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ब्रिक्स ICT ट्रैक में भारत ने रखा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विजन, ग्लोबल साउथ के लिए मजबूत डिजिटल साझेदारी का आह्वान

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पुणे- संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने पुणे में आयोजित BRICS ICT Track Thematic Panel Discussion में मुख्य वक्तव्य देते हुए भारत के खुले, समावेशी और मजबूत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (Digital Public Infrastructure—DPI) की वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डाला।

“Sustainable and Resilient Digital and ICT Ecosystems: Digital Public Infrastructure for Impact – Global South Insights on Powering Public Services and Economic Growth” विषय पर आयोजित इस चर्चा में BRICS देशों के मंत्री, नीति-निर्माता, शिक्षाविद और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए।

भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बना नई विकास व्यवस्था का आधार

डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि पारंपरिक रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर का अर्थ सड़क, बंदरगाह और बिजली जैसी भौतिक संपत्तियों से लगाया जाता था, लेकिन भारत ने पहचान, बैंकिंग, भुगतान, सत्यापन योग्य दस्तावेज और सहमति आधारित डेटा जैसे डिजिटल माध्यमों पर आधारित एक आधुनिक डिजिटल व्यवस्था विकसित की है।

उन्होंने कहा कि भारत की असली उपलब्धि एक ऐसे खुले और इंटरऑपरेबल सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का निर्माण है, जिस पर बैंक, फिनटेक कंपनियां और सरकारी विभाग विभिन्न सेवाएं विकसित कर सकते हैं।

UPI ने डिजिटल भुगतान को बनाया आसान

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रमुख स्तंभों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने UPI की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि UPI से 720 बैंक जुड़े हुए हैं और यह भारत के लगभग 85 प्रतिशत डिजिटल लेनदेन को प्रोसेस करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक रियल-टाइम भुगतान में भारत की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत है और UPI अब 9 साझेदार देशों तक पहुंच चुका है।

DBT और DigiLocker से पारदर्शिता को बढ़ावा

डॉ. पेम्मासानी ने Direct Benefit Transfer (DBT) की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। DBT पोर्टल के माध्यम से 56 मंत्रालयों की 318 योजनाओं को जोड़ा गया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम करने और लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने में मदद मिली है।

वहीं, DigiLocker के 70 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं और इसके माध्यम से करीब 9 अरब सत्यापन योग्य डिजिटल दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं।

उन्होंने ONDC, Government e-Marketplace (GeM) और Account Aggregator जैसी पहलों को भी डिजिटल बाजार और डेटा से जुड़ी नागरिकों की स्वायत्तता को बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

99 प्रतिशत गांवों तक 4G कवरेज

भारत के दूरसंचार क्षेत्र में हो रहे विस्तार पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश के लगभग 99 प्रतिशत गांवों में 4G मोबाइल कवरेज पहुंच चुका है। इसके लिए करीब 4 अरब डॉलर के सैचुरेशन अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।

भारत में 5G नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार हुआ है और 5 लाख से अधिक 5G बेस स्टेशन तैनात किए जा चुके हैं। वहीं, BharatNet मिशन के तहत प्रमुख गांवों तक हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर पहुंचाने का काम जारी है।

हरित ऊर्जा पर भी जोर

डिजिटल और दूरसंचार विस्तार के साथ पर्यावरणीय स्थिरता पर भी जोर देते हुए डॉ. पेम्मासानी ने बताया कि मोबाइल टावरों में वर्तमान में 12.4 प्रतिशत हरित ऊर्जा का उपयोग हो रहा है। वर्ष 2030 तक दूरसंचार बुनियादी ढांचे में 30 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा गया है।

ग्लोबल साउथ के लिए DPI जरूरी

अपने संबोधन के समापन में डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि Digital Public Infrastructure केवल विकसित देशों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के सतत विकास की आवश्यकता है।

उन्होंने BRICS देशों के बीच मजबूत डिजिटल सहयोग का आह्वान करते हुए मॉड्यूलर और ओपन-सोर्स तकनीकी ढांचे को साझा करने पर जोर दिया, ताकि महंगे लाइसेंसिंग खर्च को कम किया जा सके। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ICT मानक निर्धारण संस्थाओं में ग्लोबल साउथ की उचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त क्षमता निर्माण की आवश्यकता बताई।

इस thematic panel में ब्राजील के संचार मंत्री फ्रेडेरिको डी सिकीरा फिल्हो और दक्षिण अफ्रीका के संचार एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी उपमंत्री मोंडली गंगुबेले सहित BRICS देशों के अन्य प्रतिनिधि और वैश्विक तकनीकी क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञ भी शामिल हुए।

UPI को लेकर बड़ा अपडेट: ग्राहकों के लिए भुगतान रहेगा मुफ्त, व्यापारियों पर लग सकता है मामूली शुल्क

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भारत में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। UPI के जरिए भुगतान करने वाले आम ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, यानी नागरिकों के लिए UPI पेमेंट पहले की तरह मुफ्त रहने की संभावना है। वहीं, कुछ मामलों में व्यापारियों से मामूली शुल्क लिए जाने पर चर्चा चल रही है।

UPI देश में डिजिटल लेनदेन का सबसे लोकप्रिय माध्यम बन चुका है और करोड़ों लोग रोजमर्रा के भुगतान के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में ग्राहकों पर किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाने से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

व्यापारियों से संभावित शुल्क को लेकर अंतिम व्यवस्था और नियमों का स्पष्ट होना अभी बाकी है।

DPIIT और KRAFTON के बीच समझौता: स्टार्टअप और इनोवेशन को मिलेगा नया बढ़ावा

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भारत के स्टार्टअप और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने देशभर के स्टार्टअप्स, नवोन्मेषकों और उद्यमियों को समर्थन देने के लिए एक डिजिटल एंटरटेनमेंट कंपनी के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस सहयोग का उद्देश्य डिजिटल एंटरटेनमेंट, ऑनलाइन गेमिंग, ई-स्पोर्ट्स, इंटरएक्टिव मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों जैसे क्षेत्रों में कार्य कर रहे प्रोडक्ट स्टार्टअप्स के विकास को बढ़ावा देना है। इसके तहत स्टार्टअप्स को संरचित उद्योग सहभागिता के माध्यम से स्केलेबल और उद्योग-उन्मुख समाधान विकसित करने में सहायता मिलेगी।

इस पहल के तहत स्टार्टअप्स को मेंटरशिप, उद्योग संबंधी जानकारी, नॉलेज एक्सचेंज प्लेटफॉर्म और विशेष सहभागिता के अवसर प्रदान किए जाएंगे। साथ ही, उन्हें प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट (PoC) विकास, बाजार तक पहुंच और उद्योग तंत्र में एकीकरण जैसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों को हासिल करने में भी सहयोग मिलेगा।

इस अवसर पर DPIIT के संयुक्त सचिव संजीव ने कहा कि यह सहयोग भारत की डिजिटल और क्रिएटिव अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक अहम कदम है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार की साझेदारियां स्टार्टअप्स को नवाचार, विस्तार और उभरती प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समाधान विकसित करने में सक्षम बनाती हैं।

इस सहयोग के अंतर्गत DPIIT, KRAFTON इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ मिलकर भारत स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज के तहत नवाचार प्रतियोगिताएं आयोजित करने, साथ ही गेम डिजाइन, एनीमेशन, इमर्सिव टेक्नोलॉजी, ई-स्पोर्ट्स प्रबंधन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में हैकाथॉन, वर्कशॉप और मास्टरक्लास आयोजित करने की संभावनाओं पर कार्य करेगा।

यह साझेदारी उद्योग से जुड़ाव, ज्ञान साझा करने और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुभव का अवसर भी प्रदान करेगी। चयनित स्टार्टअप्स को पायलट प्रोजेक्ट्स में भागीदारी और परिणामों के आधार पर आगे सहयोग के अवसर मिल सकते हैं।

इसके अलावा, यह पहल स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रमों में भागीदारी और आउटरीच गतिविधियों के माध्यम से स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने में भी मदद करेगी।

यह समझौता DPIIT के उप सचिव टी. एल. के. सिंह और KRAFTON इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के गवर्नमेंट रिलेशंस प्रमुख विभोर कुकरेती द्वारा दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया।

डिजिटल इंडिया: भारत की डिजिटल क्रांति

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परिचय

भारत का डिजिटल परिवर्तन दुनिया के सबसे बड़े जनसंख्या स्तर पर कनेक्टिविटी और तकनीक आधारित सार्वजनिक सेवा वितरण के विस्तारों में से एक है। यह परिवर्तन डिजिटल इंडिया कार्यक्रम पर आधारित है, जिसे 2015 में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य हर नागरिक के लिए डिजिटल अवसंरचना को एक बुनियादी सुविधा बनाना, डिजिटल विभाजन को कम करना, मांग पर शासन और सेवाएँ प्रदान करना और डिजिटल माध्यम से लोगों को सशक्त बनाना है।

एक दशक पहले भारत में डिजिटल विभाजन काफी स्पष्ट था। तेज़ इंटरनेट मुख्यतः शहरों तक सीमित था, ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी कम थी और ऑनलाइन सेवाओं तक पहुँच स्थान, आय और डिजिटल साक्षरता पर निर्भर करती थी। समय के साथ सरकार के निवेश से ब्रॉडबैंड नेटवर्क और ऑप्टिकल फाइबर अवसंरचना का तेजी से विस्तार हुआ, जिससे गाँवों और दूरदराज़ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर हुई।

आज यह डिजिटल अंतर तेजी से कम हो रहा है। सस्ता इंटरनेट, डिजिटल सेवा केंद्र और इंटरऑपरेबल डिजिटल प्लेटफॉर्म नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, डिजिटल भुगतान करने, ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त करने और शासन में भाग लेने में सक्षम बना रहे हैं।

भारत का डिजिटल अवसंरचना निर्माण

भारत का डिजिटल ढांचा तीन प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:

  1. सार्वभौमिक कनेक्टिविटी अवसंरचना

  2. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)

  3. कम्प्यूटिंग क्षमता

ये तीनों मिलकर डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी को संभव बनाते हैं।

सार्वभौमिक डिजिटल कनेक्टिविटी और सस्ती इंटरनेट सुविधा

भारत की डिजिटल क्रांति का आधार तेज़ और सस्ती इंटरनेट सुविधा है।

भारतनेट

BharatNet परियोजना के तहत ग्रामीण भारत में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुँचाया जा रहा है।

  • 2026 तक 2.15 लाख से अधिक ग्राम पंचायतें जुड़ चुकी हैं।

  • ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क 2019 में 19.35 लाख रूट किमी से बढ़कर 2025 में 42.36 लाख रूट किमी हो गया।

5G विस्तार

भारत का तेज़ 5G नेटवर्क अब 99.9% जिलों तक पहुँच चुका है और 5.18 लाख बेस ट्रांसीवर स्टेशन स्थापित किए गए हैं।

सस्ता डेटा

डेटा की कीमतों में भारी कमी आई है:

  • 2014: लगभग ₹269 प्रति GB

  • 2025–26: लगभग ₹8–10 प्रति GB

इसके परिणामस्वरूप ब्रॉडबैंड ग्राहकों की संख्या 100 करोड़ से अधिक हो गई है।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर इंटरनेट को वास्तविक सेवाओं में बदलता है।

आधार

Aadhaar के तहत 143 करोड़ से अधिक डिजिटल पहचान जारी की गई हैं, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुँचता है।

यूपीआई

Unified Payments Interface के माध्यम से जनवरी 2026 में लगभग 21.7 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल राशि लगभग ₹28.33 लाख करोड़ रही।

डिजीलॉकर

DigiLocker के 62 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं, जहाँ नागरिक अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित रख सकते हैं।

उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग और क्लाउड

National Supercomputing Mission के तहत भारत में 38 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए गए हैं जिनकी कुल क्षमता 44 पेटाफ्लॉप्स है।

इसके अलावा MeghRaj सरकारी क्लाउड प्लेटफॉर्म पर 2170 से अधिक मंत्रालय और विभाग अपने एप्लिकेशन चला रहे हैं।

भारत का डेटा सेंटर क्षमता लगभग 1280 मेगावाट है, जिसे 2030 तक 4–5 गुना बढ़ाने की योजना है।

समावेशी डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र

डिजिटल परिवर्तन का लक्ष्य केवल इंटरनेट देना नहीं है, बल्कि हर नागरिक को डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी का अवसर देना है।

डिजिटल साक्षरता

Pradhan Mantri Gramin Digital Saksharta Abhiyan के तहत 6.39 करोड़ ग्रामीण लोगों को डिजिटल प्रशिक्षण दिया गया।

डिजिटल शिक्षा

दीक्षा

DIKSHA प्लेटफॉर्म पर:

  • 19,000 से अधिक कोर्स

  • 18 करोड़ से अधिक नामांकन

स्वयं

SWAYAM प्लेटफॉर्म पर:

  • 18,500 से अधिक कोर्स

  • 6 करोड़ से अधिक नामांकन

इंस्पायर-मानक

INSPIRE‑MANAK कार्यक्रम के तहत हर साल 1 लाख छात्र नवाचार विचार चुने जाते हैं।

कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)

Common Service Centres ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाएँ पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

  • 6.5 लाख से अधिक VLE (Village Level Entrepreneurs) कार्यरत हैं।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था का डिजिटलीकरण

  • e‑NAM के तहत 1.79 करोड़ किसान और 1522 मंडियाँ जुड़ी हैं।

  • MGNREGA के तहत 99% मजदूरी भुगतान डिजिटल हो चुका है।

PM-WANI

PM‑WANI योजना के तहत फरवरी 2026 तक:

  • 4,09,111 सार्वजनिक Wi-Fi हॉटस्पॉट लगाए गए हैं।

भविष्य के लिए डिजिटल कौशल

अटल इनोवेशन मिशन

Atal Innovation Mission के तहत:

  • 10,000 से अधिक अटल टिंकरिंग लैब

  • 1.1 करोड़ छात्र जुड़ चुके हैं।

इंडिया AI मिशन

IndiaAI Mission के तहत:

  • 38,000 GPU स्थापित

  • 9,500 से अधिक AI डेटासेट उपलब्ध

स्टार्टअप इंडिया

Startup India के तहत:

  • 2016 में 400 स्टार्टअप से बढ़कर 2025 में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप

  • 21 लाख नौकरियाँ सृजित

निष्कर्ष

पिछले एक दशक में भारत का डिजिटल परिवर्तन तकनीक, शासन, शिक्षा और आर्थिक अवसरों तक पहुँच को पूरी तरह बदल चुका है। डिजिटल कनेक्टिविटी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत कंप्यूटिंग के माध्यम से शहरों, गाँवों और दूरदराज़ क्षेत्रों के नागरिक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी कर पा रहे हैं।

डिजिटल साक्षरता, नवाचार, स्टार्टअप और युवाओं पर केंद्रित पहलें यह सुनिश्चित कर रही हैं कि डिजिटल विकास समावेशी, समान और सतत हो। यह मॉडल भारत को एक डिजिटल रूप से सशक्त और समावेशी राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।


नई दिल्ली में ग्लोबल फोरम ऑन टैक्स ट्रांसपेरेंसी की 18वीं प्लेनरी बैठक का उद्घाटन: भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और पारदर्शिता पर जोर दिया

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केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमन ने आज नई दिल्ली में ग्लोबल फोरम ऑन ट्रांसपेरेंसी और एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन फॉर टैक्स पर्पजेस की 18वीं प्लेनरी बैठक का उद्घाटन किया।

बैठक का विषय:

“Tax Transparency: Delivering a Shared Vision Through International Cooperation”

इस फोरम में 172 सदस्य क्षेत्र शामिल हैं और यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के कार्यान्वयन के लिए विश्व का प्रमुख संगठन है, जिसमें एक्सचेंज ऑफ इंफॉर्मेशन ऑन रिक्वेस्ट (EOIR) और ऑटोमेटिक एक्सचेंज ऑफ फाइनेंशियल अकाउंट इंफॉर्मेशन (AEOI) शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर टैक्स चोरी और अवैध वित्तीय प्रवाह को रोकना है।


मुख्य बिंदु:

  •  मंत्री सीतारमन ने कहा कि पारदर्शिता केवल अनुपालन का उपकरण नहीं है, बल्कि यह सतत विकास का आधार है। जब राष्ट्रीय धन वैध कराधान से बचता है, तो यह राजस्व और विकास दोनों में अंतर पैदा करता है।

  • उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत में स्वैच्छिक अनुपालन को स्पष्टता, सरलीकरण और विश्वास निर्माण के माध्यम से बढ़ाया गया है।

  • पंकज चौधरी ने कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानकारी प्राप्त करना आसान और व्यावहारिक हो गया है, जिससे करदाता का विश्वास बढ़ा है।

  • अरविंद श्रीवास्तव ने फोरम को बहुपक्षीय सहयोग का सफल उदाहरण बताया और डिजिटल अर्थव्यवस्था में कराधान और क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क को आगामी प्राथमिकताओं में रखा।

प्लेनरी बैठक का महत्व:

यह बैठक ग्लोबल फोरम की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है। इसमें सभी सदस्य क्षेत्र समान स्तर पर भाग लेते हैं और निर्णय आमतौर पर सहमति से लिए जाते हैं। बैठक में EOIR और AEOI मानकों के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा की जाती है और भविष्य की प्राथमिकताओं को निर्धारित किया जाता है।

भारत की भूमिका:

  • भारत 2009 से संस्थापक सदस्य है और ग्लोबल फोरम में सक्रिय नेतृत्व निभा रहा है।

  • भारत वर्तमान में स्टियरिंग ग्रुप, EOIR और AEOI पियर रिव्यू ग्रुप्स, ग्रुप ऑन रिस्क और CARF ग्रुप में प्रमुख पदों पर है।

  • भारत ने 2023–24 में एशिया इनिशिएटिव की सह-अध्यक्षता की और विकासशील देशों के लिए क्षमता निर्माण में योगदान दिया।

इस बैठक में भारत अंतरराष्ट्रीय कर पारदर्शिता और सहयोग के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दोहराएगा और सभी देशों को समान लाभ सुनिश्चित करने पर ध्यान देगा।

मोस्‍पी ने जारी किया राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (NIC) 2025: डिजिटल और ग्रीन इकोनॉमी को मिला व्यापक स्थान

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सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने राष्ट्रीय औद्योगिक वर्गीकरण (NIC) 2025 का विमोचन राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण (NSS) की 75वीं वर्षगांठ तथा विश्व सांख्यिकी दिवस 2025 के ‘कुलमिनेशन समारोह’ के दौरान 18 नवंबर 2025, उदयपुर में किया।

NIC एक बुनियादी उपकरण है जिसका उपयोग सांख्यिकीय सर्वेक्षणों, जनगणनाओं, आर्थिक अनुसंधान और नीतिगत निर्माण में किया जाता है। भारत में यह वर्गीकरण प्रणाली पहली बार 1962 में शुरू की गई थी और बदलते आर्थिक परिदृश्य तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप इसे समय-समय पर संशोधित किया गया—जैसे NIC 1970, 1987, 1990, 1998, 2004 और 2008। NIC 2025 भारत में आर्थिक गतिविधियों के वर्गीकरण का नवीनतम अद्यतन मानक है।

अद्यतन वर्गीकरण भारतीय अर्थव्यवस्था के तेज़ी से हो रहे परिवर्तन को समाहित करता है, जो तकनीकी प्रगति, नवाचार और नए क्षेत्रों के उभरने से प्रेरित है। इस संशोधन में नवीकरणीय ऊर्जा, फिनटेक, ई-कॉमर्स, डिजिटल इंटरमीडिएशन जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों को प्रमुखता दी गई है। साथ ही आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाएँ और हैंडलूम उद्योग जैसे महत्वपूर्ण स्वदेशी क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।

NIC 2025 को अंतरराष्ट्रीय मानक ISIC Rev.5 (UNSD द्वारा विकसित) के अनुरूप तैयार किया गया है। यह संशोधन आर्थिक वर्गीकरण संशोधन हेतु गठित विशेषज्ञ समिति (ECREC) के मार्गदर्शन में किया गया, जिसमें विषय विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा मंत्रालयों, विभागों, राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ व्यापक परामर्श भी किया गया।

NIC 2025 में पहली बार 6-अंकीय कोडिंग संरचना अपनाई गई है, जो NIC 2008 की 5-अंकीय संरचना से अधिक विस्तृत और लचीली है। इससे नई उभरती गतिविधियों को बेहतर ढंग से दर्शाना संभव होगा।

NIC 2008 बनाम NIC 2025 – संरचना तुलना

संरचना                         NIC 2008    NIC 2025
सेक्शन (Alphabetic) 21 (A–U)     22 (A–V)
डिवीजन (2-digit) 88        87
ग्रुप (3-digit) 238       257
क्लास (4-digit) 403       463
सब-क्लास 1304      1887

NIC 2025 की प्रमुख विशेषताएँ

1. इंटरमीडिएशन सेवाओं का विस्तृत वर्गीकरण

शक्ति, रिटेल, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य, शिक्षा, रियल एस्टेट और खाद्य सेवाओं जैसे क्षेत्रों में इंटरमीडिएशन सेवाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाने के लिए नए वर्ग बनाए गए हैं।

2. पर्यावरण एवं हरित अर्थव्यवस्था का समावेश

कार्बन कैप्चर, अपशिष्ट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और सुधार संबंधी गतिविधियों का विस्तृत कवरेज दिया गया है, ताकि SDGs और SEEA फ्रेमवर्क के साथ बेहतर तालमेल बने।

3. डिजिटल अर्थव्यवस्था का स्पष्ट प्रतिनिधित्व

क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, ब्लॉकचेन, प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं, वेब सर्च पोर्टलों आदि को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।

4. तकनीकी-पद्धति से स्वतंत्र वर्गीकरण

किसी भी गतिविधि को इस आधार पर विभाजित नहीं किया गया कि वह पारंपरिक तरीकों से की जा रही है या आधुनिक तकनीकों से।

NIC 2025 सांख्यिकीय सर्वेक्षणों, प्रशासनिक डेटा सेट, राष्ट्रीय खातों और अन्य आधिकारिक सांख्यिकी के लिए एक मानक ढांचा बनेगा। यह आर्थिक क्षेत्रों में संकेतकों के सुसंगत संकलन, विश्लेषण और नीति निर्माण को अधिक सटीक और उपयोगी बनाएगा।


नीति आयोग ने भारत के सेवा क्षेत्र पर प्रारंभिक रिपोर्टें जारी कीं — क्षेत्रीय संतुलन, रोजगार प्रवृत्तियों और विकसित भारत @2047 के लिए रोडमैप पर केंद्रित

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नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम ने आज सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी और भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंथा नागेश्वरन की उपस्थिति में सेवाएं विषयक श्रृंखला (Services Thematic Series) के तहत दो प्रारंभिक रिपोर्टें जारी कीं। इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग संघों के प्रतिनिधि तथा शिक्षाविद उपस्थित थे। ये रिपोर्टें सेवाक्षेत्र का व्यापक मूल्यांकन प्रस्तुत करती हैं — उत्पादन और रोजगार के परिप्रेक्ष्य से — जो समग्र प्रवृत्तियों से आगे बढ़कर राज्य-स्तरीय विश्लेषण भी प्रदान करती हैं।

पहली रिपोर्ट, “भारत का सेवाक्षेत्र: सकल मूल्य वर्धन प्रवृत्तियों और राज्य-स्तरीय गतिशीलता से अंतर्दृष्टि”, राष्ट्रीय और राज्य-स्तर की प्रवृत्तियों का अध्ययन करती है ताकि यह समझा जा सके कि सेवाक्षेत्र-आधारित विकास विभिन्न क्षेत्रों में कैसे आगे बढ़ रहा है और क्या अपेक्षाकृत पिछड़े राज्य अग्रणी राज्यों की बराबरी कर रहे हैं — जो संतुलित क्षेत्रीय विकास का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

सेवाक्षेत्र अब भारत की आर्थिक वृद्धि का आधार बन गया है, जिसने वित्त वर्ष 2024–25 में राष्ट्रीय सकल मूल्य वर्धन (GVA) में लगभग 55 प्रतिशत योगदान दिया। रिपोर्ट के अनुसार, सेवाक्षेत्र आधारित विकास अब अधिक क्षेत्रीय रूप से संतुलित हो रहा है। यद्यपि राज्यों के बीच सेवाक्षेत्र के हिस्से में असमानता में थोड़ी वृद्धि हुई है, फिर भी प्रमाण मिलते हैं कि संरचनात्मक रूप से पिछड़े राज्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यह प्रवृत्ति इंगित करती है कि भारत का सेवाक्षेत्र रूपांतरण अब व्यापक और समावेशी होता जा रहा है।

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि क्षेत्रीय स्तर पर डिजिटल अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स, नवाचार, वित्त और कौशल विकास को प्राथमिकता दी जाए, ताकि विविधीकरण और प्रतिस्पर्धात्मकता को गति दी जा सके। राज्य स्तर पर, रिपोर्ट स्थानीय क्षमताओं पर आधारित सेवाक्षेत्र रणनीतियाँ विकसित करने, संस्थागत क्षमता बढ़ाने, उद्योग-सेवा एकीकरण को प्रोत्साहित करने तथा शहरी और क्षेत्रीय सेवा क्लस्टरों को सशक्त बनाने की सिफारिश करती है।

दूसरी रिपोर्ट, “भारत का सेवाक्षेत्र: रोजगार प्रवृत्तियों और राज्य-स्तरीय गतिशीलता से अंतर्दृष्टि”, सेवाक्षेत्र के रोजगार पैटर्न का विश्लेषण करती है। इसमें उप-क्षेत्र, लिंग, क्षेत्र, शिक्षा और व्यवसाय के आधार पर भारत के सेवा कार्यबल की बहुआयामी तस्वीर प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट बताती है कि सेवाक्षेत्र में एक द्वैत संरचना दिखाई देती है — आधुनिक, उच्च उत्पादकता वाले क्षेत्र जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हैं परंतु रोजगार की दृष्टि से सीमित हैं, और पारंपरिक क्षेत्र जो अधिक श्रमिकों को समाहित करते हैं किंतु अधिकतर अनौपचारिक और कम वेतन वाले हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यद्यपि सेवाक्षेत्र भारत की रोजगार वृद्धि और महामारी के बाद पुनर्प्राप्ति का मुख्य आधार बना हुआ है, फिर भी कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। रोजगार सृजन सभी उप-क्षेत्रों में समान नहीं है, अनौपचारिकता व्यापक है, और रोजगार की गुणवत्ता उत्पादन वृद्धि के अनुरूप नहीं है। लैंगिक असमानता, ग्रामीण-शहरी अंतर और क्षेत्रीय विषमताएँ यह दर्शाती हैं कि रोजगार नीति में औपचारिकता, समावेशन और उत्पादकता वृद्धि को केंद्र में रखना आवश्यक है।

इन चुनौतियों से निपटने के लिए रिपोर्ट चार-स्तरीय नीति मार्गदर्शिका सुझाती है —

  1. गिग, स्वरोजगार और एमएसएमई श्रमिकों के लिए औपचारिकता और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा देना,

  2. महिलाओं और ग्रामीण युवाओं के लिए लक्षित कौशल प्रशिक्षण और डिजिटल पहुँच का विस्तार,

  3. उभरते और हरित अर्थव्यवस्था क्षेत्रों में कौशल निवेश, और

  4. टियर-2 और टियर-3 शहरों में सेवा हब विकसित कर संतुलित क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करना।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सेवाक्षेत्र न केवल उत्पादन और आय का स्रोत है, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले, समावेशी और उत्पादक रोजगार का प्रमुख चालक बन सकता है, जिससे विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने में सहायता मिलेगी।

ये दोनों रिपोर्टें राज्य सरकारों और उद्योग जगत के लिए एक रणनीतिक मार्गदर्शिका प्रस्तुत करती हैं — जो भारत के सेवाक्षेत्र को अगले चरण के विकास की ओर अग्रसर करने के लिए डिजिटल अवसंरचना, कौशल, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और सेवा मूल्य शृंखलाओं के एकीकरण पर बल देती हैं, जिससे भारत को वैश्विक सेवाक्षेत्र में एक विश्वसनीय अग्रणी के रूप में स्थापित किया जा सके।

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