावरण भी प्रदान करता है।

भारत के कई राज्यों — हिमाचल, उत्तराखंड, केरल, सिक्किम और असम — की तरह अब छत्तीसगढ़ भी होम स्टे आधारित ग्रामीण पर्यटन के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जशपुर की पहाड़ियाँ और हरियाली इस अवधारणा को और अधिक आकर्षक बनाती हैं।

जशपुर जम्बुरी में रोमांच प्रेमियों के लिए भी विशेष आकर्षण रहा। देशदेखा क्षेत्र में लगभग 120 पर्यटकों ने रॉक क्लाइंबिंग का रोमांचक अनुभव लिया, जो पूरी सुरक्षा और विशेषज्ञों की निगरानी में संपन्न हुआ। पर्यटक हरी-भरी वादियों के बीच एडवेंचर और सुकून दोनों का आनंद ले रहे हैं।

पहले दिन पंजीकृत पर्यटकों को जशपुर की पारंपरिक शैली में दोना-पत्तल में भोजन परोसा गया। दिनभर की गतिविधियों के बाद संध्या बेला में पर्यटक लोक कलाकारों के साथ झूमते नजर आए। चांदनी रात और संगीत की स्वर-लहरियों ने माहौल को उत्सवमय बना दिया।

जशपुर जम्बुरी की विशेषता रही स्टार-गेजिंग सेशन, जिसमें पर्यटकों ने खुले आसमान के नीचे तारों को निहारते हुए प्रकृति की अद्भुत सुंदरता का अनुभव किया। लोक कलाकारों के गीत, नृत्य और चांदनी की उजास ने कार्यक्रम को अविस्मरणीय बना दिया।

जिला प्रशासन द्वारा निवास, भोजन, सुरक्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सुदृढ़ व्यवस्था ने जशपुर जम्बुरी को एक आदर्श ग्रामीण-पर्यटन उत्सव बना दिया है। इस आयोजन से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है, बल्कि जशपुर को “प्रकृति, संस्कृति और एडवेंचर का संगम” के रूप में राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिली है।


मयाली नेचर कैम्प में ऑनलाइन बुकिंग सुविधा प्रारंभ

No comments Document Thumbnail

रायपुर-जशपुर जिले के कुनकुरी परिक्षेत्र अंतर्गत स्थित मयाली नेचर कैम्प अपनी प्राकृतिक सुंदरता एवं मनोहारी परिवेश के कारण पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह क्षेत्र घने वनों से आच्छादित है। यह क्षेत्र जशपुर जिले को प्रकृति द्वारा मिला एक अनुपम उपहार है। मयाली नेचर कैम्प देवबोरा एवं मयाली ग्राम के मध्य स्थित है। यह स्थल पारिवारिक भ्रमण, मित्रों के साथ अवकाश व्यतीत करने तथा साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए लंबी दूरी की पैदल यात्राओं हेतु अत्यंत उपयुक्त है।

पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मयाली नेचर कैम्प में ऑनलाइन गेट मनी बुकिंग सुविधा प्रारंभ की गई है। इस सुविधा के माध्यम से पर्यटक अब अपने भ्रमण हेतु ऑनलाइन टिकट प्राप्त कर सकेंगे। आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस ऑनलाइन सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और मयाली नेचर कैम्प की प्राकृतिक सौंदर्यता का आनंद लें।



Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.