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तेलंगाना के RIMS अस्पताल में भीषण आग, दो नवजातों की मौत; 28 बच्चों को सुरक्षित बचाया गया

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आदिलाबाद- तेलंगाना के आदिलाबाद स्थित RIMS अस्पताल में आग लगने से दो नवजात बच्चों की मौत हो गई। हादसे के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना के दौरान अस्पताल में मौजूद 28 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

बताया जा रहा है कि आग अस्पताल के उस हिस्से में लगी जहां बच्चों का इलाज चल रहा था। आग की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन और बचाव दल सक्रिय हो गए और बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

इस हादसे में दो नवजातों की जान चली गई। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आग किस वजह से लगी, इसका कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हुआ है।

अधिकारियों की ओर से आग लगने के कारणों और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जा रही है। घटना के बाद अस्पताल में सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल प्रशासन की जांच जारी है और आग लगने के वास्तविक कारण का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।


रायपुर के पास तेंदुए की दहशत, 5 बकरियों का किया शिकार; खेत में बैठा रहा तेंदुआ

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वन विभाग की टीम मौके पर, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी; तेंदुए को ट्रैंक्विलाइज कर सुरक्षित पकड़ने की तैयारी

रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के आसपास एक बार फिर तेंदुए की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। रायपुर के पास एक खेत में घुसे तेंदुए ने 5 बकरियों का शिकार कर दिया। बकरियों के शिकार के बाद तेंदुआ खेत में ही बैठा रहा, जिसके चलते आसपास के इलाके में लोगों की आवाजाही को लेकर चिंता बढ़ गई है।

खेत में घुसकर बकरियों का किया शिकार

जानकारी के मुताबिक, तेंदुआ खेत में पहुंचा और वहां मौजूद बकरियों को अपना शिकार बनाया। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया। तेंदुए के खेत में ही मौजूद होने की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों को सतर्क किया गया और मौके से दूर रहने की अपील की गई।

वन विभाग ने शुरू किया रेस्क्यू ऑपरेशन

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग सक्रिय हो गया। रायपुर से विशेष रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए ऑपरेशन शुरू किया गया है।

वन विभाग की टीम तेंदुए को ट्रैंक्विलाइज यानी बेहोश कर सुरक्षित तरीके से पकड़ने की तैयारी कर रही है। इसके बाद तेंदुए को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील

तेंदुए की मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग और प्रशासन ने लोगों से घटनास्थल के आसपास नहीं जाने और सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। रेस्क्यू टीम के ऑपरेशन के दौरान भी लोगों को मौके से दूर रहने की सलाह दी गई है, ताकि तेंदुआ घबराकर किसी व्यक्ति पर हमला न करे।

वन्यजीव और इंसानी बस्तियों के बीच बढ़ता संपर्क

रायपुर के आसपास तेंदुए की इस तरह मौजूदगी एक बार फिर वन्यजीवों के प्राकृतिक क्षेत्र और मानव बस्तियों के बीच बढ़ते संपर्क की ओर ध्यान खींचती है। ग्रामीण इलाकों में पशुओं पर वन्यजीवों के हमले से स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है।

फिलहाल वन विभाग का मुख्य उद्देश्य तेंदुए को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रेस्क्यू करना है। टीम की निगरानी में पूरा ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

लोगों के लिए जरूरी अपील

  • तेंदुए को देखने या उसका वीडियो बनाने के लिए उसके करीब न जाएं।

  • खेत या झाड़ियों वाले इलाकों में अकेले जाने से बचें।

  • बच्चों और पालतू पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें।

  • रेस्क्यू टीम के काम में बाधा न डालें।

  • तेंदुआ नजर आने पर तुरंत वन विभाग या स्थानीय प्रशासन को सूचना दें।

फिलहाल इलाके में तेंदुए को सुरक्षित पकड़ने के लिए वन विभाग की टीम तैनात है और ट्रैंक्विलाइजेशन की तैयारी की जा रही है।

दिल्ली के सत्य निकेतन में दर्दनाक हादसा: पांच मंजिला PG इमारत ढही, 7 लोगों की मौत; मालिक गिरफ्तार

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नई दिल्ली- दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को हुए दर्दनाक इमारत हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है। दक्षिणी दिल्ली के इस घनी आबादी वाले इलाके में छात्रों के लिए संचालित एक पांच मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए पूरी रात बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया गया। अब तक 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया है

हादसे के बाद मचा हड़कंप

यह इमारत दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित थी और इसमें बड़ी संख्या में छात्र रहते थे। रविवार को इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था, इसी दौरान अचानक पूरी संरचना ढह गई। घटना के बाद आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में पुलिस, दमकलकर्मी तथा बचाव दल मौके पर पहुंच गए।

बचाव अभियान में दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियों ने हिस्सा लिया। मलबे को हटाने के लिए अर्थमूवर और अन्य भारी मशीनों के साथ प्रशिक्षित बचावकर्मियों और खोजी कुत्तों की भी मदद ली गई।

इमारत के मालिक को राजस्थान से पकड़ा गया

हादसे के बाद इमारत का मालिक हरिराम गुप्ता पुलिस की पकड़ से बाहर था। दिल्ली पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमें लगाईं और उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया।

सोमवार को पुलिस ने उसे राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार/हिरासत में लिया। पुलिस अब उससे इमारत की स्थिति, मरम्मत कार्य और हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर पूछताछ कर रही है।

मरम्मत का काम जांच के घेरे में

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इमारत काफी पुरानी थी और हादसे के समय उसमें मरम्मत का काम चल रहा था। बेसमेंट में पानी जमा होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इमारत आखिर क्यों गिरी, इसका अंतिम कारण अभी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। अधिकारियों ने फिलहाल किसी एक वजह को हादसे का निश्चित कारण नहीं माना है।

MCD के पांच अधिकारी निलंबित

हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। मामले में MCD के पांच अधिकारियों को निलंबित किया गया है, जिनमें दक्षिण क्षेत्र के उपायुक्त भी शामिल हैं। प्रशासन अब इलाके में अवैध और असुरक्षित निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की बात कह रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

इस हादसे ने दिल्ली में पुराने भवनों और छात्र PG की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर उन इलाकों में जहां पुराने मकानों को बिना पर्याप्त संरचनात्मक जांच के PG या हॉस्टल में बदला जा रहा है, वहां सुरक्षा मानकों की निगरानी को लेकर चिंता बढ़ गई है।

प्रशासन की ओर से अब ऐसे भवनों की स्ट्रक्चरल सेफ्टी जांच और सुरक्षा प्रमाणन को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाने की बात कही गई है।

फिलहाल स्थिति

  • मृतक: 7

  • मलबे से सुरक्षित निकाले गए: 12

  • इमारत: पांच मंजिला छात्र PG

  • स्थान: सत्य निकेतन, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली

  • मालिक: हरिराम गुप्ता, गिरफ्तार/हिरासत में

  • MCD कार्रवाई: 5 अधिकारी निलंबित

  • जांच: हादसे के कारण और जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच जारी

सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि इतनी पुरानी इमारत में मरम्मत और निर्माण संबंधी गतिविधियों की अनुमति कैसे मिली और सुरक्षा मानकों की निगरानी में कहां चूक हुई। जांच पूरी होने के बाद हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदार लोगों की तस्वीर और साफ होगी।

बिहार में बाढ़ का संकट गहराया, 11 जिलों में 19.57 लाख लोग प्रभावित; पटना में गंगा ने तोड़ा पुराना रिकॉर्ड

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पटना- बिहार में लगातार बढ़ रहे नदी के जलस्तर ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर कर दिया है। राज्य के 11 जिलों में करीब 19.57 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर अपने पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) से ऊपर पहुंच गया है, जिसके बाद निचले और डाउनस्ट्रीम इलाकों में प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है।

रविवार सुबह 6 बजे गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर दर्ज किया गया, जो 21 अगस्त 2016 को दर्ज किए गए पिछले उच्चतम बाढ़ स्तर 50.52 मीटर से 5 सेंटीमीटर अधिक है। अधिकारियों के मुताबिक, अगले एक से तीन दिनों में हथीदह और उसके बाद के गेज स्टेशनों पर भी जलस्तर बढ़ने का खतरा है।

11 जिलों के 330 पंचायतों पर असर

बाढ़ का असर पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अररिया समेत 11 जिलों की 330 ग्राम पंचायतों में बताया गया है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों, तटबंधों, निचले क्षेत्रों और नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं।

कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

गंगा के अलावा गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा समेत कई नदियां अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। हथीदह में गंगा का जलस्तर और बढ़ने की आशंका को देखते हुए बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

NDRF-SDRF की टीमें और 1,345 नावें तैनात

बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद और संभावित निकासी के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर राहत-बचाव संसाधन लगाए हैं। NDRF की 10 और SDRF की 27 टीमें अलग-अलग जिलों में तैनात हैं। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में आवाजाही और लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए 1,345 नावें लगाई गई हैं।

110 सामुदायिक रसोई चल रहीं

बाढ़ प्रभावित लोगों तक भोजन पहुंचाने के लिए विभिन्न जिलों में 110 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी और बाढ़ के पानी के पास जाने से बचने तथा स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने की अपील की है।

ट्रेनों पर भी असर

बाढ़ और बढ़ते जलस्तर का असर रेल सेवाओं पर भी पड़ा है। पटना-गया रेलखंड पर पानी का स्तर बढ़ने के कारण कुछ ट्रेनों को रद्द और कुछ को डायवर्ट किया गया है। प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, राहत सामग्री उपलब्ध कराना और तटबंधों व संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी करना है। आने वाले दिनों में जलस्तर में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

सत्य निकेतन में बिल्डिंग हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, मलबे से 6 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

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नई दिल्ली के साउथ-वेस्ट इलाके के सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत गिरने के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। हादसे के बाद मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीमों ने मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए अभियान तेज कर दिया है।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अब तक 6 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। बचाव दल मलबे के अन्य हिस्सों की भी बारीकी से जांच कर रहे हैं, ताकि किसी और व्यक्ति के फंसे होने की स्थिति में उसे जल्द से जल्द बाहर निकाला जा सके।

घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है। पुलिस, दमकल विभाग और अन्य राहत एजेंसियां मौके पर मौजूद हैं और लगातार बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। प्रशासन की ओर से भी हालात पर नजर रखी जा रही है।

फिलहाल प्राथमिकता मलबे में संभावित रूप से फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। हादसे की वजह को लेकर जांच की जा रही है।

दिल्ली के सत्य निकेतन में बड़ा हादसा, PG की इमारत भरभराकर गिरी; एक की मौत, कई के दबे होने की आशंका

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नई दिल्ली- राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को बड़ा हादसा हो गया। यहां एक बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, इमारत का इस्तेमाल पेइंग गेस्ट (PG) आवास के तौर पर किया जा रहा था। हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और बचाव दल की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। मलबे को हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

अब तक एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई लोगों को बाहर निकालने की कोशिश जारी है। कुछ घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। बचाव एजेंसियां मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की संभावना को देखते हुए सावधानी से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।

हादसे के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जांच की जा रही है। मौके पर राहत-बचाव कार्य जारी है और अधिकारियों की नजर स्थिति पर बनी हुई है।

Nepal Flood Rescue: 9 दिन बाद टनल से जिंदा निकले 2 कर्मचारी, देश में जगी नई उम्मीद

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काठमांडू- नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बीच शुक्रवार को एक ऐसी खबर सामने आई जिसने राहत और बचाव अभियान में नई उम्मीद जगा दी। लगभग नौ दिनों से एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे दो कर्मचारियों को जिंदा बाहर निकाल लिया गया। दोनों कर्मचारी Upper Trishuli 3A Hydropower Project की सुरंग में फंसे हुए थे।

बचाए गए दोनों कर्मचारियों की पहचान 30 वर्षीय Sanjay Sah, जो mechanical foreman हैं, और 45 वर्षीय Kabir Maharjan, जो mechanical supervisor हैं, के रूप में हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों को सुरंग के अंदर करीब 170 मीटर की गहराई से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

26 अगस्त को आई थी विनाशकारी बाढ़

यह पूरा हादसा 26 अगस्त 2026 को हुआ, जब नेपाल के Trishuli River क्षेत्र में भारी बाढ़ और मलबे ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए ice और rock avalanche/glacier collapse के बाद अचानक आई बाढ़ ने नदी के आसपास के इलाकों, सड़कों और कई hydropower projects को भारी नुकसान पहुंचाया।

बाढ़ का पानी अपने साथ भारी मात्रा में कीचड़, चट्टान और मलबा लेकर आया। इससे जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों के प्रवेश द्वार और अंदर के रास्ते बुरी तरह प्रभावित हुए। बड़ी संख्या में कर्मचारी लापता हो गए और कई लोगों के सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका जताई गई।

सुरंग के अंदर कैसे बचे दोनों कर्मचारी?

Sanjay Sah ने rescue के बाद बताया कि जब बाढ़ का पानी underground area में घुसना शुरू हुआ, तब वहां बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद थे। उन्होंने पहले अपने साथियों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की।

Sah के मुताबिक, उस समय वहां सामान्य से कहीं ज्यादा लोग मौजूद थे और उन्होंने कई लोगों को बाहर निकलने के लिए कहा। दूसरों को बचाने की कोशिश में उनका खुद का बाहर निकलने का मौका निकल गया और वे सुरंग के अंदर फंस गए।

उन्होंने बताया कि सुरंग में फंसे रहने के दौरान उन्होंने प्रार्थना करते हुए समय बिताया और बाहर से मदद पहुंचने का इंतजार किया। उनके मुताबिक, आसपास कुछ और लोगों की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं, जिससे यह उम्मीद बढ़ी कि सुरंग में अन्य लोग भी जीवित हो सकते हैं।

आवाज सुनाई देने के बाद तेज हुआ Rescue Operation

कई दिनों तक सुरंग में फंसे लोगों की तलाश जारी रही। Rescue teams ने भारी मशीनों की मदद से सुरंग के रास्ते में जमा मलबा हटाना शुरू किया।

शुक्रवार को अभियान के दौरान rescuers को सुरंग के अंदर से आवाज सुनाई देने की सूचना मिली। इसके बाद बचाव दल ने उसी दिशा में खुदाई और मलबा हटाने का काम तेज कर दिया। लगभग 50 से 60 मीटर तक मलबा हटाने के बाद rescue teams उन कर्मचारियों तक पहुंचने में सफल हुईं।

बचाव अभियान में Nepal Army, Nepal Police और Armed Police Force के जवानों के साथ technical experts भी शामिल रहे। विदेशी tunnel-rescue specialists ने भी अभियान में सहायता और सलाह दी।

अस्पताल में कराया गया भर्ती

सुरंग से बाहर निकाले जाने के बाद दोनों कर्मचारियों को प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर उन्हें काठमांडू के अस्पताल ले जाया गया।

रिपोर्टों के अनुसार, Sanjay Sah की हालत स्थिर बताई गई है, जबकि Kabir Maharjan को इलाज और निगरानी की जरूरत है। दोनों को rescue site से Kathmandu ले जाया गया।

Kabir Maharjan भी पहुंचे थे Maintenance के लिए

Kabir Maharjan स्थायी रूप से Trishuli 3A में तैनात नहीं थे। वे routine maintenance work के लिए वहां पहुंचे थे। उनके परिवार के मुताबिक, वह 25 अगस्त को project site के लिए रवाना हुए थे और अगले दिन बाढ़ आने के बाद उनसे संपर्क टूट गया।

उनके परिवार के लिए नौ दिन बेहद मुश्किल रहे। फोन बंद होने के बाद परिवार लगातार अधिकारियों से संपर्क कर उनके बारे में जानकारी लेने की कोशिश करता रहा। उनके जिंदा मिलने की खबर के बाद परिवार में राहत की लहर दौड़ गई।

लेकिन अभी Rescue Operation खत्म नहीं हुआ

दो कर्मचारियों के जिंदा मिलने से जहां राहत की उम्मीद बढ़ी है, वहीं Nepal में rescue operation अभी भी जारी है।

अधिकारियों के मुताबिक, कई hydropower projects की सुरंगों में अभी भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में सैकड़ों workers के लापता होने और कई लोगों के सुरंगों में फंसे होने की बात कही गई है। Trishuli 3A site पर भी rescuers को उम्मीद है कि कुछ और लोग जीवित हो सकते हैं।

Rescue teams अब सुरंगों में संभावित survivable pockets की तलाश कर रही हैं। मशीनों, tunnel maps, oxygen systems और technical expertise की मदद से अभियान लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।

9 दिन बाद मिली जिंदगी की उम्मीद

नेपाल की इस भीषण प्राकृतिक आपदा में हजारों लोगों की जान गई है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। ऐसे समय में नौ दिन तक सुरंग के अंदर फंसे दो कर्मचारियों का जिंदा बचना एक बड़ी राहत और उम्मीद की खबर बनकर सामने आया है।

दोनों की कहानी ने rescue teams को भी नई ऊर्जा दी है। अब उनकी सुरक्षित वापसी के बाद सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि सुरंगों में फंसे अन्य लोगों को भी जल्द से जल्द जिंदा बाहर निकाला जा सके।

बड़ी बात

9 दिन तक अंधेरी और मलबे से घिरी सुरंग में फंसे दो कर्मचारियों का जिंदा बचना Nepal के अब तक के सबसे कठिन rescue operations में से एक में उम्मीद की किरण बन गया है। Rescue teams का अभियान जारी है और अब नजर इस बात पर है कि क्या सुरंग के अंदर से और लोगों को भी सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता है।

उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर, 23 जिले प्रभावित; 16,784 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, 3 की मौत

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लखनऊ- उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 23 जिले इस समय बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। बुधवार को ही 3,042 लोगों को रेस्क्यू किया गया। बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक तीन लोगों की मौत की भी सूचना है।

कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर

लगातार बारिश और जलस्तर बढ़ने के कारण राज्य की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में बाढ़ का खतरा अधिक बना हुआ है। गंगा, सरयू, शारदा और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और राहत-बचाव अभियान तेज कर दिया है।

1,499 नावें और 1,067 मेडिकल टीमें तैनात

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य के लिए सरकार ने 1,499 नाव और मोटरबोट तैनात की हैं। इसके साथ ही 1,067 मेडिकल टीमें प्रभावित लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में जुटी हैं। प्रशासन ने राज्य में 1,311 बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए हैं, जिनमें से 201 शिविर फिलहाल संचालित किए जा रहे हैं।

चित्रकूट और बलिया में हालात चिंताजनक

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण चौरा गांव से करीब 150 लोगों को मोटरबोट की मदद से सुरक्षित निकाला गया। वहीं बलिया में गंगा और सरयू का जलस्तर बढ़ने से करीब 20,500 लोग प्रभावित हुए हैं। यहां राहत कार्यों के लिए नावों की तैनाती के साथ राशन, दवाइयां और पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

वाराणसी में भी बढ़ा बाढ़ का खतरा

वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के जिलाधिकारी से बात कर बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी ली। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रखा है।

बारिश का दौर अभी जारी

मौसम विभाग ने दक्षिणी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। ऐसे में आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

उत्तर प्रदेश में बिगड़ते बाढ़ हालात के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक समय पर राहत पहुंचाना और निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालना है। फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

नेपाल–तिब्बत में कुदरत का कहर: ग्लेशियर टूटने से भीषण बाढ़, 900+ मौतें और हजारों लापता

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26 अगस्त 2026 को नेपाल–चीन (तिब्बत) सीमा के हिमालयी क्षेत्र में अचानक ग्लेशियर/बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के टूटने से भारी मात्रा में पानी, बर्फ, मलबा और पत्थर नीचे की ओर तेजी से बह निकले।

इससे नेपाल के कई इलाकों में अचानक फ्लैश फ्लड यानी बेहद तेज बाढ़ आ गई। पानी के साथ आया मलबा इतना शक्तिशाली था कि घर, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाओं के हिस्से तक बह गए। 

सबसे ज्यादा असर कहाँ हुआ?

नेपाल में रसुवा, नुवाकोट और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में भारी तबाही हुई। चीन की तरफ तिब्बत के Gyirong County और सीमा क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुए।

त्रिशूली नदी के आसपास कई Hydropower Projects स्थित हैं। बाढ़ और मलबा इन परियोजनाओं की सुरंगों तक पहुंच गया, जिसके कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी अंदर फंस गए या लापता हो गए। 

कितनी बड़ी है तबाही?

31 अगस्त की उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में आधिकारिक रूप से 794 मौतों की पुष्टि हुई है और 2,500 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

तिब्बत में 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी है। =

हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में नेपाल और तिब्बत के आंकड़ों को मिलाकर 900 से अधिक मौतें और 4,700 से ज्यादा लोग लापता बताए गए हैं। इसका कारण अलग-अलग समय पर जारी किए गए अपडेट और अलग-अलग सरकारी आंकड़ों का इस्तेमाल है। इसलिए अंतिम आंकड़ा अभी तय नहीं माना जा सकता। 

अभी सबसे बड़ी चिंता:

  • हजारों लोग अभी भी लापता हैं।
  • इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
  • कई लोग जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।
  • खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर और जमीन से बचाव अभियान कई बार बाधित हुआ है। 

सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश

इस हादसे का सबसे मुश्किल हिस्सा Hydropower Project की सुरंगों में फंसे लोगों को बचाना है।

बाढ़ का पानी, कीचड़ और पत्थर सुरंगों के रास्तों में भर गए हैं। कई स्थानों पर बचाव दल के लिए अंदर तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।

नेपाल के साथ भारत और चीन के विशेषज्ञ भी सुरंगों से लोगों को निकालने में मदद कर रहे हैं। कुछ जगहों पर सुरंग में पाइप डालकर हवा पहुंचाने की कोशिश की गई है। 

नेपाल की ओर से सैकड़ों जलविद्युत कर्मचारियों के लापता होने की सूचना है।

भारत की भूमिका क्या है?

भारत ने नेपाल के बचाव अभियान में विशेषज्ञ सहायता भेजी है।

भारतीय विशेषज्ञों की टीम विशेष रूप से सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने में सहायता कर रही है। चीन ने भी अपनी विशेष Tunnel Rescue Team भेजी है।

इसके अलावा भारत की नदियों में भी कुछ शव मिलने की सूचना मिली है, जिनके नेपाल की बाढ़ में बहकर आने की आशंका जताई गई है।

एक और खतरा: नई झील बन गई

बाढ़ के बाद स्थिति और गंभीर इसलिए हो गई क्योंकि भूस्खलन के कारण नदी का रास्ता कुछ जगहों पर बंद हो गया और पानी जमा होकर नई झील जैसी स्थिति बन गई।

ऐसी स्थिति में यदि प्राकृतिक बांध अचानक टूट जाए तो उसके पीछे जमा पानी एक और अचानक बाढ़ की लहर पैदा कर सकता है।

इसी वजह से कुछ इलाकों में बचावकर्मियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया गया। 

खराब मौसम ने बढ़ाई मुश्किल

बचाव अभियान के दौरान लगातार बारिश और नदी का बढ़ता जलस्तर बड़ी समस्या बन रहा है।

कई जगहों पर:

  • हेलीकॉप्टर उड़ाना मुश्किल

  • सड़कें और पुल टूटे

  • मोबाइल/संचार व्यवस्था प्रभावित

  • कीचड़ और मलबे से रास्ते बंद

  • नदी का जलस्तर तेजी से बदल रहा है

  • सुरंगों में प्रवेश बेहद जोखिमपूर्ण है

इस कारण बचाव दल को बहुत सावधानी से काम करना पड़ रहा है।

क्या यह जलवायु परिवर्तन से जुड़ा है?

विशेषज्ञों और अधिकारियों ने ग्लेशियरों की अस्थिरता और बढ़ते तापमान को इस तरह की घटनाओं के बढ़ते खतरे से जोड़ा है।

हिमालय में तापमान बढ़ने से ग्लेशियर और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ तथा चट्टानों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। इससे ग्लेशियर टूटने, भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

हालांकि इस विशेष घटना के सटीक वैज्ञानिक कारणों की जांच अभी जारी है, इसलिए इसे केवल एक कारण से जोड़ना जल्दबाजी होगी।

विदेशी नागरिक भी लापता

इस हादसे में कई विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की खबर है।

तिब्बत की तरफ अधिकारियों ने 23 देशों के 261 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी थी। इनमें नेपाल और भारत के नागरिकों के साथ अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों के लोग भी शामिल हैं। 

नेपाल में भी कई विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के संपर्क में नहीं होने की खबरें आई हैं।

बचाव अभियान में कौन-कौन लगा है?

बचाव अभियान में मुख्य रूप से:

  • नेपाल सेना और सुरक्षा बल
  • चीन की रेस्क्यू टीमें
  • भारत की विशेषज्ञ टीम
  • अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियां और रेड क्रॉस

शामिल हैं।

नेपाल में हजारों सुरक्षाकर्मी और स्वयंसेवक खोज एवं राहत अभियान में लगे हैं। चीन ने भी बड़ी संख्या में बचावकर्मियों, ड्रोन, उपकरण और राहत सामग्री को लगाया है।

आर्थिक नुकसान कितना?

तबाही इतनी व्यापक है कि नेपाल को कई अरब डॉलर के पुनर्निर्माण खर्च का सामना करना पड़ सकता है।

घर, सड़क, पुल, बिजली परियोजनाएं, पर्यटन क्षेत्र और स्थानीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कुछ आकलनों में नुकसान को नेपाल की अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से के बराबर बताया गया है, लेकिन अंतिम आधिकारिक नुकसान का आकलन अभी बाकी है। 

अभी सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या है?

फिलहाल सरकार और बचाव एजेंसियों की प्राथमिकता है:

1. जीवित लोगों को ढूंढना
2. सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालना
3. लापता लोगों की पहचान करना
4. शवों को बरामद कर पहचान कराना
5. प्रभावित लोगों को भोजन, पानी और चिकित्सा देना
6. नए भूस्खलन और बाढ़ से लोगों को बचाना
7. क्षतिग्रस्त सड़कों और संचार व्यवस्था को बहाल करना

सबसे महत्वपूर्ण बात

यह सिर्फ एक सामान्य बाढ़ नहीं थी। ग्लेशियर/चट्टान के टूटने से पानी और मलबे की अचानक आई बेहद शक्तिशाली लहर ने कुछ ही समय में हिमालयी घाटियों और नदी किनारे के क्षेत्रों को तबाह कर दिया।

और सबसे चिंताजनक बात यह है कि मृतकों की संख्या से भी कहीं ज्यादा लोग अभी लापता हैं। इसलिए आने वाले दिनों में मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है। बचाव अभियान अभी जारी है।

नोट: अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में अंतर है क्योंकि नेपाल और चीन की एजेंसियां अलग-अलग समय पर आंकड़े अपडेट कर रही हैं। ऊपर मैंने 31 अगस्त 2026 तक उपलब्ध ताजा आंकड़ों और इस अंतर को ध्यान में रखकर जानकारी दी है।

नेपाल की भीषण बाढ़ में चाय का ब्रेक बना जिंदगी का सहारा, रायपुर के 5 दोस्तों की बाल-बाल बची जान

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रायपुर- नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बीच छत्तीसगढ़ के रायपुर निवासी पांच दोस्तों की जिंदगी महज कुछ मिनट के अंतर से बच गई। घूमने के लिए नेपाल गए इन दोस्तों ने रास्ते में चाय पीने के लिए कुछ देर रुकने का फैसला किया, और यही छोटा-सा ब्रेक उनके लिए जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन गया।

रायपुर के माना कैंप इलाके के रहने वाले नारायण सेन, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, यतेंद्र प्रकाश और दिनेश सिंह ठाकुर नेपाल यात्रा पर गए थे। सभी की उम्र करीब 50 से 60 वर्ष के बीच बताई गई है। 26 अगस्त को नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी।

चाय के लिए रुके और सामने बह गया रास्ता

यात्रा के दौरान पांचों दोस्त मालेंखु इलाके से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने चाय पीने के लिए गाड़ी रोक दी। यह फैसला उस वक्त सामान्य लगा, लेकिन कुछ ही देर बाद हालात तेजी से बदल गए।

बाढ़ का पानी अचानक तेजी से बढ़ने लगा और आगे का रास्ता बेहद खतरनाक हो गया। जिस मार्ग से उन्हें आगे बढ़ना था, वहां मौजूद पुल भी बाढ़ की चपेट में आ गया। अगर वे चाय के लिए नहीं रुकते और तय समय पर आगे बढ़ जाते, तो संभव था कि वे भी उसी रास्ते पर फंस जाते।

आंखों के सामने दिखा बाढ़ का खौफनाक मंजर

चाय के लिए रुकने के बाद जब बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई तो दोस्तों ने ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थान पर शरण ली। इसके बाद उन्हें करीब दो दिन तक मालेंखु में फंसे रहना पड़ा।

उन्होंने ऊंचाई वाले स्थान से त्रिशूली नदी का रौद्र रूप देखा। पानी का बहाव इतना तेज था कि वाहन और मलबा नदी में बहते नजर आए। हालात सामान्य होने तक दोस्तों ने अपनी कार में रात गुजारी और स्थानीय लोगों तथा प्रशासन की मदद से सुरक्षित रहने की कोशिश की।

भारतीय हेल्पलाइन से भी मिला सहयोग

मुश्किल हालात के बीच स्थानीय लोगों और प्रशासन ने पांचों दोस्तों की मदद की। भारतीय अधिकारियों की हेल्पलाइन के जरिए भी उन्हें संपर्क बनाए रखने और आवश्यक सहायता हासिल करने में मदद मिली। इसके बाद वे सुरक्षित रूप से रायपुर लौट सके।

रायपुर लौटने के बाद दोस्तों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि चाय के लिए कुछ देर रुकना उनके लिए वरदान साबित हुआ। कुछ मिनटों की देरी ने उन्हें उस रास्ते से दूर रखा, जहां कुछ ही देर बाद बाढ़ का पानी तबाही मचा रहा था।

स्थानीय लोगों ने भी बढ़ाया मदद का हाथ

इस कठिन समय में नेपाल के स्थानीय लोगों ने भी मानवीयता का परिचय दिया। पांचों दोस्तों ने बताया कि संकट की घड़ी में उन्हें स्थानीय लोगों से सहयोग मिला।

इस दौरान एक भावुक क्षण भी सामने आया, जब स्थानीय महिला सुरक्षा कर्मियों ने दोस्तों की कलाई पर रक्षाबंधन के अवसर पर राखी बांधी। आपदा के बीच यह छोटा-सा मानवीय पल उनके लिए यादगार बन गया।

नेपाल में जारी है बाढ़ का खतरा

26 अगस्त की आपदा ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में अचानक आई बाढ़ से सड़कें, पुल, मकान और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। 30 अगस्त तक नेपाल में मृतकों की संख्या 700 से अधिक पहुंच चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। बचाव और राहत अभियान जारी है।

इस बीच अधिकारियों ने कुछ नदी क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने को लेकर नए अलर्ट भी जारी किए हैं। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

जिंदगी और मौत के बीच सिर्फ कुछ मिनट का फासला

रायपुर के इन पांच दोस्तों की कहानी बताती है कि प्राकृतिक आपदा के दौरान परिस्थितियां कितनी तेजी से बदल सकती हैं। एक साधारण-सा चाय का ब्रेक उनके लिए जिंदगी बचाने वाला फैसला साबित हुआ।

कभी-कभी जिंदगी बचाने के लिए किसी बड़े चमत्कार की नहीं, बस सही समय पर लिया गया एक छोटा-सा फैसला ही काफी होता है।

ओडिशा तट के पास बड़ा समुद्री हादसा: 24 क्रू सदस्यों वाला कार्गो जहाज डूबा, 2 लोग बचाए गए

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भुवनेश्वर- ओडिशा के पारादीप तट से करीब 240 नॉटिकल मील दूर बंगाल की खाड़ी में एक बड़ा समुद्री हादसा हुआ है। पनामा-फ्लैग वाला बल्क कैरियर MV Ocean Winner शनिवार को समुद्र में डूब गया। जहाज पर कुल 24 क्रू सदस्य सवार थे। भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना ने बड़े पैमाने पर Search and Rescue Operation शुरू किया है।

जहाज कहां जा रहा था?

MV Ocean Winner ने ओडिशा के पारादीप पोर्ट से 20 अगस्त की रात अपनी यात्रा शुरू की थी। जहाज करीब 72,100–72,200 मीट्रिक टन लौह अयस्क (Iron Ore Fines) लेकर सिंगापुर जा रहा था। 

हादसे के समय जहाज पर 24 विदेशी क्रू सदस्य मौजूद थे:

  • 20 चीनी नागरिक

  •  3 म्यांमार के नागरिक

  •  1 बांग्लादेशी नागरिक

अचानक टूट गया संपर्क

अधिकारियों के अनुसार, जहाज के साथ संपर्क टूटने की सूचना 22 अगस्त को मिली। इसके बाद Maritime Rescue Coordination Centre और भारतीय एजेंसियों ने तुरंत Search and Rescue Operation शुरू किया।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार जहाज समुद्री tracking system से भी गायब हो गया था। हादसे की सटीक वजह अभी सामने नहीं आई है और इसकी जांच की जा रही है। 

 2 क्रू सदस्य सुरक्षित मिले

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक बड़ी राहत की खबर सामने आई। पास से गुजर रहे MT AISOPOS नामक जहाज ने दो अलग-अलग life rafts से 2 क्रू सदस्यों को जीवित बचा लिया। 

फिलहाल बाकी 22 क्रू सदस्यों की तलाश जारी है।

Coast Guard और Navy ने संभाला मोर्चा

भारतीय तटरक्षक बल ने Search and Rescue Operation को तेज करते हुए कई जहाजों को तैनात किया है। ICGS Varad और ICGS Anmol को ऑपरेशन में लगाया गया है, जबकि ICGS Vijit को भी खोज अभियान में शामिल किया गया है। आसपास मौजूद अन्य जहाजों को भी राहत एवं बचाव अभियान में मदद करने के लिए अलर्ट किया गया है। 

खराब समुद्री परिस्थितियां बनी चुनौती

रेस्क्यू टीमों के सामने समुद्र की स्थिति भी बड़ी चुनौती है। अधिकारियों के अनुसार कुछ क्रू सदस्य life rafts या lifebuoys के सहारे समुद्र में हो सकते हैं, इसलिए बचाव दल लगातार संभावित इलाकों में तलाश कर रहे हैं। 

जहाज क्यों डूबा?

फिलहाल MV Ocean Winner के डूबने की वजह स्पष्ट नहीं है।

जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि:

  • क्या जहाज में कोई तकनीकी खराबी आई थी?

  • क्या समुद्र की खराब स्थिति हादसे की वजह बनी?

  • संपर्क टूटने से पहले क्या कोई distress signal भेजा गया था?

  • जहाज tracking system से क्यों गायब हुआ?

  • जहाज इतनी तेजी से कैसे डूबा?

अधिकारियों की जांच के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आएगी। 

अभी की सबसे बड़ी खबर

MV Ocean Winner के 24 क्रू सदस्यों में से 2 को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 22 अन्य की तलाश भारतीय Coast Guard और Navy द्वारा जारी है।

यह हादसा ओडिशा के पारादीप तट से करीब 240 नॉटिकल मील दूर बंगाल की खाड़ी में हुआ है। बचाव अभियान लगातार जारी है। 

छत्तीसगढ़ में बाढ़ आपदा से निपटने आज बड़ी मॉक ड्रिल, राहत-बचाव तैयारियों की होगी परीक्षा

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में संभावित बाढ़ और जलभराव जैसी आपदा की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के दिशा-निर्देशों के तहत 20 अगस्त को प्रदेश में व्यापक मॉक ड्रिल आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य आपदा के दौरान राहत, बचाव और प्रशासनिक प्रतिक्रिया की तैयारियों को जमीनी स्तर पर परखना है।


रायपुर में परसदा सेंध झील में होगा अभ्यास

राजधानी रायपुर में मुख्य मॉक ड्रिल मंदिर हसौद तहसील के परसदा गांव स्थित सेंध झील में आयोजित की जा रही है। यह अभ्यास सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलेगा। NDMA और जिला प्रशासन की संयुक्त पहल के तहत होने वाले इस अभ्यास में आपदा की सूचना मिलने से लेकर राहत एवं बचाव दलों के मौके पर पहुंचने तक की पूरी प्रक्रिया को परखा जाएगा।

परखी जाएगी विभागों की तैयारी

मॉक ड्रिल के दौरान पुलिस, नगर सेना, अग्निशमन, नागरिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, ऊर्जा सहित विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता का परीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों को निर्धारित Standard Operating Procedures (SOPs) को समझने और उनका प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य यह देखना है कि अचानक बाढ़ या जलभराव की स्थिति में प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, राहत सामग्री उपलब्ध कराने और बचाव अभियान शुरू करने में कितना समय लगता है।

‘जीरो डिले’ रिस्पॉन्स पर फोकस

आपदा प्रबंधन की तैयारियों में ‘जीरो डिले’ रिस्पॉन्स पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे पूर्वाभ्यास से वास्तविक आपदा के समय होने वाली देरी और व्यवस्थागत कमियों को पहले ही चिन्हित किया जा सकता है। इसके आधार पर राहत एवं बचाव व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

प्रदेश में 18 अगस्त को राज्य स्तरीय टेबल-टॉप एक्सरसाइज भी आयोजित की गई थी, जिसमें अधिकारियों ने संभावित बाढ़ परिदृश्यों और विभागीय जिम्मेदारियों पर अभ्यास किया। इसके बाद 20 अगस्त को जमीनी स्तर पर मॉक ड्रिल के जरिए तैयारियों की वास्तविक परीक्षा की जा रही है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह मॉक ड्रिल?

बाढ़ जैसी आपदा के दौरान शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में प्रशासन का त्वरित निर्णय, राहत-बचाव दलों की पहुंच, संचार व्यवस्था और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल सीधे तौर पर जनहानि को कम करने में मदद कर सकता है।

यह मॉक ड्रिल प्रदेश की आपदा प्रबंधन क्षमता, अंतर-विभागीय समन्वय और त्वरित राहत-बचाव व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

वन विभाग की सतर्कता से टला बड़ा खतरा, केरावाहारा में तेंदुआ सुरक्षित पकड़ा गया

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वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार त्वरित कार्रवाई, स्वास्थ्य परीक्षण के बाद होगी आगे की प्रक्रिया

रायपुर- छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के केराबाहरा गांव में आतंक मचाने वाला एक तेंदुआ 1 अगस्त 2026 की सुबह वन विभाग द्वारा सुरक्षित पकड़ लिया गया। यह तेंदुआ पिछले एक महीने से अधिक समय से लगातार रिहायशी इलाके में आ रहा था और ग्रामीणों में दहशत का माहौल था। छत्तीसगढ़ वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पिंजरा लगाया और जानवर को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित पिंजरे में कैद कर लिया।

वन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार गरियाबंद वनमंडल के वन परिक्षेत्र गरियाबंद अंतर्गत ग्राम केरावाहारा (ग्राम पंचायत जोवा) में वन विभाग ने बड़ी सफलता हासिल की है। पिछले कुछ समय से क्षेत्र में तेंदुए की लगातार गतिविधियों को देखते हुए लगाए गए केज ट्रैप (पिंजरे) में शुक्रवार को तेंदुआ सुरक्षित रूप से पकड़ा गया। वन विभाग की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई से संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष को टाल दिया गया।

तेंदुए की गतिविधियों पर रखी जा रही थी विशेष निगरानी

वनमंडलाधिकारी ससिगानंदन के. ने बताया कि तेंदुए ने पहले क्षेत्र में पालतू मवेशियों पर हमला किया था। इसके अलावा विद्यालय परिसर और आबादी के आसपास भी उसकी मौजूदगी की सूचना मिल रही थी। इसे देखते हुए वन विभाग ने क्षेत्र में विशेष निगरानी शुरू की और आवश्यक सुरक्षा उपाय किए।

केज ट्रैप और रेस्क्यू टीम की रणनीति रही सफल

वनमंडलाधिकारी ससिगानंदन के., उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वरुण जैन और वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश वर्मा के निर्देशन में ग्राम जोवा और केरावाहारा में केज ट्रैप लगाए गए थे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित लेपर्ड रेस्क्यू टीम को आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात किया गया था। इस कार्रवाई के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सह मुख्य वन्यजीव वार्डन, छत्तीसगढ़ से आवश्यक अनुमति और दिशा-निर्देश भी प्राप्त किए गए थे।

सुरक्षित रेस्क्यू के बाद स्वास्थ्य पर रखी जा रही निगरानी

वन विभाग की लगातार निगरानी और सुनियोजित रणनीति के चलते तेंदुआ सुरक्षित रूप से पिंजरे में आ गया। सूचना मिलते ही विभागीय टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उसके स्वास्थ्य और व्यवहार पर निगरानी शुरू कर दी। मौके पर भीड़ न जुटे, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था भी की गई।

विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई

पकड़े गए तेंदुए का तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण में उसकी शारीरिक स्थिति, किसी संभावित चोट या बीमारी तथा प्राकृतिक आवास में छोड़ने की उपयुक्तता का आकलन किया जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।

अफवाहों से बचें, वन विभाग को दें तुरंत सूचना

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न करें। तेंदुए से संबंधित कोई भी जानकारी मिलने पर तुरंत नजदीकी वन अमले को सूचित करें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मानव जीवन और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी आवश्यक कदम नियमानुसार उठाए जा रहे हैं।

उफनते नाले में बही कार, चालक लापता: सारंगढ़-बरमकेला मार्ग पर हादसा

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 सारंगढ़-बिलाईगढ़ | जिले के माधोपली क्षेत्र में तेज बारिश के बीच उफनते नाले को पार करने का जोखिम एक कार सवार के लिए जानलेवा साबित हुआ। सारंगढ़-बरमकेला मुख्य मार्ग पर स्थित माधोपली के पास एक कार पानी के प्रचंड बहाव में बह गई। हादसे के बाद से कार चालक लापता बताया जा रहा है। घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस और स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। हालांकि, देर शाम अंधेरा होने और पानी का बहाव तेज होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा। सुबह से दोबारा बड़े पैमाने पर तलाश अभियान चलाया जाएगा।


तेज बहाव में अनियंत्रित होकर बही कार

जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में बीते कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। इसी दौरान एक कार चालक ने उफनते नाले को पार करने की कोशिश की। नाले पर पानी का दबाव इतना अधिक था कि कार अचानक अनियंत्रित हुई और देखते ही देखते तेज धार में बह गई। इस दृश्य को देख आसपास के लोगों में हड़कंप मच गया और उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया।

अंधेरा बना रेस्क्यू में बाधा

घटना की खबर मिलते ही पुलिस टीम ने ग्रामीणों के साथ मिलकर नाले और आसपास के इलाकों में काफी देर तक खोजबीन की। लेकिन जलस्तर ज्यादा होने और शाम ढलते ही अंधेरा छा जाने के कारण सुरक्षा के लिहाज से रेस्क्यू ऑपरेशन को स्थगित करना पड़ा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कार में कितने लोग सवार थे और लापता व्यक्ति की सटीक पहचान क्या है, इस संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है।

प्रशासन की अपील के बावजूद लापरवाही

बारिश के दिनों में जिले के कई पुल-पुलिया जलमग्न हो जाते हैं। प्रशासन द्वारा लगातार लोगों से उफनते नदी-नालों को पार न करने की अपील की जा रही है, फिर भी जल्दबाजी में लोग जान जोखिम में डाल रहे हैं।

बाढ़ में फंसे 170 लोगों को भारतीय तटरक्षक बल ने सुरक्षित बचाया, दमन, दादरा एवं नगर हवेली और दक्षिण गुजरात में चलाया बड़ा रेस्क्यू अभियान

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नई दिल्ली- भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर दमन, दादरा एवं नगर हवेली और दक्षिण गुजरात के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे 170 लोगों को सुरक्षित बचाया। 22 जुलाई 2026 की मध्यरात्रि से अब तक लगातार बारिश, भीषण बाढ़ और खराब मौसम के बीच 11 सफल रेस्क्यू अभियान चलाए गए।

रेस्क्यू अभियान की शुरुआत 22/23 जुलाई की रात सिलवासा के खानवेल क्षेत्र से पांच लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ हुई। इसके बाद कडैया तटीय क्षेत्र में बाढ़ के कारण नदी किनारे फंसे तीन मछुआरों को बचाया गया।

सबसे बड़े अभियानों में से एक में वेलस्पन इंडस्ट्रियल एरिया से 60 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, जहां बाढ़ के कारण सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका था।

इसके अलावा बाढ़ के पानी में फंसी एक बस से सात लोगों को, डोंगरी क्षेत्र से 10 लोगों को, वलसाड-पारडी क्षेत्र से हेलीकॉप्टर की मदद से चार लोगों को तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज क्षेत्र से आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

एक अन्य महत्वपूर्ण अभियान में आवध सोसाइटी से 10 लोगों को बचाया गया, जिनमें नौ माह की गर्भवती महिला और सांस लेने में तकलीफ से जूझ रही एक महिला भी शामिल थीं। दोनों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई।

24 जुलाई को भारतीय तटरक्षक बल के दो हेलीकॉप्टरों ने नवसारी जिले के मेंदर गांव से 33 लोगों को एयरलिफ्ट किया। इनमें एक गंभीर सीने के दर्द से पीड़ित व्यक्ति भी शामिल था, जिसे तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई।

लगातार मूसलाधार बारिश, तेज बहाव और बेहद कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारतीय तटरक्षक बल के जवान बिना रुके राहत एवं बचाव कार्य में जुटे रहे। इस अभियान के जरिए तटरक्षक बल ने अपने आदर्श वाक्य "वयम् रक्षामः" (हम रक्षा करते हैं) को एक बार फिर चरितार्थ किया।

भारतीय तटरक्षक बल ने कहा है कि वह नागरिक प्रशासन के साथ मिलकर पूरी सतर्कता के साथ राहत कार्य जारी रखे हुए है और बाढ़ से उत्पन्न किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।

भारतीय तटरक्षक बल ने समुद्र में फंसे छह मछुआरों का सुरक्षित किया रेस्क्यू

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नई दिल्ली/मंगलुरु- भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने 29 जून 2026 को मंगलुरु तट के पास समुद्र में संकटग्रस्त भारतीय मछली पकड़ने वाली नाव आईएफबी ‘मंजू माथा’ (IFB Manju Matha) से छह मछुआरों को सफलतापूर्वक बचाया। यह चुनौतीपूर्ण समुद्री खोज एवं बचाव (Search and Rescue - SAR) अभियान भारतीय तटरक्षक पोत आईसीजीएस सचेत (ICGS Sachet) द्वारा अंजाम दिया गया।

तटरक्षक बल को शाम लगभग 4 बजे वीएचएफ रेडियो के माध्यम से संकट संदेश प्राप्त हुआ। संदेश में बताया गया कि सूरतकल तट से लगभग 33 समुद्री मील दूर स्थित मछली पकड़ने वाली नाव में समुद्र की ऊंची लहरों और खराब मौसम के कारण गंभीर जलभराव और नाव के ढांचे को नुकसान पहुंचा है, जिससे उसमें सवार सभी छह मछुआरों की जान खतरे में पड़ गई है।

संदेश मिलते ही भारतीय तटरक्षक बल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आईसीजीएस सचेत को घटनास्थल की ओर रवाना किया और संकटग्रस्त नौका तक पहुंचकर राहत अभियान शुरू किया।

अत्यंत खराब मौसम, ऊंची लहरों, तेज हवाओं और कम दृश्यता जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद तटरक्षक दल ने उच्च स्तर की दक्षता और साहस का परिचय दिया। अभियान के दौरान विशेष रूप से खराब समुद्री परिस्थितियों के लिए विकसित रिमोट-ऑपरेटेड लाइफबॉय का उपयोग कर सभी मछुआरों तक सुरक्षित पहुंच बनाई गई और उन्हें एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला गया।

शाम 6 बजे तक सभी छह मछुआरों का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया। इसके बाद आईसीजीएस सचेत बचाए गए मछुआरों को सुरक्षित उतारने के लिए न्यू मंगलुरु बंदरगाह की ओर रवाना हो गया।

यह अभियान समुद्र में मानव जीवन की सुरक्षा के प्रति भारतीय तटरक्षक बल की अटूट प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण है। साथ ही यह आधुनिक तकनीक, उच्च स्तरीय प्रशिक्षण, साहस और पेशेवर दक्षता के प्रभावी समन्वय को भी दर्शाता है, जिसके बल पर तटरक्षक बल सबसे कठिन समुद्री आपात स्थितियों का भी सफलतापूर्वक सामना कर रहा है।

डोमिनिकन रिपब्लिक में होटल में भीषण आग, 1 की मौत – 1700 लोग सुरक्षित निकाले गए

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डोमिनिकन रिपब्लिक में एक बीच होटल में भीषण आग लगने की दुखद घटना सामने आई है। इस हादसे में कम से कम 1 व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि लगभग 1700 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया

कैसे हुआ हादसा?

रिपोर्ट्स के अनुसार, आग होटल के अंदर अचानक लगी और कुछ ही समय में कई हिस्सों में फैल गई। तेज़ धुआं और आग की लपटों के कारण अफरा-तफरी मच गई, जिससे मेहमानों को तुरंत बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी।

 राहत और बचाव कार्य

दमकल विभाग और आपातकालीन सेवाएं तुरंत मौके पर पहुंचीं और घंटों की मेहनत के बाद आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया।
सभी होटल मेहमानों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

 जांच जारी

स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है कि आग कैसे लगी। शुरुआती तौर पर इसे एक गंभीर हादसा माना जा रहा है, लेकिन कारणों की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

स्थिति फिलहाल

  • 1 व्यक्ति की मौत

  • लगभग 1700 लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू

  • राहत और बचाव कार्य पूरा

  • जांच जारी

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