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अजीत डोभाल चीन पहुंचे, 25वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता पर दुनिया की नजर

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नई दिल्ली- भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को दो दिवसीय यात्रा पर बीजिंग पहुंच गए हैं। चीन के विदेश मंत्री वांग यी के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा के दौरान डोभाल मंगलवार, 25 अगस्त को भारत-चीन सीमा मुद्दे पर 25वें Special Representatives (SR) स्तर की वार्ता में हिस्सा लेंगे।

यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन के बीच संबंधों को स्थिर करने तथा सीमा पर शांति बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। बैठक में डोभाल भारत की ओर से विशेष प्रतिनिधि की भूमिका निभाएंगे, जबकि चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी वार्ता में शामिल होंगे।

सीमा विवाद और LAC पर रहेगा मुख्य फोकस

25वीं विशेष प्रतिनिधि वार्ता का प्रमुख मुद्दा भारत-चीन सीमा प्रश्न रहेगा। दोनों पक्ष सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने और लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने पर चर्चा कर सकते हैं।

हाल के वर्षों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव ने भारत-चीन संबंधों को प्रभावित किया है। ऐसे में उच्चस्तरीय वार्ता को दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।

संबंधों में सुधार के बीच महत्वपूर्ण यात्रा

डोभाल की बीजिंग यात्रा भारत और चीन के बीच हाल में दिखाई दे रहे कूटनीतिक संपर्कों के बीच हो रही है। दोनों देश सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।

इस वार्ता का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि आने वाले समय में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संभावित संपर्क को लेकर भी चर्चा है। सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन से पहले डोभाल की चीन यात्रा को महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

चीनी उपराष्ट्रपति से भी मुलाकात

विदेश मंत्रालय के अनुसार, अजीत डोभाल अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान चीन के उपराष्ट्रपति से भी मुलाकात करेंगे। इससे संकेत मिलता है कि यात्रा केवल सीमा वार्ता तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि दोनों देशों के व्यापक संबंधों पर भी उच्चस्तरीय बातचीत की संभावना है।

आगे की राह के लिए अहम मानी जा रही वार्ता

भारत-चीन सीमा विवाद लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों के लिए संवेदनशील मुद्दा रहा है। ऐसे में 25वीं SR वार्ता से यह उम्मीद की जा रही है कि दोनों पक्ष सीमा पर स्थिरता बनाए रखने और आपसी विश्वास बहाल करने के उपायों पर चर्चा करेंगे।

डोभाल की बीजिंग यात्रा को भारत-चीन संबंधों में संवाद और कूटनीतिक संपर्क को आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, वार्ता के वास्तविक परिणाम और किसी ठोस सहमति की जानकारी बैठक के बाद ही स्पष्ट होगी।

अरुणाचल सीमा विवाद पर किरेन रिजिजू का बड़ा बयान: 60 किमी चीनी घुसपैठ के दावे को बताया गलत

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नई दिल्ली- अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित घुसपैठ को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने 60 किलोमीटर अंदर तक चीनी सैनिकों के प्रवेश के दावे को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह दावा गलत है और सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो या सूचनाएँ साझा करना भ्रम पैदा कर सकता है।

रिजिजू ने कहा कि भारत-चीन सीमा के कुछ हिस्सों में वास्तविक समस्या है, लेकिन इसका प्रमुख कारण सीमा का जमीन पर पूरी तरह स्पष्ट रूप से सीमांकन (demarcation) न होना है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच अरुणाचल प्रदेश में सीमा को लेकर अलग-अलग धारणाएँ हैं, जिसके कारण कुछ क्षेत्रों में स्थिति को लेकर भ्रम बना रहता है।

60 किलोमीटर घुसपैठ के दावे पर सफाई

रिजिजू ने स्पष्ट किया कि यह कहना सही नहीं है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश में 60 किलोमीटर अंदर तक प्रवेश कर लिया है या किसी भारतीय गांव पर कब्जा कर लिया है। उनके अनुसार, कुछ क्षेत्रों में सीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं होने के कारण दोनों पक्ष संबंधित भू-भाग पर अलग-अलग दावे करते हैं। 

उन्होंने यह भी कहा कि सीमा क्षेत्र के गांवों में रहने वाले लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। स्थानीय लोगों द्वारा सीमा और पारंपरिक भूमि को लेकर उठाई गई चिंताएँ वास्तविक हैं और सरकार इन्हें गंभीरता से लेती है।

चीन की गतिविधियों पर भी नजर

रिजिजू ने माना कि अरुणाचल प्रदेश के कुछ सीमावर्ती इलाकों में चीनी गतिविधियों में वृद्धि हुई है। हालांकि, उन्होंने इसे 60 किलोमीटर की नई सैन्य घुसपैठ के रूप में पेश किए जाने से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि सीमा की स्थिति को लेकर गलत सूचनाएँ फैलाने से देश में अनावश्यक भ्रम पैदा हो सकता है और सुरक्षा बलों का मनोबल प्रभावित हो सकता है। 

रिपोर्टों के अनुसार, यह बयान अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले और लॉन्गजू क्षेत्र के आसपास चीनी गतिविधियों को लेकर उठी चिंताओं के बीच आया है। 

सीमा पर बुनियादी ढांचे को लेकर भी चर्चा

रिजिजू ने भारत और चीन के सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चीन ने भारत की तुलना में सीमा क्षेत्रों में सड़क और अन्य बुनियादी ढांचे का निर्माण पहले शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद भारत ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क और अन्य आधारभूत ढांचे के विकास को तेज किया है। 

सरकार का संदेश

केंद्रीय मंत्री के बयान का मुख्य संदेश यह है कि 60 किलोमीटर चीनी घुसपैठ या भारतीय गांव पर कब्जे की खबरों को सही नहीं माना जाना चाहिए, जबकि सीमा के कुछ हिस्सों में सीमांकन से जुड़ी वास्तविक चुनौतियाँ मौजूद हैं। सरकार स्थानीय लोगों की चिंताओं को गंभीरता से लेने और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा एवं बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रही है। 

महत्वपूर्ण: 60 किमी घुसपैठ का दावा फिलहाल मंत्री के बयान के अनुसार गलत बताया गया है; इसे तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

‘रक्षा शक्ति’ बनेगी विकसित भारत की ताकत, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर PM मोदी का जोर

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से दिए स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘रक्षा शक्ति’ को विकसित भारत के लिए सप्तधारा की सात प्रमुख शक्तियों में शामिल किया। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को जरूरी बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक माहौल में भारत केवल दुनिया का बाजार बनकर नहीं रह सकता। देश को अगली पीढ़ी की रक्षा तकनीकों का विकास कर वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा। उन्होंने ड्रोन, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और हाइपरसोनिक रक्षा तकनीक में नेतृत्व हासिल करने पर जोर दिया।

रक्षा उत्पादन में तेज बढ़ोतरी

प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में रक्षा क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का रक्षा उत्पादन करीब चार गुना बढ़ा है, जबकि रक्षा निर्यात में लगभग 50 गुना वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि भारत के हथियार अब करीब 100 देशों तक पहुंच रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सीमाओं के भीतर या बाहर किसी भी चुनौती से निपटने के लिए भारत को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना होगा। बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच देश की रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करना जरूरी है।

आधुनिक युद्ध के लिए नई तैयारी

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आधुनिक संघर्ष केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि रिफाइनरी, बैंकिंग सिस्टम, डेटा सेंटर, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया जा सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ के तहत चल रहे कार्यों का उल्लेख किया और आधुनिक खतरों से निपटने के लिए रक्षा तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दिया।

साइबर सुरक्षा में युवाओं की भूमिका

प्रधानमंत्री ने साइबर सुरक्षा को भी रक्षा का महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की प्रतिभा और तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और भारत के साथ-साथ दुनिया के हित में किया जा सकता है।

नागरिक सुरक्षा का बनेगा मजबूत नेटवर्क

प्रधानमंत्री ने नागरिकों की सुरक्षा को भी राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि पिछली सदी के युद्धों को ध्यान में रखकर बनाए गए मौजूदा नागरिक सुरक्षा तंत्र को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप बदलने की जरूरत है।

उन्होंने आने वाले समय में आधुनिक प्रणालियों से लैस एक व्यापक नागरिक सुरक्षा नेटवर्क और बड़ी स्वैच्छिक सिविल डिफेंस फोर्स तैयार करने की घोषणा की।

रक्षा क्षेत्र में नारी शक्ति की बढ़ती भूमिका

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में भी देश की बेटियां नई भूमिका निभा रही हैं। NDA से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिला कैडेट्स सैन्य नेतृत्व की क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं।

प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट रहा कि आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता, आधुनिक तकनीक, साइबर सुरक्षा और नागरिकों की तैयारियों के जरिए भारत को एक सुरक्षित और मजबूत राष्ट्र बनाना विकसित भारत 2047 की यात्रा का अहम हिस्सा है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया को भारत की सैन्य शक्ति और नागरिकों की सुरक्षा के संकल्प का संदेश दिया: राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय शौर्य और पराक्रम को प्रदर्शित किया तथा पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और हमारी महिलाओं के सिंदूर की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

रक्षा मंत्री 9 अगस्त 2026 को दिल्ली कैंट स्थित बेस अस्पताल में आयोजित ‘सिंदूर महारक्तदान यात्रा’ रक्तदान शिविर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारतीय रक्षा बलों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पाकिस्तान में स्थित आतंकवादियों और उनके आकाओं का सफाया किया तथा भारत की ओर बुरी नजर से देखने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़े।

‘सिंदूर महारक्तदान यात्रा’ की तुलना ऑपरेशन सिंदूर से करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि जहां ऑपरेशन सिंदूर ने साहस और शौर्य का परिचय दिया, वहीं यह विशाल रक्तदान शिविर करुणा और मानव सेवा का प्रतीक है। शिविर में महाराष्ट्र के लगभग 1,000 पहलवानों और खिलाड़ियों ने रक्तदान कर निस्वार्थ सेवा और सशस्त्र बलों के प्रति एकजुटता की भावना का प्रदर्शन किया।

रक्तदाताओं का आभार व्यक्त करते हुए रक्षा मंत्री ने विश्वास जताया कि आज दान किया गया रक्त भविष्य में जरूरतमंद सैनिकों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण भंडार के रूप में काम आएगा। उन्होंने रक्तदान को ‘जीवनदान’ और ‘महादान’ बताते हुए कहा कि विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद मानव रक्त का अभी तक कोई कृत्रिम विकल्प विकसित नहीं किया जा सका है। रक्त केवल मानव शरीर द्वारा ही बनाया जा सकता है और एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को रक्तदान कर सकता है। इसलिए रक्तदान मानव सेवा और परोपकार के सबसे महान कार्यों में से एक है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रत्येक रक्तदाता और रक्त प्राप्त करने वाला व्यक्ति अपने-अपने तरीके से राष्ट्र की सेवा कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से रक्तदान को अपनी जीवनशैली और सामाजिक संस्कृति का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि जब भारत वर्ष 2047 में स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब हमारा लक्ष्य केवल विकसित अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए। हमें एक ऐसे संवेदनशील समाज की भी कल्पना करनी चाहिए, जहां लोग स्वस्थ और सुरक्षित हों तथा जरूरत के समय रक्त जैसी जीवनरक्षक सामग्री आसानी से उपलब्ध हो।

युवाओं से फिटनेस को प्राथमिकता देने का आह्वान करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वस्थ और फिट व्यक्ति समाज के लिए अधिक उपयोगी होता है और रक्तदान जैसे नेक कार्यों में बेहतर योगदान दे सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ‘खेलो इंडिया’ और ‘फिट इंडिया’ जैसी पहलों के माध्यम से विशेष रूप से युवाओं को फिटनेस को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

महाराष्ट्र की वीरता और करुणा की समृद्ध परंपरा का उल्लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि शारीरिक शक्ति का वास्तविक उद्देश्य दूसरों की रक्षा करना और राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। छत्रपति शिवाजी महाराज की भूमि से आए खिलाड़ियों और पहलवानों का यह योगदान राष्ट्र के लिए एक महान सेवा के रूप में याद रखा जाएगा।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रताप राव जाधव, महाराष्ट्र सरकार के उद्योग मंत्री उदय रविंद्र सामंत, सांसद डॉ. श्रीकांत लता एकनाथ शिंदे, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (AFMS) के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, एडजुटेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल वी.पी.एस. कौशिक, बेस अस्पताल दिल्ली कैंट के कमांडेंट मेजर जनरल विशाल चौधरी सहित वरिष्ठ सैन्य एवं नागरिक अधिकारी उपस्थित रहे।

सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा (AFMS) के लिए पर्याप्त रक्त भंडार बनाए रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि सैन्य अस्पताल नियमित स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ ऑपरेशनल, ट्रॉमा और आपातकालीन परिस्थितियों में भी चिकित्सा सहायता प्रदान करते हैं। लगभग 500 स्वैच्छिक रक्तदाताओं की भागीदारी ने ‘सेवा परमो धर्म’ की भावना को मजबूत किया और यह संदेश दिया कि प्रत्येक पात्र नागरिक नियमित स्वैच्छिक रक्तदान के माध्यम से जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की, ‘प्रादेशिक सेना’ की भूमिका पर हुआ मंथन

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 6 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में रक्षा मंत्रालय की संसदीय परामर्शदात्री समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में ‘प्रादेशिक सेना (Territorial Army)’ के विषय पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को प्रादेशिक सेना के उद्देश्य, भूमिका और प्रमुख उपलब्धियों पर विस्तृत जानकारी दी। समिति के सदस्यों ने सेना को और अधिक सशक्त एवं प्रभावी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रादेशिक सेना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा कि जहाँ सशस्त्र बलों की मुख्य भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी होती है, वहीं प्रादेशिक सेना पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कार्यों में भी उल्लेखनीय योगदान देती है।

उन्होंने कहा, “प्रादेशिक सेना ‘नागरिक-सैनिक’ (Citizen-Soldier) की अवधारणा का जीवंत उदाहरण है। इसके सदस्य अपने नागरिक व्यवसायों के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर वर्दी पहनकर सीमाओं की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का दायित्व निभाते हैं।”

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रादेशिक सेना सशस्त्र बलों के लिए अतिरिक्त सैन्य क्षमता (Surge Capacity) तैयार करती है। यह प्रशिक्षित सैनिकों का ऐसा रिजर्व बल है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सेवा अवधि पूरी करने के बाद जब ये सैनिक पुनः नागरिक जीवन में लौटते हैं, तो वे समाज और सेना के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं तथा विशेषकर युवाओं को रक्षा सेवाओं में शामिल होने के लिए प्रेरित करते हैं।

वर्तमान में प्रादेशिक सेना में लगभग 44,400 कर्मी और 59 विभिन्न इकाइयाँ हैं। रक्षा मंत्री ने इसे प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पहला प्रतिक्रिया बल (First Responders) बताते हुए कहा कि यह राहत एवं बचाव कार्यों तथा चिकित्सा सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने केरल की बाढ़, ओडिशा के चक्रवात तथा हाल ही में असम की बाढ़ के दौरान प्रादेशिक सेना द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की सराहना की।

पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के क्षेत्र में प्रादेशिक सेना के योगदान की प्रशंसा करते हुए उन्होंने बताया कि इसकी इकोलॉजिकल टास्क फोर्स (Ecological Task Forces) अब तक लगभग 10 करोड़ पौधे लगा चुकी है, जिनकी 80–85 प्रतिशत तक जीवित रहने की दर है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के ‘मिशन LiFE’ और ‘पंचामृत’ लक्ष्यों को धरातल पर साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

रक्षा मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में तैनात प्रादेशिक सेना की ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को जन-जन तक पहुँचाने में निभाई गई भूमिका की भी सराहना की।

बैठक में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, रक्षा वित्त सचिव विश्वजीत सहाय तथा रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा मंत्रालय में सैन्य और असैन्य एकीकरण को और मजबूत करने पर दिया जोर

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नई दिल्ली- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बल जब अधिक संयुक्तता (Jointness) की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, ऐसे समय में रक्षा मंत्रालय के सैन्य एवं असैन्य (सिविल) घटकों के बीच बेहतर समन्वय और गहरा एकीकरण अत्यंत आवश्यक है। इससे बदलती सुरक्षा और तकनीकी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकेगा तथा संस्थागत अनुभव, स्थिरता और नियमों के बेहतर अनुपालन को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

नई दिल्ली में 85वें सशस्त्र बल मुख्यालय (AFHQ) सिविलियन सर्विसेज दिवस समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वर्दीधारी और सिविल सेवाएं दोनों ही "राष्ट्र प्रथम" की भावना से कार्य करती हैं। जब लक्ष्य एक होता है, तो व्यवस्था का प्रत्येक अंग राष्ट्रीय शक्ति में परिवर्तित हो जाता है।

उन्होंने कहा कि सैन्य और प्रशासनिक एकीकरण अलग-अलग रास्तों पर नहीं चल सकते। जैसे-जैसे संयुक्त और एकीकृत संरचनाएं विकसित होंगी, नीति निर्माण, प्रशासन, मानव संसाधन प्रबंधन, वित्तीय प्रक्रियाओं, लॉजिस्टिक्स तथा संस्थागत ज्ञान जैसे क्षेत्रों में निरंतरता और विशेषज्ञता की आवश्यकता और बढ़ेगी।

रक्षा मंत्री ने सैन्य और सिविल अधिकारियों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा क्रॉस-एक्सपोजर को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सैन्य अधिकारी युद्ध संचालन और कमान का अनुभव लेकर आते हैं, जबकि सिविल अधिकारी प्रशासनिक निरंतरता, नीतिगत अनुभव, सरकारी प्रक्रियाओं की समझ और संस्थागत स्मृति प्रदान करते हैं। इन दोनों की संयुक्त क्षमता निर्णय प्रक्रिया को अधिक संतुलित, प्रभावी और सशक्त बनाती है।

साइबर युद्ध और रक्षा अनुसंधान पर विशेष जोर

राजनाथ सिंह ने साइबर युद्ध (Cyber Warfare) का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि AFHQ सिविलियन सर्विसेज के अधिकारी अपनी विशेषज्ञता का उपयोग कर रक्षा क्षेत्र के लिए विशेष साइबर उपकरण विकसित करें, तो यह सशस्त्र बलों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।

उन्होंने भारतीय सैन्य इतिहास के अध्ययन के लिए एक विशेष मंच विकसित करने का भी सुझाव दिया, जहां सिविल दृष्टिकोण से अध्ययन कर नए विचार और रणनीतिक सोच विकसित की जा सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि AFHQ सिविलियन सर्विसेज अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में और अधिक सार्थक योगदान दे सकती है।

"रक्षा प्रबंधन का रणनीतिक मस्तिष्क बने AFHQ"

रक्षा मंत्री ने AFHQ सिविलियन सर्विसेज से आह्वान किया कि वह भारत की रक्षा प्रबंधन व्यवस्था का "रणनीतिक मस्तिष्क (Strategic Brain)" बने। इसके लिए रक्षा क्षेत्र की व्यापक समझ विकसित करनी होगी, संयुक्त वातावरण में प्रभावी ढंग से कार्य करना होगा तथा उभरती चुनौतियों के अनुरूप अपनी विशेषज्ञता को निरंतर बढ़ाना होगा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध तकनीकी नवाचारों पर आधारित है, इसलिए अब केवल सेवा नियमों और आदेशों के पालन तक सीमित रहने के बजाय रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान, भू-रणनीतिक सोच और नवाचार पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

उन्होंने कहा, "किसी भी सेना की शक्ति केवल उसके हथियारों और गोला-बारूद से नहीं, बल्कि उन हजारों अदृश्य हाथों से भी आती है जो हर समय उसके साथ खड़े रहते हैं। AFHQ सिविलियन सर्विसेज भी ऐसी ही एक महत्वपूर्ण और निर्णायक शक्ति है।"

कई डिजिटल पहल की शुरुआत

समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने संयुक्त सचिव एवं मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (JS & CAO) कार्यालय की कई डिजिटल पहलों तथा संशोधित विजन एवं मिशन स्टेटमेंट का शुभारंभ किया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • इंटरनेट आधारित आवास प्रबंधन प्रणाली (IBAMS) पोर्टल।

  • eHRMS का TULIP 2.0 प्रणाली से एकीकरण।

  • वेतन एवं भत्तों के ऑनलाइन प्रसंस्करण हेतु CAO कार्यालय का TULIP 2.0 से एकीकरण।

  • स्मार्ट परफॉर्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट रिकॉर्डिंग ऑनलाइन विंडो (SPARROW) पोर्टल पर ऑनबोर्डिंग।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने 'संवाद' पत्रिका के 34वें अंक का भी विमोचन किया, जिसमें सेवा मुख्यालयों एवं अंतर-सेवा संगठनों में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा लिखे गए यात्रा-वृत्तांत, निबंध, लेख और कविताएं प्रकाशित की गई हैं।

उन्होंने खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले AFHQ कर्मियों तथा शैक्षणिक उपलब्धियां हासिल करने वाले कर्मचारियों के बच्चों को सम्मानित भी किया।

कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह सहित रक्षा मंत्रालय के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

AFHQ दिवस का महत्व

हर वर्ष 1 अगस्त को AFHQ दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रक्षा मंत्रालय के तीनों एकीकृत सेवा मुख्यालयों, मुख्यालय इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ तथा 24 अंतर-सेवा संगठनों में कार्यरत उन असैन्य कर्मचारियों के योगदान को सम्मान देना है, जो सशस्त्र बलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की रक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। AFHQ कैडर की स्थापना 1 अगस्त 1942 को की गई थी।


राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया

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पुणे- केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज पुणे में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल को 'लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026' से सम्मानित किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदेसुनेत्रा पवार, केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि आज लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 106वीं पुण्यतिथि है। उन्होंने कहा कि तिलक ने "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा" का मंत्र देकर भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान की। उन्होंने कहा कि वास्तविक स्वराज तभी संभव है जब शासन व्यवस्था, भाषा, संस्कृति और धर्म मजबूत हों।

शाह ने कहा कि लोकमान्य तिलक ने स्वतंत्रता आंदोलन को जन-जन से जोड़ा और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा को देश के सामने रखा। उन्होंने कहा कि तिलक महान शिक्षक, निर्भीक पत्रकार, प्रखर चिंतक और कर्मयोगी थे, जिनकी विचारधारा आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

उन्होंने कहा कि तिलक ने न्यू इंग्लिश स्कूल, डेक्कन एजुकेशन सोसाइटी और फर्ग्यूसन कॉलेज जैसी संस्थाओं की स्थापना कर शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके समाचार पत्र 'केसरी' और 'द मराठा' ब्रिटिश शासन के लिए सबसे प्रभावशाली आवाज बने।

अजीत डोभाल के योगदान की सराहना

अमित शाह ने कहा कि लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार केवल सम्मान नहीं, बल्कि समाज को प्रेरित करने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि अजीत डोभाल ने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए असाधारण योगदान दिया है और यह सम्मान देश सेवा के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब अहमदाबाद सहित देशभर में हुए बम धमाकों की जांच के दौरान अजीत डोभाल ने गुजरात पुलिस के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप कई मामलों का सफलतापूर्वक खुलासा हुआ।

अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती मिली है, जिसमें अजीत डोभाल का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

उन्होंने कहा कि 1972 से लेकर इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के निदेशक बनने तक डोभाल ने देश के लगभग हर बड़े सुरक्षा अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूर्वोत्तर, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, पंजाब तथा पाकिस्तान में कार्य करते हुए राष्ट्र की सुरक्षा को मजबूत किया। पाकिस्तान में उनका छह वर्षों का कार्यकाल भी देश की सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मिली नई मजबूती

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 के बाद केंद्र सरकार ने मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) को मजबूत किया, जो आज देश की आंतरिक सुरक्षा की रीढ़ बन चुका है। उन्होंने कहा कि MAC की मजबूत नींव रखने में अजीत डोभाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किया और वे देश के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी हैं।

अमित शाह ने कहा कि डोभाल के कार्यकाल में भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, तकनीकी सशक्तीकरण और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए, जिनमें उनका अनुभव और मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।

कार्यक्रम के अंत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में देश के पहले सैन्य चिकित्सा विभाग का किया उद्घाटन, युद्धक्षेत्र चिकित्सा क्षमता को मिलेगी नई मजबूती

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नई दिल्ली/लखनऊ- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित कमांड अस्पताल (मध्य कमान) में सैन्य चिकित्सा विभाग (Department of Military Medicine) का वर्चुअल उद्घाटन किया। यह देश का पहला समर्पित शैक्षणिक और परिचालन विभाग है, जो विशेष रूप से सैन्य चिकित्सा पर केंद्रित होगा। यह पहल युद्धक्षेत्र में चिकित्सा तैयारियों को सुदृढ़ करने, अनुसंधान को बढ़ावा देने, स्वदेशी सिद्धांत विकसित करने तथा भविष्य के युद्धक्षेत्रों और मानवीय आपदाओं से निपटने के लिए विशेषज्ञता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सेना चिकित्सा सेवा महानिदेशालय (DGMS-आर्मी) के अधीन स्थापित यह विभाग सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) की परिचालन चिकित्सा तैयारियों को और मजबूत करेगा।

राष्ट्रीय सुरक्षा को मिलेगा नया आधार

अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ उसकी संप्रभुता और प्रगति का मूल आधार उसकी सेना की शक्ति और मनोबल होता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह नया विभाग सैनिकों को अत्याधुनिक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय सुरक्षा को और मजबूत करेगा तथा उनमें यह भरोसा पैदा करेगा कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सर्वोत्तम उपचार और सहयोग मिलेगा।

इन क्षेत्रों पर होगा विशेष फोकस

नया विभाग निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में शिक्षा, प्रशिक्षण और अनुसंधान करेगा:

  • सैन्य आघात (Military Trauma) एवं डैमेज कंट्रोल

  • कॉम्बैट मनोचिकित्सा एवं मानसिक दृढ़ता

  • पर्यावरण एवं परिचालन चिकित्सा

  • सैन्य चिकित्सा लॉजिस्टिक्स

  • रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु एवं विस्फोटक (CBRNe) चिकित्सा प्रतिक्रिया

  • आपातकालीन चिकित्सा एवं क्रिटिकल केयर

  • आपदा चिकित्सा

  • मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)

  • अनुसंधान, ऑडिट एवं डेटा विश्लेषण

इसके साथ ही विभाग तकनीक आधारित युद्धक्षेत्र चिकित्सा, सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण, टेलीमेडिसिन, फील्ड केयर और चिकित्सा निर्णय सहायता प्रणाली में नवाचार को भी बढ़ावा देगा।

चरणबद्ध तरीके से होगा विकास

विभाग का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। प्रारंभिक चरण में शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इसके बाद HADR और CBRNe चिकित्सा के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) स्थापित किए जाएंगे। भविष्य में इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य चिकित्सा के अग्रणी संस्थान के रूप में विकसित किया जाएगा।

सैनिकों के लिए विशेष चिकित्सा प्रोटोकॉल

रक्षा मंत्री ने कहा कि जिस प्रकार एयरोस्पेस मेडिसिन अंतरिक्ष यात्रियों और पायलटों की चुनौतियों का अध्ययन करती है, उसी प्रकार सैन्य चिकित्सा युद्ध और युद्ध जैसी परिस्थितियों में मानव शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन करती है।

उन्होंने कहा, "हमारे सैनिक दुनिया के सबसे कठिन भौगोलिक क्षेत्रों और प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियों में तैनात रहते हैं। यह विभाग ऐसे परिचालन वातावरण के अनुरूप चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित करेगा।"

नई चुनौतियों से निपटने में मददगार

राजनाथ सिंह ने कहा कि पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ व्यापक विनाश के हथियारों (Weapons of Mass Destruction) का खतरा भी बना हुआ है। ऐसे में यह विभाग अनुसंधान एवं विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरती तकनीकी चुनौतियों से निपटने में देश की क्षमता को मजबूत करेगा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियानों में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए यह विभाग आपदा प्रबंधन, फील्ड अस्पताल संचालन, बड़े पैमाने पर हताहतों के प्रबंधन तथा महामारी नियंत्रण में विशेषज्ञता विकसित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

युवाओं के लिए नए अवसर

रक्षा मंत्री ने उम्मीद जताई कि यह विभाग आर्मी मेडिकल कॉर्प्स के युवा डॉक्टरों को युद्धक्षेत्र नर्सिंग और एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण देगा।

उन्होंने कहा, "अब छात्र सैन्य चिकित्सा में सुपर स्पेशलाइजेशन कर सकेंगे। इससे सेना की बौद्धिक क्षमता बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की प्रतिष्ठा भी मजबूत होगी।"

निवारक स्वास्थ्य सेवा पर जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि 'प्रिवेंटिव हेल्थकेयर' यानी निवारक स्वास्थ्य सेवा को उपचार से पहले रक्षा की पहली पंक्ति माना जाना चाहिए।

उन्होंने रोग निगरानी, टीकाकरण, स्वच्छता, पोषण, शारीरिक फिटनेस, व्यावसायिक स्वास्थ्य और नियमित स्वास्थ्य जांच जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), वेयरेबल डिवाइस, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और आधुनिक डायग्नोस्टिक तकनीकों का उपयोग कर सैनिकों के स्वास्थ्य की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकती है और संभावित स्वास्थ्य जोखिमों की समय रहते पहचान की जा सकती है।

विश्वस्तरीय अनुसंधान केंद्र बनाने का लक्ष्य

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि सैन्य चिकित्सा विभाग देश की सैन्य सोच में एक क्रांतिकारी परिवर्तन का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, "हमें मिलकर इस विभाग को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ 'बैटलफील्ड मेडिसिन रिसर्च सेंटर' बनाना है।"

सरकार के विजन को मिलेगा बल

यह विभाग रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने और सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने के सरकार के विजन के अनुरूप है। साथ ही यह रक्षा रणनीति विजन 2026-30 के तहत प्रस्तावित ग्लोबल मिलिट्री मेडिसिन सेंटर की अवधारणा को भी आगे बढ़ाएगा।

इस पहल के साथ सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (AFMS) को आधुनिक, प्रौद्योगिकी-सक्षम, परिचालन रूप से प्रभावी और रोगी-केंद्रित सैन्य स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित हुआ है। यह भविष्य की रक्षा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की तैयारियों को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा।

ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखाई भारत की ताकत, पाकिस्तान से बातचीत केवल पीओके पर होगी: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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द्रास (लद्दाख)- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 27वें कारगिल विजय दिवस के अवसर पर द्रास स्थित कारगिल युद्ध स्मारक में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत पाकिस्तान की हर दुस्साहसपूर्ण हरकत का उसकी कल्पना से कहीं अधिक कठोर जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत तभी होगी, जब उसका विषय केवल पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की वापसी होगा।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की संप्रभुता के खिलाफ होने वाली हर साजिश का जवाब भारतीय सशस्त्र बल उसी दृढ़ता और साहस से देंगे, जैसा उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान आतंकवादियों और उनके संरक्षकों के खिलाफ दिया।

उन्होंने पाकिस्तान पर आतंकवाद को राज्य नीति का हिस्सा बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वहां सेना और आतंकवादी संगठनों के बीच का अंतर लगभग समाप्त हो चुका है। पाकिस्तान की सेना न केवल आतंकवादी संगठनों को संरक्षण देती है, बल्कि उनके साथ मिलकर काम भी करती है। इसी कारण भारत अब आतंकवादियों और उन्हें संरक्षण देने वाली सरकारों को अलग-अलग नहीं मानता।

भारत और पाकिस्तान की राहें अब पूरी तरह अलग

राजनाथ सिंह ने कहा कि कारगिल युद्ध के 27 वर्षों बाद भारत और पाकिस्तान की दिशा पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा कि जहां भारत नवाचार, स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष मिशनों और डिजिटल तकनीक में नई ऊंचाइयां छू रहा है, वहीं पाकिस्तान घुसपैठ, आतंकवाद, आत्मघाती हमलावरों और कट्टरपंथ को बढ़ावा देने में लगा हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया को सॉफ्टवेयर और यूपीआई जैसी आधुनिक तकनीक दे रहा है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद और हवाला नेटवर्क को बढ़ावा दे रहा है। यदि पाकिस्तान भारत की प्रगति में बाधा डालने का प्रयास करेगा, तो भारतीय सशस्त्र बल उसे करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सेना को खुली छूट, हर खतरे का मिलेगा जवाब

रक्षा मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने सशस्त्र बलों को हर खतरे का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी राजनीतिक स्वतंत्रता दी है। उन्होंने विश्वास जताया कि जब तक भारतीय सैनिक देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं, तब तक कोई भी दुश्मन भारत की ओर बुरी नजर डालने का साहस नहीं कर सकता।

कारगिल के वीरों को श्रद्धांजलि

राजनाथ सिंह ने 1999 के कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा और कैप्टन मनोज कुमार पांडेय सहित सभी शहीदों को याद करते हुए कहा कि उनका बलिदान देश के युवाओं को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल विजय का प्रतीक नहीं, बल्कि त्याग, सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करने वाला दिन है।

हर भारतीय में होना चाहिए सैनिक जैसा जज़्बा

रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का भी कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि हर भारतीय में सैनिक जैसा अनुशासन, साहस और राष्ट्रप्रेम होना चाहिए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर पूरा देश एकजुट होकर राष्ट्र की रक्षा के लिए खड़ा हो सके।

2047 का विकसित भारत होगा सुरक्षित और आत्मनिर्भर

उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना केवल आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक शक्ति, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक समरसता का भी संकल्प है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कारगिल के वीरों जैसी निष्ठा और समर्पण की आवश्यकता है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर

राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा उत्पादन में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। उन्होंने बताया कि पहले भारत अपनी 65-70 प्रतिशत रक्षा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर था, जबकि आज लगभग 65 प्रतिशत रक्षा उपकरण देश में ही बनाए जा रहे हैं।

उन्होंने आकाश-तीर एयर डिफेंस सिस्टम, आकाश मिसाइल, आईएनएस विक्रांत, तेजस, प्रचंड, ध्रुव, अर्जुन टैंक, पिनाका, अस्त्र मिसाइल और आधुनिक ड्रोन व काउंटर-ड्रोन प्रणालियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये भारतीय सेनाओं की ताकत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कैप्टन विक्रम बत्रा के प्रसिद्ध नारे "ये दिल मांगे मोर" का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और अधिक आधुनिक हथियार, लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां और मिसाइलें स्वदेश में ही विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

शहीदों को दी श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने कारगिल युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी तथा दो मिनट का मौन रखा। उन्होंने 'शौर्य विजय यात्रा' का समापन भी किया, जिसका शुभारंभ उन्होंने 14 जुलाई को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से किया था। इस अवसर पर वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, कारगिल युद्ध के वीर सैनिक, वीर नारियां, शहीदों के परिजन और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।


BRO की परियोजना ब्रह्मांक ने मनाया 16वां स्थापना दिवस, अरुणाचल प्रदेश में रणनीतिक कनेक्टिविटी को मिली नई मजबूती

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नई दिल्ली/अरुणाचल प्रदेश- सीमा सड़क संगठन (BRO) की परियोजना ब्रह्मांक (Project BRAHMANK) ने 29 जून 2026 को 16वां स्थापना दिवस मनाया। यह परियोजना पिछले 15 वर्षों से अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक सड़क एवं पुल निर्माण के माध्यम से देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

प्रमुख उपलब्धियां

  • परियोजना 811 किलोमीटर सड़कों और 86 पुलों के निर्माण एवं रखरखाव की जिम्मेदारी निभा रही है।

  • कार्यक्षेत्र में सियांग, ईस्ट सियांग, वेस्ट सियांग, अपर सियांग, शि-योमी (Shi-Yomi) तथा असम के धीमाजी जिले के कुछ हिस्से शामिल हैं।

  • प्रमुख इंजीनियरिंग उपलब्धियों में सियोम नाला पर 100 मीटर लंबा स्टील आर्च ब्रिज तथा सिमांग नाला पर 165 मीटर लंबा पीएससी (PSC) पुल शामिल हैं।

वर्ष 2025-26 की उपलब्धियां

  • सियांग और सियोम घाटियों में कुल 390 मीटर लंबाई के 13 नए पुलों का निर्माण एवं उद्घाटन।

  • 61 किलोमीटर सड़कों का राष्ट्रीय राजमार्ग मानकों (NHDL) के अनुरूप ब्लैकटॉप निर्माण।

  • दुर्गम क्षेत्रों में बेहतर संपर्क और रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए हेलीपैड भी विकसित किए गए।

स्थापना दिवस पर आयोजन

16वें स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यालय और विभिन्न टास्क फोर्स स्थानों पर सैनिक सम्मेलन (Sainik Sammelan), जवानों से संवाद, बड़ा खाना (Bada Khana) तथा अन्य सामाजिक एवं कल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए गए।

परियोजना का महत्व

29 जून 2011 को स्थापित यह परियोजना कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, भारी वर्षा और सीमित संसाधनों के बावजूद भारतीय सशस्त्र बलों को रणनीतिक संपर्क उपलब्ध कराने के साथ-साथ दूरदराज के गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

12 वर्षों में बदली भारत की आतंकवाद-रोधी तस्वीर: जीरो टॉलरेंस नीति से मजबूत हुआ राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र

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नई दिल्ली- पिछले 12 वर्षों में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को एक नई दिशा देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे में व्यापक बदलाव किए हैं। केंद्र सरकार की "आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance)" नीति के तहत कानूनी सुधार, संस्थागत सशक्तीकरण, खुफिया समन्वय, सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप देश में आतंकवादी घटनाओं और उनसे होने वाली जनहानि में उल्लेखनीय कमी आई है।

2014 में चुनौतीपूर्ण सुरक्षा परिदृश्य

वर्ष 2014 में देश को आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ, आतंकवादी गतिविधियां और पत्थरबाजी की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं। वहीं, सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए कट्टरपंथी विचारधाराओं का प्रसार भी नई चुनौती बनकर उभरा था।

कानूनी सुधारों से मिली नई ताकत

सरकार ने आतंकवाद से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कानूनों में संशोधन किए।

  • यूएपीए (UAPA) संशोधन 2019 के तहत व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान किया गया।

  • राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) संशोधन अधिनियम 2019 से एजेंसी की जांच शक्तियों का विस्तार हुआ।

  • धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) को मजबूत कर आतंकियों की वित्तीय आपूर्ति पर शिकंजा कसा गया।

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 में पहली बार आतंकवाद और संगठित अपराध की स्पष्ट परिभाषा दी गई।

  • आर्म्स संशोधन अधिनियम 2019 के जरिए अवैध हथियार तस्करी और आतंकी नेटवर्क पर कड़ा प्रहार किया गया।

NIA और खुफिया तंत्र हुआ और मजबूत

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का बजट 2014-15 के ₹91 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹394 करोड़ से अधिक हो गया। देशभर में विशेष NIA अदालतों की स्थापना की गई तथा 21 शाखा कार्यालय खोले गए।

वहीं, मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC), NATGRID और CCTNS जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था विकसित की गई। हाल ही में साइबर खतरों से निपटने के लिए Cyber Multi Agency Centre (CyMAC) की भी स्थापना की गई है।

आतंकवाद के खिलाफ बदली रणनीति

पिछले दशक में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी रणनीति को अधिक आक्रामक और जवाबी बनाया।

  • 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक ने आतंकियों के लॉन्च पैड पर सीधा प्रहार किया।

  • 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक ने सीमा पार आतंकी ढांचे को निशाना बनाया।

  • 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकवाद के स्रोत पर कार्रवाई की गई।

इन अभियानों ने स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब आतंकवादी हमलों का जवाब निर्णायक तरीके से देगा।

वैश्विक मंच पर भी बढ़ी भारत की भूमिका

भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत किया है। FATF, संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न द्विपक्षीय मंचों पर भारत ने आतंकवाद के वित्तपोषण और संरक्षण के खिलाफ प्रभावी आवाज उठाई। 2019 में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करवाना और 2025 में तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण भारत की बड़ी कूटनीतिक उपलब्धियां रहीं।

जम्मू-कश्मीर में दिखा सकारात्मक बदलाव

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 2004-2014 के दौरान 7,217 आतंकवादी घटनाएं हुई थीं, जबकि 2014-2024 के बीच यह संख्या घटकर 2,242 रह गई।

  • पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग समाप्त हो गई हैं।

  • आतंकवादी हमलों में नागरिक और सुरक्षा बलों की हताहतों की संख्या में भारी कमी आई है।

  • 2024 में जम्मू-कश्मीर में रिकॉर्ड 2.3 करोड़ पर्यटक पहुंचे।

  • निवेश और विकास परियोजनाओं में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

सुरक्षित और आत्मविश्वासी भारत की ओर

सरकार का कहना है कि पिछले 12 वर्षों में अपनाई गई व्यापक और बहुआयामी रणनीति ने भारत को आतंकवाद के खिलाफ अधिक सक्षम, आधुनिक और सशक्त बनाया है। कानूनी सुधारों, तकनीकी नवाचारों, मजबूत संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बल पर देश की आंतरिक सुरक्षा को नई मजबूती मिली है और नागरिकों का विश्वास भी बढ़ा है।

आतंकवाद के खिलाफ यह परिवर्तन केवल सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि एक सुरक्षित, विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे भारतीय सेना के नए प्रमुख, 30 जून से संभालेंगे कमान

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने वर्तमान उप सेना प्रमुख (Vice Chief of Army Staff) लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को भारतीय सेना का अगला थल सेना प्रमुख (Chief of the Army Staff) नियुक्त किया है। वह 30 जून 2026 की दोपहर से यह जिम्मेदारी संभालेंगे। वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी उसी दिन सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA), खडकवासला के पूर्व छात्र हैं और दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कॉर्प्स में कमीशन प्राप्त किया था। लगभग चार दशकों के अपने शानदार सैन्य करियर में उन्होंने संचालन, रणनीति, सैन्य आधुनिकीकरण और संस्थागत विकास के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

अपने सैन्य जीवन के दौरान उन्होंने विभिन्न चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में नेतृत्व किया है। उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में आर्मर्ड रेजिमेंट, पश्चिमी मोर्चे पर आर्मर्ड ब्रिगेड तथा जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी बल का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में उन्होंने भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक फॉर्मेशन सुदर्शन चक्र कोर की कमान भी संभाली।

इसके बाद उन्होंने दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सैन्य गतिविधियों तथा औपचारिक जिम्मेदारियों का संचालन किया। आर्मी कमांडर बनने के बाद उन्होंने दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान दोनों का नेतृत्व किया, जो भारतीय सेना में एक दुर्लभ उपलब्धि मानी जाती है।

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को सेना के आधुनिकीकरण और क्षमता विकास में उनके योगदान के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। उन्होंने सेना मुख्यालय में रणनीतिक योजना और क्षमता विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए भारतीय सेना की आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप कई महत्वपूर्ण योजनाओं को दिशा दी।

एक उत्कृष्ट सैन्य अधिकारी के रूप में उन्होंने सैन्य शिक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। वे हायर कमांड कोर्स और नेशनल डिफेंस कॉलेज के स्नातक हैं तथा उन्होंने पेरिस में प्रतिष्ठित कमांड एंड स्टाफ कोर्स भी पूरा किया है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना आधुनिकीकरण, तकनीकी नवाचार और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की दिशा में और अधिक सशक्त होगी।



रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर स्मारक पुस्तक का विमोचन किया, 100 सैनिकों के अनुभव शामिल

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 मई 2026 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर एक स्मारक पुस्तक (Commemorative Volume) का विमोचन किया, जिसमें इस अभियान में शामिल 100 अधिकारियों, सैनिकों, वायु सैनिकों और अन्य जवानों के व्यक्तिगत अनुभवों को संकलित किया गया है।

रक्षा मंत्री ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए इस प्रकाशन को उन सभी वीरों को श्रद्धांजलि बताया, जिन्होंने इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक नागरिकों को सैनिकों की समर्पण भावना और दृढ़ता से जुड़ने का अवसर देती है। उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों को इस पुस्तक से प्रेरणा लेनी चाहिए और राष्ट्र की सुरक्षा तथा संप्रभुता बनाए रखने के लिए देश द्वारा दिए जा रहे भारी बलिदान के योग्य नागरिक बनना चाहिए।

राजनाथ सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक अभूतपूर्व सफलता बताया, जिसमें भारत ने चार दिनों के भीतर पाकिस्तान को संघर्षविराम के लिए बाध्य किया। उन्होंने कहा कि यह अभियान अब तक के सभी युद्धों से अलग था और यह स्मारक प्रकाशन केवल ऐतिहासिक विवरण नहीं है, बल्कि इसमें सैनिकों के व्यक्तिगत अनुभवों को भी शामिल किया गया है।

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक आधुनिक युद्ध के मानवीय पक्ष को भी दर्शाती है, जहां नेतृत्व, साहस, दबाव में निर्णय लेने की क्षमता और समर्पण रणनीति को सफलता में बदलते हैं।

यह प्रकाशन जानबूझकर पारंपरिक सैन्य इतिहास लेखन से अलग है, क्योंकि इसमें केवल मुख्यालय या संचालन कक्ष के दृष्टिकोण पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि वास्तविक युद्धभूमि के अनुभवों को भी शामिल किया गया है—जैसे एलओसी पर तैनात सैनिक, ड्रोन को निष्क्रिय करने वाले एयर डिफेंस ऑपरेटर, कॉम्बैट पायलट और नौसेना के कर्मी।

इस पुस्तक में तीनों सेनाओं के साथ-साथ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, लॉजिस्टिक्स, मेडिकल, सिग्नल्स और अन्य सहयोगी इकाइयों के अनुभव शामिल हैं।

इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी और वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इस पुस्तक का संकलन सीडीएस के मार्गदर्शन में किया गया है तथा इसे विभिन्न सैन्य मीडिया इकाइयों और यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के सहयोग से प्रकाशित किया गया है।

भारतीय वायु सेना का संयुक्त एयरोस्पेस पावर सेमिनार: आत्मनिर्भरता और कुशल अनुरक्षण पर विशेष जोर

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भारतीय वायु सेना के मुख्यालय अनुरक्षण कमान ने स्वायत्त रक्षा चिंतन संस्थान सेंटर फॉर एयरपावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ (CAPSS) के सहयोग से 11 मई 2026 को नागपुर में एक दिवसीय संयुक्त एयरोस्पेस पावर सेमिनार का सफल आयोजन किया। “कुशल अनुरक्षण एवं आत्मनिर्भरता: वायु शक्ति के सक्षम आधार” विषय पर आयोजित इस सेमिनार में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, विषय विशेषज्ञों तथा विशिष्ट प्रतिभागियों ने भाग लिया और एयरोस्पेस क्षमता को सुदृढ़ बनाने में अनुरक्षण दक्षता तथा आत्मनिर्भरता की महत्वपूर्ण भूमिका पर विचार-विमर्श किया।

इस अवसर पर अनुरक्षण कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ एयर मार्शल यल्ला उमेश, वीएसएम, पीएचडी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने परिचालन तत्परता बनाए रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सुदृढ़ अनुरक्षण ढांचे तथा स्वदेशी क्षमता विकास के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एयरोस्पेस प्रणालियों में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना देश की सामरिक मजबूती, बाहरी निर्भरता में कमी और मिशन की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

सेमिनार में उभरती अनुरक्षण पद्धतियों, तकनीकी प्रगति, स्वदेशीकरण पहलों तथा भारत की रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दृष्टि को सशक्त बनाने वाली नीतिगत व्यवस्थाओं पर विशेषज्ञ प्रस्तुतियां और पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। भारतीय वायु सेना और CAPSS के विशेषज्ञों ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप अनुरक्षण रणनीतियों को विकसित करने पर अपने विचार साझा किए।

यह आयोजन ज्ञान-विनिमय का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ और इससे रणनीतिक विशेषज्ञों तथा परिचालन हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा मिला। इस सेमिनार ने राष्ट्रीय उद्देश्यों की पूर्ति हेतु भारतीय वायु सेना की अनुरक्षण कमान की नवाचार आधारित दृष्टिकोण अपनाने और स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।

सेमिनार का समापन एयरोस्पेस अनुरक्षण और क्षमता विकास में परिवर्तनकारी सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए रक्षा चिंतन संस्थानों और सशस्त्र बलों के बीच सहयोग को और अधिक मजबूत करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।

लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि बने भारत के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ

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भारत सरकार ने एनएस राजा सुब्रमणि , पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम, वीएसएम (सेवानिवृत्त) को नया चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) नियुक्त किया है। वे भारत सरकार के रक्षा मामलों के विभाग (Department of Military Affairs) में सचिव के रूप में भी कार्य करेंगे। उनकी नियुक्ति कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होगी और अगले आदेश तक जारी रहेगी। वर्तमान चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ  अनिल चौहान, पीवीएसएम, यूवाईएसएम, एवीएसएम, एसएम, वीएसएम 30 मई 2026 को अपना कार्यकाल पूरा करेंगे।

एनएस राजा सुब्रमणि वर्तमान में 01 सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय में सैन्य सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे 01 जुलाई 2024 से 31 जुलाई 2025 तक उप सेना प्रमुख (Vice Chief of the Army Staff) रहे तथा मार्च 2023 से जून 2024 तक केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के पद पर नियुक्त थे।

जनरल अधिकारी राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी  के स्नातक हैं। उन्हें 14 दिसंबर 1985 को  गढ़वाल राइफल्स की 8वीं बटालियन में कमीशन प्राप्त हुआ था। वे यूनाइटेड किंगडम के जॉइंट सर्विसेज कमांड स्टाफ कॉलेज, ब्रैकनेल तथा राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने किंग्स कॉलेज लंदन से कला में स्नातकोत्तर तथा मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एमफिल की उपाधि प्राप्त की है।

चार दशकों से अधिक लंबे अपने गौरवशाली सैन्य करियर में लेफ्टिनेंट जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों और भौगोलिक परिस्थितियों में सेवा दी है तथा अनेक कमांड, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है। उन्होंने ऑपरेशन राइनो के तहत असम में आतंकवाद-रोधी अभियानों के दौरान 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान संभाली, जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड तथा केंद्रीय सेक्टर में 17 माउंटेन डिवीजन का नेतृत्व किया। उन्हें भारतीय सेना की पश्चिमी मोर्चे की प्रमुख स्ट्राइक कोर ‘2 कोर’ की कमान संभालने का गौरव भी प्राप्त है।

जनरल अधिकारी के स्टाफ एवं प्रशिक्षण संबंधी दायित्वों में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी में डिविजनल ऑफिसर, माउंटेन ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, कजाकिस्तान में रक्षा अताशे, सैन्य सचिव शाखा में सहायक सैन्य सचिव, पूर्वी कमान मुख्यालय में कर्नल जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस), जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स सेक्टर के डिप्टी कमांडर, रक्षा मंत्रालय (सेना) के एकीकृत मुख्यालय में उप महानिदेशक सैन्य खुफिया, पूर्वी कमान में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस), वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में मुख्य प्रशिक्षक (सेना) तथा उत्तरी कमान मुख्यालय में चीफ ऑफ स्टाफ जैसे पद शामिल हैं। उन्हें पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं की ऑपरेशनल परिस्थितियों का गहन ज्ञान और व्यापक अनुभव प्राप्त है।

उत्कृष्ट सेवाओं के लिए जनरल अधिकारी को परम विशिष्ट सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल तथा विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है।

ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना के शौर्य को किया सलाम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के एक वर्ष पूर्ण होने पर भारतीय सशस्त्र बलों के साहस, सटीकता और संकल्प को नमन किया। उन्होंने कहा कि सेना ने पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर हमला करने वालों को करारा जवाब दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की आतंकवाद के खिलाफ दृढ़ नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इस अभियान ने सशस्त्र बलों की पेशेवर क्षमता, तैयारी और आपसी समन्वय को प्रदर्शित किया। साथ ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत की बढ़ती ताकत भी सामने आई।

मोदी ने देशवासियों से अपील की कि वे सशस्त्र बलों के सम्मान में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की डीपी बदलकर ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी तस्वीर लगाएं। उन्होंने कहा कि हर भारतीय को अपनी सेना पर गर्व है।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर भारतीय वायुसेना का शक्ति प्रदर्शन, आपात लैंडिंग की सफल टेस्टिंग

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सुल्तानपुर, उत्तर प्रदेश- भारतीय वायुसेना ने एक बार फिर अपनी ताकत और तैयारियों का प्रदर्शन करते हुए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) को सफलतापूर्वक सक्रिय किया। यह ऑपरेशन दिन और रात—दोनों समय किया गया, जिससे वायुसेना की हर परिस्थिति में ऑपरेशन करने की क्षमता साबित हुई।

इस महत्वपूर्ण अभ्यास का आयोजन सुल्तानपुर  जिले में किया गया, जहां राज्य के मंत्री ओम प्रकाश राजभर और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

आधुनिक विमानों और कमांडो का प्रदर्शन

इस ऑपरेशन में वायुसेना के कई अत्याधुनिक विमान और हेलीकॉप्टर शामिल हुए:

  • जगुआर, मिराज-2000 और सुखोई-30 MKI जैसे फाइटर जेट

  • C-295 और AN-32 जैसे ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट

  • Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर

  • गरुड़ कमांडो टीम

इन सभी ने एक्सप्रेसवे पर सफलतापूर्वक लैंडिंग और टेक-ऑफ कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

कम समय में ELF एक्टिवेशन

भारतीय वायुसेना ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर:

  • बेहद कम समय में ELF को सक्रिय किया

  • दिन और रात दोनों समय सफल संचालन किया

  • अपने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) को वैलिडेट किया

क्यों है यह अहम?

यह अभ्यास कई मायनों में महत्वपूर्ण है:

  • पारंपरिक रनवे के बिना भी वायुसेना ऑपरेशन कर सकती है

  • युद्ध या आपात स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया संभव

  • एक्सप्रेसवे एयरस्ट्रिप्स फोर्स मल्टीप्लायर के रूप में काम करते हैं

आपदा राहत में भी बढ़ेगी ताकत

इस तरह की सुविधाएं न केवल रक्षा क्षेत्र में, बल्कि:

  • आपदा राहत (HADR) ऑपरेशन

  • दूरदराज इलाकों में मेडिकल और राहत पहुंचाने
    में भी बेहद कारगर साबित होंगी।

मजबूत तालमेल का उदाहरण

इस पूरे ऑपरेशन में वायुसेना, UPEIDA और स्थानीय प्रशासन के बीच शानदार तालमेल देखने को मिला, जिसने देश की रणनीतिक तैयारी और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को और मजबूत किया।

निष्कर्ष

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर किया गया यह सफल अभ्यास भारतीय वायुसेना की तत्परता, तकनीकी दक्षता और लचीलापन का स्पष्ट प्रमाण है, जो देश की सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती देता है।


भारतीय नौसेना कमांडर्स सम्मेलन 2026 शुरू, भविष्य की रणनीति और सुरक्षा पर मंथन

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नई दिल्ली- Indian Navy का बहुप्रतीक्षित कमांडर्स सम्मेलन 01/2026 नौ सेना भवन में शुरू हो गया। सम्मेलन का उद्घाटन एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी (नौसेना प्रमुख) द्वारा किया गया, जिसमें देशभर से वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, ऑपरेशनल एवं क्षेत्रीय कमांडर तथा मुख्यालय के अधिकारी शामिल हुए।

नौसेना प्रमुख का संबोधन

अपने उद्घाटन भाषण में नौसेना प्रमुख ने भारत के समुद्री हितों की रक्षा में नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, ऑपरेशनों की बढ़ती गति और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल को बड़ी उपलब्धि बताया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए नौसेना को हर समय युद्ध के लिए तैयार (Combat Ready) रहना चाहिए। साथ ही, आधुनिक तकनीकों को अपनाकर एक “Future Ready Force” तैयार करना समय की आवश्यकता है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और रणनीतिक दृष्टिकोण

नौसेना प्रमुख ने हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सक्रिय भूमिका को दोहराया। उन्होंने मित्र देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यासों और सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया, ताकि एक मजबूत, समन्वित और विश्वसनीय रणनीति विकसित की जा सके।

 सम्मेलन में प्रमुख चर्चाएं

सम्मेलन के दौरान कई अहम विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया—

  • संयुक्त सैन्य संचालन (Joint Operations)

  • समुद्री और तटीय क्षमता में वृद्धि

  • जहाजों की मरम्मत और रखरखाव

  • बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा उपाय

  • प्रशिक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

  • मानव संसाधन विकास

  • नवाचार और आत्मनिर्भरता (Indigenisation)

 सीडीएस का महत्वपूर्ण संदेश

जनरल अनिल चौहान (Chief of Defence Staff) ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।
उन्होंने बदलते वैश्विक परिदृश्य और युद्ध के बदलते स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए नौसेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्थिक और तकनीकी पहलुओं का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है।

निष्कर्ष

भारतीय नौसेना कमांडर्स सम्मेलन 2026 देश की समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक योजना और भविष्य की तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित हो रहा है।
इस सम्मेलन से प्राप्त निष्कर्ष आने वाले समय में भारत की रक्षा रणनीति को और मजबूत बनाएंगे।


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