Media24Media.com: प्राचार्यों, प्रोफेसरों और प्रधानपाठकों को सड़क सुरक्षा की जानकारी है या नहीं? — गेंदलाल कोकडिया

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प्राचार्यों, प्रोफेसरों और प्रधानपाठकों को सड़क सुरक्षा की जानकारी है या नहीं? — गेंदलाल कोकडिया

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गंभीर दुर्घटना के बाद ही जागेगा स्कूल शिक्षा विभाग?

महासमुंद- स्कूली एवं महाविद्यालयीन विद्यार्थियों में सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता को लेकर महासमुंद जिले में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। चेतना विकास मूल्य शिक्षा के अंतर्गत अभिभावक विद्यालय, कोकड़ी शासकीय विद्यालय में सड़क सुरक्षा एवं यातायात नियमों को लेकर एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई।

कार्यशाला का आयोजन विद्यालय के शिक्षक गेंदलाल कोकडिया एवं विद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों को सड़क पर सुरक्षित चलने, यातायात नियमों का पालन करने तथा दुर्घटनाओं से बचाव के संबंध में जानकारी दी गई।

कोकड़ी विद्यालय के बच्चों में दिखी जागरूकता

शिक्षक गेंदलाल कोकडिया के अनुसार कार्यशाला के दौरान कोकड़ी शासकीय विद्यालय के विद्यार्थियों में सड़क सुरक्षा नियमों को लेकर अच्छी जागरूकता देखने को मिली। बच्चों को सड़क पर पैदल चलते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, सड़क पार करने का सुरक्षित तरीका क्या है और यातायात नियमों का पालन क्यों आवश्यक है—इसकी जानकारी दी गई।

उन्होंने कहा कि विद्यालय के बच्चों को सड़क पर सुरक्षित आवागमन के नियमों की जानकारी है और वे उनका पालन करने के लिए जागरूक दिखाई दिए।

आसपास के स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों के व्यवहार पर चिंता

कोकडिया ने आसपास के विभिन्न विद्यालयों, निजी स्कूलों और महाविद्यालयों में आने-जाने वाले विद्यार्थियों तथा वाहनों के आवागमन के तरीकों पर चिंता व्यक्त की।

उनका कहना है कि कई स्थानों पर स्कूल की छुट्टी के बाद विद्यार्थी एक साथ सड़क के बीच में चलते हुए यातायात को प्रभावित करते दिखाई देते हैं। कई बच्चे सड़क किनारे चलने के बजाय सड़क के बीच में चलते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कम उम्र के विद्यार्थी मोटरसाइकिल से स्कूल या कॉलेज आते-जाते दिखाई देते हैं, जो उनके अनुसार गंभीर चिंता का विषय है।

कम उम्र में दोपहिया वाहन चलाने पर रोक की मांग

शिक्षक ने कम उम्र के बच्चों द्वारा मोटरसाइकिल चलाने पर विशेष चिंता जताई। उनका कहना है कि कई विद्यार्थी कम उम्र में ही दोपहिया वाहन चलाकर स्कूल या कॉलेज पहुंचते हैं।

उन्होंने प्रशासन और शिक्षा विभाग से ऐसे मामलों में प्रभावी निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है, ताकि नाबालिग विद्यार्थियों को दोपहिया वाहन चलाने से रोका जा सके और सड़क दुर्घटनाओं की संभावना कम हो।

मोबाइल और ईयरफोन का इस्तेमाल भी बना खतरा

कोकडिया ने विद्यार्थियों द्वारा सड़क पर चलते या साइकिल चलाते समय मोबाइल फोन और ईयरफोन का इस्तेमाल किए जाने पर भी चिंता जताई।

उनके अनुसार, कुछ विद्यार्थी कान में ईयरफोन लगाकर तेज गति से साइकिल चलाते हैं। इससे आसपास से आने वाले वाहनों का हॉर्न सुनाई नहीं देता और दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि सड़क पर चलते या वाहन चलाते समय मोबाइल फोन और ईयरफोन का इस्तेमाल न करें।

सड़क पर किताब-कॉपी लेकर चलने से भी खतरा

उन्होंने बताया कि कई बार विद्यार्थी स्कूल से निकलने के बाद सड़क पर समूह में चलते हुए किताब-कॉपी और अन्य सामान उछालते या आपस में खेलते नजर आते हैं। कुछ विद्यार्थी सड़क के किनारे अथवा सड़क पर ही बैठकर आराम करने लगते हैं।

उन्होंने कहा कि सड़क वाहन आवागमन के लिए होती है, इसलिए वहां अनावश्यक रूप से बैठना, खेलना या लापरवाही करना दुर्घटना का कारण बन सकता है।

 विद्यार्थियों को सड़क किनारे चलने की आदत सिखाने की जरूरत

कोकडिया ने कहा कि विद्यार्थियों को स्कूल स्तर से ही सड़क सुरक्षा के व्यावहारिक नियमों की जानकारी दी जानी चाहिए।

उन्होंने विशेष रूप से विद्यार्थियों से अपील की कि—

  • सड़क पर चलते समय निर्धारित किनारे/पैदल मार्ग का उपयोग करें।

  • सड़क के बीच में समूह बनाकर न चलें।

  • बिना आवश्यकता सड़क पर न बैठें।

  • साइकिल चलाते समय मोबाइल फोन और ईयरफोन का इस्तेमाल न करें।

  • दोपहिया वाहन चलाते समय यातायात नियमों का पालन करें।

  • कम उम्र के बच्चों को मोटरसाइकिल चलाने से रोकें।

  • सड़क पर तेज गति से वाहन न चलाएं।

  • दूसरे वाहनों को गलत तरीके से ओवरटेक न करें।

  • वाहन चलाते समय दूसरे वाहन को सुरक्षित तरीके से रास्ता देना अच्छी आदत है।

  • सड़क पार करते समय दोनों तरफ देखकर ही आगे बढ़ें।

स्कूलों और कॉलेजों में नियमित जागरूकता अभियान की मांग

शिक्षक गेंदलाल कोकडिया एवं विद्यालय प्रबंधन समिति ने मांग की है कि सरकारी और निजी स्कूलों तथा महाविद्यालयों में नियमित रूप से सड़क सुरक्षा कार्यशालाएं आयोजित की जाएं।

उनका कहना है कि केवल सड़क सुरक्षा सप्ताह या किसी दुर्घटना के बाद जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के बजाय पूरे वर्ष विद्यार्थियों को यातायात नियमों की जानकारी दी जानी चाहिए।

उन्होंने स्कूल बसों और अन्य शैक्षणिक वाहनों की स्थिति, वाहन चालकों की जिम्मेदारी तथा विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही पर भी विशेष ध्यान देने की मांग की है।

 प्रशासन और शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की मांग

 कोकडिया ने महासमुंद कलेक्टर, मुख्यमंत्री, शिक्षा विभाग तथा परिवहन एवं सड़क सुरक्षा से संबंधित अधिकारियों से इस दिशा में आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि स्कूल और कॉलेज आने-जाने वाले विद्यार्थियों को सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए लगातार प्रेरित किया जाना चाहिए तथा विद्यालयों के प्राचार्य, प्रधानपाठक और शिक्षक भी विद्यार्थियों की यातायात संबंधी आदतों पर ध्यान दें।

सवाल यही है—दुर्घटना के बाद जागरूकता या पहले से सुरक्षा?

सड़क सुरक्षा को लेकर उठाई गई इस चिंता के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि क्या स्कूल और कॉलेजों में सड़क सुरक्षा की शिक्षा को नियमित शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा या किसी गंभीर दुर्घटना के बाद ही प्रशासन और शिक्षा विभाग सक्रिय होंगे?

सड़क पर एक छोटी सी लापरवाही भी किसी विद्यार्थी के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है। इसलिए विद्यालय स्तर से ही बच्चों में “सुरक्षित सड़क व्यवहार” की आदत विकसित करना दुर्घटनाओं की रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।


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