Media24Media.com: 'कैच द रेन' अभियान में छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव बना मिसाल, मिशन जल रक्षा से जल संरक्षण को मिली नई दिशा

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'कैच द रेन' अभियान में छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव बना मिसाल, मिशन जल रक्षा से जल संरक्षण को मिली नई दिशा

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नई दिल्ली/राजनांदगांव- मानसून के आगमन के साथ देशभर में 'कैच द रेन' अभियान तेज़ी पकड़ रहा है। इस अभियान के तहत विभिन्न जिले वर्षा जल के संरक्षण और भूजल स्रोतों को मजबूत बनाने के लिए व्यापक प्रयास कर रहे हैं। इन्हीं में छत्तीसगढ़ का राजनांदगांव जिला अपनी अभिनव 'मिशन जल रक्षा' पहल के कारण देशभर में एक मिसाल बनकर उभरा है। वैज्ञानिक तकनीकों, जनभागीदारी और प्रभावी जल प्रबंधन के माध्यम से जिले ने यह सुनिश्चित किया है कि बारिश की हर बूंद को संरक्षित कर भूजल भंडार तक पहुंचाया जाए।

राजनांदगांव ने मानसून शुरू होने से पहले ही जल संरक्षण की व्यापक तैयारी कर ली थी। मिशन जल रक्षा के तहत ऐसा वैज्ञानिक और सामुदायिक ढांचा विकसित किया गया है, जिससे वर्षा जल बहकर व्यर्थ न जाए, बल्कि उसे धरती के भीतर पहुंचाकर भूजल स्तर को बढ़ाया जा सके।

इस अभियान में जीआईएस मैपिंग (GIS Mapping), रिमोट सेंसिंग, एक्वीफर मैपिंग, डिजिटल एलिवेशन मॉडल (DEM) और रिज-टू-वैली प्लानिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर भूजल पुनर्भरण के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान की गई। इसके साथ ही बंद पड़े बोरवेलों को रिचार्ज शाफ्ट में बदला गया तथा मिनी परकोलेशन टैंक और डीप इंजेक्शन वेल जैसी संरचनाएं विकसित की गईं, जिससे कठोर चट्टानी क्षेत्रों में भी वर्षा जल गहरे भूजल स्रोतों तक पहुंच सके।

मिशन जल रक्षा की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि यह केवल सरकारी योजना न रहकर जन आंदोलन बन गया। किसान, महिलाएं, युवा, ग्राम पंचायतें और स्थानीय समुदाय जल बजट, जागरूकता अभियान और व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल हुए। जनभागीदारी के कारण जल संरक्षण को व्यापक सामाजिक समर्थन मिला।

कृषि क्षेत्र में भी इस पहल का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। गर्मी के मौसम में होने वाली लगभग 70 प्रतिशत धान की खेती को कम पानी वाली फसलों की ओर स्थानांतरित किया गया, जिससे भूजल पर दबाव कम हुआ और कृषि अधिक टिकाऊ बनी।

मिशन के परिणाम भी बेहद उत्साहजनक रहे हैं। जिले की 662 ग्राम पंचायतों में 60 हजार से अधिक जल संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण संरचनाएं बनाई गई हैं। 500 से अधिक बंद पड़े बोरवेल रिचार्ज शाफ्ट में परिवर्तित किए गए हैं। 600 से अधिक इंजेक्शन वेल को 1,700 से अधिक मिनी परकोलेशन टैंकों से जोड़ा गया है तथा 2,500 से अधिक जलाशयों का जियो-टैगिंग किया गया है।

इन प्रयासों से 51 लाख से अधिक मानव-दिवस रोजगार सृजित हुए हैं और जिले में औसतन 2.04 मीटर भूजल स्तर की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे सिंचाई और पेयजल सुरक्षा दोनों को मजबूत आधार मिला है।

'कैच द रेन' अभियान के तहत राजनांदगांव यह साबित कर रहा है कि वैज्ञानिक योजना, समय पर तैयारी और जनभागीदारी के माध्यम से मानसून को स्थायी जल सुरक्षा के अवसर में बदला जा सकता है। मिशन जल रक्षा यह संदेश देता है कि वर्षा जल संरक्षण केवल मौसमी गतिविधि नहीं, बल्कि जल स्रोतों की सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन और जल-सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक सतत संकल्प है।

राजनांदगांव अब बारिश का इंतजार नहीं करता, बल्कि बारिश की हर बूंद को सहेजने के लिए पूरी तरह तैयार है।


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