Media24Media.com: नेपाल की भीषण बाढ़ में चाय का ब्रेक बना जिंदगी का सहारा, रायपुर के 5 दोस्तों की बाल-बाल बची जान

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नेपाल की भीषण बाढ़ में चाय का ब्रेक बना जिंदगी का सहारा, रायपुर के 5 दोस्तों की बाल-बाल बची जान

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रायपुर- नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बीच छत्तीसगढ़ के रायपुर निवासी पांच दोस्तों की जिंदगी महज कुछ मिनट के अंतर से बच गई। घूमने के लिए नेपाल गए इन दोस्तों ने रास्ते में चाय पीने के लिए कुछ देर रुकने का फैसला किया, और यही छोटा-सा ब्रेक उनके लिए जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन गया।

रायपुर के माना कैंप इलाके के रहने वाले नारायण सेन, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, यतेंद्र प्रकाश और दिनेश सिंह ठाकुर नेपाल यात्रा पर गए थे। सभी की उम्र करीब 50 से 60 वर्ष के बीच बताई गई है। 26 अगस्त को नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी।

चाय के लिए रुके और सामने बह गया रास्ता

यात्रा के दौरान पांचों दोस्त मालेंखु इलाके से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने चाय पीने के लिए गाड़ी रोक दी। यह फैसला उस वक्त सामान्य लगा, लेकिन कुछ ही देर बाद हालात तेजी से बदल गए।

बाढ़ का पानी अचानक तेजी से बढ़ने लगा और आगे का रास्ता बेहद खतरनाक हो गया। जिस मार्ग से उन्हें आगे बढ़ना था, वहां मौजूद पुल भी बाढ़ की चपेट में आ गया। अगर वे चाय के लिए नहीं रुकते और तय समय पर आगे बढ़ जाते, तो संभव था कि वे भी उसी रास्ते पर फंस जाते।

आंखों के सामने दिखा बाढ़ का खौफनाक मंजर

चाय के लिए रुकने के बाद जब बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई तो दोस्तों ने ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थान पर शरण ली। इसके बाद उन्हें करीब दो दिन तक मालेंखु में फंसे रहना पड़ा।

उन्होंने ऊंचाई वाले स्थान से त्रिशूली नदी का रौद्र रूप देखा। पानी का बहाव इतना तेज था कि वाहन और मलबा नदी में बहते नजर आए। हालात सामान्य होने तक दोस्तों ने अपनी कार में रात गुजारी और स्थानीय लोगों तथा प्रशासन की मदद से सुरक्षित रहने की कोशिश की।

भारतीय हेल्पलाइन से भी मिला सहयोग

मुश्किल हालात के बीच स्थानीय लोगों और प्रशासन ने पांचों दोस्तों की मदद की। भारतीय अधिकारियों की हेल्पलाइन के जरिए भी उन्हें संपर्क बनाए रखने और आवश्यक सहायता हासिल करने में मदद मिली। इसके बाद वे सुरक्षित रूप से रायपुर लौट सके।

रायपुर लौटने के बाद दोस्तों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि चाय के लिए कुछ देर रुकना उनके लिए वरदान साबित हुआ। कुछ मिनटों की देरी ने उन्हें उस रास्ते से दूर रखा, जहां कुछ ही देर बाद बाढ़ का पानी तबाही मचा रहा था।

स्थानीय लोगों ने भी बढ़ाया मदद का हाथ

इस कठिन समय में नेपाल के स्थानीय लोगों ने भी मानवीयता का परिचय दिया। पांचों दोस्तों ने बताया कि संकट की घड़ी में उन्हें स्थानीय लोगों से सहयोग मिला।

इस दौरान एक भावुक क्षण भी सामने आया, जब स्थानीय महिला सुरक्षा कर्मियों ने दोस्तों की कलाई पर रक्षाबंधन के अवसर पर राखी बांधी। आपदा के बीच यह छोटा-सा मानवीय पल उनके लिए यादगार बन गया।

नेपाल में जारी है बाढ़ का खतरा

26 अगस्त की आपदा ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में अचानक आई बाढ़ से सड़कें, पुल, मकान और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। 30 अगस्त तक नेपाल में मृतकों की संख्या 700 से अधिक पहुंच चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। बचाव और राहत अभियान जारी है।

इस बीच अधिकारियों ने कुछ नदी क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने को लेकर नए अलर्ट भी जारी किए हैं। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

जिंदगी और मौत के बीच सिर्फ कुछ मिनट का फासला

रायपुर के इन पांच दोस्तों की कहानी बताती है कि प्राकृतिक आपदा के दौरान परिस्थितियां कितनी तेजी से बदल सकती हैं। एक साधारण-सा चाय का ब्रेक उनके लिए जिंदगी बचाने वाला फैसला साबित हुआ।

कभी-कभी जिंदगी बचाने के लिए किसी बड़े चमत्कार की नहीं, बस सही समय पर लिया गया एक छोटा-सा फैसला ही काफी होता है।

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