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मनिहारी का ठेला छोड़कर वर्दी पहनी और देश के लिए दे दी अपनी जान

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पंद्रहवीं पुण्यतिथि पर शहीद घनश्याम कन्नौजे का पुण्य स्मरण

नक्सलियों से लोहा लेते हुए बिरकोनी के वीर घनश्याम ने दिया था सर्वोच्च बलिदान

महासमुंद- “वतन की राह में वतन के नौजवां शहीद हो...” यह पंक्ति उन वीरों की कहानी कहती है, जिनके लिए देश की सुरक्षा से बढ़कर कुछ नहीं था। ऐसे ही एक साधारण परिवार में जन्मे असाधारण साहस के धनी थे बिरकोनी के घनश्याम कन्नौजे। हाथों में कभी मनिहारी का सामान लेकर गांव की गलियों में घूमने वाला यह नौजवान जब वर्दी में आया, तो देश की रक्षा को अपना धर्म मान लिया। बस्तर के घने जंगलों में नक्सलियों से मुठभेड़ के दौरान महज 23 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। 21 अगस्त 2026 को उनकी पंद्रहवीं पुण्यतिथि पर यह अंचल अपने उस वीर लाल को श्रद्धा और गर्व के साथ याद कर रहा है।

साल 2011 में एएसएफ की दूसरी बटालियन, सकरी बिलासपुर में आरक्षक क्रमांक 111 के रूप में पदस्थ घनश्याम कन्नौजे बीजापुर के भद्राकाली क्षेत्र में तैनात थे। 19 अगस्त को फोर्स की एक टुकड़ी कैंप के लिए रसद लेने निकली थी। जवानों को अंदाजा नहीं था कि जिस जंगल के रास्ते से वे गुजर रहे हैं, वहीं नक्सलियों ने घात लगा रखी है। अचानक बारूदी सुरंग में जोरदार विस्फोट हुआ। वाहन के परखच्चे उड़ गए और कई जवान घायल हो गए। विस्फोट के तुरंत बाद नक्सलियों ने तीन दिशाओं से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। परिस्थितियां बेहद प्रतिकूल थीं, लेकिन जवानों ने हिम्मत नहीं छोड़ी। घायल होने के बावजूद उन्होंने मोर्चा संभाला और हमलावरों को मुंहतोड़ जवाब दिया। गोलियों और बारूदी विस्फोटों के बीच जवान आखिरी सांस तक लड़ते रहे। इस मुठभेड़ में 13 जवान शहीद हुए। उनमें बिरकोनी का वह नौजवान घनश्याम कन्नौजे भी था।

20 अगस्त को उनका पार्थिव शरीर मिला। अगले दिन, 21 अगस्त को बिरकोनी के हाईस्कूल परिसर में पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। जिस विद्यालय में कभी घनश्याम ने पढ़ाई की थी, वही परिसर उस दिन उनके अंतिम विदाई का साक्षी बना। अपने वीर बेटे को अंतिम विदाई देने पूरा गांव उमड़ पड़ा था।

6 अक्टूबर 1988 को महासमुंद के समीप ग्राम बिरकोनी में जन्मे घनश्याम का बचपन किसी संपन्न परिवार में नहीं, बल्कि मेहनत और संघर्ष के बीच बीता। उनके दादाजी पुरानिक कन्नौजे सीमांत किसान थे। पिता गुलाब कन्नौजे खेती के साथ मनिहारी का सामान बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। घनश्याम ने बिरकोनी के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय और महासमुंद के शासकीय आदर्श स्कूल में पढ़ाई की। पढ़ाई के साथ वे खेती में हाथ बंटाते और पिता के मनिहारी व्यवसाय में भी सहयोग करते थे। कई बार स्वयं मनिहारी का ठेला लेकर गांव की गलियों में घूमते थे। 

जीवन की कठिनाइयों ने उनके हौसले को कमजोर नहीं किया। करीब 20 वर्ष की उम्र में उन्होंने फोर्स ज्वाइन की। गांव की गलियों में मनिहारी का सामान बेचने वाला यह युवक देखते ही देखते वर्दीधारी जवान बन गया। लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था। सेवा के कुछ ही वर्षों बाद, 23 वर्ष की उम्र पूरी होने से पहले, उन्होंने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। गांव आया तो तिरंगे में लिपटकर। 

शहीद घनश्याम कन्नौजे की स्मृति आज भी बिरकोनी में उतनी ही जीवंत है। स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और 21 अक्टूबर पुलिस दिवस के अवसर पर पुलिस जवान, नागरिक, शिक्षक-शिक्षिकाएं और विद्यार्थी उनकी प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। बिरकोनी के हाईस्कूल परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा आज भी आने-जाने वालों को उनके बलिदान की याद दिलाती है। इससे भी आगे बढ़कर गांव के श्रीराम-जानकी मंदिर सहित अनेक देवालयों में उनके छायाचित्र लगाए गए हैं। धार्मिक स्थलों में सहेजी गई उनकी तस्वीरें इस बात की गवाही देती हैं कि शहीद घनश्याम केवल परिवार या गांव के नहीं, बल्कि पूरे अंचल के गौरव हैं।

 उनकी शहादत को याद करना केवल अतीत को स्मरण करना नहीं है। यह आने वाली पीढ़ियों को यह बताना भी है कि देश की सुरक्षा और सम्मान के लिए कुछ लोग अपना आज कुर्बान कर देते हैं, ताकि देश का कल सुरक्षित रहे। बिरकोनी की मिट्टी ने मनिहारी का सामान बेचने वाले जिस साधारण से बेटे को जन्म दिया था, उसी बेटे ने असाधारण साहस के साथ देश के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया। घनश्याम कन्नौजे आज भी इस अंचल के लिए केवल एक शहीद नहीं, बल्कि उस मिट्टी की अमर पहचान हैं, जिसने उन्हें जन्म दिया।

केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को दी शुभकामनाएं

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तिरुवरुर- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज तिरुवरुर स्थित केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय (CUTN) के 11वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचने के लिए बधाई दी।

दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्रदान करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति, ज्ञान की खोज तथा विद्यार्थियों की मेहनत, समर्पण, दृढ़ता और संघर्ष का उत्सव है।

उन्होंने स्नातक विद्यार्थियों के माता-पिता और शिक्षकों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि माता-पिता और शिक्षकों ने अपने बच्चों एवं विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अनेक वर्तमान सुख-सुविधाओं का त्याग किया है।

थिरुवरुर ज्ञान, आध्यात्म और कला की धरती

उपराष्ट्रपति ने थिरुवरुर के ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान त्यागराज के भव्य मंदिर के लिए प्रसिद्ध यह पवित्र नगर सदियों से आध्यात्मिकता, विद्वता और कला की उत्कृष्टता का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र भूमि ने संतों, विद्वानों और कर्नाटक संगीत की महान त्रिमूर्ति को जन्म दिया है। जब संस्कृति, शिक्षा और मूल्य एक साथ विकसित होते हैं, तभी वास्तविक महानता का निर्माण होता है।

शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक प्राप्त करना नहीं

उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में उच्च शिक्षा का तेजी से विस्तार हुआ है। उन्होंने कहा कि देशभर में आयोजित दीक्षांत समारोहों में वे अक्सर देखते हैं कि पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाएं डिग्री और पदक प्राप्त कर रही हैं। उन्होंने इसे एक स्वागत योग्य बदलाव बताया।

उन्होंने कहा कि आज शिक्षा को केवल परीक्षा और अंकों के आधार पर नहीं मापा जा सकता।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि व्यक्ति स्वतंत्र रूप से सोचने, प्रभावी ढंग से संवाद करने, मिलकर काम करने और जीवनभर सीखते रहने में कितना सक्षम है।

उपराष्ट्रपति ने केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय द्वारा बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और मूल्य आधारित शिक्षा पर दिए जा रहे जोर की सराहना की।

परीक्षाओं में अनुचित साधनों पर रोक जरूरी

संसद द्वारा हाल ही में पारित लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि परीक्षाओं में अनुचित साधनों को रोकना और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल के दौरान झारखंड सरकार ने भी इसी प्रकार का विधेयक पारित किया था और तत्कालीन राज्यपाल के रूप में उन्होंने उस पर तुरंत हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद वह कानून बन सका।

उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों के हितों की रक्षा के लिए समाज में गलत कार्य करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मजबूत कदम उठाने पर जोर दिया।

विद्यार्थी ज्ञान के उपभोक्ता नहीं, निर्माता बनें

उपराष्ट्रपति ने स्नातक विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे “ज्ञान के उपभोक्ता बनने के बजाय निर्माता, अनुकरण करने वालों के बजाय नवप्रवर्तक और अनुयायी बनने के बजाय नेता बनें।”

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं से अपने कार्यों में “राष्ट्र प्रथम—राष्ट्र प्रथम” की भावना को सर्वोच्च स्थान देने और अपने ज्ञान, कौशल एवं नेतृत्व क्षमता का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने का आह्वान किया।

नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील

उपराष्ट्रपति ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों तथा नशे के प्रसार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि नशे की लत न केवल व्यक्ति का जीवन बर्बाद करती है, बल्कि परिवार और पूरे समाज पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती है। युवाओं को इस खतरे से बचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने विद्यार्थियों से “नशे को ना कहें—Say No to Drugs” का संदेश अपनाने और अपने मित्रों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

1,103 विद्यार्थियों को मिली डिग्री, 50 को स्वर्ण पदक

दीक्षांत समारोह में कुल 1,103 स्नातकों को डिग्री प्रदान की गई, जिनमें शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 50 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। कुल स्नातकों में 616 छात्राएं शामिल हैं। वहीं 50 स्वर्ण पदकों में से 37 पदक छात्राओं ने हासिल किए।

समारोह में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, नागपट्टिनम से लोकसभा सांसद थिरु वी. सेल्वराज, कुलाधिपति प्रो. जी. पद्मनाभन, कुलपति सीनियर प्रो. सुलोचना शेखर, विश्वविद्यालय के शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

उपराष्ट्रपति ने SRMIST के 22वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित, युवाओं से ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत पर चलने का आह्वान

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज चेन्नई के निकट चेंगलपट्टु के कट्टनकुलथुर स्थित एस.आर.एम. इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (SRMIST) के 22वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। उन्होंने स्नातक छात्रों से आह्वान किया कि वे ‘नेशन फर्स्ट – राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत से प्रेरित होकर अपने ज्ञान, कौशल और नवाचार का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें।

स्नातक छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्रदान करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह वर्षों की मेहनत, अनुशासन और सीखने की यात्रा का उत्सव है। साथ ही, यह जिम्मेदारी और सेवा से जुड़ी आजीवन यात्रा की शुरुआत भी है।

सी. पी. राधाकृष्णन ने SRMIST द्वारा विकसित ऐसे शैक्षणिक वातावरण की सराहना की, जो अंतर-विषयक शिक्षा, रचनात्मकता, उद्यमिता और आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि संस्थान का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर रिसर्च, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी और सतत विकास जैसे क्षेत्रों पर बढ़ता ध्यान भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं और समाज को आकार देगा।

उपराष्ट्रपति ने शोध को व्यावहारिक समाधानों में बदलने के लिए SRMIST के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि शोध तभी अपनी सर्वोच्च सार्थकता प्राप्त करता है, जब वह समाज की सेवा करता है, लोगों के जीवन को बेहतर बनाता है, उद्योग को मजबूत करता है और सतत विकास में योगदान देता है।

राधाकृष्णन ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने 100 से अधिक देशों को कोविड-19 वैक्सीन उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि भारत ने इस मानवीय सहायता का व्यावसायीकरण करने का प्रयास नहीं किया। उन्होंने हाल ही में केन्या के स्पीकर के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने भारत द्वारा उपलब्ध कराई गई वैक्सीन सहायता के लिए आभार व्यक्त किया था। उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के प्रयासों ने मानवता की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया और दोहराया कि भारत शांति, विकास और मानव कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।

उपराष्ट्रपति ने बताया कि प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि देश के हर हिस्से में AIIMS उपलब्ध होना चाहिए, ताकि पूरे भारत में लोगों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं और चिकित्सा शिक्षा पहुंच सके।

उन्होंने 2014 के बाद देश में उच्च शिक्षा के विस्तार को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इस अवधि में 16 IIIT, 8 केंद्रीय विश्वविद्यालय, 8 IIM, 7 IIT, 2 IISER, 1 NIT और 12 AIIMS स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि आज भारत में 1,425 से अधिक विश्वविद्यालय, 54,000 कॉलेज और 16,850 स्वतंत्र उच्च शिक्षण संस्थान हैं।

सी. पी. राधाकृष्णन ने उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014-15 में उच्च शिक्षा में महिला विद्यार्थियों की संख्या 1.57 करोड़ थी, जो 2023-24 में बढ़कर 2.24 करोड़ हो गई। यह 42.2 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोहों में बड़ी संख्या में महिलाओं को डिग्री और पदक प्राप्त करते देखना स्वागत योग्य बदलाव है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्नातक छात्र भारत की ‘विकसित भारत @2047’ की यात्रा के एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित, नवोन्मेषी, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य प्रत्येक युवा भारतीय से राष्ट्र निर्माण में योगदान की अपेक्षा करता है।

उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके लोग, विशेष रूप से युवा हैं। स्नातक छात्रों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा: “भविष्य के लिए केवल खुद को तैयार न करें; भविष्य को आकार देने के लिए खुद को तैयार करें।”

उपराष्ट्रपति ने छात्रों से नशे और हर प्रकार के मादक पदार्थों के सेवन से दूर रहने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को “भटकाव के बजाय अनुशासन, प्रलोभन के बजाय उद्देश्य और आसान रास्तों के बजाय उत्कृष्टता” को चुनना चाहिए।

उन्होंने तमिलनाडु में हाल ही में हुई उस घटना का उल्लेख किया, जिसमें नशीले पदार्थों के कारोबार से जुड़ी जानकारी साझा करने के कारण एक छात्र की हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि यह घटना बेहद पीड़ादायक है और उन्हें ऐसा लगा जैसे उन्होंने अपने परिवार के एक सदस्य को खो दिया हो।

उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से ‘नेशन फर्स्ट – राष्ट्र प्रथम’ को अपना मार्गदर्शक सिद्धांत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उनका ज्ञान, नवाचार और मेहनत भारत की प्रगति, सुरक्षा और समृद्धि में योगदान देनी चाहिए। उन्होंने छात्रों से संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने, विविधता का सम्मान करने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और संकीर्ण निजी हितों से ऊपर व्यापक राष्ट्रीय हित को रखने का आग्रह किया।

अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने स्नातकों से भारतीय जीवन मूल्यों ज्ञान, कर्तव्य, करुणा और सेवा को अपने साथ लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के ऑटोमोटिव बिजनेस के अध्यक्ष श्री आर. वेलुसामी को मानद उपाधि प्रमाणपत्र प्रदान किया। उन्होंने स्नातकों को पदक, रैंक और डिग्रियां भी प्रदान कीं तथा छात्रों और स्नातकों को ‘नशे को ना कहें’ की शपथ दिलाई।

इस अवसर पर तमिलनाडु और केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, SRMIST के चांसलर डॉ. टी. आर. पारिवेंधर, प्रो-चांसलर (प्रशासन) डॉ. रवि पचमुथु, प्रो-चांसलर (शैक्षणिक) डॉ. पी. सत्यनारायणन, कुलपति डॉ. सी. मुथमिझचेलवन सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

देश की आजादी में छत्तीसगढ़ के वीर नायकों का योगदान नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा दायित्व : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वतंत्रता दिवस पर सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का किया शुभारंभ

स्वतंत्रता संग्राम की गौरवगाथा से विकसित छत्तीसगढ़ की नई तस्वीर तक को एक मंच पर समेट रही प्रदर्शनी

‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा, स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और सुशासन की उपलब्धियों का सजीव प्रदर्शन

ऐतिहासिक टाउन हॉल और शहीद स्मारक के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की 50-50 लाख रुपये देने की घोषणा

मुख्यमंत्री ने कहा - अपनी विरासत को सहेजते हुए विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा छत्तीसगढ़

21 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 10.30 से रात 8 बजे तक आम नागरिक कर सकेंगे प्रदर्शनी का अवलोकन

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय छायाचित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ के योगदान, अमर सेनानियों के शौर्य एवं बलिदान, ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा और राज्य में सुशासन एवं विकास की उपलब्धियों को समेटे यह प्रदर्शनी अतीत के गौरव से वर्तमान की उपलब्धियों और भविष्य की आकांक्षाओं तक छत्तीसगढ़ की यात्रा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रदर्शनी के विभिन्न खंडों का अवलोकन किया और वहां प्रदर्शित दुर्लभ छायाचित्रों, दस्तावेजों एवं सूचनात्मक सामग्री में विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के लिए छत्तीसगढ़ की धरती के अनेक वीर सपूतों ने संघर्ष और बलिदान किया। उनके योगदान और राष्ट्रभक्ति की प्रेरक गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा दायित्व है। ऐसी प्रदर्शनियां युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने के साथ उनमें राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यबोध और देश के प्रति समर्पण की भावना को और मजबूत करती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रदर्शनी केवल इतिहास का स्मरण नहीं कराती, बल्कि विरासत से प्रेरणा लेकर विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण के संकल्प को भी सुदृढ़ करती है। एक ओर इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान की अमर गाथाएं हैं, तो दूसरी ओर जनकल्याणकारी योजनाओं, सुशासन, आधुनिक अधोसंरचना और नई तकनीक के माध्यम से बदलते छत्तीसगढ़ की तस्वीर भी दिखाई गई है।

‘वंदे मातरम्’—राष्ट्रजागरण के अमर स्वर की 150 वर्षों की यात्रा

प्रदर्शनी का विशेष आकर्षण राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर केंद्रित खंड है। इसमें ‘वंदे मातरम्’ की रचना से लेकर स्वतंत्रता आंदोलन में इसके राष्ट्रजागरण के मंत्र के रूप में स्थापित होने तक की यात्रा को ऐतिहासिक संदर्भों और छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम्’ ने देशवासियों को एक सूत्र में बांधने और मातृभूमि के लिए त्याग एवं बलिदान की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके स्वर ने स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों में नई ऊर्जा का संचार किया। 150 वर्ष की इस ऐतिहासिक यात्रा को प्रदर्शनी में विशेष स्थान देकर नई पीढ़ी को ‘वंदे मातरम्’ के राष्ट्रभाव और उसके ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराया गया है।

छत्तीसगढ़ के वीर सेनानियों की संघर्ष और बलिदान की गौरवगाथा

प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ की भूमिका को विस्तार से प्रदर्शित किया गया है। प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों, जननायकों और अमर बलिदानियों के योगदान से जुड़े दुर्लभ छायाचित्र, दस्तावेज और ऐतिहासिक प्रसंग यहां दर्शकों को स्वतंत्रता आंदोलन के उस दौर से रूबरू कराते हैं, जब छत्तीसगढ़ की धरती पर भी ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष और जनजागरण की आवाज बुलंद हुई थी।

महात्मा गांधी के छत्तीसगढ़ प्रवास तथा यहां के सामाजिक एवं राष्ट्रीय आंदोलनों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों को प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया है। इन ऐतिहासिक दस्तावेजों के माध्यम से नई पीढ़ी यह जान सकेगी कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में छत्तीसगढ़ का योगदान कितना व्यापक और गौरवपूर्ण रहा है।

टाउन हॉल और शहीद स्मारक के लिए 50-50 लाख रुपये की घोषणा

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर की दो महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों - टाउन हॉल और शहीद स्मारक - के संरक्षण, साज-सज्जा एवं नवीनीकरण के लिए 50-50 लाख रुपये प्रदान करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद स्मारक राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों की स्मृतियों को संजोए हुए है, जबकि ऐतिहासिक टाउन हॉल रायपुर की समृद्ध विरासत और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इन धरोहरों का संरक्षण हमारी गौरवशाली विरासत के प्रति सम्मान की अभिव्यक्ति है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ‘विरासत से विकास तक’ की सोच के साथ आगे बढ़ रही है। हमारा प्रयास है कि आधुनिक विकास की गति के साथ प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों की गरिमा भी अक्षुण्ण रहे। इन स्थलों को बेहतर स्वरूप मिलने से नई पीढ़ी अपने इतिहास, संस्कृति और बलिदान की परंपरा को और निकटता से जान सकेगी।

योजनाओं ने बदली जिंदगी - महिलाओं से किसानों और युवाओं तक विकास की झलक

प्रदर्शनी का एक महत्वपूर्ण खंड राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उनसे आम नागरिकों के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों पर केंद्रित है। इसमें महिलाओं, किसानों, युवाओं, श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के जीवन को बेहतर बनाने वाली योजनाओं एवं पहलों को छायाचित्रों और सूचनात्मक सामग्री के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।

महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण, कृषक उन्नति योजना से किसानों को मिल रहे संबल तथा प्रधानमंत्री आवास योजना से जरूरतमंद परिवारों के पक्के घर के सपने के साकार होने की तस्वीर यहां दिखाई गई है। युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल, रोजगार एवं नए अवसरों के विस्तार और श्रमिकों सहित विभिन्न वर्गों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं को भी प्रमुखता से स्थान दिया गया है।

प्रदर्शनी यह संदेश देती है कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाकर उसके जीवन में सकारात्मक और स्थायी बदलाव लाना है।

सुशासन और आधुनिक अधोसंरचना से उभरते विकसित छत्तीसगढ़ की तस्वीर

प्रदर्शनी में राज्य की विकास यात्रा को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। डिजिटल पंजीयन के माध्यम से प्रशासन में पारदर्शिता, सुशासन तिहार के माध्यम से जनसमस्याओं के समाधान, हरित छत्तीसगढ़ की दिशा में किए जा रहे प्रयास तथा शिक्षा और अधोसंरचना के विस्तार की झलक यहां देखने को मिलती है।

बेहतर सड़क एवं रेल संपर्क, औद्योगिक अधोसंरचना, निवेश और रोजगार के नए अवसरों सहित विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को भी प्रदर्शित किया गया है। इस प्रकार प्रदर्शनी छत्तीसगढ़ के गौरवशाली अतीत और तेजी से आकार लेते भविष्य को एक साथ प्रस्तुत करती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष से हमें राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की प्रेरणा मिलती है और यही प्रेरणा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में हमारी ऊर्जा बनती है।

एआई से जुड़ा विरासत और पर्यटन का अभिनव अनुभव

प्रदर्शनी में आधुनिक तकनीक और छत्तीसगढ़ की विरासत का अभिनव संगम भी आकर्षण का केंद्र है। विशेष एआई आधारित पहल के माध्यम से आगंतुक प्रदेश के प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों की पृष्ठभूमि के साथ अपनी डिजिटल तस्वीर तैयार करा सकते हैं। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में इसे लेकर उत्साह देखा जा रहा है।

इस पहल के माध्यम से तकनीक का उपयोग कर नई पीढ़ी को प्रदेश की पर्यटन, सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से रोचक तरीके से जोड़ने का प्रयास किया गया है। आगंतुक इन डिजिटल तस्वीरों को प्रदर्शनी की स्मृति के रूप में भी प्राप्त कर सकते हैं।

विजिटर डायरी और विशेष डॉक्यूमेंट्री भी बनी आकर्षण का केंद्र

प्रदर्शनी स्थल पर रखी गई विजिटर डायरी में आगंतुक स्वतंत्रता दिवस, राष्ट्रप्रेम और छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा से जुड़े अपने विचार एवं अनुभव दर्ज कर सकते हैं। राज्य की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास यात्रा पर आधारित विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भी प्रदर्शन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री साय ने विजिटर बुक में अपने विचार दर्ज करते हुए प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और शासन की योजनाओं एवं उपलब्धियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का यह उपयोगी प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों, विशेषकर युवाओं और विद्यार्थियों से प्रदर्शनी देखने की अपील करते हुए कहा कि अपने इतिहास और विरासत को जानना हमें वर्तमान के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराता है और बेहतर भविष्य के निर्माण की प्रेरणा देता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सलाहकार आर. कृष्णा दास, विधायक पुरंदर मिश्रा, जनसंपर्क आयुक्त रजत बंसल, कलेक्टर गौरव सिंह, अपर संचालक उमेश मिश्रा, संजीव तिवारी,  आलोक देव सहित जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि कचहरी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउन हॉल में यह सात दिवसीय प्रदर्शनी 15 से 21 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10.30 बजे से रात 8 बजे तक आम नागरिकों के अवलोकन के लिए खुली रहेगी।

अमित शाह ने PM मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन को बताया मील का पत्थर

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नई दिल्ली- केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर दिए गए संबोधन को ‘स्वदेशी, समृद्धि और आत्मनिर्भरता’ के संकल्प से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह संबोधन भारत को सभी क्षेत्रों में अग्रणी राष्ट्र बनाने की यात्रा में मील का पत्थर साबित होगा।

अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत’ के निर्माण का व्यापक रोडमैप प्रस्तुत किया। इसमें नशामुक्त भारत, सुरक्षित भारत और ‘नेशन फर्स्ट’ की भावना को प्रमुखता दी गई।

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उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा और रेलवे परिवहन सहित कई क्षेत्रों में हुई अभूतपूर्व प्रगति को रेखांकित किया। साथ ही देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए ‘सप्तधारा’ यानी सात शक्तियों के मंत्र को सामने रखा गया।

अमित शाह के अनुसार, युवाओं की क्षमता को दिशा देने के लिए प्रधानमंत्री ने एक वर्ष में एक करोड़ से अधिक युवाओं को AI कौशल प्रदान करने, मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग का नेटवर्क तैयार करने और 2036 ओलंपिक के लिए टैलेंट हंट अभियान शुरू करने जैसी पहलों की घोषणा की।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने और आठ नई सेमीकंडक्टर इकाइयां स्थापित करने जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य सामने रखे हैं।

अमित शाह ने कहा कि स्वदेशी, समृद्धि और आत्मनिर्भरता के संकल्प से ओत-प्रोत प्रधानमंत्री मोदी का यह संबोधन भारत को सभी क्षेत्रों में अग्रणी राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा।

लाल किले पर पहली बार गूंजा ‘वंदे मातरम्’

अमित शाह ने अपने एक अन्य पोस्ट में स्वतंत्रता आंदोलन के जोशीले उद्घोष ‘वंदे मातरम्’ का लाल किले की प्राचीर से पहली बार गूंजना ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक पल को देखना उनके लिए रोमांचकारी अनुभव था और इससे उनका पूरा अस्तित्व उत्साह से भर उठा।


राष्ट्र, समाज और सनातन संस्कृति के प्रति दिलीप सिंह जूदेव जी का समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में श्रद्धेय स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव जी की पुण्यतिथि पर उनके छायाचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया और राष्ट्र एवं समाज के प्रति उनके योगदान का स्मरण किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि श्रद्धेय दिलीप सिंह जूदेव जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्र, समाज और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पित रहा। जनजातीय समाज के हितों की रक्षा, उनके स्वाभिमान और सामाजिक जागरण के लिए उन्होंने आजीवन कार्य किया। समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति उनकी संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें जन-जन के हृदय में विशिष्ट स्थान दिलाया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जूदेव जी का छत्तीसगढ़ की माटी और यहां के लोगों से गहरा आत्मीय जुड़ाव था। विशेष रूप से जनजातीय अंचलों में उन्होंने समाज को संगठित करने, लोगों में आत्मविश्वास जगाने और उनकी आवाज को मजबूती देने का महत्वपूर्ण कार्य किया। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जूदेव जी का जीवन राष्ट्रसेवा, सामाजिक सरोकार और अपनी संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति अटूट निष्ठा का प्रेरक उदाहरण है। उनके विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को समाज एवं राष्ट्र के लिए समर्पित भाव से कार्य करने की प्रेरणा देते रहेंगे।

इस अवसर पर प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रियंवदा सिंह जूदेव, प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी तथा छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा उपस्थित थे।

लाल किले से 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का भव्य आयोजन, पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का होगा विशेष गायन

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नई दिल्ली- देश 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगे। इस वर्ष का समारोह राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की गौरवशाली विरासत को समर्पित होगा। साथ ही, विकसित भारत@2047 की दिशा में देश की युवा शक्ति की ऊर्जा, आकांक्षाओं और योगदान को भी विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा। इस वर्ष पहली बार लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम्’ का विशेष गायन होगा।

प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत और गार्ड ऑफ ऑनर

लाल किले पहुंचने पर प्रधानमंत्री का स्वागत रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह करेंगे। इसके बाद दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल राजेश सेठी प्रधानमंत्री को सलामी मंच तक ले जाएंगे, जहां सेना, नौसेना, वायुसेना और दिल्ली पुलिस के संयुक्त दल द्वारा उन्हें सामान्य सलामी दी जाएगी।

इसके बाद प्रधानमंत्री गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करेंगे। इस वर्ष प्रधानमंत्री के गार्ड ऑफ ऑनर में सेना, नौसेना, वायुसेना और दिल्ली पुलिस के एक-एक अधिकारी तथा 24-24 जवान शामिल होंगे। स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए इस वर्ष भारतीय सेना समन्वयक सेवा है। गार्ड ऑफ ऑनर की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल अर्जुन सिंह संभालेंगे।

तिरंगा फहराने के साथ होगा 21 तोपों की सलामी का समन्वय

गार्ड ऑफ ऑनर के निरीक्षण के बाद प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर पर पहुंचेंगे, जहां वे राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे। इस दौरान कैप्टन सोनिया सिंह चौहान प्रधानमंत्री की सहायता करेंगी। तिरंगा फहराने का कार्यक्रम 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) के वीर तोपचियों द्वारा दी जाने वाली 21 तोपों की सलामी के साथ समन्वित होगा।

इस अवसर पर स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल किया जाएगा। सेरेमोनियल बैटरी की कमान मेजर पवन सिंह शेखावत संभालेंगे।

तिरंगे को दिया जाएगा ‘राष्ट्रीय सलाम’

राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के समय सेना, नौसेना, वायुसेना और दिल्ली पुलिस से जुड़े जवानों वाला राष्ट्रीय ध्वज गार्ड ‘राष्ट्रीय सलाम’ पेश करेगा। इस इंटर-सर्विसेज गार्ड और पुलिस गार्ड की कमान मेजर लोकेन्द्र सिंह शेखावत संभालेंगे।

तिरंगा फहराए जाने के बाद सेना का बैंड ‘वंदे मातरम्’ की धुन प्रस्तुत करेगा और समारोह में मौजूद सभी लोग राष्ट्रीय गीत का गायन करेंगे। इसके बाद राष्ट्रगान होगा। सेना बैंड का संचालन सूबेदार ईश्वर सिंह करेंगे।

हेलीकॉप्टर से होगी पुष्पवर्षा

राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के तुरंत बाद भारतीय वायुसेना के दो Mi-17 हेलीकॉप्टर समारोह स्थल पर पुष्पवर्षा करेंगे। इनमें से एक हेलीकॉप्टर पर राष्ट्रीय ध्वज और दूसरे पर ‘वंदे मातरम्’ का ध्वज होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करेंगे।

2,500 NCC कैडेट और ‘My Bharat’ स्वयंसेवक होंगे शामिल

प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) और ‘My Bharat’ के स्वयंसेवक ‘वंदे मातरम्’ का गायन करेंगे, जिसके बाद राष्ट्रगान होगा।

इस वर्ष कुल 2,500 बालक एवं बालिका कैडेट तथा ‘My Bharat’ स्वयंसेवक समारोह में भाग लेंगे। ये सभी ज्ञानपथ पर लाल किले की प्राचीर के सामने बैठेंगे और सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ की आकृति बनाएंगे। ज्ञानपथ पर ‘विकसित भारत@2047’ विषय को दर्शाने वाले व्यू-कटर भी लगाए जाएंगे।

देशभर से करीब 5,000 विशेष अतिथि होंगे शामिल

इस वर्ष लाल किले पर आयोजित समारोह में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े करीब 5,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। इनमें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के स्वयंसेवक, पीएम मुद्रा योजना की महिला उद्यमी, NAMASTE, PM AJAY और SEED योजनाओं के लाभार्थी, उत्कृष्ट My Bharat स्वयंसेवक, PMAY (Urban) के लाभार्थी, पीएम स्वनिधि के स्ट्रीट वेंडर, स्वच्छ भारत मिशन के शहरी स्वच्छता कर्मी और दिल्ली मेट्रो के उत्कृष्ट कर्मचारी शामिल हैं।

इसके अलावा कर्तव्य पथ एवं सेंट्रल विस्टा में कार्यरत उत्कृष्ट कर्मचारी, युवा नवप्रवर्तक, विभिन्न क्षेत्रों के श्रेष्ठ वैज्ञानिक, भारत टैक्सी के सारथी और चालक, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के श्रेष्ठ इंटर्न, स्टार्टअप इंडिया से जुड़े उत्कृष्ट स्टार्टअप, पीएम कौशल विकास योजना के उत्कृष्ट प्रशिक्षित युवा, सरकारी अस्पतालों के नर्सिंग ऑर्डरली, पीएम सूर्य घर योजना के लाभार्थी, पीएम विश्वकर्मा योजना के कारीगर और उत्कृष्ट किसान भी समारोह में शामिल होंगे।

देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 1,500 से अधिक लोग पारंपरिक परिधानों में भी समारोह में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित किए गए हैं।

दर्शकों की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम

समारोह में आने वाले लोगों की सुविधा के लिए छह स्थानों पर 25 क्लोक रूम बनाए गए हैं। आगंतुकों की सहायता के लिए 200 स्वयंसेवक, जिनमें 100 NCC और 100 My Bharat स्वयंसेवक शामिल हैं, तैनात रहेंगे।

जरूरतमंद लोगों के लिए मेट्रो स्टेशनों और पार्किंग क्षेत्रों में NCC कैडेट व्हीलचेयर सहायता उपलब्ध कराएंगे। 15 अगस्त को सुबह 4 बजे से मेट्रो सेवा शुरू होगी और आमंत्रित अतिथियों के लिए मेट्रो सेवा नि:शुल्क रहेगी। पार्किंग, पैदल यात्रियों के लिए रैंप और यातायात संबंधी जानकारी के लिए Google एवं Mappls Maps पर भी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

इस बार नदियों की जगह देश की प्रमुख झीलों के नाम पर होंगे एनक्लोजर

इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए बैठने वाले एनक्लोजरों के नाम भारत की प्रमुख झीलों के नाम पर रखे गए हैं। इनमें डल, चिलिका, लोकटक, सांभर, पुष्कर, पांगोंग त्सो, वुलर, वेम्बनाड, पुलिकट, कोलेरू और अन्य प्रमुख झीलों के नाम शामिल हैं।

स्वच्छता और बारिश से निपटने की भी तैयारी

समारोह के बाद लाल किले पर स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। NCC कैडेट और My Bharat स्वयंसेवक दर्शकों के जाने के बाद प्लॉगिंग और कचरा हटाने का कार्य करेंगे।

संभावित बारिश को देखते हुए लाल किले और आसपास के क्षेत्रों में जल निकासी एवं सीवेज व्यवस्था की व्यापक सफाई की जा रही है, ताकि जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो।

स्वतंत्रता दिवस से पहले देशभर में प्रतियोगिताएं

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्रालय और MyGov के सहयोग से विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं। इनमें ‘2047 तक विकसित भारत के निर्माण में AI की भूमिका’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता, ‘भारत 1947 बनाम भारत 2047’ पर चित्रकला प्रतियोगिता और संविधान, स्वतंत्रता आंदोलन, आधुनिक भारत की तकनीकी प्रगति, अंतरिक्ष तथा परमाणु तकनीक से जुड़े ऑनलाइन क्विज शामिल हैं।

इन प्रतियोगिताओं के करीब 600 विजेता भी स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बनेंगे।

देशभर में 343 स्थानों पर बैंड प्रदर्शन

देशभक्ति की भावना को मजबूत करने और स्वतंत्रता दिवस के उत्सव को जन-जन तक पहुंचाने के लिए देशभर में 343 प्रमुख स्थानों पर बैंड प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें सेना, नौसेना, वायुसेना, भारतीय तटरक्षक, NCC, CRPF, ITBP, CISF, SSB, BSF, Integrated Defence Staff, RPF और असम राइफल्स के बैंड शामिल हैं। इन कार्यक्रमों में आम नागरिकों के लिए प्रवेश खुला रहेगा।

अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप में भी फहराया जाएगा तिरंगा

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारतीय नौसेना और स्थानीय प्रशासन द्वारा अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप में भी राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा।

कुल मिलाकर, 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह भारत की स्वतंत्रता की गौरवशाली विरासत, ‘वंदे मातरम्’ की 150 वर्षों की यात्रा और विकसित भारत@2047 के संकल्प को एक साथ सामने लाएगा। समारोह में युवाओं की भागीदारी, तकनीकी प्रगति, सांस्कृतिक विविधता और देशभक्ति की भावना को विशेष महत्व दिया गया है।

15 अगस्त 2026 को देश मनाएगा 80वां स्वतंत्रता दिवस

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15 अगस्त 2026 को देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व करेंगे। 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2026 ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का भी अवसर है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान लाखों लोगों को प्रेरित करने वाले राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को पहली बार लाल किले की प्राचीर से गाकर इसकी गौरवशाली विरासत को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

प्रधानमंत्री के लाल किले पहुंचने पर ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और राष्ट्र को अपना परंपरागत संबोधन देंगे। इस वर्ष के समारोह में युवा शक्ति को भी विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में देश के युवाओं के योगदान को सम्मानित किया जाएगा।

वंदे मातरम् के 150 वर्ष

लाल किले की फूलों से होने वाली सजावट में ‘वंदे मातरम्’ की थीम दिखाई देगी। ज्ञानपथ पर प्राचीर के सामने NCC और MY Bharat के कुल 2,500 छात्र-छात्रा कैडेट एवं स्वयंसेवक ‘वंदे मातरम्’ की आकृति बनाएंगे। भारतीय वायुसेना का एक Mi-17 हेलीकॉप्टर ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बैनर लेकर लाल किले पर मौजूद लोगों के ऊपर पुष्पवर्षा करेगा।

सैन्य बैंड प्रस्तुतियां

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों को एकजुट और प्रेरित करने वाले राष्ट्रीय गीत को श्रद्धांजलि देने के लिए 8 अगस्त 2026 से देशभर में विभिन्न बैंड प्रस्तुतियों का आयोजन किया जा रहा है।

सेना, नौसेना, वायुसेना, भारतीय तटरक्षक बल, NCC, CRPF, ITBP, CISF, SSB, BSF, Integrated Defence Staff, RPF और असम राइफल्स के बैंड देशभर के 343 प्रमुख स्थानों पर प्रस्तुतियां देंगे। ये कार्यक्रम 15 अगस्त 2026 तक जारी रहेंगे। नागरिकों में देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन कार्यक्रमों में आम जनता के लिए प्रवेश खुला रहेगा।

युवा शक्ति: विकसित भारत @2047 की यात्रा का नेतृत्व

स्वतंत्रता दिवस समारोह 2026 में विभिन्न क्षेत्रों में युवाओं की उपलब्धियों को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। वर्ष 2026 के अंतरराष्ट्रीय भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और गणित ओलंपियाड में पदक जीतने वाले 19 छात्र-छात्राओं की उपलब्धियां विज्ञान के क्षेत्र में युवा शक्ति की सफलता का उदाहरण हैं। इन्हें समारोह में आमंत्रित किया गया है और वे लाल किले की प्राचीर पर बैठेंगे।

पृष्ठभूमि में लगाए गए विजुअल्स के माध्यम से परमाणु और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रगति को प्रदर्शित किया जाएगा। गार्ड ऑफ ऑनर क्षेत्र में फूलों की सजावट के माध्यम से विकसित भारत @2047 की भारत की यात्रा को दर्शाया जाएगा।

विशेष अतिथि

विकसित भारत की यात्रा में योगदान देने वाले विभिन्न क्षेत्रों के लगभग 5,000 उपलब्धि हासिल करने वाले लोगों को समारोह में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • राष्ट्रीय नवाचार कार्यक्रमों के युवा नवोन्मेषक

  • प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के उत्कृष्ट इंटर्न

  • विभिन्न योजनाओं से सहायता प्राप्त उत्कृष्ट स्टार्टअप

  • PM कौशल विकास योजना के उत्कृष्ट प्रशिक्षित युवा

  • Startup India Seed Fund से समर्थित उत्कृष्ट स्टार्टअप

  • उत्कृष्ट MY Bharat स्वयंसेवक

  • NAMASTE, PM AJAY और SEED योजनाओं के लाभार्थी

  • विभिन्न क्विज एवं प्रतियोगिताओं में चयनित दिल्ली सरकार के स्कूलों के विद्यार्थी

उद्यमियों, नवोन्मेषकों और जमीनी स्तर पर कार्य करने वाले लोगों के विकसित भारत @2047 में योगदान को सम्मानित करने के लिए निम्नलिखित वर्गों से भी विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है:

  • अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के स्वयंसेवक

  • PM Mudra Yojana की महिला उद्यमी

  • PMAY (U) के उत्कृष्ट लाभार्थी

  • विभिन्न क्षेत्रों के नवोन्मेषक एवं वैज्ञानिक

  • दिल्ली में Bharat Taxi के सारथी/कैब चालक/टैक्सी चालक

  • PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के लाभार्थी

  • PM Vishwakarma योजना के कारीगर

  • प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना के उत्कृष्ट लाभार्थी

  • प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना (PM-MKSSY) के उत्कृष्ट किसान

विशेष अतिथियों में ऐसे मौन योद्धा भी शामिल हैं, जो दूसरों की सफलता में सहायता के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। स्वतंत्रता दिवस पर उनके योगदान को भी सम्मानित किया जाएगा। इनमें शामिल हैं:

  • PM SVANidhi के स्ट्रीट वेंडर

  • स्वच्छ भारत मिशन के शहरी स्वच्छता कर्मचारी

  • उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दिल्ली मेट्रो कर्मचारी

  • कर्तव्य पथ/सेंट्रल विस्टा के उत्कृष्ट कर्मचारी

  • दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के नर्सिंग ऑर्डरली (वार्ड अटेंडेंट) और अन्य कर्मचारी

विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से दिल्ली में रहने वाले 1,500 से अधिक लोगों को भी पारंपरिक परिधानों में समारोह देखने के लिए आमंत्रित किया गया है। वे लाल किले पर भारत की विविधता का जीवंत स्वरूप प्रस्तुत करेंगे।

प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों की भागीदारी

स्वतंत्रता दिवस से पहले रक्षा मंत्रालय ने MyGov के सहयोग से विभिन्न क्विज और प्रतियोगिताओं का आयोजन किया। इनमें ‘2047 तक विकसित भारत के निर्माण में AI की भूमिका’ विषय पर निबंध प्रतियोगिता, ‘भारत 1947 बनाम भारत 2047’ विषय पर चित्रकला प्रतियोगिता तथा कई ऑनलाइन क्विज शामिल हैं।

इनमें भारतीय संविधान—मौलिक अधिकार, कर्तव्य, प्रमुख अनुच्छेद एवं संविधान निर्माता; भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका—रानी लक्ष्मीबाई से सरोजिनी नायडू तक; आधुनिक भारत के प्रमुख पड़ाव—तकनीकी प्रगति एवं अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की उपलब्धियां; तथा परमाणु प्रौद्योगिकी में भारत की सफलता जैसे विषय शामिल हैं।

इन प्रतियोगिताओं के लगभग 600 विजेता भी स्वतंत्रता दिवस समारोह का हिस्सा बनेंगे।

अन्य मंत्रालयों/विभागों, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस द्वारा भी नागरिकों को राष्ट्रीय पर्व से जोड़ने के लिए विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन क्विज एवं गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।

जनसुविधाओं की विशेष व्यवस्था

  • क्लॉक रूम: आगामी समारोह के लिए छह स्थानों पर 25 क्लॉक रूम बनाए गए हैं।

  • हेल्पडेस्क पर स्वयंसेवक: 200 स्वयंसेवक—MY Bharat के 100 और NCC के 100—पुलिसकर्मियों के साथ आगंतुकों की सहायता करेंगे।

  • व्हीलचेयर सुविधा: जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए मेट्रो स्टेशनों और पार्किंग क्षेत्रों में NCC कैडेट 20 व्हीलचेयर के साथ मौजूद रहेंगे।

  • मेट्रो सेवा: 15 अगस्त को लोगों की सुविधा के लिए मेट्रो सेवा सुबह 4 बजे से शुरू होगी। सभी आमंत्रितों को मेट्रो सेवा निःशुल्क उपलब्ध होगी। ई-निमंत्रण के साथ मेट्रो QR कोड दिए जाएंगे।

  • पार्किंग सुविधा: वैध पार्किंग पास/लेबल वाले आगंतुकों के लिए परेड ग्राउंड में पार्किंग की सुविधा होगी।

  • पैदल यात्रियों के लिए रैंप: ऊपरी सुभाष मार्ग से निचले सुभाष मार्ग तक सुगम आवागमन के लिए रैंप और सीढ़ियां बनाई गई हैं।

  • Google एवं Mappls Maps: मुख्य समारोह के दिन यातायात प्रतिबंधों की जानकारी Google और Mappls Maps पर उपलब्ध होगी।

  • रेन पोंचो: मौसम की अनिश्चित परिस्थितियों को देखते हुए माधव दास पार्क और 15 अगस्त पार्क में सभी आमंत्रितों को तथा प्राचीर पर मौजूद गणमान्य अतिथियों को रेन पोंचो उपलब्ध कराए जाएंगे।

निमंत्रण पत्र: जनसेवा और कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता

प्रधानमंत्री ने ‘सेवा तीर्थ’ को राष्ट्र को समर्पित करते हुए कहा था कि ‘सेवा तीर्थ’ कर्तव्य, करुणा और राष्ट्र प्रथम की भावना का सशक्त प्रतीक है। यह आने वाली पीढ़ियों को निस्वार्थ सेवा और देशवासियों के कल्याण के लिए समर्पण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देगा।

इसी भावना के साथ इस वर्ष के मुख्य समारोह के निमंत्रण पत्र पर ‘सेवा तीर्थ’ को प्रदर्शित किया गया है, ताकि प्रत्येक नागरिक के कल्याण के लिए समर्पण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिले। निमंत्रण पत्र पर बना धर्म चक्र धर्मपूर्ण कर्तव्य, निरंतर सेवा और निस्वार्थ कर्म की शाश्वत गति का प्रतीक है।

स्वच्छता अभियान

कर्तव्य के प्रति प्रतिबद्धता की भावना के साथ इस वर्ष समारोह के बाद लाल किले पर स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। इसमें NCC कैडेट और MY Bharat स्वयंसेवक भाग लेंगे।

इस अभियान का उद्देश्य दर्शकों के लौटने के बाद उसी दिन व्यवस्थित तरीके से प्लॉगिंग और कचरे को हटाना है। इसके माध्यम से स्वच्छ भारत अभियान का संदेश दिया जाएगा। अभियान के बाद लाल किला देशभर से आने वाले पर्यटकों के लिए स्वच्छ रूप में उपलब्ध रहेगा।

प्रवेश कक्षों के नाम

VIP संस्कृति को समाप्त करने और जल संरक्षण के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से गणतंत्र दिवस 2026 में बैठने के कक्षों के नाम भारत की नदियों पर रखे गए थे। स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए इन बैठने के कक्षों के नाम भारत की प्रमुख झीलों के नाम पर रखे गए हैं।

जल निकासी की व्यवस्था

स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान संभावित बारिश को देखते हुए जलभराव रोकने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। लाल किले और आसपास के क्षेत्रों में जल निकासी एवं सीवेज व्यवस्था की पूरी तरह सफाई की जा रही है, ताकि बारिश की स्थिति में पानी का सुचारु निकास सुनिश्चित किया जा सके।

सीआरपीएफ स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवानों को दी शुभकामनाएं, साहस और राष्ट्रसेवा की सराहना की

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के स्थापना दिवस के अवसर पर सभी अधिकारियों और जवानों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ ने अपने अटूट साहस, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा के बल पर देश की सेवा में एक विशिष्ट पहचान बनाई है।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने से लेकर प्राकृतिक आपदाओं और अन्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में नागरिकों की सहायता करने तक, सीआरपीएफ के जवानों ने हमेशा राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उनके समर्पण और सेवा भावना ने देशवासियों का विश्वास और सम्मान अर्जित किया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से नक्सलवाद (माओवाद) के खिलाफ सीआरपीएफ की निर्णायक भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि जवानों के साहस, समर्पण और निरंतर अभियानों के कारण प्रभावित क्षेत्रों में शांति, सुरक्षा और विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिससे लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' (X) पर अपने संदेश में कहा कि सीआरपीएफ ने हर कठिन परिस्थिति में राष्ट्र की रक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अद्वितीय साहस का परिचय दिया है। उन्होंने बल के सभी जवानों के उज्ज्वल भविष्य, उत्तम स्वास्थ्य और सुरक्षित सेवा की कामना करते हुए उनके योगदान को राष्ट्र के लिए प्रेरणादायक बताया।

सीआरपीएफ देश का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल है, जो आंतरिक सुरक्षा, आतंकवाद और नक्सल विरोधी अभियानों, चुनावी सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में अहम भूमिका निभाता है।


कारगिल विजय दिवस: वीरता, बलिदान और राष्ट्रगौरव का अमर प्रतीक

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नई दिल्ली- आज पूरा देश 27वां कारगिल विजय दिवस गर्व और श्रद्धा के साथ मना रहा है। यह दिन उन वीर सैनिकों के अदम्य साहस, अद्वितीय शौर्य और सर्वोच्च बलिदान को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में दुर्गम पहाड़ियों पर दुश्मन को परास्त कर भारत की विजय सुनिश्चित की। इस अवसर पर देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई और उनकी वीरगाथाओं को याद किया गया।

कारगिल युद्ध भारतीय सैन्य इतिहास के सबसे गौरवशाली अध्यायों में से एक माना जाता है। ऑपरेशन विजय के तहत भारतीय सेना ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और विपरीत मौसम के बावजूद अद्भुत साहस का परिचय देते हुए नियंत्रण रेखा (LoC) पर रणनीतिक चोटियों को दुश्मन के कब्जे से मुक्त कराया। इस ऐतिहासिक विजय ने दुनिया को भारतीय सैनिकों की वीरता और अटूट संकल्प का परिचय कराया।

कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत का उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान की भावना का प्रतीक है। इस युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज कुमार पांडेय सहित अनेक वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उनका अद्वितीय साहस आज भी देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता है।

इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कारगिल के वीर सैनिकों का साहस और राष्ट्र के प्रति उनका समर्पण सदैव देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। वहीं रक्षा मंत्री ने द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए भारतीय सशस्त्र बलों की क्षमता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

आज का दिन हर भारतीय को यह संदेश देता है कि राष्ट्र की सुरक्षा, एकता और अखंडता सर्वोपरि है। कारगिल के अमर शहीदों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा और भारत उनके ऋण को कभी नहीं भूल पाएगा।

आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ता देश, प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' में गिनाईं उपलब्धियां

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सुरक्षा, आत्मनिर्भरता, विज्ञान और सामाजिक भागीदारी के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। उन्होंने स्वदेशी रक्षा उत्पादन, योग, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत में निर्मित C-295 विमान की पहली सफल उड़ान देश के रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि है। इसके साथ ही DRDO द्वारा स्वदेशी लॉन्ग-रेंज लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का उल्लेख करते हुए कहा कि इस वर्ष दुनिया भर के 2,500 से अधिक स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। अहमदाबाद में आयोजित विश्व योगासन चैंपियनशिप में भारत ने 114 पदक जीतकर पहला स्थान हासिल किया।

प्रधानमंत्री ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के लिए स्थानीय उत्पाद अपनाने की अपील की। उन्होंने आगामी गणेश उत्सव के अवसर पर मिट्टी से बनी स्थानीय कारीगरों की गणेश प्रतिमाएं खरीदने तथा प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियों से बचने का आग्रह किया।

कार्यक्रम में उन्होंने प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना का भी उल्लेख करते हुए लोगों से इन योजनाओं का लाभ उठाने और अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने की अपील की।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने जल संरक्षण, 'कैच द रेन' अभियान और जनभागीदारी को देश की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए सभी नागरिकों से इसमें सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

चूरू में लेफ्टिनेंट जनरल सागत सिंह की प्रतिमा का अनावरण, ओम बिरला ने दी श्रद्धांजलि

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 चूरू- ओम बिरला ने आज राजस्थान के चूरू में अदम्य योद्धा, स्वर्गीय लेफ्टिनेंट जनरल सागत सिंह राठौड़ की प्रतिमा के अनावरण समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर ओम प्रकाश माथुर, भजनलाल शर्मा, भागीरथ चौधरी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

लेफ्टिनेंट जनरल सागत सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ओम  बिरला ने कहा कि उनका जीवन साहस, नेतृत्व और राष्ट्रसेवा का प्रेरणादायक उदाहरण है। द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीय सेना के साथ उनके पराक्रम से लेकर गोवा मुक्ति आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज फहराने तक, उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा। नाथू ला सीमा पर उनके साहसिक निर्णयों ने देश की सीमाओं को मजबूत किया, और 1971 के युद्ध में ढाका में पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे बांग्लादेश के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

राजस्थान की वीरता और देशभक्ति की परंपरा का उल्लेख करते हुए ओम  बिरला ने कहा कि राज्य का प्रत्येक परिवार राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो युवाओं को देशसेवा के लिए प्रेरित करेगी।

लोकसभा अध्यक्ष ने आगे कहा कि सागत सिंह की वीरता और विरासत पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है। उनका जीवन सिखाता है कि साहस, दृढ़ संकल्प और समर्पण के साथ कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने युवाओं से ऐसे महान वीरों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाबू जगजीवन राम की जयंती पर दी श्रद्धांजलि

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बाबू जगजीवन राम ने अपना पूरा जीवन समानता और सामाजिक न्याय के आदर्शों के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने देश के लिए उनके अमूल्य योगदान को याद करते हुए कहा कि राष्ट्र हमेशा उनके योगदान को स्मरण करता रहेगा।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा,

“पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। उन्होंने समानता और सामाजिक न्याय के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। देश के लिए उनका अमूल्य योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।”

राष्ट्रपति भवन में ‘राजाजी उत्सव’ में शामिल हुए उपराष्ट्रपति, राजाजी की प्रतिमा का अनावरण

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भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘राजाजी उत्सव’ में भाग लिया। इस अवसर पर भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एडविन लुटियंस की प्रतिमा के स्थान पर सी. राजगोपालाचारी (राजाजी) की प्रतिमा का अनावरण किया।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि राजाजी की प्रतिमा का अनावरण औपनिवेशिक प्रभावों के अवशेषों को समाप्त करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि औपनिवेशिक प्रभाव से भारत की मुक्ति कोई एक घटना नहीं है, बल्कि शासन, कानून, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान में चल रहा एक सतत परिवर्तन है।

उन्होंने कहा कि इन सुधारों के केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि है, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान संस्थानों और सोच को आकार देने वाली औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का लगातार आह्वान किया है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि “गुलामी की मानसिकता से मुक्ति” की दृष्टि को कई पहलों के माध्यम से कार्यरूप दिया गया है, जिनमें राजभवनों का लोक भवनों में परिवर्तन; पीएमओ का सेवा तीर्थ के रूप में विकास; केंद्रीय सचिवालय का कर्तव्य भवन के रूप में नामकरण; औपनिवेशिक कालीन आपराधिक कानूनों का स्थानापन्न; इंडिया गेट के पास नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा की स्थापना; राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का निर्माण आदि शामिल हैं।

“ये परिवर्तन केवल प्रतीकात्मक नहीं हैं, बल्कि सरकार की सेवा भावना को दर्शाते हैं,” उन्होंने कहा।

उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के नेतृत्व में राष्ट्रपति भवन में किए गए कई पहलों का उल्लेख किया, जिनमें उद्यानों को अमृत उद्यान के रूप में जनता के लिए खोलना; दरबार हॉल का नाम बदलकर गणतंत्र मंडप करना; ब्रिटिश एडीसी के फोटो हटाकर परमवीर चक्र विजेताओं के चित्र लगाना; तथा भारतीय शास्त्रीय भाषाओं के लिए समर्पित ‘ग्रंथ कुटीर’ पुस्तकालय और संग्रहालय का उद्घाटन शामिल है। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम सार्वजनिक चेतना से औपनिवेशिक छाप मिटाने और भारत के सभ्यतागत आत्मविश्वास को मजबूत करने में मदद करेंगे।

राजाजी उत्सव को भारत के एक महान सपूत के प्रति उचित सम्मान बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सी. राजगोपालाचारी ने देश के इतिहास में एक विशिष्ट स्थान अर्जित किया है।

उन्होंने राजाजी की बहुआयामी प्रतिभा को रेखांकित करते हुए कहा कि वे एक कुशल वकील, स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता, राजनीतिज्ञ और लेखक थे, जिनमें असाधारण प्रतिभा का विस्तार था। उन्होंने कहा कि राजाजी लगातार आर्थिक स्वतंत्रता के पक्षधर रहे और उनका मानना था कि भारत की आर्थिक नीति स्वतंत्र और उदार होनी चाहिए।

अपने संबोधन के अंत में उपराष्ट्रपति ने आशा व्यक्त की कि राजाजी का जीवन नागरिकों को प्रेरित करता रहेगा कि वे अपने चरित्र को ऊँचा उठाएँ, जिम्मेदारियाँ बढ़ने पर अपने विश्वास को मजबूत करें और सदैव राष्ट्र को स्वयं से ऊपर रखें।

डॉ. मनसुख मांडविया ने बीएमएस के अखिल भारतीय त्रैवार्षिक सम्मेलन में श्रमिक कल्याण को बताया विकसित भारत की आधारशिला

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केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज ओडिशा के पुरी में आयोजित भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के अखिल भारतीय त्रैवार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। उन्होंने दोहराया कि श्रमिकों का कल्याण, गरिमा और सुरक्षा सरकार की राष्ट्रीय विकास की परिकल्पना के केंद्र में है।

डॉ. मांडविया ने कहा,

“मुझे श्रम शक्ति और युवा शक्ति के लिए कार्य करने का सौभाग्य मिला है। ये दोनों शक्तियाँ भारत की प्रगति की आधारशिला हैं और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगी।”

मंत्री ने कहा कि बीएमएस न केवल भारत का सबसे बड़ा ट्रेड यूनियन है, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े संगठनों में भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बीएमएस ने श्रमिकों के कल्याण, देश के श्रमबल को न्याय दिलाने और उन्हें राष्ट्रीय विकास व आर्थिक वृद्धि में भागीदार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

यह जोर देते हुए कि आर्थिक विकास के लिए श्रमिक और उद्योग—दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, मंत्री ने कहा कि एक मजबूत और सुदृढ़ अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए दोनों के बीच सामंजस्य और सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इसी संतुलन को मजबूत करने, श्रमिकों के लिए कल्याण और सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने तथा उद्योगों के लिए अनुपालन को सरल बनाने के उद्देश्य से श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को लागू किया है।

उन्होंने कहा,

“मैं बीएमएस को बधाई देता हूँ कि उसने 15 अन्य केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ श्रम संहिताओं का स्वागत किया, श्रमिकों में जागरूकता फैलाई और दुष्प्रचार का मुकाबला किया। यह जिम्मेदार और रचनात्मक नेतृत्व को दर्शाता है, जिसमें संगठनात्मक हितों से ऊपर श्रमिकों के हितों को रखा गया है।”

श्रम संहिताओं के सक्षम प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए मंत्री ने अनिवार्य नियुक्ति पत्र, पुरुषों और महिलाओं के लिए समान अवसर, वार्षिक स्वास्थ्य जांच तथा खतरनाक उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का उल्लेख किया।

सामाजिक सुरक्षा पहलों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने लगातार कवरेज बढ़ाने और श्रमिकों के लिए संस्थागत समर्थन को मजबूत करने का कार्य किया है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) के अनुसार लगभग 94 करोड़ लोग अब सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत आ चुके हैं और वर्ष 2026 तक 100 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का लक्ष्य है।

उन्होंने आगे कहा कि ईएसआईसी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में अब श्रमिकों के बच्चों के लिए मेडिकल शिक्षा में आरक्षण की सुविधा दी जा रही है, जिससे वित्तीय बोझ कम होगा और उच्च शिक्षा की उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने में सहायता मिलेगी।

डॉ. मांडविया ने कहा कि बीएमएस ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की वेतन सीमा बढ़ाने, न्यूनतम मजदूरी (फ्लोर वेज) पर निर्णय लेने तथा ईपीएस-95 के अंतर्गत न्यूनतम पेंशन बढ़ाने से संबंधित प्रतिवेदन प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन सभी विषयों पर श्रमिकों के हित में गंभीरता से विचार किया जाएगा और शीघ्र निर्णय लिए जाएंगे।

उन्होंने कहा,

“देश की प्रगति श्रमिकों के कल्याण से अलग नहीं की जा सकती। जब श्रमिक समृद्ध होते हैं, तब देश समृद्ध होता है।”

‘नया भारत’ के निर्माण में श्रमिकों की भूमिका को रेखांकित करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार श्रमिक कल्याण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाकर आगे बढ़ती रहेगी। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार उन संगठनों का निरंतर समर्थन करेगी जो ईमानदारी से श्रमिकों के कल्याण, सशक्तिकरण और संरक्षण के लिए कार्य करते हैं।

डॉ. मांडविया ने सभी हितधारकों से ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए मिलकर कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा,
“हमें सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने होंगे, हर श्रमिक को आगे बढ़ाना होगा और उन्हें अपनी पूरी क्षमता को साकार करने के लिए सशक्त बनाना होगा।”

इस सम्मेलन ने श्रम सुधारों, सामाजिक सुरक्षा और श्रमिक सशक्तिकरण पर संवाद के लिए एक मंच प्रदान किया, जिसमें देशभर से श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

उद्घाटन सत्र में कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें हिरणमय पंड्या, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बीएमएस; रविंद्र हिमते, राष्ट्रीय महामंत्री, बीएमएस; सर्गेई चेर्नोगायेव, अध्यक्ष, एफएनपीआर, रूस; मा. भागैया, अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य, आरएसएस; तथा युकी ओत्सुजी, वर्कर स्पेशलिस्ट, दक्षिण एशिया एवं कंट्री ऑफिस, आईएलओ, नई दिल्ली शामिल थे।


अबूझमाड़ की धरती से देश-दुनिया को दिया जा रहा है अमन और शांति का मजबूत संदेश: मुख्यमंत्री साय

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अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन: शांति, विश्वास और विकास का सामूहिक दौड़

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नारायणपुर में अबूझमाड़ पीस हॉफ मैराथन को दिखाई हरी झंडी

10 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने लगाई दौड़, आत्मसमर्पित नक्सली भी बने आयोजन का हिस्सा

रायपुर- अबूझमाड़ की पावन धरती से शांति, सद्भाव और विकास का सशक्त संदेश देते हुए आज अबूझमाड़ पीस हाफ मैराथन 2026 का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज अलसुबह नारायणपुर के हाईस्कूल परिसर के समीप आयोजित हाफ मैराथन सहभागिता की और धावकों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा सांकेतिक रूप से स्वयं भी दौड़ लगाई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विजयी प्रतिभागियों को प्रदान किए जाने वाले मैडल का अनावरण भी किया। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आज अबूझमाड़ की धरती से पूरे देश और दुनिया को अमन और शांति का मजबूत संदेश दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह वही अबूझमाड़ है, जहाँ कभी आम नागरिकों और जवानों का पहुँचना भी कठिन था, लेकिन आज सकारात्मक वातावरण के कारण हजारों लोग यहाँ एकत्रित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर में माओवाद से मुक्ति की दिशा में युवा वर्ग का जोश और उत्साह यह संकेत दे रहा है कि जल्द ही यह क्षेत्र खुशियों से आबाद होगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह परिवर्तन डबल इंजन सरकार की नीतियों और नेतृत्व का परिणाम है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संकल्प और दृढ़ इच्छाशक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद के समूल उन्मूलन का लक्ष्य तय किया गया है और बस्तर लाल आतंक से पूरी तरह मुक्त होगा। उन्होंने नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष में लगे सुरक्षा बलों के अधिकारियों एवं जवानों के अदम्य साहस और पराक्रम को नमन करते हुए कहा कि उन्हीं के बलिदान और समर्पण से आज बस्तर क्षेत्र में शांति और विकास की मजबूत नींव पड़ी है।

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में बस्तर क्षेत्र में 351 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया गया है तथा नए विकास कार्यों की घोषणा भी की गई है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के कारण यह क्षेत्र पिछले चार दशकों से विकास से वंचित रहा, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा और बस्तर में विकास की गंगा निरंतर बहेगी। उन्होंने सम्पूर्ण बस्तर और छत्तीसगढ़ को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के सरकार के संकल्प को दोहराया।

उल्लेखनीय है कि यह 21 किलोमीटर लंबी हाफ मैराथन नारायणपुर से बासिंग तक आयोजित की गई, जिसमें देश-विदेश से आए 60 से अधिक विदेशी प्रतिभागियों सहित बस्तर संभाग, प्रदेश एवं अन्य राज्यों के 10 हजार से अधिक धावकों ने भाग लिया। मैराथन से पूर्व हाईस्कूल परिसर में जुंबा वॉर्मअप कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों प्रतिभागियों ने एक साथ उत्साहपूर्वक सहभागिता की। 

आत्मसर्पित माओवादी बने मैराथन का हिस्सा

इस आयोजन की सबसे विशेष और ऐतिहासिक बात यह रही कि आत्मसमर्पित माओवादी युवाओं ने भी हथियार छोड़कर शांति और मुख्यधारा में लौटने का संदेश देते हुए मैराथन में हिस्सा लिया। नारायणपुर की अबूझमाड़िया जनजाति सहित स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को और अधिक प्रभावशाली एवं प्रेरणादायी बनाया।

कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक केदार कश्यप, जिले के प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा, बस्तर सांसद महेश कश्यप, छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष रूपसाय सलाम, वैद्यराज पद्मश्री हेमचंद मांझी, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, आईजी पी. सुंदरराज, कलेक्टर नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक राबिनसन गुरिया, जिला सीईओ आकांक्षा शिक्षा खलखो सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

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