Media24Media.com: भिलाई इस्पात संयंत्र में 250 टन कबाड़ चोरी का मामला, अब सीबीआई करेगी जांच

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भिलाई इस्पात संयंत्र में 250 टन कबाड़ चोरी का मामला, अब सीबीआई करेगी जांच

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दुर्ग/भिलाई- छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित भिलाई इस्पात संयंत्र से जुड़े करीब 250 टन लौह स्क्रैप चोरी के मामले ने अब बड़ा रूप ले लिया है। राज्य सरकार ने इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपने की मंजूरी दे दी है। इससे पहले मामले की जांच पुरानी भिलाई पुलिस कर रही थी।

छत्तीसगढ़ सरकार ने 25 सितंबर 2026 को अधिसूचना जारी कर इस मामले में सीबीआई को जांच का अधिकार दिया। मामला पुरानी भिलाई थाने में अपराध क्रमांक 277/2026 के तहत दर्ज है।

कैसे सामने आया मामला?

मामला उस समय सामने आया जब 26 मई 2026 को पुलिस ने अकलोरडीह-खदानपारा, हथखोज क्षेत्र स्थित ए.के. ट्रेडर्स के परिसर में छापेमारी की।

पुलिस को वहां बड़ी मात्रा में लोहे की प्लेटें, बीम के कटे हुए टुकड़े और अन्य लौह सामग्री मिली। पुलिस के अनुसार यह सामग्री भिलाई इस्पात संयंत्र से कथित तौर पर बाहर निकाली गई थी।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने बड़ी मात्रा में स्क्रैप के अलावा ट्रक, अर्थमूवर, क्रेन और अन्य मशीनरी भी जब्त की थी।

पुलिस के प्रारंभिक आकलन के अनुसार जब्त किए गए माल, वाहनों और मशीनरी की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये थी, जबकि संदिग्ध चोरी के लोहे की कीमत लगभग 90 लाख रुपये बताई गई थी।

चोरी का माल बाहर कैसे पहुंचाया जाता था?

जांच में एक कथित तरीके की जानकारी सामने आई है, जिसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया।

जांच एजेंसियों के अनुसार, भिलाई इस्पात संयंत्र से निकलने वाली फ्लू डस्ट की खेपों में कथित तौर पर मूल्यवान लौह स्क्रैप को छिपाकर बाहर ले जाने की कोशिश की जाती थी।

फ्लू डस्ट इस्पात निर्माण प्रक्रिया से निकलने वाला एक उप-उत्पाद है। आरोप है कि इसी तरह के वैध परिवहन के बीच चोरी के स्क्रैप को बाहर निकालने का रास्ता बनाया गया।

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कथित तौर पर संयंत्र के अंदर काम करने वाले लोगों, परिवहन से जुड़े व्यक्तियों, स्क्रैप कारोबारियों और बाहर की औद्योगिक इकाइयों के बीच संभावित संबंधों के संकेत मिले।

अब तक 21 गिरफ्तारियां

इस मामले में पुलिस अब तक 21 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

इनमें भिलाई इस्पात संयंत्र से जुड़े अधिकारी/कर्मचारी, परिवहन से जुड़े लोग तथा निजी क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति शामिल बताए गए हैं। एक राजनीतिक पदाधिकारी का नाम भी गिरफ्तार आरोपियों में बताया गया है।

जांच का दायरा बढ़ते हुए एक निजी बिजली एवं इस्पात कंपनी तक भी पहुंचा। रिपोर्टों के अनुसार कंपनी के प्रबंध निदेशक और निदेशक को 18 सितंबर को गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 21 हो गई।

अब सीबीआई के सामने क्या बड़े सवाल हैं?

सीबीआई की जांच में मुख्य रूप से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि—

  • भिलाई इस्पात संयंत्र से कथित रूप से स्क्रैप बाहर कैसे निकाला जाता था?

  • क्या संयंत्र के अंदर से किसी व्यक्ति या समूह ने इसमें मदद की?

  • परिवहन व्यवस्था का इस्तेमाल किस तरह किया गया?

  • चोरी का माल किन लोगों या कंपनियों तक पहुंचाया गया?

  • क्या बरामद 250 टन स्क्रैप ही पूरे मामले की सीमा है या इसके पीछे इससे बड़ा नेटवर्क था?

  • चोरी और बिक्री से होने वाले कथित आर्थिक लाभ में कौन-कौन लोग शामिल थे?

  • क्या इस मामले में दस्तावेज, परिवहन रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, बैंक लेनदेन या डिजिटल साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?

स्थानीय पुलिस ने पहले ही मामले की कई कड़ियों की जांच की है। अब सीबीआई उन साक्ष्यों और केस डायरी की समीक्षा करके कथित नेटवर्क की आगे की कड़ियों की जांच कर सकती है।

क्या मामला हजारों करोड़ रुपये का है?

इस मामले में कुछ राजनीतिक दावे हजारों करोड़ रुपये की कथित चोरी को लेकर सामने आए हैं। हालांकि, अभी तक सामने आई पुलिस कार्रवाई में करीब 250 टन स्क्रैप की बरामदगी और उससे संबंधित मामले की जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध है।

इसलिए हजारों करोड़ रुपये के कथित नुकसान को फिलहाल जांच में साबित तथ्य के रूप में नहीं बताया जा सकता। वास्तविक नुकसान कितना हुआ और चोरी कितने समय से चल रही थी, इसका पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा।

भिलाई इस्पात संयंत्र के लिए मामला क्यों महत्वपूर्ण है?

भिलाई इस्पात संयंत्र भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के इस्पात संयंत्रों में से एक है। ऐसे संयंत्र से बड़ी मात्रा में सामग्री के कथित रूप से बाहर निकलने का मामला सुरक्षा, निगरानी, परिवहन व्यवस्था और आंतरिक नियंत्रण से जुड़े सवाल खड़े करता है।

सीबीआई जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी होगा कि इतनी बड़ी मात्रा में सामग्री कथित रूप से संयंत्र से बाहर कैसे पहुंची और क्या इसमें किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका थी।

अब आगे क्या होगा?

सीबीआई अब राज्य पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच, गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े रिकॉर्ड और जब्त सामग्री सहित उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा कर सकती है।

जांच आगे बढ़ने पर संयंत्र से जुड़े कर्मचारी, ठेका एजेंसियां, ट्रांसपोर्टर, वाहन मालिक, स्क्रैप कारोबारी और कथित रूप से चोरी का माल प्राप्त करने वाली औद्योगिक इकाइयां जांच के दायरे में आ सकती हैं।

फिलहाल इस मामले में 21 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन जांच एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये गिरफ्तारियां पूरे कथित नेटवर्क तक पहुंचती हैं या इसके पीछे और लोग भी हैं।

बड़ी बात

भिलाई इस्पात संयंत्र से करीब 250 टन लौह स्क्रैप की बरामदगी से शुरू हुआ मामला अब केंद्रीय जांच एजेंसी तक पहुंच गया है। 21 गिरफ्तारियों के बाद सीबीआई के सामने अब कथित चोरी के पूरे नेटवर्क, अंदरूनी मिलीभगत और चोरी के माल की अंतिम मंजिल का पता लगाने की चुनौती है।

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