Media24Media.com: विश्व हाथी दिवस 2026: विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समारोह, हाथी संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण पहल जारी

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विश्व हाथी दिवस 2026: विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समारोह, हाथी संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण पहल जारी

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विशाखापत्तनम- विश्व हाथी दिवस 2026 के अवसर पर आज विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय स्तर के समारोह का आयोजन किया गया। समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने की। आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री कोनिडेला पवन कल्याण समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव  तन्मय कुमार, महानिदेशक (वन) एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी, अपर महानिदेशक (वन्यजीव) रमेश पांडे सहित मंत्रालय, आंध्र प्रदेश वन विभाग, भारतीय रेल, विभिन्न राज्यों के वन विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान से हाथी संरक्षण पर जोर

समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत हाथियों के लिए एक टिकाऊ भविष्य सुनिश्चित करने की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रिमोट सेंसिंग और जियोस्पेशियल मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीकों को पारंपरिक ज्ञान के साथ जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मानव–हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) को कम करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच समन्वय, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक है। साथ ही, संरक्षण प्रयासों में स्थानीय समुदायों के कल्याण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सिंह ने कहा कि हाथी संरक्षण भारत के लिए केवल एक नीतिगत प्राथमिकता नहीं, बल्कि देश की सभ्यतागत विरासत और पारिस्थितिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि भारत में वर्तमान में 33 हाथी रिजर्व और वैज्ञानिक रूप से चिन्हित 150 हाथी गलियारे (Elephant Corridors) हैं। भारत में दुनिया की लगभग 60 प्रतिशत जंगली एशियाई हाथी आबादी पाई जाती है।

उन्होंने कहा कि मानव–हाथी संघर्ष एक जटिल समस्या है और इसके समाधान के लिए विभिन्न हितधारकों को साथ लाकर, जमीनी स्तर पर सत्यापित वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग करना जरूरी है।

‘Conflict to Coexistence’ होगा आंध्र प्रदेश का मंत्र

मुख्य वक्तव्य देते हुए आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने कहा कि मानव–हाथी संघर्ष के मामलों से निपटने के लिए राज्य सरकार का मंत्र ‘Conflict to Coexistence’ यानी ‘संघर्ष से सह-अस्तित्व की ओर’ है।

उन्होंने कहा कि मानव–हाथी संघर्ष राज्यों की प्रशासनिक सीमाओं तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इसे साझा जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।

पवन कल्याण ने आंध्र प्रदेश सरकार की H.A.N.U.M.A.N. (Healing And Nurturing Units for Monitoring, Aid and Nursing of Wildlife) पहल की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग के साथ स्थानीय समुदायों को जोड़ा जा रहा है और वन विभाग के अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

‘गज गौरव पुरस्कार 2026’ प्रदान किए गए

विश्व हाथी दिवस समारोह के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने हाथी संरक्षण और प्रबंधन के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को ‘गज गौरव पुरस्कार 2026’ प्रदान किए।

‘30 Giant Steps’ का विमोचन

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण ‘30 Giant Steps’ का विमोचन रहा। इसमें वर्ष 2020 से 2026 के बीच प्रोजेक्ट एलिफेंट के तहत हासिल की गई 30 प्रमुख उपलब्धियों, महत्वपूर्ण पड़ावों और संरक्षण पहलों को रेखांकित किया गया है।

प्रोजेक्ट एलिफेंट की शुरुआत वर्ष 1992 में केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में हुई थी। तीन दशकों से अधिक समय से यह योजना हाथियों, उनके आवास और गलियारों के संरक्षण, मानव–हाथी संघर्ष को कम करने तथा बंदी हाथियों के कल्याण की दिशा में काम कर रही है।

दक्षिण भारत के लिए क्षेत्रीय कार्ययोजना जारी

समारोह में ‘Regional Action Plan for Comprehensive Understanding and Management of Human–Elephant Conflict in Southern India’ भी जारी की गई। यह कार्ययोजना कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में मानव–हाथी संघर्ष के व्यापक और समन्वित प्रबंधन पर केंद्रित है।

प्रोजेक्ट एलिफेंट के तहत दक्षिणी हाथी क्षेत्र वाले राज्यों, वैज्ञानिक संस्थानों और विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार इस योजना में 500 करोड़ रुपये के भारत सरकार के सहयोग का प्रावधान है।

योजना में हाथी आवासों की कनेक्टिविटी, गलियारों का संरक्षण, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, संघर्ष कम करने के लिए बुनियादी ढांचा, आवास पुनर्स्थापन, सामुदायिक भागीदारी, अनुसंधान एवं निगरानी, त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र, क्षमता निर्माण तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया है।

हाथी संरक्षण पर विशेष प्रकाशन जारी

समारोह में Journal of Wildlife Science का विशेष अंक भी जारी किया गया, जो भारत में हाथी संरक्षण के तीन दशकों को समर्पित है। इसमें पिछले तीन दशकों में हाथी संरक्षण से संबंधित वैज्ञानिक ज्ञान और अनुसंधान को संकलित किया गया है।

इसके अलावा ‘Asian Elephants in Central India Before 1947’ नामक मोनोग्राफ भी जारी किया गया। इसमें वर्ष 1947 से पहले मध्य भारत में हाथियों के वितरण, स्थिति और मानव–हाथी संबंधों का ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत किया गया है।

प्रोजेक्ट एलिफेंट की 23वीं संचालन समिति की बैठक

विशाखापत्तनम में प्रोजेक्ट एलिफेंट की 23वीं संचालन समिति की बैठक भी आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने की।

बैठक में हाथी संरक्षण एवं प्रबंधन से जुड़े मौजूदा मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान ‘The Trumpet’ के Volume VI Issue 01, Nilgiri Elephant Reserve के लिए Model Elephant Conservation Plan, ‘Captive Elephant Husbandry: Science, Welfare and Practice’ तथा मानव–हाथी संघर्ष अध्ययन के दूसरे चरण से जुड़ी पहलें जारी की गईं।

मानव–हाथी संघर्ष पर राष्ट्रीय कार्यशाला

विश्व हाथी दिवस समारोह के तहत ‘Human–Elephant Conflict: Varying Scenarios Across India’ विषय पर कार्यशाला भी आयोजित की गई। इसमें हाथी बहुल राज्यों के नियामक प्राधिकरणों, वैज्ञानिक संस्थानों और मैदानी एजेंसियों ने हिस्सा लिया।

कार्यशाला में मानव–हाथी संघर्ष की स्थिति, रुझानों और विभिन्न क्षेत्रों में इसके अलग-अलग स्वरूपों की वैज्ञानिक आंकड़ों और मैदानी अनुभवों के आधार पर समीक्षा की गई। चर्चा में विद्युत करंट से हाथियों की मौत रोकने, रेलवे से होने वाली हाथी मृत्यु को कम करने, पशु चिकित्सा हस्तक्षेप, आवास एवं गलियारा प्रबंधन और एकीकृत लैंडस्केप दृष्टिकोण जैसे विषयों पर जोर दिया गया।

21,450 स्कूलों के 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

विश्व हाथी दिवस के अवसर पर प्रोजेक्ट एलिफेंट और National Museum of Natural History के समन्वय से देशभर में व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाया गया।

इस अभियान में 21,450 स्कूलों के 20 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। बच्चों को हाथियों के पारिस्थितिक और सांस्कृतिक महत्व तथा उनके आवासों के संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए चित्रकला एवं मुखौटा निर्माण प्रतियोगिताएं, रैलियां, नुक्कड़ नाटक, जागरूकता कार्यक्रम और शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए गए।

देशभर के विद्यार्थियों ने हाथियों के संरक्षण और सुरक्षा की शपथ लेते हुए स्वयं को वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण के युवा दूत के रूप में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

हाथियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भारत की प्रतिबद्धता

विशाखापत्तनम में आयोजित विश्व हाथी दिवस 2026 समारोह ने हाथियों के संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को फिर दोहराया। विज्ञान और तकनीक के उपयोग, हाथी आवास एवं गलियारों के संरक्षण, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से भारत का लक्ष्य हाथियों की स्वस्थ आबादी और मजबूत वन परिदृश्य को सुरक्षित रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए देश की इस राष्ट्रीय धरोहर प्रजाति का भविष्य सुरक्षित रह सके।

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