Media24Media.com: ब्रिक्स ICT ट्रैक में भारत ने रखा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विजन, ग्लोबल साउथ के लिए मजबूत डिजिटल साझेदारी का आह्वान

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

ब्रिक्स ICT ट्रैक में भारत ने रखा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विजन, ग्लोबल साउथ के लिए मजबूत डिजिटल साझेदारी का आह्वान

Document Thumbnail

पुणे- संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने पुणे में आयोजित BRICS ICT Track Thematic Panel Discussion में मुख्य वक्तव्य देते हुए भारत के खुले, समावेशी और मजबूत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (Digital Public Infrastructure—DPI) की वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डाला।

“Sustainable and Resilient Digital and ICT Ecosystems: Digital Public Infrastructure for Impact – Global South Insights on Powering Public Services and Economic Growth” विषय पर आयोजित इस चर्चा में BRICS देशों के मंत्री, नीति-निर्माता, शिक्षाविद और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए।

भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बना नई विकास व्यवस्था का आधार

डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि पारंपरिक रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर का अर्थ सड़क, बंदरगाह और बिजली जैसी भौतिक संपत्तियों से लगाया जाता था, लेकिन भारत ने पहचान, बैंकिंग, भुगतान, सत्यापन योग्य दस्तावेज और सहमति आधारित डेटा जैसे डिजिटल माध्यमों पर आधारित एक आधुनिक डिजिटल व्यवस्था विकसित की है।

उन्होंने कहा कि भारत की असली उपलब्धि एक ऐसे खुले और इंटरऑपरेबल सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का निर्माण है, जिस पर बैंक, फिनटेक कंपनियां और सरकारी विभाग विभिन्न सेवाएं विकसित कर सकते हैं।

UPI ने डिजिटल भुगतान को बनाया आसान

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रमुख स्तंभों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने UPI की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि UPI से 720 बैंक जुड़े हुए हैं और यह भारत के लगभग 85 प्रतिशत डिजिटल लेनदेन को प्रोसेस करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक रियल-टाइम भुगतान में भारत की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत है और UPI अब 9 साझेदार देशों तक पहुंच चुका है।

DBT और DigiLocker से पारदर्शिता को बढ़ावा

डॉ. पेम्मासानी ने Direct Benefit Transfer (DBT) की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। DBT पोर्टल के माध्यम से 56 मंत्रालयों की 318 योजनाओं को जोड़ा गया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम करने और लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने में मदद मिली है।

वहीं, DigiLocker के 70 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं और इसके माध्यम से करीब 9 अरब सत्यापन योग्य डिजिटल दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं।

उन्होंने ONDC, Government e-Marketplace (GeM) और Account Aggregator जैसी पहलों को भी डिजिटल बाजार और डेटा से जुड़ी नागरिकों की स्वायत्तता को बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

99 प्रतिशत गांवों तक 4G कवरेज

भारत के दूरसंचार क्षेत्र में हो रहे विस्तार पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश के लगभग 99 प्रतिशत गांवों में 4G मोबाइल कवरेज पहुंच चुका है। इसके लिए करीब 4 अरब डॉलर के सैचुरेशन अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।

भारत में 5G नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार हुआ है और 5 लाख से अधिक 5G बेस स्टेशन तैनात किए जा चुके हैं। वहीं, BharatNet मिशन के तहत प्रमुख गांवों तक हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर पहुंचाने का काम जारी है।

हरित ऊर्जा पर भी जोर

डिजिटल और दूरसंचार विस्तार के साथ पर्यावरणीय स्थिरता पर भी जोर देते हुए डॉ. पेम्मासानी ने बताया कि मोबाइल टावरों में वर्तमान में 12.4 प्रतिशत हरित ऊर्जा का उपयोग हो रहा है। वर्ष 2030 तक दूरसंचार बुनियादी ढांचे में 30 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा गया है।

ग्लोबल साउथ के लिए DPI जरूरी

अपने संबोधन के समापन में डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि Digital Public Infrastructure केवल विकसित देशों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के सतत विकास की आवश्यकता है।

उन्होंने BRICS देशों के बीच मजबूत डिजिटल सहयोग का आह्वान करते हुए मॉड्यूलर और ओपन-सोर्स तकनीकी ढांचे को साझा करने पर जोर दिया, ताकि महंगे लाइसेंसिंग खर्च को कम किया जा सके। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ICT मानक निर्धारण संस्थाओं में ग्लोबल साउथ की उचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त क्षमता निर्माण की आवश्यकता बताई।

इस thematic panel में ब्राजील के संचार मंत्री फ्रेडेरिको डी सिकीरा फिल्हो और दक्षिण अफ्रीका के संचार एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी उपमंत्री मोंडली गंगुबेले सहित BRICS देशों के अन्य प्रतिनिधि और वैश्विक तकनीकी क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञ भी शामिल हुए।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.