Media24Media.com: ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखाई भारत की ताकत, पाकिस्तान से बातचीत केवल पीओके पर होगी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखाई भारत की ताकत, पाकिस्तान से बातचीत केवल पीओके पर होगी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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द्रास (लद्दाख)- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत पाकिस्तान की हर दुस्साहसपूर्ण हरकत का उसकी कल्पना से कहीं अधिक कठोर जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत तभी होगी, जब उसका विषय केवल पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की वापसी होगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की संप्रभुता के खिलाफ होने वाली हर साजिश का जवाब भारतीय सशस्त्र बल उसी दृढ़ता और साहस से देंगे, जैसा उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकवादियों और उनके संरक्षकों के खिलाफ दिया।

उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवाद को राज्य नीति का हिस्सा बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वहां सेना और आतंकवादी संगठनों के बीच का अंतर लगभग समाप्त हो चुका है। पाकिस्तान की सेना न केवल आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देती है, बल्कि उनके साथ मिलकर काम भी करती है। इसी कारण भारत अब आतंकवादियों और उन्हें संरक्षण देने वाली सरकारों को अलग-अलग नहीं मानता।

भारत और पाकिस्तान की राहें अब पूरी तरह अलग

राजनाथ सिंह ने कहा कि कारगिल युद्ध के 27 वर्षों बाद भारत और पाकिस्तान की दिशा पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि जहां भारत नवाचार, स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष मिशनों और डिजिटल तकनीक में नई ऊंचाइयां छू रहा है, वहीं पाकिस्तान घुसपैठ, आतंकवाद, आत्मघाती हमलावरों और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने में लगा हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया को सॉफ्टवेयर और यूपीआई जैसी आधुनिक तकनीक दे रहा है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद और हवाला नेटवर्क को बढ़ावा दे रहा है। यदि पाकिस्तान भारत की प्रगति में बाधा डालने का प्रयास करेगा, तो भारतीय सशस्त्र बल उसे करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सेना को खुली छूट, हर खतरे का मिलेगा जवाब

रक्षा मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने सशस्त्र बलों को हर खतरे का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी राजनीतिक स्वतंत्रता दी है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब तक भारतीय सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, तब तक कोई भी दुश्मन भारत की ओर बुरी नजर डालने का साहस नहीं कर सकता।

कारगिल के वीरों को श्रद्धांजलि

राजनाथ सिंह ने 1999 के कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा और कैप्टन मनोज कुमार पांडेय सहित सभी शहीदों को याद करते हुए कहा कि उनका बलिदान देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि त्याग, सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने वाला दिन है।

हर भारतीय में होना चाहिए सैनिक जैसा जज़्बा

रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि हर भारतीय में सैनिक जैसा अनुशासन, साहस और राष्ट्रप्रेम होना चाहिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर पूरा देश एकजुट होकर राष्ट्र की रक्षा के लिए खड़ा हो सके।

2047 का विकसित भारत होगा सुरक्षित और आत्मनिर्भर

उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक शक्ति, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता का भी संकल्प है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कारगिल के वीरों जैसी निष्ठा और समर्पण की आवश्यकता है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा उत्पादन में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। उन्होंने बताया कि पहले भारत अपनी 65-70 प्रतिशत रक्षा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर था, जबकि आज लगभग 65 प्रतिशत रक्षा उपकरण देश में ही बनाए जा रहे हैं।

उन्होंने आकाश-तीर एयर डिफेंस सिस्टम, आकाश मिसाइल, आईएनएस विक्रांत, तेजस, प्रचंड, ध्रुव, अर्जुन टैंक, पिनाका, अस्त्र मिसाइल और आधुनिक ड्रोन व काउंटर-ड्रोन प्रणालियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये भारतीय सेनाओं की ताकत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कैप्टन विक्रम बत्रा के प्रसिद्ध नारे "ये दिल मांगे मोर" का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और अधिक आधुनिक हथियार, लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां और मिसाइलें स्वदेश में ही विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

शहीदों को दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने कारगिल युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखा। उन्होंने 'शौर्य विजय यात्रा' का समापन भी किया, जिसका शुभारंभ उन्होंने 14 जुलाई को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से किया था। इस अवसर पर वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, कारगिल युद्ध के वीर सैनिक, वीर नारियां, शहीदों के परिजन और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।


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