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सात साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग, मोदी से मुलाकात पर दुनिया की नजर

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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली पहुंचेंगे चीन के राष्ट्रपति, भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत की उम्मीद

नई दिल्ली - चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत दौरे पर आ रहे हैं। वह 12–13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों से सीमा विवाद, सुरक्षा और व्यापार को लेकर तनाव बना रहा है।

मोदी-शी मुलाकात पर टिकी नजर

ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। दोनों नेताओं की बातचीत भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों नेताओं के बीच भारत में पहली औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत होगी।

इस बैठक में सीमा पर शांति, व्यापार, निवेश, तकनीक, सुरक्षा और दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठ सकते हैं।

सीमा विवाद अभी भी सबसे बड़ी चुनौती

भारत और चीन के रिश्तों में सुधार के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन सीमा विवाद अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में भारी तनाव पैदा हुआ था।

हाल के वर्षों में दोनों पक्षों ने सीमा पर तनाव कम करने और संवाद बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके बावजूद सीमा पर भरोसे की कमी और सुरक्षा संबंधी चिंताएं अभी भी भारत-चीन संबंधों के सामने बड़ी चुनौती हैं।

व्यापार और निवेश पर भी होगी चर्चा

भारत और चीन के बीच आर्थिक संबंध भी आसान नहीं रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार काफी बड़ा है, लेकिन भारत लंबे समय से व्यापार घाटे और चीनी कंपनियों से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर चिंता जताता रहा है।

शी जिनपिंग की यात्रा के दौरान दोनों देश व्यापार और निवेश को बढ़ाने के रास्तों पर चर्चा कर सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा, विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि, सुरक्षा और तकनीकी संवेदनशीलता को लेकर भारत का रुख सावधानी भरा रहने की संभावना है।

ब्रिक्स के मंच पर भारत-चीन संबंध

शी जिनपिंग की भारत यात्रा सिर्फ द्विपक्षीय रिश्तों तक सीमित नहीं है। भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन वैश्विक राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

मध्य पूर्व में जारी युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक व्यापार, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और विकासशील देशों की भूमिका जैसे मुद्दों पर ब्रिक्स देशों के बीच चर्चा होगी। ऐसे समय में भारत और चीन का साथ मिलकर काम करना संगठन की एकजुटता के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत के लिए क्या मायने रखती है यह यात्रा?

शी जिनपिंग की सात साल बाद भारत यात्रा को कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह चीन के साथ संवाद और आर्थिक सहयोग बढ़ाते हुए अपनी सीमा सुरक्षा और रणनीतिक हितों से कोई समझौता न करे।

वहीं, चीन के लिए भारत के साथ बेहतर संबंध क्षेत्रीय स्थिरता और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मोदी-शी बातचीत से कुछ क्षेत्रों में तनाव कम करने का रास्ता खुल सकता है, लेकिन वर्षों से चली आ रही अविश्वास की स्थिति को तुरंत खत्म करना आसान नहीं होगा।


BRICS SUMMIT 2026: दिल्ली में जुटेंगे दुनिया के बड़े नेता, ईरान युद्ध के बीच भारत के सामने बड़ी कूटनीतिक चुनौती

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नई दिल्ली- भारत में होने जा रहे BRICS शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजर है। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वां BRICS Summit आयोजित होगा। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और ऐसे समय में यह सम्मेलन हो रहा है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है।

इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन समेत कई देशों के नेता और प्रतिनिधि नई दिल्ली पहुंचेंगे। शी जिनपिंग की भारत यात्रा खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह करीब सात साल बाद उनका भारत दौरा होगा।

सबसे बड़ा मुद्दा होगा पश्चिम एशिया का संकट

इस बार BRICS Summit ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष का असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव तेल, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।

BRICS के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि संगठन के सदस्य देशों के बीच ही इस संकट को लेकर अलग-अलग हित हैं। ईरान BRICS का सदस्य है, जबकि UAE और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देश भी समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सभी देशों को एक साझा बयान पर सहमत कराना भारत के लिए आसान नहीं होगा।

भारत की कूटनीतिक परीक्षा

भारत की कोशिश होगी कि BRICS को किसी एक पक्ष के समर्थन में खड़ा करने के बजाय संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान का रास्ता आगे बढ़ाया जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। ईरान और रूस के नेताओं के साथ भारत की हालिया बातचीत में भी यही रुख सामने आया है।

शी जिनपिंग की भारत यात्रा पर भी नजर

BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

भारत और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ वर्षों में तनाव रहा है, लेकिन हाल के समय में दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ा है। ऐसे में BRICS Summit दोनों देशों को राजनयिक संबंधों को और बेहतर करने का अवसर दे सकता है।

हालांकि व्यापार और निवेश के मोर्चे पर अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। दोनों देशों के बीच सुरक्षा को लेकर अविश्वास पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

पुतिन के साथ भी अहम बातचीत

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी भी सम्मेलन को खास बनाती है।

भारत और रूस के बीच ऊर्जा, रक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच BRICS Summit के दौरान द्विपक्षीय बातचीत होने की उम्मीद है।

भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि रूस के साथ उसके संबंध व्यापक रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं और दोनों देश वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर लगातार बातचीत कर रहे हैं।

तेल और ऊर्जा सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का सीधा असर ऊर्जा बाजार पर दिखाई दे रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल की आपूर्ति और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ी है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए स्थिति और महत्वपूर्ण हो जाती है।

महंगा कच्चा तेल भारत के लिए कई तरह की मुश्किलें पैदा कर सकता है—

महंगा तेल → आयात बिल बढ़ेगा → रुपये पर दबाव → महंगाई बढ़ने का खतरा

इसी वजह से BRICS में ऊर्जा सुरक्षा और सुरक्षित समुद्री व्यापार पर चर्चा भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।

BRICS के एजेंडे में सिर्फ युद्ध नहीं

BRICS Summit में पश्चिम एशिया संकट के अलावा कई आर्थिक और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होगी।

मुख्य मुद्दों में शामिल हैं:

  • खाद्य सुरक्षा

  •  ऊर्जा सुरक्षा

  •  व्यापार और निवेश

  •  तकनीक और डिजिटल सहयोग

  •  टिकाऊ विकास

  •  स्वास्थ्य सहयोग

  •  सप्लाई चेन की मजबूती

  •  वैश्विक संस्थाओं में सुधार

  •  क्षेत्रीय और वैश्विक शांति

भारत ने अपनी BRICS अध्यक्षता का मुख्य विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा है। भारत की कोशिश BRICS सहयोग को केवल राजनीतिक चर्चाओं तक सीमित रखने के बजाय विकास और व्यावहारिक सहयोग से जोड़ने की है।

दिल्ली घोषणापत्र पर होगी नजर

दो दिवसीय सम्मेलन के अंत में New Delhi Declaration जारी करने की कोशिश होगी। लेकिन पश्चिम एशिया के मुद्दे पर BRICS देशों के अलग-अलग रुख के कारण संयुक्त घोषणा पर सहमति बनाना बड़ी चुनौती हो सकती है।

यही वजह है कि इस बार सवाल सिर्फ यह नहीं है कि BRICS देश क्या घोषणा करते हैं, बल्कि यह भी है कि क्या वे मौजूदा वैश्विक संकटों पर एक साझा आवाज बना पाते हैं?

दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

दुनिया के कई बड़े नेताओं के दिल्ली पहुंचने के मद्देनजर राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों के लिए अलग-अलग सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं और महत्वपूर्ण इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है।

भारत के लिए कितना बड़ा मौका?

BRICS Summit भारत के लिए अपनी कूटनीतिक ताकत और वैश्विक नेतृत्व दिखाने का बड़ा अवसर है।

एक तरफ भारत को रूस और चीन जैसे बड़े देशों के साथ संबंधों को संभालना है, दूसरी तरफ ईरान और खाड़ी देशों के बीच संतुलन बनाए रखना है। साथ ही अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी ध्यान में रखना है।

ऐसे में इस पूरे सम्मेलन में भारत की सबसे बड़ी चुनौती होगी—

“सभी पक्षों के साथ संबंध बनाए रखते हुए BRICS को एकजुट रखना।”

अगर भारत इस चुनौती को सफलतापूर्वक संभालता है और सदस्य देशों के बीच किसी साझा रुख पर सहमति बनती है, तो यह सम्मेलन भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत कर सकता है।


ब्रिक्स ICT ट्रैक में भारत ने रखा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विजन, ग्लोबल साउथ के लिए मजबूत डिजिटल साझेदारी का आह्वान

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पुणे- संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने पुणे में आयोजित BRICS ICT Track Thematic Panel Discussion में मुख्य वक्तव्य देते हुए भारत के खुले, समावेशी और मजबूत डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (Digital Public Infrastructure—DPI) की वैश्विक भूमिका पर प्रकाश डाला।

“Sustainable and Resilient Digital and ICT Ecosystems: Digital Public Infrastructure for Impact – Global South Insights on Powering Public Services and Economic Growth” विषय पर आयोजित इस चर्चा में BRICS देशों के मंत्री, नीति-निर्माता, शिक्षाविद और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हुए।

भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बना नई विकास व्यवस्था का आधार

डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि पारंपरिक रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर का अर्थ सड़क, बंदरगाह और बिजली जैसी भौतिक संपत्तियों से लगाया जाता था, लेकिन भारत ने पहचान, बैंकिंग, भुगतान, सत्यापन योग्य दस्तावेज और सहमति आधारित डेटा जैसे डिजिटल माध्यमों पर आधारित एक आधुनिक डिजिटल व्यवस्था विकसित की है।

उन्होंने कहा कि भारत की असली उपलब्धि एक ऐसे खुले और इंटरऑपरेबल सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का निर्माण है, जिस पर बैंक, फिनटेक कंपनियां और सरकारी विभाग विभिन्न सेवाएं विकसित कर सकते हैं।

UPI ने डिजिटल भुगतान को बनाया आसान

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रमुख स्तंभों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने UPI की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि UPI से 720 बैंक जुड़े हुए हैं और यह भारत के लगभग 85 प्रतिशत डिजिटल लेनदेन को प्रोसेस करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक रियल-टाइम भुगतान में भारत की हिस्सेदारी करीब 49 प्रतिशत है और UPI अब 9 साझेदार देशों तक पहुंच चुका है।

DBT और DigiLocker से पारदर्शिता को बढ़ावा

डॉ. पेम्मासानी ने Direct Benefit Transfer (DBT) की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। DBT पोर्टल के माध्यम से 56 मंत्रालयों की 318 योजनाओं को जोड़ा गया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम करने और लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने में मदद मिली है।

वहीं, DigiLocker के 70 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं और इसके माध्यम से करीब 9 अरब सत्यापन योग्य डिजिटल दस्तावेज जारी किए जा चुके हैं।

उन्होंने ONDC, Government e-Marketplace (GeM) और Account Aggregator जैसी पहलों को भी डिजिटल बाजार और डेटा से जुड़ी नागरिकों की स्वायत्तता को बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

99 प्रतिशत गांवों तक 4G कवरेज

भारत के दूरसंचार क्षेत्र में हो रहे विस्तार पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश के लगभग 99 प्रतिशत गांवों में 4G मोबाइल कवरेज पहुंच चुका है। इसके लिए करीब 4 अरब डॉलर के सैचुरेशन अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है।

भारत में 5G नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार हुआ है और 5 लाख से अधिक 5G बेस स्टेशन तैनात किए जा चुके हैं। वहीं, BharatNet मिशन के तहत प्रमुख गांवों तक हाई-स्पीड ऑप्टिकल फाइबर पहुंचाने का काम जारी है।

हरित ऊर्जा पर भी जोर

डिजिटल और दूरसंचार विस्तार के साथ पर्यावरणीय स्थिरता पर भी जोर देते हुए डॉ. पेम्मासानी ने बताया कि मोबाइल टावरों में वर्तमान में 12.4 प्रतिशत हरित ऊर्जा का उपयोग हो रहा है। वर्ष 2030 तक दूरसंचार बुनियादी ढांचे में 30 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग का राष्ट्रीय लक्ष्य रखा गया है।

ग्लोबल साउथ के लिए DPI जरूरी

अपने संबोधन के समापन में डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि Digital Public Infrastructure केवल विकसित देशों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ के सतत विकास की आवश्यकता है।

उन्होंने BRICS देशों के बीच मजबूत डिजिटल सहयोग का आह्वान करते हुए मॉड्यूलर और ओपन-सोर्स तकनीकी ढांचे को साझा करने पर जोर दिया, ताकि महंगे लाइसेंसिंग खर्च को कम किया जा सके। साथ ही उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ICT मानक निर्धारण संस्थाओं में ग्लोबल साउथ की उचित भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त क्षमता निर्माण की आवश्यकता बताई।

इस thematic panel में ब्राजील के संचार मंत्री फ्रेडेरिको डी सिकीरा फिल्हो और दक्षिण अफ्रीका के संचार एवं डिजिटल प्रौद्योगिकी उपमंत्री मोंडली गंगुबेले सहित BRICS देशों के अन्य प्रतिनिधि और वैश्विक तकनीकी क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञ भी शामिल हुए।

BRICS 2026: भारत की अध्यक्षता में पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में चार ज्ञान संकलनों का विमोचन

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भारत की BRICS 2026 अध्यक्षता के तहत आयोजित 12वीं BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने BRICS सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल प्रमुखों के साथ BRICS पर्यावरण कार्य समूह द्वारा तैयार चार ज्ञान-संकलनों (Knowledge Compendiums) का विमोचन किया। ये दस्तावेज BRICS सदस्य देशों की उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों, ज्ञान प्रणालियों और नवाचारों को दर्शाते हैं।

ये चारों संकलन BRICS पर्यावरण कार्य समूह में हुई रचनात्मक एवं सार्थक चर्चाओं का परिणाम हैं। इनमें BRICS सदस्य देशों के राष्ट्रीय अनुभवों, उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों, नवीन समाधानों और स्थानीय ज्ञान प्रणालियों को साझा किया गया है।

1. सतत जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अनुभवों, उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों और सफलता की कहानियों पर संकलन

भारत की BRICS 2026 अध्यक्षता के तहत पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा तैयार यह संकलन BRICS सदस्य देशों—ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और UAE—के उत्कृष्ट उदाहरणों का साझा ज्ञान भंडार है।

इसमें बताया गया है कि BRICS देश नीतिगत नवाचार, व्यवहार परिवर्तन, पर्यावरण शिक्षा, सामुदायिक भागीदारी, सतत उपभोग एवं उत्पादन, सर्कुलर इकोनॉमी, पारिस्थितिकी तंत्र बहाली, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और हरित विकास कार्यक्रमों के माध्यम से सतत जीवनशैली को व्यवहार में कैसे ला रहे हैं।

भारत के योगदान में मिशन LiFE, पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम और SAMBHAV अभियान शामिल हैं, जो नागरिकों के नेतृत्व वाली सतत जीवनशैली के लिए सरकार और समाज के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। यह संकलन नागरिक भागीदारी, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधान और डिजिटल एकीकरण पर जोर देते हुए पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए सहयोग, संयुक्त अनुसंधान और आपसी सीख का एक व्यावहारिक खाका प्रस्तुत करता है।

2. एकीकृत अग्नि प्रबंधन के लिए सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और नवोन्मेषी दृष्टिकोणों पर संकलन

दुनिया भर में बदलती जलवायु परिस्थितियां, लंबे समय तक सूखा और बढ़ता तापमान जंगलों में आग लगने की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ा रहे हैं। इससे पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता, आजीविका और समुदायों पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

इस साझा चुनौती को ध्यान में रखते हुए भारत ने अपनी BRICS 2026 अध्यक्षता के दौरान एकीकृत वनाग्नि प्रबंधन (Integrated Wildfire Management) को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रमुख विषय के रूप में आगे बढ़ाया।

इस पहल के तहत देशों ने सामुदायिक नेतृत्व वाली रोकथाम, स्वदेशी ज्ञान, प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों, प्रौद्योगिकी, तैयारी और समन्वित प्रतिक्रिया सहित विभिन्न अनुभवों और अभिनव समाधानों को साझा किया।

यह संकलन केवल विभिन्न देशों के अनुभवों का संग्रह नहीं है, बल्कि एक साझा दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है—रोकथाम से तैयारी तक, प्रारंभिक चेतावनी से प्रारंभिक कार्रवाई तक और प्रतिक्रिया से पुनर्बहाली तक आग का सामूहिक रूप से प्रबंधन करना आवश्यक है।

ज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्थानों और समुदायों को जोड़कर BRICS देश सामूहिक क्षमता को मजबूत कर सकते हैं, जंगलों और जैव विविधता की रक्षा कर सकते हैं, आजीविका को सुरक्षित रख सकते हैं और आग के प्रति अधिक सक्षम भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

3. एकीकृत लैंडस्केप-आधारित हरितीकरण दृष्टिकोण पर संकलन

यह संकलन BRICS सदस्य देशों के अनुभवों, अच्छी कार्यप्रणालियों और नीतिगत दृष्टिकोणों को एक साथ प्रस्तुत करता है, जो भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण, जैव विविधता हानि और जलवायु परिवर्तन जैसी आपस में जुड़ी चुनौतियों से निपटने पर केंद्रित हैं।

इसमें सदस्य देशों के सामूहिक योगदान को दर्शाते हुए ऐसे लैंडस्केप-आधारित उपायों को प्रमुखता दी गई है, जो पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली को जैव विविधता संरक्षण के साथ एकीकृत करते हैं।

संकलन में BRICS सहयोग को मजबूत करने के लिए ज्ञान एवं अनुभव साझा करने, क्षमता निर्माण एवं तकनीकी सहयोग, संयुक्त अनुसंधान तथा निगरानी और आकलन के लिए साझा दृष्टिकोण विकसित करने जैसे क्षेत्रों की पहचान की गई है।

यह पहल पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, जलवायु अनुकूलन क्षमता को मजबूत करने, आजीविका में सुधार और वैश्विक पुनर्स्थापना एवं सतत विकास के लक्ष्यों में योगदान देने के लिए सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

4. विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) ढांचे और अग्रणी सर्कुलर इकोनॉमी कार्यप्रणालियों पर संकलन

यह संकलन BRICS सदस्य देशों के अनुभवों, नीतिगत दृष्टिकोणों, नियामक उपायों और संस्थागत मॉडलों को प्रस्तुत करता है, जिनका उद्देश्य सर्कुलर और संसाधन-कुशल अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण को बढ़ावा देना है।

इसमें सामुदायिक नेतृत्व वाले अपशिष्ट प्रबंधन, डिजिटल वेस्ट-एक्सचेंज प्लेटफॉर्म, राष्ट्रीय सर्कुलर इकोनॉमी रोडमैप, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी सिस्टम, रीसाइक्लिंग प्रमाणन और अपशिष्ट क्षेत्र में व्यापक सुधार जैसी प्रमुख पहलों को शामिल किया गया है।

संकलन में भारत के बाजार-आधारित विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) ढांचे की प्रगति को भी रेखांकित किया गया है, जिसे केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म का समर्थन प्राप्त है और जिसका विस्तार विभिन्न प्रकार के अपशिष्टों तक किया गया है।

साथ ही, BRICS सहयोग को मजबूत करने के लिए ज्ञान एवं अनुभव साझा करने, डिजिटल ट्रेसेबिलिटी समाधान, तकनीकी क्षमता निर्माण और सर्कुलर बिजनेस मॉडल विकसित करने जैसे क्षेत्रों की पहचान की गई है। इन प्रयासों का उद्देश्य संसाधन-कुशल, लचीली और सतत अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देना है।

भुवनेश्वर में संपन्न हुई 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक, भारत ने शिक्षा सहयोग को नई दिशा देने का किया आह्वान

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भुवनेश्वर- केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी की अध्यक्षता में ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक के अंत में 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की घोषणा (Declaration) को सर्वसम्मति से अपनाया गया। इस दौरान भारत ने "जन-केंद्रित और मानवता-प्रथम" दृष्टिकोण के साथ ब्रिक्स देशों के बीच शिक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 का विषय "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो युवाओं को भविष्य के अवसरों के लिए तैयार करे, साथ ही उन्हें मानवीय मूल्यों से भी जोड़े रखे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और युवाओं को नीति निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के केंद्र में रखा जाना चाहिए।

जोशी ने कहा कि शिक्षा समावेशी विकास और साझा समृद्धि की आधारशिला है। उन्होंने पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी बल देते हुए कहा कि नवाचार और विरासत एक-दूसरे के पूरक हैं। ब्रिक्स देशों की समृद्ध सभ्यतागत विरासत पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का अनूठा अवसर प्रदान करती है।

उन्होंने ओडिशा की प्राचीन शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए भारत के "अतिथि देवो भव" और "वसुधैव कुटुम्बकम्" जैसे मूल्यों को वैश्विक सहयोग की प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग परंपराओं और अनुभवों के बावजूद सभी देशों की प्रगति एक-दूसरे से जुड़ी हुई है।

बैठक में ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया और संयुक्त अरब अमीरात सहित ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

घोषणा पत्र की प्रमुख बातें

ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की घोषणा में भारत की अध्यक्षता के तहत पांच प्रमुख प्राथमिकताओं पर सहमति बनी—

  • प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा (ECCE) और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत करने तथा सभी बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने पर जोर।

  • कौशल विकास और तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा (TVET) में सहयोग बढ़ाने तथा भारत की अंतरराष्ट्रीय कौशल अंतर अध्ययन (International Skill Gap Study) पहल का स्वागत।

  • शोध, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा देने, शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सुरक्षित एवं नैतिक उपयोग तथा उच्च शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति।

  • शैक्षणिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता (Mutual Recognition of Qualifications) के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) की दिशा में कार्य आगे बढ़ाने का निर्णय।

  • शैक्षणिक नेतृत्व और संस्थागत क्षमता निर्माण को मजबूत करने, ब्रिक्स रेक्टर्स फोरम, छात्रवृत्ति कार्यक्रमों तथा STEM शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर जोर।

बैठक में भारत की पारंपरिक एवं स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों पर शैक्षणिक सहयोग के लिए ब्रिक्स मार्गदर्शक सिद्धांत (BRICS Guiding Principles) की पहल का भी स्वागत किया गया।

इसके अलावा, शिक्षा मंत्रालय ने 5 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर में तीसरी ब्रिक्स वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक (SOM) का भी आयोजन किया, जिसमें समावेशी, सशक्त और भविष्य उन्मुख शिक्षा व्यवस्था विकसित करने पर व्यापक चर्चा हुई।

भारत अपनी ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के दौरान विभिन्न क्षेत्रों की मंत्रिस्तरीय बैठकों की मेजबानी करता रहेगा। इसका समापन 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ होगा।

मुंबई में शुरू हुआ BRICS WAVES Bazaar 2026, रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मिलेगा वैश्विक मंच

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BRICS WAVES Bazaar का शुभारंभ आज मुंबई में हुआ। दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में BRICS सदस्य एवं साझेदार देशों के 500 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसका उद्देश्य ऑडियो-विजुअल और रचनात्मक उद्योगों में संवाद, व्यापारिक सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान तथा सीमा-पार साझेदारियों को बढ़ावा देना है।

इस आयोजन में विभिन्न देशों के सरकारी प्रतिनिधि, उद्योग संगठन, फिल्म निर्माता, कंटेंट क्रिएटर्स, प्रोड्यूसर्स, निवेशक, ब्रॉडकास्टर्स, OTT प्लेटफॉर्म, टेक्नोलॉजी कंपनियां, स्टार्टअप्स, सांस्कृतिक संस्थान और रचनात्मक उद्यम शामिल हो रहे हैं।

मुंबई वैश्विक क्रिएटिव इकोसिस्टम का केंद्र: आशीष शेलार

उद्घाटन समारोह में मुख्य वक्तव्य देते हुए महाराष्ट्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, एआई एवं संस्कृति मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने मुंबई को भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था का केंद्र बताते हुए कहा कि कला और प्रौद्योगिकी के बीच की सीमाएं तेजी से समाप्त हो रही हैं।

उन्होंने कहा कि BRICS WAVES Bazaar केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि वैश्विक रचनात्मक अर्थव्यवस्था के भविष्य को आकार देने वाला उच्च स्तरीय मंच है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक बार फिर 'विश्वगुरु' के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। इस दिशा में 'ऑरेंज इकोनॉमी' महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जहां भारत की सांस्कृतिक विरासत, रचनात्मकता और आधुनिक व्यापार का संगम होता है।

प्रधानमंत्री की सांस्कृतिक दृष्टि का विस्तार: चंचल कुमार

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव चंचल कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार संस्कृति और रचनात्मकता को देशों और समाजों को जोड़ने का प्रभावी माध्यम बताते रहे हैं। इसी दृष्टि से भारत का BRICS देशों के साथ सिनेमा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है।

उन्होंने बताया कि मुंबई में आयोजित BRICS WAVES Bazaar और नवंबर 2026 में भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) के साथ आयोजित होने वाला BRICS फिल्म फेस्टिवल रचनात्मक उद्योगों को दो अलग-अलग लेकिन पूरक मंच उपलब्ध कराएंगे। एक मंच व्यापार, साझेदारी और बाजार तक पहुंच के लिए होगा, जबकि दूसरा फिल्मों, फिल्मकारों और दर्शकों को जोड़ने का कार्य करेगा।

उन्होंने कहा कि BRICS देशों के पास कहानियों, प्रतिभा, दर्शकों, तकनीक और उद्यमिता का विशाल भंडार है। WAVES Bazaar का उद्देश्य इन सभी क्षमताओं को एक साझा मंच पर लाना है, जहां नई परियोजनाएं, सह-निर्माण (Co-production), निवेश और नए बाजारों के अवसर विकसित हो सकें।

BRICS देशों के कंटेंट को मिले व्यापक पहुंच

चंचल कुमार ने कहा कि BRICS देशों की फिल्मों, वेब सीरीज, एनीमेशन, संगीत और डिजिटल कंटेंट की सदस्य देशों के भीतर बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में अपने अनुभव साझा करने और संस्थागत एवं व्यावसायिक सहयोग को मजबूत करने के लिए तैयार है।

उन्होंने बताया कि भारत WAVES, WAVES Bazaar, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज, इंडिया सिने हब तथा क्रिएटर स्किलिंग एवं स्टार्टअप्स जैसी पहलों के माध्यम से वैश्विक सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।

साथ ही उन्होंने सभी BRICS सदस्य एवं साझेदार देशों को 2027 में मुंबई में आयोजित होने वाले अगले WAVES संस्करण में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया।

IFFI 2026 में दिखाई जाएंगी 250 फिल्में

प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एवं IFFI के फेस्टिवल डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर ने सभी प्रतिभागियों को IFFI 2026 में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उन्होंने बताया कि महोत्सव में 8 क्यूरेटेड सेक्शनों में लगभग 250 फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी देश की संस्कृति और समाज को समझने का सबसे प्रभावी माध्यम उसका सिनेमा होता है। BRICS WAVES Bazaar जैसे मंच फिल्म निर्माताओं, लेखकों और निवेशकों को एक साथ लाकर नए सहयोग और नई फिल्मों का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था में रचनात्मक उद्योगों की बढ़ती भूमिका

विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (MER-III) राजीव बोडवाडे ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित BRICS WAVES Bazaar 2026 का विषय "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" है।

उन्होंने बताया कि रचनात्मक अर्थव्यवस्था वैश्विक GDP का लगभग 3.1 प्रतिशत योगदान देती है और अंतरराष्ट्रीय सेवा निर्यात में 1.4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का योगदान करती है। उन्होंने कहा कि BRICS देश अपनी डिजिटल क्षमता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के माध्यम से इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

दो दिनों तक होंगे सम्मेलन और बिजनेस मीटिंग्स

नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NFDC) के प्रबंध निदेशक प्रकाश मगदूम ने बताया कि दो दिवसीय आयोजन में उच्च स्तरीय सम्मेलन, मुख्य व्याख्यान, पैनल चर्चा, बिजनेस नेटवर्किंग और बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) बैठकें आयोजित की जाएंगी।

इन चर्चाओं में अंतरराष्ट्रीय सह-निर्माण, कंटेंट फाइनेंसिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, बौद्धिक संपदा (IP), महिला उद्यमिता, उभरती तकनीक, सार्वजनिक नीति और दक्षिण-दक्षिण सहयोग जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

समापन पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव सेंथिल राजन ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि BRICS WAVES Bazaar भारत की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत रचनात्मक अर्थव्यवस्था को नवाचार, उद्यमिता, रोजगार और आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है।

यह आयोजन BRICS सदस्य एवं साझेदार देशों के बीच व्यापार, निवेश और सांस्कृतिक सहयोग के नए अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से 101 करोड़ लोग जुड़े, आबादी के 68% से अधिक को मिला लाभ : डॉ. मनसुख मांडविया

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नई दिल्ली- केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि भारत की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का दायरा अब लगभग 101 करोड़ लोगों तक पहुंच चुका है, जो देश की 68 प्रतिशत से अधिक आबादी को कवर करता है। उन्होंने बताया कि इस उपलब्धि को अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने पिछले सप्ताह हैदराबाद में आयोजित ब्रिक्स श्रम मंत्रियों की बैठक में भी रेखांकित किया, जो भारत की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर मिली मान्यता का प्रमाण है।

डॉ. मांडविया नई दिल्ली में आयोजित चौथे ग्लोबल इंडस्ट्रियल रिलेशंस समिट को संबोधित कर रहे थे। इस दो दिवसीय सम्मेलन का आयोजन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ एम्प्लॉयर्स (AIOE) ने फिक्की (FICCI) और अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के सहयोग से किया।

उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, नियोक्ता, श्रमिक और ट्रेड यूनियनों के बीच निरंतर समन्वय ही स्वस्थ औद्योगिक संबंधों की आधारशिला है। आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को साथ लेकर चलने के लिए सभी पक्षों की साझेदारी आवश्यक है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि औद्योगीकरण राष्ट्रीय विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। उन्होंने विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सहकारी मॉडल की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि ये पहल आजीविका के नए अवसर पैदा करने, अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

उन्होंने जोर देते हुए कहा कि ऐसा संतुलित विकास मॉडल आवश्यक है जो एक ओर श्रमिकों के कल्याण और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करे तथा दूसरी ओर उद्योगों के लिए 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को भी बढ़ावा दे।

डॉ. मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्थिर कर व्यवस्था, बढ़ती बचत, बढ़ी हुई क्रय शक्ति और विनिर्माण क्षेत्र के विस्तार के कारण आर्थिक विकास और रोजगार सृजन का सकारात्मक चक्र विकसित हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जीडीपी में प्रत्येक 1 प्रतिशत वृद्धि के साथ रोजगार में 1.11 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है, जबकि लगभग 12 वर्ष पहले रोजगार वृद्धि का यह अनुपात केवल 0.008 प्रतिशत था।

उन्होंने कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) में प्रस्तावित सुधारों की जानकारी देते हुए कहा कि भविष्य में केवल ईएसआईसी अस्पताल ही नहीं, बल्कि बेहतर निजी अस्पतालों को भी ईएसआईसी से संबद्ध स्वास्थ्य सुविधाओं के रूप में मान्यता दी जा सकती है। इसके अलावा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की सभी दावों की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल की जा रही है तथा एकल यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के माध्यम से खातों का स्वतः स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, यूपीआई के माध्यम से पीएफ निकासी की सुविधा पर भी विचार किया जा रहा है।

इस अवसर पर भारत में ILO की दक्षिण एशिया निदेशक सुश्री मिचिको मियामोटो ने भारत को सामाजिक सुरक्षा के विस्तार पर बधाई देते हुए कहा कि ILO के आकलन के अनुसार भारत अब एक अरब से अधिक लोगों को कम से कम एक सामाजिक सुरक्षा लाभ उपलब्ध कराने वाला देश बन गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह उपलब्धि भारत की आर्थिक प्रगति को और गति देगी।

सम्मेलन के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने दो दिवसीय सम्मेलन की स्मारिका का भी विमोचन किया।

कोच्चि में BRICS महिला कार्य समूह की बैठक शुरू, महिला सशक्तिकरण और महिला-नेतृत्व वाले विकास पर मंथन

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कोच्चि- भारत की BRICS अध्यक्षता-2026 के तहत सोमवार को केरल के कोच्चि में BRICS महिला कार्य समूह (Women's Working Group- WWG) की दो दिवसीय बैठक शुरू हुई। बैठक में BRICS सदस्य देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी महिला सशक्तिकरण, महिला-नेतृत्व वाले विकास तथा साझा हितों के विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।


बैठक का उद्घाटन करते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भौगोलिक दूरी के बावजूद महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति BRICS देशों की साझा प्रतिबद्धता उन्हें एक-दूसरे से जोड़ती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह बैठक सार्थक संवाद, अनुभवों के आदान-प्रदान और सहयोग को नई दिशा देगी।

अनिल मलिक ने बताया कि भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान महिला ट्रैक को चार प्रमुख प्राथमिकताओं के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इनमें महिलाओं के नेतृत्व और सुशासन को बढ़ावा देकर अधिक सशक्त BRICS का निर्माण, वित्तीय एवं डिजिटल समावेशन को प्रोत्साहन, महिला उद्यमिता और कौशल विकास को बढ़ावा देना तथा जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और पोषण के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करना शामिल है।

उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से इन्हीं प्राथमिकताओं के आधार पर सदस्य देशों के बीच सहयोग और विचार-विमर्श जारी है, जो कोच्चि बैठक में भी चर्चा का मुख्य आधार रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि सदस्य देशों के बीच सकारात्मक सहयोग की भावना बैठक के सफल परिणाम सुनिश्चित करेगी।

बैठक भारत की BRICS अध्यक्षता की थीम "Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability" (लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास के निर्माण) के अनुरूप आयोजित की जा रही है, जो मानव-केंद्रित और मानवता-प्रथम दृष्टिकोण को दर्शाती है।

महिला कार्य समूह की बैठक के बाद 8 और 9 जुलाई 2026 को कोच्चि में BRICS देशों के महिला एवं बाल विकास मंत्रियों की दो दिवसीय मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी।

गुवाहाटी में BRICS एंटी-ड्रग एजेंसियों की दो दिवसीय बैठक शुरू, सिंथेटिक ड्रग्स पर रहेगा मुख्य फोकस

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गुवाहाटी- ब्रिक्स (BRICS) देशों की मादक पदार्थ निरोधक एजेंसियों की दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक सोमवार से गुवाहाटी में शुरू हो गई। बैठक में सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारी नशीले पदार्थों की तस्करी, विशेष रूप से सिंथेटिक ड्रग्स के बढ़ते खतरे से निपटने के लिए साझा रणनीति पर चर्चा करेंगे।

बैठक का प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के बीच खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान को मजबूत करना, सीमा पार मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए समन्वय बढ़ाना और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग को और सशक्त बनाना है।

इस दौरान ड्रग तस्करी के बदलते तौर-तरीकों, नई चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त कार्रवाई को लेकर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस बैठक से ब्रिक्स देशों के बीच नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान को नई मजबूती मिलेगी और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान का संबोधन

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मध्य प्रदेश की स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध और व्यावसायिक राजधानी मानी जाने वाली इंदौर में ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन शुरू हुआ। उद्घाटन सत्र में भारत के कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने भारत की कृषि उपलब्धियों, सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक सहयोग के प्रति प्रतिबद्धता को प्रस्तुत किया। इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर भी उपस्थित रहे। 

‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और वैश्विक सहयोग पर जोर

चौहान ने ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए भारत की प्राचीन परंपरा ‘अतिथि देवो भवः’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत सदैव वैश्विक एकता, शांति और सहयोग का समर्थक रहा है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का दृष्टिकोण “युद्ध नहीं, शांति; संघर्ष नहीं, समन्वय” पर आधारित है, जो भविष्य में वैश्विक कृषि सहयोग की मजबूत नींव बन सकता है।

छोटे किसानों के सशक्तिकरण की आवश्यकता

उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव, कृषि लागत में वृद्धि और बाजार की अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों पर सामूहिक विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच है। उनका मानना है कि यदि छोटे और सीमांत किसान आर्थिक रूप से मजबूत तथा तकनीकी रूप से सक्षम बनते हैं, तो वैश्विक खाद्य सुरक्षा भी अधिक मजबूत और टिकाऊ होगी।

भारत की कृषि उपलब्धियां

चौहान ने बताया कि पिछले एक दशक में भारत के कृषि क्षेत्र की औसत वार्षिक वृद्धि दर लगभग 4.5 प्रतिशत रही है। उन्होंने प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि—

  • कुल खाद्यान्न उत्पादन लगभग 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है।

  • गेहूं उत्पादन लगभग 118 मिलियन टन हो गया है।

  • बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन से अधिक हो चुका है।

  • मत्स्य उत्पादन 19 मिलियन टन से अधिक हो गया है।

उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम चला रहा है, जिसके माध्यम से बड़ी आबादी को खाद्य सुरक्षा प्रदान की जा रही है। इन उपलब्धियों का श्रेय किसानों की मेहनत और किसान-हितैषी सरकारी नीतियों को जाता है।

कृषि का आर्थिक महत्व

उन्होंने बताया कि भारत के लगभग 43 प्रतिशत कार्यबल का संबंध कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों से है। कृषि केवल खाद्य सुरक्षा ही नहीं, बल्कि करोड़ों ग्रामीण परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार भी है।

छोटे और सीमांत किसानों पर विशेष ध्यान

चौहान ने कहा कि भारत के लगभग 87 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत वर्ग से आते हैं। इसलिए उनका सशक्तिकरण ग्रामीण विकास की कुंजी है। उन्होंने निम्न योजनाओं का उल्लेख किया—

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता।

  • किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए ऋण सुविधा।

  • फसल बीमा योजनाओं के माध्यम से जोखिम से सुरक्षा।

प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि

उन्होंने प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना और रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता कम करना दीर्घकालिक कृषि स्थिरता के लिए आवश्यक है।

उन्होंने मध्य प्रदेश से शुरू किए गए ‘खेत बचाओ अभियान’ का भी उल्लेख किया, जिसके माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

महिला सशक्तिकरण और ‘ड्रोन दीदी’

चौहान ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी कृषि परिवर्तन का मजबूत आधार है। देशभर में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से करोड़ों महिलाएं कृषि और ग्रामीण विकास में नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने ‘ड्रोन दीदी’ पहल को तकनीकी और सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक बताते हुए कहा कि इससे ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों तक पहुंच मिल रही है।

युवाओं की बढ़ती भूमिका

उन्होंने कहा कि नवाचार, स्टार्टअप, डिजिटल तकनीक और कृषि उद्यमिता के माध्यम से युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है, जिससे कृषि क्षेत्र अधिक आधुनिक, कुशल और आकर्षक बन रहा है।

ब्रिक्स देशों से सहयोग का आह्वान

अपने संबोधन के अंत में चौहान ने ब्रिक्स देशों से छोटे किसानों के सशक्तिकरण, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अनुभवों के आदान-प्रदान, तकनीकी सहयोग और नीति संवाद के माध्यम से यह सम्मेलन वैश्विक कृषि को नई दिशा देगा तथा अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और समावेशी कृषि भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

भारत की अध्यक्षता में पहली ब्रिक्स युवा समन्वय बैठक 2026 का आयोजन

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 भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत युवा कार्य विभाग ने 25 मार्च 2026 को वर्चुअल माध्यम से पहला ब्रिक्स (BRICS) युवा समन्वय बैठक आयोजित की। यह बैठक शाम 4:30 बजे से 6:00 बजे (IST) तक चली और इसमें सभी ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

भारत द्वारा वर्ष 2026 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालने के साथ ही इस बैठक के माध्यम से “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास का निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) थीम के तहत युवा सहयोग की दिशा निर्धारित की गई।

बैठक के दौरान भारत ने ब्रिक्स यूथ ट्रैक 2026 का एक विस्तृत खाका प्रस्तुत किया, जिसमें प्रमुख पहलें शामिल थीं—कार्य समूह बैठकों का आयोजन, विषयगत सहभागिता, ‘Serve BRICS’ स्वयंसेवी गतिविधियां, युवा विकास मंच, युवा परिषद बैठक, युवा शिखर सम्मेलन और युवा मंत्रिस्तरीय बैठक।

चर्चा के दौरान सदस्य देशों के बीच सहयोग के लिए प्राथमिक क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया, जिनमें शिक्षा एवं कौशल विकास, युवा उद्यमिता, विज्ञान और नवाचार, सामाजिक भागीदारी, समावेशन, स्वास्थ्य एवं खेल, पर्यावरण एवं सतत विकास, अंतर-धार्मिक संवाद तथा युवा आदान-प्रदान शामिल हैं।

यह बैठक सदस्य देशों के बीच व्यापक विषयों पर सहमति बनाने और ब्रिक्स यूथ ट्रैक 2026 के अंतर्गत सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई, जिससे भारत की अध्यक्षता के दौरान आगामी कार्यक्रमों की मजबूत नींव रखी गई।

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