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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने वर्चुअली दिखाई PBG सोल्जराथॉन को हरी झंडी, सैनिकों के सम्मान में दौड़े हजारों प्रतिभागी

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नई दिल्ली- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (2 अगस्त 2026) राष्ट्रपति भवन के प्रांगण से आयोजित समारोह में प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड (PBG) सोल्जराथॉन को वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कार्यक्रम की स्मृति में विशेष डाक आवरण (स्पेशल पोस्टल कवर) का भी विमोचन किया। कार्यक्रम में मिजोरम के राज्यपाल एवं पहल के संरक्षक जनरल (डॉ.) वी.के. सिंह (सेवानिवृत्त) भी उपस्थित रहे। दौड़ का आयोजन करियप्पा परेड ग्राउंड, दिल्ली कैंट में किया गया।

'Run for Soldiers, Run with Soldiers' की थीम पर आयोजित सोल्जराथॉन का उद्देश्य आम नागरिकों और भारतीय सशस्त्र बलों के बीच संबंधों को और मजबूत बनाना है। इस वर्ष कार्यक्रम का मुख्य विषय "Supporting Real Heroes – the Armed Forces of India" रखा गया, जिसके माध्यम से देश के वीर सैनिकों के साहस, समर्पण और बलिदान को सम्मान दिया गया तथा नागरिकों से उनके प्रति एकजुटता व्यक्त करने का आह्वान किया गया।

सोल्जराथॉन में प्रतिभागियों के लिए 3 किलोमीटर, 5 किलोमीटर और 10 किलोमीटर की दौड़ आयोजित की गई। बड़ी संख्या में नागरिकों, पूर्व सैनिकों और सैन्य कर्मियों ने इसमें भाग लेकर सैनिकों के प्रति अपना सम्मान और समर्थन व्यक्त किया।

सोल्जराथॉन से प्राप्त आय का उपयोग सशस्त्र बलों के पैराप्लेजिक पुनर्वास केंद्र (Paraplegic Rehabilitation Centre), युद्ध में घायल एवं शहीद सैनिकों के परिवारों और उनके आश्रितों के कल्याण सहित विभिन्न सामाजिक एवं कल्याणकारी कार्यों के लिए किया जाएगा। वहीं PBG सोल्जराथॉन से प्राप्त सहयोग का उपयोग प्रेसिडेंट्स बॉडीगार्ड के घोड़ों और जवानों के कल्याण के लिए किया जाएगा।

यह आयोजन सैनिकों के प्रति सम्मान, राष्ट्रभक्ति और नागरिक-सैन्य सहयोग की भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के प्रथम दीक्षांत समारोह में किया संबोधन

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जनजातीय विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ आजीविका, कौशल विकास और सामाजिक न्याय के केंद्र बनें : राष्ट्रपति

विजयनगरम- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के प्रथम दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की विशेष जिम्मेदारी है कि वह जनजातीय समाज में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और नीति निर्माण की योग्यता विकसित करने का केंद्र बने। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के उद्देश्य से स्थापित ऐसे संस्थानों का दायित्व केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जनजातीय समुदायों के शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका और वन अधिकारों के क्षेत्र में जमीनी स्तर पर भी कार्य करना चाहिए।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में यह विश्वविद्यालय जनजातीय और वंचित समुदायों के युवाओं के समग्र विकास के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

जनजातीय आजीविका को बढ़ावा देने के लिए नवाचार आवश्यक

राष्ट्रपति ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों, विशेषकर जनजातीय विश्वविद्यालयों को ऐसी नवाचारी व्यवस्थाएं विकसित करनी चाहिए, जो जनजातीय समुदायों की आजीविका को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि लघु वनोपज, हस्तशिल्प, मोटे अनाज (मिलेट्स), औषधीय पौधों, इको-टूरिज्म और स्थानीय उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर विकसित किए जाने चाहिए।

दीक्षांत समारोह केवल उत्सव नहीं, संकल्प का भी अवसर

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य के लिए नए संकल्प लेने का अवसर भी है।

उन्होंने विद्यार्थियों को तेजी से बदलते समय के अनुरूप कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न रहकर आसपास के सामाजिक और प्राकृतिक परिवेश से भी सीखना चाहिए, ताकि व्यावहारिक कौशल विकसित हो सकें।

उन्होंने विद्यार्थियों से समाज और राष्ट्र के बेहतर भविष्य के निर्माण में योगदान देने के साथ-साथ अपनी समुदाय, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया।

विरासत और आधुनिक विज्ञान का समन्वय जरूरी

राष्ट्रपति ने कहा कि तेजी से विकसित हो रहे भारत में अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहते हुए आधुनिक विज्ञान का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने उत्तर आंध्र प्रदेश के जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने के लिए 'विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हब' की स्थापना की है।

उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय ने जनजातीय कल्याण, जनस्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों पर शैक्षणिक और जमीनी स्तर पर उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि ये प्रयास समानता पर आधारित विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में निभाएगा महत्वपूर्ण योगदान

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का लक्ष्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत का निर्माण करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अपनी समावेशी, व्यवहारिक और पर्यावरण संरक्षण आधारित शिक्षा प्रणाली के माध्यम से इस लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि आधुनिक शिक्षा के सकारात्मक पहलुओं को जनजातीय समाज से जोड़कर स्थानीय युवाओं को देश के समावेशी और संतुलित विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संबोधन: शिक्षा, जनजातीय विकास और विकसित भारत पर दिया विशेष जोर

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (21 जून 2026) मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा किसी भी व्यक्ति या समुदाय के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसलिए जनजातीय समुदाय की शैक्षिक उन्नति के लिए प्रयास करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। हमें सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जनजातीय युवाओं को आधुनिक विकास में योगदान देने का अवसर मिले, साथ ही वे अपनी जनजातीय पहचान और विशिष्टता को उसके वास्तविक स्वरूप में सुरक्षित रख सकें। जनजातीय समुदाय के पारंपरिक कौशल और ज्ञान का विभिन्न माध्यमों से प्रसार भी किया जाना चाहिए। जनजातीय ज्ञान एवं शिल्प परंपराओं का व्यापक अध्ययन देश के सभी नागरिकों के लिए लाभकारी होगा। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों को इस दिशा में विशेष प्रयास करने चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान करने के अलावा उच्च शिक्षण संस्थान नवाचार और अनुसंधान के प्रमुख केंद्र भी होते हैं। छात्रों में रचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उद्यमशीलता की भावना विकसित करना इन संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। साथ ही, छात्रों में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और भाषाओं के प्रति गौरव की भावना विकसित करना भी आवश्यक है। आधुनिकता और परंपरा के संतुलित समन्वय से ही देश का समग्र विकास संभव होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन अध्ययनों और अनुसंधानों पर विशेष बल दिया जाना चाहिए जो राष्ट्र और समाज के लिए उपयोगी हों। पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, वंचित वर्गों का विकास, स्वच्छता और सामाजिक समरसता जैसे विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने से समाज को लाभ होता है। इन विषयों पर अध्ययन और अनुसंधान देश के विकास के लिए योजनाएँ बनाने में भी सहायक होते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है। हमारी भाषा और जीवनशैली में भी तेज़ी से परिवर्तन हो रहा है। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कुछ शाश्वत मूल्य सदैव हमें शक्ति प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति के मूल्यों और आदर्शों को अपने जीवन का आधार बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और ईमानदारी जैसे मूल्य हर युग में हमारी चेतना के मूल तत्व रहे हैं। इन मूल्यों को अपनाकर वे कठिन परिस्थितियों का भी दृढ़ता से सामना कर सकते हैं, आदर्श नागरिक बन सकते हैं और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल अपने परिवारों या विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधि नहीं हैं, बल्कि राष्ट्र की आकांक्षाओं और उसके भविष्य के निर्माता हैं। उनके ज्ञान, ऊर्जा और संकल्प से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा। उन्होंने उनसे आग्रह किया कि वे अपनी शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज के व्यापक हित के लिए भी करें। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आसपास के वंचित और ग्रामीण समुदायों की चुनौतियों को समझने, उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप समाधान विकसित करने, उन्हें सशक्त बनाने और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में योगदान देने की सलाह दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि देश डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप, हरित ऊर्जा, अंतरिक्ष अनुसंधान और आधुनिक अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर रहा है। उन्होंने युवाओं को इन अवसरों का लाभ उठाकर वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बनाने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जल, वन और भूमि संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग, जैव विविधता की रक्षा तथा सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता उनके जीवन की यात्रा का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को प्रधानमंत्री मोदी ने दी जन्मदिन की शुभकामनाएं

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नई दिल्ली- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू का साहस, सादगी, विनम्रता और जनसेवा के प्रति अटूट समर्पण देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू ने सार्वजनिक जीवन में अपने लंबे अनुभव के दौरान देश की उत्कृष्ट सेवा की है। उन्होंने विशेष रूप से समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के कल्याण के लिए लगातार काम किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के विकास के प्रति राष्ट्रपति की दृढ़ प्रतिबद्धता अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने राष्ट्रपति के लंबे, स्वस्थ और राष्ट्रसेवा से परिपूर्ण जीवन की कामना की।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी संदेश में यह भी बताया कि वे आज ओडिशा में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात करेंगे।


अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय उन्मूलन मिशन की उपलब्धियों को सराहा

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ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश)- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने सिकल सेल रोग के उन्मूलन की दिशा में देश द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए इसे स्वास्थ्य क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण चुनौती से निपटने की सार्थक पहल बताया।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले पूरा किया जाना एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष तक की आयु के लगभग 7 करोड़ लोगों की जांच की गई है, जो विश्व के सबसे बड़े आनुवंशिक रोग स्क्रीनिंग अभियानों में से एक है।

उन्होंने कहा कि मिशन मोड में की गई स्क्रीनिंग के परिणामस्वरूप अब तक लगभग 2.5 लाख सिकल सेल रोगियों की पहचान की गई है, जबकि 20 लाख से अधिक वाहकों (Carriers) का भी पता लगाया गया है। राष्ट्रपति ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में वाहकों की पहचान भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों को समझने और उनके समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

राष्ट्रपति ने केंद्र और राज्य सरकारों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल मरीजों और वाहकों की पहचान की है, बल्कि उनके उचित उपचार और स्वास्थ्य देखभाल की भी व्यवस्था सुनिश्चित की है।

उन्होंने विशेष रूप से मध्य प्रदेश सरकार के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि राज्य ने 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक चलाए गए "स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान" के तहत 4 लाख से अधिक महिलाओं की स्क्रीनिंग कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले वर्ष अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर "सिकल मित्र" पहल शुरू की थी। इस पहल के अंतर्गत सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं, स्वयंसेवी संगठनों तथा एनसीसी कैडेट्स के प्रतिनिधियों को जागरूकता फैलाने और मरीजों की सहायता के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी राज्यों की सक्रिय भागीदारी और सामूहिक प्रयासों से भारत वर्ष 2047 से पहले ही सिकल सेल रोग से मुक्ति के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल होगा।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सिक्किम पुलिस को प्रदान किया ‘प्रेसिडेंट्स पुलिस कलर’

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गंगटोक- भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज गंगटोक में आयोजित एक समारोह में सिक्किम पुलिस को ‘प्रेसिडेंट ऑफ इंडियाज़ पुलिस कलर’ से सम्मानित किया। इस अवसर पर उन्होंने सिक्किम पुलिस के सभी वर्तमान और पूर्व अधिकारियों एवं जवानों को बधाई दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 1897 में स्थापना के बाद से सिक्किम पुलिस ने राज्य में शांति, सुरक्षा और न्याय व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारतीय पुलिस व्यवस्था पर लंबे औपनिवेशिक शासन की छाप रही है, जहां पुलिस का उद्देश्य जनता की सेवा करने के बजाय उन पर नियंत्रण रखना था। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए इस औपनिवेशिक मानसिकता को पूरी तरह समाप्त करना आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। आम नागरिक बिना भय के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें, इसके लिए पुलिस तंत्र को अधिक जनहितैषी बनाया जाना चाहिए। साथ ही महिलाओं, बच्चों और समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने पर भी उन्होंने बल दिया।

उन्होंने कहा कि पुलिस को केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि जनता की सहयोगी और मार्गदर्शक बनना चाहिए। इससे जनता और पुलिस के बीच विश्वास मजबूत होगा तथा समाज में सुरक्षा और कानून के प्रति सम्मान की भावना बढ़ेगी।

राष्ट्रपति ने सिक्किम पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि उसने राज्य में शांति और सौहार्द बनाए रखने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। अपने पेशेवर व्यवहार और नागरिकों के प्रति मित्रवत रवैये के कारण सिक्किम पुलिस ने लोगों का सम्मान और विश्वास अर्जित किया है।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हैदराबाद के राष्ट्रपति निलयम में उद्यान उत्सव 2026 की तैयारियों की समीक्षा की

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (19 दिसंबर 2025) हैदराबाद स्थित राष्ट्रपति निलयम में उद्यान उत्सव के दूसरे संस्करण के उद्घाटन की तैयारियों की समीक्षा की।

उद्यान उत्सव आम जनता के लिए 3 जनवरी से 11 जनवरी 2026 तक प्रतिदिन सुबह 10:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहेगा। अंतिम प्रवेश शाम 7:00 बजे तक होगा।

इस उत्सव में प्रवेश सभी आगंतुकों के लिए निःशुल्क रहेगा।

नौ दिवसीय यह कृषि एवं उद्यानिकी महोत्सव टिकाऊ कृषि, उद्यानिकी और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार जीवनशैली के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। यह भारत की हरित परंपराओं, सतत प्रथाओं और सामुदायिक सहभागिता का उत्सव होगा।

उत्सव में पुष्प एवं अपुष्प दोनों प्रकार के आकर्षण देखने को मिलेंगे, जिनमें उन्नत मौसमी फूलों की क्यारियाँ, सुसज्जित पुष्प स्थापना, सेल्फी पॉइंट और उन्नत उद्यान क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा आगंतुक कृषि एवं उद्यानिकी विषयक स्टॉल, लाइव प्रदर्शन, इको-क्राफ्ट कार्यशालाएँ और इंटरैक्टिव ज्ञान क्षेत्र भी देख सकेंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (19 दिसंबर, 2025) हैदराबाद, तेलंगाना में तेलंगाना लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों के राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने सेवाओं और लोक सेवा आयोगों के लिए संविधान का एक पूरा भाग समर्पित किया है। यह इस बात को दर्शाता है कि उन्होंने संघ और राज्यों के लोक सेवा आयोगों की भूमिकाओं और कार्यों को कितनी महत्ता दी है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, तथा स्थिति और अवसर की समानता से जुड़े हमारे संवैधानिक आदर्श लोक सेवा आयोगों के कार्यकरण के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। संविधान की प्रस्तावना, सार्वजनिक रोजगार के मामलों में अवसर की समानता से जुड़ा मौलिक अधिकार तथा जनकल्याण को बढ़ावा देने वाले सामाजिक व्यवस्था की स्थापना हेतु राज्य को मार्गदर्शन देने वाला निदेशक सिद्धांत—ये सभी लोक सेवा आयोगों के लिए मार्गदर्शक पथ हैं। उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोगों को केवल अवसर की समानता के आदर्श से ही नहीं, बल्कि परिणामों की समानता के लक्ष्य की प्राप्ति का भी प्रयास करना चाहिए। आयोग समानता और न्याय को बढ़ावा देने वाले परिवर्तन के वाहक (चेंज-एजेंट) हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि लोक सेवा आयोगों द्वारा चयनित लोक सेवकों से गठित तथाकथित ‘स्थायी कार्यपालिका’ शासन प्रक्रिया में निष्पक्षता, निरंतरता और स्थिरता प्रदान करती है। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर जनोन्मुखी नीतियों के क्रियान्वयन के लिए स्थायी कार्यपालिका में शामिल सिविल सेवकों की ईमानदारी, संवेदनशीलता और दक्षता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोक सेवा आयोगों को भर्ती करते समय उम्मीदवारों की ईमानदारी और सत्यनिष्ठा को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। ईमानदारी और सत्यनिष्ठा सर्वोपरि हैं और असमझौतापूर्ण (नॉन-नेगोशिएबल) हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि कौशल और दक्षताओं की कमी को प्रशिक्षण और अन्य रणनीतियों से दूर किया जा सकता है, लेकिन सत्यनिष्ठा की कमी ऐसे गंभीर संकट पैदा कर सकती है जिन्हें दूर करना असंभव हो सकता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सिविल सेवक बनने की आकांक्षा रखने वाले युवाओं में हाशिए पर पड़े और कमजोर वर्गों के लिए कार्य करने की प्रवृत्ति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे सिविल सेवकों को महिलाओं की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होना चाहिए। लोक सेवा आयोगों द्वारा लैंगिक संवेदनशीलता को उच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था होने के साथ-साथ अत्यधिक विविधताओं वाले देश भारत को सभी स्तरों पर सबसे प्रभावी शासन प्रणालियों की आवश्यकता है। देश निकट भविष्य में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रखता है। साथ ही, हम 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि लोक सेवा आयोग अपनी जिम्मेदारियों का निरंतर निर्वहन करते रहेंगे और उनके द्वारा चयनित व मार्गदर्शित भविष्य-तैयार सिविल सेवकों की टीम के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।


राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 2025 प्रदान किए

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राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (14 दिसंबर 2025) नई दिल्ली में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार 2025 तथा ऊर्जा संरक्षण पर राष्ट्रीय चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया।

इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ऊर्जा संरक्षण सबसे पर्यावरण-अनुकूल और विश्वसनीय ऊर्जा स्रोत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऊर्जा संरक्षण आज के समय की केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा बचाने का अर्थ केवल कम उपयोग करना नहीं है, बल्कि ऊर्जा का समझदारी, जिम्मेदारी और दक्षता के साथ उपयोग करना है।

राष्ट्रपति ने कहा कि जब हम अनावश्यक रूप से विद्युत उपकरणों का उपयोग नहीं करते, ऊर्जा-दक्ष उपकरण अपनाते हैं, घरों और कार्यस्थलों में प्राकृतिक प्रकाश और वेंटिलेशन का उपयोग करते हैं, अथवा सौर और नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाते हैं, तो हम न केवल ऊर्जा बचाते हैं बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाते हैं। ऊर्जा संरक्षण स्वच्छ वायु, सुरक्षित जल स्रोतों और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बचाई गई ऊर्जा की प्रत्येक इकाई प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी संवेदनशीलता का प्रतीक है।

राष्ट्रपति ने विशेष रूप से युवाओं और बच्चों की भूमिका पर बल देते हुए कहा कि यदि वे ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक हों और इस दिशा में प्रयास करें, तो इस क्षेत्र के लक्ष्य आसानी से प्राप्त किए जा सकते हैं और देश का सतत विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच समुदायों को सशक्त बनाती है, स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देती है और नए विकास अवसर पैदा करती है। इसलिए हरित ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सशक्तिकरण और समावेशी विकास का एक सशक्त माध्यम है।

राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन जैसी पहलों की सराहना की, जो जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सरकार नवीकरणीय उपभोग दायित्व (RCO) और उत्पादन-संलग्न प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2023-24 में भारत के ऊर्जा दक्षता प्रयासों से 53.60 मिलियन टन तेल समतुल्य ऊर्जा की बचत हुई है, जिससे प्रतिवर्ष उल्लेखनीय आर्थिक लाभ और CO₂ उत्सर्जन में बड़ी कमी आई है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के ऊर्जा संक्रमण की सफलता के लिए हर क्षेत्र और प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता लाने के लिए व्यवहारगत परिवर्तन अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण संतुलित जीवनशैली अपनाने की चेतना भारत की सांस्कृतिक परंपरा का मूल है, और यही भावना विश्व को दिए गए संदेश “लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट – LiFE” का आधार है।

उन्होंने ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत सभी हितधारकों की सराहना करते हुए कहा कि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य सुनिश्चित करेगा। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक जिम्मेदारी, साझेदारी और जनभागीदारी की भावना के साथ भारत ऊर्जा संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा और हरित भविष्य की दिशा में अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त करेगा।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘चाणक्य डिफेंस डायलॉग-2025’ का उद्घाटन किया

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज (27 नवंबर, 2025) नई दिल्ली में भारतीय सेना के तीसरे संस्करण के सेमिनार, ‘चाणक्य डिफेंस डायलॉग-2025’ के उद्घाटन सत्र में शिरकत की।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने भारत की संप्रभुता की रक्षा में पेशेवर दक्षता और देशभक्ति का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। हर सुरक्षा चुनौती, चाहे वह पारंपरिक हो, सशस्त्र विद्रोह विरोधी हो या मानवीय मिशन, हमारे बलों ने अद्वितीय अनुकूलन क्षमता और संकल्प दिखाया है। ऑपरेशन सिंदूर की हाल की सफलता हमारे आतंकवाद विरोधी और निवारक रणनीति का निर्णायक क्षण है। दुनिया ने न केवल भारत की सैन्य क्षमता को देखा, बल्कि यह भी महसूस किया कि भारत शांति की प्राप्ति के लिए मजबूती के साथ, परंतु जिम्मेदारीपूर्वक कार्य करने के लिए नैतिक स्पष्टता भी रखता है।

अपने परिचालनात्मक कर्तव्यों से परे, भारतीय सशस्त्र बल राष्ट्रीय विकास के स्तंभ बने हुए हैं। सीमाओं को मजबूत करने के अलावा, उन्होंने बुनियादी ढांचा, कनेक्टिविटी, पर्यटन और शिक्षा के माध्यम से सीमा क्षेत्रों के विकास में भी योगदान दिया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज का भू-राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था नए शक्ति केंद्रों, तकनीकी विघटन और बदलती गठबंधनों द्वारा पुनःनिर्मित हो रही है। साइबर, अंतरिक्ष, सूचना और संज्ञानात्मक युद्ध जैसे नए प्रतिस्पर्धा क्षेत्रों ने शांति और संघर्ष की रेखाओं को धुंधला कर दिया है। उन्होंने कहा कि वसुधैव कुटुम्बकम के हमारी सभ्यता के दृष्टिकोण से, हमने यह दिखाया है कि रणनीतिक स्वतंत्रता और वैश्विक जिम्मेदारी सह-अस्तित्व में रह सकती हैं। हमारी कूटनीति, अर्थव्यवस्था और सशस्त्र बल मिलकर ऐसा भारत प्रस्तुत करते हैं जो शांति चाहता है, लेकिन अपनी सीमाओं और नागरिकों की रक्षा करने के लिए दृढ़ और सक्षम है।

राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त की कि सेना ‘दशक परिवर्तन’ (Decade of Transformation) के तहत मापनीय परिणामों के माध्यम से खुद को बदल रही है। यह संरचनाओं में सुधार कर रही है, डोक्ट्रिन्स को पुनः निर्देशित कर रही है और सभी क्षेत्रों में भविष्य के लिए तैयार और मिशन-कुशल बनने के लिए क्षमताओं को पुनः परिभाषित कर रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि ये रक्षा सुधार भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेंगे।

राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि सेना युवाओं और मानव संसाधन में निवेश कर रही है। यह शिक्षा, NCC के विस्तार और खेल के माध्यम से युवाओं में देशभक्ति का संचार कर रही है। उन्होंने कहा कि युवा महिला अधिकारियों और सैनिकों के योगदान का विस्तार, उनके कार्य और चरित्र दोनों में, समावेश की भावना को बढ़ावा देगा। इससे और अधिक युवा महिलाएँ भारतीय सेना में शामिल होंगी और अन्य पेशों में भी कदम रखेंगी।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि चाणक्य डिफेंस डायलॉग-2025 की चर्चाएँ और परिणाम नीति-निर्माताओं को हमारे राष्ट्रीय नीति के भविष्य के स्वरूप को आकार देने में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्रदान करेंगे। उन्होंने यह भी भरोसा व्यक्त किया कि हमारे सशस्त्र बल उत्कृष्टता के लिए प्रयासरत रहेंगे और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संकल्प और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ेंगे।


भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की बोत्सवाना की प्रथम राजकीय यात्रा : द्विपक्षीय संबंधों में नया अध्याय

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भारत की राष्ट्रपति,द्रौपदी मुर्मु, अपने अंगोला और बोत्सवाना की राजकीय यात्रा के अंतिम चरण में कल (11 नवम्बर 2025) बोत्सवाना की राजधानी गाबोरोन पहुंचीं। यह भारत की ओर से बोत्सवाना की पहली राष्ट्रपति स्तरीय यात्रा है। इस राजकीय यात्रा में राष्ट्रपति के साथ जल शक्ति और रेल मंत्रालय के राज्य मंत्री वी. सोमनाअ, तथा संसद सदस्य पर्भुभाई नगरभाई वसावा और डी. के. अरुणा भी शामिल हैं।

आज (12 नवम्बर 2025) राष्ट्रपति ने अपने कार्यक्रमों की शुरुआत गाबोरोन स्थित राष्ट्रपति भवन से की, जहाँ उनका स्वागत बोत्सवाना गणराज्य के राष्ट्रपति माननीय एडवोकेट डूमा गिडियन बोको ने गर्मजोशी से किया।

राष्ट्रपति बोको ने राष्ट्रपति मुर्मु का स्वागत करते हुए कहा कि भारत, जो “लोकतंत्र की जननी” है, बोत्सवाना की विकास यात्रा में प्रेरणा और समर्थन का एक दृढ़ स्रोत रहा है। उन्होंने शिक्षा, लैंगिक समानता और वंचित समुदायों के उत्थान में राष्ट्रपति मुर्मु की भूमिका की सराहना की। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह उनके कार्यभार ग्रहण करने के बाद किसी भी देश से बोत्सवाना की पहली राजकीय यात्रा है, जो भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को दर्शाती है।

राष्ट्रपति मुर्मु और राष्ट्रपति बोको के बीच एकांतवार्ता एवं प्रतिनिधिमंडल स्तर की बैठकें हुईं, जिनमें व्यापार एवं निवेश, कृषि, अक्षय ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, रक्षा और डिजिटल प्रौद्योगिकी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि यह यात्रा भारत-बोत्सवाना द्विपक्षीय संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, क्योंकि यह बोत्सवाना की पहली भारतीय राष्ट्रपति स्तरीय यात्रा है। यह यात्रा वर्ष 2026 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ से पहले आयोजित हो रही है, जिससे इसका विशेष महत्व है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत, अफ्रीका के साथ अपने संबंधों को और गहरा करने तथा भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन के ढांचे के अंतर्गत बोत्सवाना के साथ अपनी साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

राष्ट्रपति ने यह बताते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि बोत्सवाना, भारत में “प्रोजेक्ट चीता” के अगले चरण के तहत चीता पुन:स्थापन में सहायता करेगा। उन्होंने कहा कि यह भारत सरकार की एक अनूठी वन्यजीव संरक्षण पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के पारिस्थितिकी तंत्र में चीतों को पुनर्स्थापित करना है। राष्ट्रपति ने बोत्सवाना के राष्ट्रपति और जनता का भारत को चीते भेजने के निर्णय के लिए धन्यवाद दिया।

दोनों नेताओं ने फार्माकोपिया (औषध संहिता) पर एक समझौते पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया देखी, जिससे बोत्सवाना के नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाली और सुलभ भारतीय दवाओं तक आसान पहुँच सुनिश्चित होगी।

राष्ट्रपति ने यह भी घोषणा की कि भारत सरकार, बोत्सवाना सरकार के अनुरोध पर आवश्यक एंटीरेट्रोवायरल (ARV) दवाओं की आपूर्ति करेगी।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अंगोला की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ में भाग लिया; बोत्सवाना पहुंचीं ऐतिहासिक राजकीय यात्रा पर

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राष्ट्रपति जोआओ मैनुअल गोंसाल्वेस लौरेन्सो के आमंत्रण पर, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (11 नवंबर 2025) अंगोला की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के उत्सव में भाग लिया। यह भव्य समारोह लुआंडा के प्राका दा रेपुब्लिका में आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रपति मुर्मु ने राष्ट्रपति लौरेन्सो के साथ अंगोला की सैन्य और सांस्कृतिक परंपराओं के रंगारंग प्रदर्शन का अवलोकन किया।

अफ्रीका की अपनी दो देशों की राजकीय यात्रा के अंतिम चरण में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु गाबोरोन, बोत्सवाना के सर सेरेट्से खामा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचीं। यह भारत के किसी राष्ट्रपति की बोत्सवाना की पहली राजकीय यात्रा है।

भारत और बोत्सवाना की गहरी मित्रता को दर्शाने वाले विशेष भाव के रूप में, राष्ट्रपति मुर्मु का हवाई अड्डे पर बोत्सवाना के राष्ट्रपति महामहिम एडवोकेट डुमा गिडियन बोको ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर और औपचारिक स्वागत समारोह प्रदान किया गया।




अंगोला की नेशनल असेंबली में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संबोधन

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अंगोला की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष महामहिम कैरोलिना सेरक्वेइरा ने राष्ट्रपति मुर्मु का गर्मजोशी से स्वागत किया और कहा कि अंगोला की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु की ऐतिहासिक यात्रा भारत और अंगोला के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि भारत की परिवर्तनकारी विकास यात्रा अंगोला के लिए प्रेरणा है और भारत के अफ्रीका के प्रति निरंतर समर्थन और प्रतिबद्धता की गहरी सराहना की।

अंगोला की संसद को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि औपनिवेशिक विरोधी संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों का इतिहास भारत और अंगोला को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अंगोला अफ्रीका के सबसे सशक्त लोकतंत्रों में से एक है।

राष्ट्रपति ने दोनों देशों की संसदों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ाने का आह्वान किया ताकि पारस्परिक समझ और सहयोग को प्रोत्साहित किया जा सके।

उन्होंने अंगोला की संसद में महिलाओं के उल्लेखनीय प्रतिनिधित्व की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संसद में 39 प्रतिशत से अधिक महिला सदस्य होने के साथ, अंगोला समावेशी शासन का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने भारत में हाल ही में पारित किए गए उस कानून का भी उल्लेख किया जो विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए लाया गया है।

द्विपक्षीय संबंधों पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि व्यापार और आर्थिक सहयोग हमारी साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग ने आर्थिक संबंधों को और मजबूत किया है। उन्होंने डिजिटल तकनीक, रक्षा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

राष्ट्रपति ने अंगोला में बुनियादी ढांचे, सुशासन और कृषि, ऊर्जा तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंगोला अफ्रीका की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण सहभागी के रूप में उभर रहा है। उन्होंने अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष के रूप में अंगोला की अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व भूमिका की भी प्रशंसा की।

राष्ट्रपति ने कहा कि जब दुनिया संघर्षों और अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है, तब वैश्विक दक्षिण के देश विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने अफ्रीका में शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई और अंगोला के सांसदों से भारत-अंगोला साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए एक साथ काम करने का आग्रह किया।

इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मु ने लुआंडा में डॉ. एंतोनियो आगोस्टिन्हो नेतो की स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। डॉ. नेतो, जो अंगोला के प्रथम राष्ट्रपति थे, देश की एकता, प्रतिरोध और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक हैं और उन्होंने अंगोला की स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राष्ट्रपति ने साओ मिगेल किला भी देखा, जो 16वीं सदी का औपनिवेशिक युग का दुर्ग है और अब सशस्त्र बलों के संग्रहालय के रूप में कार्य करता है। यह संग्रहालय अंगोला के सैन्य इतिहास, औपनिवेशिक काल और स्वतंत्रता संघर्ष की कहानी प्रस्तुत करता है।



राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 20 नवबंर को अम्बिकापुर में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस के आयोजन में होंगी शामिल

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प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने कार्यक्रम स्थलों का किया निरीक्षण

रायपुर-भगवान बिरसा मुण्डा की स्मृति में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का 20 नवबंर को अम्बिकापुर प्रवास प्रस्तावित है। जिसकी तैयारी को लेकर आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने आज कार्यक्रम स्थल पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया और कार्यक्रम  से जु़ड़े अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। 

प्रमुख सचिव बोरा ने सबसे पहले गांधी स्टेडियम पहुंचकर राष्ट्रपति के आगमन हेतु तैयार किए जा रहे हेलीपैड स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, आगमन एवं निर्गमन मार्ग, हेलीपैड की मजबूती तथा आसपास की साफ-सफाई का बारीकी से जायजा लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

इसके पश्चात् उन्होंने पी.जी. कॉलेज मैदान पहुंचकर मुख्य कार्यक्रम स्थल की तैयारियों की समीक्षा की। प्रमुख सचिव ने पीजी कॉलेज मैदान में बनने वाले डोम पंडाल, बैठक व्यवस्था, वीआईपी गेट, यातायात बेरिकेडिंग, प्रवेश एवं निकास द्वार, स्टॉल्स की साज-सज्जा, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था, पार्किंग व्यवस्था, बिजली व्यवस्था एवं सांस्कृतिक मंच का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राष्ट्रपति के आगमन से पूर्व सभी व्यवस्थाएं मानक के अनुरूप और सौंदर्यपूर्ण ढंग से पूरी होनी चाहिए।

प्रमुख सचिव बोरा ने पी.जी. कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित होने वाली संगोष्ठी कार्यक्रम की तैयारियों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि कार्यक्रम सुव्यवस्थित, समयबद्ध रहे। निरीक्षण के दौरान सरगुजा संभागायुक्त नरेन्द्र दुग्गा, कलेक्टर विलास भोसकर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल सहित अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अंबाला वायुसेना स्टेशन पर राफेल विमान में भरी सॉर्टी; दो लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली पहली भारतीय राष्ट्रपति बनीं

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भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज (29 अक्टूबर 2025) हरियाणा के अंबाला वायुसेना स्टेशन में राफेल विमान में उड़ान (सॉर्टी) भरी। वह दो अलग-अलग लड़ाकू विमानों में उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बन गई हैं। इससे पहले, उन्होंने वर्ष 2023 में सुखोई-30 एमकेआई विमान में सॉर्टी ली थी।

अंबाला वायुसेना स्टेशन वह पहला एयरबेस है, जहाँ फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन फैसिलिटी से राफेल विमान सबसे पहले पहुँचे थे।

राष्ट्रपति, जो कि भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर हैं, ने लगभग 30 मिनट तक उड़ान भरी, जिसमें उन्होंने करीब 200 किलोमीटर की दूरी तय की और फिर वायुसेना स्टेशन पर लौट आईं।
इस विमान को ग्रुप कैप्टन अमित गहानी, कमांडिंग ऑफिसर, 17 स्क्वाड्रन ने उड़ाया।
उड़ान के दौरान विमान ने समुद्र तल से लगभग 15,000 फीट की ऊँचाई पर और करीब 700 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से उड़ान भरी।

बाद में राष्ट्रपति ने विज़िटर्स बुक में अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा —

“भारतीय वायुसेना के राफेल विमान में अपनी पहली उड़ान के लिए अंबाला वायुसेना स्टेशन का दौरा कर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हुई। राफेल पर यह उड़ान मेरे लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है। इस शक्तिशाली राफेल विमान में यह प्रथम उड़ान राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं में मेरे गर्व को और बढ़ाती है। मैं भारतीय वायुसेना और अंबाला वायुसेना स्टेशन की पूरी टीम को इस सफल सॉर्टी के आयोजन के लिए बधाई देती हूँ।”

इस अवसर पर राष्ट्रपति को राफेल विमान और भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमताओं के बारे में भी अवगत कराया गया।



राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सेंट टेरेसा कॉलेज, केरल की शताब्दी उत्सव में भाग लिया

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आज, 24 अक्टूबर 2025 को भारत की राष्ट्रपति Smt. द्रौपदी मुर्मू ने केरल के एर्नाकुलम में सेंट टेरेसा कॉलेज के शताब्दी उत्सव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि सेंट टेरेसा कॉलेज ने महिलाओं की शिक्षा को गहरे आध्यात्मिक मूल्यों के साथ बढ़ावा दिया है, जो समाजिक परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण में एक महत्वपूर्ण योगदान है। हमें उन विशिष्ट व्यक्तियों की दृष्टि और विरासत को गहराई से स्वीकार करना चाहिए जिन्होंने इस संस्था की स्थापना की और इसे एक शताब्दी तक लगातार उपलब्धियों की राह पर अग्रसरित किया।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि केरल की महिलाएं देश को नेतृत्व प्रदान करती रही हैं। संविधान सभा के 15 विशिष्ट महिला सदस्य संविधान निर्माण में महत्वपूर्ण दृष्टिकोण लेकर आई थीं, जिनमें से तीन केरल से थीं – अम्मू स्वामिनाथन, एनी मास्करीन और दक्षयानी वेलायुदन। उन्होंने मौलिक अधिकारों, सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और कई अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर बहसों को प्रभावित किया। भारत की पहली महिला उच्च न्यायालय न्यायाधीश जस्टिस अन्ना चंडी थीं, जो 1956 में केरल उच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनीं। इसके बाद, 1989 में जस्टिस M. फातिमा बीवी भारत की सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला न्यायाधीश बनीं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सेंट टेरेसा कॉलेज की होनहार महिला छात्राएं युवा भारत, प्रगतिशील भारत और सशक्त भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं। उन्होंने कहा कि देश की जनसांख्यिकीय लाभ का सही उपयोग करने के लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दशक में लैंगिक बजट आवंटन में चार और आधा गुना वृद्धि हुई है। 2011 और 2024 के बीच महिला नेतृत्व वाली MSMEs लगभग दोगुनी हो गई हैं। 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने के लिए महिला कार्यबल की 70% भागीदारी एक प्रमुख स्तंभ है। विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों की महिलाएं भारत की प्रगति में योगदान दे रही हैं। राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता जताई कि इस कॉलेज की पूर्व छात्राएं देश की वृद्धि और विकास में सकारात्मक भूमिका निभा रही हैं।

राष्ट्रपति ने यह भी प्रसन्नता जताई कि सेंट टेरेसा कॉलेज ने SLATE (Sustainability, Leadership and Agency through Education) परियोजना शुरू की है। इस परियोजना के माध्यम से कॉलेज ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। छात्रों को सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से जोड़ना और उन्हें भविष्य के रोजगारों के लिए तैयार करना इस परियोजना के सराहनीय उद्देश्य हैं। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थान जैसे सेंट टेरेसा कॉलेज भारत को ज्ञान-सुपर पावर बनने में मदद करेंगे।


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