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इंडोनेशिया में ज्वालामुखी का भीषण विस्फोट, 8 एयरपोर्ट बंद; 1.70 लाख यात्री प्रभावित

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जकार्ता- इंडोनेशिया में माउंट अनाक क्राकाटोआ (Anak Krakatau) के लगातार हो रहे ज्वालामुखी विस्फोट ने देश के हवाई यातायात को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। ज्वालामुखी से निकल रही राख के कारण सुरक्षा के मद्देनजर आठ एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन रोक दिया गया, जिससे करीब 1.70 लाख यात्री प्रभावित हुए हैं।

आसमान में छाई ज्वालामुखी की राख

अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में शुक्रवार से गतिविधियां तेज हुई थीं। रविवार को हुए विस्फोट के बाद राख का गुबार हजारों फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया और तेज हवाओं के कारण राख इंडोनेशिया के कई इलाकों तक फैल गई। रिपोर्टों के मुताबिक राख का गुबार करीब 50,000 फीट तक पहुंचा।

ज्वालामुखी से निकलने वाली राख विमान के इंजन और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों के लिए खतरनाक मानी जाती है। इसी वजह से अधिकारियों ने यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए कई एयरपोर्ट पर उड़ानें रोकने का फैसला लिया।

1,500 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित

हवाई सेवाओं पर इस प्राकृतिक आपदा का बड़ा असर पड़ा है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार 1,558 से ज्यादा उड़ानें रद्द या प्रभावित हुईं और करीब 1.70 लाख यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अकेले जकार्ता के मुख्य सोएकार्नो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से जुड़ी 900 से ज्यादा उड़ानें प्रभावित हुईं।

एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में यात्री अपनी उड़ानों की स्थिति जानने के लिए घंटों इंतजार करते नजर आए। कई यात्रियों को अपनी यात्रा आगे बढ़ानी पड़ी, जबकि कुछ को वैकल्पिक एयरपोर्ट और उड़ानों का सहारा लेना पड़ा।


स्कूल भी ऑनलाइन किए गए

ज्वालामुखी की राख का असर सिर्फ हवाई सेवाओं तक सीमित नहीं रहा। राख के कारण कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। सुरक्षा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जकार्ता और आसपास के कुछ क्षेत्रों में स्कूलों को ऑनलाइन कक्षाओं में बदल दिया गया है। लोगों को बाहर निकलते समय मास्क पहनने और राख के सीधे संपर्क से बचने की सलाह दी गई है।

अभी भी बनी हुई है खतरे की स्थिति

अधिकारियों का कहना है कि ज्वालामुखी की गतिविधि और मौसम की स्थिति लगातार बदल रही है। इसी वजह से यह तय करना मुश्किल है कि एयरपोर्ट और उड़ान सेवाएं पूरी तरह सामान्य कब होंगी। सोमवार को भी कई एयरपोर्ट पर संचालन प्रभावित रहा।

2018 की घटना की याद हुई ताजा

अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी का नाम इंडोनेशिया की एक बेहद खतरनाक प्राकृतिक आपदा से भी जुड़ा है। 2018 में इसी ज्वालामुखी की गतिविधि से सुनामी आई थी, जिसमें 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। हालांकि, मौजूदा विस्फोट को लेकर अधिकारियों ने तत्काल सुनामी का खतरा नहीं बताया है।

 एक नजर में

  •  ज्वालामुखी: माउंट अनाक क्राकाटोआ

  • देश: इंडोनेशिया

  •  प्रभावित एयरपोर्ट: 8

  •  प्रभावित यात्री: करीब 1.70 लाख

  •  प्रभावित उड़ानें: 1,500 से ज्यादा

  •  मुख्य समस्या: ज्वालामुखी की राख

  •  अन्य असर: कुछ क्षेत्रों में स्कूल ऑनलाइन

  •  स्थिति: ज्वालामुखी और हवाई सेवाओं पर निगरानी जारी

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता यात्रियों और आम लोगों की सुरक्षा है। मौसम और ज्वालामुखी की गतिविधि को देखते हुए एयरपोर्ट संचालन को लेकर अगले कुछ घंटों में स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

नेपाल–तिब्बत में कुदरत का कहर: ग्लेशियर टूटने से भीषण बाढ़, 900+ मौतें और हजारों लापता

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26 अगस्त 2026 को नेपाल–चीन (तिब्बत) सीमा के हिमालयी क्षेत्र में अचानक ग्लेशियर/बर्फ और चट्टानों के बड़े हिस्से के टूटने से भारी मात्रा में पानी, बर्फ, मलबा और पत्थर नीचे की ओर तेजी से बह निकले।

इससे नेपाल के कई इलाकों में अचानक फ्लैश फ्लड यानी बेहद तेज बाढ़ आ गई। पानी के साथ आया मलबा इतना शक्तिशाली था कि घर, सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाओं के हिस्से तक बह गए। 

सबसे ज्यादा असर कहाँ हुआ?

नेपाल में रसुवा, नुवाकोट और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में भारी तबाही हुई। चीन की तरफ तिब्बत के Gyirong County और सीमा क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुए।

त्रिशूली नदी के आसपास कई Hydropower Projects स्थित हैं। बाढ़ और मलबा इन परियोजनाओं की सुरंगों तक पहुंच गया, जिसके कारण बड़ी संख्या में कर्मचारी अंदर फंस गए या लापता हो गए। 

कितनी बड़ी है तबाही?

31 अगस्त की उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल में आधिकारिक रूप से 794 मौतों की पुष्टि हुई है और 2,500 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

तिब्बत में 16 लोगों की मौत और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी है। =

हालांकि कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में नेपाल और तिब्बत के आंकड़ों को मिलाकर 900 से अधिक मौतें और 4,700 से ज्यादा लोग लापता बताए गए हैं। इसका कारण अलग-अलग समय पर जारी किए गए अपडेट और अलग-अलग सरकारी आंकड़ों का इस्तेमाल है। इसलिए अंतिम आंकड़ा अभी तय नहीं माना जा सकता। 

अभी सबसे बड़ी चिंता:

  • हजारों लोग अभी भी लापता हैं।
  • इनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
  • कई लोग जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।
  • खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर और जमीन से बचाव अभियान कई बार बाधित हुआ है। 

सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने की कोशिश

इस हादसे का सबसे मुश्किल हिस्सा Hydropower Project की सुरंगों में फंसे लोगों को बचाना है।

बाढ़ का पानी, कीचड़ और पत्थर सुरंगों के रास्तों में भर गए हैं। कई स्थानों पर बचाव दल के लिए अंदर तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।

नेपाल के साथ भारत और चीन के विशेषज्ञ भी सुरंगों से लोगों को निकालने में मदद कर रहे हैं। कुछ जगहों पर सुरंग में पाइप डालकर हवा पहुंचाने की कोशिश की गई है। 

नेपाल की ओर से सैकड़ों जलविद्युत कर्मचारियों के लापता होने की सूचना है।

भारत की भूमिका क्या है?

भारत ने नेपाल के बचाव अभियान में विशेषज्ञ सहायता भेजी है।

भारतीय विशेषज्ञों की टीम विशेष रूप से सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने में सहायता कर रही है। चीन ने भी अपनी विशेष Tunnel Rescue Team भेजी है।

इसके अलावा भारत की नदियों में भी कुछ शव मिलने की सूचना मिली है, जिनके नेपाल की बाढ़ में बहकर आने की आशंका जताई गई है।

एक और खतरा: नई झील बन गई

बाढ़ के बाद स्थिति और गंभीर इसलिए हो गई क्योंकि भूस्खलन के कारण नदी का रास्ता कुछ जगहों पर बंद हो गया और पानी जमा होकर नई झील जैसी स्थिति बन गई।

ऐसी स्थिति में यदि प्राकृतिक बांध अचानक टूट जाए तो उसके पीछे जमा पानी एक और अचानक बाढ़ की लहर पैदा कर सकता है।

इसी वजह से कुछ इलाकों में बचावकर्मियों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया गया। 

खराब मौसम ने बढ़ाई मुश्किल

बचाव अभियान के दौरान लगातार बारिश और नदी का बढ़ता जलस्तर बड़ी समस्या बन रहा है।

कई जगहों पर:

  • हेलीकॉप्टर उड़ाना मुश्किल

  • सड़कें और पुल टूटे

  • मोबाइल/संचार व्यवस्था प्रभावित

  • कीचड़ और मलबे से रास्ते बंद

  • नदी का जलस्तर तेजी से बदल रहा है

  • सुरंगों में प्रवेश बेहद जोखिमपूर्ण है

इस कारण बचाव दल को बहुत सावधानी से काम करना पड़ रहा है।

क्या यह जलवायु परिवर्तन से जुड़ा है?

विशेषज्ञों और अधिकारियों ने ग्लेशियरों की अस्थिरता और बढ़ते तापमान को इस तरह की घटनाओं के बढ़ते खतरे से जोड़ा है।

हिमालय में तापमान बढ़ने से ग्लेशियर और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ तथा चट्टानों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। इससे ग्लेशियर टूटने, भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

हालांकि इस विशेष घटना के सटीक वैज्ञानिक कारणों की जांच अभी जारी है, इसलिए इसे केवल एक कारण से जोड़ना जल्दबाजी होगी।

विदेशी नागरिक भी लापता

इस हादसे में कई विदेशी नागरिकों के भी लापता होने की खबर है।

तिब्बत की तरफ अधिकारियों ने 23 देशों के 261 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी थी। इनमें नेपाल और भारत के नागरिकों के साथ अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों के लोग भी शामिल हैं। 

नेपाल में भी कई विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के संपर्क में नहीं होने की खबरें आई हैं।

बचाव अभियान में कौन-कौन लगा है?

बचाव अभियान में मुख्य रूप से:

  • नेपाल सेना और सुरक्षा बल
  • चीन की रेस्क्यू टीमें
  • भारत की विशेषज्ञ टीम
  • अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियां और रेड क्रॉस

शामिल हैं।

नेपाल में हजारों सुरक्षाकर्मी और स्वयंसेवक खोज एवं राहत अभियान में लगे हैं। चीन ने भी बड़ी संख्या में बचावकर्मियों, ड्रोन, उपकरण और राहत सामग्री को लगाया है।

आर्थिक नुकसान कितना?

तबाही इतनी व्यापक है कि नेपाल को कई अरब डॉलर के पुनर्निर्माण खर्च का सामना करना पड़ सकता है।

घर, सड़क, पुल, बिजली परियोजनाएं, पर्यटन क्षेत्र और स्थानीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कुछ आकलनों में नुकसान को नेपाल की अर्थव्यवस्था के बड़े हिस्से के बराबर बताया गया है, लेकिन अंतिम आधिकारिक नुकसान का आकलन अभी बाकी है। 

अभी सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या है?

फिलहाल सरकार और बचाव एजेंसियों की प्राथमिकता है:

1. जीवित लोगों को ढूंढना
2. सुरंगों में फंसे कर्मचारियों को निकालना
3. लापता लोगों की पहचान करना
4. शवों को बरामद कर पहचान कराना
5. प्रभावित लोगों को भोजन, पानी और चिकित्सा देना
6. नए भूस्खलन और बाढ़ से लोगों को बचाना
7. क्षतिग्रस्त सड़कों और संचार व्यवस्था को बहाल करना

सबसे महत्वपूर्ण बात

यह सिर्फ एक सामान्य बाढ़ नहीं थी। ग्लेशियर/चट्टान के टूटने से पानी और मलबे की अचानक आई बेहद शक्तिशाली लहर ने कुछ ही समय में हिमालयी घाटियों और नदी किनारे के क्षेत्रों को तबाह कर दिया।

और सबसे चिंताजनक बात यह है कि मृतकों की संख्या से भी कहीं ज्यादा लोग अभी लापता हैं। इसलिए आने वाले दिनों में मृतकों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है। बचाव अभियान अभी जारी है।

नोट: अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों और लापता लोगों के आंकड़ों में अंतर है क्योंकि नेपाल और चीन की एजेंसियां अलग-अलग समय पर आंकड़े अपडेट कर रही हैं। ऊपर मैंने 31 अगस्त 2026 तक उपलब्ध ताजा आंकड़ों और इस अंतर को ध्यान में रखकर जानकारी दी है।

नेपाल की भीषण बाढ़ में चाय का ब्रेक बना जिंदगी का सहारा, रायपुर के 5 दोस्तों की बाल-बाल बची जान

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रायपुर- नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बीच छत्तीसगढ़ के रायपुर निवासी पांच दोस्तों की जिंदगी महज कुछ मिनट के अंतर से बच गई। घूमने के लिए नेपाल गए इन दोस्तों ने रास्ते में चाय पीने के लिए कुछ देर रुकने का फैसला किया, और यही छोटा-सा ब्रेक उनके लिए जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन गया।

रायपुर के माना कैंप इलाके के रहने वाले नारायण सेन, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, यतेंद्र प्रकाश और दिनेश सिंह ठाकुर नेपाल यात्रा पर गए थे। सभी की उम्र करीब 50 से 60 वर्ष के बीच बताई गई है। 26 अगस्त को नेपाल की भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी।

चाय के लिए रुके और सामने बह गया रास्ता

यात्रा के दौरान पांचों दोस्त मालेंखु इलाके से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने चाय पीने के लिए गाड़ी रोक दी। यह फैसला उस वक्त सामान्य लगा, लेकिन कुछ ही देर बाद हालात तेजी से बदल गए।

बाढ़ का पानी अचानक तेजी से बढ़ने लगा और आगे का रास्ता बेहद खतरनाक हो गया। जिस मार्ग से उन्हें आगे बढ़ना था, वहां मौजूद पुल भी बाढ़ की चपेट में आ गया। अगर वे चाय के लिए नहीं रुकते और तय समय पर आगे बढ़ जाते, तो संभव था कि वे भी उसी रास्ते पर फंस जाते।

आंखों के सामने दिखा बाढ़ का खौफनाक मंजर

चाय के लिए रुकने के बाद जब बाढ़ की स्थिति गंभीर हुई तो दोस्तों ने ऊंचाई वाले सुरक्षित स्थान पर शरण ली। इसके बाद उन्हें करीब दो दिन तक मालेंखु में फंसे रहना पड़ा।

उन्होंने ऊंचाई वाले स्थान से त्रिशूली नदी का रौद्र रूप देखा। पानी का बहाव इतना तेज था कि वाहन और मलबा नदी में बहते नजर आए। हालात सामान्य होने तक दोस्तों ने अपनी कार में रात गुजारी और स्थानीय लोगों तथा प्रशासन की मदद से सुरक्षित रहने की कोशिश की।

भारतीय हेल्पलाइन से भी मिला सहयोग

मुश्किल हालात के बीच स्थानीय लोगों और प्रशासन ने पांचों दोस्तों की मदद की। भारतीय अधिकारियों की हेल्पलाइन के जरिए भी उन्हें संपर्क बनाए रखने और आवश्यक सहायता हासिल करने में मदद मिली। इसके बाद वे सुरक्षित रूप से रायपुर लौट सके।

रायपुर लौटने के बाद दोस्तों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि चाय के लिए कुछ देर रुकना उनके लिए वरदान साबित हुआ। कुछ मिनटों की देरी ने उन्हें उस रास्ते से दूर रखा, जहां कुछ ही देर बाद बाढ़ का पानी तबाही मचा रहा था।

स्थानीय लोगों ने भी बढ़ाया मदद का हाथ

इस कठिन समय में नेपाल के स्थानीय लोगों ने भी मानवीयता का परिचय दिया। पांचों दोस्तों ने बताया कि संकट की घड़ी में उन्हें स्थानीय लोगों से सहयोग मिला।

इस दौरान एक भावुक क्षण भी सामने आया, जब स्थानीय महिला सुरक्षा कर्मियों ने दोस्तों की कलाई पर रक्षाबंधन के अवसर पर राखी बांधी। आपदा के बीच यह छोटा-सा मानवीय पल उनके लिए यादगार बन गया।

नेपाल में जारी है बाढ़ का खतरा

26 अगस्त की आपदा ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में अचानक आई बाढ़ से सड़कें, पुल, मकान और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। 30 अगस्त तक नेपाल में मृतकों की संख्या 700 से अधिक पहुंच चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। बचाव और राहत अभियान जारी है।

इस बीच अधिकारियों ने कुछ नदी क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने को लेकर नए अलर्ट भी जारी किए हैं। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

जिंदगी और मौत के बीच सिर्फ कुछ मिनट का फासला

रायपुर के इन पांच दोस्तों की कहानी बताती है कि प्राकृतिक आपदा के दौरान परिस्थितियां कितनी तेजी से बदल सकती हैं। एक साधारण-सा चाय का ब्रेक उनके लिए जिंदगी बचाने वाला फैसला साबित हुआ।

कभी-कभी जिंदगी बचाने के लिए किसी बड़े चमत्कार की नहीं, बस सही समय पर लिया गया एक छोटा-सा फैसला ही काफी होता है।

चीन में टाइफून ‘डॉल्फिन’ का खतरा, रेड अलर्ट जारी; कई उड़ानें रद्द, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

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बीजिंग- चीन में शक्तिशाली टाइफून ‘डॉल्फिन’ के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है और प्रभावित इलाकों में एहतियाती कदम तेज कर दिए गए हैं।


टाइफून के चलते कई क्षेत्रों में तेज हवाओं और भारी बारिश की आशंका जताई गई है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई उड़ानें रद्द की गई हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन ने नागरिकों से समुद्र तटीय और निचले इलाकों से दूर रहने तथा मौसम संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है। राहत और बचाव दलों को भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रखा गया है।

टाइफून के चलते परिवहन और दैनिक जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सुरक्षा एवं राहत उपाय किए जा रहे हैं।

यूरोप में भीषण जंगल की आग का कहर: फ्रांस और स्पेन में बड़े पैमाने पर तबाही, हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया

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पेरिस/मैड्रिड- यूरोप में लगातार बढ़ती भीषण गर्मी और शुष्क मौसम के बीच फ्रांस और स्पेन के कई हिस्सों में जंगल की आग तेजी से फैल रही है। आग की चपेट में आने से लाखों हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है, जबकि हजारों लोगों को एहतियातन अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

दमकल विभाग, आपदा राहत एजेंसियां और सुरक्षा बल दिन-रात आग पर काबू पाने में जुटे हैं। कई इलाकों में तेज हवाओं और अत्यधिक तापमान के कारण आग तेजी से फैल रही है, जिससे राहत एवं बचाव कार्यों में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

जंगल की आग का असर केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय आबादी, वन्यजीव, कृषि और पर्यटन क्षेत्र भी गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं। कई प्रमुख सड़क मार्ग बंद कर दिए गए हैं और प्रभावित क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाएं लगातार सक्रिय हैं।

संयुक्त राष्ट्र और जलवायु विशेषज्ञों ने इस घटना को जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों का गंभीर संकेत बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तापमान, लंबे समय तक पड़ने वाला सूखा और चरम मौसम की घटनाएं भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता को और बढ़ा सकती हैं।

प्रशासन ने लोगों से प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत एजेंसियों से संपर्क करने की अपील की है।

असम में बाढ़ का कहर जारी: 4.45 लाख से अधिक लोग प्रभावित, राहत-बचाव अभियान तेज

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गुवाहाटी- असम में लगातार हो रही भारी बारिश और नदियों के उफान के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 4.45 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

बाढ़ के चलते हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियां प्रभावित लोगों तक भोजन, पेयजल, दवाइयां और आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाने में जुटी हैं। केंद्र और राज्य सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और राहत कार्यों में समन्वय के साथ तेजी लाई जा रही है।

इस बीच, असम में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है। हालांकि कई क्षेत्रों में जलस्तर घटने के साथ हालात में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है और अपर असम में सड़क एवं संचार संपर्क पूरी तरह बहाल कर दिया गया है। इसके बावजूद कई निचले इलाकों में अब भी पानी भरा हुआ है और राहत कार्य जारी हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि असम में हर वर्ष आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए दीर्घकालिक समाधान, बेहतर जल प्रबंधन और बाढ़-रोधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना आवश्यक है। फिलहाल प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। 

साइक्लोन डिटवॉह: श्रीलंका में 123 मौतें, भारत सतर्क

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श्रीलंका में साइक्लोन डिटवॉह की वजह से अब तक 123 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 130 लोग लापता हैं। तेज़ हवाओं और भारी बारिश से कई घर और सड़कें तबाह हो गई हैं।


साइक्लोन अब भारत की ओर बढ़ रहा है, जिससे तमिलनाडु, पुदुचेरी, केरल और आंध्र प्रदेश में चेतावनी जारी की गई है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।

भारत सरकार ने राहत और बचाव कार्य "ऑपरेशन सागर बंधु" के तहत शुरू कर दिया है। भारतीय वायु सेना ने श्रीलंका में फंसे लोगों तक राहत सामग्री और बचाव दल भेजे हैं।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 24–48 घंटों में भारी बारिश और तेज़ हवाओं के साथ साइक्लोन तटीय इलाकों में दस्तक दे सकता है। नागरिकों से सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा न करने का आग्रह किया गया है।


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