Media24Media.com: राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला में भारत को वैश्विक सीफूड निर्यात महाशक्ति बनाने पर जोर

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राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला में भारत को वैश्विक सीफूड निर्यात महाशक्ति बनाने पर जोर

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विशाखापत्तनम- मत्स्य पालन विभाग, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय तथा आंध्र प्रदेश सरकार के सहयोग से 5 और 6 जून 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य (सीफूड) निर्यात कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों, निर्यातकों, उद्योग प्रतिनिधियों, स्टार्टअप्स तथा विभिन्न संस्थानों ने भाग लेकर भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किन्जारापु राममोहन नायडू तथा केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने कार्यशाला में भाग लिया

गुणवत्ता और वैल्यू एडिशन पर विशेष जोर

कार्यशाला में इस बात पर बल दिया गया कि भारत को केवल मात्रा आधारित निर्यातक नहीं, बल्कि उच्च गुणवत्ता और मूल्य संवर्धित समुद्री उत्पादों के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित किया जाए। विशेषज्ञों ने नवाचार, आधुनिक तकनीक, ट्रेसबिलिटी सिस्टम और गुणवत्ता प्रमाणन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई ताकि भारतीय सीफूड उत्पादों की वैश्विक पहचान और मजबूत हो सके।

₹1 लाख करोड़ से अधिक निर्यात का लक्ष्य

कार्यशाला के दौरान सरकार ने समुद्री खाद्य निर्यात को ₹1 लाख करोड़ से अधिक तक पहुंचाने के लक्ष्य को रेखांकित किया। इसके लिए कोल्ड चेन, एयर कार्गो, क्वारंटीन सुविधाओं और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।

अंतर्देशीय मत्स्य पालन में अपार संभावनाएं

विशेषज्ञों ने कहा कि देश के कुल मत्स्य उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र में निर्यात की अपार संभावनाएं हैं। पिंजरा मत्स्य पालन, जलाशय आधारित एक्वाकल्चर, मोती उत्पादन, समुद्री शैवाल (सीवीड) खेती और सजावटी मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देकर किसानों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाई जा सकती है।

स्टार्टअप और एमएसएमई बनेंगे विकास के नए इंजन

कार्यशाला में स्टार्टअप्स और एमएसएमई की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने माना कि नवाचार, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और नई तकनीकों के उपयोग से भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाई जा सकती है। साथ ही, रोजगार सृजन और निर्यात विविधीकरण में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

चुनौतियों पर भी हुई चर्चा

हितधारकों ने रोग प्रबंधन, बढ़ती उत्पादन लागत, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, कोल्ड चेन की कमी, क्वारंटीन सुविधाओं की सीमाएं, कड़े अंतरराष्ट्रीय मानक और ट्रेसबिलिटी जैसी चुनौतियों को रेखांकित किया। इन समस्याओं के समाधान के लिए समन्वित नीति और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया।

सामूहिक प्रयासों से बनेगा मजबूत निर्यात तंत्र

कार्यशाला का समापन केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, उद्योग जगत, अनुसंधान संस्थानों और उद्यमियों की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। सभी पक्षों ने सतत उत्पादन, गुणवत्ता, प्रमाणन, बुनियादी ढांचे के विकास और बाजार विविधीकरण के माध्यम से भारत को विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी सीफूड निर्यातक राष्ट्र बनाने का संकल्प दोहराया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्यशाला से प्राप्त सुझाव भविष्य की नीतियों और योजनाओं को दिशा देंगे तथा भारत को वैश्विक समुद्री खाद्य बाजार में और मजबूत स्थान दिलाने में मदद करेंगे।


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