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CGPSC भर्ती मामला: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सचिव जीवन किशोर ध्रुव की जमानत पर CBI से मांगा जवाब

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नई दिल्ली/रायपुर- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व सचिव एवं सेवानिवृत्त IAS अधिकारी जीवन किशोर ध्रुव की जमानत याचिका पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने सोमवार, 21 सितंबर 2026 को मामले की सुनवाई करते हुए CBI को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का नोटिस जारी किया।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और न्यायमूर्ति संदीप मेहता शामिल थे। ध्रुव ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के 5 अगस्त 2026 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें हाईकोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी।

2020-2022 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा मामला

यह मामला CGPSC की 2020 से 2022 के बीच की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। CBI इस मामले की जांच कर रही है। सरकारी प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के अनुसार, CBI ने सितंबर 2025 में CGPSC के तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव समेत पांच लोगों को कथित भर्ती अनियमितताओं की जांच के दौरान गिरफ्तार किया था।

PIB की 19 सितंबर 2025 की विज्ञप्ति के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए लोगों में तत्कालीन CGPSC सचिव जीवन किशोर ध्रुव, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक तथा कुछ अन्य आरोपी शामिल थे। CBI की जांच कथित तौर पर 2020 और 2021 की परीक्षाओं में चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं और कथित पक्षपात से जुड़े आरोपों की पड़ताल कर रही थी।

हाईकोर्ट ने अगस्त में जमानत की थी खारिज

सुप्रीम कोर्ट में जाने से पहले जीवन किशोर ध्रुव को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली थी। अगस्त 2026 में हाईकोर्ट ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र की गोपनीयता और कथित पेपर लीक के प्रभाव को लेकर कड़ी टिप्पणियां की थीं।

हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए ध्रुव ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की। अब सुप्रीम कोर्ट ने CBI का पक्ष जानने के लिए नोटिस जारी किया है।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने CBI को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को CBI के जवाब पर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई करीब चार सप्ताह बाद होने की बात रिपोर्टों में कही गई है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने जमानत मंजूर नहीं की है। अदालत ने केवल CBI से जवाब मांगा है। इसलिए अगली सुनवाई में CBI का पक्ष और उसके बाद अदालत का आदेश इस मामले में महत्वपूर्ण होगा।

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